Month: December 2025

  • साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    01 लाख से अधिक राशि की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर लागू होगी ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

    भोपाल 25दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)। ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘साइबर सुरक्षित भारत’ के दृष्टिकोण और अक्टूबर 2024 में उनके ‘मन की बात’ संबोधन के अनुरूप है। 

         केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में साइबर अपराध से निपटने हेतु ऐतिहासिक और तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रशासनिक सुशासन को सुदृढ़ करने हेतु एक नवीन अभिनव पहल के रूप में  ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्‍यवस्‍था का शुभारंभ किया गया। जिसका उद्घाटन ग्वालियर में आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के दौरान माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर ई-जीरो एफआईआर की पहली प्रति माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहाँ ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को लागू किया गया है। यह पहल पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

             इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास), उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मंत्री जल संसाधन एवं प्रभारी मंत्री ग्वालियर श्री तुलसीराम सिलावट तथा मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग श्री चेतन्य काश्यप की विशिष्ट उपस्थिति रही।

           मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री जी का मानना है कि जैसे हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही हमें साइबर स्वच्छता को भी अपनी संस्कृति बनाना होगा।

    प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य पुलिस को अपराधियों से अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

    साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही पलों में अपराधियों के हाथों चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा ई-जीरो एफआईआर की अवधारणा को लागू किया गया है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके।

     2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—नागरिक-केंद्रित हैं और इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ प्रदान करना है।

    BNSS की धारा 173 के अंतर्गत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित हुआ हो।

    -जीरो एफआईआर एक क्रांतिकारी व्यवस्था है जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (विशेष रूप से 1 लाख से अधिक की हानि) के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज करती है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की बाधाओं को समाप्त कर जांच की प्रक्रिया को तुरंत प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों को एकीकृत करती है, जिसमें नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), I4C – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र एवं CCTNS – अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम सम्मिलित है। 

    ई-जीरो एफआईआई पंजीकरण की प्रक्रिया पांच चरणों में संपन्‍न होती है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में शिकायत दर्ज कराना होती है, जिसमें पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है। 1 लाख रूपए से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केन्‍द्रीय साइबर पुलिस हब को भेजा जाता है। दूसरे चरण में ऑटोमेटिक जनरेशन के अंतर्गत CCTNS सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है। तीसरे चरण में स्‍वीकृति (Acknowledgement) के अंतर्गत पीड़ित को तुरंत ई-जीरो एफआईआर नंबर उपलब्ध कराया जाता है। चौथे चरण में समीक्षा एवं हस्‍तांतरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थाने भेजा जाता है। पांचवे एवं अंतिम चरण में नियमित एफआईआर दर्ज की जाती है, जिसमें  शिकायतकर्ता को 3 दिवस के भीतर अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराने की प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है।

    साइबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व

    साइबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को “गोल्डन ऑवर” माना जाता है। जिसमें यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही राशि को फ्रीज (रोक) किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य कानूनी रूप से तत्काल सुरक्षित किए जाते हैं।

    देश में कहीं से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा से क्षेत्राधिकार से मुक्ति मिलती है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा प्राप्‍त होती है। एफआईआर जल्दी दर्ज होने से बैंकिंग चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पीड़ित सीधे पोर्टल पर स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड कर सकते हैं। 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रणाली के लागू होने से यह स्‍पष्‍ट है कि तकनीक के माध्यम से न्याय को न केवल तेज, बल्कि आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया है।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी

    हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दुनिया के नक्शे पर मध्यप्रदेश आज भारत की नई सांस्कृतिक पहचान के साथ उभर रहा है। यहां के आतिथ्य संस्कार से आकर्षित होकर प्रदेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार इसे देखते हुए प्रदेश के तमाम धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों पर ठहरने की आवासीय सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि दुनिया भर के पर्यटक मध्यप्रदेश आएं और यहां की विकास यात्रा के सहभागी बनें।


    राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में संस्कृति मंत्री ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति देश के हृदय प्रदेश के कला संसार में साफ तौर पर देखी जा सकती है। हमारे प्रदेश के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से दुनिया भर में प्रेम का संदेश दिया है। यही वजह है कि इस साल दुनिया भर से लगभग 14 लाख पर्यटक मध्यप्रदेश आए हैं। हमने अपने धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ दिया है। इससे यहां आने वाले पर्यटक एक साथ सभी लक्ष्य पूरे कर लेते हैं।


    उन्होंने पिछले दो सालों में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभागों की सफलताओं का लेखा जोखा प्रेस के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के माध्यम से हमें जनता के जो सुझाव मिल रहे हैं हम उनके अनुसार अपने कार्यक्रमों में फेरबदल कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक संवाद के इस महा अभियान में आम जनता की सीधी भागीदारी हो। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर भी उन्होंने कई जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि हम चारों दिशाओं में फोरलेन सड़कों के साथ ठहरने के सुविधायुक्त आवास भी बढ़ा रहे हैं। इससे दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक आत्मिक संतुष्टि मिल पाएगी।

  • मंत्रिपरिषद ने कहा किसानों को मिलेंगे ज्यादा पावर के पंप

    मंत्रिपरिषद ने कहा किसानों को मिलेंगे ज्यादा पावर के पंप


    भोपाल,22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सिंचाई के लिये सोलर पम्प स्थापना की योजना में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। संशोधन अनुसार कृषकों को स्वीकृत सोलर पम्प स्थापना क्षमता से एक क्षमता अधिक तक का विकल्प प्रदाय किया जायेगा। अब 3 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 5 एच.पी. और 5 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 7.5 एच.पी. का सोलर पंप प्रदाय करने का विकल्प दिया जाएगा।


    योजना के प्रथम चरण में अस्थायी विद्युत कनेक्शन संयोजन वाले किसानों अथवा अविद्युतीकृत किसानों को सोलर पम्प का लाभ दिया जाएगा। योजना अनुसार 7.5 एचपी क्षमता तक का सोलर पम्प पम्प लगाने के लिए अस्थाई विद्युत कनेक्शन धारी कृषक का अंश 10% रहेगा। शासन द्वारा 90% की सब्सिडी दी जाएगी।


    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की कुसुम-ब योजना को प्रदेश में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” नाम से 24 जनवरी 2025 से लागू किया गया है। इसका क्रियान्वयन राज्य में मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। इस निर्णय से सोलर पंप की स्थापना से विद्युत पंपों को विद्युत प्रदाय के लिए राज्य सरकार पर अनुदान के भार को सीमित किया जा सकेगा एवं विद्युत वितरण कम्पनियों की वितरण हानियों को कम किया जा सकेगा।

  • गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग प्रायोगिक रूप से राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदिशंकराचार्य गुरुकुलम शुरू करने जा रहा है। इन गुरुकुलों में वेद, योग, संस्कृत के साथ गाय को लेकर भी पाठ्यक्रम शामिल रहेंगे।उन्होंने कहा कि अब तक बच्चों को स्कूलों में गाय पर निबंध लिखना सिखाया जाता था पर अब हम उसे दैनंदिनी जीवन का हिस्सा बनाने जा रहे हैं।


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग का दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए बताया कि हम गाय के बारे में बच्चों को पढ़ाएंगे ताकि नई पीढ़ी गाय के महत्व को आसानी से समझ पाए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तौर पर ये बात साबित हो चुकी है कि गाय से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। गाय से निरोग रहने के लिए वातावरण मिलता है. गाय को लेकर दूसरे देशों में भी रिसर्च किए जा रहे हैं।


    राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के खाली पद भरे जाएंगे. इसके अलावा पहली बार ये भी हुआ है कि पात्र शिक्षकों को प्रमोट किया गया है. पहली बार ही 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तबादला ऐसे विद्यालयों में किया गया है जहां टीचर्स की कमी है. अब स्कूलों में हाईटेक अटेंडेंस हो रही है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत नियमित और 96 फीसदी अतिथि शिक्षकों की जियो टैग एप से हाजिरी दर्ज की जा रही है।


    मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा “राइट टू एजुकेशन के तहत सबसे महत्वपूर्ण काम है कि बच्चों को समय से सिलेबस मिले और सरकार उन्हें किताबें उपलब्ध कराए. किताबें अगर समय पर नहीं मिलती तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. पिछले वर्ष हमने 100 फीसदी जिन बच्चों को मुफ्त में मिलना चाहिए, हम स्कूल में भेजने में कामयाब रहे. इस साल हम एक कदम और आगे जा रहे हैं. हम विकास खंड स्तर पर बुक फेयर लगाएंगे. बच्चे शासन स्तर पर न्यूनतम दरों पर पुस्तकें खरीद सकते हैं.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 8 वीं कक्षा तक 86 प्रतिशत बच्चे स्कूलिंग नियमित रख पा रहे हैं. 10वीं तक के बच्चों के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट के साथ ये आंकड़ा 54 फीसदी है. वहीं 12वीं तक पहुंच पाने वाले छात्रों की संख्या घटकर 32 प्रतिशत ही रह जाती है. बीते 3 वर्षों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है. वर्ष 2024-25 में प्रथामिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 6.8 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गई है.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “पहली कक्षा में पिछले साल के मुकाबले में 19 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. इसी तरह से नौवीं से 12वीं में इनरोलमेंट करीब 4 फीसदी बढ़ा है. समग्र आईडी के जरिए 90 फीसदी बच्चों की ट्रैकिंग पूर्ण कर ली गई है. जिसमें 6-14 वर्ष के विद्यालय से बाहर के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है.”


    एक सवाल के जवाब में मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मौजूदा स्थिति में प्रदेश के 3367 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है. जिनमें 17 ट्रेड और 42 जॉब रोल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बीते दो वर्षों से 690 विद्यालयों में कृषि ट्रेड भी शुरू किया गया है.”
    मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में कई चुनौतियां हैं, लेकिन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। हर साल अप्रैल में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है, जिससे स्कूलों में नामांकन बढ़ा है। इस साल 100 फीसदी किताबें समय पर स्कूलों तक पहुंचाई गईं।


    उन्होंने बताया कि कक्षा 1 में नामांकन पिछले साल की तुलना में 19.6 फीसदी बढ़ा है, जबकि सरकारी स्कूलों में यह बढ़ोतरी 32.4 फीसदी रही। कक्षा 9 से 12 तक के नामांकन में भी 4 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले तीन सालों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट कम हुआ है और साल 2024–25 में ड्रॉपआउट दर घटकर शून्य हो गई।


    मंत्री ने बताया कि अब हर विकासखंड में बुक फेयर लगाया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे कम कीमत पर किताबें खरीद सकेंगे। प्रदेश में 30,281 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। 275 संदीपनी और 799 पीएमश्री स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। 3,367 स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा शुरू की जा चुकी है। आने वाले तीन सालों में स्कूलों में सीटें बढ़ाने, स्कूल का समय कम करने और आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना है।


    राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मालवी, बुंदेलखंडी और निमाड़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में किताबें बच्चों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदि शंकराचार्य गुरुकुल बनाया जाएगा, जहां वेद और योग की शिक्षा दी जाएगी। भोपाल में शिक्षा विभाग की एक बहुमंजिला इमारत भी बनाई जाएगी।


    मंत्री ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक 86 फीसदी, कक्षा 1 से 10 तक 54 फीसदी और कक्षा 1 से 12 तक 32 फीसदी बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। ड्रॉपआउट रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
    इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल, परिवहन विभाग के सचिव श्री मनीष सिंह, परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह एवं विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई

    उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई


    भोपाल, 21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज सरकार के दो साल पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने बिजली बिलों में वसूले जाने वाले अनाप शनाप अधिभारों को लेकर उनकी खिंचाई कर दी। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि बिजली सुधारों के नाम पर जब ऊर्जा विभाग ने हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लिया है तो फिर उपभोक्ताओं से ये अतिरिक्त शुल्क की वसूली क्यों की जा रही है। बिजली मंत्री ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बिजली की मांग बढ़ती जा रही है पर बिजली कंपनियां बिना कटौती बिजली सप्लाई करके देश में मिसाल कायम कर रहीं हैं। स्मार्टमीटर, सब्सिडी और कर्मचारियों की भर्ती करके व्यवस्था में सुधार किया गया है।


    मध्य प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अभी 12 दिसंबर को 19,113 मेगावाट की बिजली मांग भी हमने बिना किसी कटौती के पूरी की है। इसके लिए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सुधार किए हैं और बिजली प्रबंधन मजबूत किया है।खेती के लिए अनियमित बिजली सप्लाई के मुद्दे पर श्री तोमर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।


    उन्होंने बताया कि हम 25,081 मेगावाट बिजली खरीदने का अनुबंध करके बिजली की सप्लाई लगातार बनाए हुए हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के बाद बिजली कंपनियों में नियमित भर्तियां नहीं हो रहीं हैं इससे हमें अपनी सेवाओं को किराए पर लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अक्षमता की शिकायतें मिलने के बाद मंत्री परिषद ने बिजली कंपनियों में 50 हजार से अधिक नियमित पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है।


    प्रद्युम्न सिंह तोमर ने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से समय पर और सही बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वितरण केन्द्रों के प्रभारी अधिकारी प्रतिदिन पांच उपभोक्ताओं से फोन पर सीधे संवाद कर रहे हैं। स्मार्ट मीटर के जरिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मिलने वाली सस्ती बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इस अवधि में की गई खपत पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।


    ऊर्जा मंत्री ने दावा किया कि सरकार अलग अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में बिजली सब्सिडी दे रही है। हर माह करीब एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से पहले 100 यूनिट बिजली के लिए केवल 100 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों को देय राशि का मात्र 7 प्रतिशत भुगतान दो किस्तों में करना होता है. अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के एक हेक्टेयर तक भूमि वाले और पांच एचपी पंपधारक किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि पांच हार्स पावर के पंप धारकों से आठ हार्स पावर का बिल क्यों वसूला जा रहा है तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आने पर हम कार्रवाई करेंगे।


    उन्होंने बताया कि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को हर साल करीब 26 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उद्योगों को भी रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सरकार को हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और कई सरकारी प्रतिष्ठान तक समय पर बिजली का भुगतान नहीं करते इसलिए हमारी उधारी बढ़कर ग्यारह हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। इसकी भरपाई ऊर्जा विभाग को ही करनी पड़ती है।


    इस मौके पर विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले, वित्तीय सलाहकार रंजीत सिंह चौहान,और अन्य प्रमुख अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों

    नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जब यूनानी चिकित्सा की डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब उठाकर उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास किया तो कट्टर पंथियोंऔर नीतिश विरोधियों ने अपनी ओछी राजनीति शुरु कर दी। इस घटनाक्रम को नीतिश विरोधियों ने महिला और इस्लाम का अपमान बताना शुरु कर दिया । इस शोरगुल से घबराई नुसरत अब सरकारी नौकरी ज्वाईन करने को तैयार हो गई है। नीतिश ने कभी नरक बन चुके बिहार को तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर हो रहे प्रांत में बदलने का भगीरथ किया है। दंगे,लूट और अराजकता के दौर में जा चुके बिहार की गाड़ी को पटरी पर लाना कभी लगभग असंभव माना जाता रहा है। ऐसे में बिहार की तरुणाई की आंखों में विकास को लेकर जो संकल्प और दृढ़ विश्वास पनपा है वह अद्भुत है। युवाओं के मुस्कुराते चेहरे आज बिहार के नव सूर्योदय की झलक दिखाते हैं। कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें मूर्ति का सौंदर्य उभारता है तो वह बार बार हर कोण से उसकी मुस्कान को उभारने का प्रयास करता है । नीतिश कुमार भी कुछ इसी तरह बिहार के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के 74 वें पड़ाव पर वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि बिहार के युवाओं की आंखों में आगे बढ़ने के कैसे स्वप्न पल रहे है।उनकी राजनीतिक पारी का लंबा इतिहास रहा है। उस यात्रा में नुसरत जैसी न जाने कितनी नारियां उनके साथ कदम मिलाकर चलती रहीं हैं। इतने लंबे इतिहास में कभी नीतिश कुमार को अय्याश या चरित्र हीन व्यक्ति नहीं माना गया है। वे एक संवेदनशील राजनेता हैं जो अपने राज्य की बेहतरी के लिए दुर्दांत माफिया से भी टकराता रहा है। बिहार के आपराधिक गिरोह जिस तरह संसाधनों को लूटते रहे हैं और वहां की तरुणाई मजबूर होकर अन्य राज्यों व दूर देशों में काम करने को मजबूर की जाती रही हो वहां एक युवती वो भी मुस्लिम समाज के बीच से निकलकर डाक्टर बनने जा रही हो ये सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास करने वाले नीतिश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं । जिन चयनकर्ताओं ने उसे एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए चुना वे भी उसकी योग्यता और सामाजिक समर्पण के कायल थे तभी तो उन्होंने उसे नौकरी के लिए चुना। ये नियुक्ति नीतिश कुमार के निर्देश पर नहीं हुई थी। जाहिर है कि उस क्षण को जिसे नीतिश कुमार भाव विभोर होकर देखने का प्रयास कर रहे थे उसे पूरी दुनिया में रह रहे बिहारी भी प्रसन्न भाव से देख रहे हैं। केवल कुछ कट्टरपंथी और विरोधी इस पर बखेड़ा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने इतिहास पढ़ा है उन्होंने अंग्रेजों, मुगलों, जमींदारों, छुटभैये राजाओं की वे कहानियां खूब पढ़ी हैं जिनमें वे राज्य की नवयुवतियों को अपनी सेज पर ले जाने का कुकर्म करते देखे गए थे। इन्हीं बैचैनियों से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जन्म लिया। आज कोई भी शासक या राजा ऐसी जुर्रत भी नहीं कर सकता है। नुसरत की उम्र तो उनके नाती पोतियों के बराबर है।वे सार्वजनिक स्थल पर उसके साथ अश्लील व्यवहार करने की सोच भी कैसे सकते हैं। वे जिस प्रशंसा भरे भाव से नुसरत को देख रहे थे वह दृश्य न केवल बिहार की आगे बढ़ती एक लड़की की कहानी सुनाता है बल्कि भारत के मुसलमानों की आगे बढ़ती नई पीढ़ी का दृष्टांत भी देता है। मुस्लिम वोटरों के जो ठेकेदार बरसों से भाजपा और उसके सहयोगी गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं वे इस घटनाक्रम से जरूर बैचेन घूम रहे हैं। उन्हें भय है कि यदि भारत के मुसलमानों की नई पीढ़ी के बीच से हिंदुत्व वादी राजनीति को मुस्लिम विरोधी बताने वाला नेरेटिव टूट गया तो वे कभी सत्ता का ख्वाब भी नहीं देख पाएंगे। जिस तरह हिंदू मुस्लिम और जातिगत व भाषाई राजनीति करके उन्होंने भारतीय समाज में फूट के बीज बोए थे वह षड़यंत्र धराशायी हो जाएगा। इसीलिए वे तरह तरह के दुष्प्रचार करके समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये अच्छा है कि नुसरत ने उनके बहकावे में न आकर अपने पैरों पर खड़े होकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा का निर्णय लिया है वह प्रशंसनीय है और स्वागत करने योग्य है। नुसरत के समान देश के सभी युवाओं को संकरे पैमानों से बाहर आकर विकास यात्रा का सहयात्री बनना है,तभी हम एक नए भारत का स्वप्न साकार कर पाएंगे।

  • अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल

    अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल


    भोपाल, 19 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज पत्रकारों को बताया कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल पर ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ या VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee For Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)) के नाम से जो योजना शुरु की गई है वह बेरोजगारी दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी।

    इसी तरह प्रधानमंत्री जनमन योजना अब दूर दराज की बस्तियों को भी मुख्य धारा से जोड़ने का कारगर उपाय बनने जा रही है। राजधानी के मिंटो हाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों से मीडिया को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की है। मध्य प्रदेश में श्रमिकों के हित में भी अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।भारत सरकार ने श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए जो जी राम जी योजना लागू की है वह अब गांवों में खुशहाली लाने का प्रवेश द्वार साबित होगी।


