भोपाल,14 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजा भोज विमान तल इन दिनों कई संदिग्ध गतिविधियों की वजह से संदेह के घेरे में आ गया है। संदिग्ध कर्मचारियों की घुसपैठ, हवाला तस्करों की आवाजाही और निर्माण संबंधी घोटालों की वजह से न केवल भोपाल बल्कि देशविदेश की हवाई यात्रा करने वालों के लिए ये विमानतल असुरक्षित होता जा रहा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और टाटा के स्वामित्व वाली इंडियन एयरलाईंस जैसी दो एजेंसियों के बीच तालमेल न बन पाने की वजह से कई असामाजिक तत्व भी हवाई यात्रा के मार्ग में विषकंटक बन गए हैं।
ताजा मामला एक संदेहास्पद कर्मचारी को घुसपैठ कराने और फिर उसे बचाने का सामने आया है। भोपाल एअरपोर्ट पर एआईएएसएल का कर्मचारी गुलरेज आठ दिन की छुट्टी पर था, वापस आया और बिना किसी परमिशन के चुपके से ड्यूटी आरंभ कर दी।उसकी ड्यूटी आरंभ कराने में एअर इंडिया के ही एक सीनियर असिस्टेंट नासिर खान ने मुख्य रोल निभाया । हाइली सेंसटिव एरिया माने जाने वाले इस एअरपोर्ट पर युद्ध की आशंका से अतिरिक्त सुरक्षा ऐहतियात बरते जा रहे हैं । इस गुलरेज नाम के कर्मचारी का एयरपोर्ट एंट्री पास खत्म होने के बावजूद नासिर खान ने इसकी सूचना अपने अधिकारियों को नहीं दी। यह 9 मई से लगातार बिना पास के नौकरी करता रहा।बाहर मई को एअर इंडिया के एक सुरक्षा कर्मचारी ने विमान पर ड्यूटी कर रहे गुलरेज का पास चैक किया तो वह सदमे में आ गया कि किसी भी हो जाने वाली वारदात के चपेटे में वह स्वयं भी आ सकता है। एअरपोर्ट पर केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी सीआईएसएफ की इतनी बड़ी चूक को अब छुपाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि गुलरेज खान के विरुद्ध कोई कार्रवाई केवल इसलिए नहीं की जा रही है क्योंकि एआईएएसएल के उत्तरी क्षेत्र का मुख्य अधिकारी अब्दुल गफ्फार खान है और नासिर खान, अब्दुल गफ्फार खान का खास कर्मचारी है।
एक अन्य मामले में एअर इंडिया का एक संदिग्ध अधिकारी पारेश गांधी भोपाल में पदस्थ था। उसे महिला कर्मचारियों का यौन शोषण, भ्रष्टाचार, हेराफेरी आदि केसों में तीसरी बार सस्पेंड किया गया है। इस मामले में इन दिनों विजिलेंस की जांच भी भोपाल एयरपोर्ट पर चल रही है।बताते हैं कि इसने अब्दुल गफ्फार खान के साथ लगभग डेढ़ साल पहले ग्वालियर एअरपोर्ट पर हुई भर्ती में खुलकर भ्रष्टाचार किया । इस भर्ती के लिए हुए इंटरव्यू में कुछ लड़के भोपाल के भी चुने गए थे। भ्रष्टाचार में डूबे इन अधिकारियों ने इन योग्य लड़कों की सूची रोक ली। कुछ दिनों बाद अब्दुल गफ्फार खान ने इन लड़कों के स्थान पर कई मुस्लिम युवकों को भर्ती करवा दिया। अब्दुल गफ्फार खान उत्तरी क्षेत्र का सर्व सर्वा है और उसने चुपके से हुई इन भर्तियों की भनक किसी को नहीं लगने दी।ये सभी कर्मचारी बगैर पहचान पत्र जारी हुए आज भी नौकरी कर रहे हैं। इस बात की जानकारी कई राष्ट्रीय स्तर के मुस्लिम नेताओं को भी दी गई लेकिन उन्होंने जातिगत शोरशराबे में इस पर अपनी आंखें मूंद लीं।
कतिपय कर्मचारियों का कहना है कि एक महिला अधिकारी का शारीरिक शोषण करके चुपके से छः छः महीने के अनुबंध पर भोपाल में ज्वाइनिंग दी गई थी,जब यह राज खुलने का अंदेशा हुआ तो से उस महिला अधिकारी को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। अब्दुल गफ्फार खान एयर इंडिया की उस ग्राऊंड हैंडलिंग कंपनी का मुखिया है जो पैंतीस हवाई अड्डों के प्रबंधन का कार्य संभालती है। यही वजह है कि छुटपुट सुगबुगाहट वहीं दबा दी जाती है। संदिग्ध कर्मचारी गुलरेज और अब्दुल गफ्फार खान के बीच क्या रिश्ता है ये व्यापक जांच में ही पता चल सकता है।सूत्रों का कहना है कि जब गुलरेज विमान पर बिना पास के पाया गया है और यह गतिविधी संदिग्धता की श्रेणी में आती है तो सीआईएसएफ ने उसपर केस दर्ज क्यों नहीं किया,उसपर थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।नासिर खान जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुपरवाइजर है, उसे निलंबित क्यों नहीं किया गया।
भोपाल,16 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की फूड एंड ड्रग कंट्रोलर कार्यालय की संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी की महत्वाकांक्षाएं राज्य की भाजपा सरकार के लिए गले में बंधा पत्थर बनती जा रहीं हैं। प्रशासन का दुरुपयोग करके उन्होंने भजकलदारम का जो खेल शुरु कर दिया है उससे राज्य की जनता विषैले खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए मजबूर हो गई है। यही नहीं राजा भोज एयरपोर्ट के विमानपत्तन निदेशक रामजी अवस्थी की पत्नी होने के नाते उन्होंने सरकार को जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु किया है उससे वे कई मंत्रियों की गुडबुक में पहुंच गईं हैं। हालांकि इस वीआईपी ट्रीटमेंट की आड़ में कथित तौर पर उन्होंने हवाला कारोबारियों को वायु मार्ग से रकम पहुंचाने का गोरख धंधा भी चला रखा है। हवाला की इसी कमीशन के बलबूते वे राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नति पाकर आईएएस बनने का ख्वाब देख रहीं हैं.
सत्ता के गलियारों से जो खबरें छन छनकर बाहर आ रहीं हैं उनसे पता चल रहा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी माया अवस्थी इन दिनों आईएएस बनने का अनुष्ठान बड़ी तन्मयता से चला रहीं हैं। इसके लिए उन्होंने अपने पति की मदद से मंत्रियों को हवाई अड्डे पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु कर दिया है। मंत्रियों की इसी करीबी का लाभ लेकर उन्होंने खाद्य अपमिश्रण करने वाले व्यापारियों से अवैध वसूली का नेटवर्क चला रखा है। हर संभागीय और जिला फूड अधिकारी को हर महीने शहर के अनुसार पेटियां लेकर राजधानी पहुंचना पड़ता है। विभाग के ही त्रस्त अधिकारियों का कहना है कि मैडम का वसूली अंदाज बड़ा खौफनाक है। वे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को अपना मामा बताती हैं।विमानपत्तन निदेशक पद पर पदस्थ अपने पतिदेव रामजी अवस्थी की मदद से उन्होंने रीवा में हवाई अड्डा शुरु करने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दिला दी है। इसी प्रोजेक्ट की आड़ में उन्होंने वसूली का कारोबार धड़ल्ले से खोल दिया है।
रामजी अवस्थीःहवाला कारोबार की आड़ में पत्नी को आईएएस बनाने का बीड़ा उठाया
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल पर तो मैडम ने वो जादू चला दिया है कि उन्हें आसमान से सोना झरता नजर आने लगा है। माया अवस्थी का फरमान राज्य के कोने कोने में व्यापारियों और सड़कों पर खड़े रेहड़ी वालों तक पहुंच गया है कि यदि उन्हें अपना कारोबार चलाना है तो सरकार की सेवा करनी होगी। तुम नकली खाद्य सामग्री बेचो या कम तौलो कोई तुम्हें नहीं छुएगा । यही वजह है कि राज्य में नकली खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रहीं हैं.
जिन व्यापारियों की खाद्य सामग्री का नमूना फेल करना होता है तो उसे राज्य की सरकारी प्रयोगशाला में भिजवा दिया जाता है जहां नमूना मिलावटी पाया जाता है। जिन व्यापारियों को माफी देनी होती है तो उनके नमूने लैब की व्यस्तता का बहाना बनाकर निजी लैबों में भिजवा दिया जाता है। बताते हैं कि इन लैबों से हर महीने तगड़ी वसूली की जाती है। इसका प्रमाण उन लैबों के भुगतानों से सहज प्राप्त किया जा सकता है। मैडम खुद फाईल भेजकर उनके भुगतान जारी करवाती रहती हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों के मामलों की फाईलें या तो ढंडे बस्तों में डाल दी जाती हैं या फिर दलालों के माध्यम से उन्हें भजकलदारम की पगडंडी पर धकेल दिया जाता है।
नरेन्द्र शिवाजी पटेलः प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को झमेले में फंसाने की नादानी
इस कार्य के लिए मैडम ने स्थापना शाखा में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को पदस्थ कर रखा है। राजेन्द्र मेहरा नाम का ये कर्मचारी वास्तव में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। इसे गैरकानूनी तरीके से तृतीय श्रेणी अधिकारी बना दिया गया था। यह वहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों को धमकाकर वसूली का कारोबार चलाता है। इसे पदोन्नति की पात्रता न होने की वजह से पदावनत किया जाना चाहिए था लेकिन मैडम की कृपा ने इसे विभाग का दबंग व्यक्ति बना दिया है।
सूत्र बताते हैं कि हवाला का नेटवर्क चलाने वाले व्यापारियों के चंदे की आड में ही मैडम ने अपने पति की मदद से हवाई सेवा को कूरियर सर्विस की तरह चला रखा है। एयरपोर्ट का प्रबंधन भले ही विमानपत्तन प्राधिकरण के हाथ में हो लेकिन विमान तल की सुरक्षा का दायित्व टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया की एजेंसी सीएआईएएसएल के पास है। उसकी स्वयं की इनोवा गाडियां वीआईपी को विमान में बैठाने के लिए लगाई गईं हैं। मैडम अवस्थी के पतिदेव रामजी अवस्थी हर वीआईपी को अपने स्वागत कक्ष में बिठाते हैं और फिर उन्हें उनके निजी सामान समेत स्वयं अपनी कार में बिठाकर विमान के दरवाजे तक पहुंचाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की चैकिंग नहीं की जाती है। सुरक्षा एजेंसी को मालूम रहता है कि वीआईपी को लाने ले जाने में जब इतना बड़ा अधिकारी स्वयं मौजूद है तो फिर हम क्यों पंगा लें।
दरअसल एयर इंडिया के निजीकरण के दौरान लगभग पच्चीस हजार कर्मचारियों को निजी एजेंसियों के माध्यम से ठेके पर रखा गया है। टाटा वाली एयर इंडिया इनके मामले में ज्यादा दखलंदाजी नहीं करती क्योंकि उन कर्मचारियों का वेतन पुरानी शर्तों के आधार पर विमानपत्तन प्राधिकरण ही देता है। नियोक्ता एजेंसी उन कर्मचारियों का वेतन मनमर्जी से देती है । मजबूर कर्मचारी कुछ नहीं बोल पाते इसलिए विमानपत्तन अधिकारी होने का लाभ लेकर रामजी अवस्थी कथित तौर पर हवाला कारोबारियों को वीआईपी बताकर उनके लगेज समेत विमान में बिठाकर आते हैं। ग्राऊंड हैंडलिंग एजेंसी के कर्मचारी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाते। जिस सीआईएसएफ को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है उसे गच्चा देकर इस मार्ग से हवाला की रकम और कारोबारी सुरक्षित बच निकलते हैं।
हवाला का ये कारोबार इतना मजबूत है कि इसका लाभ सरकार में बैठे नेता और आला अफसर सभी उठाते हैं। राज्य से पिछले बीस सालों में चुराए गए लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों को इसी तरह अन्य प्रदेशों या देशों तक पहुंचाया जाता रहा है। यही वजह है कि माया अवस्थी आज सरकार के कई बड़े नेताओं की नाक का बाल बन गईं हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि राज्य सरकार उनका नाम आईएएस की प्रमोशन सूची में केन्द्र के पास पहुंचाएगी। केन्द्र सरकार में भी बैठे कई लोग उन्हें एक सुविधा प्रदान करने वाली अधिकारी के रूप में जानते हैं । इसका लाभ लेकर वे आईएएस जरूर बन जाएंगी। मैडम का कुर्सी अभियान भले ही सबकी आंखों में धूल झोंककर चल रहा हो लेकिन इससे सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। राज्य के घोटाले बाजों की इस कड़ी पर मोदी की न खाऊंगा न खाने दूंगा वाली निगाह अब तक क्यों नही पहुंची ये शोध का विषय है।
China On Train Hijacking : बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक के बाद से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। वहां की सरकार समझ नहीं पा रही है कि अब वो क्या करें। वहीं पाकिस्तान से ज्यादा टेंशन इस वक्त चीन को सता रही है।
इस घटना से चीन की सांसे अटकी हुई हैं। BLA पाकिस्तान के साथ-साथ चीन के लिए भी सिर दर्द बना हुआ है। बलूच विद्रोही पहले ही चीन को धमकी दे चुके हैं कि वो अपना कारोबार बलूचिस्तान से समेटकर यहां से निकल जाएं। बता दें कि चीन अब तक अपने CPEC प्रोग्राम में करोड़ो डॉलर लगा चुका है। अगर अब चीन अपने पैर वापस खिचता है तो उसको भारी नुकसान होगा। चीन का प्लान था कि वो बलूचिस्तान के रास्ते अपने एनर्जी ट्रेड को सुरक्षित करना चाह रहा था, लेकिन इस हमले के बाद CPEC ही सुरक्षित नही दिख रहा। वहीं इलाके में पाक सेना की हालत देख चीन की टेंशन और ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान की तरफ से चीन को हर संभव सुरक्षा देने का वादा किया गया था, जो होते हुए नजर नहीं आ रहा है। ट्रेन हाईजैक के बाद पहली बार इस हमले के लेकर चीन का बयान सामने आया है।
चीन ने हमले के लेकर क्या कहा?
