भोपाल, 23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत के कई राज्यों में बिहारियों को निशाना बनाया गया लेकिन धीरे धीरे लोगों ने उनकी भूमिका का मह्त्व स्वीकार कर लिया। बिहारियों से जिन्हें एलर्जी है उनके लिए तो हम केवल यही कह सकते हैं कि वे एंटी एलर्जी दवाई खाकर अपना काम चलाएं। आज का बिहार तेज गति से आगे बढ़ रहा है और वह अपना परम वैभव पाकर ही रहेगा। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी मर्मभेदी रचनाओं से भारत के गौरव का गान किया और तरुणायी को जाग्रत किया था । बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर ने बिहारियों के योगदान को रेखांकित करने के लिए कवि दिनकर की रचनाओं के साथ जो अनुष्ठान प्रारंभ किया है वो सार्थक नतीजे लेकर सामने आएगा।
भोपाल के कवि दुष्यंत संग्रहालय सभागृह में आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जयंती समारोह में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने कहा कि बिहारी शब्द विहार से निकला है। हंगरी में भी एक बिहार प्रांत है। बिहारी होने का अर्थ घूमंतु होना है। मौर्य वंश, मगध साम्राज्य, गुप्त वंश, भगवान बुद्ध, जैनियों के 23 तीर्थंकरों ,अष्टावक्र,वाचस्पति, मंडन मिश्र,चंपारन सत्याग्रह जैसे अनेकानेक कारणों की वजह से बिहार हमेशा से भारत की अभिन्न पहचान रहा है। जिस तरह बिहार फाऊंडेशन ने यहां एक समृद्ध विरासत का गरिमावंदन शुरु किया है वह सराहनीय है।
उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर के विश्व प्रसिद्ध हिंदी कविता अनुवाद सीपी और शंख की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रकृति की महिमा गाते हुए कहते हैं कि ..मत छुओ इस झील को, कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियां डारो नहीं, फूल मत बोरो,और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो। खेल खेल में तुमको पुलक उन्मेष होता है, लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है। बिहार के मौजूदा हालात में दिनकर की इन पंक्तियों का महत्व समझा जा सकता है।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि चंपारन सत्याग्रह से बिहार ने कर्मवीर गांधी को महात्मा गांधी बना दिया था। जयप्रकाश आंदोलन तक कांग्रेस ने देश पर एकछत्र राज्य किया लेकिन इसके बाद उसकी सत्ता डोल गई। तब राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा था कि
हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
उन्होंने कहा कि राजनेताओं को बिहार से उपजे उस जनांदोलन से सबक सीखना चाहिए। यदि व्यापार ही सत्ता का लक्ष्य हो जाएगा तो मानवता नष्ट होने लगेगी। तब सरकारों को जनता के कोप का सामना भी करना पड़ेगा।
तकनीकी शिक्षा विभाग में अपर संचालक संजय कुमार ने कहा कि छायावादी कविताओं के बाद दिनकर की ओज और राष्ट्रीयता भरी कविताओं ने देश की दिशा बदल दी थी। उन्होंने जिस तरह कर्ण के त्याग को रेखांकित किया उससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और वे जान पाते हैं कि प्रतिभाएं कष्ट में रहकर ही उभरती हैं।
प्रसिद्ध साहित्यकार प्रियदर्शी खैरा, एचएन मिश्रा एवं अन्य लोगों ने भी राष्ट्रकवि दिनकर की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर के अध्यक्ष राधा मोहन प्रताप सिंह ने देश को गढ़ने में बिहारी साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया। सेंट्रल स्कूल से सेवा निवृत्त साहित्यकार श्रीमती रागिनी सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि दिनकर की कविताओं के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान के लिए सभी आगंतुकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
Month: September 2025
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बिहारियों से एलर्जी है तो एंटी हिस्टामाईन दवा खाएंः अनुराधाशंकर सिंह
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पत्रकारों का स्वागत रहेगाःजनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना
भोपाल 22 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब पब्लिक ट्रस्ट के आमंत्रण पर राजधानी के अरेरा क्लब में पधारे नए जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना का कहना है कि वे मीडिया को मार्गदर्शक के रूप में सहयोगी मानते हैं। पिछले 32 सालों की नौकरी में उनका कभी पत्रकारों से टकराव नहीं हुआ। वे कहते हैं कि महत्वपूर्ण सुझाव देकर विभिन्न सामाजिक समस्याओं की गुत्थी सुलझाने वाले पत्रकारों का उनके कार्यकाल में हमेशा स्वागत रहेगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर निवृत्तमान जनसंपर्क कमिश्नर सुदाम खाड़े को भी भावभीनी विदाई दी गई।
डॉ. सुदाम खाड़े, जिनकी सहजता, सादगी और संवादप्रियता ने पत्रकारिता जगत के हृदय पर गहरी छाप छोड़ी है, ने अपने विदाई संबोधन में कहा- “पत्रकारिता और जनसंपर्क की डोर हमेशा अटूट रहनी चाहिए। यहाँ हर शब्द की जवाबदेही है। एक बार प्रकाशित हो जाने के बाद सुधार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। यही इस विभाग की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी शक्ति भी है। मध्यप्रदेश का जनसंपर्क विभाग, केंद्र से प्रत्यक्ष जुड़ाव न होने के बावजूद, आज देशभर में नवाचार में अग्रणी स्थान पर है।”
भावुक स्वर में उन्होंने आगे कहा – “मुझे आदत थी कि मैं प्रतिदिन सौ से अधिक लोगों से भेंट करता था। अब यह संभव नहीं होगा और निश्चय ही यह मुझे बहुत खलेगा।”वहीं, नवागत जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना ने विश्वास का संदेश देते हुए कहा- “अपने 32 वर्ष के लंबे करियर में कभी किसी पत्रकार से टकराव की स्थिति नहीं बनी। आगे भी ऐसी स्थिति नहीं आएगी। मेरी आदत है कि हर कॉल उठाऊं और यदि छूट भी जाए तो अवश्य कॉल बैक करूं। मेरा प्रयास रहेगा कि सरकार और मीडिया के बीच विश्वास की डोर और अधिक सुदृढ़ हो। जब हम सब एक दिशा में कार्य कर रहे हैं, तो कटुता की कोई संभावना नहीं है।”
वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित विजय दत्त श्रीधर ने इस अवसर पर सुझाव दिया कि फोटोजर्नलिस्टों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों की स्मृतियों और अनुभवों को संजोने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यही अनुभव भविष्य की पत्रकारिता के लिए दिशा-प्रदर्शक सिद्ध होंगे।
नए जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना का कहना है कि समाज की गुत्थियां सुलझाने वाले पत्रकार राज्य की धरोहर हैं। सरकार के साथ वे भी समाज कल्याण का लक्ष्य लेकर चलते हैं इसलिए कोई टकराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष विजय दास ने कहा कि इस पत्रकार संघ ने अपने गठन से ही आंदोलन और नारेबाज़ी से दूरी बनाए रखते हुए संवाद, विमर्श और रचनात्मक गतिविधियों को अपनी पहचान बनाया है। मीडिया संवाद श्रृंखलाएँ, कार्यशालाएँ, पुस्तक विमोचन, स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक सरोकार- इन सबने इसे वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित किया है।
कार्यक्रम में डॉ. सुदामा खाड़े को शाल-श्रीफल, पौधा और स्मृति-चिह्न भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई। वहीं श्री दीपक सक्सेना का उसी आत्मीयता और विश्वास के साथ स्वागत किया गया।इस अवसर पर क्लब के सचिव सचिन चौधरी ने अपनी पुस्तक “बागेश्वर धाम सरकार” अतिथियों को भेंट की।
कार्यक्रम में क्लब के राष्ट्रीय संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार दास , प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द गुर्जर , राष्ट्रीय समन्वयक राजेश भाटिया , महासचिव अक्षत शर्मा संस्थापक समन्वयक सरमन नगेले , पूर्व महासचिव मृग्रेन्द्र सिंह ,भोपाल जिलाध्यक्ष कन्हैया लोधी , ट्रस्टी के डी शर्मा , वीरेंद्र सिन्हा एवं क्लब के समस्त पदाधिकारी, पत्रकारगण,जनसम्पर्क अधिकारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में संदेश स्पष्ट था कि पत्रकारिता और जनसंपर्क की साझेदारी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सहयोग की जीवंत परंपरा है। यही भरोसा आने वाले कल की पत्रकारिता को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा। -

विदेशी पूंजी से कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
-आलोक सिंघई-