    प्रसन्नता का विषय है कि भारत की संसद ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025) को पारित किया है। यह विधेयक मनरेगा में व्यापक वैधानिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्रामीण रोज़गार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ संयोजित करेगा तथा जवाबदेही, बुनियादी ढांचे के परिणामों और आय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।गांव के विकास के बिना प्रदेश और राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारा सौभाग्य है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में ग्राम विकास है। उनकी भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के विकास हेतु सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग का उत्तरदायित्व मिला है। हमारी सरकार ने विगत दो वर्षों में जो कार्य किए हैं उनकी जानकारी इस प्रकार है :-
    विशेष उल्लेखनीय बिंदु
    तीनों स्तर की पंचायतों के कार्यालय भवनों हेतु स्वीकृतियां प्रदान कीं तथा उनकी डिजाइन में परिवर्तन भी किया ताकि भविष्य में उनके ऊपरी मंजिलों का भी निर्माण किया जा सके।
    2472 अटल ग्राम सेवा सदनों (ग्राम पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 922.20 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    106 अटल सुशासन भवनों (जनपद पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 557.08 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    05 अटल जिला सुशासन भवनों (जिला पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 49.98 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    जीवनदायिनी माँ नर्मदा के परिक्रमा पथ को सुगम बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। इस हेतु आश्रय स्थलों के निर्माण हेतु 231 स्थल चिन्हित किए गए हैं। इन स्थलों पर प्रथम चरण में पौधारोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 4.13 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। 19 स्थलों पर आश्रय स्थलों एवं यात्री प्रतिक्षालय के निर्माण हेतु 10.5 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इन आश्रय स्थलों का निर्माण पर्यटन विकास विभाग के माध्यम से प्रारंभ भी हो चुका है।
    नदियों एवं जलवायु का संरक्षण हम सभी की सामूहिक चिंता का विषय है। मैंने प्रदेश की 106 नदियों के उद्गम स्थलों तक की यात्रा की है। हमारी सरकार इन उद्गम स्थलों को संरक्षित एवं संवर्धित करने का प्रयास कर रही है। हमने 89 नदियों के उद्गम स्थलों पर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 2.92 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के पुराऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण भी हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। हमने तामिया एवं भीमबेटिका क्षेत्र के विकास हेतु मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को 2 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों को सुव्यवस्थित करने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। इसके लिए दिसंबर, 2026 तक की समय सीमा भी तय की है। इस अवधि में सभी श्मशान घाटों को अतिक्रमण मुक्त करवाकर फेंसिंग उपरांत उनमें पौधरोपण करना तथा उन्हें मुख्य सड़क से एप्रोच रोड बनाकर जोड़ने का कार्य इस अवधि में किया जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रदेश ने उल्लेखनीय कार्य किया है इसके प्रथम चरण में 72975 किलोमीटर लंबाई की 18948 सड़कों का निर्माण किया गया द्वितीय चरण में 4891 किलोमीटर की 373 सड़कों का निर्माण हुआ तथा तीसरे चरण में 11886 किलोमीटर की 984 सड़कों का निर्माण किया गया। विगत दो वर्षों में इन तीनों चरणों में 913 किलोमीटर लंबाई की सड़क तथा 305 फूलों का निर्माण किया गया है।
    आरसीपीएलडब्ल्यूईए अंतर्गत 18 अप्रैल 107 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण हुआ है।
    प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत 1033 संपर्क विहीन बस्तियों हेतु 2218 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई हैं।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण हेतु 10602 बस हटे चिन्ह अंकित की गई है जिनके लिए 1849 किलोमीटर की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।
    रोजगार गांरटी योजना :-
    कार्यों के स्थल चयन हेतु वैज्ञानिक आधार पर करने हेतु SIPRI सॉफ्टवेयर विकसित
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 में SIPRI सॉफ्टवेयर से समस्त कार्यों (जैसे खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर इत्यादि) के उपयुक्त स्थल का चयन
    वर्ष 2025-26 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 1500 लाख, कुल सृजित : 1404 लाख (94%)
    वर्ष 2024-25 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 2000 लाख, कुल सृजित : 1897 लाख (95%)
    राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर
    कैच द रेन अभियान (जल संचय, जन भागीदारी- अप्रैल 2024 से मई 2025) – देश में मध्यप्रदेश को चतुर्थ स्थान एवं खंडवा जिले को प्रथम पुरुस्कार प्राप्त
    एक बगिया माँ के नाम परियोजना अंतर्गत रु 750 करोड़ की लागत से 31,142 कार्य लिए गए।
    माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर चिन्हित आश्रय स्थल के में 138 परिसरों में पौधरोपण कार्य।
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 अंतर्गत, रु 3000 करोड़ के कार्य लिए गए
    खेत तालाब – 86,360 लागत रु 2048 करोड़
    कूप रिचार्ज – 1,05,203 लागत रु 263 करोड़
    अमृत सरोवर – 536, लागत रु 138 करोड़
    पूर्व वर्षों के प्रगतिरत 24,358 कार्यों की पूर्णता
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2024 अंतर्गत रु. 1368 करोड़ के 60,428 कार्य कराये गए।
    राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन
    लखपति दीदी- Digital Ajeevika register के अनुसार SHG के ऐसे सदस्य जिनके परिवार की मासिक आय ₹10,000 या उससे अधिक है, की श्रेणी में 11,27,037 परिवार पिछले 2 वर्षों में बने।
    135 FPO का टर्नओवर ₹1,608 करोड़। (306 करोड़ रूपये की बढ़ोत्‍तरी)
    प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण
    कुल 11.72 लाख लक्ष्‍य में से 11.46 लाख आवास स्‍वीकृत देश में प्रथम स्‍थान
    PM-JANMAN
    लक्ष्‍य- 1.85 लाख
    स्‍वीकृत- 1.84 लाख
    पूर्ण- 1.29 लाख देश में प्रथम स्‍थान
    स्‍वच्‍छ भारत मिशन
    खुले में शौच मुक्ति के स्थायित्व हेतु 2,87,279 पारिवारिक व्यक्तिगत शौचालय (IHHL) एवं 1,417 सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण।
    16,056 ग्रामों (अब तक कुल 99.35%) ग्राम ठोस अपशिष्ट प्रबंधित (SWM) घोषित।
    4,318 ग्रामों (अब तक कुल 99.46%) ग्राम तरल अपशिष्ट प्रबंधित (LWM) घोषित।
    गोबरधन योजना अंतर्गत 73 बायो गैस सयंत्रों का निर्माण ।
    नवाचार
    सभी ग्राम पंचायतो में CSC ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से गैर वित्तीय आधार पर अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन। 30 नवम्बर तक 1084 पंचायतों में अटल ई-सेवा केंद्र प्रारंभ हो चुके है।
    मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना 2025 प्रकाशित हो चुकी है। ग्रामों के चयन की गतिविधियां अंतिम चरण में है।
    श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास 5वां राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि से किया जाना एवं इस हेतु इस वित्तीय वर्ष की द्वितीय किश्त जारी।
    23,011 ग्राम पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु प्लानर सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
    विकेंद्रीकृत कौशल प्रशिक्षण – आदिवासी बाहुल्य /नक्सल प्रभावित जिलों में विशेषकर जनजाति समूहों की परंपरागत कला और ज्ञान को संरक्षित, प्रोत्साहित, और व्यवसायिक बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम प्रारंभ।
    नवाचार -स्वच्छता साथी Wash on Wheels सेवा
    ODF के निरंतरता के लिए मोबाइल ऐप द्वारा ऑनलाइन बुकिंग सेवा जिसके अंतर्गत घरेलू एवं संस्थागत शौचालयों की आधुनिक मशीनों एवं उपकरणों के माध्यम से साफ़-सफ़ाई
    प्रशिक्षित स्वच्छता साथियों के द्वारा दो-पहिया वाहन के माध्यम से त्वरित साफ़-सफ़ाई
    सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने हेतु पूर्णत: व्यावसायिक मॉडल
    वर्तमान में प्रगति-
    37,499 ग्राम मैप
    1,577 क्लस्टर निर्माण पूर्ण
    1,484 स्वच्छता साथी का पोर्टल पर पंजीकरण पूर्ण
    आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना
    नर्मदा परिक्रमा पथ पर चयनित स्‍थलों पर 20 से 25 कि.मी की पारस्‍परिक दूरी पर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रध्‍दालुओं के लिये सर्वसुविधायुक्‍त आश्रय स्‍थल/यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण।
    सभी पंचायत भवनों में अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन सुनिश्चित किया जायेगा।
    पंचायत सचिवो एवं अन्य विभागीय रिक्त पदों पर भर्ती सुनिश्चित की जाएगी।
    प्रदेश के समस्त ग्रामीण क्षेत्र के श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास एवं निर्बाध पहुंच मार्ग सुनिश्चित किया जाना
    अर्ध शहरी एवं बड़ी ग्राम पंचायतो के व्यवस्थित्त विकास हेतु मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (कॉलोनी विकास) नियमों का युक्तियुक्तकरण करते हुए व्यवस्थित विकास कराया जायेगा|
    ग्रामीण क्षेत्रो में कॉलोनियो के रजिस्ट्रेशन एवं विकास इत्यादि की अनुमति केंद्रीकृत ऑनलाइन व्यवस्था तथा EWS हितग्राहियों संबंधी समस्त जानकारियों का पंचायत दर्पण पोर्टल पर प्रदर्शन|
    पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से पंचायतो का वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना|
    पंचायत दर्पण पोर्टल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के पोर्टल से इन्टीग्रेट कर अनिवार्य TDS कटोत्रा सुनिश्चित करना|
    पंचायतो की सशक्त करने के दृष्टिकोण से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां ऑनलाइन जारी किया जाना |
    मानव संसाधन के बेहतर एवं प्रभावी प्रबंधन हेतु HRMS पोर्टल का प्रभावी उपयोग।
    दोहरी संपर्कता हेतु प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम संपर्कता परियोजना
    अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना,मुख्‍य जिला सड़क, अन्‍य जिला सड़क इत्‍यादि से जोड़ा जा चुका है।
    कई स्‍थानों पर 02 ग्रामों/पंचायतों/मजरे-टोलों को एक-दूसरे से जोड़ने हेतु व संदीपनी विद्यालय तक संपर्कता की मांग, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणजनों से प्राप्‍त होती है।
    दो गांव/पंचायत/मजरे-टोले को दोहरी संपर्कता उपलब्‍ध कराए जाने हेतु प्रदेश में मनरेगा अंतर्गत “मुख्‍यमंत्री सुगम सम्‍पर्कता परियोजना” लागू की जा रही है
    प्रदेश में लगभग रु. 1000 करोड़ के कार्य लिए जा सकेंगे (3 करोड़ प्रति जनपद पंचायत)
    कार्य स्थल चयन तथा DPR तैयार करने हेतु RIMS पोर्टल विकसित।
    3300 ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक के रिक्त पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही
    एक बगिया माँ के नाम अंतर्गत लिए गए 30,000 से अधिक कार्यों को पूर्ण करना तथा कार्बन क्रेडिट से जोड़ना ।
    किचिनशेड के निर्धारित राशि रू. 2.24 – 3.25 लाख में कुल 3000 किचिनशेड में मनरेगा कंवरजेंस से 10 लाख तक के उन्‍नत किचनशेड का निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी से नामकरण हेतु अनुरोध है।
    पीएम पोषण पोर्टल, निरीक्षण, ऑडिट, AMS, MIS से संबंधित समस्‍त पोर्टल का एक डेशबोर्ड तैयार करना।
    शतप्रतिशत लक्षित शालाओं में नवीन बर्तनों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना।
    शाजापुर की तर्ज में आगामी वर्ष में प्रदेश के समस्‍त सांदीपनी शालाओं में SHG के माध्‍यम से मेकेनाईज्‍ड किचिन शेड का प्रशिक्षण दिया जा कर किचिन शेड का संचालन किया जाएगा।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • हमारा टारगेट, प्रतिव्यक्ति आय साढ़े बाईस लाख करने का,बोले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव

    हमारा टारगेट, प्रतिव्यक्ति आय साढ़े बाईस लाख करने का,बोले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव


    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर बाईस लाख पचास हजार रुपए करने का रोडमैप प्रस्तुत किया है। विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में धारा प्रवाह उद्बोधन के बीच उन्होंने अपने आंकड़ों से कर्ज के लिए आलोचना करने वाले विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब भी दिया।उन्होंने कहा कि हम सभी प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बन सकें इसके लिए ही विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रयासों से ये विशेष सत्र आहूत किया गया है। उन्होंने प्रदेश के हर नागरिक से इस यात्रा में बढ़ चढ़कर भागीदारी करने का आव्हान भी किया।
    विकास यात्रा की इस मैराथन चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने सदन में कहा कि जब हम आपसे विजन डॉक्‍यूमेंट 2047 की बात कर रहे हैं तो यह विजन डॉक्‍यूमेंट कोई कागज का टुकड़ा नहीं है ,यह हमारा व्‍यक्तिगत संकल्‍प भी है। ये मानकर चलिए 2047 तक मध्‍यप्रदेश का युवा, महिला सभी वर्गों का इस प्रकार का माहौल बनेगा कि हमारे युवा और महिला नेतृत्‍व नौकरी देने वाले बनें । उन्हें नौकरी मांगने की जरूरत न पड़े। हम इस प्रकार के संकल्‍प से आगे बढ़ रहे हैं। मध्‍यप्रदेश 2047 का विजन डॉक्‍यूमेंट्स राज्‍य को आर्थिक रूप से सशक्‍त, सांस्‍कृतिक रूप से समृद्ध और नागरिक जीवन की गुणवत्‍ता को उच्‍चतम स्‍तर तक ले जाने के लिए संकल्‍पबद्ध हैं। यह हमारा सबका संकल्‍प है।
    उन्होंने कहा कि हम अपनी इस सरकार के गठन से 2 वर्षों में लगभग 14-15 परसेंट की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर कर्ज को लेकर चिंता व्यक्त करते रहते हैं। कहते हैं कि सरकार ने फिर कर्जा ले लिया, कर्जा हो गया, बजट से ज्‍यादा कर्जा हो गया। आंकडों पर हिसाब लगाएं तो एक साल के अंदर लगभग हमने 82 हजार करोड़ लिया है । हमारा बजट 4 लाख, 21 हजार करोड़ का था । कर्ज में वो राशि भी शामिल है जो पिछली सरकारों ने विकास पर खर्च की है। हमें तो उसका ब्याज और मूलधन भी चुकाना है। सरकारें तो बनती बिगड़ती हैं पर हमारी लायबिलिटी तो हमें चुकाना पड़ेगी। हमारे कर्ज में से हमने तीस हजार करोड़ तो मूलधन दिया है। अगर 4 लाख, 21 हजार में से 82 हजार घटा दें तो यह बचा हुआ साढ़े तीन लाख करोड़ कहां से आया। जाहिर है ये हमारी कमाई है। यह हमारी सरकार की नेक नियत है,हमारा कर्ज हमारी तीन प्रतिशत की सीमा के अंदर ही है। हमें इस गणित को दिमाग में रखना होगा। उसको समझकर ही ये बात जनता के बीच में लाएं।
    उन्होंने कहा कि बड़े से बड़े उद्योगपति तीन प्रतिशत की लिमिट में ही कारोबार करते हैं। अगर कोई उद्यमी बैंक में अपना कोई ऋण नहीं बताएगा तो आने वाले समय में उसकी ग्रोथ रुक जाएगी. स्‍वाभाविक रूप से बैलेंस शीट तो हमारे लिए कागज लिखने का तरीका है । यदि हमने बिजली,सड़क और पानी जैसी मूलभूत जरूरतों का ढांचा विकसित किया है तो ये हमारी सफलता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002-03 तक केवल 20 हजार करोड़ रुपये का बजट होता था आज हमारा बजट 4 लाख, 21 हजार करोड़ का है।
    पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने इस बार हमारा बजट सोलह हजार करोड़ रुपए बढ़ाया है। आंकड़ों के अनुसार यह 36 प्रतिशत होता है। इस तरह हम विकास के पैमाने पर आगे बढ़ रहे हैं।
    कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जब मैं 2003 में पीडब्‍ल्‍यूडी मिनिस्‍टर था तब सरकार का बजट सिर्फ 900 करोड़ रुपये का था और उसके बाद हमने उसको 10 हजार करोड़ का किया था. यह हमारी सरकार की उपलब्धि थी और लगातार डेवलपमेंट के मामले में मध्‍यप्रदेश की सरकार आगे बढ़ती जा रही है. यह हम सबके लिए बहुत गर्व की बात है.
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि 2047 तक लगभग सवा तीन लाख करोड़ का बजट हम हर पांच साल में दोगुना करेंगे। इसका मतलब है कि 2028 तक यह लगभग 7 लाख करोड़ के आसपास पहुंचेगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 7 का 14 होगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 14 का 28 होगा. फिर 5 साल बाद सरकार बनेगी तो 28 का 56 होगा. फिर 5 साल बाद सरकार बनेगी तो सीधा 100 होगा। इसीलिए तो हमने कहा कि 2047 तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्‍यवस्‍था हमारे राज्‍य की होगी ।
    प्रति व्‍यक्ति सालाना आय का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2002-03 तक 11 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति थी । वर्ष 1956 में मध्‍यप्रदेश बना. 55 साल में ये आय सिर्फ 11 हजार थी। मुझे गर्व है कि आज 1 लाख, 56 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति आय है। यह हमारी ग्रोथ रेट है और अब वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार करने का संकल्प हम आपके माध्यम से कर रहे हैं। इसमें हम विपक्षी सदस्यों का भी सहयोग चाहेंगे। जब हम राज्य की बेहतरी की बात करेंगे तो गरीब आदमी के सपने भी पूरे क्यों नहीं होना चाहिए । वो आर्थिक रुप से संपन्न क्यों नहीं होना चाहिए। धीरे-धीरे कृषि बढ़ रही है. परमात्मा चाहेगा तो औसत आयु, साक्षरता दर, जिस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं और बाकी चीजें हम बढ़ा रहे हैं इनमें हम लगातार ग्रोथ देखेंगे । साक्षरता तो 100 प्रतिशत बढ़ाने का संकल्प आप सभी के माध्यम से चाहेंगे।
    उन्होंने विपक्षी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि आप बताइए कहां-कहां पर स्कूल खोलें, स्कूल के अंदर कौन-कौन सी सौगात दें. कमियां बताएं बहुत अच्छी बात है लेकिन समाधान भी बताईए । हम और आप मिलकर उसका रास्ता निकालें. हमारे मन में कोई भेदभाव नहीं है. हम सबको साथ लेकर चलने को तैयार हैं. इस मामले में हमारा बहुत खुला दृष्टिकोण है. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था, सेवा आधारित कामों को, राज्य को आत्म निर्भर और विकसित बनाने के लिए विस्तृत प्लान हम बना रहे हैं। वर्ष 2047 तक दलों से ऊपर उठकर प्रदेश की बेहतरी के लिए हम संकल्प करके आगे बढ़ रहे हैं। क्योंकि मध्यप्रदेश के भविष्य के लिए हम और आप सब मिलकर एक हैं. इसी भावना के साथ हम चल रहे हैं. हमारी और आपकी सामूहिक जवाबदारी है.

  • मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख

    मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख


    भोपाल 10 दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश दिये है कि आगामी जनगणना 2027 के दृष्टिगत प्रशासनिक इकाइयों में जो भी परिवर्तन किये जाने हैं वे 31 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्यतः कर लिये जांए। मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में भारत की जनगणना 2027 के दृष्टिगत राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के दौरान 30 दिवस की अवधि में किया जायेगा। मुख्य सचिव ने सम्बंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित की जायें।


    बैठक में बताया गया कि जनगणना के द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फ़रवरी 2027 में किया जायेगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के द्वितीय चरण को ध्यान में रखकर वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। उन्होंने परीक्षाओं की समय-सारणी इस तरह तैयार करने के निर्देश दिये है जिससे विद्यार्थीयों को कोई असुविधा नहीं हो। साथ ही सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये गये कि वे आपस में समन्वय करते हुए जनगणना 2027 के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए योजना तैयार करें जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने आगामी जनगणना डिजिटल होने के मद्देनजर सर्वसम्बन्धितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। श्री जैन ने जनगणना के दौरान स्व-गणना (Self-Enumeration) किये जाने के प्रावधान की सराहना की। उन्होंने सभी सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये कि वे जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय के लिए अपने अपने विभागों में एक नोडल अधिकारी नामित करें। जनसंपर्क विभाग को जन सामान्य में जनगणना के प्रति जागरूकता लाने एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये ।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जन को यह बताया जाना आवश्यक होगा कि जनगणना 2027 पहली बार देश में डिजिटल होगी, जिसमें मोबाईल एप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन एवं वेब पोर्टल के माध्यम से मैनेंजमेंट एवं मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का प्रचार होना चाहिए कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना में संकलित व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय होती है साथ ही इन्हें कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।


    राज्य-स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की इस पहली बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, सचिव, गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना), निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश,राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी. और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    अपर मुख्य सचिव, गृह श्री शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना सम्पादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा । प्रारंभ में निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियां, डिजिटल रोडमैप और संगठनात्मकढांचा इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने यह बताया कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना (Self-Enumeration)का प्रावधान भी किया जायेगा जिससे कि आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।


    निदेशक, जनगणना द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 1 लाख 75 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अमले की भी आवश्यकता होगी। निदेशक जनगणना द्वारा अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य प्रदेश में जिला रतलाम की रतलाम तहसील, जिला सिवनी की कुरई तहसील के कुछ चयनित ग्रामों में तथा ग्वालियर जिले के नगर निगम ग्वालियर के चयनित वार्डों में नवम्बर 2025 में कराया गया। पूर्व परीक्षण कार्य को राज्य शासन एवं सम्बंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

  • मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    भले ही भारत की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर के लिहाज़ से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन देश पर बढ़ते कर्ज को कई विदेशी ताकतें भाजपा सरकारों की असफलता ठहराने का प्रयास कर रहीं हैं। केंद्र और राज्यों दोनों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसका प्रत्यक्ष असर राज्यीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिख रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ सरकार लगातार बड़े बजट और जनकल्याण योजनाओं के साथ आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इन पहलों का वित्तीय भार राज्य की ऋण-प्रणाली को चुनौती देता बताया जा रहा है।ये सारा शोर कमोबेश वही लोग मचा रहे हैं जो अब तक शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान मलाई छानते रहे हैं।


    भारत में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं घरेलू—दोनों स्तरों पर कर्ज तेज़ी से बढ़ा है। कोविड के बाद पुनरुद्धार पैकेज, बुनियादी ढाँचे में निवेश, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने सरकारी उधारी पर निर्भरता बढ़ाई है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ऋण का सीधा असर राज्यों की उधारी सीमा, बाजार ब्याज दरों और उधार की लागत पर पड़ता है। केंद्र की उधारी बढ़ने से बाजार में बांडों की मांग प्रभावित होती है और राज्यों को ऊँचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। यही स्थिति आज मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के सामने है।


    विधानसभा के हालिया सत्र में अनुपूरक बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाक्टर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगभग चार लाख अस्सी हजार करोड़ से ज्यादा हो गया है। ये राज्य के कुल बजट से भी ज्यादा है। राज्य पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है और सरकार की विकास योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं। मध्यप्रदेश का वार्षिक बजट जहाँ लगातार बढ़ा है, वहीं राज्य का कर्ज उससे भी तेज़ी से ऊपर गया है। 2025 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य पर बकाया ऋण लगभग 4.4–4.6 लाख करोड़ रुपयों तक पहुँच चुका है—जो राज्य के वार्षिक बजट (लगभग 4.21 लाख करोड़) से भी अधिक है।
    इसके अलावा, वर्ष 2025 के भीतर सरकार ने कई बार तात्कालिक उधारी (short-term borrowing) ली—जो यह संकेत देती है कि योजनाओं और भुगतान दायित्वों को पूरा रखने के लिए सरकार को बाजार से बार-बार धन जुटाना पड़ रहा है। राज्य की ऋण-से-GSDP अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) भी बढ़कर 31% के आसपास पहुँच गया है, जो आदर्श वित्तीय सीमा से अधिक माना जाता है।


    ऐसा कहा जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना की वजह से सरकार झमेले में पड़ रही है। हालांकि ये योजना डाक्टर मोहन यादव को विरासत में मिली थी।वर्तमान सरकार ने महिलाओं को आर्थिक आधार देने के लिए ‘लाडली बहना’ योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्हें दी जाने वाली रकम भी बढ़ाई है। योजना की मासिक किश्तें और लगातार बढ़ती पात्रता संख्या के कारण राज्य को हर माह बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यह योजना सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावी है, लेकिन इसके लिए आवश्यक बजट का एक बड़ा हिस्सा उधार पर निर्भर है।


    सरकारी कर्मचारियों के वेतन-संशोधन, महंगाई भत्ते और पेंशन दायित्व बढ़े हैं, जिससे सरकार का नियमित राजस्व व्यय लगातार ऊपर जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, नदी-लिंक, पर्यटन अवसंरचना और औद्योगिक इकाइयों पर बड़े निवेश की पहल की गई है। ये प्रोजेक्ट दीर्घकाल में लाभ देंगे, लेकिन शुरुआती वर्षों में इन पर भारी पूंजी खर्च की आवश्यकता होती है—जो उधारी के सहारे पूरी की जा रही है। सरकार ने मई से अक्टूबर 2025 के बीच कई बार 3,000–5,000 करोड़ रुपये के कर्ज लिए। यह नकदी-अभाव और बढ़ते भुगतान दायित्वों की ओर संकेत बताया जा रहा है। जबकि वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ये रकम देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने में प्रयुक्त हो रही है इसलिए इस पर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।


    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याण, महिलाओं का सशक्तिकरण, बड़े बुनियादी प्रोजेक्ट पर कार्य, औद्योगिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर नए निवेश के रूप में जारी है। इन सभी पहलों को जनता का समर्थन भी प्राप्त है। परंतु यह भी सच है कि इतनी व्यापक योजनाओं के लिए राज्य को सशक्त राजस्व आय की आवश्यकता है,जो अभी सीमित है। यही कारण है कि सरकार को बार-बार उधार लेकर नीतियों को गति देनी पड़ रही है। राजनीतिक दृष्टि से ये योजनाएँ मजबूत आधार बनाती हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से ऋण-पोषित कल्याण मॉडल लंबे समय में चुनौती बन सकता है।


    वित्तीय तरलता घटने से कई कार्यक्रम गड़बड़ा जाते हैं। जब कर्ज बढ़ता है, तो बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे में निवेश कम पड़ने का खतरा होता है। उच्च ऋण/GSDP अनुपात से राज्य की क्रेडिट रेटिंग प्रभावित होती है, और आने वाले वर्षों में उधार लेना महंगा हो सकता है। कर्ज जितना बढ़ता जाएगा, नीति-निर्माताओं के पास नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश उतनी ही कम होती जाएगी।
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने आय बढ़ाने वाले विभागों पर तेजी से कार्य करने का फैसला लिया है। उसका प्रयास है कि राजस्व आय बढ़े,उद्योग और पर्यटन पर निवेश बढ़ाने की नई नीतियां लाई जाएं। जीएसटी की प्रक्रिया मजबूत हो और कर संग्रहण की स्थितियों में सुधार हो। राज्य के संसाधनों और संपत्तियों का इस तरह से पुर्ननियोजन किया जाए कि उनसे आय बढ़ाई जा सके और बर्बादी रोकी जा सके। कल्याण योजनाओं के लिए लाभार्थियों की नियमित समीक्षा कर खर्च की दक्षता बेहतर की जा सकती है। सरकारी खरीद और प्रशासनिक खर्च में कटौती कर कर्ज निर्भरता को कम किया जा सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट जिनसे सीधे राजस्व आय बढ़ती है — कृषि वैल्यू चेन, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्टार्टअप इकॉनमी — इन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


