पूरी दुनिया इन दिनों शैतान पर कंकर फेंककर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान लेने वाली घिनौनी मानसिकता से परेशान है। इस रेगिस्तानी सोच के परंपरा वाहक काल्पनिक शैतान पर लेबल चिपकाने और फिर उस पर आतंकी हमला करने में ही जुटे रहते हैं। उनकी इसी राजनैतिक शैली की वजह से कई देश आज बंजर और वीरान हो चुके हैं। इसके बावजूद भारत की कांग्रेस उस मनोदशा से उबरने के बजाए उस लुटेरी मानसिकता की ध्वजवाहक बनी हुई है। दरअसल ये मनोदशा कांग्रेस के डीएनए में शामिल है। कभी अंग्रेजों के निवेश को बचाकर उन्हें बच निकलने का सेफ पैसेज देने के लिए गढ़ी गई कांग्रेस आज भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। नगरीय विकास एवं आवास व संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में एक सामाजिक संवाद के दौरान जब कहा कि भारत हमेशा से लक्ष्मीजी, सरस्वती जी जैसी देवियों की उपासना करता रहा है। यही वजह है कि हमारी बहन बेटियां सोलह श्रंगार से सज्जित रहती आईं हैं। आज भी भारतीय वेशभूषा में सजी संवरी नारियां समाज को संस्कारित करने की बड़ी भूमिका निभाती हैं। उन्होने कहा कि कई बार बेटियां जब ऊटपटांग कपड़े पहिनकर मेरे साथ फोटो खिंचवाने आती हैं तो मैं उन्हें मना कर देता हूं और कहता हूं कि वे रुचिकर वस्त्र पहिनकर आएं। मुझे ऊटपटांग कपड़े पहिनकर आने वाली संस्कार विहीन स्त्रियां अच्छी भी नहीं लगतीं। कैलाश विजयवर्गीय राज्य के एक वरिष्ठतम मंत्री हैं। मालवा के इंदौर जैसे शहर को विकास की ऊंचाईयों तक ले जाने में उनका भी उल्लेखनीय योगदान है। इंदौर वैसे भी राज्य का सबसे प्रगतिशील नगर है। यहां के युवा देश ही नहीं पूरी दुनिया में सफलताओं के झंडे गाड़ रहे हैं। पूरा शहर एक परिवार की तरह आगे बढ़ने की चुनौतियों से जूझता है। शहर में वो हर छोटी बात चर्चा का विषय बनती है जिसकी वजह से सामाजिक व्यवस्था में मजबूती आ सकती है। यही वजह है कि सफाई के मापदंडों पर आज इंदौर ने सिंगापुर की बराबरी कर ली है। यदि कोई बाहिरी व्यक्ति गलती से सड़क पर कचरा फेंक दे तो स्थानीय राहगीर भी उसे टोक देता है. यही नहीं वह कचरा उठाकर कूढ़ेदान में भी फेंक देगा। शहर में लड़के लड़कियों की बदलती आदतें भी जनचर्चा का विषय बनती हैं। युवाओं की गलतियों को माडरेट करने में भी इंदौर का कोई जवाब नहीं है। ऐसे में वहां का जन नेता यदि युवतियों को सज संवरकर रहने और देवियों की तरह समाज का प्रतिनिधित्व करने की सलाह दे रहा है तो इस कदम का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए। कैलाश विजयवर्गीय अपने इस उद्बोधन में समाज के आधे हिस्से को अपनी भूमिका में सफल होने का आव्हान करते नजर आ रहे हैं। वे लड़कियों से कह रहे हैं कि स्त्रियों की आजादी का मतलब छोटी छोटी वेशभूषा में नहीं बल्कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में है। इंदौर के आम लोगों ने अपने लाड़ले नेता की इस सलाह को सिर आंखों पर लिया है। घर घर में लड़कियां अपने वरिष्ठ नेता का संकेत समझ रहीं हैं और सम्मानजनक वेशभूषा का उद्देश्य पूरा करने में जुट गईं हैं। इंदौर ही नहीं मालवा से उठी इस पुकार ने समूचे देश में विकास के इस पैमाने को स्वीकार किया है। इसके विपरीत कांग्रेस के नेताओं के जो बयान सामने आए हैं वे क्षोभजनक हैं। संभव था कि कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर चुप रहकर अपनी खोखली मानसिकता का प्रकटीकरण न करते। वोट बटोरने वाली मानसिकता से वशीभूत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी की अराजक सोच सामने ला दी है। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को महिलाओं के कपड़े ही क्यों दिखाई देते हैं। यही नहीं उनके सुर में सुर मिलाते हुए कुछ प्रगतिशील सोच का झंडा उठाए फिरने वाले अखबारों ने भी इस बयान का विरोध शुरु कर दिया है। खुद को प्रगतिशील कहलाने का दंभ भरने वाले वामपंथियों के लिए तो कैलाश जी का ये बयान पच भी नहीं सकता। दुनिया भर में अराजकता फैलाने वाले धर्मों और तानाशाही ताकतों के लिए ये सुविधाजनक लगता है कि वे समाज में स्थापित मूर्तियों का भंजन करें ताकि येन केन प्रकारेन सत्ता शीर्ष पर बैठ सकें। भारत का इतिहास पढ़ने वाले जानते हैं कि किस तरह भारत में मुगल सल्तनत का पतन अय्याशी और हरमों की दुर्दशा की वजह से हुआ था। आजादी के बाद अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने फिल्म संसार की मदद से उसी नंगई को समाज के बीच बोने का प्रयास किया ताकि भारत कभी अपने पैरों पर न खड़ा हो सके और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कारोबार इस विकलांग समाज में बदस्तूर जारी रहे। भारतीय समाज में शालीन वस्त्र पहिनकर प्रगतिशील सोच रखने वाली देवी अहिल्या बाई समूचे मालवा को विकास पथ पर अग्रसर कर पाईं तो ये हमारी देशज सोच की वजह से ही संभव हो सका था। वे तो रानी साहिबा थीं। उन्हें ऊटपटांग वस्त्र पहिनकर विदेशी माडल बनने से कौन रोक सकता था। वे पढ़ी लिखीं थीं और दुनिया भर के कई देशों से उनका सीधा संपर्क था। इसके बावजूद वे माता अहिल्याबाई से देवी अहिल्या केवल इसलिए बन पाईं क्योंकि उन्होंने खंडित सोच के बजाए अनुशासित सोच को प्राथमिकता दी। आज जब समाज और वर्गों को खंड खंड करके आपस में लडाने वाली कांग्रेस को लोगों ने सत्ता से बाहर धकेल दिया है तब उसके नए नेता बार बार अपने पूर्वजों की गलतियों को दुहराकर यही जताने का प्रयास कर रहे हैं कि हम नहीं सुधरेंगे। संघ और भाजपा के संस्कारों में पले बढ़े कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी बात ठीक ढंग से कह दी और समाज ने उसको सकारात्मक नजरिए से स्वीकार किया ये संतोष की बात है।समाज को ये भी तय करना होगा कि विदेशी षड़यंत्रों को जड़ जमाने का मौका न मिले। ऐसे मूर्ति भंजकों को कुचलना हमारी भी जवाबदारी है।
Category: राजनीति
-

