भोपाल, 01 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सैकड़ों लोगों से ठगी और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध करने वाला कंप्यूटर व्यवसायी प्रकाश चंद्र गुप्ता इन दिनों जेल की सजा से बचने के लिए तरह तरह के कानूनी दांवपेंचों का इस्तेमाल कर रहा है। उसने अपने वकील के माध्यम से पीडि़ता पर दबाव बनाकर पास्को एक्ट की कड़ी सजा से बचने का जाल बिछाया है। वह अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध भी शिकायतें करके खुद को निर्दोष बताने का प्रयास कर रहा है।
बताया जाता है कि राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम नामक दूकान चलाने वाला गुप्ता अपने ग्राहकों को झांसा देकर ठगने के लिए कुख्यात रहा है। उसके विरुद्ध कई व्यापारियों और ग्राहकों ने भी ठगी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। जब इस बार उसके विरुद्ध एक नाबालिग बालिका ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने सख्त जांच करके उसे अदालत के माध्यम से जेल पहुंचा दिया । तभी से वह अपने बचाव में कई तरह के षड़यंत्र कर रहा है।ये आदतन अपराधी अब तो सजा से बचने के लिए पुलिस और अदालतों के विरुद्ध भी तरह तरह की झूठी शिकायतें कर रहा है।
पीड़िता की ओर से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की गई है कि आरोपी गुप्ता स्वयं एवं अपने वकील के माध्यम से मनगढ़ंत लिफाफे भेज रहा है जिन पर लीगल नोटिस लिखा है। वह पहले से अन्य प्रकरणों में भी इस तरह के लिफाफे भेजकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास करता रहा है। पूर्व में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय चौधरी ने ऐसे ही लिफाफे भेजने के कारण गुप्ता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। तब उन लिफाफों में ऊटपटांग चित्र और रद्दी कागज भेजे गए थे। श्री चौधरी ने लिखा था कि उनके पक्षकार मनीष बाधवानी को इस तरह की चिठ्ठियां भेजना बंद करें। इस प्रकार के षड़यंत्र करना न्याय के लिए घातक है। ये दस्तावेज पक्षकार की ओर से अदालत को भी दिए गए हैं।
ज्ञात हुआ है कि विगत में एक लड़की अनन्या पाराशर ने एमपीनगर पुलिस थाने को शिकायत की थी कि जब गुप्ता ने उसे कबाड़ा कंप्यूटर बेचा और वह शिकायत करने पहुंची तो गुप्ता ने अपनी ही दूकान में बंदूक तानकर गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी। लड़की की शिकायत पर एमपीनगर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 0210 । 2022 दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। बाद में शिकायत कर्ता लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए कुख्यात प्रकाश गुप्ता ने केनरा बैंक कोहेफिजा शाखा की मैनेजर सुधा दर्शिका से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी के आरोप में जेल की हवा खाना पड़ी थी। इससे बचने के लिए गुप्ता ने सुधा दर्शिका के विरुद्ध भोपाल जिला न्यायालय में एक झूठा प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया । बाद में केनरा बैंक और सुधा दर्शिका को भी वह इसी तरह के फर्जी लिफाफे भेजने लगा। केनरा बैंक ने आम जनता को सावधान करने के लिए राजधानी के एक अखबार में आम सूचना प्रकाशित करवाई थी कि बैंक की ओर से गुप्ता से ये रकम वसूली जानी है। वह कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है ।
कमलानगर पुलिस ने भी महिलाओं की शिकायत पर प्रकाश गुप्ता के विरुद्द चार करोड़ सत्ताईस लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पुलिस ने अपराध दर्ज करके गुप्ता को गिरफ्तार किया था तब न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। यह प्रकरण क्रमांक आरटी 4137 । 20 अभी अदालत में विचाराधीन है।
गुप्ता की ओर से न्यायाधीशों पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट तक में झूठी शिकायतें की जाती रहीं हैं। अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड और मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट विनोद पाटीदार की झूठी शिकायतें हाईकोर्ट के सतर्कता विभाग ने जांच के बाद झूठी पाए जाने पर खारिज कर दीं थीं।

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