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  • उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी

    उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी


    भोपाल, 13 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के बिट्टन मैदान पर 7 से 13 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी मेला का आज विधिवत समापन हो गया।मेले के भव्य आयोजन के स्वरूप को देखते हुए नगर पालिक निगम के सभापति किशन सूर्यवंशी ने कहा कि ये आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता का बुलंद उद्घोष है।ये उद्यमियों को संबल देने वाला बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

    राजेश पोरवालः स्वदेशी के विचार को देशव्यापी बनाने में उल्लेखनीय योगदान.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जिस तरह मेले के आयोजन को सफल बनाने के लिए आशीर्वाद दिया उससे नागरिकों की जन भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने मेले के समापन अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित नगर निगम सभापति किशन सूर्यवंशी का हार्दिक अभिनंदन किया। श्री सूर्यवंशी ने मेले का भ्रमण किया और देश भर से आए शिल्प कलाकारों की सफलता की कहानियां भी सुनीं। उन्होंने बताया कि जिस तरह युवा उद्यमियों ने अपनी कला अभिरुचि को व्यावसायिक तौर पर प्रस्तुत किया है उसे देखकर कहा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में जन भागीदारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जो उपाय किए हैं उनमें इस तरह के मेलों के आयोजन से युवाओं को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं।


    भारत सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि चेतन कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने उद्यमियों के लिए कई फ्लैगशिप योजनाएं चलाई हैं। उद्यमियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करके राष्ट्र के विकास सूचकांक को बढ़ाने में मदद मिली है। इस मेले में भी विभाग ने सक्रिय सहयोग करके युवाओं का मार्गदर्शन किया है।राज्य सरकार ने जिस तरह आगे बढ़कर उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराया उससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि महावीर जयंती तक मेले की सूचना राजधानी के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच चुकी थी। इससे दस अप्रैल से मेला स्थल पर खासा जमघट लगने लगा था। छुट्टी के दिनों में तो मेले में पहुंचे नागरिकों ने भरपूर खरीददारी की। मेला स्थल पर वाहन पार्किंग, पेयजल, बैठक व्यवस्था, प्रकाश संयोजन और व्यंजनों की सुविधा और बच्चों के लिए खेल जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराईं गईँ थीं जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। मेले के संचालक प्रणम्य अग्रवाल ने सभी सहयोगियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ

    एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की सत्ता संभालते ही गुजरातियों के व्यापारिक सोच से पूरे देश को रोशन करने का अभियान चलाया हुआ है। भारत ही नहीं बल्कि वे पूरे देश में अपने इसी सोच की वजह से वे आज आकर्षण का केन्द्र बन गए हैं। भोपाल में जब ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन तय किया गया तभी से पूरी दुनिया के भारत मित्रों की निगाह देश के दिल की ओर लगी हुईं थीं। फ्रांस,जर्मनी, अमेरिका समेत विश्व के तमाम देशों में जाकर प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत आने का न्यौता दिया है। यही वजह है कि एमपी आज निवेशकों के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बनकर सामने आया है। उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिए भाजपा ने लगभग दो दशक पहले आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया था। बिजली, सड़क और पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, जल नल योजना जैसी तमाम योजनाओं ने एमपी के इंफ्रास्टक्चर को मजबूती प्रदान की है। आज प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं से यहां के आम नागरिक की खरीद क्षमता भी बढ़ी है जिससे राज्य आज एक सफल बाजार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस सबसे अलग जो बात आज श्री मोदी ने इंवेस्टर्स समिट में आए निवेशकों को समझाने का प्रयास किया वो यह कि देश का दिल आज निवेशकों को मुनाफे की गारंटी वाला राज्य बन गया है।


    इसके लिए हमें दो दशक पहले मध्यप्रदेश पर गौर करना होगा। तब राज्य में न तो सड़कें थीं, न बिजली पानी की मूलभूत व्यवस्थाएं थीं। कांग्रेस की सरकारों ने राज्य में लूटपाट का माहौल बना रखा था। वोट बटोरने के लिए तुष्टिकरण और जनता को बरगलाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेठों को खलनायक बताने की राजनीति की जाती थी। शोषण की कहानियां सुनाकर कांग्रेस के नेता लोगों को बरगलाते थे। व्यापारियों और उद्योगपतियों को चोर व शोषक बताया जाता था। उनकी पैरवी करने वाली भाजपा को व्यापारियों की पार्टी बताकर लांछित किया जाता था। चंबल में डकैतों का आतंक इतना गहरा था कि लोग शाम के वक्त घरों से बाहर नहीं निकलते थे। उन्हीं डकैतों की कहानियां दिखाकर मुंबई की फिल्म नगरी कांग्रेस की जीवनरेखा बनी हुई थी। मीडिया की अपराध कथाएं भी उद्यमियों को कलंकित करती होती थीं। यही वजह है कि न तो यहां उद्योग विकसित हो पाए और न ही पूंजी का निर्माण हो पाया । आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका मध्यप्रदेश एक दुःस्वप्न बनकर रह गया था।


    बदले माहौल में आज इन्हीं पिछड़ेपन की नीतियों को मार भगाया गया है। लगभग दो दशकों की भाजपा की सरकारों ने पहले डकैतों, माफियाओं, ठगों और षड़यंत्र कारियों के विरुद्ध अभियान चलाया। अब वह सत्ता के दलालों को मार भगाने में जुटी हुई है। शिवराज सिंह की भाजपा सरकार ने आधारभूत ढांचे को तो विकसित किया लेकिन वह राज्य को सत्ता के दलालों से मुक्ति नहीं दिला पाई थी। डकैतों और माफियाओं ने जंगल छोड़ दिए लेकिन वे बस्तियों में आकर सेठ बन गए। राज्य की आय तो नहीं बढ़ी लेकिन कर्ज बढ़कर साढ़े तीन लाख करोड़ हो गया। चोरों मवालियों और ठगों ने अपनी आय बढ़ाई लेकिन वे न तो उद्योग स्थापित कर रहे थे और न ही उन्होंने अपनी काली कमाई का टैक्स चुकाया ।


    इस बार प्रदेश की जनता ने जैसे ही भाजपा को एक बार फिर सत्ता सौंपी तो सबसे पहले सत्ता के दलालों के आगे नतमस्तक नेताओं को सत्ता से बाहर किया और नई पीढ़ी को बागडोर सौंपी। डाक्टर मोहन यादव जैसे जमीनी नेता के हाथों कमान सौंपकर केन्द्र सरकार ने सत्ता के दलालों को घर बैठने का संदेश दिया। लाठी लेझम चलाने वाले पहलवान मोहन यादव हों या फिर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा जैसे समर्पित राजनेताओं तो आगे लाकर उन्होंने जड़ हो चुकी राजनीति को एक खुला आसमान सौप दिया है। इसके साथ ही काला धन बटोरकर जिन राजनेताओं ने अपने चहेते व्यापारियों के माध्यम से निवेश किया और महाराजा बन बैठे उनसे काला धन भी निकलवाया जाने लगा है।इस सब कार्य के लिए मोहन यादव ने अफसरशाही को खुला अवसर दिया है।


    मुख्य सचिव के रूप में अनुराग जैन को भेजकर राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाया गया है।जिन अफसरों के हाथों में आज राज्य की कमान है,योजनाओं को लागू करने की जवाबदारी है वे अपेक्षाकृत रूप से साफ सुथरे हैं। ये भी कहा जा सकता है कि अफसरशाही पर शिकंजा कसकर उसे औद्योगिक विकास के अनुकूल बनाया गया है। यही वजह है कि इस बार की इंवेस्टर समिट पिछले तमाम सम्मेलनों से अलग तस्वीर लेकर सामने आई है। निवेशकों की परख के लिए राज्य की पूरी जानकारी डिजिटल कर दी गई है। उनके आवेदनों की प्रक्रिया भी इतनी सरल कर दी गई है कि वे निवेश का प्रस्ताव देकर आसानी से अपना कारोबार शुरु कर सकते हैं।दुनिया के बहुराष्ट्रीय बैंकों में कार्य कर चुके भोपाल के ही युवा उद्यमी अंकेश मेहरा ने बताया कि उन्होंने अलान्ना ब्रांड नेम से राजधानी में एक स्टार्टअप शुरु किया है। उनका प्रोडक्ट होंठों की सुंदरता के लिए दुनिया का आधुनिकतम आविष्कार है। अपने माल को सस्ता और आम जनता की पहुंच का बनाने के लिए उन्हें कुछ पैकिंग मटेरियल आज भी चीन से बुलाना पड़ता है। जल्दी ही वे ये सामान भी भारत में बनाने लगेंगे। राज्य की औद्योगिक नीतियां उद्यमियों के लिए दोस्ताना हैं ।ये माहौल बना रहेगा तो राज्य जल्दी ही एक सफल स्टेट के रूप में अपना नाम रौशन करेगा।


    इसके पहले तक राज्य में एक कुप्रथा छाई हुई थी कि टेंडर किसी भी उद्यमी के नाम खुले उसे एक विशेष प्रजाति का साईलेंट पार्टनर रखना पड़ता था। कांग्रेस के आपराधिक चरित्र वाले मुख्यमंत्रियों की चलाई इस प्रथा का पालन भाजपा की सरकारें भी दो दशक तक करती रहीं।इसका सबसे बड़ा नुक्सान ये होता था कि निवेशक यदि गुणवत्ता का कार्य करे और कम मुनाफा ले तब भी उसे सत्ता के दलालों को मुनाफे का कट देना पड़ता था। सत्ता का पेट भरते भरते उसे यहां कारोबार करना घाटे का सौदा बन जाता था और वो यहां की परंपराओं से घबराकर निवेश से पीछे हट जाता था। पहली बार डाक्टर मोहन यादव की सरकार ने निवेशकों को सत्ता के दलालों के भय से मुक्ति दिलाकर स्वच्छंद वातावरण मुहैया कराया है। यही वजह है कि राज्य में निवेशकों ने धड़ाधड़ निवेश शुरु कर दिया है।


    लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस नीरज मंडलोई ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट की सफलता का आलम ये है कि आज पहले दिन ही उनके विभाग को लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। कल तक ये आंकडा़ नया रिकार्ड स्थापित करेगा। इसी तरह एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उद्यमियों में जो उत्साह देखने मिल रहा है वह अद्वितीय है। हमें अब तक के अनुभवों और निरंतर संवाद का लाभ भी मिला है। ये बात सही है कि राज्य में कई मूलभूत बदलाव हुए हैं लेकिन अब तक भाजपा के कई स्थानीय नेता भी इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेताओं के नाम पर भड़काया जा रहा है। अब तक जो हुआ सो हुआ पर जीआईएस के आयोजन की सफलता की जो तस्वीर उभरी है वह मध्यप्रदेश और देश में मेक इन इंडिया का एक सफल माडल दुनिया के सामने लाने में सफल हुई है।