देवी अहिल्याबाई की छवि से क्यों चिढ़ी कांग्रेस
-

इसे कहते हैं नेता की छत्रछाया
दिल्ली में रविवार, 25 मई को NDA शासित राज्यों के सीएम और डिप्टी सीएम की मीटिंग में पीएम नरेंद्र मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा है, “कहीं भी, कुछ भी मत बोलिए.”यह कहकर उन्होंने भाजपा और एनडीए के नेताओं को साफ साफ समझाईश दी है। रविवार को मुख्यमंत्रियों और डिप्टी मुख्यमंत्रियों के बीच सम्मेलन में उन्होंने देश में कैसा विकास चाहिए इस विषय पर भी अपने खेमे का मार्गदर्शन किया है। दरअसल पिछले दिनों मध्यप्रदेश के आदिवासी नेता और वरिष्ठ मंत्री कुंवर विजय शाह की जुबान ऐसी फिसली कि पूरे देश में हंगामा शुरु हो गया। विपक्ष और मोदी विरोधियों ने इसे लेकर भारी उछलकूद शुरु कर दी। मीडिया के तमाम दिग्गज भी बहती गंगा में हाथ धोने उतर आए। ऐसा माहौल बनाया गया कि मानों देश के विरुद्ध कोई बड़ी साजिश की जा रही हो. इसी सीरीज में राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भी पार्टी नेता नरेन्द्र मोदी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सेना को अपने साथ खड़ा कर लिया । इसे भी मोदी विरोधियों ने सेना का अपमान बताना शुरु कर दिया। इसी तरह पहलगाम आतंकी हमले पर अब हरियाणा से BJP के राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अपना सुहाग खोने वाली महिलाओं में वीरांगना का भाव व जोश नहीं था, इसलिए 26 लोग गोली का शिकार बने।नेताओं के बड़बोलेपन के इन कुछ उदाहरणों ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। उनके ऊटपटांग बयानों पर नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं भी आईँ हैं। भारतीय समाज के लोकतांत्रिक सोच का उद्घोष करती इन प्रतिक्रियाओं के बीच न्यायपालिका के भी कुछ जजों ने बढ़ चढ़कर अपनी आस्तीनें चढाना शुरु कर दिया। कुंवर विजय शाह का मामला तो अदालत के सामने भी पहुंचा दिया गया है। सोशल मीडिया के दौर में जनता के बीच से जो प्रतिक्रियाएं आईं उससे परेशान जनजाति मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह घबरा गए और उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर अपने बयानों पर खेद व्यक्त किया और माफी मांगी।दरअसल कुंवर विजय शाह भाजपा के संघर्ष के दौर में उभरे नेताओं में से हैं. जब दिग्विजय सिंह की सरकार हरसूद के विस्थापितों पर लाठियां भांज रही थी तब विजय शाह सरकार के आक्रोश के बीच नेता बनकर उभरे थे। राज्य के लगभग बाईस प्रतिशत आदिवासी मतदाताओं के बीच सबसे सशक्त नेता के रूप में विजय शाह सबकी निगाहों में बने रहते हैं। उनके इसी तरह के बयानों से एक बार शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राजनीति के मैदान से हटाने का मन बना लिया था। इसके बावजूद विजय शाह को जानने वालों को ये पता है कि वे किस तरह जन भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हुए कुछ भी कह गुजरते हैं। उनके चुटीले अंदाज को अक्सर नजरंदाज किया जाता रहा है। यही सब जानकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें उनके घर जाकर मनाया और पार्टी में उनका महत्व बरकरार रखा।इस बार मंच पर मौजूद भाजपा की वरिष्ठ नेत्री ऊषा ठाकुर स्वयं कह रहीं हैं कि ये जुबान फिसलने जैसा मामला है। विजय शाह अक्सर अपनी रौ में बहकर वो बातें भी कह देते हैं जो अमूमन सड़कों की भाषा कही जाती है। पाकिस्तान के कट्टर पंथियों के बारे में भारत के राष्ट्रप्रेमी जिस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं ऐसी की कुछ भाषा का इस्तेमाल विजय शाह ने किया था।खुद ऊषा ठाकुर बेहतरीन वक्ता हैं और उनका ओजस्वी भाषण मुर्दों में भी जान फूंकने जैसा होता है। अपनी बहन की बराबरी करने के लिए विजय शाह ने भी बढ़ चढ़कर बयान दे दिया। उनका बयान पाकिस्तान के उन कट्टर पंथियों के लिए चेतावनी देने वाला था कि हमारे हिंदुस्तान की एक मुसलमान महिला ही तुम्हारा मुकाबला कर लेती है, तो फिर पूरे हिंदुस्तान से टकराने की जुर्रत न करो। बेशक उनका भाषण गली छाप कहा जा सकता है लेकिन वह न तो देश के खिलाफ था न सेना के विरुद्ध। सेना की प्रवक्ता कर्नल सोफिया कुरैशी के प्रति अपमान का भाव भी नहीं था। बल्कि वे तो सोफिया कुरैशी को पूरे पाकिस्तान की सेना से भी ज्यादा भारी बताना चाह रहे थे। शब्दों का उचित चयन न करने की वजह से विजय शाह को दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी। विभिन्न माध्यमों पर उनकी प्रतिक्रियाओं से लोगों ने उन्हें माफ भी कर दिया और हल्का फुलका व्यंग्य समझकर बात समाप्त कर दी। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी विजय शाह के बयान को अदालत का विषय बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने तो कांग्रेस के नेताओं के देश विरोधी बयानो का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। विजय शाह के मामले में अदालत क्या निर्णय लेती है ये तो सुनवाई के बाद ही पता चलेगा लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एऩडीए के नेताओं को इस तरह के बयानों में न उलझने की सलाह देते हुए स्वयं को विशाल हृदय वाले नेता होने का परिचय दिया है. बेशक विजय शाह जैसे नेताओं के बयानों को नैतिकता या मर्यादा की कसौटी पर कम नंबर मिलें लेकिन इससे उनके पूर्व में किए गये कार्यों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वैसे भी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम राजनेताओं को बोलने की आजादी देता है। वह नेताओं को जनता की आवाज बनने की छूट भी देता है।अभिव्यक्ति की आजादी तो हर भारतीय नागरिक का अधिकार है ही। ऐसे में विजय शाह को केवल लापरवाही से भरी बयानबाजी के बाद मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग करना ज्यादति कही जाएगी। फिलहाल नरेन्द्र मोदी ने विजय शाह के माध्यम से भारत सरकार को नैतिकता के कटघरे में खड़ा करने वाले षड़यंत्रकारियों को करारा जवाब दे दिया है.ये उनकी परिपक्व राजनीति का परिचायक है।वास्तव में किसी भी पार्टी का मुखिया होता ही इसलिए है कि वो सभी नेताओं को संरक्षण प्रदान करे. कहा भी गया है कि मुखिया मुख सौ चाहिए, खानपान को एक, पाले पौसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक। जाहिर है कि विजय शाह के माध्यम से मोदी विरोध का ख्वाब पालने वालों के स्वप्न अब धरातल पर उतर आएंगे। -

सूखे निमाड़ में हरियाली लाएगी तापी परियोजनाः डॉ.मोहन यादव
भोपाल, 10 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के विकास का नया आयाम स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के सरकार के बीच आज एमओयू किया गया है। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडनवीस विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपने सभी पड़ोसी राज्यों के साथ जल बंटवारे को लेकर आपस में जनता के हित में पीने के पानी और सिंचाई सुविधा के विकास लिए आगे बढ़ रहा है। आज ही महाराष्ट्र सरकार साथ एमओयू हुआ है। आपसी सहयोग से हम जल भंडारण का नया प्रोजेक्ट बना रहे हैं जो विश्व का एक अनूठा प्रोजेक्ट होगा। उन्होंने कहा कि महाऱाष्ट्र के मुख्यमंत्री का स्वागत और अभिनंदन है। दोनों राज्यों ने मिलकर यह योजना बनाई है। हम आपसी सहयोग से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस प्रकार से नदी जोड़ो का महा अभियान प्रारंभ किया है, इसमें सहभागिता करते हुए मध्यप्रदेश अपने पड़ोस के सभी राज्यों से तालमेल कर रहा है। मध्यप्रदेश में केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोडो परियोजना पर हमने हाल ही में काम प्रारंभ किया है। इससे पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों का जीवन बदलेगा। इसी प्रकार राजस्थान सरकार के साथ हमारा पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का काम भी प्रारंभ हुआ है। इससे मालवा और चंबल के कई क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। इसी क्रम में तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। इससे प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के जिलों को लाभ मिलेगा, जिसमें खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं बुरहानपुर जिले में नेपानगर, खकनार और बुरहानपुर तहसीलों के अलावा बड़वानी जिले तक के क्षेत्र में हम इस परियोजना का लाभ ग्रामीणों को देंगे।
-

लाड़ली बहनों को अब केन्द्र की तीन योजनाओं का लाभ
भोपाल, 12 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की डाक्टर मोहन यादव सरकार ने आज अपना दूसरा बजट पेश किया। इस बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। बजट में महिलाओं, युवाओं और उद्योगों पर ज्यादा फोकस किया गया है। लाड़ली बहना योजना Ladli Behna Yojana को केन्द्र की पेंशन योजना और अन्य योजनाओं से जोड़कर इसे स्थायी बनाया जा रहा है।
वित्तमंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में बताया कि लाड़ली बहना योजना में लगभग एक करोड़ 27 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं। इस बार सरकार ने बजट 2025 में लाड़ली बहना योजना के लिए 18,669 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश की बहनों को केंद्र सरकार की तीन बड़ी योजनाओं के साथ जोड़ा जाएगा । जिसमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राही महिलाओं को हर महीनें 1250 रुपए की धनराशि प्रदान की जाती है।
हरदा के टिमरनी से कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ने विधानसभा में सवाल के माध्यम से आरोप लगाया था कि लाड़ली बहना योजना का लाभ प्रदेश की महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि लाड़ली बहना योजना में अब तक सिर्फ 35 महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है। योजना शुरु होने बाद से अब तक कुल 15 हजार 735 महिलाओं की मौत हो चुकी है। नवंबर 2023 के बाद एक भी महिला का नाम लाड़ली बहना योजना में नहीं जोड़ा गया है।
ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से बड़ी संख्या में हितग्राही महिलाओं के नाम काटे गए थे। इसके बाद से सरकार पर हितग्राहियों की सूची अपडेट करने का दबाव बनाया जाता रहा है। इस योजना की वजह से सरकार पर कर्ज बढ़ता जा रहा है।इसे देखते हुए अब सरकार महिलाओं को केन्द्रीय योजनाओं का लाभ दिलाकर अपना बोझ घटाना चाह रही है। -

