Month: April 2025

  • नरवाई के नाम पर किसानों की प्रताड़ना

    नरवाई के नाम पर किसानों की प्रताड़ना


    सरकार ने नरवाई प्रबंधन पर कई कड़े फैसले लिए हैं। सरकार का कहना है कि नरवाई जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषण होता है वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो जाती है। इसलिए एक मई के बाद यदि कोई किसान अपने खेतों में नरवाई जलाता पाया जाएगा तो उस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दंड वसूला जाएगा। यही नहीं ऐसे चिन्हित किसानों की किसान सम्मान निधि बंद कर दी जाएगी। समर्थन मूल्य पर उस किसान की फसल भी नहीं खरीदी जाएगी। इस तरह के कड़े प्रतिबंधात्मक कदमों से खेतों की नरवाई का प्रबंधन किया जाएगा। इससे जहां जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाया जा सकेगा वहीं जानवरों के लिए भूसा भी बचाया जा सकेगा। कई जिला कलेक्टरों ने तो आगे बढ़कर किसानों से जुर्माना वसूलना भी शुरु कर दिया है। सरकार हर साल कृषि और विभाग और उसके सहयोगी संस्थानों पर लगभग पचास हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करती है। कृषि प्रबंधन पर तीस हजार करोड़ रुपए, उपार्जन पर बीस हजार करोड़ रुपए ,खेती के मशीनीकरण पर लगभग दो सौ करोड़ रुपए, खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा कृषि संबंधी कार्यों पर अन्य सहयोगी विभागों की राशि मिलाकर ये आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपयों तक पहुंच जाता है। पिछले डेढ़ दशक में कृषि कर्मण अवार्ड जैसे पुरस्कार हासिल करके मध्यप्रदेश ने देश के कृषि क्षेत्र में डंका बजा दिया है। सिंचाई प्रबंधन पर सरकार हर साल बीस हजार करोड़ रुपयों से अधिक की राशि खर्च करती है। भारी धनराशि खर्च किए जाने और निजी क्षेत्र के इससे कई गुना अधिक निवेश से राज्य की लगभग साढ़े बारह लाख हेक्टेयर जमीनें सिंचित हो चुकी हैं। सरकार हर साल अपने बजट की बड़ी धनराशि सब्सिडी के रूप में किसानी कार्यों पर खर्च करती है। यही कारण है कि आज राज्य की ज्यादातर जमीनें सिंचित हो गई हैं। किसानों ने भी आगे बढ़कर दो से तीन फसलें लेना शुरु कर दिया है। फसल काटे जाने के बाद खेत खाली करने और अगली फसल बोने के बीच बहुत कम समय मिलता है। इतने समय में कृषि अवशेषों का सड़ना गलना संभव नहीं होता है। यही वजह है कि किसानों ने नरवाई जलाने की सस्ती प्रक्रिया अपना ली है। इससे खेत के अधिकतर कृषि अवशेष जल जाते हैं और किसान रोटावेटर चलाकर खेत में हल चला देता है। इस प्रक्रिया में खेत की मिट्टी भी काफी हद तक जल जाती है और कड़ी होती चली जाती है। सरकार और इससे जुड़ा तंत्र नरवाई जलाने से रोकने वाले सरकार के फैसले का समर्थन कर रहा है। ऊपरी तौर पर ये प्रयास सराहनीय भी नजर आते हैं। इसके विपरीत जब कृषि विभाग और सरकारी तंत्र के कार्यों का अवलोकन किया जाए तो गहरी निराशा हाथ लगती है। खेती भले ही निजी क्षेत्र में की जाती हो पर कृषि प्रबंधन का ठेका लेने वाले सरकार के विभाग अपना दायित्व निभाने में बुरी तरह असफल साबित हुए हैं। पिछले पच्चीस सालों में सरकार ने कृषि यंत्रीकरण पर ही लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों से अधिक की धनराशि खर्च की है।इसके बावजूद जमीन की जुताई ,कटाई आदि में निजी क्षेत्र की मशीनें ही दायित्व संभाल रहीं हैं। हर साल पंजाब से आने वाले हार्वेस्टर फसलें तो काट देते हैं पर वे नरवाई का भूसा खेत में ही बिखरा देते हैं। कुछ जिला कलेक्टरों ने ऐसे हार्वेस्टर बंद करने और फसलों की कटाई के लिए सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का अभियान चलाया है। बेशक ये नई मशीनें किसानों के लिए सहयोगी हैं सरकार इनका प्रमोशन भी कर रही है। इसके बावजूद सरकार अपनी कमजोरी को स्वीकार करने तैयार नहीं है। हर साल बजट की बड़ी धनराशि खर्च करने के बावजूद राज्य की खेती का मशीनीकरण फिसड्डी बना हुआ है। अपनी अकुशलता को छिपाने के लिए सरकार ने किसानों पर प्रतिबंध लगाना शुरु कर दिया है। ये कदम निश्चित ही किसानों के हित में नहीं है। यदि किसान दो या तीन फसलें लेकर अधिक खाद्यान्न का उत्पादन करना चाह रहा है तो उसे प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। उसे दंडित करके सरकार कृषि विपणन की अपनी अक्षमता को छिपाने का प्रयास अधिक कर रही है। सरकार को अपने फैसले पर नए संदर्भों में विचार करना होगा।

  • हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी

    हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी


    भोपाल,16 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की फूड एंड ड्रग कंट्रोलर कार्यालय की संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी की महत्वाकांक्षाएं राज्य की भाजपा सरकार के लिए गले में बंधा पत्थर बनती जा रहीं हैं। प्रशासन का दुरुपयोग करके उन्होंने भजकलदारम का जो खेल शुरु कर दिया है उससे राज्य की जनता विषैले खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए मजबूर हो गई है। यही नहीं राजा भोज एयरपोर्ट के विमानपत्तन निदेशक रामजी अवस्थी की पत्नी होने के नाते उन्होंने सरकार को जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु किया है उससे वे कई मंत्रियों की गुडबुक में पहुंच गईं हैं। हालांकि इस वीआईपी ट्रीटमेंट की आड़ में कथित तौर पर उन्होंने हवाला कारोबारियों को वायु मार्ग से रकम पहुंचाने का गोरख धंधा भी चला रखा है। हवाला की इसी कमीशन के बलबूते वे राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नति पाकर आईएएस बनने का ख्वाब देख रहीं हैं.


    सत्ता के गलियारों से जो खबरें छन छनकर बाहर आ रहीं हैं उनसे पता चल रहा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी माया अवस्थी इन दिनों आईएएस बनने का अनुष्ठान बड़ी तन्मयता से चला रहीं हैं। इसके लिए उन्होंने अपने पति की मदद से मंत्रियों को हवाई अड्डे पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु कर दिया है। मंत्रियों की इसी करीबी का लाभ लेकर उन्होंने खाद्य अपमिश्रण करने वाले व्यापारियों से अवैध वसूली का नेटवर्क चला रखा है। हर संभागीय और जिला फूड अधिकारी को हर महीने शहर के अनुसार पेटियां लेकर राजधानी पहुंचना पड़ता है। विभाग के ही त्रस्त अधिकारियों का कहना है कि मैडम का वसूली अंदाज बड़ा खौफनाक है। वे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को अपना मामा बताती हैं।विमानपत्तन निदेशक पद पर पदस्थ अपने पतिदेव रामजी अवस्थी की मदद से उन्होंने रीवा में हवाई अड्डा शुरु करने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दिला दी है। इसी प्रोजेक्ट की आड़ में उन्होंने वसूली का कारोबार धड़ल्ले से खोल दिया है।

    रामजी अवस्थीःहवाला कारोबार की आड़ में पत्नी को आईएएस बनाने का बीड़ा उठाया


    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल पर तो मैडम ने वो जादू चला दिया है कि उन्हें आसमान से सोना झरता नजर आने लगा है। माया अवस्थी का फरमान राज्य के कोने कोने में व्यापारियों और सड़कों पर खड़े रेहड़ी वालों तक पहुंच गया है कि यदि उन्हें अपना कारोबार चलाना है तो सरकार की सेवा करनी होगी। तुम नकली खाद्य सामग्री बेचो या कम तौलो कोई तुम्हें नहीं छुएगा । यही वजह है कि राज्य में नकली खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रहीं हैं.


