भोपाल,22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी में 24 और 25 फरवरी को आयोजित हो रही ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगमन मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए होने जा रहा है। इससे पहले श्री मोदी छतरपुर जिले के गढ़ा गांव के बागेश्वर धाम में बन रहे सौ बिस्तरों के कैंसर के इलाज की सुविधाओं वाले मल्टी स्पेशियलिटी वाले अस्पताल की आधारशिला भी रखने जा रहे हैं। भाजपा ने इससे पहले कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री की बुदेलखंड में निकाली गई यात्रा को भी लगभग गोद लेकर उनकी लोकप्रियता को परवान चढ़ाने में रुचि ली थी। अब स्वयं प्रधानमंत्री वहां जाकर पं.धीरेन्द्र शास्त्री की जन स्वीकृति स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।
बागेश्वर धाम को पिछले कुछ वर्षों में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाने वाले धीरेन्द्र शास्त्री का कहना है कि अब तक लोगों ने अस्पतालों के परिसरों में मंदिर या भगवान की मूर्तियां देखी हैं। पहली बार दुनिया देखेगी की किस तरह कोई धर्म क्षेत्र अपने संसाधनों से अस्पताल बनाकर जन सेवा का माडल प्रस्तुत करेगा। वे कहते हैं कि उन्होंने बुंदेलखंड के लगभग सत्रह अठारह जिलों में यात्रा करके देखा है कि कैसर के इलाज के लिए लोग भटकते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से लोग कैंसर की पीड़ा भोगते हुए काल कवलित भी हो जाते हैं।यह देखते हुए बागेश्वर धाम के भक्त मिलकर कैंसर के उपचार का अस्पताल बनाने जा रहे हैं। लगभग दो सौ करोड़ रुपयों की लागत से ये अस्पताल बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रांडेड इमेज का लाभ इस कैंसर अस्पताल को पहुंचाने के लिए आनन फानन में उनका दौरा करवाया जा रहा है।इसके बावजूद वहां भीड़ के प्रबंधन का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।आगंतुकों के आवागमन की लचर व्यवस्था है। बस्ती में जल मल व्ययन पूरी तरह धराशाई है।लोग गंदगी से उपजी बीमारियों के शिकार है।आग के प्रबंधन के इंतजाम नहीं हैं।अग्नि सुरक्षा के प्रमाणपत्र जारी करने वाले अकुशल अधिकारियों को आपातकाल से निपटने का अनुभव और जानकारी नहीं है।इसकी वजह केवल यही है कि सरकार की रुचि केवल धीरेन्द्र शास्त्री की छवि के सहारे बुंदेलखंड प्रांत की स्वीकार्यता को हवा देना है।
देश में कई धर्म संप्रदायों के मतावलंबियों ने पहले से चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखकर कल्याणकारी अस्पताल चला रखे हैं।ऐसे में बुंदेलखंड की धरती पर बनाया जा रहा ये अस्पताल पृथक बुंदेलखंड के राजनीतिक एजेंडे को लेकर सामने आ रहा है। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने बुंदेलखंड के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से में भी अपनी यात्राएं निकाली हैं और वे पृथक बुंदेलखंड की कमजोर आवाज को बल देने का कार्य ही कर रहे हैं। उनके साथ बुंदेलखंड पैकेज से धन जुटाने वाले ठेकेदारों और उद्यमियों का पूरा नेटवर्क जुड़ गया है। इन्हें उम्मीद है कि नया राज्य बन जाने पर वे वैश्विक संस्थाओं से विकास के नाम पर अधिक कर्ज बटोर सकेंगे।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के रहवासी पृथक बुंदेलखंड का समर्थन नहीं करते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि एक संसाधन विहीन पिछ़ड़ा इलाका होने की वजह से ये एक पंगु राज्य होगा। छोटे राज्य को सफलता की गारंटी बताने वाले निर्माण माफिया के लोग विकास के पिछड़ेपन के लिए बड़े राज्यों को दोष देते रहते हैं। इसके बावजूद नई पीढ़ी के जो युवा दुनिया भर के दूरदराज देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरियां करके देख चुके हैं वे जानते हैं कि दुनिया आज ग्लोबल विलेज बन चुकी हैं। ऐसे में प्रशासनिक अकुशलता के लिए दूरी को दोष देकर राजनेता और अफसर सरासर झूठ बोल रहे हैं। प्रत्यक्षतः देखा जा सकता है कि भोपाल राजधानी के नजदीक वाले सीहोर और रायसेन जैसे जिले केवल कर्ज लेकर किए जाने वाले विकास की बैसाखियों पर ही चल पा रहे हैं । ऐसे में छोटे राज्य के नाम पर अंधकूप में धकेल दिए जाने वाले बुदेलखंड को मुख्य धारा में आने के लिए एक दुरूह दौर का सामना करना पड़ेगा।

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