  • भयमुक्त मध्यप्रदेश में अब निवेशकों को मुनाफे की गारंटी बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    भयमुक्त मध्यप्रदेश में अब निवेशकों को मुनाफे की गारंटी बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    भोपाल,24 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित मध्यप्रदेश से विकसित भारत के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई दी। प्रधामनंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा अवसर पहली बार आया है, जब पूरी दुनिया भारत के लिए आशान्वित है। भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता को सिद्ध किया है, जिसके परिणाम स्वरूप सम्पूर्ण विश्व भारत पर विश्वास प्रकट कर रहा है। प्रधामनंत्री श्री मोदी ने कहा कि यही विश्वास हम मध्यप्रदेश में अनुभव कर रहे हैं। मध्यप्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से देश का पांचवां बड़ा राज्य है, कृषि और खनन में अग्रणी है, इसके साथ ही राज्य को माँ नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। देश में हो रहे अधोसंरचना विकास का लाभ मध्यप्रदेश को मिला है, दिल्ली, मुम्बई नेशनल हाईवे का बड़ा भाग मध्यप्रदेश से निकलता है, प्रदेश में पाँच लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है और लॉजिस्टिक्स की यहाँ अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। मध्यप्रदेश में हर वो क्षमता है, जो इसे देश के शीर्ष पाँच राज्यों में ला सकता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने के लिए बधाई दी।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रिमोर्ट का बटन दबाकर प्रदेश में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए लागू 18 नवीन नीतियों का शुभारंभ किया। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश उद्योग नीति 2025, एमएसएमई नीति, एक्सपोर्ट प्रमोशन नीति, लॉजिस्टिक्स नीति, स्टार्टअप नीति, मध्यप्रदेश एनीमेशन, वीआर, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटि नीति, जीसीसी नीति, सेमी कंडक्टर नीति, ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति, फिल्म पर्यटन नीति, पर्यटन नीति, पम्पड हाइड्रो स्टोरेज नीति, सिटी गैस डिस्टिब्यूशन नीति, विमानन नीति, नवकरणीय ऊर्जा नीति, स्वास्थ निवेश प्रोत्साहन नीति और एकीकृत टाउनशिप नीति शामिल हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समिट में पधारे उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यहां 300 से अधिक इंडस्ट्री जोन हैं और निवेश की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में 31 हजार मेगावॉट सरप्लस एनर्जी है, जिसमें 30 फीसदी रिन्यूएबल एनर्जी है। कुछ दिन पहले ही ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सौर ऊर्जा परियोजना का शुभारंभ हुआ है। एनर्जी सेक्टर में आए बूम का मध्यप्रदेश को लाभ मिला है। हाल ही में 45 हजार करोड़ रूपए लागत की केन-बेतवा लिंक परियोजना की आधारशिला रखी गई, जिससे 10 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, परिणामस्वरूप प्रदेश में कपड़ा उद्योग और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बढ़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को देश का कॉटन कैपिटल बताते हुए कहा कि कपड़ा उद्योग और कॉटन सप्लाई में मध्यप्रदेश, देश का सबसे बड़ा उत्पादक है। यहां का मलबरी सिल्क और चंदेरी साड़ियां भी बहुत पसंद की जाती हैं। देश में बन रहे सात बड़े टेक्सटाइल पार्क में से एक मध्यप्रदेश में है। देश के टूरिज्म सेक्टर में मध्यप्रदेश अजब भी है और गजब भी है। नर्मदा के किनारे पर्यटन का पर्याप्त विकास हुआ है। प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की भी अपार संभावनाएं हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि दो दशक पहले लोग मध्यप्रदेश में निवेश करने से डरते थे। जिस प्रदेश में बसें ठीक से नहीं चल पाती थीं, वह राज्य अब इलेक्ट्रिक व्हीकल के मामले में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जनवरी 2025 तक प्रदेश में दो लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं, जो दर्शाता है कि नए क्षेत्रों में भी मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित कर रहा है। लीथियम बैटरी और न्यूक्लीयर एनर्जी में भी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में शत-प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। रानी कमलापति स्टेशन के चित्र सभी का मन मोह रहे हैं। इसी तर्ज पर प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। विमानन सेवा के लिए ग्वालियर और जबलपुर के एयरपोर्ट को विस्तार दिया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार प्रदेश की विकास दर को नई ऊँचाइयां देने के लिए निरंतर हरसंभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में निवेश का यही समय है और सही समय है।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि विश्व के सामान्यजन, विशेषज्ञ और संस्थाएं भारत की ओर आशा से देख रही हैं। विश्व बैंक ने कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में ऐसे ही गतिशील अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इसी प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ की एक संस्था ने भारत को सौर ऊर्जा का श्रेष्ठ केन्द्र कहा है। एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक सप्लाई चैन के रूप में उभर रहा है। विश्व में यह मान्यता है कि भारत जो कहता है – वह करके दिखाता है। वैश्विक स्तर पर विद्यमान यह विचार निवेशकों का उत्साह बढ़ाने के पर्याप्त आधार हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि टेक्सटाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी आगामी वर्षों में देश के विकास को गति देंगे। मध्यप्रदेश सहित देश में मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाए हैं। हेल्थ एंड वेलनेस क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार एमएसएमई सेक्टर को गति देने के लिए एमएसएमई केन्द्रित सप्लाई चैन को विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है और इस सेक्टर में कार्यरत उद्यमियों को प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। “ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस” को प्रोत्साहित करने के लिए कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया गया है। केन्द्रीय बजट में टैक्स स्लैब को रिस्ट्रक्चर किया गया है, रिजर्व बैंक ने भी ब्याज दरें घटाई हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समिट में पधारे डेलीगेट्स से कहा कि वे मध्यप्रदेश आएं है तो उज्जैन के महाकाल महालोक के दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें, यह उन्हें आलोकिक अनुभूति प्रदान करेगा।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस के शुभारंभ कार्यक्रम में 15-20 मिनिट विलंब पहुंचने का कारण बताते हुए कहा कि उन्हें ज्ञात हुआ कि आज 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा है। वीआईपी मूवमेंट होने से विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो, इस उद्देश्य से उन्होंने अपने शिड्यूल को पंद्रह मिनिट लेट कर दिया।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी का भोपाल में पहली बार हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पधारने पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंग वस्त्रम भेंट अभिवादन किया। आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मृति चिन्ह के रूप में भोपाल की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कला से निर्मित महाकाल मंदिर का चित्र भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित दो दिवसीय समिट में देश-दुनिया के दिग्गज राजनेता, उद्योगपति और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।
    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरते भारत पर केंद्रित लघु फिल्म “इंडिया ग्रोथ स्टोरी” का भी प्रदर्शन किया गया। प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं पर केंद्रित लघु फिल्म “मध्य प्रदेश-अनंत संभावनाएं” का प्रदर्शन किया गया।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर मध्यप्रदेश की अनोखी शिल्प कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते एमपी एक्सपीरियन्स जोन और एमपी प्वेलियन का अवलोकन किया। एक्सपीरियन्स ज़ोन के अंतर्गत इमर्सिव डिजिटल वॉकव्यू के रूप में प्रदेश की विरासत, प्रगति और आकांक्षाओं का प्रदर्शन किया गया है। इसके साथ ही सांस्कृति क्षेत्र के अंतर्गत इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और वर्चुअल रीयलिटी द्वारा राज्य के इतिहास, लोककथाएं, वास्तुशिल्प और जनजातीय परम्पराएं प्रदर्शित हैं। गांव के रूप में विकसित जोन में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, टैराकोटा कलाकृतियों के साथ ही “एक जिला-एक उत्पाद” के अंतर्गत जिलों के उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश के प्रसिद्ध जनजातीय चित्रकारों द्वारा बनाई गई गौंड, भीली, और पिथौरा कलाकृतियों का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर लगाई गई औद्योगिक प्रदर्शनियों क्रमश: आटो शो, टेक्सटाइल एवं फैशन एक्सपो का भी अवलोकन किया।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सतत विकास और औद्योगिक निवेश की दिशा में नए कदम बढ़ाऐ जा रहे है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की थीम ‘अनंत संभावनाएँ है, जो प्रदेश में उद्योग और निवेश की असीमित संभावनाओं को दर्शाती है। ‘अनंत संभावनाएँ’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में अवसरों की व्यापकता को दर्शाने वाला दृष्टिकोण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास” का मंत्र दिया, जिसमें यह संदेश समाहित है कि जब संभावनाओं के अनंत आकाश में हम साथ मिलकर आशा की ज्योत जलाते हैं, तो एक नहीं, बल्कि सभी के आंगन रोशन होते हैं और यही हमारी सनातन संस्कृति है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प समस्त भारतवासियों ने लिया है, हमारा लक्ष्य देश को 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। विकसित भारत के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विकसित मध्यप्रदेश समस्त प्रदेशवासियों के साथ महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी अनुक्रम में राज्य सरकार अगले 05 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक वर्ष पहले निवेश तथा औद्योगिक विकास की यात्रा मार्च 2024 में बाबा महाकाल के आशीर्वाद के साथ उज्जैन से शुरू हुई। इस यात्रा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के साथ ही देश के प्रमुख शहरों में इंटरैक्टिव सेशंस आयोजित किए गए। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूके, जर्मनी एवं जापान में मध्यप्रदेश की विकास गाथा को प्रस्तुत किया गया और उद्योगपतियों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं एवं संभावित चुनौतियों को समझा तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। सरल, निवेश अनुकूल एवं प्रासंगिक नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन, सरलीकृत व्यापार एवं बाधारहित व्यवसाय, सिंगल विंडो सिस्टम को बेहतर बनाना और शासन में पारदर्शिता लाना हमारी उच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में निवेश के प्रयासों के लिए लगातार कार्य करने के उद्देश्य से सरकार ने वर्ष 2025 को “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग एवं रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अंतर्गत 6 विभाग शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग, खनिज विभाग, नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं एमएसएमई विभाग के अलग से समिट हो रहे हैं। किसी भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 4 मूलभूत संसाधनों की आवश्यकता होती है, भूमि, जल, बिजली और कुशल कार्यबल। प्रदेश में सरप्लस बिजली है, भरपूर पानी है, विशाल लैंड बैंक है और कुशल मानव संसाधन है। यहां की कानून-व्यवस्था भी निवेश अनुकूल है। इसके साथ ही सरकार की प्रतिबद्धता प्रदेश में उद्योगों के विकास की है, जिससे उद्योग जगत के कार्य सरल, प्रभावी एवं त्वरित गति से चलें, नवीन निवेश के क्षेत्र का विकास हो और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल इकोसिस्टम तैयार हो।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सकल राज्य घरेलु उत्पाद (GSDP) में मध्यप्रदेश बड़े राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वार्षिक विकास दर वाला राज्य है। पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश का सकल घरेलु उत्पाद लगभग 4 गुना हुआ है। मेगा फुटवेयर क्लस्टर (मुरैना), नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण (मोहासा-बावई) और पीएम मित्रा (MITRA) पार्क (धार) सहित कई बड़े प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन) में मेडिकल डिवाइसेस पार्क और 6 नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हो रहा है। प्रदेश में 300 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र हैं। आगामी वर्ष में 13 नए औद्योगिक पार्क पूर्ण होंगे, जबकि 20 और औद्योगिक पार्कों की आधारशिला रखी जाएगी। राज्य में प्लग एंड प्ले सेंटर, सेमीकंडक्टर पार्क एवं नवीन आईटी पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, इससे प्रदेश में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। बड़े से बड़ा और छोटे से छोटा निवेशक भी हमारे लिए अतिथि है। सभी के लिए प्रदेश में अनंत संभावनाएं हैं। इन अनंत संभावनाओं को विकास में फलीभूत करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित पूरा देश आर्थिक प्रगति के नई युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता एवं महिलाओं को केंद्र में रखते हुए 4 मिशन आरंभ किए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को विकास की राह पर अग्रसर करने के लिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की सौगात दी, जिससे मध्यप्रदेश में 41 लाख की आबादी को पेयजल सुविधा एवं लगभग 09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में सरप्लस स्टेट है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को विकसित और औद्योगिक मध्यप्रदेश’ बनाने की यात्रा शुरू हो चुकी है, प्रदेश एक बेहतर भविष्य को आकार दे रहा है। मध्यप्रदेश, देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में अग्रणी साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों को प्रदेश में आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सशक्त पारिवारिक भावना विद्यमान है। यहां की यह विशेषता है कि जो मध्यप्रदेश एक बार आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी की उपस्थिति में विभिन्न उद्योगपतियों और औद्योगिक समूहों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के संचालन और गतिविधियों के विस्तार के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। इसके अंतर्गत अडाणी ग्रुप के चेयरमेन श्री गौतम अडाणी ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। अडाणी ग्रुप मध्यप्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपए का निवेश कर चुका है। भविष्य में उनके समूह की एक लाख 10 हजार करोड़ रूपए की योजना है। यह निवेश सीमेंट, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में होगा, इससे वर्ष 2030 तक एक लाख 20 हजार रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के साथ मल्टी स्मार्ट सिटी और एयरपोर्ट सिटी के निर्माण के लिए भी उनका समूह चर्चा कर रहा है।