    जिन व्यापारियों की खाद्य सामग्री का नमूना फेल करना होता है तो उसे राज्य की सरकारी प्रयोगशाला में भिजवा दिया जाता है जहां नमूना मिलावटी पाया जाता है। जिन व्यापारियों को माफी देनी होती है तो उनके नमूने लैब की व्यस्तता का बहाना बनाकर निजी लैबों में भिजवा दिया जाता है। बताते हैं कि इन लैबों से हर महीने तगड़ी वसूली की जाती है। इसका प्रमाण उन लैबों के भुगतानों से सहज प्राप्त किया जा सकता है। मैडम खुद फाईल भेजकर उनके भुगतान जारी करवाती रहती हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों के मामलों की फाईलें या तो ढंडे बस्तों में डाल दी जाती हैं या फिर दलालों के माध्यम से उन्हें भजकलदारम की पगडंडी पर धकेल दिया जाता है।

    नरेन्द्र शिवाजी पटेलः प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को झमेले में फंसाने की नादानी


    इस कार्य के लिए मैडम ने स्थापना शाखा में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को पदस्थ कर रखा है। राजेन्द्र मेहरा नाम का ये कर्मचारी वास्तव में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। इसे गैरकानूनी तरीके से तृतीय श्रेणी अधिकारी बना दिया गया था। यह वहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों को धमकाकर वसूली का कारोबार चलाता है। इसे पदोन्नति की पात्रता न होने की वजह से पदावनत किया जाना चाहिए था लेकिन मैडम की कृपा ने इसे विभाग का दबंग व्यक्ति बना दिया है।


    सूत्र बताते हैं कि हवाला का नेटवर्क चलाने वाले व्यापारियों के चंदे की आड में ही मैडम ने अपने पति की मदद से हवाई सेवा को कूरियर सर्विस की तरह चला रखा है। एयरपोर्ट का प्रबंधन भले ही विमानपत्तन प्राधिकरण के हाथ में हो लेकिन विमान तल की सुरक्षा का दायित्व टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया की एजेंसी सीएआईएएसएल के पास है। उसकी स्वयं की इनोवा गाडियां वीआईपी को विमान में बैठाने के लिए लगाई गईं हैं। मैडम अवस्थी के पतिदेव रामजी अवस्थी हर वीआईपी को अपने स्वागत कक्ष में बिठाते हैं और फिर उन्हें उनके निजी सामान समेत स्वयं अपनी कार में बिठाकर विमान के दरवाजे तक पहुंचाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की चैकिंग नहीं की जाती है। सुरक्षा एजेंसी को मालूम रहता है कि वीआईपी को लाने ले जाने में जब इतना बड़ा अधिकारी स्वयं मौजूद है तो फिर हम क्यों पंगा लें।


    दरअसल एयर इंडिया के निजीकरण के दौरान लगभग पच्चीस हजार कर्मचारियों को निजी एजेंसियों के माध्यम से ठेके पर रखा गया है। टाटा वाली एयर इंडिया इनके मामले में ज्यादा दखलंदाजी नहीं करती क्योंकि उन कर्मचारियों का वेतन पुरानी शर्तों के आधार पर विमानपत्तन प्राधिकरण ही देता है। नियोक्ता एजेंसी उन कर्मचारियों का वेतन मनमर्जी से देती है । मजबूर कर्मचारी कुछ नहीं बोल पाते इसलिए विमानपत्तन अधिकारी होने का लाभ लेकर रामजी अवस्थी कथित तौर पर हवाला कारोबारियों को वीआईपी बताकर उनके लगेज समेत विमान में बिठाकर आते हैं। ग्राऊंड हैंडलिंग एजेंसी के कर्मचारी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाते। जिस सीआईएसएफ को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है उसे गच्चा देकर इस मार्ग से हवाला की रकम और कारोबारी सुरक्षित बच निकलते हैं।


    हवाला का ये कारोबार इतना मजबूत है कि इसका लाभ सरकार में बैठे नेता और आला अफसर सभी उठाते हैं। राज्य से पिछले बीस सालों में चुराए गए लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों को इसी तरह अन्य प्रदेशों या देशों तक पहुंचाया जाता रहा है। यही वजह है कि माया अवस्थी आज सरकार के कई बड़े नेताओं की नाक का बाल बन गईं हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि राज्य सरकार उनका नाम आईएएस की प्रमोशन सूची में केन्द्र के पास पहुंचाएगी। केन्द्र सरकार में भी बैठे कई लोग उन्हें एक सुविधा प्रदान करने वाली अधिकारी के रूप में जानते हैं । इसका लाभ लेकर वे आईएएस जरूर बन जाएंगी। मैडम का कुर्सी अभियान भले ही सबकी आंखों में धूल झोंककर चल रहा हो लेकिन इससे सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। राज्य के घोटाले बाजों की इस कड़ी पर मोदी की न खाऊंगा न खाने दूंगा वाली निगाह अब तक क्यों नही पहुंची ये शोध का विषय है।