ट्रेन हाईजैक को लेकर चीन की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, चीन हर तरह के आतंकवाद का विरोध करता है। चीन पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ सहयोग देता रहेगा। ताकि क्षेत्र में शांति, क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे। इस बयान के बाद एक बार फिर से इस बात के कयास लगाए जा रहे है कि कहीं चीन अपनी सेना को ही पाकिस्तान में CPEC की सुरक्षा में तैनात ना कर दे। अब इस बयान के बाद ऐसे क्यास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में चीन अपनी सेना को पाकिस्तान में भेज सकता है।
पाक में तैनात होगी चीनी सेना
चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना CPEC प्रोजेक्ट पर इस वक्त बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अब तक उसने इसमें करोड़ो डॉलर खर्च कर चुका है। लेकिन पाकिस्तान चीनी नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर सका। रिपोट के मुताबिक 2022 से चीन लगातार CPEC के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। उनकी सुरक्षा के लिये चीनी सुरक्षाबलों की यूनिट तैनात करने को कहा था लेकिन रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान ने उसे सिरे से खारिज कर दिया था लेकिन चीनी दबाव के चलते जल्द चीन और पाकिस्तान के बीच ज्वाइंट सिक्योरिटी कंपनीज फ्रेमवर्क ( एंटी टेररिज्म कॉपरेशन) पर दस्तखत हुए हैं। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि बलूचिस्तान में चीनी सुरक्षाबलों की तैनाती हो सकती है। इस फ्रेमवर्क के तहत जिस जगह चीनी नागरिक काम कर रहे होंगे उनकी सुरक्षा घेरों की होंगे. अंदर वाला घेरा चीनी ट्रूप के पास को बाहरी घेरा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के हाथों में होगी।
भोपाल, 15 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केनरा बैंक की मैनेजर से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए की ठगी करने वाले बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद्र गुप्ता की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने केस डायरी आने तक लंबित कर दिया है। उसके आपराधिक रिकार्ड को देखते हुए अदालत ने कहा है कि गुप्ता को आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण प्रकरण क्रमांक MCRC/11442/2025 में जमानत पर छोड़ने का कोई तर्क मान्य नहीं किया जा सकता।केनरा बैंक प्रबंधन ने अदालत में केविएट दायर की थी कि इस तरह के किसी जमानत आवेदन पर सुनवाई से पहले बैंक का पक्ष सुना जाए। गुप्ता फिलहाल भोपाल केन्द्रीय जेल में बंद है और उसकी जमानत के लिए कई बड़े सूदखोरों ने न्यायपालिका से जुड़े अपने दलालों को सक्रिय कर रखा है। केनरा बैंक और उसकी मैनेजर ने जो प्राथमिकी दर्ज कराई है उसमें गुप्ता प्रथम दृष्टया अपराधी नजर आ रहा है।
विधिक जानकारों के अनुसार कंप्यूटर व्यवसायी के रूप में पहचान बनाने वाला लालगंज का ठग प्रकाशचंद्र गुप्ता वास्तव में सफेदपोश अपराधी है। उसने समाज के कई प्रतिष्ठित लोगों से ठगी करके वह रकम बैंकों से कई हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने वाले माफिया के पास जमा कराए हैं। इस राशि पर वह हर महीने मोटा ब्याज प्राप्त करता है। इसी धनराशि से वह अदालती दांवपेंच खेलकर जजों के अपने प्रभाव में लेता है और आपराधिक चरित्र के वकीलों की मदद से हर बार बच निकलता रहा है।इसके बावजूद भोपाल पुलिस ने जो तथ्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं वे उसके आपराधिक चरित्र के अटल साक्ष्य बन गए हैं।
भोपाल पुलिस लंबे समय से उसके आपराधिक कारनामों के साक्ष्य जुटाती रही है। हर बार वह कुछ निजी हस्ताक्षर विशेषज्ञों और फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से फर्जी साक्ष्य बनाकर अदालतों की आंखों में धूल झोंकता रहा है। इस बार केनरा बैंक घोटाले में वह साफ तौर पर अदालत के हत्थे चढ़ा है। उसके विरुद्ध पास्को एक्ट का भी एक गंभीर मुकदमा चल रहा है ।उसने अपने मकान को गिरवी रखकर केनरा बैंक से दो करोड़ साठ लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस राशि पर उसे मासिक ब्याज की किस्त भरना पड़ती थी लेकिन उसने अप्रैल 2023 से ब्याज देना बंद कर दिया था। इसी वसूली के लिए जब केनरा बैंक कोहेफिजा की मैनेजर उसकी दूकान पर पहुंची तो उसने मैनेजर व उसके सहयोगी को एक लाख 21 हजार रुपए दिए पर अपनी जमा परची में इस राशि को दो करोड़ इक्कीस लाख बीस हजार रुपए लिख लिया । इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह सरफेसी एक्ट में मकान नीलामी के विरुद्ध अदालत जा पहुंचा। यहां धोखाघड़ी पकड़ी गई और साक्ष्यों के आधार पर ही उसे निचली अदालत ने जेल भेजा था।
भोपाल के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने प्रकाश चंद्र गुप्ता उर्फ पीसी गुप्ता का जमानत आवेदन इस आधार पर खारिज किया था कि बैंक को सरफेसी एक्ट में उसका मकान नीलाम करने का पूरा हक है। इसके बावजूद उसने बैंक मैनेजर के साथ फर्जी दस्तावेज बनाकर ठगी की है। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक माधुरी पाराशर ने कहा कि गुप्ता ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक अधिकारियों को झांसा देने का प्रयास किया है। इसलिए उसे समाज में आजाद रहकर व्यापार करने का कोई हक नहीं है।
गौरतलब है कि उसकी दो पत्नियां और दो बेटियां इन दिनों उसका कारोबार संभाल रहीं हैं। इसके विरुद्ध कई शिकायत कर्ताओं ने अदालत में आवेदन देकर उसके पारिवारिक सदस्यों को भी ठगी का सहआरोपी बनाने का निवेदन किया है। विघानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जी के बेटे से भी तीन करोड़ रुपए की ठगी करने के आरोप में गुप्ता पहले भी जेल जा चुका है।भोपाल पुलिस ने जिस गंभीरता के साथ उसके विरुद्ध चल रहे सभी प्रकरणों को नत्थी करके अदालत से समक्ष प्रस्तुत किया है उसे देखते हुए गुप्ता की जेल यात्रा इस बार सजा तक जारी रहने की उम्मीद की जा रही है।गुप्ता ने जो धन आम नागरिकों से ठगी करके जुटाया है और ब्याज पर बड़े बैंक घोटालेबाजों के पास जमा कर ऱखा है उस पर उसे लगातार मोटा ब्याज मिल रहा है। इस रकम से वह अदालती खर्च को आसानी से वहन करता चला आ रहा है।
जमा पर्ची में हेरफेर करके बोला केनरा बैंक की मैनेजर स्कूटर पर ले भागी दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए
भोपाल,28 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).केनरा बैंक की मैनेजर से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी करने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता को आज ग्यारहवें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एक बार फिर जेल भेज दिया है। उसके विरुद्ध आर्थिक ठगी के अलावा पास्को एक्ट का भी प्रकरण दर्ज है। देश भर के विभिन्न शहरों में चल रहे मुकदमों की फेरहिस्त भी जब अदालत के सामने पहुंची तो विद्वान न्यायाधीश ने उसके आपराधिक चरित्र को देखते हुए जमानत आवेदन खारिज कर दिया। भोपाल पुलिस बरसों बाद प्रभावशाली लोगों को झांसा देकर बचते रहे इस सफेदपोश ठग को गिरफ्त में ले पाई है।
केनरा बैंक में कारोबारी साख का फायदा उठाकर जब बूटकाम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने मकान फायनेंस कराया तब तक बैंक को नहीं पता था कि उसकी शातिर खोपड़ी में क्या चल रहा है। बैंक को तो उसके कारोबार का आयव्यय देखकर लगता था कि वह बड़ा व्यापारी है। हकीकत जब सामने आई तो पुलिस भी देखकर दंग रह गई कि उसकी नाक के नीचे बरसों से ये ठग कैसे लोगों की आंख में धूल झोंकता रहा है। कभी छुरेबाजी करके रायबरेली के लालगंज से फरार हुआ प्रकाश चंद्र गुप्ता कलकत्ता में चाय कारोबार में नौकरी करने लगा था। बाद में चाय का कारोबारी बनकर भोपाल आ गया।यहां भाजपा के छुटभैये नेता के साथ नकली चाय बेचने के आरोप में पकड़ा गया तो उसने अपना धंधा बदलकर कंप्यूटर की दूकान खोल ली। इस बार उस पर बैंक ठगी का जो प्रकरण दर्ज कराया गया है उसमें उसने वही तरीका अपनाया जिसमें वह पंजाब नेशनल बैंक से सफल ठगी कर चुका है।
प्रकाश चंद्र गुप्ताः केनरा बैंक से ठगी के आरोप में अदालत ने गिरफ्तार करके जेल भेजा.
राजधानी के कोहेफिजा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी क्रमांक 0317 दिनांक 18.05.2024 में थाना प्रभारी ने लिखा कि मै थाना कोहेफिजा मे थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ हूं.दिनांक 29/04/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल की ओर से एक टाईपशुदा आवेदन पत्र थानाध्यक्ष थाना कोहेफिजा भोपाल के नाम का प्रस्तुत किया गया जिसमे बताया कि अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप्राईटर बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल का लोन खाता केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा मे है जिसके द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल से 03 व्यवसायिक लोन कुल राशि 2,60,00,000/- लिया गया है जिसका अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता को इंस्टालमेन्ट भरना पडता है जब ग्राहक की 3 इंस्टालमेन्ट due हो जाती है तो बैंक द्वारा लोन NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जाता है और बैंक द्वारा ग्राहक को demand notice जारी किया जाता है ।
दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक कोहेफिजा भोपाल द्वारा अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप0 बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल को demand Notice तामील कराने के लिए बैंक के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी रोहित नरवरे के साथ प्रकाश चंद्र गुप्ता के कार्यालय एम पी नगर भोपाल अपने व्यक्तिगत दो पहिया वाहन एक्टीवा से पहुंचे वहाँ पर अनावेदक से demand notice पर receiving प्राप्त कर अनावेदक के अनुरोध पर केनरा बैंक की एक जमा पर्ची जिसमें कुल राशि 1,20,000/- शब्दो ओर अंको मे पहले से ही भरी हुई थी. उसके साथ अनावेदक द्वारा उक्त नगद रकम 1,20,000/- दी गई अनावेदक द्वारा आवेदिका से काउन्टर जमा पर्ची पर हस्ताक्षर लिया गया सील ना होने से नही लगाई गई । उक्त नगद रकम को आवेदिका द्वारा लिफाफे मे रख कर अनावेदक के साथ रोहित को बुलाकर अवेदिका के मोबाईल से फोटो लिया गया बाद अनावेदक को शेष रकम भी जल्द जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस बैंक आकर उक्त रकम 1,20,000/- केशियर को जमा पर्ची के साथ उसके खाते मे जमा करने हेतु दिये गये ।
उसी समय प्रबंधक हर्षित द्वारा demand notice पर अनावेदक के हस्ताक्षर चैक किये गये तो अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा demand notice पर अपने शासकीय कार्यालयीन में किये गये हस्ताक्षर के स्थान पर किसी अन्य प्रकार के हस्ताक्षर पाए गए।
अनावेदक के हस्ताक्षर सही नही पाये जाने पर दिनांक 08/01/2024 को ही प्रबंधक हर्षित द्वारा पुनः अनावेदक के कार्यालय एम पी नगर मे जाकर हस्ताक्षर लिये गए. दिनांक 09.01.2024 को अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने प्रंबधक हर्षित को फोन कर तीनों ऋण खाते का बैलेंस सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने के लिए कहा। जिस पर आवेदिका और प्रबंधक हर्षित अनावेदक के कार्यालय एमपी नगर जाकर बैलेंस प्रमाणपत्रों उपलब्ध कराये जाकर लोन खाता मे minimum required amount (11.50लाख लगभग) जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस शाखा आ गये ।
दिनांक 15.01.2024 को शाखा को उक्त अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता से मुख्य प्रबंधक के नाम से डाक से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। इस लिफाफे को खोलने पर उसमें ड. बाबा साहब भीमराम अम्बेडकर से संबंधित एक पृष्ठ का नोट पाया गया जिसका श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता या उनके खातों से इसका कोई लेना-देना नहीं था।
दिनांक 08.02.2024 को, आवेदिका, रोहित नरवरे के साथ नियमित तरीके से एमपी नगर में अनावेदक श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के एम.पी. नगर स्थित कार्यालय गई। मुख्य प्रबंधक ने ऋण खातों को पूरी तरह से बंद करने के बजाय उन्हीं खातों को अपग्रेड करने की सलाह दी क्योंकि इसमें कम राशि की आवश्यकता थी जो कि लगभग 14 लाख रुपये हो सकती थी। अनावेदक द्वारा यह जानते हुए कि आवेदिका को हिन्दी नही आती है उन्हे एक पत्र (हिंदी भाषा मे) दिया जाकर आवेदिका से हस्ताक्षर करवाए सील नही होने से सील नही लगाई गई ।
आवेदन पत्र के प्रत्येक पृष्ठ पर पावती ली गई । दिनांक 06/03/2024 को अनावेदक द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा को एक पत्र भेजा गया जिसमे उसके द्वारा 08/01/2024 को 2,21,20,000/- रुपये आवेदिका को उसके कार्यालय एम पी नगर मे नगद देना बताया गया और शेष लोन की राशि को उसकी जमा एफडी मे से काटने का उल्लेख किया गया तब जाकर आवेदिका के सज्ञांन मे यह बात आई ।
जांच मे आवेदिका व साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किये गए । पूर्व में प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-03 भोपाल को एक आवेदन पत्र FIR दर्ज करने के संबंध में कैनरा बैंक शाखा प्रबंधक सुधा प्रियदर्शिका के विरूध 02,21,20,000/- रूपये कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हडप कर लेने के संबंध में दिनांक 03/04/224 को दिया गया था । जो कार्यालय पुलिस उपायुक्त जोन-03 के माध्यम से जशि-177 दिनांक 08/04/2024 में इन्द्राज कर दिनांक 12/04/224 को थाना प्रभारी थाना कोहेफिजा को प्राप्त हुआ । शिकायत आवेदन पत्र के अनुक्रम में दिनांक 22/04/24 को शिकायत के संबंध में विस्तृृत पूछताछ कर कथन लेखबद्ध किये गये है ।
आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दवारा दिये गये आवेदन पत्र की जांच मे यह बात सामने आई है कि आमतौर पर expert द्वारा रुपये 2,21,20,000/-रूपये को मशीन से गिनने मे लगभग 03 घंटे का और हाथ से गिनने मे करीबन 15 घंटे का समय लगता है. जो कि दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका अनावेदक के कार्यालय मे लगभग एक ही घंटे रुके थे अनावेदक के कार्यालय मे CCTV कैमरे भी लगे थे उसके बावजूद भी अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा इतनी बडी राशि प्रदाय करने का कोई CCTV Footage संग्रहित नही किया गया और बैंक दवारा 02,21,20,000/- जमा करने की बात को अस्वीकार करने पर संबंधित पुलिस थाना व सबंधित बैंक को सूचना न देते हुए सीधे हाईकोर्ट मे 02,21,20,000/- रूपये जमा करने के उपरांत लोन की शेष राशि के समायोजन के लिए रिट पिटिशन क्र. 5100/2024 फाईल की और पर्याप्त समय निकलने के बाद सम्बंधित बैंक को सूचना दी गई ताकी कोई साक्ष्य उपलब्ध न हो सके ।
अनावेदक द्वारा जो काउन्टर जमा पर्ची कोर्ट मे उपलब्ध कराई गई थी उसमे रुपये 2,21,20,000/- रूपये का अंको ओर शब्दो मे उल्लेख है और जो जमा पर्ची बैंक से प्राप्त हुई है उसमे शब्दो और अंको मे रुपये 1,20,000/- रू का उल्लेख है दोनो ही पर्चियों मे असमानता है । अनावेदक द्वारा जमा पर्ची कि counter file मे edit किया जाना प्रथम दृष्टया सम्भव प्रतीत होता है तथा अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में कैनरा बैंक का दिनांक 09/01/2024 का balance certificate प्रस्तुत किया गया है जिसमे received cash 2,21,20,000/- होना लेख है जो कि edit किया जाना प्रथम दृष्यया प्रतीत होता है । बैंक से प्राप्त CCTV Footage अनुसार दिनांक 08/01/2024 के दोपहर लगभग 02.40 बजे अवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दो पहिया वाहन एक्टीवा से दैनिक बेतन भोगी रोहित नरवरे के साथ जाना व दोपहर लगभग 04.11 बजे शाखा कोहेफिजा वापस आना पाया गया इतने कम समय मे इतनी बडी राशि गिनकर वापस दो पहिया वाहन पर ले कर आना सम्भव प्रतीत नही होता है । अनावेदक द्वारा बैंक मे कभी भी इतनी बडी राशि पूर्व मे जमा नही की गई । बैंक से प्राप्त जानकारी अनुसार जाँच मे यह बात भी सामने आई कि अनावेदक प्रकाश चंद गुप्ता के मोबाइल नंबर 9826057899 जो कि केनरा बेंक शाखा मे उसके खाते से registered है, जिसमे दिनांक 08/01/2024 को बैंक द्वारा एस एम एस भेजा गया था जिसमे सिर्फ रुपये 1,20,000/- जमा होने का उल्लेख था। यदि अनावेदक द्वारा रुपये 2,21,20,000/- जमा किये होते तो अनावेदक एस एम एस प्राप्त होने के बाद तुरंत बैंक जाकर सूचना देकर सुधार करवाता ।
इसके पश्चात भी अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा केनरा बैंक मे बुटकाम सिस्टम के नाम से संचालित खाते कि net banking का user ID and password जिसकी जानकारी सिर्फ खाता धारक को होती है अनावेद्क द्वारा दिनांक 10.01.2024 एवम 15.01.2024 को उक्त user id and password के माध्यम से net banking से 16 बार लागिन किया गया था उसके बाद भी अनावेदक द्वारा पैसा जमा न होने के सम्बंध मे न तो बैंक को और न ही पुलिस को सूचना दी गई। यदि अनावेदक दवारा दिनांक 08/01/2024 को 02,21,20,000/- रूपये जमा किये जाते तो बैंक नियमानुसार जमा करने में cash handling charge एवं door step banking charge जमा राशि से काटा जाता। इस संबध मे अनावेदक द्वारा कोई आपत्ति क्यो नही उठाई गई जो संदेह उत्पन्न करता है।
आवेदिका द्वारा काउंटर जमा पर्ची पर एवं दिनाक 08.01.24 को अनावेदक को दी गई पावती पर सिर्फ हस्ताक्षर किये गये सील नही लगाई गई जबकी अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष प्रस्तुत उक्त दस्तावेज की छाया प्रति मे सील लगी हुई है जो की बैंक की शासकीय कार्यालयीन उपयोग की सील न होकर अनावेदक दवारा तैयार कूटरचित सील है । बैंक की सील में दो स्टार है और अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दिये गये दस्तावेजों मे चार स्टार है तथा सील मे लिखा हुआ कोहेफिजा अंग्रेजी व हिन्दी मे कोहे फिजा के बीच मे गेप है। आवेदिका दवारा हमेशा ही हस्ताक्षर करने के उपरांत सील हमेशा हस्ताक्षर के उपर लगाना बताया गया है परन्तु अनावेदक द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजो में हस्ताक्षर के बाजू मे सील लगाई गई है ।
अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष रिट पिटीशन न. 5100/2024 में प्रस्तुत दस्तावेजो पर लगी सील कूटरचित है । अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपने ऋण खाते मे बडी राशि जमा करने की प्रवंचना कर आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक शाखा कोहेफिजा भोपाल एवं अन्य अधिकारी केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा के विरूध षडयंत्र रचा गया है । आवेदन पत्र की जांच पर प्रथम दृष्टया अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता के विरूध अपराध धारा-420,467,468,471 (भादवि) का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया जाता है ।
नकल आवेदन पत्र केनरा लेटरपेड पर लिखा हुआ है। संदर्भ दिनांक-10.05.2024 श्रीमान थानाध्यक्ष महोदय,थाना- कोहेफिजा, भोपाल विषय- हमारी कोहेफ़िज़ा शाखा, भोपाल में मेसर्स बूटकम सिस्टम्स के नाम पर अपने ऋण खातों में दस्तावेज़ों की जालसाज़ी करने के लिए श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के लिए। विषय के संदर्भ में यह भी सूचित किया जाता है कि अधोहस्ताक्षरी को मानसिक रूप से परेशान करने और यातना देने के लिए, मेरे खिलाफ आपके पुलिस स्टेशन में झूठी शिकायत दर्ज करने के अलावा, जिसकी जांच चल रही है, श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स निम्नलिखित मामले दर्ज किए हैं-1.श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स बनाम केनरा बैंक और अन्य द्वारा रिट याचिका संख्या 5100/2024 माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके दायर की गई और माननीय को गुमराह करके आदेश प्राप्त करने में सफल रहे। ब्ले कोर्ट. माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दायर रिट याचिका की प्रमाणित प्रति अनुलग्नक-1 के रूप में संलग्न है2.न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत में मेरे खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके शिकायत संख्या यूएन सीआर/2143/2024, जिनका माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दुरुपयोग किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक – 2 के रूप में संलग्न है।3.बैंक और अधोहस्ताक्षरी के खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष एक सिविल मुकदमा संख्या आरसीएस ए/397/2024 दायर किया गया है। 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक -3 के रूप में संलग्न है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस सुशील नागू और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कोहेफिजा बैंक का पक्ष सुनने के बाद प्रकाश चंद्र गुप्ता की रिट याचिका दो अप्रैल को खारिज कर दी थी। अब इस प्रकरण में पुलिस ने कई अन्य तथ्य भी जुटाए हैं। नए कानूनों के अनुसार साक्ष्यों में हेरफेर प्रथम दृष्टया तो साबित हो रही है जिसमें गुप्ता को जेल भेजा गया है।
भोपाल,26 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।ट्रांसपोर्ट माफिया सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज हो गई है। भोपाल के विशेष न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसका आवेदन खारिज कर दिया है। आरोपी के वकील का कहना था कि सौरभ सरकारी कर्मचारी नहीं है इसलिए उसे अपने बचाव में तथ्य प्रस्तुत करने के लिए समय दिया जाए। अदालत ने कहा कि वह स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की वजह से सरकारी कर्मचारी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
ग्वालियर के वकील राकेश पाराशर का कहना है कि सौरभ सरकारी कर्मचारी नहीं है इसलिए लोकायुक्त ने उसके खिलाफ गलत कार्रवाई की है। जो संपत्ति उसकी बताई जा रही है वह उसकी नहीं है।सोने चांदी पर भी उसका नाम नहीं लिखा है। उन्हें शंका है कि कहीं माफिया के अन्य गुर्गे उसकी गोली मारकर हत्या न कर दें। सौरभ के जिन पार्टनर्स और बिल्डरों ने करोड़ों रुपयों की दौलत बनाई है और लगभग पांच सौ करोड़ से अधिक का आयकर चोरी किया है वे ही सौरभ की जान के दुश्मन बने हुए हैं। आठ करोड़ की संपत्ति और 52 किलो सोने की जब्ती का मामला इतना गंभीर है कि उसे अब किसी और अदालत से भी राहत मिलने की संभावना नहीं है। पुलिस को उम्मीद है कि उसका सहयोगी चेतन सिंह गौर पुलिस के लिए अहम गवाह साबित हो सकता है।
चेतन गौरः पुलिस गवाह बनकर ठाठ से जिंदगी बिताने की तैयारी.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की जिस धारा 482 में ये अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया है उसमें गंभीर मामलों में जमानत दिए जाने की प्रक्रिया कठिन कर दी गई है। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जिस धारा 438 के अंतर्गत अग्रिम जमानत की सुनवाई की जाती थी अब उसके खंड(1ए)और (1बी) को हटा दिया गया है। सीआरपीसी की धारा 438 के (2)(3) और (4) को उसी रूप में रखा गया है। जाहिर है कि अपराधियों के कानून से भागने की राह कठिन कर दी गई है। ऐसे में पुलिस को उसे अपनी अभिरक्षा में रखना आसान होगा।
भारत की कई जांच एजेंसियां सौरभ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और आज रात तक उसके भारत लौटने की सूचना भी मिली है। उसे भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पुलिस अभिरक्षा में उससे पूछताछ होगी।इस पूरी प्रक्रिया को कई जांच एजेंसियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और अन्य आपराधिक तत्वों या माफिया के गुर्गों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
भोपाल, 26 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) 25 दिसम्बर, 2023 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। धारा 106 की उप-धारा (2) के प्रावधान और बीएनएसएस और बीएसए की पहली अनुसूची में बीएनएस की धारा 106 (2) से संबंधित प्रविष्टि को छोड़कर, बीएनएस के प्रावधान 1 जुलाई, 2024 से लागू हो गए हैं।इस कानूनी फेरबदल के बाद नागरिकों ने अब खुद आन लाईन प्राथमिकी दर्ज कराना शुरु कर दिया है।
नये आपराधिक कानूनों की मुख्य बातें अनुलग्नक-I में दी गई हैं।
बीएनएसएस की धारा 478 से 496 में जमानत और बांड से संबंधित प्रावधानों का विवरण है
जेलों में भीड़भाड़ को कम करने के लिए बीएनएस, 2023 और बीएनएसएस, 2023 में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
बीएनएसएस की धारा 290 में दलील देने को समयबद्ध बनाया गया है और आरोप तय होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा, बीएनएसएस की धारा 293 में प्रावधान है कि जहां आरोपी पहली बार अपराधी है और उसे पहले किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है, तो न्यायालय ऐसे आरोपी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित सजा का एक-चौथाई/एक-छठा हिस्सा दे सकता है।
विचाराधीन कैदी को हिरासत में रखने की अधिकतम अवधि बीएनएसएस, 2023 की धारा 479 में निर्धारित की गई है। इसमें प्रावधान किया गया है कि जहां कोई व्यक्ति पहली बार अपराधी है (जिसे पहले कभी किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है), उसे न्यायालय द्वारा बांड पर रिहा किया जाएगा, यदि वह उस कानून के तहत ऐसे अपराध के लिए निर्दिष्ट कारावास की अधिकतम अवधि के एक तिहाई तक की अवधि के लिए हिरासत में रह चुका है। इसके अलावा, जेल अधीक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह इस संबंध में न्यायालय में आवेदन करे।
पहली बार, सामुदायिक सेवा को बीएनएस, 2023 की धारा 4 में दंड के रूप में शामिल किया गया है।
अनुलग्नक-I
नये आपराधिक कानून की मुख्य विशेषताएं
नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन कानूनों का उद्देश्य सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और कुशल न्याय प्रणाली बनाना है। नए आपराधिक कानूनों के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं, जो व्यक्तिगत अधिकारों और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को उजागर करते हैं:
ऑनलाइन घटनाओं की रिपोर्ट करें: अब कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से घटनाओं की रिपोर्ट कर सकता है, इसके लिए उसे पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता नहीं है। इससे रिपोर्टिंग आसान और त्वरित हो जाती है, जिससे पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई की सुविधा मिलती है।
किसी भी पुलिस स्टेशन पर एफआईआर दर्ज करें: जीरो एफआईआर की शुरुआत के साथ, कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर सकता है, चाहे उसका क्षेत्राधिकार कुछ भी हो। इससे कानूनी कार्यवाही शुरू करने में होने वाली देरी खत्म हो जाती है और अपराध की तुरंत रिपोर्ट करना सुनिश्चित होता है।
एफआईआर की निःशुल्क प्रति: पीड़ितों को एफआईआर की निःशुल्क प्रति मिलेगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
गिरफ़्तारी के समय सूचना देने का अधिकार: गिरफ़्तारी की स्थिति में, व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में सूचित करने का अधिकार है। इससे गिरफ़्तार व्यक्ति को तत्काल सहायता और सहयोग सुनिश्चित होगा।
गिरफ्तारी की सूचना का प्रदर्शन: गिरफ्तारी का विवरण अब पुलिस थानों और जिला मुख्यालयों में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार और मित्रों को महत्वपूर्ण जानकारी तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह और वीडियोग्राफी: मामले और जांच को मजबूत करने के लिए, फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए गंभीर अपराधों के लिए अपराध स्थलों पर जाना और साक्ष्य एकत्र करना अनिवार्य हो गया है। इसके अतिरिक्त, साक्ष्यों से छेड़छाड़ को रोकने के लिए अपराध स्थल पर साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी की जाएगी। यह दोहरा दृष्टिकोण जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है और न्याय के निष्पक्ष प्रशासन में योगदान देता है।
त्वरित जांच: नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गई है, जिससे सूचना दर्ज करने के दो महीने के भीतर जांच पूरी हो सके।
पीड़ितों को प्रगति अपडेट: पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर अपने मामले की प्रगति के बारे में अपडेट प्राप्त करने का अधिकार है। यह प्रावधान पीड़ितों को सूचित रखता है और उन्हें कानूनी प्रक्रिया में शामिल करता है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास बढ़ता है।