    मध्यप्रदेश आज दो राहे पर खड़ा है उसे अपनी जन हितकारी योजनाएं जारी रखनी हैं लेकिन उसे अपने कर्ज के निवेश से आय के नए संसाधन भी विकसित करने हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीतियाँ सकारात्मक सामाजिक बदलाव ला रही हैं, किंतु इन नीतियों की वित्तीय स्थिरता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब राज्य कर्ज-निर्भरता से निकलकर मजबूत राजस्व-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेगा। राज्य के लिए चुनौती यह नहीं कि योजनाएँ जारी रहें या नहीं—बल्कि यह है कि उन्हें वित्तीय दृष्टि से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यही वह बिंदु है जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की आर्थिक सेहत और विकास गति दोनों तय करेगा।

  • महिलाओं ने लिख दिया कई राज्यों का भाग्यःहेमंत खंडेलवाल

    महिलाओं ने लिख दिया कई राज्यों का भाग्यःहेमंत खंडेलवाल


    महिला मोर्चा की नई अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा मतदाताओं की गणना का कार्य भारत माता की आराधना


    भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे को पदभार ग्रहण कराकर संबोधित किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिलाओं को संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लेकर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कार्य किया है। महिलाएं अब जागरूक हैं, वह अच्छी तरह से समझती हैं कि लोकतंत्र किस दिशा में जाना चाहिए। महिलाएं अब किसे वोट देना है, यह स्वयं निर्णय करती हैं। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा और इसके बाद लोकसभा चुनाव के साथ हाल ही में बिहार में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने भाजपा की जीत को आसान बना दिया। महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि चुनावों के लिए मतदाताओं की गणना का अभियान वास्तव में राष्ट्र की आराधना है।


    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि महिला मोर्चा की कार्यकर्ता पार्टी की सभी संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने का कार्य कर रही हैं। महिला मोर्चा का अस्तित्व तो जनसंघ के समय से रहा है, लेकिन महिलाओं की राजनीति में बहुत कम भागीदारी रहती थी। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने स्थानीय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें नेतृत्व करने के अधिकार देने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने तो देश की संसद और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाकर राजनीति में देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। आजादी के बाद महिलाएं मतदान किसे करना है, यह निर्णय स्वयं बहुत कम कर पाती थी। अब महिलाएं यह अच्छी तरह से जानती हैं कि लोकतंत्र को किस दिशा में लेकर जाना है। मध्यप्रदेश के विधानसभा और लोकसभा के साथ हाल ही में बिहार में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को बहनों ने ही आसान बनाया है, क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश भर की महिलाएं भाजपा पर विश्वास करती हैं।


    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य कार्य चल रहा है। यह कार्य चुनाव आयोग 20-25 वर्ष में करता रहता है। एसआईआर के कार्यों में आप सभी कार्यकर्ता जितना अधिक सहयोग और कार्य करेंगे, आगामी चुनाव में पार्टी की जीत उतनी ही आसान हो जाएगी। एसआईआर की प्रक्रिया में एक भी सही मतदाता छूटने न पाए, इसका भी सभी कार्यकर्ताओं को ध्यान रखना है। पारदर्शी चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची का पूरी तरह से सही होना चाहिए। एसआईआर मतदाता सूची को सही करने का ही कार्य है। एसआईआर में सहयोग इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कोई भी फर्जी मतदाता बचना नहीं चाहिए। कई ऐसे लोग भी मतदाता बन जाते हैं, जो बांग्लादेश से आकर यहां चोरी छिपे बस गए हैं। ऐसे मतदाताओं की कोई विचारधारा नहीं होती, वह सिर्फ चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं।


    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि आप सभी महिला कार्यकर्ता पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कार्य करें। पार्टी संगठन सभी को समय-समय पर दायित्व देता रहता है। पार्टी में सभी कार्यकर्ता समान होते हैं, सिर्फ दायित्व अलग-अलग होते हैं। आप सभी कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती के लिए और हर घर तक भाजपा की पहुंच हो, इसके लिए कार्य करना है। आप सभी बहनें अपनी चिंता छोडकऱ पार्टी की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए कार्य करें। संगठन आप सभी बहनों के सम्मान की चिंता स्वयं कर रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के नेतृत्व में आज महिलाएं सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों से लेकर महापौर, विधायक और सांसद तक हैं। श्रीमती अश्विनी परांजपे को पार्टी संगठन से महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा है। भाजपा एक परिवार है। यहां सभी कार्यकर्ता समान हैं। जिसे जो दायित्व मिला है, वह पूरी निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन कर पार्टी संगठन को बुलंदियों तक पहुंचाने में जुटे रहें।


    भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने कहा कि महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे मां नर्मदा की बेटी हैं। वह महिला मोर्चा में प्रदेश महामंत्री के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं। मोर्चा के कार्यों को पूरी तरह समझती हैं। श्रीमती अश्विनी परांजपे के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का महिला मोर्चा अपने संगठनात्मक कार्यों में इतिहास रचेगा। भाजपा महिलाओं की समाज और राजनीति में भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने संगठन में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कार्य किया है। भाजपा महिलाओं के सम्मान के लिए लगातार कार्य कर रही है।


    भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे ने पदभार संभालने के बाद अपने संबोधन में कहा कि एसआईआर का कार्य भारत माता की पूजा की तरह है। मध्यप्रदेश में इस समय एसआईआर का कार्य चल रहा है। महिला मोर्चा की सभी कार्यकर्ता एसआईआर के कार्य में सहयोग करें, ताकि एक भी सही मतदाता वंचित न रहने पाए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने महिलाओं को सम्मान देने के साथ नेतृत्व करने के भी अवसर दिए हैं। प्रधानमंत्री जी ने महिला आरक्षण कानून बनाकर सभी महिलाओं को बहुत बड़ा अवसर दिया है। हम सभी महिला मोर्चा की कार्यकर्ता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरू बनाने के कार्य में अपना सहयोग देने के लिए हमेशा तैयार रहना है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संगठन ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना और संगठन को बुलंदियों तक पहुंचाने का कार्य हम सभी कार्यकर्ता को मिलकर करना है। मंच का संचालन श्रीमती माया पटेल ने किया एवं आभार श्रीमती शशि यादव ने माना।


    इस दौरान मंच पर पार्टी की प्रदेश मंत्री सुश्री राजो मालवीय, मोर्चा प्रभारी श्री मनोरंजन मिश्रा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्रीमती रीति पाठक, जिलाध्यक्ष श्री रविन्द्र यति, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती वंदना जाचक, श्रीमती शशि पटेल, श्रीमती उमा सिंह, श्रीमती श्वेता त्यागी, श्रीमती अजोध्या गोधरा, श्रीमती अर्पणा सिंह, सुश्री नेहा बग्गा, श्रीमती कविता डाबी, श्रीमती माधुरी सावले, सुश्री प्रियांशा उरमलिया उपस्थित रहीं।

  • विधानसभा ने पारित किया साढ़े तेरह हजार करोड़ रुपयों का अनुपूरक बजट

    विधानसभा ने पारित किया साढ़े तेरह हजार करोड़ रुपयों का अनुपूरक बजट

    भोपाल 5 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के स्वप्न को विकसित मध्य प्रदेश बनाकर साकार करेंगे। हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। विकसित भारत बनाना केवल एक मिशन नहीं हमारा धर्म भी है।

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव शुक्रवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के समापन अवसर पर सदन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि विधानसभा प्रजातंत्र का मंदिर है।अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने कुशलता के साथ सदन का संचालन किया है, जो अभिनंदन है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष प्रजातंत्र की धुरी है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने नेता प्रतिपक्ष को भी धन्यवाद दिया कि उनके नेतृत्व में विपक्ष ने पूरे सत्र में सकारात्मक चर्चा की और अपने प्रश्नों एवं उद्बोधनों से लाभान्वित किया।