अमेरिकी प्रतिबंधों से तिलमिलाई सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं अनुरोध कर रहे हैं कि लोग भारत में बना माल ही खरीदें ताकि स्थानीय बाजार को बल मिले। अब तक की कांग्रेस की सरकारें हों या फिर मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सभी धड़ल्ले से विदेशी माल और पूंजी के सहारे विकास का ढोल पीटते रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की पृष्ठभूमि गुजरात रही है इसलिए वे एमके गांधी के स्वराज आंदोलन को करीब से जानते रहे हैं। वह आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाला बताया गया था। कम से कम भारतीय इतिहासकारों ने तो आजादी के बाद से ही गांधी नेहरू और कांग्रेस के आंदोलनों को आजादी दिलाने वाला आंदोलन बताया है। ये विचार उन्होंने देश के मन मस्तिष्क में इतने गहरे तक जमा दिया है कि लोग इससे अलग कुछ सोचना ही नहीं चाहते। यदि उनके इस मानस से अलग कुछ भी कहा जाए तो वे भड़क उठते हैं। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ब्रिटिश साम्राज्य ने सीधे तौर पर लगभग 56 देशों को शासित किया और इनमें से कई देशों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, जिससे आज दुनिया के लगभग 60 संप्रभु देश ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुए देशों के दायरे में आते हैं। इन 56 देशों में से एक देश भारत भी था । शेष पचपन देशों में न गांधी थे न नेहरू न उनकी कांग्रेस इसके बाद भी उन्हें आजादी मिली।
दरअसल द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जनजागरण का जो माहौल बना उसमें किसी दूसरे देश पर शासन करना कठिन हो गया था। अमेरिका में स्वतंत्रता के जिन मूल्यों की पैरवी की जा रही थी उसने अंग्रेजों के कारनामों को खूब बदनाम किया। रूस में जारशाही का पतन सन 1917 में हुआ था, जब रूस की फरवरी क्रांति ने जार निकोलस द्वितीय के शासन को समाप्त कर दिया और एक अंतरिम सरकार की स्थापना हुई। ऐसे माहौल में अंग्रेजों को महसूस हो गया था कि वे अब ज्यादा लंबे समय तक अपने उपनिवेशों को गुलाम बनाकर नहीं रख सकते। भारत में अंग्रेजी शासक 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से विभिन्न रियासतों के बीच अपना शासन चला रहे थे। जब उन्हें लगा कि उन्हें शासन छोड़ना पड़ेगा तो उन्होंने अपने संरक्षण वाले औद्योगिक घरानों के सहयोग से एमके गांधी के चलाए आंदोलनों को अपना मूक समर्थन देना शुरु कर दिया।
बंगाल में नील किसानों का आंदोलन 1859 से चल रहा था। गांधी जी को 1917-18 में चंपारन सत्याग्रह में भाग लेने का अवसर मिला। इस आंदोलन ने गांधी को विदेशी कपड़ो के धंधे की बारीकियां समझने का अवसर मिला। नतीजतन गांधीजी ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का आंदोलन शुरु किया। उन्होंने 1921 में वस्त्रों की होली जलाकर कपड़े के धंधे की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया। इस समय तक अंग्रेज बचाव की मुद्रा में आ चुके थे। वे गांधी के आंदोलनों को अंदर से समर्थन देकर भारत में अपने नियंत्रण वाली सत्ता के उदय की भूमिका जमा रहे थे। पहले स्वाधीनता संग्राम 1857 के बाद से 90 सालों तक अंग्रेजों पर छुटपुट हमले जारी रहे। त्रिपुरी अधिवेशन में 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी समर्थित पट्टाभि सीतारमैय्या को हराकर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया था । इसके बावजूद उन्हें अंग्रेजों के समर्थन वाले गांधीजी के असहयोग की वजह से अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इससे क्षुब्ध सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में सिंगापुर से अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी के संग्राम की घोषणा कर दी । उन्होंने1943 में आजाद हिंद सरकार का गठन करके ग्यारह देशों से मान्यता भी हासिल कर ली थी।
इन हालात में चलाए गए गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन को अंग्रेज केवल इसलिए समर्थन दे रहे थे क्योंकि वे भारत में अपनी पिट्ठू सरकार का गठन करना चाहते थे। यही वजह थी कि भले ही 1947 में अंग्रेजों ने नेहरू के साथ ट्रांसफर आफ पावर एग्रीमेंट कर लिया लेकिन भारतीय बाजार पर उन्होंने अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा। 1947 में अंग्रेजों का भारतीय कपड़ा उद्योग में बहुत गहरा और विनाशकारी हस्तक्षेप था, जिसके कारण पारंपरिक हथकरघा उद्योग लगभग नष्ट हो गया और भारतीय कारीगरों को भारी नुकसान हुआ। अंग्रेजों ने कच्चे माल के रूप में सस्ते कपास का निर्यात किया और ब्रिटेन में उत्पादित सस्ते, मशीन-निर्मित कपड़े भारत में ऊंची कीमतों पर बेचे, जिससे भारतीय बाजार पट गए और पारंपरिक भारतीय वस्त्र उद्योग दम तोड़ गया। आजादी के बाद स्वदेशी का नारा खादी आंदोलन तक ही सीमित रह गया। खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के नारे तले कांग्रेस ने देश को कपड़ा निर्माण में आत्मनिर्भर नहीं होने दिया।
कांग्रेस के विभाजन के बाद जब 1971 में श्रीमती इंदिरागांधी सत्ता में लौटी तो उन्होंने रिलायंस के धीरूभाई अंबानी को देश के बाजार में पोलिएस्टर कपड़ा उतारने का काम दे दिया। इसके बाद भारतीय कपास की खेती का भट्टा बैठ गया और वह कपास की गठाने निर्यात करने का कार्य बदस्तूर जारी रहा । इन दिनों नरेन्द्र मोदी धार में कपड़ा उद्योग की आधारशिला रख रहे हैं तब इतिहास की इन बातों पर गौर करना जरूरी हो गया है। इसके पहले तक की तमाम राजनीतिक दलों की सरकारों ने भारत में विदेशी पूंजी की घुसपैठ रोकने को कोई कोशिश नहीं की बल्कि वे अधिकाधिक कर्ज लेकर शासन करने की नीति पर ही चलते रहे। लगभग दो दशकों तक मध्यप्रदेश में भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार भी पुरानी सत्ता लाबी की ही पिट्टू सरकार बनकर काम करती रही। कर्ज लेकर खैरात बांटने का जो अभियान उन्होंने चलाया उससे उन्हें भरपूर लोकप्रियता हासिल हुई। कर्ज से बिजली सड़क और पानी के प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए उन्होंने धड़ाधड़ कर्ज लिया और जाते हुए वे प्रदेश पर तीन लाख अस्सी हजार करोड़ रुपयों का भारी भरकम कर्ज छोड़कर गए। इस कर्ज पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर हर साल राज्य को लगभग चालीस हजार करोड़ रुपयों का ब्याज अदा करना पड़ता है। भला इतनी मोटी कमाई को सूदखोर देश और कंपनियां कैसे बंद होने दे सकती हैं।
आज की डाक्टर मोहन यादव सरकार के लिए खैरात बांटने की अब तक चली आ रही नीतियों के विपरीत काम करने पर कुर्सी जाने का भय है और वे भले ही हिचक के साथ ही सही पर वही नीति दुहराते चले जा रहे हैं। ऐसे में जब भारतीय जनता पार्टी स्वदेशी का नारा बुलंद कर रही है तब उसके आंदोलन की खोखली आवाज कितने दूर तक जाएगी इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता। सरकारी नौकरियां बेचने का जो अभियान कांग्रेस ने शुरु किया था उसे शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने खूब हवा दी। कांग्रेस की तरह लूटो और भागो की नीति पर अमल करते हुए शिवराज सिंह काजल की इस कोठरी से अपनी स्याह तस्वीर लेकर सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।
नरेन्द्र मोदी का स्वदेशी माल खरीदने का अनुरोध अमेरिकी प्रतिबंधों की मार की वजह से सामने आ सका है। आज इसे मेक इन इंडिया का विस्तार भले ही कहा जा रहा है पर मध्यप्रदेश में दो दशकों तक भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने स्वदेशी के मुद्दों पर क्या किया है इसका आकलन सहजता से किया जा सकता है।नानाजी देशमुख ने अपने सहयोगियों के साथ चित्रकूट में स्वदेशी के जो अनुसंधान किए और पूरी थीसिस तैयार की उसे भाजपा की उमा भारती सरकार ने पूरी शिद्दत से लागू करना शुरु किया था। इससे सूदखोर देशो में बेचैनी फैल गई और उन्होंने अरबों रुपयों का कर्ज बांटकर अपने पिट्ठू अखबारों के माध्यम से आंदोलन चलाकर उमा भारती की सरकार गिराई और अंततः उन्हें सत्ता से बाहर ही भेज दिया। आज वह आंदोलन चलाने वाले जिस समाचार पत्र पर लगभग पैंतीस हजार करोड़ रुपयों का कर्ज है वह इस मौजूदा स्वदेशी आंदोलन को भरपूर हवा देने में जुटा हुआ है।
स्वदेशी का नारा देते घूम रहे भाजपा के चिंतकों, संगठन कर्मियों और राजनेताओं को अपने गिरेबान में झांककर पहले अपने पूर्वजों की गलत नीतियों में सुधार करना होगा। अब कार्पोरेट सेक्टर खड़े करके देशज पूंजी से उद्योगों की स्थापना करना सरल हो गया है। ऐसे में स्वदेशी आंदोलन करने से पहले भाजपा के नेताओं को स्वदेशी पूंजी, स्वदेशी प्रबंधन और स्वदेशी बाजार की मजबूती के लिए कार्य करना होगा। यदि वे ये नहीं कर पाए तो इस स्वदेशी आंदोलन का हश्र भी गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन की तरह ही होगा। विदेशी पूंजी से आत्मनिर्भर भारत नहीं बनाया जा सकता। -

स्वदेशी को अपनाकर बनेगा आत्मनिर्भर भारतः शिवप्रकाश
