Month: July 2025

  • दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक

    दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक


    देश की प्रख्यात बड़ी बड़ी अस्पतालों के चढ़ते शेयर और आम जनता के घटते स्वास्थ्य ने दुनिया के तमाम देशों के बीच भारत की भारी बदनामी कराई है। बेशक भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा मजबूत हुआ है ।बढ़ते संसाधनों के बीच आम नागरिक की औसत आयु भी बढ़ी है, इसके बाद भी आम आदमी को स्वस्थ रहने की जितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है वह चिंताजनक है। दवा माफिया के इस मायाजाल को काटने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना शुरु की थी। अगले चरण के रूप में दवाईयों की कीमतें मनमाने ढंग से बढ़ाने वाले दवा माफिया पर प्रहार किया गया है। केन्द्र की फार्मेसी काऊंसिल और राज्यों की फार्मेसी काऊंसिलों ने फार्मेसी एक्ट के अधिकारों का प्रयोग करते हुए दवाईयों पर मनमानी एमआरपी प्रकाशित करने और छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित करने के काले कारोबार पर करारा प्रहार किया है।


    मध्यप्रदेश में केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (एमपीसीडीए) ने दवाओं के अनुचित डिस्काउंट, प्रचार और छूट के माध्यम से होने वाले उपभोक्ता शोषण और स्वास्थ्य जोखिमों को दृष्टिगत रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी कौंसिल से निवेदन किया था कि वह इस पर रोक लगाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करे। इसके बाद 26 जुलाई 2025 को काऊंसिल ने दवाओं पर छूट के नाम पर अनुचित मुनाफा कमाने वाले दवा माफिया के विरुद्ध दिशा निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोलर, ड्रग आफिसर और ड्रग इंस्पेक्टरों ने दवा माफिया के इस जाल के विरुद्ध जांच भी शुरु कर दी है। जल्दी ही दवाओं की मूल कीमतों और इनके बेमेल काम्बीनेशन के विरुद्ध कार्रवाई करने की तैयारियां भी कीं गईं हैं।


    इस आदेश के माध्यम से फार्मेसी कौंसिल ने यह निर्देशित किया है कि रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट किसी भी प्रकार के छूट, ऑफर, बोर्ड, बैनर अथवा प्रचार सामग्री का उपयोग न करें, और उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह निर्णय न केवल फार्मेसी अधिनियम, 1948 तथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स, 2015 की भावना के अनुरूप है, बल्कि आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन रक्षा की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल भी है।


    छूट आधारित दवा बिक्री के कारण घटिया या नकली दवाओं की आपूर्ति में वृद्धि हो रही है। डाक्टर जिन दवाओं को अनुशंसित करता है,केमिस्ट उन्हें बदलकर छूट के नाम पर दूसरी दवाएं थमा देता है। इससे रोगियों में दवाओं के विरुद्ध एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी जटिलताएं बढ़ रहीं हैं।


    देश में दवाओं के मूल्य तय करने की जवाबदारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को दी गई है। उसने पहले से ही शेड्यूल दवाओं पर 8-16% और नॉन-शेड्यूल पर 10-20% तक मार्जिन निर्धारित कर रखा है। प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में कुछ प्रतिष्ठान छूट के नाम पर अनैतिक, अवैध एवं खतरनाक व्यापारिक प्रथाएं अपना रहे हैं — जिनमें सब-स्टैंडर्ड या नकली दवाओं की बिक्री, तथा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में मनमर्जी से परिवर्तन शामिल हैं।
    प्रिस्क्रिप्शन से इतर या गलत दवा दिए जाने से जीवन संकट में पड़ सकता है, विशेषकर गंभीर बीमारियों, हार्ट, कैंसर, डायबिटीज या मानसिक रोगों के मामलों में ये दवाएं मरीज को नुक्सान पहुंचा सकती हैं। छूट के नाम पर घटिया गुणवत्ता की या एक्सपायर्ड दवाओं की खपत बढ़ रही है, जिससे रोग ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकता है। मरीजों में AMR एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस , एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, दवा का अप्रभावी होना, और एलर्जी या दुष्प्रभाव की घटनाएं बढ़ रही हैं।


    दवाएं बदल दिए जाने से मरीज को जो क्षति उठानी पड़ती है उससे डॉक्टर-फार्मासिस्ट के बीच भरोसे का रिश्ता कमजोर होने लगा है। समाज में फार्मेसी पेशे के प्रति विश्वास धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, जिससे पूरे हेल्थकेयर सिस्टम की छवि प्रभावित हो रही है।
    केरल उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को पारित आदेश में फार्मासिस्टों को डिस्काउंट आधारित विज्ञापन न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, आदि राज्यों की फार्मेसी काउंसिल्स और ड्रग कंट्रोलर जम्मू कश्मीर भी इस विषय में स्पष्ट परामर्श जारी कर चुके हैं।

    दवा कारोबारियों ने दवा माफिया की चुनौती पर प्रहार करने के बाद मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन का अभिनंदन किया।