    द्वितीय अनुपूरक के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 13,476.94 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित होगी। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 4000 करोड़, उपार्जन संस्थाओं को ऋण देने के लिए 2000 करोड़, लाडली बहना योजना के लिए 1794 करोड़, पंचायत विभाग के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग के दिए 1,633 करोड़ और उद्योग ,कृषि और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए सदन ने राशि स्वीकृत की है।

    अनूपूरक बजट की विशेषताएं

    · द्वितीय अनुपूरक अनुमान में कुल ₹ 13476.94 करोड़ का प्रावधान

    · विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं

    · जरूरतमंद को आवास देना प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता

    · प्रधानमंत्री आवास योजना में 4000 करोड़ का प्रावधान. आगे और भी करने का प्लान

    · बहनों को आर्थिक रूप से और ज्यादा सक्षम बनाने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1794 करोड़ का प्रावधान

    · मध्य प्रदेश का परफॉर्मेंस देखते हुए 15वें वित्त आयोग का विशेष सहयोग

    · मूलभूत जन सुविधाओं के लिये स्थानीय निकायों को 1633 करोड़ का प्रावधान

    · मध्यप्रदेश पूंजीगत व्यय में सदैव अग्रणी

    · अधोसंरचना विकास के लिए बजट में कोई कमी नही

    · पूंजीगत मद में ₹ 5028.37 करोड़ का प्रावधान

    · मुख्य बजट 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट था. यह अब तक का सबसे बड़ा बजट.

    · गरीब, महिला, किसान और युवा सभी वर्गों की बेहतरी के लिए सरकार आगे बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि इन स्वीकृतियों से मध्य प्रदेश विकास के पथ पर तेज गति से अग्रसर होगा। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण विधेयक मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन विधायक 2025 प्रस्तुत हुआ, जिसमें नगर पालिकाओं और नगर पंचायत में अध्यक्ष का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से करने का प्रावधान किया गया है। निश्चित रूप से इससे वर्तमान में निकायों में कार्य करने में आ रही समस्याओं में काफी कमी आएगी और ये निकाय स्वतंत्र रूप से ओर भी तेज गति से कार्य कर सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों को धन्यवाद दिया जिसके कारण यह सत्र गरिमामय ढंग से संचालित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। इस सत्र से इसमें एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं के प्रति सदन में हम उपस्थित हैं और केवल निवेश की बात नहीं कर रहे ,मध्य प्रदेश के भाग्य और भविष्य की नींव रख रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चरैवेति चरैवेति के मंत्र के अनुसार राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने के संकल्प को व्यक्त किया।

  • शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    भोपाल,04 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जबसे मध्यप्रदेश सरकार को पाखंडी परिपाटियों से बाहर निकालने की मुहिम चलाई है तबसे तंत्र की आड़ में बैठकर आम नागरिकों का खून चूसने वाले दलालों में हड़कंप मचा हुआ है।   पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान जिस गोदी मीडिया को पालने पोसने के लिए सरकारी खजाने से लगभग हजार करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे वह तो लगभग बौखला गया है । उसने सरकारी फरमान को हाईकोर्ट का भय दिखाकर पापों का पिटारा छुपाने की कोशिश शुरू कर दी है।

    जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए शासन ने नर्मदापुरम संभाग में उपायुक्त राजस्व 2012 बैच के गणेश कुमार जायसवाल को जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक के पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी कियाथा। जैसे ही ये आदेश जारी हुआ तो जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने ये कहकर शासन के आदेश को मानने से इंकार कर दिया कि ये अधिकारी तो जूनियर है। हमारे तो उपसंचालक भी इससे वरिष्ठ हैं। सरकार किसी बाहिरी अफसर को हमारे विभागीय कैडर में कैसे पदस्थ कर सकती है। इससे पहले शिवराज सिंह सरकार ने जिस आईपीएस अधिकारी को संचालक बनाकर भेजा था वह सीनियर था लेकिन ये तो बहुत जूनियर है। हम इसके अधीन कैसे काम कर सकते हैं। इस एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल की कमर तब टूट गई जब उन्हें समझाया गया कि शासन के आदेश का विरोध सड़कों पर करना अनुशासन हीनता होगी।

    विभाग के अधिकारियों का कहना था कि वे सरकार का प्रचार कार्य संभालते हैं। यदि सरकार उनकी बात नहीं मानेगी तो वे सरकार का जनसंवाद ढप कर देंगे । उन्होंने अपना विरोध मुखरता पूर्वक दर्ज कराने के लिए कर्मचारी संगठनों को भी साथ खड़ा कर लिया था। जैसे ही इस प्रदेशव्यापी हड़ताल की खबर मंत्रालय तक पहुंची तो आला अधिकारियों ने विभाग को निर्देश दिए कि वे अपनी हड़ताल समाप्त करें ,हम इन स्थितियों को  संवाद से समझेंगे। कमिश्नर जनसंपर्क आईएएस दीपक सक्सेना ने अधिकारियों को समझाया कि वे हड़ताल समाप्त करें हम आपकी मांगों पर सदाशयता पूर्वक विचार करके कोई रास्ता निकालेंगे।

    अधिकारियों ने मौके की नजाकत को भांपकर हड़ताल तो वापस ले ली लेकिन अपने दांव पेंच जारी रखे। जिन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के नाम पर बजट की बड़ी राशि खर्च की जाती थी उन्हें अपने पक्ष में लामबंद करके अधिकारियों ने उनके कंधे से अपनी बंदूक चलानी शुरु कर दी। विभिन्न पत्रकार संगठनों और मीडिया संस्थानों ने भी अधिकारियों की नाराजगी से हामी भरते हुए सरकारी फरमान की मुखालिफत शुरु कर दी। अब जबकि सरकारी खजाने से भजकलदारम करने वाले इस गोदी मीडिया को समझ में आ गया है कि शासन अपने जनसंवाद को बगैर किसी दलाली झोल के जारी करना चाहता है तो उन्होंने सरकारी फरमान को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर शुरु कर दी है।

    इस संबंध में आज एक पत्रकार की जनहित याचिका की प्रति सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई है । इस पत्रकार का कहना है कि विभाग के अधिकारी सीधे सरकार से पंगा नहीं ले सकते इसलिए उनके कहने पर ही मैं हाईकोर्ट जा रहा हूं। जब उसे बताया गया कि वह पीड़ित पक्ष नहीं है। वह विभाग में अधिकारी नहीं है । इस सरकारी आदेश से जनता को कोई नुक्सान नहीं हो रहा है इसलिए वह पीड़ित पक्ष बनकर यदि अदालत जाएगा तो उसे स्टे मिलने के बजाए दंड भी भुगतना पड़ सकता है। यदि अधिकारियों के हक छीने जा रहे हैं तो वे स्वयं अदालत जा सकते हैं।

    गोदी मीडिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को भय है कि यदि बाहिरी अधिकारी विभाग में आ गया तो वह यहां बरसों से चल रहे गोरखधंधे की पोल खोल देगा। इससे उन्हें प्रमोशन की जगह जेल यात्रा तक भुगतना पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी फरमान का विरोध करना उनकी मजबूरी है। हालांकि अभी सरकार ने नव आगंतुक को फिलहाल अपनी पुरानी पदस्थापना पर ही बने रहने को कहा है। उसे कहा गया है कि जब विभागीय अधिकारियों की नाराजगी दूर हो जाएगी तब आपको भेजा जाएगा।

    भाजपा संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये डाक्टर मोहन यादव की सरकार है। सरकार यदि कोई फैसला करती है तो उसे सख्ती से लागू भी करती है। यदि जनसंपर्क विभाग के अफसर इसी तरह विरोध करते रहेंगे तो उनका ये कदम विभाग के पैरों पर मारी गई कुल्हाड़ी साबित होगा।

  • मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    भोपाल 3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने अत्यंत गर्व का पल बताया है।

    जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है।

    लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे।

    नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।