Month: August 2025

  • भोपाल से गूंजेगा एक राष्ट्र एक चुनाव का उद्घोषःओमप्रकाश धनखड़

    भोपाल से गूंजेगा एक राष्ट्र एक चुनाव का उद्घोषःओमप्रकाश धनखड़


    सांसद आलोक शर्मा की पहल पर आयोजित राष्ट्रव्यापी विचार एवं परामर्श सम्मेलन


    भोपाल 30 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) संविधान संशोधन के माध्यम से संसद और विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने के मुद्दे पर देश में आम सहमति बन गई है। इस मुद्दे पर बनी रामनाथ कोविंद कमेटी ने सभी दलों के प्रतिनिधियों के प्रयासों से तैयार सिफारिशें प्रस्तुत कर दीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं एक सौ चालीस करोड़ नागरिकों के इस देश में ये सुधार आम जनता की पहल पर किया जाए। यही वजह है कि देश के उद्यमियों और विचारशील लोगों से संवाद करके इस कानून के स भी पहलुओं पर राय जुटाई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने आज इस मुद्दे पर विचारोत्तेजक भाषण करके राजधानी के बुद्धिजीवियों और उद्योगपतियों के बीच समर्थन जुटाया।इस अवसर पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, भाजपा जिलाध्यक्ष रवीन्द्र यति भी उपस्थित थे। ये कार्यक्रम भोपाल सीहोर सांसद आलोक शर्मा की पहल पर आयोजित किया गया था।
    भाजपा के प्रखर राष्ट्रीय वक्ता ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि भोपाल पूरे देश का दिल है । इस दिल से उठी आवाज को पूरा देश गौर से सुनता है। सांसद आलोक शर्मा ने यहां के उद्यमियों और बुद्धिजीवियों के माध्यम से एक देश एक चुनाव का विचार देश के समक्ष प्रस्तुत किया है। निश्चित तौर पर पूरा देश आम जन के दिल की ये आवाज के समर्थन में आगे बढ़ेगा। अपने तथ्यात्मक उद्बोधन में उन्होंने बताया कि देश पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था का टारगेट पूरा करने जा रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था चार दशमलव दो ट्रिलियन डालर तक तो पहुंच चुकी है। हम दुनिया के देशों के बीच चौथे नंबर पर हैं अब तीसरे नंबर पर आने के लिए प्रयासरत हैं। हमारी विकास दर छह दशमलव पांच है जबकि हमसे ऊपर वाले तीनों देशों की विकास दर दो के आंकड़े से नीचे है। हमारी आबादी और बाजार दोनों विशाल हैं। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो अहर्निशं सेवामहे के सूत्र वाक्य पर अमल करते हुए तेजी से नए नए आयामों पर कार्य कर रहे हैं। यही वजह है कि विश्व की महाशक्तियों को भरोसा हो गया है कि भारत की यही विकास दर रही तो जल्दी ही विकसित देशों का उनका ताज छिन जाएगा।
    श्री धनख़ड़ ने कहा कि हर चार महीनों में देश में कहीं न कहीं चुनाव आ जाते हैं। इससे देश के विकास पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि रामनाथ कोविंद कमेटी ने पाया कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाएं तो हमारे चुनाव खर्च में तीस प्रतिशत की कमी आ सकती है। प्रशासनिक अमला और राजनैतिक दलों के लगभग पैंतालीस करोड़ लोग मिलकर ये चुनाव संपन्न कराते हैं। इससे धन के साथ लगभग 136 कार्य दिवसों की हानि भी होती है। उन्होने बताया कि हमारी सरकारों का राजस्व व्यय बढ़ता जा रहा है। सरकारी तंत्र पर किया गया ये खर्च हमारी अर्थव्यवस्था में केवल दो बार घूम पाता है। इसके विपरीत हमें पूंजीगत व्यय से विकास के काम करना पड़ते हैं। ये राशि हमारी अर्थव्यवस्था में छह बार घूमती है,जिससे हमारी आय बढ़ती है।
    उन्होंने बताया कि देश में 1967 तक सारे चुनाव एक साथ ही होते थे।लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए 1972 में होने वाले चुनाव 1971 में ही करा दिए। उनका पांसा उलटा पड़ा और जनादेश उनके खिलाफ आ गया। श्रीमती गांधी फंस गईं तो उन्होंने चुनावों का कानून ही बदल दिया। नई पीढ़ी को तो पता ही नहीं है कि कैसे मनमाने फैसले लिए गए। उन्होंने संसद के नाम पर कानून बना दिया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चुनावों पर दायर याचिकाएं सुनने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं है। इस कानून को उन्होंने 1971 के चुनावों के पहले की तिथि से ही लागू कर दिया। इसके बाद का चुनाव 1976 में होना था उसे 1977 में एक साल बाद करवाया। सत्ता के लिए मनमानी की ये प्रथा आगे भी जारी रही। राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव तीन महीने आगे खिसका दिए गए। इस दौरान देश भर में कलश यात्राएं निकालकर सहानुभूति को भुनाने का अभियान चलाया गया। सिर्फ एक आदमी के लिए पूरे देश के चुनावों के साथ खिलवाड़ किया गया।
    उन्होंने कहा कि राजनैतिक दल हर बूथ पर अपना बीएलए नियुक्त करता है। इस बीएलए को यदि कुछ गलत होता दिखे तो चुनाव आयोग उसकी सिफारिश पर गौर करता है। भाजपा तो हर बूथ पर अपना पंजीकृत बीएलए तैनात करती है। जबकि कांग्रेस को ज्यादातर बूथों पर बीएलए भी नहीं मिलते। वह अपना ढांचा तो खड़ा कर नहीं पाती और चुनाव आयोग पर मनगढ़ंत लांछन लगाती रहती है। हम तो साठ सालों तक विपक्ष में रहे। हमारे नेताओं को फर्जी आरोपों में जेल भेजा जाता रहा। इसके बावजूद हमने कभी देश की संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप नहीं लगाए। कांग्रेस के नेता देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करके दुश्मन देशों की भाषा बोलते हैं।