    प्रदेश में निवेश के संबंध में अवाडा ग्रुप के चेयरमेन श्री विनीत मित्तल ने कहा कि उनके समूह की प्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपए के निवेश से सोलर-विंड पॉवर प्रोजेक्ट स्थापना की योजना है। आईटीसी ग्रुप के श्री संजीव पुरी ने मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र का पॉवर हाऊस बताया। गोदरेज समूह के श्री नादिर गोदरेज ने कहा कि प्रदेश में जारी विकास प्रक्रिया से यहां निवेश करना बुद्धिमानी है। सागर ग्रुप के श्री सुधीर अग्रवाल और शक्ति पम्पस के श्री दिनेश पाटीदार ने भी प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के संचालन संबंधी अपने अनुभव साझा किए। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में विदेशी निवेशक, वैश्विक औद्योगिक संगठन, राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत औद्योगिक घरानें, उद्योग संघों के प्रतिनिधि, उद्यमी तथा व्यवसायी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

  • ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से दुनिया के नक्शे पर आया एमपी

    ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से दुनिया के नक्शे पर आया एमपी

    भोपाल, 22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24-25 फरवरी को आयोजित हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 से पहले भोपाल के अलग-अलग स्थानों पर की जा रही तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने जीआईएस की तैयारियों में लगे अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश आयेंगे। उनका आगमन समस्त प्रदेशवासियों के लिए एक गौरवशाली क्षण है। हम प्रधानमंत्री श्री मोदी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सालों के बाद ऐसा अवसर आया है कि प्रधानमंत्री भोपाल में ही रात्रि विश्राम करेंगे। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए हर स्तर पर व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी भोपाल में निर्वाचित जनप्रिनिधियों एवं शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक लेंगे।

    जीआईएस-2025 की तैयारियों के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इसमें देश-विदेश के शीर्ष उद्योगपति एवं निवेशक शामिल होंगे, जिनका आत्मीय आतिथ्य-सत्कार किया जाएगा। हम न केवल उन्हें निवेश के सभी अवसर प्रदान करेंगे, बल्कि उनका विश्वास भी जीतने का प्रयास करेंगे।

    भोपाल जीआईएस में बनेगा रिकॉर्ड

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि भोपाल जीआईएस-2025 एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में इस प्रकार के बड़े आयोजनों के लिए आगे भी प्रयास कि जाएंगे। मध्यप्रदेश देश में नंबर-1 बने इस दिशा में एक अभिनव प्रयास भोपाल में हो रहा है। सरकार ने संभाग स्तर पर सफलतापूर्वक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर प्रदेशभर में औद्योगिकीकरण एवं निवेश लाने की शुरुआत की है। अब हमारी सरकार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को जिला स्तर तक लेकर जायेगी, जिससे हर जिले, हर ब्लॉक के औद्योगिक विकास को भी और अधिक गति मिलेगी।

  • अफसरों ने थामी ग्लोबल इंवेस्टर समिट की कमान

    अफसरों ने थामी ग्लोबल इंवेस्टर समिट की कमान


    भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । राजधानी में होने जा रही ग्लोबल इंवेस्टर समिट के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज करने के लिए आज राज्य मंत्रालय में आला अफसरों ने एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में आयोजन की तैयारियों और औद्योगिक विकास की आधारशिला बनाने की रणनीति पर कार्य किया गया। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने भोपाल में आयोजित होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। भारत सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को सार्थक बनाने के लिए अफसरों ने कई जमीनी उपायों पर अमल शुरु कर दिया है।

    उन्होंने कलेक्टर भोपाल एवं पुलिस-कमिश्नर को निर्देशित किया कि जीआईएस के दौरान होने वाली परीक्षाओं में कोई अवरोध नहीं हो। इसका विशेष ध्यान रखा जाये, कोई भी विद्यार्थी परीक्षा केंद्र तक जाने से वंचित न रह जाये।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने यातायात व्यवस्था, पार्किंग, ई-बस, ई-कार्ड, बैठक व्यवस्था, होटल, स्वास्थ्य, मेहमानों के भोजन, आकस्मिक प्लान, प्रधानमंत्री की आगमन-प्रस्थान व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त कर निर्देशित किया कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों को समझकर निर्वहन करें। टीम वर्क के साथ कार्य करें जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास में वृद्धि हो सके।
    बैठक में स्वास्थ्य, नवकरणीय ऊर्जा, नगरीय प्रशासन, कौशल विकास, उद्यानिकी, खनिज साधन, पर्यटन एवं एमएसएमई विभागों ने प्रेजेंटेशन देकर अपनी तैयारियों की जानकारी दी।
    बैठक्‍में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव श्री संजय शुक्ल, श्री उमाकांत उमराव, श्री राघवेन्द्र सिंह सचिव, श्री सुदाम पी. खाड़े, श्री एम. रघुराज कलेक्टर भोपाल एवं पुलिस कमिश्नर उपस्थित थे।

  • राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 10वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मेले का उद्घाटन शाम पांच बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहेंगे। मंत्री दिलीप अहिरवार ने आज एक भीड़ भरी पत्रकार वार्ता में बताया कि मेले की थीम ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ रखी गई है। लघु वनोपजों के प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में 300 स्टाल्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परंपरागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों एवं नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
    मेले में विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 19 एवं 20 दिसंबर को मेला स्थल पर ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें श्रीलंका, नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। 21 दिसंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा,जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों (औषधीय पौधों ) कच्ची जड़ी-बूटियों एवं एमएफपी-पार्क की बनाईं हुईं आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिए अनुबंध किए जाएंगे।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में ओपीडी संचालन किया जाएगा। जिसमें आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। जिसमें 25 हजार लोगों के उपचार कराने की संभावना है।
    वन राज्य मंत्री ने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आर्केस्टा, नुक्कड़ नाटक एवं लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, गाय कार्यक्रम आयोजित होंगे, साथ ही 18 दिसंबर को लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं 19 को हास्य कलाकार एहसान कुरैशी, 20 को सूफी बैंड, 21 फिडली क्राफ्ट और 22 को ‘एक शाम वन विभाग के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
    अंतर्राष्ट्रीय वन मेला, 2024, प्रदेश की वन संपदा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक ऐसा मंच है, जो पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को प्रदर्शित करता है।

  • फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक

    फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक


    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ के प्रतिनिधि मंडल ने आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट कर बीड़ी उद्योग में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए कारोबार में आ रही कई तकनीकी अड़चनों को दूर करने का अनुरोध किया। संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बीड़ी श्रमिकों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने के लिए बीड़ी निर्माताओं को राज्य की ओर से आवश्यक संरक्षण प्रदान किया जाए। इससे श्रमिकों को साल भर रोजगार देने वाले इस कारोबार से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
    विधानसभा के मुख्यमंत्री कक्ष में उन्होंने डाक्टर मोहन यादव को बताया कि बरसों से इस उद्योग को अनदेखा किए जाने की वजह से पूरा कारोबार अराजकता का शिकार हो गया है। बीड़ी उद्योग संघ के सचिव श्री अर्जुन खन्ना के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि बीड़ी निर्माण एक श्रम आधारित कुटीर ग्रामोद्योग है, जिसमें न्यूनतम पूंजी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। संघ ने बताया कि प्रदेश के जंगलों से प्राप्त होने वाले अच्छी गुणवत्ता के तेंदूपत्ते से बीड़ी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाकर श्रमिकों का भी भला किया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाने से मध्यप्रदेश बीड़ी निर्यात की अपनी खोई विरासत दुबारा हासिल कर सकता है।
    संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन देकर राज्य को संगठित और स्थायी बीड़ी उत्पादन के केन्द्र के रूप में मजबूती से खड़ा किया जा सकता है। तेंदूपत्ता की स्थानीय खपत बढ़ने से प्रदेश में ही पूंजी का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। बीड़ी का स्थानीय निर्माण होने से बेरोजगारी की समस्या का समाधान भी किया जा सकेगा। मुख्यमँत्री डाक्टर मोहन यादव ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार बीड़ी उद्योग संघ के सुझावों पर अमल करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करेगी।
    गौरतलब है कि राज्य में तेंदूपत्ते का राष्ट्रीयकरण के साथ ही छोटी सिगरेट को बढ़ावा मिलने की वजह से राज्य का बीड़ी उद्योग अन्य राज्यों में पहुंच गया था। इससे स्थानीय रोजगार घटा था और सिगरेट कंपनियों का मुनाफा बढ़ गया था। कांग्रेस की पूर्ववर्ती अर्जुनसिंह की सरकार ने श्रमिकों को अधिक मजदूरी का प्रलोभन देकर खूब वाहवाही बटोरी थी। राज्य का बीड़ी उद्योग समाप्त हो जाने की वजह से स्थानीय श्रमिकों का रोजगार छिन गया था। अन्य राज्यों में ट्रांसफर हुए बीड़ी उद्योग की वजह से उन राज्यों में तो श्रमिकों को लाभ होने लगा लेकिन यहां के मजदूर लाचार हो गये थे। धीरे धीरे तेंदूपत्ते की चोरी बढ़ी और स्थानीय स्तर पर स्थापित ब्रांडों की और बगैर लेवल वाली नकली बीड़ी का निर्माण बढ़ गया था। इससे राज्य को टैक्स के रूप में होने वाली आय भी प्रभावित हुई थी और अपंजीकृत मजदूरों को श्रम कानूनों का लाभ मिलना भी बंद हो गया था।