    एसोसिएशन ने फार्मेसी काऊंसिल के इस निर्देश पर प्रभावी अमल करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे संबंधित विभागों विशेष रूप से औषधि नियंत्रण प्रशासन (Drug Control Department) को आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि इस निर्णय का पालन सभी फार्मेसी आउटलेट्स को अनिवार्य रूप से करना पड़े।


    फार्मेसी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दवाईयों की दूकानों पर अलग अलग डिस्काऊंट के बोर्ड लगे होते हैं जिनमें एक ही किस्म की अलग अलग कंपनियों से बनी दवाएं अलग अलग रेट पर बेची जा रहीं हैं। कुछ सालों से दवा माफिया ने दवा निर्माण के साथ साथ मार्केटिंग का जो तंत्र विकसित किया है उसमें डाक्टरों के साथ सांठ गांठ की गई है। इस दवा माफिया ने प्रचलित ब्रांडों की दवाओं से मिलते जुलते नामों से कंपनियां बना लीं हैं। ये दवाईयां थर्ड पार्टी के लाईसेंस से बनाई जा रहीं हैं।इन दवाईयों पर पहले से कई गुना अधिक एमआरपी लिखवा दी जाती है फिर उस पर डिस्काउंट देकर छूट का कारोबार चलाया जाता है।


    फार्मेसी प्रेक्टिस एक्ट 2015 के अध्याय 7 एवं 8 में उल्लेख किया गया है की फार्मासिस्ट कोई भी ऐसा कार्य यह प्रचार प्रसार नहीं कर सकता जो की जनता को भ्रमित करें । इसी के तहत डिस्काउंट के बोर्ड लगाकर जनता को भ्रमित करना एक्ट के विरुद्ध है। इन सब को देखते हुए देश के 6 प्रदेशों में इस तरह के कार्य नहीं करने के लिए काउंसिल द्वारा समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित की गई है इसी के क्रम में मध्य प्रदेश में भी यह सूचना जारी की गई है। फार्मेसी एक्ट के तहत नियमों का पालन कराना काउंसिल के दायरे में आता है इसमें उनके साथ फूड एंड ड्रग का योगदान महत्वपूर्ण होता है।जम्मू एवं कश्मीर के ड्रग कंट्रोलर ने ही इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं।


    दवाओं की गुणवत्ता और इनके बाजार मूल्यों पर नियंत्रण के लिए भारत में पहली बार इस तरह का अभियान सरकारी तंत्र की पहल पर चलाया जा रहा है। इससे जहां कुकरमुत्तों की तरह उग आईं नकली दवाओं की कंपनियों पर रोक लगेगी वहीं दवा कंपनियों की सांठगांठ से चलने वाले असपतालों की लूट से भी उपभोक्ताओं को बचाया जा सकेगा।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन कहते हैं कि दवाओं की गुणवत्ता स्थापित करने के लिए नकली दवा कंपनियों पर रोक लगाना जनहित का कार्य है। निश्चित रूप से भारत सरकार ने दवा माफिया पर लगाम लगाने की जो मुहिम चलाई है उसका लाभ देश के दवा उद्योग और दवाईयों का निर्यात करने वाली कंपनियों को भी मिलेगा।दवा निर्माण का लाईसेंस देने में स्थानीय अधिकारियों ने जो गोरख धंधा चला रखा है इस मुहिम से उसे भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। भारत की दवाओं की साख बढ़ाने के इस अभियान से सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली दवाओं पर भी पड़ेगा जो भारत के आम लोगों के स्वास्थ्य के पैमाने पर एक सार्थक प्रयास साबित होगा।