    सांसद आलोक शर्मा की पहल पर ओमप्रकाश धनखड़ ने सेल्फी प्वाईंट का उद्घाटन भी किया।


    उन्होंने बताया कि कांग्रेस तो बंदी प्रत्यक्षीकरण जैसा दमनकारी कानून लाई थी। जिसमें इकतरफा कार्रवाई में जेल भेजे गए व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती थी। उसे अदालत में भी प्रस्तुत नहीं किया जाता था. यही वजह है कि देश में कानूनों को आम सहमति से निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। दुनिया के कई विकसित देश अपने चुनाव एक साथ करवाते हैं। हम तो हमेशा से एक देश एक चुनाव की बात कहते रहे हैं। हमारे चुनावी घोषणा पत्र इसके गवाह हैं। मोदी जी चाहते हैं कि जनमत की राय लेकर ही चुनाव जैसा महत्वपूर्ण कानून बनाया जाए। संसद के भीतर इस पर काम पूरा हो चुका है। कोविद कमेटी ने सिफारिश की है कि राष्ट्रपति एक तारीख घोषित करें।उसे आम चुनाव की तिथि कहा जाएगा। हर बार इसी तिथि को चुनाव होंगे। इन चुनावों को एक पखवाड़े के भीतर संपन्न करा लिया जाएगा। यदि कहीं सरकारें अल्पमत की वजह से गिर जाएं तो मध्यावधि चुनावों से चुनी सरकारों का कार्यकाल भी इसी तिथि तक ही होगा।समिति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82ए और 324ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा हैताकि लोकसभाराज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकें।
    इस मुद्दे पर पूर्व कमिश्रर कवीन्द्र कियावत , पूर्व आईएएस राजेश प्रसाद मिश्र, और कई अन्य गणमान्य नागरिकों ने इस मुद्दे पर अपने सुझाव रखे जिन्हें चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। ट्रक ट्रांसपोर्ट ओनर वेलफेयर आर्गेनाईजेशन के अध्यक्ष कमल पंजवानी ने कहा कि भोपाल के उद्यमी अपव्यय पर रोक लगाने के प्रयासों का हमेशा से समर्थन करते रहे हैं। भोपाल के उद्यमियों की ओर से डाक्टर शैलेश लुनावत ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • जब सेना हस्तक्षेप नहीं करती तो सवाल क्यों- कर्नल डॉ गिरिजेश सक्सेना