  • कृषक कल्याण मिशन से मध्यप्रदेश लिखेगा नई इबारत

    कृषक कल्याण मिशन से मध्यप्रदेश लिखेगा नई इबारत

    भोपाल,15 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के किसानों के समन्वित विकास के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग, मत्स्य पालन विभाग, पशु पालन एवं डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग में प्रचलित योजनाओं को एक मंच पर लाकर मध्यप्रदेश किसान कल्याण मिशन को प्रारंभ करने की सैद्धांतिक अनुमति दी गयी।

    मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। कृषि उत्पादकता (किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) वर्ष 2002-2003 में 1195 था जो वर्ष 2024 में 2393 हो गया। यह वृद्धि 200 प्रतिशत हो गयी है। फसल उत्पादन (लाख मीट्रिक टन) वर्ष 2002-2003 में 224 एवं वर्ष 2024 में 723 होकर 323 प्रतिशत हो गयी है। कृषि विकास दर (प्रतिशत में) 2002-2003 में 3 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 9.8 प्रतिशत हो गयी। 327 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कृषि क्षेत्र का बजट (करोड़ रूपये) वर्ष 2002-2003 में 600 करोड़ एवं वर्ष 2024 में 27050 करोड़ होकर वृद्धि दर 4508 प्रतिशत हुई। मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र का योगदान प्रदेश की जीडीपी में 39 प्रतिशत है।

    म.प्र. कृषक कल्याण मिशन का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि को जलवायु-अनुकूल बनाना, धारणीय कृषि पद्धतियों को अपनाना, जैव विविधता और परम्परागत कृषि ज्ञान संरक्षण, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।

    किसानों की आय में वृद्धि- कृषि तथा उद्यानिकी के अंतर्गत फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, उच्च मूल्य फसलों की खेती, गुणवत्तापूर्ण आदानों की उपलब्धता – बीज, रोपण सामग्री, उर्वरक, कीटनाशक, और कृषि विस्तार एवं क्षमता विकास, सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की आसान उपलब्धता, खाद्य प्र-संस्करण और कृषि आधारित उद्योग, वैल्यू-चैन विकास और मौजूदा वैल्यू-चैन का सुदृढ़ीकरण, मप्र की विशिष्ट समस्याओं के लिए अनुसंधान एवं विकास है।

    कृषि तथा उद्यानिकी सस्टेनेबल कृषि पद्धतियां के अंतर्गत गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (जीएपी) को अपनाना, जैविक/प्राकृतिक खेती क्षेत्र में बढ़ोतरी, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों के लिए मार्केट लिंकेज का निर्माण तथा सुदृढ़ीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद हेतु प्रमाण पत्र जारी करने तथा ट्रैसेबिलिटी सिस्टम को विकसित ,किसानों की उपज के उचित मूल्य सुनिश्चित करना,मंडियों का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन, मंडी कार्यों के प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, मण्डी में पारदर्शी तथा निष्पक्ष नीलामी की प्रक्रिया को सुदृढ़ एवं मंडी के बाहर उपज बेचने की सुविधा को विकसित करना, जिन फसलों में वायदा अनुबंधों की अनुमति है, उनकी कार्य योजना तैयार करना है।

    किसानों की आय में वृद्धि के लिए सहकारिता एवं मत्स्य पालन के अंतर्गत सहकारिता के माध्यम से दूध संकलन के कवरेज को 26000 ग्रामों तक ले जाया जायेगा। दूध संकलन व प्र-संस्करण की वर्तमान क्षमता को बढाकर 50 लाख लीटर / दिवस किया जायेगा। पशुओं में स्टॉल फीडिंग एवं मिनरल मिक्चर का घरेलू विकल्प का उपयोग से निराश्रित गौवंश की संख्या में कमी लाना। मत्स्य पालन क्षेत्र में आय वृद्धि के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग – Cage Farming तथा Biofloc, मछुआ/किसान क्रेडिट कार्ड योजनान्तर्गत शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जायेगा।