पीड़ितों के लिए निःशुल्क चिकित्सा उपचार: नए कानून सभी अस्पतालों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के पीड़ितों को निःशुल्क प्राथमिक उपचार या चिकित्सा उपचार की गारंटी देते हैं। यह प्रावधान चुनौतीपूर्ण समय के दौरान पीड़ितों की भलाई और रिकवरी को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक चिकित्सा देखभाल तक तत्काल पहुंच सुनिश्चित करता है।
इलेक्ट्रॉनिक समन: अब समन इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जा सकते हैं, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी, कागजी कार्रवाई कम होगी और सभी संबंधित पक्षों को प्रभावशाली तरीके से सूचना मिल सकेगी।
महिला मजिस्ट्रेट द्वारा बयान: महिलाओं के विरुद्ध कुछ अपराधों के लिए, पीड़िता के बयान, जहां तक संभव हो, महिला मजिस्ट्रेट द्वारा तथा उसकी अनुपस्थिति में, महिला की उपस्थिति में पुरुष मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाने चाहिए, ताकि संवेदनशीलता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके तथा पीड़ितों के लिए एक सहायक वातावरण बन सके।
पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की आपूर्ति: आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट/आरोपपत्र, बयान, स्वीकारोक्ति और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने का अधिकार है।
सीमित स्थगन: मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी से बचने के लिए अदालतें अधिकतम दो स्थगन देती हैं, जिससे समय पर न्याय सुनिश्चित होता है।
गवाह संरक्षण योजना: नए कानून में सभी राज्य सरकारों को गवाह संरक्षण योजना लागू करने का निर्देश दिया गया है ताकि गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित किया जा सके तथा कानूनी कार्यवाही की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
लिंग समावेशिता: “लिंग” की परिभाषा में अब ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी शामिल हैं, जो समावेशिता और समानता को बढ़ावा देता है।
सभी कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक मोड में: सभी कानूनी कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित करके, नए कानून पीड़ितों, गवाहों और अभियुक्तों को सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे पूरी कानूनी प्रक्रिया सुव्यवस्थित और तेज हो जाती है।
बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग: पीड़िता को अधिक सुरक्षा प्रदान करने और बलात्कार के अपराध से संबंधित जांच में पारदर्शिता लागू करने के लिए, पुलिस द्वारा पीड़िता का बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा।
xviii. पुलिस स्टेशन जाने से छूट: महिलाओं, 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों, 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों तथा विकलांग या गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को पुलिस स्टेशन जाने से छूट दी गई है।
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध: बीएनएस में विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से निपटने के लिए एक नया अध्याय जोड़ा गया है, जिससे केंद्रित सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित हो सके।
लिंग-तटस्थ अपराध: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ विभिन्न अपराधों को बीएनएस में लिंग-तटस्थ बना दिया गया है, जिसमें लिंग की परवाह किए बिना सभी पीड़ितों और अपराधियों को शामिल किया गया है
सामुदायिक सेवा: नए कानून में छोटे-मोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की शुरुआत की गई है, जिससे व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलता है। सामुदायिक सेवा के तहत, अपराधियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने, अपनी गलतियों से सीखने और मजबूत सामुदायिक बंधन बनाने का मौका मिलता है।
अपराधों के लिए जुर्माने का समायोजन: नए कानूनों के तहत, कुछ अपराधों के लिए लगाए गए जुर्माने को अपराध की गंभीरता के अनुसार समायोजित किया गया है, ताकि निष्पक्ष और आनुपातिक दंड सुनिश्चित हो सके, भविष्य में अपराध करने से रोका जा सके और कानूनी प्रणाली में जनता का विश्वास बना रहे।
xxiii. सरलीकृत कानूनी प्रक्रियाएं: कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है ताकि उन्हें समझना और उनका पालन करना आसान हो सके, जिससे निष्पक्ष और सुलभ न्याय सुनिश्चित हो सके।
xxiv. तेज़ और निष्पक्ष समाधान: नए कानून मामलों के तेज़ और निष्पक्ष समाधान का वादा करते हैं, जिससे कानूनी प्रणाली में विश्वास पैदा होता है।
यह बात गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कही।
भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।Saurabh Sharma Case परिवहन विभाग के सेवा निवृत्त कांस्टेबल सौरभ शर्मा के बारे में जांच में एक बात सामने आई है कि उसने ज्यादातर चेक पोस्टों से उगाही की रकम जुटाने के लिए परिवहन आयुक्त के पीए की मदद से अनुसूचित जाति और जन जाति के अफसरों को अपना एजेंट बनाया था। आरक्षित कोटे के अधिकारियों की पोस्टिंग इन नाकों पर कराई गई थी और फिर उन्हें महीने की एकमुश्त रकम देकर केवल दस्तखत करने की जवाबदारी थमा दी जाती थी। उगाही की रकम सौरभ शर्मा के सहयोगी बटोरते थे और फिर आला अफसरों और नेताओं को उनका कमीशन पहुंचाकर चुप कर दिया जाता था।
परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यदि इस मामले पर कोई अफसर आपत्ति करता था तो सरकार और शासन में बैठे अधिकारियों के फोन पहुंच जाते थे। सौरभ को अनुकंपा नियुक्ति भी फर्जी थी और उसकी सेवा निवृत्ति को स्वीकार किया जाना भी फर्जी तरीके से किया गया था। पुलिस, आयकर महकमा ,लोकायुक्त जैसी तमाम एजेंसियां इस मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने में जुटी हुई है। हालांकि ये मामला आपसी रंजिश की वजह से सामने आया है किसी जांच एजेंसी ने इस मामले में पहल नहीं की थी।
सूत्र बताते हैं कि सौरभ ने कई अधिकारियों को उनके कमीशन के बदले में ब्याज देने का वादा किया था। अफसरों से कहा गया था कि आपकी रकम हमने अपने सहयोगियों के मार्फत ब्याज पर चढ़ा दी है। आपको हर महीने राशि का पांच प्रतिशत ब्याज मिल जाएगा। ब्याज की ये राशि उसने थोड़े दिनों तक तो दी लेकिन बाद में आना कानी करने लगा। आपसी टसल की वजह से ही उसके सोने, चांदी और नगद राशि की जब्ती कराई गई है।
लोकायुक्त ने आरोपी सौरभ शर्मा सहित पांच लोगों को समन जारी किया है. आय से अधिक संपत्ति मामले में सौरभ शर्मा लोकायुक्त के रडार पर आया था. लोकायुक्त की टीम ने पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के घर पर छापेमारी की थी. छापेमारी में करोड़ों रुपये कैश, लगभग बावन किलो सोना, ढाई क्विंटल चांदी और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए थे. लोकायुक्त के डीजी जयदीप प्रसाद ने बताया कि सौरभ शर्मा, उसकी मां, पत्नी, दो दोस्तों चेतन सिंह और शरद जायसवाल को समन भेजा गया है. उन्होंने बताया कि सौरभ शर्मा से पूछताछ के बाद अहम खुलासे हुए. इनोवा कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये कैश बरामद हुए थे. इनोवा कार सौरभ शर्मा ही इस्तेमाल करता था. हालांकि डीजी जयदीप प्रसाद ने सौरभ शर्मा के घर से मिली डायरी और कागजात की जानकारी नहीं दी. उन्होंने सौरभ शर्मा के लोकेशन की जानकारी से भी इंकार किया.
जयदीप प्रसाद ने आगे बताया कि मामले की जांच करने के लिए तीन सदस्यों की एक टीम बनाई गई है. जांच टीम की अगुवाई लोकायुक्त के डीसीपी वीरेंद्र सिंह करेंगे. भ्रष्टाचार के आरोपी सौरभ शर्मा पर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. सौरभ शर्मा के दूसरे ठिकाने का सीसीटीवी फुटेज बड़े राज को उजागर करता है. जिस लावारिस गाड़ी में 52 किलो सोना और 10 करोड़ कैश मिले थे, जो चेतन सिंह की बताई जा रही, इसका सीधा संबंध सौरभ शर्मा से ही था. पूरे मामले में लोकायुक्त, इनकम टैक्स के बाद अब ईडी की भी एंट्री हो गई है. सौरभ शर्मा और चेतन सिंह के खिलाफ एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है.
नई दिल्ली,26 नवंबर(प्रेस इन्फॉर्मेशन सेंटर)सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवम्बर को भारत में भौतिक मतपत्र मतदान की मांग करने वाले प्रचारक डॉ. के.ए. पॉल द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के रूप में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए डॉ. पॉल ने शुरुआत में जस्टिस विक्रम नाथ और पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया: “यह जनहित याचिका, मैंने बहुत प्रार्थना के बाद दायर की है…” अपनी बात पूरी करने से पहले ही न्यायमूर्ति नाथ ने मौखिक टिप्पणी की: “आपने पहले भी जनहित याचिकाएँ दायर की हैं। आपको ऐसे शानदार विचार कैसे मिलते हैं?” याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि वह लॉस एंजिल्स में ग्लोबल पीस समिट से अभी-अभी आया है: इस जनहित याचिका में हमारे साथ लगभग 180 सेवानिवृत्त आईएएस/आईपीएस अधिकारी और न्यायाधीश हैं जो मेरा समर्थन कर रहे हैं…मैं ग्लोबल पीस का अध्यक्ष हूँ और मैंने 3,10,000 अनाथों और 40 लाख विधवाओं को बचाया है। दिल्ली में हमारी 5,000 विधवाएँ हैं।” न्यायमूर्ति नाथ ने पूछा कि वे राजनीतिक क्षेत्र में क्यों शामिल होना चाहते हैं, और इस पर उन्होंने जवाब दिया: “यह राजनीतिक नहीं है। देखिए, मैं 155 देशों में गया हूँ और दुनिया के हर देश में, अगर आप देखें तो [बैलेट पेपर वोटिंग] है। दुनिया के हर लोकतंत्र में, अगर आप देखें तो [भौतिक बैलेट पेपर है]। हर देश। 180 देश। सिवाय तानाशाहों के, क्योंकि उनके पास चुनाव नहीं होते। जैसे मैं पुतिन के साथ रूस गया हूँ, असद के साथ सीरिया और चार्ल्स टेलर के साथ लाइबेरिया – उन्हें जेल से बाहर निकाला। वह अभी जेल में है। उनकी पत्नी भी शनिवार को शिखर सम्मेलन में शामिल हुईं। इसलिए, हम लोकतंत्र की रक्षा कर रहे हैं।” डॉ. पॉल ने आगे तर्क दिया कि अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन किया गया है। इस पर, न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी की: “इस मामले की सुनवाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है!” डॉ. पॉल ने कहा कि अनुच्छेद 32 उन्हें न्यायालय में जाने और तथ्य प्रस्तुत करने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा: “तथ्य बहुत स्पष्ट हैं। सभी को पता है, लेकिन कोई उपाय क्यों नहीं है? आपको भी आश्चर्य होगा, 8 अगस्त को नई दिल्ली के ले मेरिडियन में 18 राजनीतिक दलों ने इस प्रार्थना का समर्थन किया। प्रार्थना क्या है? आइए हम बाकी दुनिया का अनुसरण करें। 197 देशों में से 180 देश…” न्यायमूर्ति नाथ ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या वे नहीं चाहते कि भारत बाकी दुनिया से अलग हो, जिस पर उन्होंने जवाब दिया: “क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार है” न्यायमूर्ति नाथ ने इस दावे का खंडन किया और कहा: “कोई भ्रष्टाचार नहीं है। कौन कहता है कि भ्रष्टाचार है?” डॉ पॉल ने कहा कि उनके पास भ्रष्टाचार के सबूत हैं। उन्होंने कहा: “चुनाव आयोग ने इस साल जून में घोषणा की थी कि उन्होंने नौ हजार करोड़, एक अरब डॉलर से ज़्यादा, नकद और सोना जब्त किया है। इसका नतीजा क्या है?…मैं पिछले तीन चुनाव आयुक्तों से मिल चुका हूँ और सबूत दे चुका हूँ।” उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को जवाबी कार्रवाई करने दें। इस पर जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की: “राजनीतिक दलों को इस व्यवस्था से कोई समस्या नहीं है। आपको समस्या है।” डॉ. पॉल ने आगे दावा किया कि चुनाव के दौरान पैसे बांटे जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यापारी, जिसका नाम वे नहीं बताना चाहते, ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी सहित सभी प्रमुख 6 दलों को 12 सौ करोड़ दिए हैं। लेकिन इस पर जस्टिस नाथ ने पूछा: “हमें चुनाव के दौरान कभी पैसे नहीं मिले। हमें कुछ भी नहीं मिला…” डॉ पॉल ने कहा कि विशेषज्ञ एलन मस्क ने भी स्पष्ट रूप से लिखित में कहा है कि ईवीएम से छेड़-छाड़ की जा सकती है। 2018 में पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ट्वीट किया था कि ईवीएम से छेड़-छाड़ की जा सकती है और अब जगन मोहन रेड्डी, मैंने उनके ट्वीट संलग्न किए हैं, कि ईवीएम से छेड़-छाड़ की जाती है।” न्यायमूर्ति नाथ ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा: “अगर आप चुनाव जीतते हैं, तो ईवीएम से छेड़-छाड़ नहीं की जाती है। जब आप चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम से छेड़-छाड़ की जाती है। जब चंद्रबाबू नायडू हार गए, तो उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़-छाड़ की जा सकती है। अब इस बार जगन मोहन रेड्डी हार गए, उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़-छाड़ की जा सकती है।” याचिका की अन्य प्रार्थनाओं में चुनाव आयोग को निर्देश जारी करना शामिल था कि यदि चुनाव के दौरान पैसे, शराब और अन्य प्रलोभन बांटने का दोषी पाया जाता है तो उम्मीदवारों को कम से कम 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।
केस विवरण: डॉ. के. ए. पॉल बनाम भारत संघ और अन्य, डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 718/2024
भोपाल, 29 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).पंजाब नेशनल बैक से बत्तीस लाख रुपयों की ठगी करके दुगुने रुपए वसूल करने वाले ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता को बचाने में किस तरह कानून के रखवालों ने ही अपनी भूमिका निभाई इसकी कथा आधुनिक ठगों की कार्यप्रणाली का नमूना बन गई है । इसका अध्ययन अब कानून के विशेषज्ञ भी कर रहे हैं ।कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर कानून की आड़ लेकर गुप्ता ने इस बार केनरा बैंक की मैनेजर को अपना शिकार बनाया है । पंजाब नेशनल बैंक की कथा पढ़कर गुप्ता के आपराधिक चरित्र को आसानी से समझा जा सकता है।
पंजाब नेशनल बैंक का वो वसूली नोटिस जिसमें प्रकाश चंद्र गुप्ता की रखैल रीना गुप्ता और उसके पिता शंभुदयाल मालवीय की गिरवी रखी संपत्तियों का उल्लेख है.