    जब सेना हस्तक्षेप नहीं करती तो सवाल क्यों- कर्नल डॉ गिरिजेश सक्सेना


    भोपाल,14 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय लोकतंत्र ने सेना को जो दायित्व सौंपा है उसे वह पूरी जिम्मेदारी से निभा रही है। सेना किसी भी आंतरिक मामले में बगैर बुलाए हस्तक्षेप नहीं करती है। ऐसे में सेना के आपरेशंस पर सवाल खड़े करके हमें अपनी रणनीति उजागर करने पर मजबूर क्यों किया जाता है। सेना के पूर्व अफसरों एयर वाइस मार्शल डॉ प्रमोद श्रीवास्तव, कर्नल राजीव सूद, बिग्रेडियर आर विनायक,और कैप्टन नेवी विनोद बक्शी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए ये बैचेनी व्यक्त की। इस कार्यक्रम का संयोजन कर्नल डॉ.गिरिजेश सक्सेना ने किया था। आयोजन की संकल्पना दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजुरकर की थी।संचालन डॉ विशाखा राजुरकर ने किया एवं आभार दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के अध्यक्ष रामराव वामनकर ने व्यक्त किया।
    कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए डॉ गिरिजेश ने अपने बीज वक्तव्य में कहा। मानव जीवन की शुरुआत ही युद्ध से हुई और उसका पहला युद्ध भोजन के लिये था। जैसे – जैसे सभ्यताओं का विकास और विस्तार हुआ युद्ध के स्वरूप बदलते गये पर युद्ध सदैव ही स्वार्थ की सिद्धि के लिये हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद सेना को जो भी मिशन दिया गया उसने बखूबी पूरा किया और कभी कोई सवाल नहीं किया । इसके बावजूद बालाकोट स्ट्राइक,पुलवामा और पहलगाम हमले के बाद विपक्ष ने सेना से जो सवाल किये उससे सेना का मनोबल तोड़ने की कोशिश हुई है । अच्छी बात यह कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने पहलगाम घटना के बाद सेना को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया । यही वजह थी कि देश की तीनों सेनाओं ने तैयारी के साथ ऑपरेशन सिन्दूर को अंजाम दिया।
    इस अवसर पर कर्नल राजीव सूद ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर का उद्देश्य पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना था। पाकिस्तान से लड़ना या पीओ के लेना इसका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने बताया मध्य रात्रि में ये अभियान शुरू हुआ और मात्र 25 मिनट में सेना ने अपना टारगेट भेद दिया । बाद में पाकिस्तान ने हम पर ड्रोन हमले करने की कोशिश की जिन्हें सेना ने आसमान में ही नष्ट कर दिया । इस आपरेशन की सफलता में हमारे वैज्ञानिकों ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
    बिग्रेडियर आर विनायक ने अपने 36 साल के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना कभी हारी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से पांच लाख सैनिक लड़े और द्वितीय विश्व युद्ध में हमारे साठ हजार सैनिकों में से छब्बीस हजार शहीद हुए। उन्होंने बासठ,पैंसठ, इकहत्तर के युद्ध कारगिल और आपरेशन सिन्दूर के संदर्भ में भारतीय सैनिकों के साहस और पराक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम कभी भी हमलावर नहीं रहे केवल बचाव की कार्रवाई की ,इसकी हमें बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी।
    इस अवसर पर समुद्री सुरंग विशेषज्ञ कैप्टन विनोद बख्शी ने बताया सेना में शामिल होने के बाद संविधान की रक्षा की शपथ लेनी होती है। उन्होंने बताया कि नेवी की सेवा में चार- चार महीने दिन – रात का पता नहीं चलता।परिवार से भी कोई सम्पर्क नहीं रहता। उन्होंने 1983 में बागमति नदी में डूबीं ट्रेन का जिक्र करते हुए बताया कि जब मैंअस्सी फीट की गहराई में डूबे ट्रेन के डिब्बे से लाश निकालता था तो मेरी रूह कांप जाती थी।
    कार्यक्रम के अंत में एयर वाइस मार्शल डॉ प्रमोद श्रीवास्तव ने अनेक सवाल भी उठाये । उन्होंने कहा कि सेना में सेवा देने के बाद जब हम सेवानिवृत होते हैं तो अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है । छोटे – छोटे कामों के लिये रिश्वत देनी पड़ती है तो हमें शर्म आती है। उन्होंने कहा कि फौजी में जुनून होता है और उसे कोई लालच नहीं होता ।
    इस अवसर पर प्रश्नकाल का दौर भी हुआ जिसमें श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी मंच ने किया गया।

