Month: February 2025

  • केनरा बैंक ठगी में जेल भेजा गया प्रकाश चंद्र गुप्ता

    केनरा बैंक ठगी में जेल भेजा गया प्रकाश चंद्र गुप्ता

    जमा पर्ची में हेरफेर करके बोला केनरा बैंक की मैनेजर स्कूटर पर ले भागी दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए

    भोपाल,28 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).केनरा बैंक की मैनेजर से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी करने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता को आज ग्यारहवें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एक बार फिर जेल भेज दिया है। उसके विरुद्ध आर्थिक ठगी के अलावा पास्को एक्ट का भी प्रकरण दर्ज है। देश भर के विभिन्न शहरों में चल रहे मुकदमों की फेरहिस्त भी जब अदालत के सामने पहुंची तो विद्वान न्यायाधीश ने उसके आपराधिक चरित्र को देखते हुए जमानत आवेदन खारिज कर दिया। भोपाल पुलिस बरसों बाद प्रभावशाली लोगों को झांसा देकर बचते रहे इस सफेदपोश ठग को गिरफ्त में ले पाई है।


    केनरा बैंक में कारोबारी साख का फायदा उठाकर जब बूटकाम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने मकान फायनेंस कराया तब तक बैंक को नहीं पता था कि उसकी शातिर खोपड़ी में क्या चल रहा है। बैंक को तो उसके कारोबार का आयव्यय देखकर लगता था कि वह बड़ा व्यापारी है। हकीकत जब सामने आई तो पुलिस भी देखकर दंग रह गई कि उसकी नाक के नीचे बरसों से ये ठग कैसे लोगों की आंख में धूल झोंकता रहा है। कभी छुरेबाजी करके रायबरेली के लालगंज से फरार हुआ प्रकाश चंद्र गुप्ता कलकत्ता में चाय कारोबार में नौकरी करने लगा था। बाद में चाय का कारोबारी बनकर भोपाल आ गया।यहां भाजपा के छुटभैये नेता के साथ नकली चाय बेचने के आरोप में पकड़ा गया तो उसने अपना धंधा बदलकर कंप्यूटर की दूकान खोल ली। इस बार उस पर बैंक ठगी का जो प्रकरण दर्ज कराया गया है उसमें उसने वही तरीका अपनाया जिसमें वह पंजाब नेशनल बैंक से सफल ठगी कर चुका है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः केनरा बैंक से ठगी के आरोप में अदालत ने गिरफ्तार करके जेल भेजा.


    राजधानी के कोहेफिजा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी क्रमांक 0317 दिनांक 18.05.2024 में थाना प्रभारी ने लिखा कि मै थाना कोहेफिजा मे थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ हूं.दिनांक 29/04/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल की ओर से एक टाईपशुदा आवेदन पत्र थानाध्यक्ष थाना कोहेफिजा भोपाल के नाम का प्रस्तुत किया गया जिसमे बताया कि अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप्राईटर बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल का लोन खाता केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा मे है जिसके द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल से 03 व्यवसायिक लोन कुल राशि 2,60,00,000/- लिया गया है जिसका अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता को इंस्टालमेन्ट भरना पडता है जब ग्राहक की 3 इंस्टालमेन्ट due हो जाती है तो बैंक द्वारा लोन NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जाता है और बैंक द्वारा ग्राहक को demand notice जारी किया जाता है ।


    दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक कोहेफिजा भोपाल द्वारा अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप0 बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल को demand Notice तामील कराने के लिए बैंक के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी रोहित नरवरे के साथ प्रकाश चंद्र गुप्ता के कार्यालय एम पी नगर भोपाल अपने व्यक्तिगत दो पहिया वाहन एक्टीवा से पहुंचे वहाँ पर अनावेदक से demand notice पर receiving प्राप्त कर अनावेदक के अनुरोध पर केनरा बैंक की एक जमा पर्ची जिसमें कुल राशि 1,20,000/- शब्दो ओर अंको मे पहले से ही भरी हुई थी. उसके साथ अनावेदक द्वारा उक्त नगद रकम 1,20,000/- दी गई अनावेदक द्वारा आवेदिका से काउन्टर जमा पर्ची पर हस्ताक्षर लिया गया सील ना होने से नही लगाई गई । उक्त नगद रकम को आवेदिका द्वारा लिफाफे मे रख कर अनावेदक के साथ रोहित को बुलाकर अवेदिका के मोबाईल से फोटो लिया गया बाद अनावेदक को शेष रकम भी जल्द जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस बैंक आकर उक्त रकम 1,20,000/- केशियर को जमा पर्ची के साथ उसके खाते मे जमा करने हेतु दिये गये ।