    मिशन के अन्य घटक में कृषि का जलवायु-अनुकूलन तथा रिस्क मिटिगेशन, जलवायु अनुकूल किस्मों को विकसित करवाना, कृषि फसलों के साथ ही पशुपालन, मत्स्योत्पादन को अपनाना, जैव विविधता और परम्परागत कृषि ज्ञान संरक्षण, पारंपरिक कृषि पद्धतियों का दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और उपयोग शामिल है।

    मिशन के अपेक्षित परिणाम में उद्यानिकी फसलों का सकल वर्धित मूल्य कृषि आधारित फसलों से अधिक किया जायेगा। उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल राष्ट्रीय औसत के बराबर लाया जायेगा। कृषि यंत्रीकरण को डेढ़ गुना करना, कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश को 75 प्रतिशत बढाना, प्रदेश को नरवाई जलाने से मुक्त करना, जैविक / प्राकृतिक / गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस कृषि के अंतर्गत संपूर्ण बोये गये क्षेत्र का 10 प्रतिशत हिस्सा एवं सूक्ष्म सिंचाई को 20 प्रतिशत क्षेत्रफल तक पहुंचाना हैं।

    फसल बीमा का कवरेज 50 प्रतिशत तक करना, संकर तथा उन्नत बीजों का विस्तार आधे क्षेत्रफल तक करना, प्रदेश के अन्नदाता को ऊर्जादाता सौर ऊर्जा पम्प अनुदान पर उपलब्ध कराये जाना, नये प्र-संस्करण क्षेत्रों की स्थापना, विपणन नेटवर्क का विस्तार और प्रदेश की बाहर की मंडियों तक पहुंच बढ़ाना, मत्स्य बीज के मामलें में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना, कोल्ड चेन और नेटवर्क विकास के जरिये किसानों को मत्स्य संपदा के लिए मिलने वाले मूल्य को डेढ़ गुना करना, उच्च उत्पादकता मछली का पालन 10288 मीट्रिक टन किया जाना, मत्स्य पालन के लिए 1.47 लाख किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराये जायेंगे। संगठित क्षेत्र में दुग्ध संकलन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन किया जायेगा। पशुधन उत्पादकता में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी। बेसहारा गौ-वंश की देखभाल के लिए प्रदेशव्यापी नेटवर्क तैयार करना, जिससे सड़कों पर उनकी उपस्थिति शून्य हो सकेगी।

    मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। मिशन क्रियान्वयन की कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। मिशन क्रियान्वयन जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में किया जायेगा।

    चिकित्सा महाविद्यालय, सतना से संबंद्ध नवीन चिकित्सालय के निर्माण के लिए राशि 383 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत चिकित्सा महाविद्यालय, सतना से संबंद्ध नवीन चिकित्सालय के निर्माण के लिए राशि 383 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

    गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में नवीन पदों की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी एवं नियोनेटोलॉजी विभाग में नियमित स्थापना के कुल 12 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इन पदों में प्राध्यापक के 3 पद, सह प्राध्यापक के 3 पद, एवं सहायक प्राध्यापक के 3 पद एवं सीनियर रेसीडेंट के 3 पद शामिल हैं।

  • उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी

    उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी


    भोपाल, 13 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के बिट्टन मैदान पर 7 से 13 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी मेला का आज विधिवत समापन हो गया।मेले के भव्य आयोजन के स्वरूप को देखते हुए नगर पालिक निगम के सभापति किशन सूर्यवंशी ने कहा कि ये आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता का बुलंद उद्घोष है।ये उद्यमियों को संबल देने वाला बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

    राजेश पोरवालः स्वदेशी के विचार को देशव्यापी बनाने में उल्लेखनीय योगदान.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जिस तरह मेले के आयोजन को सफल बनाने के लिए आशीर्वाद दिया उससे नागरिकों की जन भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने मेले के समापन अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित नगर निगम सभापति किशन सूर्यवंशी का हार्दिक अभिनंदन किया। श्री सूर्यवंशी ने मेले का भ्रमण किया और देश भर से आए शिल्प कलाकारों की सफलता की कहानियां भी सुनीं। उन्होंने बताया कि जिस तरह युवा उद्यमियों ने अपनी कला अभिरुचि को व्यावसायिक तौर पर प्रस्तुत किया है उसे देखकर कहा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में जन भागीदारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जो उपाय किए हैं उनमें इस तरह के मेलों के आयोजन से युवाओं को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं।