  • स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार

    स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार


    भोपाल, 13 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय के शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 23वीं बैठक हुई। प्रस्तावित कार्यसूची के अनुरूप विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 22वीं बैठक के कार्य विवरण की पुष्टि के लिए पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्थानीय उद्योग जगत की आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों के अध्यापन की कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करें। श्री परमार ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के समन्वय के साथ, राज्य स्तर पर “अकैडमिक रिव्यू बोर्ड” बनाने के निर्देश तकनीकी शिक्षा विभाग को दिए, इससे वास्तविक आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम संचालन से समस्त इंजीनियरिंग महाविद्यालयों को सुविधा मिल सकेगी। श्री परमार ने कहा कि निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों से ही निर्माण आदि कार्यों को संपादित करवाने की कार्ययोजना बनाएं, इससे विद्यार्थियों को महाविद्यालयों में ही प्रायोगिक ज्ञान मिल सकेगा।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों के लिए अकादमिक गुणवत्ता के उत्थान के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन के निर्देश दिए। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के हितों से जुड़े आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता दें और अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि के सतत् प्रयास करें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान अपनी विशेषता और उत्कृष्टता पर व्यापक कार्य करे ताकि विशिष्ट संदर्भ में संस्थान का नाम आलोकित हो। श्री परमार ने संस्थान की पहचान को पुनः स्थापित कर, आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित करने के लिए सार्थक क्रियान्वयन करने की बात भी कही।

    बैठक में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय में पीएचडी केंद्र की स्थापना एवं शुल्क निर्धारण, सीएम संकल्प योजना के तहत कोडिंग लैब में प्रशिक्षण के संबंध में व्यय की स्वीकृति, संस्थान में नवीन यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति, प्रतिवर्ष 10 मार्च को संस्था के स्थापना दिवस REC Day मनाने एवं टेक फेस्ट के आयोजन के लिए स्वीकृति, संस्थान के नवीन लोगों एवं ध्येय वाक्य के प्रस्ताव का अनुमोदन, संस्थान के कॉलोनी परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाल के निर्माण के लिए 1 करोड़ 33 लाख 23 हजार रुपए की स्वीकृति, पेयजल व्यवस्था के लिए ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए 32 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, भवन निर्माण एवं अन्य मरम्मत कार्य के लिए कुल 67 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, विभिन्न विभागों के उपकरणों के क्रय हेतु 50 लाख 51 हजार रुपए की स्वीकृति,