    उसी समय प्रबंधक हर्षित द्वारा demand notice पर अनावेदक के हस्ताक्षर चैक किये गये तो अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा demand notice पर अपने शासकीय कार्यालयीन में किये गये हस्ताक्षर के स्थान पर किसी अन्य प्रकार के हस्ताक्षर पाए गए।


    अनावेदक के हस्ताक्षर सही नही पाये जाने पर दिनांक 08/01/2024 को ही प्रबंधक हर्षित द्वारा पुनः अनावेदक के कार्यालय एम पी नगर मे जाकर हस्ताक्षर लिये गए. दिनांक 09.01.2024 को अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने प्रंबधक हर्षित को फोन कर तीनों ऋण खाते का बैलेंस सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने के लिए कहा। जिस पर आवेदिका और प्रबंधक हर्षित अनावेदक के कार्यालय एमपी नगर जाकर बैलेंस प्रमाणपत्रों उपलब्ध कराये जाकर लोन खाता मे minimum required amount (11.50लाख लगभग) जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस शाखा आ गये ।


    दिनांक 15.01.2024 को शाखा को उक्त अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता से मुख्य प्रबंधक के नाम से डाक से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। इस लिफाफे को खोलने पर उसमें ड. बाबा साहब भीमराम अम्बेडकर से संबंधित एक पृष्ठ का नोट पाया गया जिसका श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता या उनके खातों से इसका कोई लेना-देना नहीं था।


    दिनांक 08.02.2024 को, आवेदिका, रोहित नरवरे के साथ नियमित तरीके से एमपी नगर में अनावेदक श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के एम.पी. नगर स्थित कार्यालय गई। मुख्य प्रबंधक ने ऋण खातों को पूरी तरह से बंद करने के बजाय उन्हीं खातों को अपग्रेड करने की सलाह दी क्योंकि इसमें कम राशि की आवश्यकता थी जो कि लगभग 14 लाख रुपये हो सकती थी। अनावेदक द्वारा यह जानते हुए कि आवेदिका को हिन्दी नही आती है उन्हे एक पत्र (हिंदी भाषा मे) दिया जाकर आवेदिका से हस्ताक्षर करवाए सील नही होने से सील नही लगाई गई ।


    आवेदन पत्र के प्रत्येक पृष्ठ पर पावती ली गई । दिनांक 06/03/2024 को अनावेदक द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा को एक पत्र भेजा गया जिसमे उसके द्वारा 08/01/2024 को 2,21,20,000/- रुपये आवेदिका को उसके कार्यालय एम पी नगर मे नगद देना बताया गया और शेष लोन की राशि को उसकी जमा एफडी मे से काटने का उल्लेख किया गया तब जाकर आवेदिका के सज्ञांन मे यह बात आई ।


    जांच मे आवेदिका व साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किये गए । पूर्व में प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-03 भोपाल को एक आवेदन पत्र FIR दर्ज करने के संबंध में कैनरा बैंक शाखा प्रबंधक सुधा प्रियदर्शिका के विरूध 02,21,20,000/- रूपये कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हडप कर लेने के संबंध में दिनांक 03/04/224 को दिया गया था । जो कार्यालय पुलिस उपायुक्त जोन-03 के माध्यम से जशि-177 दिनांक 08/04/2024 में इन्द्राज कर दिनांक 12/04/224 को थाना प्रभारी थाना कोहेफिजा को प्राप्त हुआ । शिकायत आवेदन पत्र के अनुक्रम में दिनांक 22/04/24 को शिकायत के संबंध में विस्तृृत पूछताछ कर कथन लेखबद्ध किये गये है ।


    आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दवारा दिये गये आवेदन पत्र की जांच मे यह बात सामने आई है कि आमतौर पर expert द्वारा रुपये 2,21,20,000/-रूपये को मशीन से गिनने मे लगभग 03 घंटे का और हाथ से गिनने मे करीबन 15 घंटे का समय लगता है. जो कि दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका अनावेदक के कार्यालय मे लगभग एक ही घंटे रुके थे अनावेदक के कार्यालय मे CCTV कैमरे भी लगे थे उसके बावजूद भी अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा इतनी बडी राशि प्रदाय करने का कोई CCTV Footage संग्रहित नही किया गया और बैंक दवारा 02,21,20,000/- जमा करने की बात को अस्वीकार करने पर संबंधित पुलिस थाना व सबंधित बैंक को सूचना न देते हुए सीधे हाईकोर्ट मे 02,21,20,000/- रूपये जमा करने के उपरांत लोन की शेष राशि के समायोजन के लिए रिट पिटिशन क्र. 5100/2024 फाईल की और पर्याप्त समय निकलने के बाद सम्बंधित बैंक को सूचना दी गई ताकी कोई साक्ष्य उपलब्ध न हो सके ।


    अनावेदक द्वारा जो काउन्टर जमा पर्ची कोर्ट मे उपलब्ध कराई गई थी उसमे रुपये 2,21,20,000/- रूपये का अंको ओर शब्दो मे उल्लेख है और जो जमा पर्ची बैंक से प्राप्त हुई है उसमे शब्दो और अंको मे रुपये 1,20,000/- रू का उल्लेख है दोनो ही पर्चियों मे असमानता है । अनावेदक द्वारा जमा पर्ची कि counter file मे edit किया जाना प्रथम दृष्टया सम्भव प्रतीत होता है तथा अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में कैनरा बैंक का दिनांक 09/01/2024 का balance certificate प्रस्तुत किया गया है जिसमे received cash 2,21,20,000/- होना लेख है जो कि edit किया जाना प्रथम दृष्यया प्रतीत होता है । बैंक से प्राप्त CCTV Footage अनुसार दिनांक 08/01/2024 के दोपहर लगभग 02.40 बजे अवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दो पहिया वाहन एक्टीवा से दैनिक बेतन भोगी रोहित नरवरे के साथ जाना व दोपहर लगभग 04.11 बजे शाखा कोहेफिजा वापस आना पाया गया इतने कम समय मे इतनी बडी राशि गिनकर वापस दो पहिया वाहन पर ले कर आना सम्भव प्रतीत नही होता है । अनावेदक द्वारा बैंक मे कभी भी इतनी बडी राशि पूर्व मे जमा नही की गई । बैंक से प्राप्त जानकारी अनुसार जाँच मे यह बात भी सामने आई कि अनावेदक प्रकाश चंद गुप्ता के मोबाइल नंबर 9826057899 जो कि केनरा बेंक शाखा मे उसके खाते से registered है, जिसमे दिनांक 08/01/2024 को बैंक द्वारा एस एम एस भेजा गया था जिसमे सिर्फ रुपये 1,20,000/- जमा होने का उल्लेख था। यदि अनावेदक द्वारा रुपये 2,21,20,000/- जमा किये होते तो अनावेदक एस एम एस प्राप्त होने के बाद तुरंत बैंक जाकर सूचना देकर सुधार करवाता ।


    इसके पश्चात भी अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा केनरा बैंक मे बुटकाम सिस्टम के नाम से संचालित खाते कि net banking का user ID and password जिसकी जानकारी सिर्फ खाता धारक को होती है अनावेद्क द्वारा दिनांक 10.01.2024 एवम 15.01.2024 को उक्त user id and password के माध्यम से net banking से 16 बार लागिन किया गया था उसके बाद भी अनावेदक द्वारा पैसा जमा न होने के सम्बंध मे न तो बैंक को और न ही पुलिस को सूचना दी गई। यदि अनावेदक दवारा दिनांक 08/01/2024 को 02,21,20,000/- रूपये जमा किये जाते तो बैंक नियमानुसार जमा करने में cash handling charge एवं door step banking charge जमा राशि से काटा जाता। इस संबध मे अनावेदक द्वारा कोई आपत्ति क्यो नही उठाई गई जो संदेह उत्पन्न करता है।