    भारत सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि चेतन कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने उद्यमियों के लिए कई फ्लैगशिप योजनाएं चलाई हैं। उद्यमियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करके राष्ट्र के विकास सूचकांक को बढ़ाने में मदद मिली है। इस मेले में भी विभाग ने सक्रिय सहयोग करके युवाओं का मार्गदर्शन किया है।राज्य सरकार ने जिस तरह आगे बढ़कर उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराया उससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि महावीर जयंती तक मेले की सूचना राजधानी के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच चुकी थी। इससे दस अप्रैल से मेला स्थल पर खासा जमघट लगने लगा था। छुट्टी के दिनों में तो मेले में पहुंचे नागरिकों ने भरपूर खरीददारी की। मेला स्थल पर वाहन पार्किंग, पेयजल, बैठक व्यवस्था, प्रकाश संयोजन और व्यंजनों की सुविधा और बच्चों के लिए खेल जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराईं गईँ थीं जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। मेले के संचालक प्रणम्य अग्रवाल ने सभी सहयोगियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया

    नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया


    भोपाल, 11 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने काऊंसिल में चल रही अनियमिताओं पर पर्दा ढांकने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री को इस बार एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। लंबे समय से पंजीयन के लिए भटक रहे फार्मासिस्टों की शिकायतों पर अखबारी खबरों से परेशान प्रभारी रजिस्ट्रार ने इस बार राज्यमंत्री को अपनी ढाल बनाया। छोटे मंत्री के पास काऊंसिल का प्रभार भी नहीं है इसके बावजूद उन्होंने दौरा करके स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर डाला है।


    पिछले लंबे समय से प्रदेश के फार्मासिस्टों और केमिस्टों के बीच पंजीयन को लेकर मारामारी चल रही है।प्रदेश के फार्मेसी कालेजों से हर साल लगभग तीस हजार विद्यार्थी डिग्री लेकर निकलते हैं। फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत होने के बाद वे देश और दुनिया के विभिन्न फार्मा संस्थानों में नौकरी पा सकते हैं। इस लिहाज से ये पंजीयन उनके जीवन के लिए सुनहरा मोड़ साबित होता है। फार्मासिस्टों की इसी चाहत का फायदा उठाकर काऊंसिल में लंबे समय से हेराफेरी चलती रही है। प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी का कहना है कि फार्मेसी की डिग्री लेकर आवारा किस्म के लोग खुद को फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत करवा लेते हैं और अपने पंजीयन प्रमाण पत्र के नाम पर मेडीकल दूकान खोलकर किराए पर दे देते हैं। इसीलिए हमारा प्रयास रहता है कि कम से कम फार्मेसिस्टों का पंजीयन हो ताकि अराजकता न फैले।


    यही तर्क देकर उन्होंने आज छोटे मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का दौरा काऊंसिल में कराया। यहां मंत्रीजी के निर्देश पर फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को बुला लिया गया। रजिस्ट्रार ने मंत्रीजी से कहा कि अध्यक्ष महोदय उन पर वाजिब पंजीयन जारी करने का दबाव बनाते हैं। इस पर अध्यक्ष ने मंत्रीजी को बताया कि हजारों विद्यार्थी परेशान घूमते रहते हैं इसीलिए वे रजिस्ट्रार को काऊंसिल में बैठने और प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देते रहते हैं। फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रजिस्ट्रार और काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने शिकायती लहजे में मंत्री जी से कहा कि अध्यक्ष महोदय यहां पदस्थ रजिस्ट्रार कुमारी दिव्या पटेल को भी जांच उपरांत पंजीयन जारी करने का निर्देश देते रहे हैं। कुमारी पटेल इन दिनों मातृत्व अवकाश पर गई हुईं हैं इसलिए मुझे काऊंसिल का प्रभार दिया गया है। मेरे पर इतना समय नहीं है कि मैं यहां बैठकर पंजीयन जारी करूं।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल राज्य सरकार के निर्देश पर पंजीकृत संस्था है। इस संस्था में फार्मा क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पदस्थ किया जाता है। इसी संस्था के फंड से रजिस्ट्रार और स्टाफ का वेतन दिया जाता है। चुनी हुई काऊंसिल संस्था के फंड प्रबंधन और जनता की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। फंड का प्रबंधन रजिस्ट्रार के हाथ में होता है । राज्य प्रशासनिक सेवा से भेजे गए रजिस्ट्रार की नाकामियों का खमियाजा सरकार और काऊंसिल दोनों को भुगतना पड़ता है।


