खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह


अटल आडवाणी के खास सिपहसालार प्रमोद महाजन ने जब मध्यप्रदेश पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा था तब तक वे एक संघर्षरत नेता के रूप में ही पहचाने जाते थे। उमा भारती के तूफानी नेतृत्व के सामने शिवराज सिंह एक टिमटिमाते दिए की भांति थे। बाबूलाल गौर महज केयर टेकर के रूप में थे और उन्हें किनारे खिसका दिया गया था।भाजपा की लगभग डेढ़ दो दशक की सत्ता संभालने के बाद राज्य भले ही साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे में डूब गया हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान आज महाराजा बनकर सामने उपस्थित हैं। वे बार बार ये अहसास कराने का प्रयास भी करते रहते हैं कि आज भी राज्य में उनकी हैसियत कम नहीं हुई है। उनके बेटे की शादी में राजधानी भोपाल में जो रिसेप्शन हुआ वह उनके इन्हीं तेवरों का प्रदर्शन था। साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी तो इस जश्न के सामने फीकी नजर आती है। शादी के इस जश्न ने भाजपा की रीति नीति और सोच को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए डाक्टर मोहन यादव ने जिस पारिवारिक आयोजन को सादगीपूर्ण तरीके से मनाया उसे शिवराज सिंह ने आखिर क्यों अपनी शान की कुतुब मीनार बनाकर पेश किया।

मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने बेटे की शादी को केवल पारिवारिक आयोजन बनाया


लगभग साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी राजस्थान के पुष्कर स्थित पुष्करा रिसोर्ट से हुई थी।पुत्र वैभव की शादी में शामिल होने के लिए सीएम डाक्टर मोहन यादव भी पहुंचे थे। दो दिनों के इस आयोजन में ध्यान रखा गया था कि लोगों को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आयोजन के आधे घंटे पहले पुष्कर सरोवर और ब्र्हमा मंदिर खाली करा दिया था। बाद में रिसोर्ट में पुत्र वैभव और पुत्र वधू शालिनी यादव का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। इस आयोजन में पूजा अर्चना के बाद मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव ने अपने पति के चरण धोए और आशीर्वाद लिया।
इसके विपरीत शिवराज सिंह चौहान के बेटे की शादी का आयोजन तीन चरणों में और भव्यता के बीच संपन्न किया जा रहा है। पहले चरण में जैत गांव में नगर भोज दिया गया जिसमें आसपास के गांवों के करीब एक लाख लोग शामिल हुए। राजधानी के भव्य समारोह में लगभग बीस हजार से अधिक लोगों ने नगर भोज में हिस्सा लिया। इसी तरह दिल्ली का आयोजन भी भव्य रखा गया है। शिवराज सिंह के करीबी बताते हैं कि ये आयोजन जन सहयोग से विशाल बन गया है। टेंट और भोजन की व्यवस्था माजिद भाई संभाले हुए थे। उनके पिता कंजे मियां राजधानी के नामी गिरामी टैंट हाऊस के मालिक थे। अपने कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान उन्हें लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों से अधिक का भुगतान कर चुके हैं। इसी तरह सत्ता में रहते हुए उन्होंने जिन अफसरों और ठेकेदारों को भरपूर कमाई कराई वे सभी उनकी कृषि मंत्री की भूमिका से आशान्वित हैं।
इस आयोजन की भव्यता राजनेताओं के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। भाजपा खुद को आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी मानती है। उसके पूर्वज चना चबेना खाकर संगठन को गढ़ने का कार्य करते रहे हैं। जबकि उसी भाजपा के वर्तमान राजनेता खुद को महाराजा साबित करने में जुटे हुए हैं। खुद को किसान पुत्र बताकर शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की सत्ता में लंबी पारी खेली और वे अब इसी छवि को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री भी हैं। उनके बेटे की हैसियत इतनी बड़ी नहीं कि इतना विशाल आयोजन कर सके। खुद शिवराज सिंह चौहान की घोषित आय भी इतनी नहीं कि वे इतना बडा आयोजन कर सकें। इसके बावजूद उनके आयोजन की भव्यता बताती है कि इसमें आय से अधिक काले धन का इस्तेमाल किया गया है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा, दिल्ली की आप सरकार पर घोटालों और कुप्रबंधन के आरोप लगाकर सत्ता में पहुंची है। मोदी स्वयं केजरीवाल को अनुभवी चोर की संज्ञा देते रहे हैं। सरकार बनाने के बाद भाजपा वहां केजरीवाल सरकार के घोटालों की जांच कराए जाने की बात भी कह रही है। ऐसे में क्या मोदी अपनी ही कैबिनेट के मंत्री शिवराज सिह चौहान की संपत्तियों की जांच कराने का साहस दिखा पाएंगे। क्या वे उस काले धन के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की पहल करवा पाएंगे जिसकी वजह से आज मध्यप्रदेश साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों के कर्ज में डूबा हुआ है।

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