  • राष्ट्रवादी भाजपा के सभी कार्यकर्ता एकजुट:  हेमंत खंडेलवाल

    राष्ट्रवादी भाजपा के सभी कार्यकर्ता एकजुट: हेमंत खंडेलवाल


    भोपाल, 22 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जो राजनेता भाजपा को राष्ट्रवादी एक्सप्रेस मानकर सहयात्री बने हैं वे सभी एकमत हैं। इसलिए आज की भाजपा अंतर्विरोधों से ऊपर उठकर वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष करती चल रही है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पत्रकारों के आत्मीय सवालों के जवाब में कहा कि हम एक परिवार की तरह राष्ट्र आराधना करते हैं। यही वजह है कि भाजपा का हर कार्यकर्ता अपने पदाधिकारी का दर्पण बनकर काम करता है।
    श्री खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा की स्थापना से लेकर आज तक सभी नेताओं ने अपनी अपनी योग्यता और समझ के अनुसार सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाया है। नेता अपना काम करता है और कार्यकर्ता अपनी भूमिका का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा हाईकमान अपने फीडबैक और नजरिए के आधार पर फैसले लेता है।हमें उन फैसलों की जानकारी कई बार मीडिया के माध्यम से ही मिलती है। उन्होंने कहा कि उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की खबर उन्हें मीडिया से ही मिली थी। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया ये जानकारी भी उन्हें मीडिया से ही मिली है। इसी तरह हर स्तर पर पार्टी के पदाधिकारी अपने क्षेत्राधिकार को समझकर फैसले लेते हैं। इन सभी फैसलों का लक्ष्य भारत माता की आराधना करना होता है।
    खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता उनके लिए महत्वपूर्ण है और हर किसी को उसकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। “पार्टी अब जन-आंदोलन से आगे बढ़कर एक जनविश्वास बन चुकी है। समाज हमसे अच्छे आचरण और जिम्मेदार नेतृत्व की उम्मीद करता है, जिसे हमें पूरी निष्ठा से निभाना होगा,” उन्होंने कहा।
    हेमंत खंडेलवाल ने अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके दादा 1930 में कांग्रेस को हराकर नगर पालिका अध्यक्ष बने थे और उनके पिता चार बार सांसद रहे। “हमारे परिवार में सिर्फ संस्कार, अनुशासन और भाजपा की विचारधारा की ही चर्चा होती है,” उन्होंने कहा।
    अपने अध्यक्षीय दृष्टिकोण को साझा करते हुए खंडेलवाल ने कहा, “मैं इसे सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा और संगठन के प्रति समर्पण का अवसर मानता हूं। हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व हमें मिला है।”

  • ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    भोपाल,12 जुलाई(ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)।सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार ने अब मूलभूत सुधार शुरु किए हैं।श्रम विभाग की ओर से भारी वाहनों जैसे बस, ट्रक, टैक्सी आदि का संचालन करने वाले ड्रायवरों तथा अन्य स्टाफ जैसे कंडक्टर और क्लीनर के कार्य के घंटे के संबंध में प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की पहल की जा रही है।इसी सिलसिले में मोटर ट्रांसपोर्ट नियोजकों की कार्यशाला शुक्रवार 18 जुलाई को श्रमायुक्त कार्यालय, इंदौर में सम्पन्न हुई।

    कार्यशाला में श्रमायुक्त श्रीमती रजनी सिंह ने मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट कार्यों में संलग्न ड्राइवरों और अन्य स्टाफ के कार्य के घंटों, विश्राम अवधि और अन्य सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के लिए प्रतिदिन 8 घंटे और साप्ताहिक 48 घंटे कार्य की अवधि निर्धारित है। इन प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रायवरों और स्टाफ के लगातार लंबी अवधि तक कार्य करने और विश्राम का समय न मिलने से थकान और तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

    श्रमायुक्त ने वाहनचालकों के समय-समय पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषकर नेत्र परीक्षण, सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न तकनीकों और उपकरणों की सहायता से, साथ ही जागरूकता और प्रचार-प्रसार के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए ड्रायवरों के कार्य समय और विश्राम अवधि की निगरानी करने तथा अन्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने हेतु मोटर वाहनों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस प्रणाली जैसे तकनीकी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    कार्यशाला में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान ने भी भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में संभावित वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्रायवर और पैसेंजर मैनेजमेंट सिस्टम का भविष्य में उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में कार्यशाला में एक प्रस्तुति भी दी गई, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी। कार्यशाला में ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अधिनियम के परिपालन के लिए सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए और मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। कार्यशाला में श्रम विभाग से श्री प्रभात दुबे, श्री आशीष पालीवाल, जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रदीप शर्मा, अटल इंदौर ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान, प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गोविंद शर्मा, इंदौर ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के श्री सी. एल. मुकाती एवं अन्य ट्रांसपोर्टर्स उपस्थित थे।

  • एमपी पुलिस ने चलाया नशा रोकने का अभियान

    एमपी पुलिस ने चलाया नशा रोकने का अभियान

    भोपाल, 15 जुलाई 2025। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने आज मंगलवार 15 जुलाई 2025 को पुलिस मुख्‍यालय, भोपाल में आयोजित प्रेस कॉंफ्रेंस में मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई तक चलाए जाने वाले वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश तथा अभियान के पोस्‍टर का विमोचन कर किया।

          डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि ड्रग्‍स- ये शब्‍द सुनते ही दिमाग में कई दृश्‍य उभरते हैं- दुर्बल शरीर, नशीली आंखे, धुऐं का गुबार और अंधकार। मादक पदार्थों के सेवन की लत कई युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रही है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्‍थ राजनैतिक नेतृत्‍व भी इस विकराल समस्‍या से चितिंत एवं इसके निदान हेतु प्रयासरत है। हम सभी की ये नैतिक जिम्‍मेदारी है कि इसके दुष्‍प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्‍चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्‍होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्‍त हो मध्‍यप्रदेश’’

    इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक सी आई डी श्री पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स श्री के.पी.वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन. ओ. डॉ. आशीष, पी एस ओ टू डीजीपी श्री विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन उपस्थित रहें।

    इनकी रहेगी महत्‍वपूर्ण भूमिका

    अभियान में उच्च शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग सहित अन्‍य विभाग, एनजीओ, धार्मिक संस्‍थान आदि की सक्रिय सहभागिता रहेगी।