भोपाल के मेसर्स बूटकाम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने पंजाब नेशनल बैंक की हबीबगंज शाखा से नकद उधार खाते और ओवरड्राफ्ट के जरिए बत्तीस लाख रुपए का ऋण लिया था। इस लोन को चुकाने से बचने के लिए गुप्ता ने अनेकों हथकंडे अपनाए । वर्ष 2006 में बैंक ने लिए गए लोन की वसूली के लिए जब पत्राचार किया तो गुप्ता ने बैंक में जाकर 15 अप्रैल 2006 को दो लाख रुपए जमा कराए । बैंक की जमा पर्ची भरते समय गुप्ता ने जालसाजी करते हुए ग्राहक की जमा पर्ची पर हेरफेर करते हुए दो लाख को बत्तीस लाख रुपए बना लिया। जिस पर बैंक सील लगा चुका था। बैंक की काऊंटर फाईल में मात्र दो लाख रुपए की इंट्री लिखी गई थी। स्वयं प्रकाश चंद्र गुप्ता ने बैंक की शाखा में जाकर शाखा प्रबंधक सुधीर शर्मा को दो लाख रुपए दिए जिसकी रसीद उन्होंने स्वयं सील लगाकर गुप्ता को दी थी। इसने आपराधिक षड़यंत्र करते हुए दो लाख को अपनी पर्ची पर बत्तीस लाख बना लिया और परची सुरक्षित रख ली। जब बैंक ने बत्तीस लाख रुपयों में से दो लाख रुपए काटकर ब्याज समेत लगभग चालीस लाख रुपयों की वसूली के लिए पत्र लिखा तो गुप्ता अपनी कूटरचित जमा पर्ची दिखाते हुए बैंक के ऊपर दबाब बनाया कि वह बत्तीस लाख रुपए नकद जमा कर चुका है इसलिए उसे नोड्यूज प्रमाण पत्र प्रदान किया जाए। तब बैंक को अपने साथ की गई धोखाघड़ी का पता चला।
शातिर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अपनी सोची समझी साजिश को अंजाम देने के लिए बैंक अधिकारियों के विरुद्ध झूठी प्राथमिकी दर्ज करवाने पहुंच गया। उसने बैंक के चार अधिकारियों के खिलाफ सिविल रिकवरी प्रकरण भोपाल जिला न्यायालय में दर्ज करवा दिया। इस ठगी को उसने स्थानीय अखबारों के माध्यम से बैंक की घोखाघड़ी बताना शुरु कर दिया। उसने अपनी परची को सही और बैंक की परची को झूठ बताने के लिए निजी हस्तलिपि विशेषज्ञ एच.एस.तोमर का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया । कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक के अधिकारियों को कानून और सजा का डर दिखाना शुरु कर दिया। कुछ भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों और एक कर्मचारी नेता के माध्यम से बैंक अधिकारियों को समझौते के लिए तैयार करना शुरु कर दिया। कुछ भ्रष्ट पुलिस के अधिकारियों ने भी बैंक के लोगों को डराया कि उनके विरुद्ध कई अन्य जांच भी शुरु हो सकती हैं। सभी बैंक अधिकारी रिटायरमेंट की सीमा के करीब पहुंच चुके थे। उन्हें भय था कि यदि उनके विरुद्ध ये प्रकरण लंबे समय तक चलता रहा तो उनका रिटायरमेंट में कई अड़चनें आएंगी।
अदालती दबावों और पुलिस व प्रकाश गुप्ता की प्रताड़ना से तंग आकर आखिरकार उन्होंने समझौते के लिए अपनी हामी भर दी। इस प्रकरण में अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को मान्य करते हुए आदेश पारित कर दिया। इस तरह बैंक अधिकारियों ने उस अपराध के प्रति अपने घुटने टेक दिए जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था।ये राशि उन्होंने अपनी जेब से चुकाई। इस तरह कानून की खामियों और पुलिस व न्यायपालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रकाश गुप्ता अपराध करने में सफल हुआ।
मुंबई 23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ) शक्ति मिल्स गैंगरेप से लेकर जर्मनी बेकरी ब्लास्ट, कसाब और दाभोलकर मर्डर केस तक के अपराधियों को अपने स्केच के जरिए जेल की सलाखों तक पहुँचाने वाले नितिन महादेव यादव आज अपराध जगत की अबूझ पहेली बन गए हैं।उन्हें लोग प्यार से “आधा पुलिसवाला” भी कहते हैं। कई लोग इन्हें ‘यादव साहब’ कह कर भी बुलाते है।
नितिन मात्र 5वीं कक्षा के छात्र थे जब उन्होंने कागज़ को बीस रुपये के नोट के आकार में काटा और अपने पेंट ब्रश की मदद से हूबहू असली नोट जैसा पेंट कर दिया। उस नोट को लेकर नितिन एक होटल में गये और काउंटर पर वह नोट पकड़ा दिया। नोट इतना हूबहू पेंट हुआ था कि सामने खड़े व्यक्ति ने उसे असली नोट समझ कर रख लिया।जब नितिन ने बताया के वह नोट नकली है तो सभी लोग पाँचवीं कक्षा के इस छात्र की प्रतिभा का लोहा मान गये।
एक रोज़ नितिन मुम्बई के ही एक पुलिस स्टेशन में नेमप्लेट पेंट कर रहे थे।थाने में एक मर्डर केस आया, मर्डर का गवाह होटल में काम करने वाला एक वेटर था। पुलिस उससे मर्डर करने वाले व्यक्ति का हुलिया पूछ रही थी और वेटर समझा नहीं पा रहा था।नितिन थानेदार के पास गये और उनसे कहा कि अगर वह वेटर को केवल आधा घंटा उसके साथ बैठने दें तो वह मर्डर करने वाले व्यक्ति का हूबहू स्केच तैयार कर सकता है। पहले थानेदार ने नितिन की बात को मज़ाक में लिया पर नितिन के बार बार आग्रह पर थानेदार मान गया।उसके बाद जो हुआ वह चमत्कार था।
वेटर से मर्डर करने वाले का हुलिया पूछने के बाद नितिन ने थानेदार के हाथ में एक स्केच पकड़ाया। वह चेहरा हूबहू मर्डर करने वाले व्यक्ति से मिलता था।स्केच की मदद से 48 घंटे के अंदर वह आरोपी पकड़ा गया। सारा पुलिस महकमा अब नितिन का मुरीद बन चुका था।
कुछ समय के पश्चात एक लड़की से बलात्कार हुआ जो मूक बधिर थी। ना बोल सकती थी, ना सुन सकती थी। नितिन को तत्कालीन डीएसपी ने याद किया और बच्ची से मिलवाया। नितिन बलात्कारी का चेहरा बच्ची की आँखों में देख चुके थे। नितिन ने एक एक कर के कई स्केच बनाये। कई तरह की आँखें, कई तरह का चेहरा। कई तरह के नैन-नक्श। एक एक कर इशारे के ज़रिये बच्ची बताती गयी की बलात्कारी कैसा दिखता है।आठ घँटे की अथक मेहनत के बाद नितिन मनोहर यादव ने डीएसपी के हाथ में बलात्कारी का स्केच थमा दिया।स्केच की मदद से अगले 72 घण्टे में बलात्कारी को पकड़ा गया।
नितिन अब मुम्बई पुलिस के लिये संजीवनी बूटी बन चुके थे। हर एक केस में नितिन के स्केच ऐसी जान फूँक देते के पुलिस उसे आसानी से सुलझा लेती।बीते 30 वर्ष के अंतराल में यादव पुलिस के लिये करीबन 4000 से अधिक स्केच बना चुके हैं।उल्लेखनीय है के केवल यादव की बनायी हुई तस्वीर की बदौलत मुम्बई पुलिस 450 से अधिक खूँखार अपराधी को गिरफ्तार कर चुकी है।
अब वह विषय, जिसके लिये यह पूरा लेख लिखा गया है….
30 साल में किसी भी स्केच या तस्वीर के लिये नितिन ने पुलिस या किसी भी अन्य व्यक्ति से “एक नया पैसा” भी नहीं लिया है।बार-बार पुलिस महकमे के बड़े से बड़े अफसर ने नितिन को ईनामस्वरूप धनराशि देने का प्रयास किया पर नितिन ने एक रुपया भी लेने से इनकार कर दिया।”नितिन मनोहर यादव” चेम्बूर एजूकेशन सोसाइटी के एक स्कूल में शिक्षक रहे।जो तनख्वाह आती उसी से गुज़र बसर करते रहे।
वह कहते हैं कि स्केच बना कर वह एक तरह से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों की पहचान होती है तो वह सलाखों के पीछे जाते हैं।नितिन 30 साल तक अपना काम राष्ट्र सेवा के भाव से करते रहे और आज भी एक बुलावे पर सब कामकाज छोड़ कर हाज़िर हो जाते हैं।30 साल की इस सेवा में नितिन को करीबन 164 प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है।
नितिन बड़े फक्र से सम्मानपत्र और ट्रॉफी दिखाते हुये कहते हैं….
“यही मेरी कमाई है। यही मेरी जमापूँजी है!”कभी कभी लगता है के यह राष्ट्र कैसे चल रहा है। चहुँओर बेईमानी का दबदबा है। चहुँओर भ्रष्ट आचरण का बोलबाला है।फिर किसी दिन नितिन महादेव यादव जैसे किसी समर्पित व्यक्ति के विषय में पढ़ कर ऐसा लगता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पित यादव जैसा एक व्यक्ति भी हज़ारों #बेईमानों पर भारी है।।
भोपाल,23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। लोकायुक्त भोपाल की सतर्क टीम ने आज भोपाल विकास प्राधिकरण कार्यालय में एक बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बीडीए का ये बाबू एक किसान से मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए तीन लाख पैंतीस हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार आज विशेष स्थापना पुलिस की टीम ने पुलिस अधीक्षक मनु व्यास के मार्गदर्शन में ये सफलता पाई है। BDA कार्यालय मे पदस्थ बाबू सहायक ग्रेड 1 तारकचंद दास के द्वारा आवेदक से उसके रत्नागिरी रायसेन रोड पिपलानी स्थित मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए335000 रुपयों की रिश्वत की मांग की थी. आवेदक किसान अपने मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए पिछले 6 महीनों से बावू तारकचंद दास के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो गया था परन्तु बाबू बिना रिश्वत लिए काम नहीं कर रहा था.
लंबे समय की प्रताडऩा से तंग आकर खेती किसानी करने वाले इस व्यक्ति ने लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर विशेष पुलिस स्थापना के पुलिस अधीक्षक से अपनी परेशानी के बारे में शिकायत की. शिकायत पर त्वरित कार्यवाही करते हुए इंस्पेक्टर नीलम पटवा की अगुवाई में तैनात पुलिस टीम ने आज BDA के भ्रष्ट बाबू टी सी दास उर्फ़ तारक चंद दास पिता स्वर्गीय श्री कालीपत दास उम्र 58 वर्ष सहायक ग्रेड 1 निवासी मकान नंबर 10 पंचशील नगर भोपाल क़ो आवेदक से 40000 रूपये लेने पर पकड़ा.आरोपी दास के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही BDA कार्यालय मे जारी है.टीम के अन्य सदस्य निरीक्षक रजनी तिवारी,निरीक्षक घनश्याम मर्सकोले,प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, मुकेश सिंह,राजेंद्र पावन,नेहा परदेसी आरक्षक मनमोहन साहू शामिल थे.