पृथक बुंदेलखंड का एजेंडा लाया बागेश्वरधाम का कैंसर अस्पताल
भोपाल,22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी में 24 और 25 फरवरी को आयोजित हो रही ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगमन मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए होने जा रहा है। इससे पहले श्री मोदी छतरपुर जिले के गढ़ा गांव के बागेश्वर धाम में बन रहे सौ बिस्तरों के कैंसर के इलाज की सुविधाओं वाले मल्टी स्पेशियलिटी वाले अस्पताल की आधारशिला भी रखने जा रहे हैं। भाजपा ने इससे पहले कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री की बुदेलखंड में निकाली गई यात्रा को भी लगभग गोद लेकर उनकी लोकप्रियता को परवान चढ़ाने में रुचि ली थी। अब स्वयं प्रधानमंत्री वहां जाकर पं.धीरेन्द्र शास्त्री की जन स्वीकृति स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।
बागेश्वर धाम को पिछले कुछ वर्षों में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाने वाले धीरेन्द्र शास्त्री का कहना है कि अब तक लोगों ने अस्पतालों के परिसरों में मंदिर या भगवान की मूर्तियां देखी हैं। पहली बार दुनिया देखेगी की किस तरह कोई धर्म क्षेत्र अपने संसाधनों से अस्पताल बनाकर जन सेवा का माडल प्रस्तुत करेगा। वे कहते हैं कि उन्होंने बुंदेलखंड के लगभग सत्रह अठारह जिलों में यात्रा करके देखा है कि कैसर के इलाज के लिए लोग भटकते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से लोग कैंसर की पीड़ा भोगते हुए काल कवलित भी हो जाते हैं।यह देखते हुए बागेश्वर धाम के भक्त मिलकर कैंसर के उपचार का अस्पताल बनाने जा रहे हैं। लगभग दो सौ करोड़ रुपयों की लागत से ये अस्पताल बनाया जाएगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रांडेड इमेज का लाभ इस कैंसर अस्पताल को पहुंचाने के लिए आनन फानन में उनका दौरा करवाया जा रहा है।इसके बावजूद वहां भीड़ के प्रबंधन का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।आगंतुकों के आवागमन की लचर व्यवस्था है। बस्ती में जल मल व्ययन पूरी तरह धराशाई है।लोग गंदगी से उपजी बीमारियों के शिकार है।आग के प्रबंधन के इंतजाम नहीं हैं।अग्नि सुरक्षा के प्रमाणपत्र जारी करने वाले अकुशल अधिकारियों को आपातकाल से निपटने का अनुभव और जानकारी नहीं है।इसकी वजह केवल यही है कि सरकार की रुचि केवल धीरेन्द्र शास्त्री की छवि के सहारे बुंदेलखंड प्रांत की स्वीकार्यता को हवा देना है।
देश में कई धर्म संप्रदायों के मतावलंबियों ने पहले से चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखकर कल्याणकारी अस्पताल चला रखे हैं।ऐसे में बुंदेलखंड की धरती पर बनाया जा रहा ये अस्पताल पृथक बुंदेलखंड के राजनीतिक एजेंडे को लेकर सामने आ रहा है। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने बुंदेलखंड के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से में भी अपनी यात्राएं निकाली हैं और वे पृथक बुंदेलखंड की कमजोर आवाज को बल देने का कार्य ही कर रहे हैं। उनके साथ बुंदेलखंड पैकेज से धन जुटाने वाले ठेकेदारों और उद्यमियों का पूरा नेटवर्क जुड़ गया है। इन्हें उम्मीद है कि नया राज्य बन जाने पर वे वैश्विक संस्थाओं से विकास के नाम पर अधिक कर्ज बटोर सकेंगे।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के रहवासी पृथक बुंदेलखंड का समर्थन नहीं करते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि एक संसाधन विहीन पिछ़ड़ा इलाका होने की वजह से ये एक पंगु राज्य होगा। छोटे राज्य को सफलता की गारंटी बताने वाले निर्माण माफिया के लोग विकास के पिछड़ेपन के लिए बड़े राज्यों को दोष देते रहते हैं। इसके बावजूद नई पीढ़ी के जो युवा दुनिया भर के दूरदराज देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरियां करके देख चुके हैं वे जानते हैं कि दुनिया आज ग्लोबल विलेज बन चुकी हैं। ऐसे में प्रशासनिक अकुशलता के लिए दूरी को दोष देकर राजनेता और अफसर सरासर झूठ बोल रहे हैं। प्रत्यक्षतः देखा जा सकता है कि भोपाल राजधानी के नजदीक वाले सीहोर और रायसेन जैसे जिले केवल कर्ज लेकर किए जाने वाले विकास की बैसाखियों पर ही चल पा रहे हैं । ऐसे में छोटे राज्य के नाम पर अंधकूप में धकेल दिए जाने वाले बुदेलखंड को मुख्य धारा में आने के लिए एक दुरूह दौर का सामना करना पड़ेगा। -

खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह
अटल आडवाणी के खास सिपहसालार प्रमोद महाजन ने जब मध्यप्रदेश पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा था तब तक वे एक संघर्षरत नेता के रूप में ही पहचाने जाते थे। उमा भारती के तूफानी नेतृत्व के सामने शिवराज सिंह एक टिमटिमाते दिए की भांति थे। बाबूलाल गौर महज केयर टेकर के रूप में थे और उन्हें किनारे खिसका दिया गया था।भाजपा की लगभग डेढ़ दो दशक की सत्ता संभालने के बाद राज्य भले ही साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे में डूब गया हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान आज महाराजा बनकर सामने उपस्थित हैं। वे बार बार ये अहसास कराने का प्रयास भी करते रहते हैं कि आज भी राज्य में उनकी हैसियत कम नहीं हुई है। उनके बेटे की शादी में राजधानी भोपाल में जो रिसेप्शन हुआ वह उनके इन्हीं तेवरों का प्रदर्शन था। साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी तो इस जश्न के सामने फीकी नजर आती है। शादी के इस जश्न ने भाजपा की रीति नीति और सोच को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए डाक्टर मोहन यादव ने जिस पारिवारिक आयोजन को सादगीपूर्ण तरीके से मनाया उसे शिवराज सिंह ने आखिर क्यों अपनी शान की कुतुब मीनार बनाकर पेश किया।
मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने बेटे की शादी को केवल पारिवारिक आयोजन बनाया
लगभग साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी राजस्थान के पुष्कर स्थित पुष्करा रिसोर्ट से हुई थी।पुत्र वैभव की शादी में शामिल होने के लिए सीएम डाक्टर मोहन यादव भी पहुंचे थे। दो दिनों के इस आयोजन में ध्यान रखा गया था कि लोगों को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आयोजन के आधे घंटे पहले पुष्कर सरोवर और ब्र्हमा मंदिर खाली करा दिया था। बाद में रिसोर्ट में पुत्र वैभव और पुत्र वधू शालिनी यादव का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। इस आयोजन में पूजा अर्चना के बाद मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव ने अपने पति के चरण धोए और आशीर्वाद लिया।
इसके विपरीत शिवराज सिंह चौहान के बेटे की शादी का आयोजन तीन चरणों में और भव्यता के बीच संपन्न किया जा रहा है। पहले चरण में जैत गांव में नगर भोज दिया गया जिसमें आसपास के गांवों के करीब एक लाख लोग शामिल हुए। राजधानी के भव्य समारोह में लगभग बीस हजार से अधिक लोगों ने नगर भोज में हिस्सा लिया। इसी तरह दिल्ली का आयोजन भी भव्य रखा गया है। शिवराज सिंह के करीबी बताते हैं कि ये आयोजन जन सहयोग से विशाल बन गया है। टेंट और भोजन की व्यवस्था माजिद भाई संभाले हुए थे। उनके पिता कंजे मियां राजधानी के नामी गिरामी टैंट हाऊस के मालिक थे। अपने कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान उन्हें लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों से अधिक का भुगतान कर चुके हैं। इसी तरह सत्ता में रहते हुए उन्होंने जिन अफसरों और ठेकेदारों को भरपूर कमाई कराई वे सभी उनकी कृषि मंत्री की भूमिका से आशान्वित हैं।
इस आयोजन की भव्यता राजनेताओं के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। भाजपा खुद को आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी मानती है। उसके पूर्वज चना चबेना खाकर संगठन को गढ़ने का कार्य करते रहे हैं। जबकि उसी भाजपा के वर्तमान राजनेता खुद को महाराजा साबित करने में जुटे हुए हैं। खुद को किसान पुत्र बताकर शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की सत्ता में लंबी पारी खेली और वे अब इसी छवि को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री भी हैं। उनके बेटे की हैसियत इतनी बड़ी नहीं कि इतना विशाल आयोजन कर सके। खुद शिवराज सिंह चौहान की घोषित आय भी इतनी नहीं कि वे इतना बडा आयोजन कर सकें। इसके बावजूद उनके आयोजन की भव्यता बताती है कि इसमें आय से अधिक काले धन का इस्तेमाल किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा, दिल्ली की आप सरकार पर घोटालों और कुप्रबंधन के आरोप लगाकर सत्ता में पहुंची है। मोदी स्वयं केजरीवाल को अनुभवी चोर की संज्ञा देते रहे हैं। सरकार बनाने के बाद भाजपा वहां केजरीवाल सरकार के घोटालों की जांच कराए जाने की बात भी कह रही है। ऐसे में क्या मोदी अपनी ही कैबिनेट के मंत्री शिवराज सिह चौहान की संपत्तियों की जांच कराने का साहस दिखा पाएंगे। क्या वे उस काले धन के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की पहल करवा पाएंगे जिसकी वजह से आज मध्यप्रदेश साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों के कर्ज में डूबा हुआ है। -