भोपाल, 20 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश , प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के राष्ट्रीय सह-संयोजक सी. पी. जोशी एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद जी ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प’ अभियान को लेकर कार्यशाला को संबोधित किया। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिवप्रकाश जी ने कहा कि स्वदेशी सिर्फ आर्थिक नहीं है, बल्कि इसमें देशभक्ति की भावना है और स्वयं का स्वाभिमान भी है। यह हमारी भाषा, रीति रिवाज, पहनावे, संस्कृति आदि सभी से संबंधित है। जो अपने देश में बना है, उसके प्रति स्वाभिमान ही स्वदेशी है। हमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वदेशी के संकल्प के साथ आगे बढ़ना है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भारत को दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए हर व्यक्ति के मन में स्वदेशी उत्पाद खरीदने की मानसिकता बनाने की जरूरत है। कार्यकर्ता स्वदेशी को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत बनाने के अभियान को साकार करें। राजस्थान के पूर्व प्रदेष अध्यक्ष व आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक सी पी जोशी ने कहा कि हम आजादी के पहले स्वदेशी के कारण आत्मनिर्भर थे, आजादी के बाद दुनिया पर निर्भर हो गए। जीएसटी रिफॉर्म कोई सामान्य बात नहीं है, आने वाले समय में यह स्वदेशी के लिए बड़ा आधार बनेगा। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद ने कहा कि स्वदेशी और स्वावलंबन से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्वदेशी की अलख जगाई गई थी। आजादी के बाद स्वदेशी आंदोलन को प्रमुखता नहीं दी गई। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 25 सितंबर से 25 दिसंबर तक ‘‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान‘‘ चलाया जाएगा।
आज के संदर्भ स्वदेशी की परिभाषा अलग-श्री शिवप्रकाश जी
भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए स्वदेशी के दो प्रयोग हुए। एक प्रयोग बाल गंगाधर तिलक जी ने किया। उन्होंने गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव शुरू किए। वहीं गांधी जी ने चरखा चलाया। उस समय के विचारकों का मानना था कि अंग्रेज भारत में विदेशी वस्त्र बेचकर देश को लूट रहे हैं। ऐसे में गांधी जी ने खादी पहनने का आग्रह किया और चरखे के माध्यम से हर व्यक्ति को जोड़ा। महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और महर्षि अरविंद आदि ने भी अपने-अपने तरीके से स्वदेशी की बात की। लेकिन आज का स्वदेशी वो चरखे वाला स्वदेशी नहीं है। हमें आज के संदर्भों में स्वदेशी की व्याख्या करनी होगी। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने एकात्म मानवतावाद में स्वदेशी और विकेंद्रीकरण की चर्चा करते हुए नए परिदृश्य में स्वदेशी की परिभाषा दी। उन्होंने कहा था कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता हमारे तंत्र हो सकते हैं।
स्वदेशी का मतलब दुनिया में कल्याणकारी व्यवस्था
भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से दिये गए भाषण और काशी की सभा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि दुनिया आज आर्थिक संकट से जूझ रही है। हर देश अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में भारत के आर्थिक विकास को जारी रखने और विकसित देश बनाने का वही तरीका उचित है, जिसमें आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का मंत्र हो। उन्होंने इसे ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी दोहराया और कोरोना संकट के समय भी कहा था। श्री शिवप्रकाश जी ने कहा कि आज दुनिया में पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवादी व्यवस्थाओं का खोखलापन उजागर हो चुका है। यूक्रेन-रूस और इजराइल-फिलस्तीन के युद्ध चल रहे हैं। पर्यावरण का संकट पैदा हो गया है। अतिवृष्टि हो रही है और जगह-जगह बादल फट रहे हैं। ऐसे में भारत की लिव एंड लैट लिव यानी वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति प्रासंगिक हो जाती है। ऐसी व्यवस्था जिसमें रोजगार हो, पर्यावरण का संरक्षण हो, कम पूंजी लगती हो और भारतीय चिंतन हो, वही दुनिया के लिए कल्याणकारी हो सकती है। इस अर्थ में स्वदेशी का मतलब है दुनिया में कल्याणकारी व्यवस्था। इसमें बाजार और व्यापार नहीं, परिवार की सोच होती है। यह भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी और दुनिया के संकटों को दूर करेगी।
स्वदेशी के मंत्र पर आगे बढ़ रहा भारत
भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया पर जोर दिया। ये दोनों ही नीतियां स्वदेशी को पोषित करने वाली हैं। बीते 11 वर्षों में उन्होंने स्वदेशी चिंतन के आधार पर व्यवस्थाएं खड़ी की। इसी का परिणाम है कि 2014 तक हमारा जो रक्षा निर्यात कुछ सौ करोड़ का था, वो 2025 में बढ़कर 24000 करोड़ हो गया। अब हमारे रक्षा उत्पाद 100 देशों में खरीदे जा रहे हैं। चंद्रयान और मिशन मंगल के बाद अब हम अनेक देशों को सैटेलाइट सिस्टम दे रहे हैं। 10 से अधिक देशों को हम रेल कोच बेच रहे हैं। एमएसएमई का हमारी जीडीपी में 30 प्रतिशत योगदान है। हम सेमी कंडक्टर भी बना रहे हैं। ट्रैक्टर, जैविक उत्पाद, मोबाइल फोन और जैनेरिक दवाएं हम सारी दुनिया को बेच रहे हैं। हम सारी दुनिया में खिलौने सप्लाई कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री जी का संकल्प ‘स्वदेशी’, हम उसके साथ खड़े होना है
भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि हमें समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में, भारत के युवाओं, बुद्धिजीवियों, व्यापारियों सबके मन में एक भाव पैदा करना है कि हम ये कर सकते हैं। हमें स्वदेशी वस्तुओं का निर्माण करने वालों को प्रोत्साहित करना है और इस विचार को प्रसारित करना है। निश्चित रूप से एक दिन भारत सारी दुनिया में फिर प्रसिद्ध होगा और हमारे उत्पाद दुनिया के बाजारों में भरे रहेंगे। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में अमेरिका ने टैरिफ के जरिए भारत पर यह दबाव बनाने के कोशिश की कि हमारा कृषि क्षेत्र, फिशरीज और डेयरी उद्योग उसके लिये खोल दिये जाएं। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि हम यह नहीं होने देंगे। उनका यह संकल्प ही ‘स्वदेशी’ है और हमें उनके इस संकल्प के साथ खड़ा होना है।
हेमंत खंडेलवालः भाजपा के लिए ठोस धरातल गढ़ने का जतन
प्रधानमंत्री जी का संकल्प आत्मनिर्भर भारत और ‘स्वदेशी’- हेमंत खंडेलवाल
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भारत और चीन साथ में आजाद हुए, लेकिन हम निर्यात में पिछड़ गए। इसकी वजह यह थी कि पूर्ववर्ती सरकारों ने निर्यात बढ़ाने के बारे में नहीं सोचा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार हर क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने और भारत को आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए प्रयास कर रही है। आत्मनिर्भर का मतलब है हम देश में बनी चीजें खरीदें और हमारा आयात कम तथा निर्यात ज्यादा हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वही उत्पाद खरीदें, जिसमें भारत के श्रमिक का पसीना हो, जो भारत में बना हो। उन्होंने कहा कि हमारे देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन कृषि का हमारी जीडीपी में योगदान सिर्फ 17 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि हमारे कृषि उत्पाद सारी दुनिया में एक्सपोर्ट हों। उन्होंने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का सफल प्रयोग किया, जिससे गन्ना उत्पादक किसानों को तो लाभ हुआ है और 2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की भी बचत हुई।
हर व्यक्ति के मन में स्वदेशी की भूख जगाएं कार्यकर्ता
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता हर व्यक्ति के मन में स्वदेशी वस्तुएं खरीदने की मानसिकता बनाने की जरूरत है। इससे रोजगार बढ़ेगा, हमारा उत्पादन बढ़ेगा और हम निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी भारत को अगले कुछ सालों में दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। इस संकल्प को साकार करने के लिए जरूरी है कि हम हर दिल तक यह बात पहुंचायें कि कोई भी व्यक्ति कुछ भी खरीदने से पहले एक बार यह जरूर सोचे कि वह वस्तु देशी है या विदेशी।
जीएसटी रिफॉर्म कोई सामान्य बात नहीं, स्वदेशी को मिलेगा आधार-श्री सी.पी. जोशी
राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के राष्ट्रीय सह-संयोजक सी. पी. जोशी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितंबर से स्वदेशी के मूल मंत्र के साथ शुरू होने वाला सबसे बड़ा आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती 25 दिसंबर तक चलेगा। यह कोई सामान्य अभियान नहीं, बल्कि देश की दिशा और दशा बदलने वाला अभियान है। यह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प है। अखंड भारत के समय हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की 40 प्रतिशत थी। पहली शताब्दी से पंद्रहवीं शताब्दी तक हमारा देश विश्व उत्पादन का 32 प्रतिशत करता था। 1720 ईस्वी तक भी हमारी अर्थव्यवस्था 18 प्रतिशत थी। हमारी आर्थिक संपन्नता और आत्मनिर्भरता के कारण ही मुग़लों से लेकर अंग्रेज़ों तक ने हमारे देश को लूटा। अंग्रेज़ों के आने से पहले हम “उत्तम कृषि, मध्यम व्यापार और निम्न चाकरी” की नीति पर चलते थे, लेकिन अंग्रेज़ों के शासन के बाद यह सब बदल गया। आज़ादी के बाद हम गरीबी रेखा के नीचे और निरक्षरता में 75 प्रतिशत तक पहुँच गए। हम आज़ादी से पहले स्वदेशी के कारण आत्मनिर्भर थे, लेकिन आज़ादी के बाद दुनिया पर निर्भर हो गए। जो लोग शासन में थे, उन्होंने ऐसी नीतियाँ बनाईं जिनके कारण हम दूसरों पर निर्भर होते चले गए।
