Month: June 2025

  • नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    भोपाल,27 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने कहा है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस से बन रहीं आधुनिक दवाएं मानवता के लिए उपहार बनकर सामने आई हैं। ये दवाएं जल्दी बन जाती हैं और व्यक्ति विशेष के लिए खास तौर पर बनाई जा सकती हैं। एल एन सी टी संस्थान भोपाल के फार्मेसी विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं साइंस टेक्नोलॉजी विभाग मध्य प्रदेश के संचालक डॉक्टर अनिल कोठारी थे।


    कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में स्टेट फार्मेसी काउंसिल मध्य प्रदेश के अध्यक्ष .एवं फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय कुमार जैन ने भाग लिया । संस्थान के डायरेक्टर श्री अशोक राय एवं फार्मेसी विभाग की विभाग अध्यक्ष श्रीमती पारुल मेहता ने अतिथियों का पुष्प एवं मालाओं से स्वागत किया । श्री कोठारी ने अपने अपने उद्बोधन में कहा कि फार्मेसी के बगैर विज्ञान अधूरी है विज्ञान की विभिन्न विभिन्न शाखों द्वारा फार्मेसी के क्षेत्र में विभिन्न शोध कार्य किया जा रहे हैं।


    मध्य प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष श्री संजय जैन ने संगोष्ठी में फार्मेसी के क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में जितनी उन्नति फार्मेसी के क्षेत्र में हुई है। उतनी आजादी के बाद कभी नहीं हुई थी। इसी का कारण है कि दुनिया के अधिकतम देश औषधि के क्षेत्र में भारत पर निर्भर हैं।


    मध्य प्रदेश में भी फार्मेसी औद्योगिक क्षेत्र एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल के मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इसी का कारण है कि मध्य प्रदेश आज फार्मेसी के क्षेत्र में विकासशील प्रदेशों में जाना जाता है।
    इस संगोष्ठी में देश प्रदेश एवं विदेश के कई फार्मासिस्ट विभिन्न माध्यमों के द्वारा भाग ले रहे हैं।