मुख्यमंत्री निवास से योगी ने देखी भोजताल की निराली छटा
भोपाल, 14 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री श्री योगी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया और अंगवस्त्रम पहनाकर व राजाभोज की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवास कार्यालय कक्ष से मुख्यमंत्री श्री योगी को भोपाल की बड़ी झील (भोजताल) के सांध्यकालीन अनुपम सौंदर्य का अवलोकन कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल की पहचान यह झील सदियों पुरानी है। यहां के तत्कालीन प्रजापालक शासकों ने उच्च तकनीक का इस्तेमाल कर इसे जल संग्रहण के लिए निर्मित कराया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी ने भोपाल के प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी ने चर्चा के दौरान पूछा कि मध्यप्रदेश में सिंहस्थ कब है ? मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें अवगत कराया कि वर्ष 2028 में उज्जैन शहर में सिंहस्थ का भव्य आयोजन होगा। सिहंस्थ आयोजन को सफल बनाने के लिए वर्तमान में प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के लिए हमने मध्यप्रदेश से अधिकारियों का दल भी प्रयागराज भेजा है।
इस अवसर पर उत्तरप्रदेश सरकार में जल शक्ति तथा बाढ़ नियंत्रण मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, म.प्र. के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विधायक रामेश्वर शर्मा एवं अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। -

भाजपा में सत्ता की रंजिश का केन्द्र बना सागर
भोपाल,19 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल में छत्रप बन चुके सागर के दो मंत्री एक स्थानीय मंत्री पर हमला करके सरकार में दुबारा शामिल होने का फार्मूला आजमा रहे हैं। खुरई से विधायक और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मौजूदा मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।सागर जिले से उठा ये विवाद भाजपा की राजनीतिक अंतर्कथा के पेंच उजागर कर रहा है। भूपेंद्र सिंह का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग पार्टी में आकर पुराने कार्यकर्ताओं को परेशान कर रहे हैं।
भूपेंद्र सिंह ने एक इंटरव्यू में सागर जिले में भाजपा को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक मंत्री जानबूझकर पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पहले भाजपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए थे, अब वे ही पार्टी में शामिल होकर कार्यकर्ताओं को परेशान कर रहे हैं। भूपेंद्र सिंह ने साफ शब्दों में कहा, ‘मैं उन लोगों को स्वीकार नहीं कर सकता जिन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय किया है।’
भूपेंद्र सिंह ने अपनी ही सरकार से सवाल करते हुए कहा, ‘अगर आप सही हैं तो मैं गलत कैसे?’ उन्होंने बताया कि उनकी आपत्ति दो लोगों से है जो सागर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार करने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि अब तक वे दोनों लोगों का नाम लेने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हीं लोगों की सुन रहा है जो कांग्रेस से आए हैं और भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रशासन जानबूझकर कांग्रेस के लोगों को बढ़ावा दे रहा है, जबकि भाजपा के असली कार्यकर्ता पीछे छूट रहे हैं।
इस विवाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी निशाने पर आ गए हैं। वीडी शर्मा ने इस मामले को निजी लड़ाई बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र सिंह ने कहा, ‘वीडी शर्मा जी को पार्टी में आए हुए 5 से 7 साल हुए हैं। वे इससे पहले ABVP में काम करते थे।’हम लोग तो बरसों पहले से भाजपा के लिए लड़ाई लड़ते रहे हैं।
उन्होंने वीडी शर्मा के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखा। भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए है। उन्होंने यह भी बताया कि वे और गोपाल भार्गव सागर जिले में पार्टी को मजबूत करने के लिए एक साथ काम कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रहे हैं।
भूपेन्द्र सिंह के इस बयान पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मैं भाजपा का अनुशासित कार्यकर्ता हूं। तीन चुनावों में अपनी निष्ठा साबित कर चुका हूं। दो विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा में मैंने पार्टी के लिए काम किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में मैंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। उसके बाद से मैं लगातार भारतीय जनता पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहा हूं। भारतीय जनता पार्टी बेहद अनुशासित पार्टी है, लेकिन भूपेंद्र सिंह ने पार्टी के अध्यक्ष को लेकर हल्की टिप्पणी की है कि वह एबीवीपी से आए हैं और अभी पांच साल ही हुए हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से ही आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जिस तरह से भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के फैसलों से असहमति जताई जा रही है ये गंभीर मामला है और इस पर पूरी पार्टी विचार कर रही है। -

अंबेडकर पर राजनीति, सरकार ने स्वयं मोर्चा संभाला
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने विपक्ष को जनता की आवाज बुलंद करने दिया कल का समय
भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। (Madhya Pradesh Assembly)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर सदन में दिए गए बयान पर बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा हुआ । शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने यह मामला उठाते हुए इसे संविधान को मानने वाले और पूरे अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान बताते हुए माफी मांगने की मांग की।
इसको लेकर सत्तापक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई तो पूरा विपक्ष आसंदी के समक्ष आ गया और नारेबाजी करने लगा। इसके विरोध में पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री सहित सत्तापक्ष के सदस्य भी आसंदी के पास आ गए।
दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी होने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने दस मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में उन्होंने पूरे संवाद को कार्यवाही से विलोपित कर दिया।
शून्यकाल में उमंग सिंघार ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर आस्था के केंद्र हैं। भाजपा संविधान को तार-तार करने में लगी है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह की टिप्पणी से पूरा समाज आहत हुआ है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि ऐसे कोई कुछ भी नहीं कह सकता है। सदन नियम और प्रक्रिया से चलता है। ऐसे किसी व्यक्ति जो सदन में अपना पक्ष नहीं रख सकता है, उसके बारे में चर्चा नहीं हो सकती है। संसद में कही किसी भी बात का उल्लेख यहां नहीं किया जा सकता है।
इस पर कांग्रेस के सदस्य एक साथ खड़े हो गए और अपनी बात जोर-जोर से रखने लगे। मुख्यमंत्री, मंत्री सहित सत्ता पक्ष के सभी सदस्य भी अपने स्थान पर खड़े हो गए और कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। जब कांग्रेस के सदस्य आसंदी के समक्ष आ गए तो मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य सदस्य भी आसंदी के समक्ष आ गए और दोनों पक्ष के बीच बहस होने लगी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अध्यक्ष ने कार्यवाही को दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया। बाद में संसदीय कार्य मंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि बिना तथ्य के किसी अन्य सदन में कही बात को यहां राजनीति के लिए उठाना नियम संगत नहीं है।
यदि किसी उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए कुछ बोलना है तो पहले अनुमति ली जानी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष को अपनी गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस के सदस्यों ने सदन के बाहर नारेबाजी करते हुए आरोप दोहराए। -

गरीबी हटाओ कांग्रेस का जुमलाःप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
PM Modi 11 Resolutions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा में संविधान पर चर्चा का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. अपने लंबे भाषणा के आखिर में पीएम मोदी ने विकसित भारत के लिए 11 संकल्प भी प्रस्तुत किए. आइये एक-एक कर जानें.
पहला संकल्प – चाहे नागरिक हो या सरकार हो सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें
दूसरा संकल्प – हर क्षेत्र, हर समाज को विकास का लाभ मिले, सबका साथ, सबका विकास हो
तीसरा संकल्प – भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस हो, भष्टाचारी की सामाजिक स्वीकार्यता न हो.
चौथा संकल्प – देश के कानून, देश के नियम, देश की परंपराओं के पालन में देश के नागरिकों को गर्व होना चाहिए. गर्व का भाव हो.
पांचवां संकल्प – गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हो. देश की विरासत पर गर्व हो.
छठा संकल्प – देश की राजनीति को परिवारवाद से मुक्ति मिले.
सातवां संकल्प – संविधान का सम्मान हो. राजनीतिक स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए.
आठवां संकल्प – संविधान की भाव के प्रति समर्पण रखते हुए, जिनको आरक्षण मिल रहा है. उसे न छिना जाए और धर्म के आधार पर आरक्षण की हर कोशिश पर रोक लगे.
नौवां संकल्प – Women-led Development में भारत दुनिया के लिए मिशाल बने.
10वां संकल्प – राज्य के विकास से राष्ट्र का विकास, ये हमारा विकास का मंत्र हो.
11वां संकल्प – एक भारत, श्रेष्ठ भारत का ध्येय सर्वोपरि हो. -