स्वदेशी के मूलमंत्र को हर नागरिक तक पहुंचाएं कार्यकर्ता
भारत संकल्प अभियान के राष्ट्रीय सह-संयोजक श्री सी. पी. जोशी ने कहा कि आज हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा युवा देश है। युवा न केवल उपयोग अधिक करता है, बल्कि अधिक उत्पादन भी करता है और देश की जीडीपी में बड़ा योगदान दे सकता है। इसलिए हमें आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान को घर-घर तक पहुँचाकर स्वदेशी के मूल मंत्र को प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाना होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म कोई सामान्य बात नहीं है, हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसा होगा। यह आने वाले समय में स्वदेशी के लिए बहुत बड़ा आधार बनेगा। हमारे देश के पास दुनिया की सबसे अधिक कृषि भूमि है। मध्यप्रदेश संसाधनों से समृद्ध है। भारत दुनिया के कुल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत करता है और गेहूं, दूध तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी है। अब हमारा देश हथियारों के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनकर अन्य देशों को हथियार उपलब्ध करा रहा है। कोरोना काल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर देश एकजुट होकर खड़ा था। अब स्वदेशी के लिए भी वैसी ही एकजुटता की आवश्यकता है। 25 सितंबर से 25 दिसंबर तक स्वदेशी का संदेश हर घर और हर दुकान तक पहुँचना चाहिए, ताकि भारत एक बार फिर आत्मनिर्भर बनकर 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सके।
आत्मनिर्भर भारत बनाने स्वदेशी के आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाएं कार्यकर्ता – श्री हितानंद जी
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कहते हैं कि आत्मनिर्भर भारत का रास्ता गरीब, किसान, महिला और युवाओं की भागीदारी से होकर जाता है। आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच का विस्तार है, जिसका लक्ष्य भारत को सामाजिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हर त्यौहार पर आमजन जो खरीदारी करते हैं, वह सिर्फ स्वदेशी वस्तुओं की ही करें। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि हम भारत के लोग वही वस्तुएं खरीदें, जिसे बनाने, तैयार करने में भारतीयों का पसीना बहा हो। प्रधानमंत्री जी के इन विचारों को आत्मसात करते हुए हम सभी कार्यकर्ताओं को आत्मनिर्भर भारत संकल्प सम्मेलन का आयोजन कर स्कूली छात्रों से लेकरी शासकीय विभागों, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, युवाओं, महिला संगठनों, बुद्धिजीवियों के साथ व्यापारिक संगठनों को इस आंदोलन में सहभागी बनाना है। भाजपा के सभी मोर्चां, प्रकोष्ठों के साथ समान विचारधारा वाले संगठनों को साथ में लेकर उद्योग सम्मेलन, प्रभात फेरी, रथ यात्रा, एमएसएमई उद्योगपति सम्मेलनों का आयोजन कर स्वदेशी के इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री जी भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री हितानंद जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी को एक आंदोलन के रूप में ले रहे हैं। भारत की स्वतंत्रता का आंदोलन जो हुआ था, वह सिर्फ देश को आजादी दिलाने के लिए आंदोलन नहीं था। वह आंदोलन भारत को संस्कृति, भाषा, संस्कार और उपयोग की वस्तुओं में स्वदेशी की खुशबू के लिए था। स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जी ने अमेरिका से ट्रड डील नहीं की। उन्होंने कहा कि भारत के किसानों, पशुपालकों का अहित नहीं होने दूंगा। यह अभियान जनभागीदारी से चलाया जाना है, इसलिए इसमें सभी समाजिक, व्यापारिक और समान विचारधारा वाले संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करें। स्वदेशी आंदोलन से हर भारतीय को जोड़कर इसे जन आंदोलन बनाने के लिए कार्य करना है, ताकि स्वदेशी को बढ़ावा मिल सके और भारत की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाया जा सके। स्वदेशी अपनाने के लिए बड़े स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए 21 से 25 सितंबर तक जिला कार्यशालाएं आयोजित होगी। 26 से 30 सितंबर तक मंडल कार्यशालाएं एवं प्रदेश स्तरीय पत्रकार वार्ता का आयोजन होगा। 1 से 5 अक्टूबर तक वक्ता कार्यशाला, 1 से 30 नवंबर तक स्वदेशी रील्स प्रतियोगिता ऑनलाईन क्विज प्रतियोगिता, आत्मनिर्भर भारत निबंध प्रतियोगिता, आत्मनिर्भर भारत स्पीच प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाना है। 1 से 25 दिसंबर तक घर-घर संपर्क, जिला स्तर पर 3 से 15 अक्टूबर तक पत्रकार वार्ताएं, 16 से 30 अक्टूबर तक महिला एवं युवा सम्मेलन, 1 से 15 नवंबर तक व्यापारी, लघु उद्योगी एवं प्रोफेशनल्स सम्मेलन व कालेज स्तरीय स्वदेशी संकल्प सेमीनार, 16 से 30 नवंबर तक स्वदेशी मेला, 1 से 25 दिसंबर तक घर-घर संपर्क, आत्मनिर्भर भारत संकल्प रथ और पदयात्रा का आयोजन होगा। मंडल स्तर पर 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच मंडल सम्मेलन, 16 से 30 नवंबर तक महिला एवं युवा सम्मेलन, 1 से 15 दिसंबर तक स्ट्रीट वेंडर, छोटे दुकानदार एवं स्थानीय कारीगर सम्मेलन व संपर्क, 1 से 25 दिसंबर तक घर-घर संपर्क के साथ 25 दिसंबर को अभियान का समापन होगा।
इस दौरान प्रदेश शासन के मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, श्री नागर सिंह चौहान, श्रीमती कृष्णा गौर, प्रदेश महामंत्री व अभियान के प्रदेश संयोजक श्री रणवीर सिंह रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष व सह संयोजक श्रीमती सीमा सिंह, श्री योगेश ताम्रकार, प्रदेश मंत्री श्री राजेश पाण्डे, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री अखिलेश जैन, आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री योगेश मेहता सहित प्रदेश टोली के सदस्य मंचासीन रहे। कार्यशाला में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी एवं अभियान के जिला टोली के सदस्य उपस्थित रहे। -

दवा माफिया ने नकली माल खपाने के लिए संघ के संगठन में भेजे बिहारी तस्कर
(अंग्रेजी अनुवाद सहित)भोपाल, 20 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बिहारी दवा माफिया ने एमपी में नकली माल खपाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक उपभोक्ता संगठन को अपना ठिकाना बनाया है। ये दवा माफिया मंहगी ब्रांडेड दवाओं की नकल बाजार में उतार रहा है। ब्रांडेड दवाओं की इस नकल को दवा विक्रेता छूट देकर बेच रहे हैं। जब इस कारोबार को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरु की गई तो दवा माफिया ने संघ से जुड़े उपभोक्ता संगठन की आड़ में दबाव बनाना शुरु कर दिया।
वैश्विक स्तर पर दवाओं के मूल्य तय करने वाले कई कारक कार्य करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मूल्य निर्धारण नीतियों पर दिशानिर्देश प्रदान करता है । भारत में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) राज्य सरकारों के निकायों के माध्यम से ये कार्य करता है। दवाओं की कीमतें घटाने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से सफल अभियान चलाया है। सरकार के इस पुनीत कार्य में कई निजी संगठन भी अपना सहयोग दे रहे हैं।कुछ दवाओं विशेष रूप से जीवन रक्षक दवाईयों पर वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) घटाकर सरकार सस्ती दवाईयां उपलब्ध करा रही है।
घरेलू दवा उद्योग को सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री(APIs) और दवा मध्यवर्ती (drug intermediates) उपलब्ध करवाकर सरकार सस्ती दवाएं दिलाने का प्रयास कर रही है।इन प्रयासों से जेनरिक दवाओं का बाजार बढ़ा है और दवाओं की कीमतें काबू में आई हैं। भारत का औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) एक नियामक तंत्र है जो आवश्यक वस्तुओं के अधिनियम, 1955 के तहत स्थापित किया गया है। यह राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को आवश्यक दवाओं के मूल्यों की निगरानी और विनियमन करने का अधिकार देता है
दवा माफिया ने इस निर्धारित ढांचे को चकमा देने के लिए उपभोक्ता संगठनों के माध्यम से भ्रम फैलाने की कोशिश शुरु कर दी है कि वह आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। दवा माफिया की इस चाल की पोल न खुले इसके लिए संघ से जुड़े एक उपभोक्ता संगठन में उसने कुछ बिहारी युवाओं को स्वयंसेवक बताकर नौकरी पर रखवाया है। मध्यप्रदेश सरकार पर संघ का दबाव बनाकर उसने इस संगठन को एक सरकारी मकान भी आबंटित करवा दिया है। करोड़ों रुपए खर्च करके इस मकान में उपभोक्ता पंचायत के नाम पर एक हाल निर्मित कराया जा रहा है।