    नगर पालिका निगम रीवा द्वारा अधिरोपित सेवा प्रभार के भुगतान राशि की स्वीकृति, संस्थान के बालक एवं कन्या छात्रावास परीक्षा विभाग, रजिस्ट्रार एवं लेखा कार्यालय, इलेक्ट्रॉनिक विभाग एवं इलेक्ट्रिकल विभाग में फर्नीचर और अलमारी के क्रय के लिए 18 लाख 37 हजार रुपए की स्वीकृति, पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत 0.66 हेक्टेयर भूमि के बदले 22 करोड रुपए के संस्थान में निर्माण कार्य के लिए स्वीकृति के साथ संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। संस्थान परिसर में संजीवनी क्लीनिक निर्माण की अनुमति प्रदान की गई। संस्थान के बिजनेस प्लान को स्वीकृति के साथ विस्तृत गाइडलाइन बनाने के निर्देश भी दिए गए। संस्था के दो प्राध्यापकों को पीएचडी /उच्च शिक्षा के लिए अनुमति तथा भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के एक पद की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह , कुलगुरु राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल प्रो. राजीव त्रिपाठी, आयुक्त तकनीकी शिक्षा श्री अवधेश शर्मा, अध्यक्ष रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज ग्लोबल एल्युमिनियम एसोसिएशन श्री आर.एस. शर्मा, रीवा के उद्योगपति श्री विष्णु अग्रवाल एवं संस्थान के प्राचार्य और सदस्य सचिव डॉ. आर.पी. तिवारी सहित शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा के अन्य सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह

    गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह


    पूर्व परिवहन मंत्री रहे विधायक भूपेन्द्र सिंह दांगी अब खुद सफाई देते घूम रहे हैं कि उन्होंने सदन में मालथौन के जिस गोविंद सिंह राजपूत पर आदिवासियों की जमीनें हड़पने का आरोप लगाया है वे खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत नहीं हैं। आदिवासियों की जमीनें हड़पने का कार्य तो मालथौन में कथित आतंक का प्रतीक बने गोविंद सिंह राजपूत पिता श्री बलवंत सिंह राजपूत ने किया है। विधानसभा में उन्होंने अपना पूरा भाषण कुछ इस तरह दिया कि लोगों को महसूस हुआ कि वे खाद्य मंत्री के बारे में बात कह रहे हैं। सदन से बाहर हालांकि उन्होंने अपनी सफाई दी लेकिन तब तक सदन की लॉबी में बैठे पत्रकार बाहर जा चुके थे। यही वजह थी कि कई समाचार माध्यमों ने भूपेन्द्र सिंह के आरोपों को खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर लगाया गया आक्षेप ही मानकर समाचार रिपोर्ट फाईल कर दी ।


    ये कूटनीति कुछ महाभारत के उस प्रसंग की ही तरह थी जिसमें भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर के माध्यम से संदेश प्रसारित करवाया था जिसमें युधिष्ठिर कहते सुने गए कि अश्वथामा हतो हतः…..इसके बाद की लाईन युद्ध के नगाड़ों के स्वर में नहीं सुनी जा सकी जिसमें उन्होंने विशालकाय हाथी अश्वथामा के बारे में कहा था ….नरो व कुंजरो वा । इस तरह की राजनीतिक चाल चलकर भूपेन्द्र सिंह ने अपने चिर प्रतिद्वंदी गोविंद राजपूत को बदनाम करने का दांव खेला था। उनका यह दांव एक तरह से उलटा पड़ा।