  • शराब के कारोबार को माफिया मुक्त बनाएगी नई नीति

    शराब के कारोबार को माफिया मुक्त बनाएगी नई नीति

    भोपाल,23 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्यप्रदेश में शराब की अवैध बिक्री सख्ती से रोक लगाई जाए और व्यापार में शामिल आपराधिक तत्वों पर कड़ी कारवाई की जाए। श्री देवड़ा ने सोमवार को भोपाल स्थित पर्यावरण अध्ययन संस्थान (इप्को) में आयोजित नवीन आबकारी नीति/आबकारी व्यवस्था वर्ष 2025-26 के निर्धारण के संबंध में मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के लायसेंसियों की कार्यशाला में ये बात कही। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने पहली बार आसवक एवं देशी/विदेशी मदिरा विनिर्माताओं एवं बार-लायसेंसियों के साथ भी बैठक की। श्री देवड़ा ने वाणिज्यक कर विभाग की उपलब्धियों को लेकर भी चर्चा की।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनका कर्तव्य है कि अधिकारी अपने मुख्यालय पर रहकर कार्यों के प्रति सजग रहें। उन्होने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मदिरा का अवैध परिवहन ना हो तथा संगठित अपराधियों के विरूद्व कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार पर पैनी नजर रखी जाएगी और जहां भी अवैध कारोबार या कालाबाजारी की सूचना मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को राजस्व देने में वाणिज्यकर विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 16 हजार करोड़ रूपये है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी के समन्वित प्रयास से यह लक्ष्य भी हम प्राप्त कर लेगें। इसके साथ साथ हमें शराब के धंधे की आड़ में जनता का शोषण करने वाले आपराधिक तत्वों पर भी नियंत्रण करना होगा।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा निरंन्तर नए-नए नवाचार किये जा रहें हैं। विभिन्न राज्यों की आबकारी नीति का अध्ययन किया जा रहा है। उनकी अच्छाईयों को प्रदेश की आबकारी नीति में संम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नीति तभी ठीक होगी जब अनुभवी लोगो से बात की जायेगी। कार्यशाला में प्रदेश के मदिरा व्यावसायियों एंव ठेकेदारों द्वारा उप मुख्यमंत्री को अपनी समस्या से भी अवगत कराया गया। उप मुख्यमंत्री श्री देवडा ने कहा कि अगर समस्या है तो उसका समाधान भी सरकार करेगी। कठिनाईयों को दूर किया जायेगा। सरकार बहुत सजग है। उन्होनें विभागीय अधिकारियों का निर्देश दिये कि प्रदेश के शराब व्यावसायियों की समस्या को हल करने का प्रयास करे। श्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के राजस्व प्राप्ति में आबकारी विभाग का अहम भागीदारी रहती है।

    कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आबकारी विभाग के द्वारा ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से लायसेंसियों को अनेक सुविधाऐं प्रदान की गई हैं, जिससे अधिक पारदर्शिता के साथ कार्य संम्पादित किये जा रहें हैं तथा राजस्व में निरंन्तर वृद्धि हो रही है। लायसेंसी भी नियमानुसार अपनी दुकान एवं बार का संचालन करें, विभाग द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर लायसेंसियों के विरूद्ध भी कार्यवाही की जावेगी।

    शराब कारोबारियों में नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाने के लिए मंथन बैठक

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि आप सभी जनप्रतिनिधियों/मंत्रियों/विधायकों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करें एवं निराकरण के बाद संबंधित को अवगत भी कराया जाए। आबकारी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन कर आबकारी अपराधों पर रोक लगाना हम सभी का दायित्व है। सभी के समन्वित प्रयास से वर्ष 2025-26 के लिए संतुलित आबकारी नीति बनाना ही विभाग का लक्ष्य है। आशा करता हूं कि हम इसमें पूरी तरह सफल होगें।

    कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर श्री अमित राठौर ने कहा कि प्रदेश के राजस्व में मदिरा व्यावसायियों का बड़ा योगदान रहता है। उन्होने अपेक्षा की कि जनता के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। आबकारी आयुक्त श्री अभिजीत अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी एवं मदिरा व्यावसायियों/लाइसेंसियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

  • स्टेट बैंक की कछुआ ब्रांच में पेंशनधारकों का सम्मेलन

    स्टेट बैंक की कछुआ ब्रांच में पेंशनधारकों का सम्मेलन


    भोपाल, 20 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी के भारतीय स्टेट बैंक मुख्यालय स्थित कछुआ ब्रांच में सेवा निवृत्त वरिष्ठ जनों की पेशन समस्याओं के निवारण के लिए एक शिविर का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ जनों को पेंशन प्रक्रिया में बचत करने और अनावश्यक राशि कटौती होने बचाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
    ब्रांच मैनेजर श्री ध्रुपद दवे ने शिविर में उपस्थित वरिष्ठ जनों को उन बैंकिंग प्रावधानों की जानकारियां दीं जिनसे किसी भी पेंशन धारक को बगैर परेशान हुए पेंशन प्राप्त करना सरल हो जाता है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ जन देश की किसी भी स्टेट बैंक शाखा में जाकर अपने जीवित होने का प्रमाण आसानी से दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ जनों को पेंशन संबंधी आदेशों के लिए पेंशन संचालनालय या सेवा निवृत्ति मंजूर करने वाली किसी भी संस्था से संपर्क करना पड़ता है। जब भारतीय स्टेट बैंक के पास पेंशन जारी करने का आदेश आ जाता है तो फिर बैंक बहुत ही सरल प्रक्रिया से पेंशन जारी कर देता है। ये पेंशन देश भर के किसी भी खाते से आसानी से निकाली जा सकती है।
    श्री ध्रुपद दवे ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक अपने पेशन धारकों की जीवन प्रक्रिया को विश्वसनीय तरीके से सहजता प्रदान करता है। इसके लिए बैंक समय समय पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई पेंशन योजनाएं भी लाता है।भारतीय स्टेट बैंक के पास देश के वरिष्ठ नागरिकों का विशाल नेटवर्क मौजूद है इसलिए बैंक अपने इन विशिष्ठ नागरिकों के लिए कई सुविधाएं भी प्रदान करता है। देश के लिए अपने जीवन का योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों को निर्विघ्न सेवाएं मिलती रहें इसके लिए बैंक ने धैर्यवान कर्मचारियों की टीम तैनात कर रखी है। इससे हम हर पेंशन धारक की समस्याओं का पूरा समाधान कर पाते हैं।


    बैंक की ही बीमा योजना के जुड़े विस्तार अधिकारी श्री सचिन शुक्ला ने बताया कि बैंक ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए मासिक पेंशन योजना आरंभ की है।उन्होंने बताया कि स्मार्ट प्लेटिना प्लस योजना में कुल ग्यारह लाख रुपए की किस्तें जमा करने वाले नागरिकों को स्कीम पूरी होने पर पच्चीस लाख इंक्यानबे हजार सात सौ पचास रुपए वापस मिलते हैं। पंद्रह सालों तक 99450 रुपए की किस्तें पेंशन के रूप में प्राप्त होती हैं। एक अन्य स्मार्ट एन्युईटी प्लस योजना में वरिष्ठ जनों के बच्चों के लिए पांच साल वाली स्मार्ट फार्च्यून बिल्डर योजना भी चलाई जा रही है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए मोबाईल नंबर750970016 पर संपर्क किया जा सकता है।

  • शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    भोपाल01 अक्टूबर(अजय खेमरिया).
    प्रदेश की मौजूदा आबकारी नीति में बड़े बदलाब की आवश्यकता है क्योंकि जिस व्यापक पैमाने पर शराब का अवैध कारोबार मैदानी स्तर पर हो रहा है उसे आबकारी विभाग रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है। सीमित मानव संसाधन और केंद्रीयकृत नियंत्रण तंत्र के अभाव में सरकार को इस अवैध कारोबार से राजस्व की क्षति भी हजारों करोड़ में हो रही है।
    तथ्य यह है कि प्रदेश में जितनी आधिकारिक शराब दुकानें है उससे दोगुने अनुपात में शराब का अवैध विक्रय संगठित तौर पर किया जा रहा है।प्रदेश में एक भी गांव ऐसा नही है जहां सरकारी दुकानों से अवैध परिवहन कर शराब नही बेची जा रही हो। यही नही इसी अनुपात में अवैध रूप से शराब निर्माण भी गांव-गांव में किया जा रहा है। इसके दुष्परिणाम सरकारी राजस्व में चपत के साथ आम नागरिकों की अमानक शराब से असमय मौत के रूप में भी सामने आ रहे हैं। मुरैना जिले में पिछले सालों जिस तरह से अवैध शराब भट्टियों से निर्मित शराब पीने से जो मौते हुई थी उससे सरकार ने कोई सबक नही सीखा।
    सरकार नहीं कर सकती शराब दुकानें बंद?
    मध्यप्रदेश सरकार बिहार या गुजरात की तरह शराब बंदी नहीं कर सकती है, क्योंकि राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा उसे आबकारी से ही प्राप्त होता है। प्रदेश में अभी तीन हजार 600 शराब दुकानों से सरकार को 13 हजार 916 करोड़ का राजस्व चालू वित्तीय बर्ष में मिला है। 2003 में यह आंकड़ा लगभग 750 करोड़ रुपए था। जाहिर है कि औधोगिक एवं खनिज संसाधनों रूप में बीमारू मप्र के लिए सरकारी राजस्व का बड़ा स्रोत शराब भी है।
    वर्तमान तीन हजार छह सौ दुकानों की संख्या आंकड़े के रूप में तो बहुत नजर आती है, लेकिन जो जमीनी हकीकत है वह इन आंकड़ों से जुदा है क्योंकि बिना सरकारी दुकानों के भी हजारों जगह शराब का अवैध विक्रय हो रहा है और इसी अनुपात में अवैध भट्टियों का संचालन भी जारी है। यह दोनों तथ्य सरकार से छिपे हुए नहीं है।
    सरकार के राजस्व का इतना महत्वपूर्ण स्रोत होने के बाबजूद आबकारी महकमा मानव संसाधन की गंभीरतम कमी से जूझ रहा है। अधिकतर जिलों में आबकारी उपनिरीक्षक, हवलदार, आरक्षक के आधे से ज्यादा पद खाली है। एक एक उपनिरीक्षक के पास दो से तीन सर्किल का प्रभार है। नतीजतन अवैध भट्टियों पर कारवाई के लिए महकमें के पास कोई संसाधन ही नहीं हैं । इस अवैध कारोबार को स्थानीय दबंगो के अलावा राजनीतिक स्तर पर भी खुला संरक्षण मिला हुआ है। जब भी आबकारी महकमा अवैध बिक्री या निर्माण पर कारवाई करता है उसे स्थानीय माफिया और नेता कारवाई नहीं करने देते हैं। नेताओं के संरक्षण के कारण ही उन अवैध कारोबारियों को न तो पुलिस का भय है और न ही आबकारी विभाग का।