दवा माफिया ने इस संगठन की आड़ में भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) से लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्य प्रदेश (FDA MP) की ओर से नियुक्त ड्रग कंट्रोलर अथारिटी (औषधि नियंत्रक प्राधिकारी) पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है। एक सर्वमान्य तथ्य है कि किसी भी नई दवा को बाजार तक लाने में दस साल लगते हैं। इस पर लगभग सत्रह हजार करोड़ रुपए का खर्च आता है। दस में से नौ क्लीनिकल ट्रायल नाकाम हो जाते हैं। यही वजह है कि ब्रांडेड दवाईयों की कीमतें अधिक होती हैं। जब दवाईयों की लागत वापस आ जाती है तब उन दवाओं को बाजार में सस्ती कीमत पर बेचा जा सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार ने जेनरिक दवाईयों के वितरण के ढांचे को मजबूत बनाने का प्रयास किया है। दवा माफिया इसी अभियान की आड़ लेकर इथिकल दवाईयों की नकल बाजार में उतार रहा है।
ये दवा विक्रेता अपनी दूकानों पर 20 से 90 प्रतिशत तक सस्ती दवाओं के बोर्ड लगाकर डुप्लीकेट माल ग्राहकों को उपलब्ध करवाते हैं। ये दवाईयां घटिया फैक्ट्रियों में बनाई जा रहीं हैं। चीन से इन दवाओं का सस्ता साल्ट लाकर उन्हें स्थानीय स्तर पर पंजीकृत दवा कंपनियों के माध्यम से बेचा जा रहा है। इन दवा कंपनियों पर शर्त है कि वे ब्रांडेड साल्ट से ही दवाएं बनाएं, जिसके दाम अधिक होते हैं। वास्तव में ये कंपनियां नकली साल्ट उपयोग करती हैं और तयशुदा मंहगी एमआरपी से कम मूल्य पर दवाईयां उपलब्ध करवाती हैं।
नकली दवाओं का ये संगठित कारोबार निरंतर बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन सालों में दिल्ली में 20 करोड़ से ज़्यादा की नकली दवाएं ज़ब्त की गई हैं और कई गिरफ्तारियां हुई हैं। कमजोर निगरानी तंत्र ,भ्रष्टाचार और मुनाफे के लालच के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पड़ोसी राज्यों से भी नकली दवाओं की सप्लाई जारी है।कैंसर, किडनी, लिवर, डायबिटीज हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी गंभीर रोगों से संबंधित दवाओं की मांग अधिक होने से इनकी नकली दवाएं आसानी से खपाई जा रही हैं।
आगरा में नामचीन दवा कंपनी ग्लेनमार्क, सनफार्मा, जायडस, सनोफी आदि कंपनियों की नकली दवाएं बरामद हुईं हैं।एसटीएफ के एडीशनल एसपी राकेश यादव के अनुसार सूचना पर एसटीएफ ने आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से एक ऑटो को पकड़ा जिसमें दवाएं भरी थीं। इनमें एक करोड़ की दवाएं तो एंटी एलर्जी की सनोफी कंपनी की एलेग्रा 125 थी।
दवा माफिया के एक बिहारी एजेंट से जब इस संबंध में बात की गई तो उसने कहा कि हम उपभोक्ता की सुविधा के लिए कार्य कर रहे हैं। जब उससे पूछा गया कि उपभोक्ता के अधिकारों के लिए वैधानिक दवा नियामक संस्थाएं पहले से मौजूद हैं आपका कार्य गैर कानूनी है तो उसने अपने बचाव में कहा कि हम केवल ड्रग इंस्पेक्टरों के कार्य में सहयोग कर रहे हैं।जब उससे कहा गया कि बाला साहब ठाकरे कहा करते थे कि एक बिहारी सौ बीमारी तो वह झेंप गया और उसने वार्तालाप बंद कर दिया।Drug Mafia Deploys Bihari Smugglers into Sangh’s Organization to Push Fake Medicines
Bhopal, September 20 (Press Information Centre).
The Bihari drug mafia has chosen a consumer organization linked to the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) in Madhya Pradesh as its base to distribute counterfeit medicines. These mafias are flooding the market with duplicates of expensive branded drugs. Retailers are selling these imitations at discounted rates. When the authorities initiated necessary action to curb this trade, the mafia began using the RSS-affiliated consumer organization as a cover to exert pressure.At the global level, several factors determine the pricing of medicines. The World Health Organization (WHO) provides guidelines on pricing policies. In India, the National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) performs this function through state government bodies. To reduce drug prices, the Modi government has successfully launched the Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendras. Several private organizations are also supporting this noble initiative. By reducing GST on certain life-saving medicines, the government is making drugs more affordable.
To support the domestic pharmaceutical industry, the government is ensuring the supply of Active Pharmaceutical Ingredients (APIs) and drug intermediates, thereby making cheaper medicines available. These efforts have boosted the generic drug market and helped keep prices in check. India’s Drug Price Control Order (DPCO), established under the Essential Commodities Act, 1955, empowers NPPA to monitor and regulate the prices of essential medicines.
To evade this regulatory framework, drug mafias have begun spreading the illusion—through consumer organizations—that they are working to make medicines cheaper for the common man. To conceal their scheme, they employed several youths from Bihar as “volunteers” in an RSS-linked consumer organization. By leveraging pressure on the Madhya Pradesh government through the Sangh, they even managed to secure a government building for this organization. Spending crores of rupees, they are now constructing a hall in the name of “Consumer Panchayat.”
Under the guise of this organization, the mafia has started exerting influence on the Drug Controller General of India (DCGI) and the state-appointed Drug Controller Authority under the Food and Drug Administration, Madhya Pradesh (FDA MP). It is a well-established fact that bringing a new medicine to market takes ten years and costs about ₹17,000 crore. Nine out of ten clinical trials fail, which is why branded medicines are expensive. Once the development cost is recovered, such medicines can be sold at cheaper rates. This is why the Indian government has been strengthening the distribution system of generic medicines. The mafia, however, is misusing this campaign to release imitations of ethical drugs in the market.
These retailers attract customers with boards claiming 20% to 90% discounts and then supply counterfeit drugs. These medicines are produced in substandard factories. Cheap salts are imported from China and then sold locally through registered pharmaceutical companies. These companies are mandated to use branded salts, which are costlier, but in reality, they use fake salts and supply medicines at prices lower than the fixed high MRP.
This organized trade of counterfeit medicines is continuously growing. In the last three years alone, fake medicines worth more than ₹20 crore have been seized in Delhi, with several arrests made. Weak monitoring mechanisms, corruption, and greed for profit are fueling this trade. Despite ongoing police action, counterfeit medicines continue to flow through online platforms and neighboring states. The demand for drugs related to cancer, kidney, liver, diabetes, hypertension, and heart diseases has made counterfeits easy to sell.
In Agra, counterfeit medicines of well-known companies such as Glenmark, Sun Pharma, Zydus, and Sanofi have been seized. According to STF Additional SP Rakesh Yadav, acting on a tip-off, the STF caught an auto loaded with medicines at Agra Fort railway station. Among these, fake anti-allergy medicines worth ₹1 crore—specifically Sanofi’s Allegra 125—were found.
When a Bihari agent of the drug mafia was confronted about this, he claimed, “We are working for the convenience of the consumer.” When asked why his activities were illegal when statutory drug regulatory authorities already exist to protect consumers’ rights, he defended himself by saying they were only “assisting drug inspectors.” When reminded that Balasaheb Thackeray once said, “One Bihari equals a hundred diseases,” he became embarrassed and ended the conversation.