    कहा जाता है मुद्दई लाख बुरा चाहे क्या होता है वही होता है जो मंजूर ए खुदा होता है। कहीं तीर और कहीं निशाना की तर्ज पर उठाए इस मुद्दे पर भूपेन्द्र सिंह ने जो सफाई दी उससे गोविंद राजपूत पर लगे तमाम आरोप खंडित होते मालूम पड़ रहे हैं जिन्हें विपक्ष में बैठे कांग्रेसी भी लंबे समय से लगाते रहे हैं। पिछले चुनावों में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सत्ता में आई थी तब ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत और इमरती देवी ने विद्रोह को स्वर देने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इमरती देवी चुनाव हार जाने की वजह से परिदृश्य से बाहर हो गईं लेकिन गोविंद राजपूत तभी से विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं।


    भूपेन्द्र सिंह अपने छात्र जीवन से गोविंद राजपूत के प्रतिद्वंदी रहे हैं। तबके गोविंद और आज के खाद्य मंत्री में बड़ा अंतर आ चुका है। अपने भाई हीरा सिंह राजपूत और क्षत्रियों के खानदानी हुनर के बलबूते गोविंद राजपूत हमेशा सत्ता के नजदीक बने रहे हैं। उनके समर्थक भी लोकतांत्रिक सत्ता का संचालन करने के हुनर में माहिर हो चुके हैं। यही वजह है कि वे लगातार सत्ता में बने हुए हैं और भूपेन्द्र सिंह जैसे उनके प्रतिद्वंदी अब अपनी राजनीतिक पारी समेटते नजर आने लगे हैं।


    दरअसल भूपेन्द्र सिंह दांगी ने भी अपनी लंबी राजनीतिक पारी में सत्ता का भरपूर आचमन किया है। कभी एक छोटी से कथित पारिवारिक मालगुजारी से शुरु उनकी राजनीतिक यात्रा आज अरबों के साम्राज्य तक पहुंच गई है। जब वे परिवहन मंत्री थे तब भी उन्होंने कांग्रेस के समय काल से चली आ रही परंपराओं को जारी रखा था। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर पिछली सरकार तक परिवहन को सत्ता दुहने का साधन माना जाता रहा है। विदेशी कर्ज चुकाने की चुनौतियों ने आज बेशक इस काली कमाई पर अंकुश लगाने की मजबूरी को जन्म दिया है। इसके बावजूद परिवहन विभाग का अमला आज भी समानांतर जांच चौकियां बनाकर अपने आकाओं को खुश करने मेंजुटा हुआ है।


    परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों से बरामद नकदी, सोना और अन्य बेनामी संपत्तियों को लेकर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी गोविंद राजपूत को घेरने का प्रयास करते हैं । इसका नतीजा ये होता है कि समूची भाजपा गोविंद राजपूत के पक्ष में आकर खड़ी हो जाती है और परिवहन घोटाले की फाईल ठंडे बस्ते में पहुंच जाती है। ऐसा ही कुछ इस बार हुआ जब भूपेन्द्र दांगी के भाषण के बाद पूरा सरकारी तंत्र स्पष्टीकरण देने में जुट गया कि मालथौन वाले गोविंद सिंह राजपूत हमारे खाद्य मंत्री नहीं हैं।


    जाहिर सी बात है कि खाद्य मंत्री को लेकर विपक्ष और पार्टी के ही कुछ पुराने भाजपाई जिस तरह से लामबंद होते जा रहे हैं गोविंद राजपूत की ताकत उतनी ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। भूपेन्द्र सिंह ने आदिवासियों की जमीनें छिनने का बवंडर खड़ा करके खुद को बड़ा जनसेवक बताने की जो चेष्ठा की उसने उन्हें ही सरकार के निशाने पर ला खड़ा किया है। जबसे वे मंत्री पद से हटाए गए हैं तभी से बार बार वे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का जतन करते रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने विधानसभा के अपने भाषण पर सफाई दी उससे उनकी बचाव की मुद्रा भी यही कुछ बयान कर रही है।