पंडित नेहरू के कार्यकाल में कांग्रेस ने सत्ता के लिए 17 बार संविधान बदलाःरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
नईदिल्ली 13 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। संसद में 13 दिसंबर को ‘भारतीय संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा हुई. इस दौरान अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला, और कांग्रेस की पोल खोल दी.
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाया. राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस हमेशा भारत के संविधान निर्माण के काम को हाईजैक करने की कोशिश करती रही है. सिंह ने12 दिसंबर को शुरू हुई संविधान चर्चा के दौरान लोकसभा में यह सारी बातें कहीं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि संविधान किसी एक पार्टी की देन नहीं है, लेकिन इसके निर्माण के कार्य को एक पार्टी विशेष द्वारा ‘हाईजैक’ करने की कोशिश हमेशा की गई है.
उन्होंने लोकसभा में ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार संविधान के मूल्यों को केंद्र में रखकर काम कर रही है. लोकसभा के उप नेता ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष के कई नेता संविधान की प्रति अपनी जेब में रखकर घूमते हैं क्योंकि उन्होंने पीढ़ियों से अपने परिवार में संविधान को जेब में ही रखे देखा है.
सिंह ने कहा, ‘‘एक पार्टी विशेष द्वारा संविधान निर्माण के कार्य को ‘हाईजैक’ करने की कोशिश हमेशा से की गई है. भारत में संविधान निर्माण के इतिहास से जुड़ी ये सब बातें लोगों से छिपायी गई हैं.’’ उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आज विपक्ष के कई नेता संविधान की प्रति अपनी जेब में रखकर घूमते हैं. असल में उन्होंने बचपन से ही यही सीखा है. उन्होंने पीढ़ियों से अपने परिवार में संविधान को जेब में ही रखे देखा है. लेकिन भाजपा संविधान को सिर माथे पर लगाती है. हमारी प्रतिबद्धता संविधान के प्रति पूरी तरह साफ है.’’
सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं को जब भी सत्ता और संविधान में से किसी एक को चुनना था तो उन्होंने हमेशा सत्ता को चुना. उन्होंने कहा, ‘‘हमने कभी किसी संस्था की स्वतंत्रता और स्वायत्तता के साथ खिलवाड़ नहीं किया है. संविधान के मूल्य हमारे लिए कहने या दिखाने भर की बात नहीं हैं. संविधान के मूल्य, संविधान के द्वारा दिखाया गया मार्ग, संविधान के सिद्धांत, हमारे मन में, वचन में, कर्म में, हर जगह दिखाई पड़ेंगे.’’ उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 10 वर्षों में जो भी संवैधानिक संशोधन किये, उन सभी का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ संवैधानिक मूल्यों को सशक्त करना था, सामाजिक कल्याण था और लोगों का सशक्तीकरण था.
सिंह ने कहा, ‘‘कांग्रेस की तरह, हमने संविधान को कभी राजनीतिक हित साधने का जरिया नहीं बनाया. हमने संविधान को जिया है. हमने सजग और सच्चे सिपाही की तरह संविधान के खिलाफ की जा रही साजिशों का सामना किया है. और उसकी रक्षा के लिए बड़े से बड़ा कष्ट भी उठाया है. उन्होंने कहा, ‘‘हमने अनुच्छेद 370 को निरस्त किया, ताकि भारत की अखंडता सुनिश्चित हो. ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त किया.
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण भी सामाजिक न्याय की भावना से ही प्रेरित था.’’ रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने अतीत में सिर्फ संविधान संशोधन नहीं किया, बल्कि दुर्भावना के साथ धीरे-धीरे संविधान बदलने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा, ‘‘पंडित जवारलाल नेहरू जब प्रधानमंत्री थे तो लगभग 17 बार संविधान में बदलाव किया गया.’’ -

प्रभावी रही डॉ.मोहन यादव की अपील
भोपाल,08 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा, राज्यों के चुनावों में जिन छह विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था उनमें बीजेपी को अच्छा समर्थन मिला है। जम्मू कश्मीर के साम्बा में बीजेपी के सुरजीत सिंह को तीस हजार वोटो से जीत मिली है।दादरी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के सुनील सतपाल सांगवान जीत गए है। भिवानी में बीजेपी के घनश्याम सराफ बत्तीस हजार से अधिक मतों से जीते है। बावनी खेड़ा में बीजेपी के कपूर सिंह लगभग बाईस हजार मतों से जीते है।तोसम विधानसभा में बीजेपी की श्रुति चौधरी चौदह हजार से अधिक मतों से जीतीं हैं। -

भाजपा के कोर वोटर ने बदलाव की बयार का रुख मोड़ा
भोपाल,08 अक्टूबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) हरियाणा विधानसभा चुनावों में अब तक आए नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा के कोर वोटर ने एंटी इंकम्बेंसी और बदलाव की बयार का रुख मोड़ देने में सफलता पाई है।वोट प्रतिशत के आंकड़ों में काग्रेस को फायदा है। भाजपा को इस बार 39.94प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि उसकी विरोधी कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं।ये नतीजे तब आए हैं जब तमाम सर्वेक्षण और राजनीतिक दल सत्ता परिवर्तन की आशंकाएं दर्शा रहे थे।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी को 1.79 फीसदी वोट मिले हैं। अगर हरियाणा में लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी इंडिया गठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरता तो सीटों के हिसाब से रिजल्ट में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता था।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में अब तक हुई वोटों की गिनती में करीब 28 ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशियों के 5 हजार या उससे कम वोटों का अंतर दिख रहा है। ऐसे में आम आदमी पार्टी अगर कांग्रेस के साथ हरियाणा चुनाव में उतरती तो इसका कुछ और ही असर हो सकता था।
कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी अंतिम वक्त चाहते थे कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन हो। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा के अति आत्मविश्वास के चलते यह गठबंधन नहीं होने दिया । चुनाव के बीच में अरविंद केजरीवाल जब जेल से बाहर आए तो लगा कि कांग्रेस और आप का गठबंधन लगभग तय है, लेकिन हुड्डा इसके लिए तैयार नहीं हुए।
उनका दावा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ भी इसी तरह के अति आत्मविश्वास में दिखे थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी को साथ लेने से मना कर दिया था और अखिलेश यादव के नाम पर बड़बोलेपन वाला बयान भी दे दिया था। हरियाणा के विधानसभा चुनाव को देखकर यही लगता है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कमलनाथ वाली गलती की और कांग्रेस का एक और राज्य जीतने का सपना धरा रह गया था। -

जातिगत जनगणना फूट डालने का षड़यंत्रःकंगना रनौत
Kangana Ranaut News: किसान आंदोलन पर अपने दो टूक बयान से मीडिया की सुर्खियां बनीं बीजेपी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अब जाति आधारित जनगणना पर भी स्पष्ट राय दी है। कंगना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adiyanath) के ‘साथ रहेंगे, नेक रहेंगे’ वाले बयान को दोहराते हुए कहा कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए.
एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कंगना रनौत ने कहा , “जातिगत जनगणना पर मेरा वही स्टैंड है जो सीएम योगी आदित्यनाथ का है,कि हम साथ रहेंगे तो नेक रहेंगे, बंटेंगे तो कटेंगे. जातिगत जनगणना बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए. हमें अपने आस-पास के लोगों की जाति की जानकारी नहीं होती और न इसकी जरूरत है। आज तक जनगणना को जाति के आधार पर घोषित नहीं किया गया तो अब इसकी क्या जरूरत।
कंगना ने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि गरीब, किसान,मजदूर और महिलाएं चार जातियां हैं. इसके अलावा कोई जाति नहीं होनी चाहिए।श्री रामनाथ कोविंद जी देश के दलित राष्ट्रपति बने,सुश्री द्रौपदी मुर्मू जी देश की आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं. हम ऐसे उदाहरणों को क्यों नहीं देखते। आरक्षण को लेकर मैं अपनी पार्टी के स्टैंड पर कायम हूं, लेकिन मुझे लगता है महिलाओं की सुरक्षा,मजदूर, किसान और गरीबों के लिए काम करना जरूरी है।”
कंगना रनौत ने कहा, “अगर हमें विकसित भारत की तरफ जाना है तो गरीब, महिला और किसानों की ही बात होनी चाहिए, लेकिन अगर हमें देश को जलाना है, नफरत करना है या फिर एक-दूसरे से लड़ना-मरना है तो जाति की गणना होनी चाहिए.” जातिगत जनगणना का शिगूफा देश में फूट डालने का षड़यंत्र है। गौर करें कि कंगना रनौत बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में रही हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था, “अगर देश में मजबूत नेतृत्व नहीं होता, तो भारत में भी किसान आंदोलन के समय बांग्लादेश जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।”
-