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डायल 112 से बंटता है साढ़े पांच हजार पुलिस वालों का वेतन

पुलिस ने खुद बताई ये कड़वी सच्चाई
भोपाल, 15 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता की सेवा के नाम पर जिस तरह नौकरियां बांटने की परिपाटी मध्यप्रदेश में चल रही है उसने सारे विकास कार्यों की राह बंद कर दी है। सरकार के पास इन कर्मचारियों को बांटने के लिए धन नहीं है। यही वजह है कि अपने अमले के स्थापना व्यय तक के लिए सरकार को योजनाओं के नाम पर भारी कर्ज लेना पड़ रहा है। इस तरह की योजनाएं वैसे तो तमाम विभागों में चल रही हैं लेकिन पुलिस विभाग की इस योजना के बारे में जब जनचर्चा फैली तो पुलिस को स्पष्टीकरण देने सामने आना पड़ा है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर डायल-112 परियोजना के अंतर्गत वाहनों की खरीद एवं खर्च से जुड़ी भ्रामक और असत्य जानकारी प्रसारित की जा रही है। इन पोस्टों में दावा किया गया है कि सरकार ने गाड़ियां 30-40 लाख रुपए की जगह 1 करोड़ रुपए से अधिक कीमत पर खरीदीं और इस पर कुल ₹1500 करोड़ खर्च हुए हैं। यह दावा पूरी तरह गलत और निराधार है।
डायल-112 परियोजना से संबंधित कुछ तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक है। इस योजना का कुल टेंडर लगभग ₹972 करोड़ का है, न कि ₹1500 करोड़, जैसा कि कुछ स्थानों पर गलत रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह राशि किसी एक वर्ष के लिए नहीं, बल्कि पूरे पाँच वर्षों की अवधि के लिए निर्धारित है। इसमें केवल गाड़ियों का किराया शामिल नहीं है, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मदें भी सम्मिलित हैं। कुल बजट में से ₹719.75 करोड़ का प्रावधान 1200 फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल्स (FRVs) के संचालन, रख-रखाव और लगभग 5000 कर्मचारियों के वेतन के लिए किया गया है। इसी प्रकार, ₹78.5 करोड़ का प्रावधान स्टेट कमांड सेंटर, डेस्कटॉप्स तथा 500 से अधिक कर्मचारियों के वेतन के लिए है। इसके अतिरिक्त, ₹174 करोड़ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सर्वर एवं उनके रख-रखाव पर खर्च किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि गाड़ियाँ खरीदी नहीं गई हैं, बल्कि किराए पर ली गई हैं—जहाँ बोलेरो वाहन का किराया ₹32,000 प्रति माह और स्कॉर्पियो वाहन का किराया ₹36,000 प्रति माह तय किया गया है। इस प्रकार पाँच वर्षों के लिए कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹972 करोड़ है।
मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस प्रकार की भ्रामक और असत्य अफवाहों पर ध्यान न दें तथा सोशल मीडिया पर इनका प्रसार करने से बचें। सही एवं प्रमाणित जानकारी के लिए केवल मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें।
गौरतलब है कि कांग्रेस के बाद भाजपा की सरकारों ने भी नौकरियों की खैरात बांटने के लिए मुक्त हस्त से नियुक्तियां जारी रखीं हैं। इन नौकरियों की वजह से आम जनता को अपनी गाढ़ी कमाई कई स्तरों पर टैक्स के रूप में भुगतना पड़ रही है। मोदी सरकार जहां वन कंट्री वन टैक्स की लोरियां सुनाती है वहीं राज्यों की सरकारें वाहवाही लूटने के लिए कर्ज लेकर खैरात बांटने की मुहिम चलाए हुए हैं।
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जैन मंदिर में जानलेवा हमला करने वाले सटोरिए को बचाने उतरे अहिंसा के पुजारी
भोपाल 14 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जैन समाज के एक सटोरिए ने शिवाजी नगर जैन मंदिर के भीतर समाजसेवी प्रदीप जैन पर जो प्राणघातक हमला किया उसे छुपाने के लिए समाज के कई सफेदपोश नेता अब समझौते का दबाव बनाने में जुट गए हैं। घटना की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद इन सफेदपोशों ने पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों पर दबाव बनाकर प्रदीप जैन के खिलाफ लगभग ग्यारह घंटे बाद छेड़खानी की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। अब आपराधिक पृष्ठभूमि के यही नेता राजधानी में विराजमान मुनि श्री से समझौता करवाने के लिए निवेदन कर रहे हैं।
पर्यूषण पर्व के उत्सवी माहौल के बाद लाड़ू चढ़ाने के कार्यक्रम में ये आपराधिक वारदात समाज के तमाम लोगों की मौजूदगी में घटित हुई थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप कुमार जैन पिता स्वं. श्री अशोक कुमार जैन उम्र 61 साल निवासी म.न. डी 4 ग्रीन हाईट्स कालोनी ऑरा माल के पीछे थाना शाहपुरा जिला भोपाल एमपीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि एमपीनगर में जैन स्वीट्स नाम से मेरी दूकान है। मैं जैन मंदिर शिवाजी नगर ,मानसरोवर के पास जोन 2 के ट्रस्ट मे संयोजक के पद पर हूँ । ये मंदिर जैन ट्रस्ट कमेटी चौक के अंतर्गत आता है। यहां विशाल जैन मंदिर का निर्माण चल रहा है।
विगत छह तारीख को साढ़े दस बजे जब वे जैन मंदिर शिवाजी नगर ,मानसरोवर के पास जोन 2 एमपी नगर पूजा के लिए गए तभी आरोपियों ने घात लगाकर इस वारदात को अंजाम दिया। उनके साथ उनकी भतीजी प्रज्ञा जैन भी उपस्थित थी। वहां पर लाड़ू चढ़ने का प्रोसीजर चल रहा था पंडितजी वहां पर मंत्र पढ़ रहे थे मेरी भतीजी के हाथ मे लाडू थे जिसके ऊपर कपूर रखा था और मेरे हाथ मे माचिस थी उसी समय वहां पर कैलाश चंद्र जैन(सिंघई) औऱ उसका लड़का अंकित सिघंई आए और गाली गलौच करने लगे।
कैलाश चंद्र के पुत्र अंकित ने उन्हें धक्का देकर माचिस छीन ली। विरोध करने पर अंकित सिघंई और कैलाश चंद्र ने मंदिर के भीतर ही प्रदीप जैन और उनकी भतीजी प्रज्ञा जैन को मां- बहन की गंदी-गंदी गालियां देने लगे । जब उनसे कहा गया कि मंदिर परिसर से बाहर निकलकर बात कीजिए तो दोनों फरियादी प्रदीप जैन पर पिल पड़े। इसी मारपीट में सहयोग करने के लिए उनके साथी नितिन जैन और जितेन्द्र जैन भी आ गए। चारों मिलकर उनके साथ हाथ मुक्को से मारपीट करने लगे । इस बीच कैलाश सिंघई ने किसी धारदार हथियार से प्रदीप जैन के सिर पर प्रहार किया। वे फर्श पर गिर पड़े और उनकी बायीं आंख व भौंह से खून बहने लगा। मारपीट में प्रदीप जैन को बायीं आँख मे एवं भौह मे ऊपर एवं दाहीने पैर के घुटने मे एवं शरीर मे अन्य जगह चोटे आयी है। इस वारदात के प्रत्यक्षदर्शी विजय मोदी और बलराम सैनी ने बताया कि उन्होंने हमलावरों को दूर करने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। कैलाश चंद्र और उनके साथी बोल रहे थे कि आज तो बच गया आईंदा उलझा तो जान से खत्म कर देंगे।
गौरतलब है कि कैलाश सिंघई कथित तौर पर गैरकानूनी सट्टे का फड़ संचालित करता है। इस वजह से पुलिस के कई आला अधिकारियों से उसके करीबी संपर्क भी हो गए हैं। समाज के कुछ सफेदपोश नेता भी इस मामले में कूद पड़े और उन्होंने पुलिस अधिकारियों को गुमराह करते हुए कहा कि ये तो सामाजिक मामला है। हम लोग आपस में समझौता करवा देंगे। आप पुलिस थाने को बोलकर हमलावरों की ओर से भी एक शिकायत दर्ज करवा दीजिए। बाकी हम निपट लेगें।इसके ग्यारह घंटे बाद पुलिस ने फरियादी के विरुद्ध छेड़खानी की झूठी शिकायत दर्ज कर ली है। जबकि इस मामले में भाजपा के एक बड़े नेता ने भी हस्तक्षेप करके पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह निष्पक्ष जांच करके प्रकरण अदालत भिजवाए ताकि अपराधियों को अपनी करनी पर दंड मिल सके। -

धार अब फैशन की दुनिया में लगाएगा नई छलांग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 को भैंसोला में लिखेंगे नई इबारत
भोपाल,13 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी सत्रह सितंबर को धार के दौरे पर आ रहे हैं। वे फैशन की दुनिया में धार के बढ़ते सोपानों की आधार शिला रखेंगे। भारत सरकार ने वस्त्र उद्योग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पीएम मित्रा पार्क योजना (PM MITRA Parks Scheme) की शुरुआत की है। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” विज़न को साकार करने का एक बड़ा कदम है।पीएम मित्रा पार्क योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई थी। इस योजना के अंतर्गत देशभर में 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (MITRA) पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र को एक ही स्थान पर पूरी वैल्यू चेन—कपास से लेकर तैयार कपड़े और निर्यात तक—उपलब्ध कराना है।मध्यप्रदेश का निमाड़ और मालवा अंचल कपास की खेती करके देश के लिए सूती कपड़े बनाने का प्रमुख आधार मुहैया कराता रहा है।
इस वस्त्र हबका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर वस्त्र निर्माण का हब बनाना है। रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध कराने की श्रंखला में राज्य का धार अंचल अब कपड़ा प्रोसेसिंग से रोजगार के नए अवसर पादा करेगा। निर्माण की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह होने से यहां उत्पादित वस्त्रों की लागत घटेगी। उद्योग को बढ़ावा देने की तमाम प्रक्रिया नए अनुसंधानों को बढ़ावा भी देगी। विकसित मशीनें पूरी दुनिया के लिए उत्तम गुणवत्ता का कपड़ा बनाकर देंगी। खेतों में कपड़े के रेशे उत्पादन के बाद फैक्ट्री में प्रोसेसिंग ,फैशन डिजाईनिंग और वैश्विक बाजार में कपड़ा भेजने के फाईव एफ(Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) विजन को भी यहां साकार किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि देश के अलग अलग राज्यों में कुल सात मित्रा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। ये सभी पार्क केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में बनाए जाएंगे। केन्द्र सरकार इन पार्कों पर लगभग चार हजार चार सौ पैंतालीस करोड़ का निवेश करेगी।
