बंडा में जहरीली शराब लाने वाला अभी तक नहीं पकड़ाया

भोपाल, 07 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सागर के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 21 तक पहुंच गया है। 120 से अधिक लोगों के उपचार की जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ मृतकों की मौत मेथेनॉल के विषाक्त प्रभाव से होने की पुष्टि हुई है। इस घटना ने अवैध शराब के कारोबार के साथ आबकारी और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद सरकार ने सागर के सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित किया है। उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया। बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी पूरण लाडिया पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है। प्रभावित क्षेत्र की शराब दुकानों को सील किया गया है और 30 से अधिक आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।

सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सागर पहुंचकर बीएमसी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने इलाज में लापरवाही नहीं होने देने और अवैध शराब के पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिम्मेदार लोगों को नहीं बख्शने की बात कही है।

मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में शराब तैयार करने, भंडारण, परिवहन और वितरण से लेकर विभागीय लापरवाही तक की पड़ताल होगी। सागर पुलिस की प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से नकली शराब आने और उस पर फर्जी रैपर, सील और क्यूआर कोड लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि ललितपुर पुलिस ने इस दावे को भ्रामक बताया है। इससे जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर शराब माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सागर एसपी अनुराग सुजानिया के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन पर मौतों के वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप भी लगाया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार से जवाब मांगा और शराब माफिया के संरक्षण का मुद्दा उठाया है। पटवारी के 50 मौतों के दावे की फिलहाल सरकारी आंकड़ों से पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच इंदौर-उज्जैन के किसी शराब कारोबारी की सप्लाई और उसे कारोबार से हटाने के लिए जहरीली शराब कांड रचे जाने जैसी चर्चाएं भी हैं। फिलहाल जांच एजेंसियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच का यह संभावित कोण हो सकता है, तथ्य नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में जहरीली शराब स्थानीय नेटवर्क तक कैसे पहुंची और उसे रोकने में आबकारी तथा पुलिस तंत्र क्यों विफल रहा। मजिस्ट्रियल और पुलिस जांच के निष्कर्ष ही यह स्पष्ट करेंगे कि यह केवल शराब माफिया की साजिश थी या इसके पीछे किसी बड़े कारोबारी हित और प्रशासनिक संरक्षण की भी भूमिका थी।

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