मोबाईल लुटेरों से निपटने पुलिस ने बनाया नया ठिकाना

भोपाल,28 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद मोबाईल लूट और चैन खींचने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। इससे निपटने के लिए पुलिस ने मोबाईल खोजने की यूनिट को पुरानी विधानसभा के सामने स्थित नए कंट्रोल रूम में कंप्यूटरीकृत सेंटर में शिफ्ट कर दिया है।

मोबाईल लुटेरों से निपटने के लिए बनाए इस नए ठिकाने पर गुमशुदा मोबाईलों की सर्च की व्यवस्था की गई है। पुलिस की साईबर सेल यूनिट ने बढ़ती मोबाईल लूट की घटनाओं के मद्देनजर ये सेंटर जन सुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किया है जबकि मोबाईल नेटवर्क के विश्लेषण की जिम्मेदारी साईबर क्राईम विंग को दी गई है।

राजधानी के सभी सार्वजनिक स्थलों पर मोबाईल लुटेरों ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं हैं। वे बेखौफ होकर जेबकतरी, मोबाईल चोरी और चैन स्नेचिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इन सभी स्थानों पर सरकारी प्रबंधन ने न तो कैमरों की व्यवस्था की है और न ही निगरानी तंत्र विकसित किया है। पुलिस की कार्यप्रणाली भी फील्ड आधारित नहीं रही है इसलिए लुटेरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

खासतौर पर आरटीओ दफ्तर, अस्पतालों और हाट बाजारों में जेबकतरों के गिरोह बेखौफ होकर वारदातें कर रहे हैं जिनके सामने पुलिस पूरी तरह असहाय साबित हो रही है। पुलिस प्रशासन के निकम्मेपन का ही नतीजा है कि चोरी किए गए अधिकतर मोबाईल ढूंढ़े नहीं जा सके हैं। भोपाल पुलिस ने गुम मोबाईल की रिपोर्ट लिखवाने के लिए नए पुलिस कंट्रोल रूम की तीसरी मंजिल पर पूरी यूनिट शुरु की है।

भोपाल जिले की सीमा में मोबाईल गुम हो जाने पर सूचनाएं इसी नए कंट्रोल रूम के सेंटर पर जमा किए जा रहे हैं। भोपाल पुलिस की वेवसाईट www.bhopalpolice.com/lostphone.html पर जो फार्म दिया गया है उसकी दो प्रतियों में यहां शिकायत की जा सकती है। आवेदन प्रस्तुत करते समय वोटर कार्ड या अन्य किसी पहचान पत्र के साथ मोबाईल बिल की फोटोकापी भी प्रस्तुत करनी होगी। दो प्रतियों में भरे इस फार्म के अलावा संबंधित थाने में दिए गए आवेदन की फोटोकापी भी लगानी होगी। आवेदन जमा करने का समय प्रातः 11 बजे से शाम 5 बजे तक है। अवकाश के दिन आवेदन पत्र जमा नहीं किए जाएंगे। मोबाईल मिलने पर फार्म में दिए गए नंबरों पर सूचना भेजी जाएगी। ध्यान रहे यहां मोबाईल गिर जाने या फिर गुम जाने पर ही फार्म लिया जाएगा। मोबाईल चोरी या छीने जाने की रिपोर्ट संबंधित पुलिस थाने में ही करनी होगी।

अब इस नई व्यवस्था के चलते क्राइम ब्रांच में साइबर मामलों की जांच नहीं होगी. वहीं पेंडिंग 1530 मामलों को भी क्राइम ब्रांच से साइबर क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया है.दो साल में क्राइम ब्रांच के पास पहुंची 1530 शिकायतों को अब साइबर क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है. इस ब्रांच की जिम्मेदारी एएसपी संदेश जैन को दी गई. जिले में सात एएसपी रैंक के अधिकारियों के पदों में से ये भी एक पद है. एससपी संदेश जैन ने बताया कि क्राइम ब्रांच पहुंचने वाले फरियादी साइबर क्राइम ब्रांच आना शुरू हो गए हैं. एक दिन में करीब 25 शिकायतें आ रही हैं. शिकायतों की जांच के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई है. जांच को प्रभावी तरीके से कर निराकरण भी कम समय में किया जा रहा है. साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायतें पूरे मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती जा रही हैं. ऐसे में पुलिस ने भी इस चुनौती से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है. अब प्रदेश स्तर पर नहीं, बल्कि जिला स्तर पर बनाई जा रही साइबर क्राइम ब्रांच इससे जुड़े अपराधों की जांच कर रही है. इसकी शुरुआत भोपाल से की गई. आने वाले दिनों में दूसरे बड़े महानगरों में जल्द शुरू किया जाएगा.

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