क्रीमी लेयर का आरक्षण बंद करने पर बाल्मिकी समाज ने लड्डू बांटे
भोपाल,21 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर करने और अन्य उपेक्षित वर्गों को आरक्षण में तय कोटा देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध आज देश में कई दलित और आदिवासी संगठनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। अनुसूचित जाति आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त को आए फैसले के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जा रही है। आज के बंद को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल ने अपना समर्थन देने की घोषणा की है। वामपंथी दलों ने भी हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया है। एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी इस बंद को समर्थन दिया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि वो संवैधानिक तौर पर दिए गए एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर को नहीं मानती।
सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ भारत बंद बुलाया गया है, जिसमें राज्यों को एससी श्रेणी के भीतर उप-वर्गीकरण बनाने की अनुमति दी गई है। इसे लेकर देश के कई दलित और आदिवासी संगठनों ने बुधवार को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद का देश में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। कई जगह हड़ताल से परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हुई हैं। वहीं कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थान भी बंद हैं। सबसे ज्यादा असर बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में दिख रहा है।
इस विरोध के पीछे 1 अगस्त, 2024 को आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय के सात न्यायधीशों की संविधान पीठ में से छह जजों ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है। फैसले का मतलब है कि राज्य एससी श्रेणियों के बीच अधिक पिछड़े लोगों की पहचान कर सकते हैं और कोटे के भीतर अलग कोटा के लिए उन्हें उप-वर्गीकृत कर सकते हैं।पंजाब सरकार के निर्णय पर फैसला सुनाते समय सात में से एक जज ने क्रीमीलेयर के विचार से अपनी असहमति जताई है।
यह फैसला भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ ने सुनाया था। इसके जरिए 2004 में ईवी चिन्नैया मामले में दिए गए पांच जजों के फैसले को पलट दिया। बता दें कि 2004 के निर्णय में कहा गया था कि एससी/एसटी में उप-वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है।
फैसले के दौरान हुई बहस में अदालत ने एससी-एसटी में क्रीमी लेयर की आवश्यकता पर जोर दिया था। कई जजों ने न्यायालय ने अनुसूचित जातियों के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ को अनुसूचित जाति श्रेणियों के लिए निर्धारित आरक्षण लाभों से बाहर रखने की पर राय रखी थी। वर्तमान में, यह व्यवस्था अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण पर लागू होती है। मुख्य रूप से न्यायमूर्ति बीआर गवई ने कहा था कि राज्यों को एससी, एसटी में क्रीमी लेयर की पहचान करनी चाहिए और उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर करना चाहिए।
देशभर में कई सामाजिक संघों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया है। दलित और आदिवासी संगठनों के राष्ट्रीय परिसंघ (NACDAOR) का तर्क है कि एससी में उप-वर्गीकरण का निर्णय आरक्षण ढांचे और संवैधानिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इसने सरकार से अनुरोध किया है कि इस फैसले को खारिज किया जाए, क्योंकि यह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा है।
कांग्रेस, बसपा, चिराग पासवान की लोजपा और रामदास अठावले की आरपीआई समेत कई पार्टियों ने कोर्ट के फैसले के कई पहलुओं की आलोचना की। चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
देश की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी नेतृत्व ने उपवर्गीकरण मुद्दे पर बैठक की थी। खरगे के आवास पर हुई बैठक में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, महासचिव जयराम रमेश और पार्टी के कानूनी और दलित चेहरे शामिल थे। बैठक के बाद जयराम रमेश ने जाति जनगणना और अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50% की सीमा को हटाने की पार्टी की मांग दोहराई।
इसके अलावा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि प्रधानमंत्री संसद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज कर सकते थे और इसे वहां ला सकते थे। उन्होंने कहा था, ‘प्रधानमंत्री कुछ घंटों में विधेयक बना सकते हैं। इसके लिए आपके पास कई दिन बीत जाने के बावजूद समय नहीं है।’
खरगे ने कहा था कि आरक्षण नीति में कोई बदलाव तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि ‘देश में अस्पृश्यता की प्रथा बनी रहे। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने क्रीमी लेयर का मुद्दा उठाकर अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के बारे में नहीं सोचा है। उन्होंने कहा था कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं।
हालांकि, कांग्रेस के दो मुख्यमंत्रियों- कर्नाटक के सिद्धारमैया और तेलंगाना के रेवंत रेड्डी ने स्थानीय समीकरणों के चलते इस फैसले का स्वागत किया था। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा था कि पार्टी का नजरिया दिल्ली में नेतृत्व द्वारा तय किया जाएगा।
उधर, केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समर्थन किया है। एनडीए के नेता ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण में जो जातियां आरक्षण के लाभ से वंचित हैं, उन्हें कोटे में कोटा का लाभ दिया जाना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत के फैसले के करीब हफ्तेभर बाद 9 अगस्त को एससी और एसटी समुदायों से आने वाले भाजपा सांसदों ने पीएम मोदी से मुलाकात की। करीब 100 सांसदों ने एससी/एसटी आरक्षण के भीतर क्रीमी लेयर अवधारणा के कार्यान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए एक ज्ञापन दिया। उन्होंने आग्रह किया कि इस निर्णय को लागू नहीं किया जाना चाहिए। सांसदों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे इस मुद्दे को हल करेंगे।
उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई जिसमें कहा गया कि संविधान में एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण को लेकर सुझाव दिया था। इसे लेकर कैबिनेट बैठक में चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार डॉ. बीआर आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान से बंधी है। साथ ही संविधान में एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है। (आज तक से साभार). -