    अवैध शराब के लिए बाजार की उपलब्धता होना है, वर्तमान में मध्य प्रदेश में संपूर्ण प्रदेश को दो ,तीन या चार-चार दुकानों के समूहों में बांटा गया है, प्रत्येक समूह किसी न किसी ठेकेदार को टेंडर के माध्यम से आवंटित किया जाता है जिसके एवज में सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है। दुकानें शासकीय होती हैं और ड्यूटी पेड शराब सरकारी वेयर हाउस से उनको प्रदान की जाती हैं जिनको वो एमएसपी और एमआरपी के बीच अपने सुविधा जनक रेट पर विक्रय करने हेतु स्वतंत्र होते हैं। अब सवाल ये उठता है कि अवैध शराब यदि दुकानों से नहीं बिकती तो फिर कहां बिकती है? प्रत्येक मदिरा समूह में ठेकेदार को आवंटित दुकानों की संख्या कम होने और उन दुकानों से संबद्ध क्षेत्र बहुत बड़ा होने से प्रति व्यक्ति दुकान तक मदिरा खरीदने जाने के लिए सक्षम नहीं होता इसलिए ठेकेदार प्रत्येक गांव में अपना एक कमीशन किसी सामान्य पान या परचून दुकानदार को दे देते हैं जिस से प्रत्येक गांव में ड्यूटी पेड शराब प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाती है।
    अवैध शराब विक्रय को रोकने के लिये प्रत्येक गांव में अघोषित रूप से खुली हुई कलारियों को सरकार नियमों के अंतर्गत लाकर उनके नियमित लाइसेंस प्रदान करने की कार्यवाही करें, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और जनहानि की संभावना भी खत्म हो जाएगी। इसके अलावा शराब की कीमतों में कमी की जानी चाहिए क्योंकि जो शराब का आदि है, वह तो शराब पियेगा, फिर चाहे जहरीली ही क्यों न हो। ऐसे में यदि कीमत कम होगी, तो यह मौतों का सिलसिला भी कम होगा। आबकारी विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों का पूर्ण अधिकार विभाग को ही दिया जाना चाहिए, ताकि विभागीय अधिकारियों का अवैध करोबार पर अंकुश लगाए जाने के प्रति रूझान बढ सके। अन्यथा पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों के कारण आबकारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाती है, फलस्वरूप दिखावे की कार्यवाहियां कर अपने काम की इतिश्री कर ली जाती है। आबकारी अधिनियम में कठोर दण्ड का प्रावधान करना और पालन करना चाहिए। दुकानों की संख्या में वृद्धि की जाकर ड्यूटी पेड मदिरा की उपलब्धता में वृद्धि की जानी चाहिए।

  • विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    सागर, 27 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य का बुन्देलखंड, विकसित बुन्देलखंड होगा। प्रदेश में उद्योगों के विकास का कार्य निरंतर जारी रहेगा। छोटे से छोटे उद्यमी की सहायता के लिए भी राज्य सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। केन-बेतवा परियोजना के क्रियान्वयन से बुन्देलखंड के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता की वृद्धि होगी, जिससे बुन्देलखंड क्षेत्र का स्वरूप बदल जायेगा। सागर में एयरपोर्ट का निर्माण होगा। इससे एविएशन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेगी। प्रदेश के कई स्थानों पर विमानन की गतिविधियों के लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, इससे रोजगार भी बढेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरआईसी सागर के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के अवसरों पर केन्द्रित लघु फिल्म “एडवांटेज एमपी” का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमपीआईडीसी के सागर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का वर्चुअल भूमि-पूजन किया। उन्होंने सागर संभाग के 6 जिलों सागर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर और दमोह में इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन सेंटर और संभागीय मुख्यालय में एमपीआईडीसी के रीजनल ऑफिस का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके साथ ही कोयंबटूर (तमिलनाडू) में एमपीआईडीसी के कार्यालय का भी वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर औद्योगिक क्षेत्र से सिंधगवां की जलापूर्ति के लिए नगर निगम सागर और एमपीआईडीसी के मध्य ट्रीटेड वाटर प्रदाय के लिए एमओयू का संपादन भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 96 औद्योगिक इकाइयों के आशय-पत्र जारी किए। इन इकाइयों को 240 एकड़ भूमि आवंटित की जाना है। इससे 1 हजार 560 करोड़ का पूंजी निवेश एवं 5 हजार 900 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुंदेलखंड इनोवेशन चैलेंज (हैकाथॉन) के विजेताओं बेम्बू वर्ल्ड के श्री सुजीत तिवारी, सेवा हब के श्री आशीष शर्मा, निम्बस गेमिंग के श्री विपुल सिंह परमार को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। जय अनाग गायत्री प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री निलय शर्मा को सर्वश्रेृष्ठ महिला उद्यमी के रूप में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर बुक ऑडियो के लिए सोशल मीडिया क्रिऐटर श्री राजीव यादव भी पुरस्कृत किए गए।
    क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र में मंगोलिया के राजदूत श्री गनबोल्ड डंबजाव, टीड्व्ल्यू के सीईओ श्री इंगो सोईलर, थाईलैंड के महावाणिज्यदूत श्री डोनाविट पूलसावत, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, मंत्री श्री लखन पटेल, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव और श्री भूपेन्द्र सिंह सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनसंपर्क विभाग द्वारा हिन्दी में प्रकाशित “मध्यप्रदेश संदेश” के अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया। इस अंक में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्यप्रदेश यात्रा, प्रदेश की पहली जनमन कॉलोनी शिवपुरी और अन्य उपलब्धियों का समावेश है। इस अवसर पर सचिव तथा आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर निवेश से स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इस कॉन्क्लेव से पूरा संभाग लाभान्वित होगा। संभाग के सभी जिलों में उद्योग तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। बीना में कई इकाइयां आएंगी। साथ ही 120 करोड़ की लागत से पेट्रोलियम क्षेत्र में भी निवेश हो रहा है। प्रदेश में सागर में चलने वाले डेटा सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। यह 1700 करोड़ का निवेश है और इससे लगभग एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नये 6 लेन और 4 लेन मार्गों का लाभ भी बुन्देलखंड क्षेत्र को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश आ रहा है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार सहयोग प्रदान कर गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। खनिज क्षेत्र में भी बुन्देलखंड सहित संपूर्ण प्रदेश में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुन्देलखंड ने कला, संस्कृति, वीरता से इतिहास में अपना स्थान बनाया है। इस क्षेत्र में चांदी का कार्य करने वालों, बीड़ी तथा अगरबत्ती उद्योग से जुड़े लोगों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा। सागर में चांदी से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने क्लस्टर विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय कॉन्क्लेव से स्थानीय स्तर पर नई इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से स्थानीय गतिविधियों के साथ प्रदेश स्तर पर महत्व रखने वाले उद्योगों की स्थापना को भी गति देने में मदद मिल रही है।
    खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है और उनका सपना साकार हो रहा है। सागर के पुराने अगरबत्ती और बीड़ी उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल भी हुई है। कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में नागरिकों को सुविधा देने के प्रयोग किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर अंचल में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से बुन्देलखंड अंचल को नई पहचान मिलेगी।
    एमएसएमई मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और दूरदर्शिता से ही क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन संभव हो पा रहे हैं। इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के लिए उत्साह का वातावरण बन रहा है। यह देश में अपनी तरह का अनूठा नवाचार है। इससे कृषि पर निर्भर उद्योगों के साथ व्यापार, व्यवसाय की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है।
    सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि बुन्देलखंड अंचल में खनिज, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। खजुराहों को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे है
    पेसिफिक मेटा-स्टील के श्री जे. पी. अग्रवाल ने कहा कि वे निवाड़ी में 3200 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगा रहे हैं। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रतिवर्ष लगभग 1 हजार करोड़ का राजस्व भी शासन को प्राप्त होगा। उन्होंनें मध्यप्रदेश में मेडीकल क्षेत्र में भी गतिविधियां आरंभ करने की योजना सांझा की।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की निवेशकों ने सराहना की। कॉन्क्लेव में आए बंसल समूह के श्री सुनील बंसल ने कहा कि चिकित्सा उद्योग क्षेत्र में बंसल समूह कार्य कर रहा है। सागर में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा समूह द्वारा प्रारंभ की गई है। श्री बंसल ने प्रदेश में 4 सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पीटल, एक पांच सितारा होटल और ऊर्जा क्षेत्र में 1350 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया।
    सागर ग्रुप के उद्योगपति श्री सुधीर अग्रवाल ने कहा कि भोपाल के पास तामोट में उनकी इकाइयां कार्य कर रही हैं। टेक्सटाईल क्षेत्र में नए निवेश के प्रयास सागर ग्रुप कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा, मकान सभी क्षेत्रों में ग्रुप कार्य कर रहा हैं। उनके समूह की डाईंग एण्ड प्रोसेसिंग क्षेत्र में लगभग 1400 करोड़ रूपये के निवेश की योजना है, इससे रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। उन्होंने कहा कि उनका समूह कॉम्पटीशन नहीं, को-आपरेशन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
    मध्य भारत एग्रो के श्री पंकज ओसवाल ने कहा कि उनके समूह का सर्वाधिक निवेश मध्यप्रदेश में है। निवेश की उद्योग मित्र नीति तथा शासन का सहयोगी रवैया अतुलनीय है। उनका समूह सागर में सिंगल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन कर रहा है। श्री ओसवाल ने बताया कि उनके समूह की सागर के बंडा के पास 500 करोड़ रूपये निवेश की योजना है।
    प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में 3 संभागीय कॉन्क्लेव के बाद आज सागर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही है। बैंगलुरू, कोयम्बटूर, मुम्बई और कोलकाता में इंटरैक्टिव सेशन भी इस वर्ष संपन्न हुए हैं। मध्यप्रदेश औद्योगिक दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, यहाँ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया हैं। अनेक क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की प्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं। अधोसंरचना की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होने से निवेशकों के लिए प्रदेश अनुकूल है। राज्य सरकार की उद्योग नीतियों से उद्योगपति मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए इच्छुक रहते हैं।
    अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए तैयार की गई राज्य की नीतियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर स्थापना की दृष्टि से मध्यप्रदेश सर्वाधिक अनुकूल प्रदेश है। श्री दुबे ने आईटी क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
    प्रमुख सचिव खनिज श्री संजय कुमार शुक्ला ने प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा और संचालित उद्योगों की विस्तार से जानकारी दी। श्री शुक्ला ने मध्यप्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सभी विभागों से जुड़ी अनुमतियां आसानी से प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि 17-18 अक्टूबर को भोपाल में खनन व खनिज गतिविधियों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का आयोजन प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि सागर की ढाना हवाईपट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
    एम.डी. पर्यटन श्री इलैया राजा टी. ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से बड़ी संख्या में प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सचिव सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम श्री नवनीत मोहन कोठारी ने कुटीर उद्योगों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रबंध संचालक हस्तशिल्प विकास निगम श्री मोहित बुन्दस ने मध्यप्रदेश में कुटीर उद्योग क्षेत्र में विद्यमान अवसरों के बारे में जानकारी दी। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

  • बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    -आलोक सिंघई-

    पिछले 36 सालों से बीड़ी उद्योग के कथित सहकारीकरण और सुधारों ने राज्य के लाखों मजदूरों को लाचार बना दिया है ।जिन मजदूरों को साल भर बीड़ी बनाने का रोजगार मिलता था वह लगभग समाप्त हो गया है। राज्य को अपने श्रमबल से होने वाली आय समाप्त हो चुकी है। तंबाखू की खपत सिगरेट और गुटखे से जारी है अंग्रेजों की बनाई आईटीसी कंपनी अपनी सिगरेट बेचकर मुनाफा कमा रही है ।  तेंदूपत्ता मजदूरों को बोनस बांटने का शिगूफा छेड़कर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और उसके बाद उनके अनुचरों ने सरकारों में शामिल होकर बीड़ी मजदूरों के साथ जो छल किया उसके पटाक्षेप का समय अब नजदीक आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही जीरो बैलैंस वाले  बैंक खाते खुलवाकर गरीब श्रमिकों को पहली बार बैंकों की चौखट तक पहुंचाया था। अब श्रमिकों के पंजीयन के बाद पीएफ खाते खोलकर मजदूरों का भविष्य सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मुताबिक देश में रोजगार की संख्या बढ़ी है,ऐसे में मध्यप्रदेश की डाक्टर मोहन यादव सरकार ने सागर में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करके बीड़ी उद्योग को प्रबंधित करने का जो मन बनाया है वह तारीफ के काबिल लगता है।

             तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों में धूम्रपान की लत बरकार है । भारत के साथ पाकिस्तान, श्रीलंका,नेपाल, म्यांमार, जैसे कई पडौसी देश भी लोगों की धूम्रपान की जरूरतों को पूरी करने के लिए अपना बाजार खोले बैठे हैं । ऐसे में बीड़ी हमेशा से सिगरेट की राह में अडंगा बनी हुई है । मध्यप्रदेश इस मायने में सौभाग्यशाली है  कि इसके जंगलों में तेंदूपत्ता बहुतायत से पाया जाता है। कथित सहकारीकरण के पहले राज्य के जंगलों से लगभग अस्सी लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता तोड़ा जाता था। जब से लघुवनोपज संघ ने ये काम संभाला तबसे तेंदूपत्ते के संग्रहण में लगातार गिरवट आती रही है । आज संघ का संग्रहण लक्ष्य ही  16 लाख मानक बोरा बचा है । जंगलों का रखरखाव घटने से तेंदूपत्ते की गुणवत्ता भी धराशायी  गई है। ये सारा षड़यंत्र कथित तौर पर आईटीसी कंपनी की छोटी सिगरेट को लाभ पहुंचाने की मंशा से रचा गया था।

         स्वर्गीय अर्जुन सिंह जब खुद को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे तब उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लुटियन गेंग को खुश करने के लिए छोटी सिगरेट का मार्ग प्रशस्त किया था।कांग्रेस के ही उनके करीबी बताते हैं कि कंपनी ने उन्हें अपना पार्टनर बना लिया था।ऐसे में राज्य को अपना कारोबार गंवाने की मंहगी कीमत चुकानी पड़ी। उनके बाद आए तमाम मुख्यमंत्रियों ने इस बर्रों के छत्ते में हाथ नहीं डाला। दिग्विजय सिंह जैसे पुतला पूजने वाले शासक हों या फिर शिवराज सिंह जैसी लंबी पारी खेलने वाले मुख्यमंत्री सभी साहब की लाबी का हाथ पकड़कर चलते रहे। अर्जुन सिंह से उपकृत स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा हों या उनकी भजन मंडली के बाबूलाल गौर, कैलाश नारायण सारंग सभी ने सिगरेट की राह में अड़ंगा न लगाने की परिपाटी जारी रखी।बाद में तो विश्वास सारंग पर लघु वनोपज संघ में खुद को श्रमिक के तौर पर पंजीकृत करवाने का आरोप भी लगा।  शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की तो क्या बिसात थी कि वे कोई स्वतंत्र फैसला ले सकते। उनके मंत्रिमंडल में  शामिल रहे पंडित गोपाल भार्गव ने दिग्विजय सिंह सरकार के सामने खूब उछलकूद मचाई और बीड़ी कारोबार को व्यवस्थित करने की नौटंकी भी की। दिग्विजय सिंह ने उन्हें बीड़ी कारोबार के अध्ययन के लिए कई राज्यों की सैर भी कराई इसके बाद वे भी सिगरेट लाबी की गोदी में जाकर बैठ गए। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपना मुंह बंद रखा। अब जबकि रोजगार के साधन बढ़ाने की मुहिम देश भर में चलाई जा रही है तब वे आगे आकर बीड़ी उद्योग की पुरानी सूरत लौटाने की आवाज उठाने लगे हैं।

            जब अर्जुनसिंह जी इस कारोबार को लपेटना चाह रहे थे  तब उनके वामपंथी सहयोगियों और मजदूर नेताओं ने खूब शोरगुल मचाया कि बीड़ी मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें ज्यादा मजदूरी मिलनी चाहिए। इस शोरगुल में उन्होंने बीड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी और तेंदूपत्ते के राष्ट्रीयकरण की आड़ में लघु वनोपज संघ के माध्यम से तेंदूपत्ते का कारोबार भी छीन लिया। कहा गया कि इस तेंदूपत्ते को बेचकर राज्य की आय बढ़ाई जाएगी और पत्ता संग्राहकों को बोनस भी बांटा जाएगा। तबसे लेकर हर साल बोनस बांटने की नौटंकी की जाती रही है। जब पत्ता एक्सपोर्ट होने लगा तो जिस बीड़ी मजदूर को साल भर रोजगार मिलता था वो छिन गया। मजदूरी बढ़ने से बीड़ी कारोबार की कमर टूट गई और यह धंधा पश्चिम बंगाल पहुंच गया।

           बीड़ी सेठ तो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष भी हुआ करते थे लेकिन अर्जुन सिंह के सामने उनकी एक न चली। बीड़ी श्रमिकों के नेताओं ने शोषण और अत्याचारों की ऐसी कहानियां गढ़ीं और सुनाईं कि बीड़ी कारोबारियों को खलनायक बना दिया गया। जिन परिवारों ने अपनी पीढ़ियों की साधना के बल पर गांव गांव में अपनी शाखाएं खोलीं और सट्टेदार स्थापित करके बीड़ी बनवाने व उसे एक्सपोर्ट करने का कारोबार विकसित किया वह शनैःशनैः धराशायी हो गया। बेशक बीड़ी कारोबारियों के कई सट्टेदार शोषण करके बीड़ी छांट देते थे और इस छंटी हुई बीड़ी की मजदूरी काट लेते थे। इस बीड़ी को बाद में नकली लेवल लगाकर बाजार में पिछले दरवाजे से बेच दिया जाता था। शोषण के कई तरीके विकसित किए गए थे लेकिन उन्हें पूरी शह सरकारी तंत्र की थी। रिश्वत लेकर सरकारी अमला मजदूरों के शोषण की राह प्रशस्त करता रहा और मुनाफा कूटता रहा। निश्चित तौर पर शोषण रोकना सरकार की जवाबदारी थी। तब आनलाईन खातों की व्यवस्था भी नहीं थी। मजदूरी नकद दी जाती थी। ऐसे में मजदूरों खासतौर पर महिलाओं का शोषण भी आम था। इन्हें रोकने की सख्ती करने के बजाए फैक्टरी की सिगरेट बाजार में उतारकर पूरा कारोबार धराशायी कर दिया गया।

            आज जब सभी धंधों के कार्पोरेटीकरण से निजीकरण की सीमाओं और सरकारीकरण की धूर्तताओं से अलग हटकर कारोबार को व्यवस्थित करने की सुविधा आ गई है। मजदूरी को व्यवस्थित करने की आनलाईन सुविधा आ गई है तब बीड़ी कारोबार पर नए संदर्भों में विचार किया जाना अनिवार्य हो गया है। सरकार जब एक क्लिक से किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना जैसी बहुउद्देश्यीय योजनाएं सफलता पूर्वक चला रहीं हैं तब श्रमिकों को उनके खातों के साथ देश के पूंजी निर्माण में पार्टनर बनाना सरल हो गया है। बीड़ी कारोबार हो या असंगठित क्षेत्र का खेतीहर मजदूर सभी को आनलाईन प्लेटफार्म पर जोड़ना जरूरी है। मध्यप्रदेश से जो बीड़ी कारोबार पश्चिम बंगाल, या आंध्रप्रदेश शिफ्ट हो चुका  है उसे एक बार फिर राज्य में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य  हो गया है।कथित सहकारीकरण का मॉडल फेल घोषित होने के बाद तो अब तय हो गया है कि बीडी़ का धंधे को कुचलकर राजनेताओं ने मजदूरों की रीढ़ तोड़ने का षडयंत्र किया था। बीड़ी कारोबारी परिवार से आए सागर के विधायक शैलैन्द्र जैन कहते हैं कि लंबी उपेक्षा के बाद तमाम बीड़ी कारोबारियों ने दूसरे धंधे शुरु कर दिए हैं और बीड़ी का कारोबार बंद कर दिया है ऐसे में इस कारोबार की पुरानी सूरत कैसै लौटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही मिल श्रमिकों के कल्याण के लिए जो ठोस फैसले लिए थे उन्हें देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिए कि खासतौर पर बुंदेलखंड के बीड़ी श्रमिकों के हित में भी वे बगैर किसी दबाव के फैसले ले सकेंगे। सागर में आयोजित इन्वेस्टर समिट में कम से कम यह एक ठोस फैसला लिए जाने की तो उम्मीद की ही जा सकती है।

  • दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    भोपाल, 25 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर के युवाओं ने गुणवत्ता युक्त दवाओं के निर्माण में नए कीर्तिमान स्थापित करके प्रदेश का नाम रोशन किया है। राज्य में बनाई जा रहीं कई जीवन रक्षक दवाएं वैश्विक बाजारों में साख अर्जित कर रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने फार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए जो उपाय किए हैं उनके नतीजे मिलने शुरु हो गए हैं। जल्दी ही प्रदेश के फार्मेसिस्ट अपनी रचनाधर्मिता से राज्य को औषधि निर्माण,विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर एक विशेष मुलाकात में काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस क्षेत्र की कई बारीकियों की जानकारी दी।


    काउंसिल के अध्यक्ष संजय कुमार जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में फार्मासिस्ट का औषधि निर्माण हॉस्पिटल मेडिकल स्टोर शोध कार्य एवं कई विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान है। काउंसिल अपने मापदंडों के अनुरूप फार्मेसी के क्षेत्र में कार्य कर रही है और भविष्य में भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।इन्हें जल्दी लागू किया जाएगा।


    काउंसिल की सचिब एवं रजिस्ट्रार सुश्री दिव्या पटेल ने कहा कि काउंसिल के माध्यम से फार्मेसी के छात्रों को कम समय में फार्मेसी के रजिस्ट्रेशन प्रदान करने का प्रयास किए जा रहे हैं। काउंसिल के अध्यक्ष एवं सचिव ने विश्व फार्मेसी दिवस पर सभी को अपनी शुभकामनाएं प्रकट की।


    कार्यक्रम का संचालन एवं आभार काउंसिल के ही गोपाल यादव ने किया । उन्होंने बताया कि आए हुए आवेदनों पर सक्रियता से फैसले लिए जा रहे हैं।

  • सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    भोपाल, 17 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत 50 जिलों के जिला अस्पतालों में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से मेडिकल स्टोर का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कर कमलो से संपन्न हुआ
    कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया गया।

    इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय राजेंद्र शुक्ल ,नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजय वर्गीय,श्रीमती कृष्णा गौर, विश्वास सारंग,विजय शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद बी डी शर्मा भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गण , सांसद , विधायक गण मध्य प्रदेश शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस अवसर पर भोपाल में जनऔषधि केन्द्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    संजय जैनःमध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी काऊंसिल, जनोपयोगी दवाओं के लिए फार्मासिस्टों का मार्गदर्शन कर रही है।