बिल्डर एम झवेरी पिता-पुत्र के खिलाफ न्यायालय में आपराधिक प्रकरण दर्ज , सिल्वर स्प्रिंग फेज 2 के रहवासियों के परिवाद पर न्यायालय ने दिये आदेश ।
इंदौर । सिल्वर स्प्रिंग के बिल्डर मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी समेत 10 लोगों के खिलाफ जिला न्यायालय इंदौर ने विभिन्न आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करते हुए सभी को 30 अगस्त को न्यायालय के समक्ष उपस्थिति दर्ज करने के लिए समन जारी किये हैं । सिल्वर स्प्रिंग फेज 2 के रहवासियों ने आलोक जैन पिता सुदेश जैन के माध्यम से एक परिवाद धारा 452, 323, 352, 506, 341, 294, 34 और 120बी के अंतर्गत प्रस्तुत किया था। माननीय न्याधीश श्री राहुल डोंगरे साहब की कोर्ट ने 31 जुलाई 2024 को हीरालाल जोशी, सुबोध गुप्ता, अभय कटारे, विकास मल्होत्रा, सत्यम राठौर, ऋषभ विश्वकर्मा, परमजीतसिंह, , जितेंद्रसिंह सोलंकी समेत बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है । 30 अगस्त को इन सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होना है। अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि माननीय न्यायालय के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया गया था, इसमें परिवादी आलोक जैन समेत आधा दर्जन रहवासियों के बयान दर्ज करवाए गए थे, इन बयानों, वीडियो और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर माननीय न्यायालय ने आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है । यह है मामला : सिल्वर स्प्रिंग टाउनशिप में मालिकाना हक वाले प्लॉट धारकों जिन्हें शेयर होल्डर्स कहा जाता है, इनकी जुलाई 2022 की विशेष आमसभा में बिल्डर की शह पर कई बाहरी गुंडातत्व भी जबरन घुस आए और जानबूझकर आमसभा में मारपीट के उद्देश्य से बहसबाजी, गाली गलौज और विवाद करने लगे थे । इस दौरान परिवादी आलोक जैन के साथ सभी आरोपियों ने मिलकर मारपीट की और छिपाकर लाए गए हथियारों से जान से मारने की धमकी दी और बीच-बचाव में अन्य शेयर होल्डर्स आए तो आरोपीगण वहां से भाग निकले । पुलिस तेजाजी नगर थाने पहुंचकर परिवादी ने पूरी जानकारी दी, वरिष्ठतम अधिकारियों तक शिकायत की, इसके बावजूद बिल्डर के दबाव में पुलिस ने प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया था। दोबारा 4 अगस्त 2022 को परिवादी और सिल्वर स्प्रिंग्स संघर्ष एवं समन्वय समिति सदस्यों ने थाना तेजाजी नगर समेत आला अधिकारियों को एक शिकायत परिवादी पर हमला करने वालों और बिल्डर के खिलाफ की थी, इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई उल्टा परिवादी और रहवासियों को बिल्डर और उसके सहयोगियों द्वारा लगातार धमकाया जाता रहा । रहवासियों की बडी जीत सिल्वर स्प्रिंग्स के बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश और अभिषेक झवेरी रसूखदार होने के साथ साथ राजनीतिक पैठ रखने वाले बिल्डर है । यही वजह है कि सैकडों शिकायतें होने के बावजूद इनके खिलाफ आज दिनांक तक पुलिस ने कोई प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया है। रहवासी क्षेत्र में जहां एक ओर बिल्डर ने मनमानी करते हुए शराब परोसने के क्लब शुरू किये, बिल्डिंग की छतों पर मोबाइल टावर लगवा दिये, नाले की जमीनों पर कब्जा करके प्लॉट बेच दिये यही नहीं कुछ बेसमेंट में सुपर मार्केट भी बनवा रखे हैं। बायपास रोड की सबसे बड़ी बसाहट वाली इस टाऊनशिप में बिल्डर डेवलपर एम झवेरी समूह ने निर्माण पश्चात भी छल बलपूर्वक अवैध अधिपत्य बनाए रखा है । घोषित एकीकृत टाऊनशिप को अनेक हिस्सों में बांटकर बिल्डर ने रहवासियों के साझा हित की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक / शासकीय धनसंपदा पर अवैध कब्जा कर रखा है । एकीकृत टाऊनशिप के हजारों रहवासियों के हित में गठित संघर्ष समिति के माध्यम से वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन द्वारा उपभोक्ता आयोग, उच्च न्यायालय व रेरा सहित हर संभव मंच पर शिकायतें परिवाद दर्ज किए गए हैं । जिनसे छुब्ध होकर बिल्डर पिता पुत्र मुकेश झवेरी व अभिषेक झवेरी द्वारा प्रायोजित कुछ रहवासियों व बाहरी गुंडों के माध्यम से 31 जुलाई 22 को रहवासियों की आमसभा में आलोक जैन के ऊपर किए गए हमले के ठीक 2 साल बाद 31 जुलाई 24 को माननीय न्यायालय के द्वारा यह प्रकरण दर्ज हो सका । भारी अनियमितताएं होने के बावजूद बिल्डर पिता-पुत्र के खिलाफ आज दिनांक तक कोई भी सख्त कार्यवाही नहीं हो पाई थी। रहवासियों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था और उम्मीद जगी है।
सेना का सर्वेक्षण अग्निवीरों सहित विभिन्न हितधारकों से फीडबैक एकत्र कर रहा है, साथ ही विभिन्न रेजिमेंटल केंद्रों में भर्ती और प्रशिक्षण कर्मियों से भी फीडबैक एकत्र कर रहा है
नई दिल्ली,13 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना वर्तमान में सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ भर्ती कार्यक्रम का आंतरिक मूल्यांकन कर रही है और कुछ समायोजन का सुझाव दे सकती है । केंद्र सरकार ने 2022 में इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरु किया था। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इस योजना पर सवाल उठाए थे इसके बाद सेना ने आंतरिक मूल्यांकन करके योजना में और भी नए सुधार शामिल करने की तैयारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समीक्षा का उद्देश्य आने वाली सरकार को कार्यक्रम में संभावित संशोधन करने में सहायता प्रदान करना है।
इंडियन एक्सप्रेस ने जिन अधिकारियों के हवाले से ये खबर जारी की है उसमें बताया गया है कि , सेना का सर्वेक्षण अग्निवीरों सहित विभिन्न हितधारकों से फीडबैक एकत्र कर रहा है, साथ ही विभिन्न रेजिमेंटल केंद्रों में भर्ती और प्रशिक्षण कर्मियों, तथा अग्निवीरों की देखरेख करने वाले यूनिट और सब-यूनिट कमांडरों से भी फीडबैक एकत्र कर रहा है।रिपोर्ट में बताया गया है कि सेना ने संबंधित पक्षों को 10 सवालों वाली प्रश्नावली भेजी थी। मई माह तक उसने प्राप्त फीडबैक के आधार पर नए सुधार लागू करके योजना को कारगर बनाया है।
फीडबैक में योजना के शुरू होने से पहले भर्ती किए गए सैनिकों के साथ अग्निवीरों के तुलनात्मक प्रदर्शन का विश्लेषण, साथ ही उनके सकारात्मक और नकारात्मक गुणों पर टिप्पणियां शामिल होंगी। इस फीडबैक के आधार पर, सेना योजना में संभावित समायोजन का प्रस्ताव करेगी। इसके अतिरिक्त, अग्निवीरों से रक्षा सेवाओं में शामिल होने के उनके उद्देश्यों, उनके पिछले नौकरी प्रयासों और क्या उन्हें लगता है कि उन्हें स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाना चाहिए, के बारे में इनपुट मांगा जाएगा। वे अपनी चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अपने पसंदीदा करियर विकल्पों के बारे में भी जानकारी देंगे और क्या वे सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं।इसके अलावा, सर्वेक्षण में यह भी पूछा जाएगा कि क्या ये सैनिक अपने परिचितों को अग्निवीर बनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवारों की भर्ती की जाती है, जिन्हें अग्निवीर के नाम से जाना जाता है। उन्हें या तो सीधे शैक्षणिक संस्थानों से या भर्ती रैलियों के माध्यम से भर्ती किया जाता है। सैनिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे पेंशन के लिए पात्रता के बिना चार साल की अवधि तक सेवा करें। योजना की शर्तों ने विवाद को जन्म दिया है, तथा सेवानिवृत्त सैनिकों और इच्छुक व्यक्तियों ने सेवारत कार्मिकों पर इसके संभावित प्रभाव, सशस्त्र बलों की व्यावसायिकता और नागरिक समाज के संभावित सैन्यीकरण के संबंध में चिंताएं व्यक्त की हैं।
हरियाणा में हाल ही में एक रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि सेना अग्निपथ योजना का विरोध करती है, जिसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया तथा कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह इसे बंद कर देंगे। हालाँकि, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले कहा था कि यदि आवश्यक हो तो सरकार अग्निपथ योजना में समायोजन करने के लिए तैयार है। वर्तमान में, 40,000 अग्निवीरों के दो बैच सेना में सेवारत हैं, जिनमें से 7,385 अग्निवीरों के तीन बैचों ने नौसेना में प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, तथा 4,955 अग्निवीर वायु प्रशिक्षु वायु सेना में प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस के इस दुष्प्रचार अभियान से सेना के भीतर भी असमंजस की स्थितियां बन गईं थीं। जिस प्रकार नई पेंशन स्कीम को लेकर कांग्रेस ने हंगामा मचाया था उसी प्रकार सेना की पेंशन के आधार पर वैमनस्य के बीज बोने की कोशिश की गई है।गृह मंत्रालय के सूत्र इस हंगामे को विदेश प्रवर्तित मानने से इंकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि भले ही ये दुष्प्रचार किन्हीं विदेशी ताकतों के इशारे पर किया जा रहा हो लेकिन इससे हमें आंतरिक सुधार का अवसर मिला है और हम अपने सैनिकों और उनके परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक सुधार की संभावना पर पूरी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
भोपाल,10 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कार्यस्थल पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों और छेड़छाड़ के मामलों में भोपाल पुलिस रसूखदारों के सामने उसी तरह लाचार नजर आती है जैसे कभी बिहार और उत्तर प्रदेश की पुलिस देखी जाती थी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का नाम लेकर किए जाने वाले अपराधों पर तो पुलिस इतनी डरी हुई होती है कि उसकी कार्रवाई घोड़े को उड़ना सिखाने जैसी हो जाती है। हबीबगंज पुलिस की महिला थानेदार ने यहां दर्ज एक छेड़छाड़ के प्रकरण की कार्रवाई केवल इसलिए विलंबित कर रखी है ताकि आरोपी को पीड़ित पक्ष पर समझौते के लिए दबाव बनाने का भरपूर अवसर मिल जाए। मामला विगत पांच अप्रैल को घटित प्रकरण क्रमांक 0189 का है। जिसमें आरोपी ने युवाओं को विदेशों में शिक्षा दिलाने का मार्गदर्शन करने वाली एक छात्रा से न केवल छेड़खानी की बल्कि उससे मारपीट भी कर डाली थी। पहले से इसी संस्थान में कार्य कर रहे इस युवक को डर था कि यदि लड़की ने अपना काम बखूबी संभाल लिया तो उसकी नौकरी जा सकती है। कथित तौर पर कबूतरबाजी में लिप्त इस युवक से संस्थान पहले से इतना परेशान था कि उसके संचालक ने छात्रा को सारी जवाबदारी सौंपना शुरु कर दिया था। बताया जाता है कि आरोपी ने षड़यंत्र पूर्वक संस्थान का कैमरा दूसरी दिशा में मोड़ दिया। तमाम कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया और फिर संस्थान के ही कक्ष में छात्रा से छेड़खानी कर डाली। यही नहीं जब छात्रा ने आपत्ति की तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी कर दी। छात्रा ने जैसे तैसे भागकर अपने मित्र को बुलाया और अपनी बड़ी बहन व अन्य मित्रों को इस घटना की जानकारी दी। छात्रा की बड़ी बहन जो कि बड़ी कंपनी में अधिवक्ता है उसने छात्रा के साथ हबीबगंज पुलिस थाने पहुंचकर वारदात की शिकायत दर्ज कराई।शुक्रवार को पुलिस ने शिकायत पर प्राथमिकी तो दर्ज कर ली लेकिन अब तक आरोपी को गिरफ्तार करके चालान प्रस्तुत नहीं किया है। आरोपी को पुलिस ने बुलाकर अपनी निगरानी में ले लिया है लेकिन उसे घर जाने दिया जाता है और उसे छात्रा पर दबाव बनाकर समझौता करने के लिए राजी करने का अवसर दिया जा रहा है। छात्रा के बताए अनुसार जब उसने आपत्ति की तो आरोपी ने अपने पत्रकार चाचा का मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के साथ फोटो दिखाया और धमकाया कि मेरा परिवार मुख्यमंत्री का करीबी है। मैं तुम्हें कहीं भी उठवा लूंगा।मेरे चाचा पत्रकार भले हैं लेकिन वे असल में माफिया सरगना हैं। पत्रकारों का एक अपराधी संगठन उनके साथ है ऐसे में तुम्हारी आवाज मीडिया भी नहीं सुनेगा। पुलिस को तो मैं इतना धमका दूंगा कि वो तुम्हारी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी। इसलिए तुम कहीं शिकायत करने की तो सोचना भी मत। छात्रा के पिता भी पत्रकार हैं और वो असली पत्रकारों की अहमियत अच्छी तरह समझती थी। उसने बहादुरी दिखाते हुए आरोपी के विरुद्ध पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी। उसकी अधिवक्ता बहिन के तर्कों के सामने पुलिस ने प्रकरण तो कायम कर लिया लेकिन आरोपी को जेल भेजने के बजाए वह उसे अवसर उपलब्ध करवा रही है। हबीबगंज थाना प्रभारी श्रीमती सरिता बर्मन का कहना है कि हमने प्रकरण कायम कर लिया है। अभी पीड़िता उसकी बहिन और उसकी मां के बयान लिए जाने हैं। आसपास के अन्य साक्ष्य भी एकत्रित किए जाने हैं। इसके बाद ही कोई कार्रवाई होगी। जब चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा तभी आरोपी के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई हो पाएगी। आरोपी भी अपनी बात कह रहा है इसलिए हम उसकी बात को भी अनसुना नहीं कर सकते। सभी पक्षों के बयान पूरे होते ही चालान कोर्ट में पेश हो पाएगा। जब उनसे पूछा गया कि कोई दबाब तो नहीं है तो उन्होंने कहा पुलिस ने प्रकरण कायम कर लिया है। बिट्टन मार्केट स्थित मैट्रो प्लाजा में संचालित फिनटेक एडु (FINTECH_EDU) संस्थान ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपी को नौकरी से निकाल दिया है लेकिन पुलिस इस आरोपी के प्रति नरमी बरत रही है। सत्यम त्रिपाठी नामक इस आरोपी के चाचा ने कथित तौर पर कई पत्रकारों के माध्यम से छात्रा के पिता पर दबाव बनाने का प्रयास किया है कि वे अपनी बेटी को समझा लें क्योंकि यदि आरोपी को जेल जाना पड़ेगा तो बेटी को खामखां बदनामी झेलना पड़ेगी। जबकि छात्रा अपनी बात पर कायम है और उसका कहना है कि आरोपी को कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए ताकि घर से बाहर काम करने निकलने वाली युवतियों के प्रति होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन के मुद्दे पर बड़ी बड़ी कार्यशालाएं करने वाली मध्यप्रदेश पुलिस की अपराधियों पर मेहरबानी का ये मुद्दा आगे चलकर उसकी बदनामी का सबब भी बनने जा रहा है।