    फार्मा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत युवाओं को अवसर दिए जा रहे हैं. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ही काऊंसिल की चुनी हुई परिषद रजिस्ट्रार पर युवाओं के हित में जांच उपरांत पजीयन जारी करने के निर्देश देती रहती है। पिछले कुछ सालों से गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं हैं लेकिन सरकारी अमला अपना भ्रष्टाचार और नाकामी छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता रहा है।


    विधानसभा चुनावों के पहले इंदौर की विजय नगर पुलिस ने जिस फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया था उसमें फार्मेसी काऊंसिल के तीन बाबू संजय तिलकवार, विजय शर्मा और आरएन पांडे भी धरे गए थे। उन्हें तो तभी निलंबित कर दिया गया था पर उन्होंने जिन फर्जी मार्कशीटों पर फार्मासिस्टों का पंजीयन कराया था उन्हें तत्कालीन रजिस्ट्रार शैलेन्द्र हिनोतिया ने मंजूरी दी थी। शैलेन्द्र हिनोतिया को बगैर जांच किए पंजीयन जारी करने का दोषी पाया गया था लेकिन उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का उपयोग करके खुद को गिरफ्तारी से बचा लिया। चुनावों की बेला में सरकारी असफलता की पोल न खुले इसके लिए काऊंसिल के पदाधिकारियों ने पूर्व की परिषद की गलतियों को नजरंदाज करने का अनुरोध करके मीडिया और विपक्षी दलों के लोगों को शांत किया था।


    माया अवस्थी को भी भय है कि वे बाबुओं की नोटशीट पर दस्तखत करके पंजीयन जारी करेंगी तो भविष्य मे उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लग सकते हैं। दिव्या पटेल ने भी अपने कार्यकाल में गिने चुने पंजीयन जारी किए । ये प्रमाण पत्र भी भारी ऊहापोह के बीच बाबुओं की सिफारिश पर जारी किए गए थे। यहां भेजे जाने वाले रजिस्ट्रार असली नकली अभ्यर्थियों की छानबीन नहीं करना चाहते वे तो बाबुओं की नोटशीट को ही आधार बनाते हैं । इसकी वजह से काऊंसिल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। वर्तमान परिषद फार्मा सेक्टर के प्रतिभाशाली लोगों के बीच से आई है इसलिए रजिस्ट्रार के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसी गई है।


    काऊंसिल की परिषद के सदस्यों का कहना है कि राज्य के फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए बड़ा वर्क फोर्स चाहिए। राज्य और केन्द्र सरकार की भी यही मंशा है। पंजीयन जारी करने की प्रक्रिया बड़ी पारदर्शी होती है। कालेजों से डिग्री पाने वाले विद्यार्थी यदि सभी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें पंजीयन जारी कर दिया जाना चाहिए। शासन को कई बार इसकी सूचना दी जा चुकी है कि फार्मा सेक्टर से जुड़ा पूर्णकालिक रजिस्ट्रार यहां पदस्थ किया जाए ताकि वह आवश्यक जांच उपरांत फार्मासिस्टों को पंजीकृत कर सके। अब सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गई है इसलिए इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी रजिस्ट्रार न तो खुद दस्तावेंजों की जांच करवाने में इच्छुक हैं और न ही वे पंजीयन जारी करने मे रुचि लेती हैं। इससे सरकार को मिलने वाली फीस भी नहीं मिल पाती और युवाओं को चक्कर काटना पड़ते हैं जिससे वे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। काऊंसिल इन्हीं गड़बड़ियों का निराकरण करने का प्रयास कर रही है।


    माया अवस्थी ने अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए ही इस बार छोटे मंत्री को सामने ला खड़ा किया है। उनके पास फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का प्रभार भी है। यहां फूड ड्रग के नमूनों की जांचें भी लंबित पड़ी हैं। ड्रग निर्माण की अनुमतियां जारी करने में भी भारी हेराफेरी की शिकायतें आ रहीं हैं। शायद यही वजह है कि छोटे मंत्रीजी को रजिस्ट्रार का पक्ष लेना न्याय जान पड़ रहा है। आज के दौरे में मंत्रीजी के साथ प्रभारी रजिस्ट्रार श्रीमती माया अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी भी उपस्थित थे।