परिवहन माफिया पर चला सुशासन का चाबुक
भोपाल,14अगस्त (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)मध्यप्रदेश की राजनीति में बरसों से घुसपैठ जमाए सत्ता माफिया के एजेंट को जेल भेजकर डॉ.मोहन यादव की पुलिस ने उसे अपनी हद में रहने की खुली चुनौती दे डाली है। इस घटना से सत्ता के गलियारों में दौड़ भाग करने वाले तमाम नेता और उनके दलाल हतप्रभ हैं। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मोहन यादव सरकार कभी उस लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा में इतनी मुस्तैद हो सकती है जिसे कभी उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने अपने दो दशक लंबे कार्यकाल में छूने की हिम्मत भी नहीं दिखाई थी। बीच में आई कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने तो सत्ता माफिया के एक अड्े को मटियामेट करके खुली जंग का ऐलान कर दिया था लेकिन इसी दंभ में भरे कमलनाथ की सरकार समय से पहले धराशायी हो गई और मध्यप्रदेश की रगों में घुसकर खून चूसने वाले सत्ता माफिया के सफाए का अभियान अधूरा रह गया था।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने लंबे शासनकाल में जिस तरह कर्ज लेकर विकास करने का जो मार्ग चुना था उसकी वजह से सत्ता के इर्द गिर्द लुटेरों का जमघट लग गया था यही सत्ता के दलाल राज्य के सारे ठेकों में हिस्सेदार बन गए थे। विकास के नाम पर चलने वाली योजनाओं का कोई भी ठेका हो उन सभी में इस गिरोह का उदय हो जाता था। शिवराज सिंह का सचिवालय हो या मंत्रालय के अफसर सभी को ताकीद थी कि इस संगठन के इशारे पर ही ठेके दिए जाएं। जिस ठेके में इस गिरोह का कम से कम एक सदस्य साईलेंट पार्टनर के रूप में शामिल होता था उसी को ठेका दिया जाता था।इस ठेके का इस्टीमेट इसी तरह का बनाया जाता था कि उसमें सबकी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो जाए।
सत्ता को धमकाने का जो खून इस सत्ता माफिया के मुंह लग चुका है उसके चलते गुंडागर्दी के सामने पुलिस अक्सर लाचार हो जाती रही है। पिछले दो दशकों में सत्ता माफिया के इन्हीं गुर्गों को प्रदेश का कर्णधार बताने की परंपरा सी पड़ गई है। उद्योगपतियों के नाम पर यही गिरोह सत्ता का लाभ लेता रहा है। इसमें भाजपा तो क्या कांग्रेस के भी तमाम लोग शामिल रहे हैं। कांग्रेस के जिन नेताओं थोड़ी बहुत कमर सीधी की उसे इस सत्ता माफिया ने या तो तोड़ दिया या अपने बीच मिला लिया।
एेसा नहीं था कि शिवराज सिंह चौहान इस परिस्थिति को नहीं समझते थे। तभी तो 13 दिसंबर 2018 को जब कमलनाथ ने शपथ ली तब शिवराज सिंह ने भाजपा की हार के बाद एक सार्वजनिक मंच पर कहा था कि मैं मुक्त हो गया। वे जानते थे कि किस तरह एमपी की सत्ता चलाना एक गंभीर कीमिया गिरी से ज्यादा नहीं है। इसके बावजूद वे इतने कमजोर साबित होते रहे कि प्रदेश की आय बढ़ाने के बजाए वे सत्ता माफिया को पालने में ही जुटे रहे।
पहली बार डाक्टर मोहन यादव ने इस सत्ता माफिया को उसकी सीमाओं में रहने की चुनौती दी है। जबसे उन्होंने सत्ता संभाली है तभी से वे सुशासन के उस फार्मूले पर सरकार चला रहे हैं जो नीति आयोग ने निर्धारित किया है। सुशासन की इसी परंपरा को अटल सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के सीईओ एवं स्टाफ लागू करने का प्रयास कर रहा है। सत्त के इसी तंत्र में घुसपैठ करने के लिए इस माफिया गिरोह ने एमपी भाजपा कार्यसमिति सदस्य हीरेन्द्र बहादुर सिंह की बेटी को संविदा पर नियुक्त करवा दिया था। विदेश से पढ़कर आई उनकी बेटी सरकार के निर्णयों की मुखबिरी करके सत्ता माफिया को एलर्ट भेज रही थी। जब इसकी असलियत खुली तो संस्थान के सीईओ लोकेश शर्मा ने उसे चलता कर दिया। इससे बौखलाए हीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री से शिकायत करने के लिए तेज आवाज में तू तू मैं मैं कर डाली। यही नहीं जब संस्थान में एक बैठक चल रही थी तब वहां जाकर उन्होंने सीईओ के कक्ष में गुंडागर्दी मचाई। उन्होंने सीईओ को धमकााया कि वे मध्यप्रदेश में भी नहीं रह पाएंगे।
डॉक्टर मोहन यादव: अखाड़े की कसरत से उपजा खेल भावना का सुशासन
दरअसल हीरेन्द्र बहादुर सिंह की चेतक ट्रेवल्स नाम की टैक्सी सेवा पिछले बीस सालों से मध्यप्रदेश की प्रमुख परिवहन कंपनी बन गई है। इस कंपनी ने सरकार से कई सौ करोड़ रुपयों का भुगतान प्राप्त किया है। इस कंपनी के नाम भुगतान की जो बिलिंग की गई है उससे भी कई गुना अधिक बिलों का भुगतान इसी गिरोह की अन्य नाम की परिवहन एजेंसियों को किया गया है।कुल मिलाकर सरकार के परिवहन पर सत्ता माफिया के प्रतिनिधि के तौर पर हीरेन्द्र बहादुर ही काबिज हैं। वे खुद को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के भतीजे बताते हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह की रिश्तेदारी की वजह से उन्होंने वहां भी अपना ठेकेदारी का नेटवर्क फैला रखा है।यही ट्रेवल्स चुनावी सभाओं के लिए हेलीकाप्टर और विमानों की सेवाओं की बिलिंग करता है। यही वजह है कि वे अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रैलियों में भी हेलीकाप्टर से साथ यात्रा करते देखे जाते थे।
हीरेन्द्र बहादुर सिंहः माफिया का चेहरा बनकर निशाने पर आए 
लोकेश शर्मा: सुशासन लागू करने की जद्दोजहद
जब हीरेन्द्र बहादुर सुशासन संस्थान में गदर मचा रहे थे तो संस्थान ने अपने बचाव में पुलिस को सूचना दे दी। संस्थान के ओएसडी(नायब तहसीलदार) निमेश पांडेय ने कमलानगर पुलिस को दिए अपने आवेदन में कहा कि जब 10 अगस्त को संस्थान में बैठक चल रही थी तब कुर्ता पजामा पहने हीरेन्द्र सिंह कक्ष में घुस आए और सीईओ लोकेश शर्मा के बारे में पूछने लगे,फिर यहां से वे सीईओ के कक्ष में गए और उन्हें धमकाने के बाद बाहर निकलते हुए भी गालियां दे रहे थे। कमलानगर पुलिस ने इस सूचना पर हीरेन्द्र सिंह को थाने बुलाया पर वे नहीं आए तो रविवार को उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया जहां से वे सोमवार को बाहर आ सके। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को करीब से समझने वालों का कहना है कि माफिया ने यदि सत्ता को धमकाने की आदत नहीं छोड़ी तो फिर एमपी में सुशासन लागू होकर ही रहेगा। -

लौह प्रतिमाओं के बोझ तले कुचली जाती भाजपा
आलोक सिंघई
आम चुनाव 2024 के नतीजों के बाद भाजपा की आलोचना करने वालों के हौसले बुलंद हो गए हैं। तमाम विपक्षी दल एक सुर में चिचिया र हे हैं कि भाजपा की नीतियों को जनता ने नकार दिया है। इस कथित हार के कारणों की समीक्षा भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि ये समीक्षा भाजपा और आरएसएस कर रहे हैं। चर्चाएं जरूर हैं पर भाजपा संगठन ने औपचारिक तौर पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। अलग अलग धड़े हार का ठीकरा फोड़ने के लिए खोपड़ी ढूंढ़ रहे हैं। जबकि कम सीटें आने के बावजूद सत्ता में लौटी मोदी सरकार जोर शोर से अपनी नीतियों का क्रियान्वयन करने में जुट गई है। जो भाजपाई और विपक्षी कांग्रेसी व अन्य राजनीतिक दल भाजपा की कथित हार की समीक्षा कर रहे हैं वे केवल बाहर से खड़े होकर कयास लगा रहे हैं। भाजपा की अंदरूनी स्थितियों की समीक्षा नहीं हो पा रही है।
भाजपा और संघ को जो लोग करीब से देखते रहे हैं वे जानते है कि भाजपा का संगठन ऊपर से जितना सर्वव्यापी दिखता है भीतर से उतना ठोस नहीं है। इसकी वजह देश का वो संविधान है जिसने अन्य राजनीतिक दलों की वजह से समाज को खंड खंड देखने की परंपरा पाई है। कांग्रेस का फार्मूला तो देश को विभाजित करके राजनीति करने के लिए ही बनाया गया था। कांग्रेस ने अपने पूरे शासनकाल में समाज को खंड खंड बांटने का प्रयास किया और फिर उनमें राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करने का प्रयास किया । ये स्वाभाविक नेतृत्व हो सकता था लेकिन कांग्रेस को जिस तरह एक ही परिवार के इर्द गिर्द खड़ा करने का प्रयास किया गया उसने जनता के बीच से स्वाभाविक नेतृत्व उभरने की प्रक्रिया को कुचल दिया। नतीजतन परिवारवाद, बाहुबल, धन बल, बंदूक बल,बलात्कार, चमड़े की नाव सभी कुटैवों ने कांग्रेस को जनता का मुकुट बनने से रोक दिया। अब उसकी जगह भरने के लिए भाजपा ने जिस तरह विकल्प बननेका प्रयास किया उससे वह अपनी स्वाभाविक पहचान ही गंवा बैठी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी जैसे कई पड़ाव पार करने के बाद जो विचारधारा सत्ता में आगे बढ़ी उसे पुष्पित और पल्लवित करने में कई पीढ़ियां खप गईं। त्याग और तपस्या के अटूट परिश्रम ने भाजपा को सत्ता के नजदीक तक तो पहुंचाया लेकिन वह सत्ता में नहीं पहुंच पा रही थी। तब कांग्रेस के भीतर से ही खुद को असहाय महसूस कर रहे नेताओं ने भाजपा को मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी। जो भाजपा कुशा भाऊ ठाकरे, बलराज माधोक, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, विजया राजे सिंधिया, जैसे नेताओं के आगोश में पल रही थी वह अचानक कांग्रेस बनने निकल पड़ी। भाजपा के इस बधियाकरण में पुरानी पीढ़ी के कई नेता पीछे छूट गए। अवसर वादी नेताओं की पौध तैयार हो गई जो सत्ता के शीर्ष पर झंडा फहराने लगी। इस लीडर शिप के मन में चोरी का भाव था इसलिए वह खुलकर संवाद तो कर नहीं सकती थी। जिन्हें सत्ता से दूर धकेला गया वे क्षोभवश खुद अपने दायरे में सिमट गए।
आज यूपी में भाजपा की कथित हार की समीक्षा हो रही है लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा की कथित जीत की समीक्षा करने कोई तैयार नहीं है। एमपी की भाजपा भी देश के अन्य राज्यों की तरह अपने ही बोझ तले दबी हुई है। जोर जोर से दावे करके दंभोक्तिपूर्ण भाषण देने वाले भाजपा के नेताओं को लगता है कि उनके प्रयासों से ही भाजपा ने अपना शत प्रतिशत परफार्मेंस दिखाया है जबकि ये अर्धसत्य ही है। एमपी की भाजपा को उसके कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस के दिग्गजों ने भी आगे बढ़ कर सत्ता में पहुंचाया है। एमपी की कांग्रेस तो जान रही थी कि भाजपा को एक बार फुल मेजोरिटी देना अनिवार्य है। क्योंकि ऐसा किए बगैर देश को नई दिशा में नहीं ले जाया जा सकता। भारत माता के पैरों में पड़ी बेड़ियां भी नहीं काटी जा सकतीं। इस रहस्य को भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व नहीं समझ पाया। उसे लग रहा था कि उसकी बेहतरीन योजनाएं जनमन को प्रभावित कर चुकीं हैं और उसे अब केवल सत्ता का मुकुट अपने सिर पर सजाना मात्र है।
यूपी में जिन राजनीतिक पंडितों को लगता है कि चार सौ पार और संविधान बदल देने के भय ने भाजपा को सत्ता से दूर किया है उन्हें अपने आकलन पर एक बार फिर विचार कर लेना चाहिए। बेशक भाजपा की हार में टिकिट वितरण और सत्ता विरोधी लहर ने अपना असर दिखाया है लेकिन इससे ज्यादा भाजपा का बोझ ही उसे कुचलने में सबसे बड़ा कारण रहा है। आरएसएस के नाम पर जिस तरह से सत्ता की लूट की गई और दंभोक्ति भरे दावे किये गए उससे भाजपा का संगठन बुरी तरह चकनाचूर हो गया है। एमपी में भी कमोबेश यही हालत है लेकिन यहां कांग्रेस की मजबूत लाबी राहुल गांधी के बोगस नेतृत्व को दरकिनार करने के लिए लामबंद हो गई थी। जीतू पटवारी जैसे ओछे और दंभी व्यक्ति की मौजूदगी ने कांग्रेसियों को अपने अपने दायरे में सिमट जाने के लिए जमीन तैयार कर दी। नतीजतन इसा लाभ भाजपा को मिला। कमलनाथ के भाजपा में जाने की अफवाह और उनके समर्थकों का भाजपा में जाने की कवायद ने जो संदेश दिया उससे जनता ने भी भाजपा को ही वोट देने में अपनी भलाई समझी और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।
डाक्टर मोहन यादव की सरकार को आए हुए आधा साल हो गया लेकिन अब तक सरकार अपनी स्वाभाविक गति नहीं पकड़ पाई है। आम चुनावों की अपरिहार्यता और आर्थिक चुनौतियों ने सरकार के हाथ बांध रखे हैं। भाजपा के नेताओं को खुद समझ नहीं आ रहा है कि वे कैसे प्रदेश सरकार की गाड़ी को पटरी पर लाएं। भाजपा को अपने संगठन की कमियों पर निश्चित रुप से आत्म चिंतन करना चाहिए। किसी भीजीवित संगठन में ये सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होती है लेकिन संगठन और सरकार दोनों को अपने भीतर पल रहे पाखंडियों से निजात पानी जरूरी है। चाहे वे भाजपा के मूल कार्यकर्ता रहे हों या सिंधिया के संग कांग्रेस से आए नेतागण सभी को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए आगे बढ़ना होगा। सबसे बड़ी बात तो ये कि डींगें हांकने वाले संगठन के स्वंभू नेताओं से भी दूरी बनानी होगी तभी भाजपा देश को बुलंदियों पर ले जाने के अपने उस स्वप्न को साकार कर पाएगी जिसा सपना उसके पूर्वजों ने कभी देखा था। लौह प्रतिमाओं का बोझ भाजपा को रसातल में पहुंचा देगा। -