इस विशेष क्षेत्र में कामन प्रोसेसिंग हाऊस होंगे जो वस्त्र निर्माण की लागत घटाने में मददगार होंगे। औद्योगिक जरूरतों के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध होगा। ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भी होंगी। नई तकनीकों और ट्रेंडिंग तकनीकी नवाचारों के लिए पर्याप्त अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। इस विशेष औद्योगिक प्रक्षेत्र में लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे जो सामाजिक रोजगार जरूरतों के लिए काफी बड़ा स्रोत साबित होगा।इस औद्योगिक क्षेत्र की वजह से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बढ़ेगी। छोटे एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को सपोर्ट मिलेगा। निर्यात क्षमता बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा का अर्जन भी होगा। कपड़ा क्षेत्र में ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी मजबूत होगी। किसानों को कपास और रेशम जैसी कच्ची सामग्री का बेहतर मूल्य मिलेगा।
सरकार ने योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्यों को मित्रा पार्क स्थापित करने की स्वीकृति दी है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश शामिल हैं। इन राज्यों में ज़मीन और उद्योगों की संभावनाओं के आधार पर पार्क का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
पीएम मित्रा पार्क योजना वस्त्र उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक टेक्सटाइल पॉवरहाउस के रूप में पहचान मिलेगी। यह योजना “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” को मजबूती देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को भी लाभ पहुँचाएगी।
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मछली ठेके और नशा कारोबार से दुबई में बनाई दौलत
भोपाल 06 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ) मध्यप्रदेश की राजनीति में शरीफ मछली का नाम आज भी आदर से लिया जाता है। उनके निधन के बाद उनके परिवार ने जिस तरह अपराध जगत से नाता जोड़ा वो प्रदेश के लिए एक बड़ी समस्या बन गया था। अपराध की दुनिया में ‘मछली परिवार’ के नाम से कुख्यात यह गिरोह ड्रग तस्करी, यौन शोषण, जबरन वसूली जैसे संगीन आरोपों से जुड़ा रहा हैं। प्रशासन ने इस गिरोह की बनाई गई अवैध संपत्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त कर एक स्पष्ट संदेश भेजा कि अपराध नहीं बख्शा जाएगा।
- बुलडोजर से अवैध संपत्तियों का ध्वंस
30 जुलाई 2025 को प्रशासन ने मछली परिवार की लगभग ₹50 करोड़ की अवैध संपत्ति—जिसमें फार्म‑हाउस, वेयरहाउस, फैक्ट्री और आवासीय भवन शामिल थे—को अवैध अतिक्रमण की कार्रवाई में ध्वस्त किया। उसी दिन जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के संयुक्त टीम ने कई ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जिसमें लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की अवैध संपत्तियाँ शामिल थीं। 21 अगस्त 2025 को ‘मछली परिवार’ की तीन मंजिला कोठी (अनंतपुरा‑कोकता इलाके, वार्ड 62) को ध्वस्त किया गया, जिसकी कीमत ₹22–25 करोड़ आंकी गई थी। यह भी सरकारी जमीन पर बिना अनुमति निर्मित थी। - गंभीर आरोप: ड्रग्स, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग
गिरफ्तारी के बाद युवक यासीन अहमद उर्फ मछली और उनके चाचा शाहवर अहमद उर्फ मछली ने अपराध शाखा की गिरफ्त में आने पर कई खुलासे किए। आरोप है कि वे राजस्थान से ड्रग्स लाते, पब और लाउंज में पुरानी एवं भरोसेमंद ग्राहकों को पहुँचाते थे, और लड़कियों का उपयोग फिक्स डिलीवरी करने और उन्हें मुफ़्त ड्रग दे कर शोषित करने में करते थे। यासीन के मोबाइल में अश्लील वीडियो और पिस्टल भी बरामद हुए, जिससे यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का मामला और गंभीर हो गया।

- न्याय प्रक्रिया में ढिलाई—एफ़आईआर का अभाव
लगभग ₹100 करोड़ की संपत्ति ध्वस्त कर दी गई परन्तु 34 दिनों बाद भी शारिक मछली के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई। शिकायतों और उपलब्ध सबूतों के बावजूद पुलिस कार्रवाई की निष्क्रियता पर सवाल उठे हुए हैं। - नए उत्पन्न मामले—रेप और होटल में शोषण
हाल ही में बीजेपी नेता के भतीजे यासीन मछली के खिलाफ और एक एफआईआर दर्ज हुई है जिसमें उन पर 5‑स्टार होटल में शादी का झांसा देकर रेप और मारपीट का आरोप लगाया गया है। यह वीडियो भी सामने आया है और अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। - राजनीतिक बयान और सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय नशा मुक्ति कार्यक्रम में कहा कि “ड्रग्स तस्करों के खिलाफ ढूंढ‑ढूंढकर कार्रवाई की जा रही है” और कहा—“कोई कितनी भी पॉलिटिकल अप्रोच वाला हो, कोई कुछ भी — हम छोड़ेंगे नहीं।”–30 जुलाई 2025 ~₹50–100 करोड़ की अवैध संपत्ति (फार्म‑हाउस, वेयरहाउस आदि) ढहायी गई । 21 अगस्त 2025 तीन मंजिला कोठी (₹22–25 करोड़) ध्वस्त, सरकारी जमीन पर गिरफ्तारी यासीन और शाहवर सहित कई आरोपियों ने ड्रग तार्किक भय, यौन शोषण आदि खुलासे किए हैं।

FIR मामला शारिक मछली के खिलाफ अभी तक FIR नहीं
नया मामला यासीन के खिलाफ होटल में रेप व मारपीट की FIR का है। एक प्रताड़ित राजेश तिवारी ने मीडिया के सामने खुद के साथ हुई मारपीट और धोखाघड़ी की शिकायत की है।क्षेत्र के मुस्लिम नागरिकों ने भी इस परिवार की गुंडागर्दी के खिलाफ खुलकर बयान दिए हैं। लोगों का कहना है कि उनके कब्जे वाले तालाबों पर मछली मारने वालों को इस परिवार के गुर्गे उठा ले जाते थे और हवेली में बंद करके मारपीट करते थे।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी सख्त कार्रवाई का राजनीतिक संदेश जारी
‘मछली परिवार’ ने लंबे समय तक भोपाल में अपराधों के जरिए करोड़ों की संपत्ति और साम्राज्य का निर्माण किया। ड्रग तस्करी, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों की घटित पृष्ठभूमि ने प्रशासन को कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया। बुलडोजर द्वारा अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध के लिए कोई स्थान नहीं होगा।
हालांकि, कार्रवाई के बाद भी न्यायालयीन प्रक्रिया में विलंब, विशेषकर शारिक मछली के खिलाफ FIR का अभाव, चिंता का विषय है। इसके अलावा, नए अपराधों की झड़ी से यह मामला अभी समाप्त नहीं माना जा सकता। सरकार की प्रतिबद्धता और पुलिस की सक्रियता ही इस जटिल अपराधी नेटवर्क को सुलझा कर कानूनी रास्ता सुनिश्चित कर सकती है।
- बुलडोजर से अवैध संपत्तियों का ध्वंस
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इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाई अपनी 9वीं वर्षगांठ
Equitas Small Finance Bank Celebrates Its 9th Anniversary
इक्विटास बैंक – 9 साल विश्वास और प्रगति के।
Equitas Bank – 9 Years of Trust and Progress.भोपाल, 06 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज अपनी स्थापना के 9 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर देशभर की सभी शाखाओं में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें ग्राहकों, कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।भोपाल की एमपीनगर शाखा में भी इस अवसर पर ग्राहक मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
Bhopal, 06 September(Press Information Centre).Equitas Small Finance Bank proudly marked the completion of its 9 successful years today. To celebrate the occasion, a series of events were held across all its branches nationwide, with enthusiastic participation from customers, employees, and local communities.
ग्राहकों के प्रति आभार | Gratitude Towards Customers
बैंक ने इस अवसर पर अपने ग्राहकों को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी निरंतर विश्वास और सहयोग से ही इक्विटास आज इस मुकाम तक पहुँचा है। बैंक ने यह दोहराया कि ग्राहकों को बेहतर सेवा और आधुनिक वित्तीय समाधान प्रदान करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।On this special day, the bank expressed heartfelt gratitude to its customers, stating that their continued trust and support have been the foundation of Equitas’ growth. The bank reaffirmed its commitment to delivering excellent service and innovative financial solutions.
कार्यक्रमों की झलक | Highlights of the Celebrations
ग्राहक सम्मान समारोहवित्तीय जागरूकता अभियान
सामुदायिक सेवा गतिविधियाँ
Customer Appreciation Events
Financial Literacy Drives
Community Service Initiatives
डिजिटल पहल: Equitas 2.0 ऐप लॉन्च | Digital Leap: Launch of Equitas 2.0 App
अपने डिजिटल दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, बैंक ने अपने नए और उन्नत मोबाइल बैंकिंग ऐप – Equitas 2.0 के लॉन्च की विधिवत घोषणा की। यह ऐप बेहतर ग्राहक अनुभव, आसान ट्रांजैक्शन और नई सुविधाओं से लैस है।Reinforcing its focus on digital transformation, the bank announced the launch of its advanced mobile banking app – Equitas 2.0. The app is designed to offer a smoother user experience, seamless transactions, and enhanced features.
