बिहारियों से एलर्जी है तो एंटी हिस्टामाईन दवा खाएंः अनुराधाशंकर सिंह


भोपाल, 23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत के कई राज्यों में बिहारियों को निशाना बनाया गया लेकिन धीरे धीरे लोगों ने उनकी भूमिका का मह्त्व स्वीकार कर लिया। बिहारियों से जिन्हें एलर्जी है उनके लिए तो हम केवल यही कह सकते हैं कि वे एंटी एलर्जी दवाई खाकर अपना काम चलाएं। आज का बिहार तेज गति से आगे बढ़ रहा है और वह अपना परम वैभव पाकर ही रहेगा। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी मर्मभेदी रचनाओं से भारत के गौरव का गान किया और तरुणायी को जाग्रत किया था । बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर ने बिहारियों के योगदान को रेखांकित करने के लिए कवि दिनकर की रचनाओं के साथ जो अनुष्ठान प्रारंभ किया है वो सार्थक नतीजे लेकर सामने आएगा।
भोपाल के कवि दुष्यंत संग्रहालय सभागृह में आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जयंती समारोह में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने कहा कि बिहारी शब्द विहार से निकला है। हंगरी में भी एक बिहार प्रांत है। बिहारी होने का अर्थ घूमंतु होना है। मौर्य वंश, मगध साम्राज्य, गुप्त वंश, भगवान बुद्ध, जैनियों के 23 तीर्थंकरों ,अष्टावक्र,वाचस्पति, मंडन मिश्र,चंपारन सत्याग्रह जैसे अनेकानेक कारणों की वजह से बिहार हमेशा से भारत की अभिन्न पहचान रहा है। जिस तरह बिहार फाऊंडेशन ने यहां एक समृद्ध विरासत का गरिमावंदन शुरु किया है वह सराहनीय है।
उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर के विश्व प्रसिद्ध हिंदी कविता अनुवाद सीपी और शंख की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रकृति की महिमा गाते हुए कहते हैं कि ..मत छुओ इस झील को, कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियां डारो नहीं, फूल मत बोरो,और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो। खेल खेल में तुमको पुलक उन्मेष होता है, लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है। बिहार के मौजूदा हालात में दिनकर की इन पंक्तियों का महत्व समझा जा सकता है।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि चंपारन सत्याग्रह से बिहार ने कर्मवीर गांधी को महात्मा गांधी बना दिया था। जयप्रकाश आंदोलन तक कांग्रेस ने देश पर एकछत्र राज्य किया लेकिन इसके बाद उसकी सत्ता डोल गई। तब राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा था कि
हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
उन्होंने कहा कि राजनेताओं को बिहार से उपजे उस जनांदोलन से सबक सीखना चाहिए। यदि व्यापार ही सत्ता का लक्ष्य हो जाएगा तो मानवता नष्ट होने लगेगी। तब सरकारों को जनता के कोप का सामना भी करना पड़ेगा।
तकनीकी शिक्षा विभाग में अपर संचालक संजय कुमार ने कहा कि छायावादी कविताओं के बाद दिनकर की ओज और राष्ट्रीयता भरी कविताओं ने देश की दिशा बदल दी थी। उन्होंने जिस तरह कर्ण के त्याग को रेखांकित किया उससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और वे जान पाते हैं कि प्रतिभाएं कष्ट में रहकर ही उभरती हैं।
प्रसिद्ध साहित्यकार प्रियदर्शी खैरा, एचएन मिश्रा एवं अन्य लोगों ने भी राष्ट्रकवि दिनकर की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर के अध्यक्ष राधा मोहन प्रताप सिंह ने देश को गढ़ने में बिहारी साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया। सेंट्रल स्कूल से सेवा निवृत्त साहित्यकार श्रीमती रागिनी सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि दिनकर की कविताओं के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान के लिए सभी आगंतुकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

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