    मध्य प्रदेश शासन की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव संदीप यादव भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के प्रदेश संयोजक संजय जैन ने बताया कि देश में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बन गया है जहां हर जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना का मेडिकल स्टोर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काऊंसिल ने सभी जन औषधि केन्द्रों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काऊंसिल की पंजीयन प्रणाली में विशेष सुविधा का प्रावधान किया है। आम जनता को सस्ती दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें इसके लिए काऊंसिल की तरफ से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।नए फार्मासिस्टों को उन आवश्यक दवाओं की सूची उपलब्ध कराई जा रही है जिनके माध्यम से जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाएं दिलाकर राहत दिलाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दवाओं की कालाबाजारी और मंहगी दवाओं के मकड़जाल से मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र परियोजना शुरु की थी जिसके संकट में फंसे आम नागरिकों की आंखों में धूल झोंकने वाले दवा माफिया को नियंत्रण में करना सरल हो गया है।


    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागरसिंह चौहान ने आज अलीराजपुर से स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने अलीराजपुर में जन औषधि केन्द्र का शुभारंभ भी किया।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जिले को जन औषधि केन्द्र का वर्चुअल शुभारंभ कर जिले को सौगात दी है। उन्होंने कहा कि औषधि केन्द्र के माध्यम से आम नागरिकों को 2000 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां प्राप्त होगी और 300 से अधिक सर्जिकल उपकरण भी उपलब्ध होंगे जो गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी होंगे, जिनकी कीमत बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होगी।


    मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की अनुपम सोच के कारण आज हर जरूरतमंद को कम कीमतों में दवा उपलब्ध होगी। निश्चित ही आदिवासी अंचलों के साथ- साथ शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी जन औषधि केंद्र का लाभ मिलेगा ।
    इस अवसर पर सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान, कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सुनहरे सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  • हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा  भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    भोपाल,16 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितम्बर से शुरू हो रहे स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन सभी जिला चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह कदम प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्र का शुभारम्भ, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शन सेंटर में सुबह 10 बजे आयोजित होने वाले समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2015 के बाद से इस योजना में और गति आयी। इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ती दवाइयों की पहुंच को व्यापक बनाना था। वर्तमान में इस परियोजना में देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ उठा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 500 से अधिक जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित हैं। ये केंद्र शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जिससे सभी नागरिकों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खरीद रहे हैं। उनके मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत हो रही है। अब सभी ज़िला चिकित्सालयों में भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं।

    सभी को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है। मरीजों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम दाम पर दवाइयां उपलब्ध होंगी।

    ग्रामीण और शहरी परिवारों को सस्ती दवाइयां मिलेंगी। मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी।

    सस्ती और सुलभ दवाओं के माध्यम से लोग अपने उपचार को निरंतर जारी रख सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के माध्यम से जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जिससे लोग ब्रांडेड दवाओं पर निर्भरता कम करेंगे और सस्ती जेनेरिक दवाओं को अपनाएंगे।

    स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। प्रत्येक केंद्र के चालन के लिए फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी आवश्यक होंगे, जिससे राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र राज्य में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन इसी स्थान पर प्रात: 10:30 बजे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में देश के 4 लाख आवासों का गृह प्रवेश कार्यक्रम होगा। इनमें मध्यप्रदेश के 51 हजार आवासों में गृह प्रवेश होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2-0 का शुभारंभ तथा पीएम स्वनिधि अंतर्गत पीआरएआईएसई अवार्ड वितरित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास श्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि होंगे। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी अध्यक्षता करेंगी। भोपाल नगर पालिग निगम की महापौर श्रीमती मालती राय, नगर पालिग निगम भोपाल के परिषद अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

  • इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष

    इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष


    भोपाल,05 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).इक्विटास बैंक ने आधुनिक बैंकिंग में जो सुधार लागू किए हैं वे देश के संपदा निर्माताओं को बहुत पसंद आ रहे हैं। बैंक की वर्षगांठ पर पहुंचे नागरिकों उद्यमियों और श्रेष्ठी वर्ग ने इक्विटास बैंक को जन जन का बैंक बनने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बैंक के ऊर्जावान कर्मचारियों ने निवेशकों की जरूरतों पर खरा उतरने के लिए जो रुचि दिखाई है उससे आने वाले समय में ये बैंक प्रदेश भर में ग्राहकों की पहली पसंद बन जाएगा।


    इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर राजधानी की एमपीनगर शाखा में प्रबंधन ने जीवंत आयोजन किया था जो लगभग दिन भर चला। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने सभी ग्राहकों,उद्यमियों और निवेशकों को बैंक की प्रगति के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अपनी आनलाईन सेवाओं के माधयम से देश की संपदा बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। देश के अठारह राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में हमारी 964 शाखाएं हैं जिनमें 57 लाख 22 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।


    भोपाल शाखा के प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हम अपनी ग्राहक हितैषी बैंकिंग के माध्यम से आम नागरिकों का दिल जीत रहे हैं। ग्राहकों की छोटी छोटी सुविधाओं को हम तत्काल समाधान देकर उनका उचित मार्गदर्शन भी करते हैं। ग्राहकों के बताए अनुसार हम अपनी सेवाओं में लगातार सुधार और विस्तार भी कर रहे हैं। हमारा प्रबंधन हर निवेश की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखता है जिसकी वजह से हम देश के बैंकिंग मानकों पर लगातार खरे उतर रहे हैं।

    बैंक के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं की वजह से ग्राहक सेवा सफल हो रही है.


    राजधानी के गणमान्य नागरिकों और श्रेष्ठि वर्ग ने बैंक पहुंचकर वर्षगांठ के आयोजन में हिस्सा लिया। दीप प्रज्जवलन के बाद केक काटा गया और सभी ने इक्विटास बैंक की सफलताओं की कहानियां सुनाईं। श्री मनोहर लाल टोंग्या ने कहा कि बैंक के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार और बैंक की सरल योजनाओं की वजह से हमें ज्यादा मुनाफा हो रहा है। बैंक में अनावश्यक नियमों का बोझ नहीं है। वरिष्ठ जनों को तो घर पहुंच सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्यादातर काम बैंक के एप से निपट जाते हैं इसलिए हमें बार बार शाखा जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।


    कार्यक्रम में पहुंचे श्री महावीर मेडीकल कालेज के प्रशासक आईएएस राजेश जैन ने कहा कि बैंक के नीति निर्धारकों ने उद्यमियों की सुविधा के लिए जो आधुनिक बैंकिंग दी है उससे संपदा निर्माण में मदद मिल रही है। श्री देवेन्द्र जैन ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को मुनाफे का हिस्सेदार बना रहा है और इसके साथ साथ समाज कल्याण की भी योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। आयोजन में पहुंचे श्री कमलेश सेन, श्रीमती प्रीति टोंग्या, श्री डी.आर.सोनी श्री सुरेश चंद्र प्रमोद सिन्हा, श्री देवेन्द्र जैन, श्री महेश सिंघल, सुरेश जैन आईएएस, श्री त्रिलोक जाजू, श्री प्रवीण कुमार सक्सेना, सीए मयंक अग्रवाल के अलावा बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिकों ने बैंक पहुंचकर अपना स्नेह प्रदर्शित किया।


    क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने अपने स्टाफ के साथ ग्राहकों के प्रति आभार प्रकट किया और उन्हें कहा कि आपके बताए सुझावों पर अमल करके बैंक ग्राहकों को अपने मुनाफे में भागीदार बनाता रहेगा। इस अवसर पर सागर मल्टिसिटी हास्पिटल के सौजन्य से हेल्थ चैकअप शिविर भी आयोजित किया गया। जिसमें नागरिकों के रक्तचाप और डायबिटीज की मुफ्त जांच की गई।

  • निवेशकों को भा गया मध्यप्रदेश बोले मुख्यमंत्री

    निवेशकों को भा गया मध्यप्रदेश बोले मुख्यमंत्री

    भोपाल,28 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में हो रही इन्वेस्टर समिट में, अब तक हुई सभी इन्वेस्टर समिट से बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है। क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के विभिन्न भागों में की जा रही इन्वेस्टर समिट के परिणाम प्रोत्साहित करने वाले हैं। उद्योग समूहों और निवेशकों ने मध्यप्रदेश सरकार पर भरोसा जताया हैं, राज्य सरकार उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतरने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन के लिए लागू की गई नीतियों और व्यवस्थाओं के प्रति उद्योगपति और निवेशक विश्वास व्यक्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एम्स भोपाल के परिसर में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह बात कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर समिट प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के उद्योगपति भी अपनी गतिविधियों को विस्तार दें और प्रदेश के युवा अपने उद्यम आरंभ करें। राज्य सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है। राज्य सरकार ने उद्योग और उद्यमशीलता में युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए आरंभ किये गये विशेष अभियान अंतर्गत गतिविधियां जारी है। समिट जीडीपी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। समिट में शिक्षा, एमएसएमई, भारी उद्योग और कृषि अभियांत्रिकी सहित सभी सेक्टर को शामिल किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से वे अगले माह सितंबर में कोलकाता में रोड-शो करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 27-28 सितंबर को सागर और अक्टूबर में रीवा में भी इन्वेस्टर समिट होगी। प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नवंबर माह में उनकी विदेश यात्रा भी प्रस्तावित है।

  • फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन

    फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन


    भोपाल,15 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि राज्य सरकार फार्मा उद्योग की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान रख रही है और जल्दी ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्वाधीनता दिवस आयोजन में राष्ट्रध्वज फहराने पहुंचे श्री संजय जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भारत सरकार के आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं जिससे जनता को राहत मिलेगी।


    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के परिसरों में झंडा वंदन के दौरान देशभक्ति के भाव से सराबोर उद्यमियों ने जोरदार नारे लगाकर राष्ट्र की आराधना की। श्री संजय जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह राजनीति को परिवार की बपौती बनाने वालों को चुनौती देने के लिए आम नागरिकों से राजनीति में आने का आव्हान कर रहे हैं उसी तरह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सत्ता माफिया पर चोट करके प्रदेश की तरुणाई को मुख्य धारा में लाने का अभियान चला रहे है। देश नई करवट ले रहा है इसलिए मध्यप्रदेश में के दवा निर्माताओं और व्यापारियों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री राजेन्द्र शुक्ल के माध्यम से प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का केंद्र प्रारंभ करने के लिए एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। श्री शुक्ल ने फार्मेसी की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए फार्मेसी काऊंसिल के माद्यम से देश और प्रदेश स्तर पर फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए कई योजनाएं बनवाई हैंं। इसका लाभ नई पीढ़ी के फार्मासिस्टों को मिलेगा।


    उन्होंने कहा कि भारत के दवा उद्योग को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के दवा निर्माता और व्यापारी आम जनता को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के प्लेटफार्म पर भी मध्यप्रदेश में निर्मित दवाओं ने अपनी भागीदारी शुरु कर दी है। इस देशव्यापी नेटवर्क से हम राज्य और देश के लिए पूंजी निर्माण का अनुष्ठान कर रहे हैं. इसमें आम फार्मासिस्ट और दवा निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।