भविष्य की दिशा | Vision Ahead
इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने मिशन “हर ग्राहक तक बैंकिंग” को दोहराया और वादा किया कि आने वाले वर्षों में वह और अधिक नवाचारों और सेवाओं के साथ हर वर्ग तक सुलभ बैंकिंग पहुँचाएगा।Equitas SFB reiterated its mission of “Banking for Every Customer” and pledged to bring more innovation and inclusive services in the coming years to reach every segment of society.
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आऊटसोर्स की मनमानी पर योगी सरकार ने लगाया अंकुश
लखनऊ,02 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में 15 बड़े फैसले लिए हैं. इसमें आउटसोर्सिंग सेवाओं को पारदर्शी बनाने के लिए UP आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया गया. इसके साथ-साथ लखनऊ-कानपुर में ई-बस प्रोजेक्ट, नई निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 और शाहजहांपुर में स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है. इन कदमों से शिक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में आउटसोर्सिंग सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई. इसमें कम्पनीज एक्ट-2013 के सेक्शन-8 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड के गठन को मंजूरी देना भी शामिल रहा. यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी होगी, जिसे नान-प्रॉफिटेबल संस्था के रूप में संचालित किया जाएगा. इसके माध्यम से अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन सीधे विभाग नहीं करेंगे. इनका चयन निगम जेम पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम किया जाएगा.
आउटसोर्स कर्मचारियों का चयन तीन वर्ष के लिए किया जाएगा. कर्मचारियों के लिए 16 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है. इस निर्णय के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक कर्मचारी को उसका पूरा हक मिले और उसका भविष्य सुरक्षित रहे. यह निर्णय न केवल लाखों युवाओं को बेहतर अवसर देगा, बल्कि प्रदेश में रोजगार और सुशासन का नया मॉडल भी स्थापित करेगा.
प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों और संस्थाओं में लंबे समय से आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में कार्मिक सेवाएं प्रदान कर रहे थे. लेकिन, लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि उन्हें सरकार द्वारा स्वीकृत मानदेय का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा. साथ ही ईपीएफ, ईएसआई जैसी अनिवार्य सुविधाओं का नियमित अंशदान भी कई बार एजेंसियों द्वारा नहीं किया जाता था. इन अनियमितताओं को खत्म करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह निगम गठित किया गया है.
अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन सीधे विभाग नहीं करेंगे, बल्कि निगम जेम पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से एजेंसी तय करेगा.कर्मचारियों का मानदेय 16 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है.आउटसोर्स कर्मचारियों से महीने में 26 दिन सेवा ली जा सकेगी.कर्मचारी तीन वर्षों के लिए अपनी सेवाएं दे सकेंगेकर्मचारियों का वेतन 1 से 5 तारीख तक सीधे उनके खातों में जाएगा.ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान अब सीधे कर्मचारियों के खाते में जाएगा, पहले यह राशि सर्विस प्रोवाइडर के पास चली जाती थी.किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सेवा तुरंत समाप्त की जा सकेगी.आउटसोर्सिंग के लिए चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान किया गया है. इससे बेहतर गुणवत्ता वाले और योग्य कार्मिकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी.
वित्त मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था में संवैधानिक प्रावधानों के तहत एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को नियमानुसार आरक्षण मिलेगा. महिलाओं को मैटरनिटी लीव का भी अधिकार दिया जाएगा. कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा. इसके अलावा, सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर 15 हजार रुपये अंतिम संस्कार सहायता के रूप में दिए जाएंगे. -

केनरा बैंक के ठग प्रकाश गुप्ता पर आयकर का छापा
भोपाल, 03 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केनरा बैंक की कोहेफिजा शाखा से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए ठगने वाले प्रकाशचंद्र गुप्ता के ठिकानों पर आयकर महकमे ने अपना शिकंजा कस दिया है। पिछले दो दिनों से आयकर के अधिकारी गुप्ता की एमपीनगर वाली कंप्यूटर दूकान बूटकॉम सिस्टम्स और कम्फर्ट पार्क, अयोध्या बाईपास रोड स्थित निवास पर दस्तावेज खंगाल रहे हैं। उसकी अवैध पत्नी के 31A पार्क एवेन्यू गिरधर परिसर कोलार रोड स्थित आवास एवं गर्ल्स हास्टल्स और फार्म हाऊस आदि संपत्तियों पर भी निगाह बनाए हुए है।
आयकर विभाग ने राजधानी के जिन सूदखोरों और ठेकेदारों पर छापे डाले हैं उन्हीं के साथ गुप्ता का कारोबारी लेनदेन पाया गया है। सूत्र बताते हैं कि इसके घर से जांच अमले को करोड़ों रुपए नकद, सोना और अवैध संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पिछले दो दिनों से एमपीनगर स्थित उसकी दूकान पर पुलिस दस्ते की मौजूदगी में अधिकारी तमाम दस्तावेज खंगाल रहे हैं।
गुप्ता ने पुलिस और न्यायालय के समक्ष ये दावा किया था कि उसने केनरा बैंक की बुजुर्ग महिला मैनेजर को अपनी दूकान कार्यालय में बुलाकर एनपीए हो गए लोन एकाऊंट को बंद करने के लिए दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए की बड़ी राशि कैश। नकद दी थी। आरोपी ने इतनी बड़ी नकद धनराशि उसके पास मौजूद होने का कोई कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया था। इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण क्रमांक आरसीटी 4137 । 2020 जो भोपाल जिला न्यायालय में लंबित है इसमें भी फरियादी को करोड़ों रुपए नकद भुगतान करने का उल्लेख किया गया है। इस नकद राशि का भी कोई वैध स्रोत नहीं बताया गया है। ये रकम उसके पास कहां से आई यही जांच का विषय है।
गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता लंबे समय से काले धन और हवाला का कारोबार कर रहा है। इसकी सूचनाएं कई बार पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को भी दी जा चुकी हैं। वह कंप्यूटर व्यवसायियों के अलावा समाज के हर वर्ग के लोगों को झांसा देकर करोड़ों रुपयों की ठगी करता रहा है। अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर वह लोगों से रकम एंठता है फिर वह रकम डकार जाता है। इसके अपराध करने के तरीकों पर पुलिस ने लगभग पांच दर्जन प्रकरण दर्ज किए हुए हैं। पास्को एक्ट के एक अपराध में वह जमानत पर छूटा है। केनरा बैंक धोखाघड़ी प्रकरण में भी वह लगभग सवा महीने जेल में बंद रहा था। बाद में अदालत के सामने मामले का निपटारा करने की गुहार पर उसे जमानत पर छोड़ा गया था।
ज्ञात हो कि वर्ष 2006-07 में भी प्रकाश चंद्र गुप्ता ने ठगी करते हुए पंजाब नेशनल बैंक की हबीबगंज शाखा से 32 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी। इस प्रकरण में उसने झूठे दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लगभग पैंसठ लाख रुपए वसूले थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रकाश गुप्ता एक आदतन अपराधी है। पुलिस के पास विगत पच्चीस सालों से उसका आपराधिक रिकार्ड है। अपराध को छुपाने के लिए वह न्याय व्यवस्था के सामने झूठे साक्ष्य गढ़कर खुद को बचाता आ रहा है। -

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल,01 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई ‘भारत का समय-पृथ्वी का समय’ रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ीः भारतीय कालगणना विज्ञान की यशोगाथा का दस्तावेज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश गौरवान्वित होता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी हर परिस्थिति में हमारे वैज्ञानिकों, सैनिकों, किसानों सहित देश के लिए समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के साथ हैं।
खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि उस राष्ट्र का भविष्य ही सुरक्षित रहता है, जो अपने अतीत और संस्कृति को प्रतिबद्धता के साथ आत्मसात करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन की ध्वजा चहुंओर लहरा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले लगभग दो वर्षों में विकास और जनकल्याण के साथ सनातन संस्कृति को सहेजने की जो पहल की है, वह सराहनीय और वंदनीय है। कार्यक्रम को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद श्री आलोक शर्मा, वैदिक घड़ी के अन्वेषणकर्ता श्री आरोह श्रीवास्तव, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे और महर्षि सांदीपनि विश्वविद्यालय के कुलगुरू पंडित शिवशंकर मिश्र ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री विष्णु खत्री, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
वैदिक घड़ी और ऐप की विशेषताएं
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है, जो भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत संगम है। यह भारत की सांस्कृतिक धुरी बनकर वैश्विक भाषाओं, पंरपराओं, आस्था और धार्मिक कार्यों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी। साथ ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के तैयार किये गये मोबाइल ऐप में 3179 विक्रम पूर्व, महाभारतकाल से लेकर 7 हजार से अधिक वर्षों के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां समाहित की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ मुहूर्तों की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। प्रचलित समय में वैदिक समय (30 घंटे), वर्तमान मुहूर्त स्थान, GMT और IST समय, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता एवं मौसम संबंधी सूचनाएं भी लोगों को उपलब्ध करायी गई है। यह ऐप 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें दैनिक सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना तथा इसी आधार पर हर दिन के 30 मुहूर्तों का सटीक विवरण शामिल है।