  • देवी अहिल्याबाई की छवि से क्यों चिढ़ी कांग्रेस

    देवी अहिल्याबाई की छवि से क्यों चिढ़ी कांग्रेस


    पूरी दुनिया इन दिनों शैतान पर कंकर फेंककर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान लेने वाली घिनौनी मानसिकता से परेशान है। इस रेगिस्तानी सोच के परंपरा वाहक काल्पनिक शैतान पर लेबल चिपकाने और फिर उस पर आतंकी हमला करने में ही जुटे रहते हैं। उनकी इसी राजनैतिक शैली की वजह से कई देश आज बंजर और वीरान हो चुके हैं। इसके बावजूद भारत की कांग्रेस उस मनोदशा से उबरने के बजाए उस लुटेरी मानसिकता की ध्वजवाहक बनी हुई है। दरअसल ये मनोदशा कांग्रेस के डीएनए में शामिल है। कभी अंग्रेजों के निवेश को बचाकर उन्हें बच निकलने का सेफ पैसेज देने के लिए गढ़ी गई कांग्रेस आज भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। नगरीय विकास एवं आवास व संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में एक सामाजिक संवाद के दौरान जब कहा कि भारत हमेशा से लक्ष्मीजी, सरस्वती जी जैसी देवियों की उपासना करता रहा है। यही वजह है कि हमारी बहन बेटियां सोलह श्रंगार से सज्जित रहती आईं हैं। आज भी भारतीय वेशभूषा में सजी संवरी नारियां समाज को संस्कारित करने की बड़ी भूमिका निभाती हैं। उन्होने कहा कि कई बार बेटियां जब ऊटपटांग कपड़े पहिनकर मेरे साथ फोटो खिंचवाने आती हैं तो मैं उन्हें मना कर देता हूं और कहता हूं कि वे रुचिकर वस्त्र पहिनकर आएं। मुझे ऊटपटांग कपड़े पहिनकर आने वाली संस्कार विहीन स्त्रियां अच्छी भी नहीं लगतीं। कैलाश विजयवर्गीय राज्य के एक वरिष्ठतम मंत्री हैं। मालवा के इंदौर जैसे शहर को विकास की ऊंचाईयों तक ले जाने में उनका भी उल्लेखनीय योगदान है। इंदौर वैसे भी राज्य का सबसे प्रगतिशील नगर है। यहां के युवा देश ही नहीं पूरी दुनिया में सफलताओं के झंडे गाड़ रहे हैं। पूरा शहर एक परिवार की तरह आगे बढ़ने की चुनौतियों से जूझता है। शहर में वो हर छोटी बात चर्चा का विषय बनती है जिसकी वजह से सामाजिक व्यवस्था में मजबूती आ सकती है। यही वजह है कि सफाई के मापदंडों पर आज इंदौर ने सिंगापुर की बराबरी कर ली है। यदि कोई बाहिरी व्यक्ति गलती से सड़क पर कचरा फेंक दे तो स्थानीय राहगीर भी उसे टोक देता है. यही नहीं वह कचरा उठाकर कूढ़ेदान में भी फेंक देगा। शहर में लड़के लड़कियों की बदलती आदतें भी जनचर्चा का विषय बनती हैं। युवाओं की गलतियों को माडरेट करने में भी इंदौर का कोई जवाब नहीं है। ऐसे में वहां का जन नेता यदि युवतियों को सज संवरकर रहने और देवियों की तरह समाज का प्रतिनिधित्व करने की सलाह दे रहा है तो इस कदम का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए। कैलाश विजयवर्गीय अपने इस उद्बोधन में समाज के आधे हिस्से को अपनी भूमिका में सफल होने का आव्हान करते नजर आ रहे हैं। वे लड़कियों से कह रहे हैं कि स्त्रियों की आजादी का मतलब छोटी छोटी वेशभूषा में नहीं बल्कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में है। इंदौर के आम लोगों ने अपने लाड़ले नेता की इस सलाह को सिर आंखों पर लिया है। घर घर में लड़कियां अपने वरिष्ठ नेता का संकेत समझ रहीं हैं और सम्मानजनक वेशभूषा का उद्देश्य पूरा करने में जुट गईं हैं। इंदौर ही नहीं मालवा से उठी इस पुकार ने समूचे देश में विकास के इस पैमाने को स्वीकार किया है। इसके विपरीत कांग्रेस के नेताओं के जो बयान सामने आए हैं वे क्षोभजनक हैं। संभव था कि कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर चुप रहकर अपनी खोखली मानसिकता का प्रकटीकरण न करते। वोट बटोरने वाली मानसिकता से वशीभूत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी की अराजक सोच सामने ला दी है। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को महिलाओं के कपड़े ही क्यों दिखाई देते हैं। यही नहीं उनके सुर में सुर मिलाते हुए कुछ प्रगतिशील सोच का झंडा उठाए फिरने वाले अखबारों ने भी इस बयान का विरोध शुरु कर दिया है। खुद को प्रगतिशील कहलाने का दंभ भरने वाले वामपंथियों के लिए तो कैलाश जी का ये बयान पच भी नहीं सकता। दुनिया भर में अराजकता फैलाने वाले धर्मों और तानाशाही ताकतों के लिए ये सुविधाजनक लगता है कि वे समाज में स्थापित मूर्तियों का भंजन करें ताकि येन केन प्रकारेन सत्ता शीर्ष पर बैठ सकें। भारत का इतिहास पढ़ने वाले जानते हैं कि किस तरह भारत में मुगल सल्तनत का पतन अय्याशी और हरमों की दुर्दशा की वजह से हुआ था। आजादी के बाद अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने फिल्म संसार की मदद से उसी नंगई को समाज के बीच बोने का प्रयास किया ताकि भारत कभी अपने पैरों पर न खड़ा हो सके और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कारोबार इस विकलांग समाज में बदस्तूर जारी रहे। भारतीय समाज में शालीन वस्त्र पहिनकर प्रगतिशील सोच रखने वाली देवी अहिल्या बाई समूचे मालवा को विकास पथ पर अग्रसर कर पाईं तो ये हमारी देशज सोच की वजह से ही संभव हो सका था। वे तो रानी साहिबा थीं। उन्हें ऊटपटांग वस्त्र पहिनकर विदेशी माडल बनने से कौन रोक सकता था। वे पढ़ी लिखीं थीं और दुनिया भर के कई देशों से उनका सीधा संपर्क था। इसके बावजूद वे माता अहिल्याबाई से देवी अहिल्या केवल इसलिए बन पाईं क्योंकि उन्होंने खंडित सोच के बजाए अनुशासित सोच को प्राथमिकता दी। आज जब समाज और वर्गों को खंड खंड करके आपस में लडाने वाली कांग्रेस को लोगों ने सत्ता से बाहर धकेल दिया है तब उसके नए नेता बार बार अपने पूर्वजों की गलतियों को दुहराकर यही जताने का प्रयास कर रहे हैं कि हम नहीं सुधरेंगे। संघ और भाजपा के संस्कारों में पले बढ़े कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी बात ठीक ढंग से कह दी और समाज ने उसको सकारात्मक नजरिए से स्वीकार किया ये संतोष की बात है।समाज को ये भी तय करना होगा कि विदेशी षड़यंत्रों को जड़ जमाने का मौका न मिले। ऐसे मूर्ति भंजकों को कुचलना हमारी भी जवाबदारी है।