भोपाल, 12 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । पास्को एक्ट के आरोपी और कतिपय भ्रष्ट जजों के टुकड़खोर प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पास्को एक्ट में प्राप्त शिकायत और सबूतों को लेकर आज भोपाल पुलिस ने जिला अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया। पुलिस कार्रवाई को बरसों से धता बता रहे गुप्ता के विरुद्ध पुलिस के पास ढेरों कहानियां हैं लेकिन अब तक वह झूठे साक्ष्यों का इस्तेमाल करके अदालतों को झांसा देता रहा है। पुलिस ने पास्को एक्ट में लगभग नौ महीनों की जांच के बाद ये चालान प्रस्तुत किया है। अदालत के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बूटकॉम कंप्यूटर नाम से एमपीनगर में दूकान चलाने वाले गुप्ता के विरुद्ध उसके एक करीबी मित्र की बेटी ने शिकायत की है कि गुप्ता ने उसके साथ अनैतिक संबंध बनाने की नियत से छेड़खानी की थी। पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही पास्को एक्ट में ये पकरण दर्ज किया है। कथित तौर पर बैंकों , व्यवसायियों और आम नागरिकों से धोखाघड़ी करने वाले इस कुख्यात आरोपी के विरुद्ध बरसो से पुलिस के पास शिकायतें तो प्राप्त होती रहीं हैं लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह अक्सर बच निकलता था। सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता को न्यायपालिका के कुछ भ्रष्ट जजों, बैंकों से अरबों रुपयों का लोन लेकर गड़प जाने वाले ठगों और पुलिस के कुछ भ्रष्ट अफसरों का संरक्षण रहा है। कुछ जजों के विरुद्ध ठगी करने वाले गुप्ता को एक समय में कुख्यात अपराधी रहे मुख्तयार मलिक ने भी धमकी दी थी लेकिन अदालतों और पुलिस अफसरों की शरण लेकर वह बच निकला। करोड़ों रुपयों की ठगी के बाद कई व्यापारियों ने अपराध जगत की शरण लेकर भी गुप्ता से अपनी रकम वापस पाने का प्रयास किया लेकिन हर बार वह चकमा देकर बच निकलता था। पुलिस को इस बार उसकी पास्को एक्ट की वारदात की सूचना मिली तो उसने पूरी छानबीन करके चालान प्रस्तुत किया है। गुप्ता ने अपने अदालती सहयोगियों के माध्यम से जमानत पाने का आवदेन प्रस्तुत किया है। हालांकि उसके विरुद्ध शिकायत करने वाली पुलिस और फरियादी ने अदालत से अनुरोध किया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसका जमानत आवेदन खारिज करके उसे जेल भेजा जाए। उत्तर प्रदेश के लालगंज का रहने वाले गुप्ता का परिवार कथित तौर पर भाजपा से भी जुड़ा है और इलाके का कुख्यात माफिया है।नाबालिग लड़कियों से रेप के अपराधी प्यारे मियां को तो शिवराज सिंह चौहान की पुलिस ने जेल के सीखचों में पहुंचा दिया था लेकिन गुप्ता ने सरकार में अपनी जमावट करके कानूनी प्रक्रियाओं को कमजोर करवा लिया था। देखना है कि डॉ. मोहन यादव की पुलिस के सामने गुप्ता की चालबाजियां चल पाती हैं या नहीं। हालांकि गुप्ता कई बार अंडरवर्ल्ड की धमकियों को लेकर पुलिस संरक्षण हासिल करता रहा है।
भोपाल 08 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भैरवगढ़ केन्द्रीय जेल की पूर्व अधीक्षक ऊषा राज से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए लेकर पोस्टिंग देने वाले पूर्व जेल डीजी संजय चौधरी को क्लीनचिट दिए जाने के बाद आईपीएस कैलाश मकवाना अब बुरी तरह उलझ गए हैं। लोकायुक्त संगठन ने संजय चौधरी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच फिर शुरु कर दी है लेकिन सीआर के नंबर बढ़वाने के फेर में कैलाश मकवाना की कथित ईमानदारी सवालों के घेरे में आ गई है। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट सामने आ जाने के बाद मकवाना की कथित तौर पर सुधार दी गई गोपनीय चरित्रावली के आदेश जारी करने को अब कोई अफसर राजी नहीं है।
आईपीएस कैलाश मकवाना को पूरा भरोसा था कि वरिष्ठता क्रम में आगे होने की वजह से वे एक बार मध्यप्रदेश के पुलिस मुखिया बन जाएंगे लेकिन लोकायुक्त संगठन से हटाए जाने के बाद अब पूरी न्यायपालिका उन्हें सींखचों में धकेलने में जुट गई है। दरअसल शिवराज सिंह सरकार के कतिपय भ्रष्ट अफसरों की सलाह पर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त में भेजा गया था। इन भ्रष्ट अधिकारियों के मामले बंद करने की सुपारी लेकर गए मकवाना ने कार्यभार संभालते ही संगठन के रिकार्ड रूम की सफाई शुरु करवा दी। कहा गया कि बरसों पुराना कचरा पड़ा होने से पुलिस की कार्रवाई में व्यवधान होता है। उन्होंने कई लंबित प्रकरणों में भी खात्मा लगाना शुरु कर दिया । उन्हें उम्मीद थी कि यदि कोई शोरगुल नहीं हुआ तो धीरे धीरे फालतू प्रकरण बताकर कई भ्रष्ट अफसरों को भी बरी करवा लिया जाएगा।
इस श्रंखला में मकवाना ने प्रेमवती खैरवार, डीएसपी श्रीनाथ सिंह बघेल, राकेश कुमार जैन, डीएसपी रामखिलावन शुक्ला, मोहित तिवारी, नरेश सिंह चौहान को क्लीनचिट देकर उनके प्रकरण बंद कर दिए। इन प्रकरणों में न तो प्रक्रिया का पालन किया गया, न जांच की गई और न ही लोकायुक्त संगठन के विधि सलाहकारों की टीप ली गई। लोकायुक्त से स्वीकृति का इंतजार भी नहीं किया गया। इस बात से संगठन में पदस्थ विधि अधिकारी(न्यायाधीश) चौंक गए। उनकी अनुशंसा पर लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने जो जांच कमेटी बिठाई उसने पाया कि सभी प्रकरणों को गैरकानूनी ढंग से बंद किया गया है।
तभी उज्जैन की केन्द्रीय जेल की अधीक्षक ऊषा राज का घोटाला सामने आ गया। उनके संरक्षण में काम करने वाले जेल के सहायक लेखाधिकारी ने लगभग सौ कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों से लगभग तेरह करोड़ से ज्यादा रुपया निकाल लिया। इसमें से कुछ रकम उन्होंने अपने खातों में डाली और कुछ रकम ऊषा राज को भेंट की। पुलिस जांच में पता चला कि इसी रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर पूर्व डीजी संजय चौधरी को भी पोस्टिंग के एवज में पहुंचाया गया था। इधर जेल डीजी संजय चौधरी के खिलाफ चल रही लोकायुक्त जांच मकवाना ने उनकी बताई कहानी को सच मानकर बंद कर दी ।संजय चौधरी का कहना था कि उनके पास मौजूद आय अधिक संपत्ति उन्होंने घोड़ों की जगह खच्चर बेचकर नहीं कमाई है। उनकी स्कूल मास्टरनी सास ने अपनी करोड़ों रुपयों की चल संपत्ति और सोना अपनी बेटी के बच्चों को गिफ्ट के रूप में दिया है । सागर के एक स्कूल से रिटायर सास के पास इतनी दौलत कभी रही ही नही ये बात सभी जानते थे। इन दिनों इंदौर जेल में बंद ऊषा राज भी सागर की ही मूल निवासी रही है। जब उन्हें उज्जैन की केन्द्रीय जेल भैरवगढ़ में पोस्टिंग दी गई तो विभाग के कई अफसरों ने हो हल्ला भी मचाया था।
अब लोकायुक्त संगठन की जांच कमेटी की अनुशंसा पर जो छानबीन शुरु हुई है उसमें संजय चौधरी तो झमेले में पड़े ही हैं साथ में कैलाश मकवाना भी उलझ गए हैं। खुद को कथित तौर पर बेगुनाह बताने के लिए मकवाना कह रहे हैं कि उनके पूर्व तीन डीजी संजय राणा, अनिल कुमार, और राजीव टंडन भी संजय चौधरी के प्रकरण को बंद करने की सिफारिश कर चुके थे पर केवल उनकी खात्मा रिपोर्ट को ही गलत ठहराया जा रहा है। दरअसल जांच कमेटी की निगाह में जो तथ्य आए थे उनके आधार पर ही फैसला लेने वाले मकवाना को दोषी पाया गया है। देखना है कि पुलिस मुखिया पद का ये खिलाड़ी कहीं खुद अपराधी न करार दिया जाए।
भोपाल, 07 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाकर खुद को ईमानदार दिखाने का जतन करने वाले आईपीएस कैलाश मकवाना की सीआर फिर खटाई में पड़ गई है। उन्हें लोकायुक्त संगठन से विदा करने वाली जांच रिपोर्ट की वजह से विभाग और शासन दोनों ने गोपनीय चरित्रावली के सुधार पर चुप्पी साध ली है। ऐसे में मकवाना की बिगड़ी सीआर सुधरना तो दूर बल्कि उनकी समूची प्रशासनिक दक्षता पर सवालिया निशान लग गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भले ही भोले भंडारी बनकर मकवाना की सीआर अपग्रेड कर दी थी लेकिन बताते हैं कि जांच रिपोर्ट की असलियत सामने आने के बाद उन्होंने भी इससे किनारा कर लिया है और अब तक उसका आदेश जारी नहीं हो पाया है। मकवाना की बात को सही मानकर जिन लोगों ने उनकी सीआर सही होने की खबर छापना शुरु कर दी थी वे अब अपना समाचार असत्य हो जाने से परेशान हैं। मकवाना को जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने लोकायुक्त संगठन भेजा था तब कतिपय भ्रष्ट अफसरों के हरकारों ने ढोल पीटा था कि अब लोकायुक्त संगठन में बेईमानों को बचाना संभव नहीं होगा। उन्होंने चंद प्रकरणों का हवाला देकर जताने की कोशिश की थी कि मकवाना ईमानदार अधिकारी हैं इसलिए अब तक उन्हें फील्ड से दूर रखा जाता रहा है। पहली बार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। मकवाना ने भी संगठन में जाते ही ताबड़तोड़ ढंग से आधे दर्जन अफसरों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण बंद कर दिए और उन्हें दोषमुक्त करार दे दिया। इसके लिए उन्होंने न तो लोकायुक्त एनके गुप्ता से कोई राय मशविरा किया और न ही उनकी विधिवत अनुमति प्राप्त की।जबकि इस प्रक्रिया में कई विधिवेत्ता और जांच अधिकारी शामिल होते हैं जिनकी रायशुमारी और कानूनी सलाह के बाद ही किसी को दोषमुक्त करार दिया जाता है। लोकायुक्त संगठन के सूत्र बताते हैं कि जब मकवाना ने संगठन के कानून वेत्ताओं को खलनायक बताते हुए खुद को राबिनहुड की तरह पेश करना शुरु कर दिया तो वहां पदस्थ कई जजों के कान खड़े हो गए। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता से की।