    श्री जैन ने कहा कि कुछ इलाकों में फार्मासिस्टों को पंजीयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है ।काऊंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार शुरु किए हैं। जल्दी ही आम फार्मासिस्टों को कई सुविधाएं घर बैठे पारदर्शी तरीके से मिलने लगेंगी।
    फार्मेसी काऊंसिल के झंडा वंदन कार्यक्रम में श्री संजय जैन के साथ काऊंसिल के उपाध्यक्ष श्री राजू चतुर्वेदी और फार्मेसी काऊंसिल की रजिस्ट्रार सुश्री माया अवस्थी ने भाग लिया। काऊंसिल के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यापारियों को सम्मानित किया गया। मप्र फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने लगभग पचहत्तर वर्ष से अधिक उम्र के केमिस्टों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़, सचिव विवेक खंडेलवाल, अनिल कुमार जैन,राहुल नगाइच, सुहाग सिंह तोमर, अनिरुद्ध पारे, विक्रम शेरवानी, मनोज शर्मा, सुनील कुमार गुप्ता एवं दवा बाजार और राजधानी के दवा व्यापारी भी उपस्थित थे।

  • सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया

    सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया


    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सोलर बिजली प्लांट लगाने के लिए जो सब्सिडी देने की योजना चलाई गई है उसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगाना शुरु कर दिए हैं और उस बिजली से वे घरों को रोशन करने के साथ साथ मुफ्त परिवहन का भी आनंद उठा रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस परियोजना पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। एनडीए सरकार इस अभियान में हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने के साथ-साथ 1 करोड़ घरों को रोशन करके भारत की ऊर्जा जरूरतों का नया इतिहास लिखने जा रही है।
    पब्लिक रिलेशंस सोसायटी आफ इंडिया,भोपाल ने इस विषय पर आज एक सेमिनार का आयोजन किया। इसमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के उप मुख्य महाप्रबंधक (एनएसई) सौरभ श्रीवास्तव ने एक समारोह में बताया कि वे किस तरह इस योजना में सब्सिडी का लाभ लेकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकते हैं और बिजली कंपनी को अतिरिक्त बिजली बेचकर अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी के पोर्टल और वेवसाईट पर इस योजना की लिंक दी गई है। इस पर आवेदन करके घर बैठे वे अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगवा सकते हैं। सरकार एक किलोवाट बिजली प्लांट पर तीस हजार रुपए ,दो किलोवाट के बिजली प्लांट पर साठ हजार रुपए और तीन किलोवाट बिजली प्लांट पर 78 हजार रुपए सब्सिडी दे रही है। इससे ज्यादा क्षमता वाले बिजली प्लांटों पर सब्सिडी 78 हजार रुपए ही रहेगी।
    उन्होंने बताया कि इन घरेलू बिजली प्लांटों से प्राप्त बिजली से घर की लाईट ,एसी ,गीजर और हीटर भी चलाए जा सकते हैं। इस बिजली से इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी भी चार्ज की जा सकती है। इससे बिजली के साथ परिवहन के ईंधन की भी बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ईंधन के आयात पर हर साल लाखों करोड़ रुपए खर्च करती है। घरेलू बिजली से जहां पर्यावरण की रक्षा की जा सकेगी वहीं देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि काफी अनुसंधान के बाद ऐसे फोटो वोल्टिक सेल भी अब बाजार में आने लगे हैं जिनसे बादलों की मौजूदगी के बीच भी बिजली बनाई जा सकती है।
    वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ये महत्वाकांक्षी योजना है। लोगों को आगे बढ़कर इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। इस योजना के अधिक प्रचार प्रसार की भी जरूरत है जिससे लोग अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
    इस परियोजना से जुड़े मोंटाज इंफ्रा पावर प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि अब देश में ही निर्मित उच्च क्वालिटी के सोलर पैनल अधिक बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। सोलर पैनलों के छाया वाले पृष्ठ पर भी अब ऐसे फोटो वोल्टिक सेल लगाए जाते हैं जो आसपास की धूप से भी बिजली का उत्पादन करते हैं। इससे सोलर प्लांटों की क्षमता में इजाफा हुआ है। भारत में लगभग तीन सौ दिनों तक धूप उपलब्ध होती है। इससे बिजली का उत्पादन सरलता से हो जाता है।
    कार्यक्रम के आयोजक और पीआरएसआई के अध्यक्ष मनोज द्विवेदी ने कहा कि भारत सरकार की इस योजना पर मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने गंभीरता से अमल शुरु किया है। इससे प्रदेश की बिजली की मांग को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। आगे आने वाले समय में हम सोलर बिजली का ऐसा नेटवर्क तैयार करने में सफल होंगे जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। पीआरएसआई के सचिव पंकज मिश्रा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था के कोषाध्यक्ष के.के.शुक्ला ने अतिथियों के सत्कार और गोष्ठी की व्यवस्था का दायित्व संभाला।

  • विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश

    विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश


    डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन और उसके बाद प्रदेश को मुखिया के रूप में मिले डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री के पद पर रहते अभी पूरे छह माह भी नहीं बीते हैं कि एक के बाद एक उनके निर्णयों ने हर क्षेत्र में राज्य की गति को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है।

    यह स्वभाविक है कि किसी भी राज्य के विकास में सबसे अहम भूमिका, शासन, प्रशासन और जनता के बीच के समन्वय की होती है । लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तब तक सफल नहीं होती, जब तक कि ये तीनों ही आपस में समन्वय के साथ कार्य करते हुए नहीं दिखते हैं । जब ये तीनों के बीच समन्वय होता है तो देश एवं प्रदेश की आर्थिक उन्नति होती है और आर्थिक गति आने से राज्य के हर नागरिक के जीवन में भौतिक सुख एवं उससे मिलनेवाले आध्यात्मिक सुख की वृद्धि होती है।

    मध्य प्रदेश में आज जो नई भाजपा की मोहन सरकार में दृश्य उभरा है, वह राज्य के नागरिक की जेब से जुड़ा हुआ है, बाजार से आप कोई वस्तु एक उपभोक्ता के रूप में तभी खरीदते हैं, जब आपकी पॉकेट इसकी अनुमति देती है। यदि आपका कोई आर्थिक संग्रह नहीं या आपकी आय पर्याप्त नहीं है तब आप चाहकर भी कोई वस्तु स्वयं के लिए और अपने परिवार जन, कुटुम्ब, बन्धु-बान्धवों के लिए नहीं खरीद पाते हैं, किंतु इस संदर्भ में मध्य प्रदेश में जो खुशी की बात वर्तमान में है, वह यह है कि राज्य में निवास कर रहे लोग खुलकर बाजार से खरीदारी कर रहे हैं और प्रदेश की सकल घरेलू आय (जीडीपी) बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं ।

    स्वभाविक है यदि राज्य में सरकार की सोच एवं कार्य लोककल्याणकारी नहीं होते तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने के साथ लगातार नवाचार करने में यदि भाजपा की मोहन सरकार कहीं कमजोर होती तो आज यह दृष्य उभरकर कभी सामने नहीं आता। यही कारण है कि देश में आज मध्य प्रदेश अपनी बड़ी आबादी के बाद भी उच्च पूंजीगत व्यय में या कहना होगा कि लग्जरी वस्तुओं की अधिक खपत के कारण राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह में, कहीं अधिक वृद्धि करने में भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे रहने में कामयाब हुआ है ।

    भारत में विनिर्माण के लिए पीएलआई, राज्य प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति के तहत लाभ जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट कानूनों सहित अधिकांश करों पर ग्राहकों को पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सलाह दे रहे केपीएमजी संस्थान के राष्ट्रीय प्रमुख अभिषेक जैन की इस संबंध में कही बातों पर हमें गौर करना चाहिए, वे कहते है कि किसी राज्य के जीएसटी की वृद्धि और गिरावट का सटीक कारण बताना कठिन है, कर संग्रह दरों को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। चूंकि जीएसटी एक उपभोग-आधारित कर है, इसलिए एसजीएसटी दरें उपभोग पैटर्न में बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं। उच्च आर्थिक क्रय शक्ति वाले राज्य और जनसंख्या आमतौर पर एसजीएसटी संग्रह को प्रभावित करने वाले कारक हैं। कई अन्य कारक भी एसजीएसटी में योगदान दे सकते हैं, जैसे सरकारी नीतियों या विनियमों में बदलाव जो राज्य में निवेश को गति देता है। अन्य प्रकार के सरकारों के सफल आर्थिक प्रयास अधिकांशत: जीएसटी की वृद्धि के कारण बनते हैं।

    इस दिशा में कहना होगा कि यह मोहन सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक और सही निर्णयों का ही प्रतिफल है जोकि मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में साल-दर-साल सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह में सफलता हासिल की है। पिछले वित्तीय वर्ष में दर्ज की गई 15.93 प्रतिशत की वृद्धि जहां मप्र ने अपने खाते में दर्ज की थी, वहीं, अभी उसने 19.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर न सिर्फ अपने ही रिकार्ड को तोड़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्यावाले राज्य जहां माल की खपत भी स्वभाविक तौर पर अधिक हैै, उसे भी पीछे छोड़ दिया है।

    आंकड़ों को देखें तो मध्य प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर वित्त वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 18.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी ने भी बीते एक वर्ष में एकदम से लगभग चार पायदान की छलांग लगाई है। 18.58 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना अगले क्रम में है। सूची में चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है, जिसका वास्तविक रूप से एक लाख करोड़ रुपये का सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह रहा है और वित्त वर्ष 24 में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखी है। दूसरी ओर गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, हरियाणा और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में 15 प्रतिशत से कम वृद्धि दर्ज होते दिख रही है।

    इसके साथ मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में अपने पूंजीगत व्यय में 97 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो आंशिक रूप से एसजीएसटी संग्रह में उछाल आगे ले जाने में सहायक रहा है। राज्य में बड़ी आबादी को रोजगार पाने एवं उन्हें मिलनेवाले वेतन में बढ़ोत्तरी को भी इससे जोड़कर देखा जा सकता है, प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की क्रय क्षमता इसके कारण से बढ़ जाती है । इससे किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलती है। मध्य प्रदेश के शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र ने भी इस बार कर संग्रह में एक बड़ी भूमिका निभाई है। जोकि यह समझता है कि राज्य में न सिर्फ शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय में लगातार अच्छी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश ने वाहन खरीदी में भी अपना एक नया रिकार्ड बनाया, यह भी आज प्रत्येक परिवार की आर्थिक समृद्धि को दर्शा रहा है।

    वस्तुत: इस मामले में आज ”बिजनेसलाइन” द्वारा देश के शीर्ष 15 राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन एवं उसकी रिपोर्ट मध्य प्रदेश के संदर्भ में एक उत्साह जगा रही है। यदि इसी तरह से मध्य प्रदेश आगे बढ़ता रहा तो जैसा अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सभा के दौरान कहा था कि भाजपा की सरकार मप्र को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएगी और इसके लिए हम संकल्पित हैं, तो कहना होगा कि उनका यह संकल्प साकार होने की दिशा में जरूर सफलता से आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है।
    (लेखक, फ‍िल्‍म सेंसर बोर्ड एडवाइजरी कमेटी के सदस्‍य एवं पत्रकार हैं)