    दरअसल भाजपा ने सत्ता की आड़ में अपना घर भरने वाले नेताओं को घर बिठाने का जो अभियान चला ऱखा है उसकी वजह से कई नेताओं को अपना भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। वे जब तक सत्ता के शेर पर सवार हैं तब तक तो उनकी कहानी चलती रहेगी लेकिन जैसे ही वे सत्ता से दूर होंगे उनकी काली कमाई का साम्राज्य धूल धूसरित कर दिया जाएगा। भोपाल का मछली साम्राज्य इसकी जीती जागती मिसाल है।


    भूपेन्द्र सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र में खडे़ गोविंद राजपूत मालथौन जैसे उस दिग्गज प्रतिद्वंदी को समेटने का प्रयास कर रहे हैं। जिसने अपनी भतीजी रक्षा राजपूत को कांग्रेस से टिकिट दिलवाकर भूपेन्द्र सिंह के सामने कड़ी राजनैतिक चुनौती खड़ी कर दी थी। भूपेन्द्र सिंह भले ही मालथौन के गोविंद सिंह राजपूत को भाजपा में लाए हों लेकिन तभी से वे उसे समाप्त करने की मुहिम भी चलाए हुए हैं। उसके बेटे का कथित अनाज घोटाला उजागर करने के बाद तो उनके लिए खुरई और मालथौन में अपने विरुद्ध बड़ी राजनीतिक ताकत खड़ी होती नजर आ रही है। अपने प्रतिद्वंदियों को वे समाप्त करने का जितना प्रयास कर रहे हैं उतना खुद ही दलदल में फंसते देखे जा रहे हैं।

  • डॉलर कमाना है तो इक्विटास बैंक से करें दोस्ती

    डॉलर कमाना है तो इक्विटास बैंक से करें दोस्ती

    भोपाल, 02 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कार्पोरेट क्षेत्र के इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड अधिक मुनाफा दिलाने की वजह से निवेशकों की पसंद बनता जा रहा है। ग्राहकों से चाय पर चर्चा के दौरान बैंक के अधिकारियों ने अनिवासी भारतीयों को डॉलर में कमाई करने के रास्ते सुझाए।


    चाय पर चर्चा के लिए पधारे रियल इस्टेट व्यवसायी और समाजसेवी राजेन्द्र जैन (टीआई) ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि विदेशों के बैंकिंग लाऊंज में इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की सुविधाएं बहुत आसानी से उपलब्ध होती हैं। बैंक ने जिस तरह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए कैंसर के इलाज और पर्यावरण रक्षा की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं वह एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि बैंक के एफसीएनआर उपकरण से भारतीय उपभोक्ताओं को डालर कमाने का प्रवेश द्वार मिल गया है। उन्होंने कहा कि वे अब तक विश्व के चौंतीस देशों में भ्रमण कर चुके हैं, कई देशों में उन्होंने इक्विटास बैंक की सुविधाओं का लाभ उठाया है।

    बैंक मैनेजर लोकेश जैनः समृद्धि के साथ पर्यावरण मित्र वस्तुओं के उपयोग का संदेश


    बैंक के शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि बैंक ने विदेशी मुद्रा कार्ड, विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) जमा और धन लाने ले जाने जैसी सुविधाओं को सरल बनाया है ।


    बैंक के अधिकारी मिनहाज खान ने बताया कि बैंक के ने अनिवासी भारतीयों को टैक्स बचाने और विभिन्न विदेशी मुद्राओं के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इक्विटास बैंक बार बार विदेश जाने वाले और विदेश से भारत आने वाले ग्राहकों के लिए बहुत कम शुल्क में सारी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध करा देता है।


    चाय पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान आए ग्राहकों ने बैंक की गतिविधियों की जानकारी ली। बैंकिग से जुड़े अपने अनुभव सुनाए और अपने परिजनों को इक्विटास बैंक से जोड़ने में रुचि दिखाई।
    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक अपने सेविंग एकाऊंट धारकों के लिए नए स्लैब के तहत 7% ब्याज देता है ।