तुष्टिकरण के लिए दलित आरक्षण की चोरी बर्दाश्त नहींःमोहन यादव
नई दिल्ली 23 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले से सवालिया निशान लग गया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में 2010 के बाद जारी पांच लाख से अधिक ओबीसी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया है. इससे राज्य ही नहीं पूरे देश की राजनीति में आरक्षण पर एक फिर बहस छिड़ गई है. हाईकोर्ट ने 2012 में राज्य की ममता बनर्जी सरकार के 77 जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने संबंधी कानून को ही अवैध करार दिया है.देश की प्रतिभा को खदेड़कर विदेश भेजने के इस षड़यंत्र पर आम चुनावों में पहले से ही बड़ी बहस चल रही है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने ममता बैनर्जी के इस व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है।उन्होंने कहा है कि संवैधानिक आधार पर दिए गए आरक्षण की चोरी करके अपना वोट बैंक खड़ा करना दलित,पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग के साथ अन्याय है।उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम तुष्टिकरण के षड़यंत्र से लिए गए तृणमूल कांग्रेस सरकार के फैसले का विरोध करते हैं। माननीय हाईकोर्ट ने जिन तथ्यों के आधार पर ये फैसला दिया है ममता बैनर्जी को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण की पूरी कहानी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गठित सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से शुरु हुई थी। उस रिपोर्ट में देश में मुस्लिम समुदाय की स्थिति के बारे में विस्तृत बातें की गई थीं. रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों में केवल 3.5 फीसदी ही मुस्लिम थे. इसी को आधार बनाकर 2010 में पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार ने 53 जातियों को ओबीसी की श्रेणी में डाल दिया और ओबीसी आरक्षण सात फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया. इस तरह उस वक्त करीब 87.1 फीसदी मुस्लिम आबादी आरक्षण के दायरे में आ गई. लेकिन, 2011 में वाम मोर्चा की सरकार सत्ता से बाहर हो गई और उसका यह फैसला कानून नहीं बन सका.
जब राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार आई और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं. ममता की सरकार ने इस सूची को बढ़ाकर 77 कर दिया. 35 नई जातियों को इस सूची में जोड़ा गया, जिसमें से 33 मुस्लिम समुदाय की जातियां थीं. साथ ही तृणमूल सरकार ने भी राज्य में ओबीसी आरक्षण सात फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया. ममता सरकार के इस कानून की वजह से राज्य की 92 फीसदी मुस्लिम आबादी को आरक्षण का लाभ मिलने लगा.
दूसरी तरह, ओबीसी आरक्षण को भी दो वर्गों में बांट दिया गया. 10 फीसदी आरक्षण एक वर्ग को दिया गया, जिसमें से अधिकतर जातियां मुस्लिम समुदाय की थीं. दूसरे वर्ग को सात फीसदी आरक्षण मिला जिसमें हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय की जातियां थीं.
ओबीसी आरक्षण को दो वर्गों में बांटने का फॉर्मूला कई राज्यों में लागू किया गया है. बिहार में पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग दो कैटगरी है. यहां ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 37 फीसदी कर दिया गया है. केंद्र सरकार और कई अन्य राज्यों में ओबीसी आरक्षण क्रीम लेयर और नॉन क्रीमी लेयर श्रेणी में बंटा है. इस आधार पर ओबीसी आरक्षण को ज्यादा तार्किक बनाने की कोशिश की गई. क्रीम और नॉन क्रीमी लेयर का आधार परिवार की आय होती है. ओबीसी समुदाय से होने के बावजूद एक दंपति की आय अगर एक निश्चिच लेवल से अधिक हो तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है.
ममता बनर्जी पर आरोप लगता है कि उन्होंने राज्य में ओबीसी की सूची में 77 जातियों को शामिल करने का कानून वोट बैंक की राजनीति के आधार पर लागू किया. इसमें राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी सूची में जातियों को शामिल करने का जो मानक है उसका ध्यान नहीं रखा गया.
हालांकि, इस पिक्चर का एक अन्य पहलू भी है. सच्चर कमेटी के मुताबिक राज्य सरकार की नौकरियों में 2010 से पहले कभी केवल 3.5 फीसदी मुस्लिम थे. उस स्थिति में आज काफी सुधार हुआ है. टेलीग्राफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में मुस्लिम समुदाय की स्थिति में काफी सुधार देखा गया. बंगाल सरकार के अल्पसंख्यक विभाग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2011 से 2015 के बीच पश्चिम बंगाल सर्विस कमिशन की भर्तियों में 9.01 फीसदी अल्पसंख्यकों का चयन हुआ. इस अवधि में पश्चिम बंगाल कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में 15 फीसदी अल्पसंख्यक चयनित हुए. ठीक इसी तरह पश्चिम बंगाल म्यूनिशिपल सर्विस कमिशन की भर्तियों में 12.5 फीसदी अल्पसंख्यक चयनित हुए. राज्य में मुस्लिम समुदाय के लोगों की आबादी 2.47 करोड़ यानी 27 फीसदी के करीब है.