इस पर संगठन की ओर से एक जांच समिति नियुक्त की गई जिसने पाया कि मकवाना ने अपने अधिकारों से इतर जाकर इन प्रकरणों में खात्मा लगाया है। भ्रष्टाचार के तथ्यों को तोड़ मरोड़कर उन्होंने आरोपियों को बरी कर दिया। जब जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की तो इसका अवलोकन कानून वेत्ताओं से करवाया गया। इसके बाद पुर्नावलोकन भी कराया गया। जब सभी ने पाया कि भ्रष्ट अधिकारियों को गैरकानूनी ढंग से बरी किया गया है तो ये जांच रिपोर्ट लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के पास पहुंची। यहां से इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में लाया गया। तब जाकर मात्र छह महीनों के भीतर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन से बाहर कर दिया गया। जिन प्रकरणों में मकवाना ने खात्मा लगवाया था उनके विरुद्ध दुबारा प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरु की गई। आईपीएस कैलाश मकवाना इससे बहुत क्षुब्ध हुए और उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलना शुरु कर दिया। सार्वजनिक ट्वीट और परिजनों के ट्वीट के साथ उन्होंने अपने कई समर्थकों के सहारे मीडिया में हल्ला मचाना शुरु कर दिया ताकि उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट के तथ्यों को अत्याचार करार दिया जा सके। कुछ सूत्रों का कहना है कि मकवाना ने विशेष पुलिस स्थापना में अपनी पोस्टिंग केवल इसलिए कराई थी ताकि वह शिवराज सरकार में आका बने बैठे कतिपय वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों में खात्मा लगाकर उन्हें बचा सकें और पुरस्कार के रूप में खुद को पुलिस महानिदेशक के रूप में पदस्थ करवा सकें। वरिष्ठता क्रम में वे आगे जरूर हैं लेकिन उनकी गोपनीय चरित्रावली की वजह से वे दौड़ से बाहर हो रहे थे। उनके विक्टिम कार्ड का असर इतना तो जरूर पड़ा कि बाद में आई कमलनाथ सरकार ने उन्हें अपने लिए उपयोगी समझा और उन्हें फिर एक बार मैदानी नियुक्ति दे दी गई। इस बार कमलनाथ सरकार को भी चार महीनों में समझ में आ गया कि मकवाना की तोड़ फोड़ और व्यक्तिगत लाभ उठाने की प्रवृत्ति उसके लिए खतरनाक साबित हो रही है। इसे देखते हुए उन्हें एक बार फिर विभागीय कामकाज संभालने के लिए पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन भेज दिया गया। पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन में संविदा नियुक्त वाली एक इंजीनियर हेमा मीणा के पास जब करोड़ों रुपयों की जायदाद बरामद हुई तब एक बार फिर मकवाना सवालों के घेरे में आ गए. आईपीएस उपेन्द्र जैन के साथ उन पर भ्रष्टाचार के छींटे उड़े क्योंकि उनके अधीनस्थ कर्मचारी इतने लंबे समय तक भ्रष्टाचार करती रही और विभाग के प्रमुखों को कानों कान खबर भी न हो ऐसा तो संभव नहीं हो सकता था। आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना के औंधे मुंह गिर पड़ने से पुलिस विभाग के कई अफसरों ने राहत की सांस ली है। पुलिस महानिदेशक पद के लिए दौड़ में शामिल इस विकेट के गिर जाने से शैलेष सिंह, अरविंद कुमार, सुधीर कुमार शाही जैसे कई अफसरों को अब अपनी राह आसान दिखने लगी है। केन्द्र सरकार ने ऐसी नियुक्तियों को लेकर एक साफ व्यवस्था बना रखी है कि जो आईएएस या आईपीएस अधिकारी लगातार दस सालों तक फील्ड में काम नहीं कर पाएं वे विभाग प्रमुख पद के लिए अयोग्य समझे जाते हैं। इस मापदंड पर मकवाना फिसड्डी साबित हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अब तक किसी भी सरकार ने या अफसरों ने दस सालों तक फील्ड में सेवा करने का अवसर नहीं दिया है।
पचास लाख रुपए की एफडी करने के बजाए राशि को बीमा में लाक कर दिया
भोपाल,19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारत के मुद्रा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक्सिस बैंक ने इन दिनों आम निवेशकों को लूटने का अभियान चला रखा है। अपना संचालन खर्च घटाने के लिए बैंक ने ऐसे नए युवाओं को फील्ड में उतार दिया है जो निवेशकों के भरोसे से खिलवाड़ करके उन्हें ठगने का काम कर रहे हैं। हाल ही में बैंक की बिलासपुर शाखा में ऐॅसी ही ठगी की शिकार प्रोफेसर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उसके साथ पचास लाख रुपए की धोखाघड़ी की गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रसायन शास्त्र की एक प्राध्यापिका ने अपनी बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए एक्सिस बैंक बिलासपुर में राजकिशोर नगर शाखा में पचास लाख रुपए जमा किए थे। बैंक के अधिकारियों का कहना था कि शाखा के आला अधिकारी इस राशि को कहीं निवेश कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस पर प्राध्यापिका ने एफडी कराने के लिए सहमति दे दी। इस पर बैंक मैनेजर चेतन श्रीवास ने अपने कर्मचारी रोहिणी वल्लभ साहू को भेजकर प्रोफेसर से कहलवाया कि वे बैंक का एप डाऊनलोड करवा लें तो ओटीपी के माध्यम से एफडी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बैंक कर्मचारी ने प्रोफेसर का मोबाईल लिया और कहा कि वह इस पर बैंक का एप डाऊनलोड कर रहा है। इस बीच उसने मैक्स लाईफ की पालिसी की सहमति के लिए ओटीपी बुला लिया और ओके करके मोबाईल वापस प्रोफेसर को लौटा दिया। प्रोफेसर को लगा कि उनकी रकम बैंक के कर्मचारी ने एफडी में लगा दी है।उन्हों इस बीमे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
कुछ हफ्तों बाद जब प्रोफेसर के घर के पते पर पालिसी डिलीवर हुई तो उन्हें पता चला कि उनकी रकम बैंक ने बीमा कंपनी में निवेश कर दी है। उन्होंने पता किया तो बैंक के कर्मचारी ने बताया कि मैक्स लाईफ इंश्योरेंस एक तरह से एक्सिस बैंक की ही सहयोगी फर्म है। उनका पैसा भले ही बीमे में रखा है लेकिन उन्हें ब्याज भी मिलेगा और जब चाहेंगी रकम मात्र पाच हजार रुपए का शुल्क चुकाकर वापस मिल जाएगी। इसके बाजवूद प्रोफेसर बैंक गई और कहा कि उन्होंने रकम एक्सिस बैंक की एफडी में निवेश की है मैक्स लाईफ में नहीं। इस पर बैंक मैनेजर ने कहा कि दोनों ही सहयोगी कंपनियां हैं इसलिए उनकी रकम पर एफडी की ही तरह ब्याज मिलता रहेगा।
प्रोफेसर ने बैंक मैनेजर से कहा कि मुझे अपनी रकम बीमा में निवेश नहीं करनी, मैं तो अपनी आय पर पूरा कर देती हूं मुझे किसी प्रकार की छूट नहीं चाहिए। मैं तो ये रकम अपनी बेटी की शादी के लिए बचाकर रखना चाहती हूं। बैंक के अधिकारियों ने उन्हें कहा कि उन्हें अपना टारगेट पूरा करना पड़ता है। इसलिए हम खाते को बीमा राशि दिखाकर वापस ले लेते हैं। अब जबकि प्रोफेसर को अपनी बेटी की शादी की तैयारी के लिए रकम की जरूरत पड़ी तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उनकी रकम लाक हो गई है और समय अवधि पूरा होने पर ही वापस मिलेगी। इस पर प्रोफेसर हतप्रभ रह गईं और उनकी मनःस्थिति गड़बड़ा गई। उन्हें लगा कि अब बेटी की पढ़ाई, रोजगार और शादी के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा।
प्रोफेसर ने अपने साथ हुई इस धोखाघड़ी की शिकायत बैंक मैनेजर के अलावा पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर को भी की है। उन्होने पुलिस से निवेदन किया है कि मुझे अंधेरे में रखकर बैंक के कर्मचारियों ने धोखाघड़ी की है। लोगों ने बताया कि इस तरह की धोखाघड़ी बैंक के लोग अपने सैकड़ों ग्राहकों से कर चुके हैं । पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरु कर दी है। बैंक के अधिकारी अब कह रहे हैं कि वे बीमा कंपनी से बात कर रहे हैं ताकि प्रोफेसर की रकम वापस दिला सकें। बीमा कंपनी का कहना है कि उन्होंने बीमा राशि को बाजार में निवेश कर दिया है। इस संबंध में वह बैंक को उसका कमीशन भी दे चुके हैं,इसलिए पूरी राशि वापस करने के लिए हेड आफिस से अनुमति लेनी होगी।
मैक्स लाईफ बीमा कंपनी के भोपाल रीजन के मैनेजर ललित कुदेसिया का कहना है कि ये मामला एक्सिस बैंक की शाखा में घटित हुआ है। हमारी कंपनी ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की है। बैंक ने कहा तो हमने बीमा कर दिया। इस संबंध में किसी भी कार्रवाई के लिए आपको बैंक से ही संपर्क करना चाहिए। इधर एक्सिस बैंक भोपाल के मैनेजर विपिन तिवारी का कहना है कि बैंक की बिलासपुर शाखा ने ये बीमा किया है। उसे एफडी करना थी या बीमा इस संबंध में केवल वहीं के मैनेजर कुछ बता सकते हैं। आपने हमें सूचना दी है तो हम अपने मुंबई मुख्यालय को सूचना भेज देंगे। जब उनसे पूछा गया कि एक्सिस बैंक में इस तरह की धोखाघड़ी क्यों की जा रही है तो उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि हमारी ब्रांच में इस तरह की धोखाघड़ी नहीं होती। जब उनसे इस ब्रांच में इसी तरह के एक प्रकरण के बारे में पूछा गया तो वे बगलें झांकने लगे।दरअसल एक्सिस बैंक प्रबंधन ने ही अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को बीमा बेचने का टारगेट दे रखा है जिसे पूरा करने के लिए वे ग्राहकों को गुमराह करके उनकी पूंजी बीमा योजना में जमा करवा देते हैं।
सूत्र बताते हैं कि एक्सिस बैंक अपनी जमा राशियों को टैक्स से बचाने के लिए और आय न दिखाने के लिए मैक्स लाईफ के अलावा अन्य बीमा कंपनियों में भी निवेश दिखाता है। इससे उसे टैक्स में छूट भी मिल जाती है और कम ब्याज पर रकम भी मिल जाती है।सेबी ने हालांकि इस तरह की धोखाघड़ी रोकने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस तरह की धोखाघड़ी को संज्ञान में लेते हुए रिजर्व बैंक ने भी गाईडलाईन जारी की हैं। जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता इस तरह की घोखाघड़ी के शिकार हो रहे हैं। यह प्रकरण सेबी और बैंकिंग लोकपाल की निगाह में भी लाया जा रहा है। देखना है कि धोखाघड़ी के इस साफ प्रकरण में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय कैसे दिलाएगी।
भोपाल, 19 फरवरी ( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर राज्य के खजाने से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों की धरपकड़ शुरु कर दी है। ऐसे ही एक गिरोह के सरगना की कारगुजारियां जब पुलिस के सामने उजागर हो गईं तो पुलिस ने कुख्यात ठग और रमनवीर इंपोरियम के कथित संचालक रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापा मारा जहां उसका गुर्गा पुलिस के हत्थे चढ़ गया।जिसने अपने मालिक के कहने पर अपराध करना स्वीकार कर लिया है। मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है।
सैडमेप भोपाल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर महिला अधिकारी ने पुलिस थाना क्राईम ब्रांच में शिकायत की थी कि किसी व्यक्ति ने उनके और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी के बीच फर्जी बातचीत का कथित स्क्रीन शाट वायरल किया था जिसमें आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ऐसी चैट बरामद की और पाया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, सेक्रेट्री एवं कमिश्नर ,एमएसएमई सेक्रेटरी , स्पोर्ट्र्स सेक्रेटरी आदि के बीच असत्य, मनगढ़ंत, और काल्पनिक आपत्तिजनक चैट बनाकर उसका स्क्रीन शाट सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इस चैट का मकसद इन अधिकारियों को बदनाम करना था। ये सब साजिशें केवल इसलिए की जा रहीं थीं क्योंकि सैडमेप से सिक्यूरिटी के नाम पर लूट कर रहे फर्जी ठेकों को निरस्त कर दिया गया था। फर्जी तरीकों से नौकरियां करने वाले कई निठल्ले अधिकारियों को भी निकाल बाहर किया गया था।
पुलिस ने पाया कि मुख्य अभियुक्त ब्लैक लिस्टेड रतन इंपोरियम का रमनवीर अरोरा इस षड़यंत्र का मुख्य साजिश कर्ता है। वह एक समाचार पत्र प्रकाशित करता है और पुलिस पर रौब जमाकर बच निकलता रहा है। इसने टाईम्स आफ इंडिया समूहब का एक पुरस्कार भी खरीदा था जिसे दिखाकर वह खुद को बड़ा समाजसेवी बताता रहता है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध मुख्यालय, और पुलिस उपायुक्त अपराध को अज्ञात आरोपी को खोजकर गिरफ्तार करने और वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिये थे।
निर्देश प्राप्त होने पर पुलिस उपायुक्त अपराध द्वारा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अपराध के नेतृत्व एवं सहायक पुलिस आयुक्त अपराध के मार्ग दर्शन में थाना क्राइम ब्रांच की टीम गठित कर तत्काल सक्रिय किया गया जिनके द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकि साधनो/संसाधनों के आधार पर पता लगाया कि इंदौर के रहने वाले जावेद मोहम्मद पिता शफी मोहम्मद खान ने अपने सेठ रमनवीर सिंह अरोरा के कहने पर उक्त फर्जी कूटरचित स्क्रीन शॉट, एप के माध्यम से बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था जिसे क्राइम ब्रांच भोपाल की टीम द्वारा कडी मशक्कत के बाद गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है,मामले में अनुसंधान एवं फरार मुख्य आरोपी रमनवीर सिंह अरोरा की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।राजधानी से एक दोपहर में प्रकाशित समाचारपत्र का मालिक इस गिरोह का संरक्षक बताया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि उसने जावेद मोहम्मद पिता सफी मोहम्मद खान उम्र 35 साल निवासी म.न 17 राजा मार्ग,धार हाल पता, म.न 249 सिल्वर नगर,मोहम्मद इसरार का मकान, गली नं 2 थाना खजराना इंदौर कक्षा -5 वीं अप.क्र.28/24 धारा 469,500 भादवि इजाफा धारा 201,204,471,120 बी भादवि के अंतर्गत गिरफ्तार किया है। वह अनपढ़ महिलाओं को कुछ पैसे देकर उनके नाम पर सिम खरीद लेता था और उसी के माध्यम से दुष्प्रचार करता था।