    आवेदिका द्वारा काउंटर जमा पर्ची पर एवं दिनाक 08.01.24 को अनावेदक को दी गई पावती पर सिर्फ हस्ताक्षर किये गये सील नही लगाई गई जबकी अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष प्रस्तुत उक्त दस्तावेज की छाया प्रति मे सील लगी हुई है जो की बैंक की शासकीय कार्यालयीन उपयोग की सील न होकर अनावेदक दवारा तैयार कूटरचित सील है । बैंक की सील में दो स्टार है और अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दिये गये दस्तावेजों मे चार स्टार है तथा सील मे लिखा हुआ कोहेफिजा अंग्रेजी व हिन्दी मे कोहे फिजा के बीच मे गेप है। आवेदिका दवारा हमेशा ही हस्ताक्षर करने के उपरांत सील हमेशा हस्ताक्षर के उपर लगाना बताया गया है परन्तु अनावेदक द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजो में हस्ताक्षर के बाजू मे सील लगाई गई है ।


    अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष रिट पिटीशन न. 5100/2024 में प्रस्तुत दस्तावेजो पर लगी सील कूटरचित है । अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपने ऋण खाते मे बडी राशि जमा करने की प्रवंचना कर आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक शाखा कोहेफिजा भोपाल एवं अन्य अधिकारी केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा के विरूध षडयंत्र रचा गया है । आवेदन पत्र की जांच पर प्रथम दृष्टया अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता के विरूध अपराध धारा-420,467,468,471 (भादवि) का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया जाता है ।


    नकल आवेदन पत्र केनरा लेटरपेड पर लिखा हुआ है। संदर्भ दिनांक-10.05.2024 श्रीमान थानाध्यक्ष महोदय,थाना- कोहेफिजा, भोपाल विषय- हमारी कोहेफ़िज़ा शाखा, भोपाल में मेसर्स बूटकम सिस्टम्स के नाम पर अपने ऋण खातों में दस्तावेज़ों की जालसाज़ी करने के लिए श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के लिए। विषय के संदर्भ में यह भी सूचित किया जाता है कि अधोहस्ताक्षरी को मानसिक रूप से परेशान करने और यातना देने के लिए, मेरे खिलाफ आपके पुलिस स्टेशन में झूठी शिकायत दर्ज करने के अलावा, जिसकी जांच चल रही है, श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स निम्नलिखित मामले दर्ज किए हैं-1.श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स बनाम केनरा बैंक और अन्य द्वारा रिट याचिका संख्या 5100/2024 माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके दायर की गई और माननीय को गुमराह करके आदेश प्राप्त करने में सफल रहे। ब्ले कोर्ट. माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दायर रिट याचिका की प्रमाणित प्रति अनुलग्नक-1 के रूप में संलग्न है2.न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत में मेरे खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके शिकायत संख्या यूएन सीआर/2143/2024, जिनका माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दुरुपयोग किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक – 2 के रूप में संलग्न है।3.बैंक और अधोहस्ताक्षरी के खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष एक सिविल मुकदमा संख्या आरसीएस ए/397/2024 दायर किया गया है। 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक -3 के रूप में संलग्न है।


    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस सुशील नागू और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कोहेफिजा बैंक का पक्ष सुनने के बाद प्रकाश चंद्र गुप्ता की रिट याचिका दो अप्रैल को खारिज कर दी थी। अब इस प्रकरण में पुलिस ने कई अन्य तथ्य भी जुटाए हैं। नए कानूनों के अनुसार साक्ष्यों में हेरफेर प्रथम दृष्टया तो साबित हो रही है जिसमें गुप्ता को जेल भेजा गया है।

  • एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ

    एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की सत्ता संभालते ही गुजरातियों के व्यापारिक सोच से पूरे देश को रोशन करने का अभियान चलाया हुआ है। भारत ही नहीं बल्कि वे पूरे देश में अपने इसी सोच की वजह से वे आज आकर्षण का केन्द्र बन गए हैं। भोपाल में जब ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन तय किया गया तभी से पूरी दुनिया के भारत मित्रों की निगाह देश के दिल की ओर लगी हुईं थीं। फ्रांस,जर्मनी, अमेरिका समेत विश्व के तमाम देशों में जाकर प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत आने का न्यौता दिया है। यही वजह है कि एमपी आज निवेशकों के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बनकर सामने आया है। उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिए भाजपा ने लगभग दो दशक पहले आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया था। बिजली, सड़क और पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, जल नल योजना जैसी तमाम योजनाओं ने एमपी के इंफ्रास्टक्चर को मजबूती प्रदान की है। आज प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं से यहां के आम नागरिक की खरीद क्षमता भी बढ़ी है जिससे राज्य आज एक सफल बाजार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस सबसे अलग जो बात आज श्री मोदी ने इंवेस्टर्स समिट में आए निवेशकों को समझाने का प्रयास किया वो यह कि देश का दिल आज निवेशकों को मुनाफे की गारंटी वाला राज्य बन गया है।


    इसके लिए हमें दो दशक पहले मध्यप्रदेश पर गौर करना होगा। तब राज्य में न तो सड़कें थीं, न बिजली पानी की मूलभूत व्यवस्थाएं थीं। कांग्रेस की सरकारों ने राज्य में लूटपाट का माहौल बना रखा था। वोट बटोरने के लिए तुष्टिकरण और जनता को बरगलाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेठों को खलनायक बताने की राजनीति की जाती थी। शोषण की कहानियां सुनाकर कांग्रेस के नेता लोगों को बरगलाते थे। व्यापारियों और उद्योगपतियों को चोर व शोषक बताया जाता था। उनकी पैरवी करने वाली भाजपा को व्यापारियों की पार्टी बताकर लांछित किया जाता था। चंबल में डकैतों का आतंक इतना गहरा था कि लोग शाम के वक्त घरों से बाहर नहीं निकलते थे। उन्हीं डकैतों की कहानियां दिखाकर मुंबई की फिल्म नगरी कांग्रेस की जीवनरेखा बनी हुई थी। मीडिया की अपराध कथाएं भी उद्यमियों को कलंकित करती होती थीं। यही वजह है कि न तो यहां उद्योग विकसित हो पाए और न ही पूंजी का निर्माण हो पाया । आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका मध्यप्रदेश एक दुःस्वप्न बनकर रह गया था।


    बदले माहौल में आज इन्हीं पिछड़ेपन की नीतियों को मार भगाया गया है। लगभग दो दशकों की भाजपा की सरकारों ने पहले डकैतों, माफियाओं, ठगों और षड़यंत्र कारियों के विरुद्ध अभियान चलाया। अब वह सत्ता के दलालों को मार भगाने में जुटी हुई है। शिवराज सिंह की भाजपा सरकार ने आधारभूत ढांचे को तो विकसित किया लेकिन वह राज्य को सत्ता के दलालों से मुक्ति नहीं दिला पाई थी। डकैतों और माफियाओं ने जंगल छोड़ दिए लेकिन वे बस्तियों में आकर सेठ बन गए। राज्य की आय तो नहीं बढ़ी लेकिन कर्ज बढ़कर साढ़े तीन लाख करोड़ हो गया। चोरों मवालियों और ठगों ने अपनी आय बढ़ाई लेकिन वे न तो उद्योग स्थापित कर रहे थे और न ही उन्होंने अपनी काली कमाई का टैक्स चुकाया ।


    इस बार प्रदेश की जनता ने जैसे ही भाजपा को एक बार फिर सत्ता सौंपी तो सबसे पहले सत्ता के दलालों के आगे नतमस्तक नेताओं को सत्ता से बाहर किया और नई पीढ़ी को बागडोर सौंपी। डाक्टर मोहन यादव जैसे जमीनी नेता के हाथों कमान सौंपकर केन्द्र सरकार ने सत्ता के दलालों को घर बैठने का संदेश दिया। लाठी लेझम चलाने वाले पहलवान मोहन यादव हों या फिर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा जैसे समर्पित राजनेताओं तो आगे लाकर उन्होंने जड़ हो चुकी राजनीति को एक खुला आसमान सौप दिया है। इसके साथ ही काला धन बटोरकर जिन राजनेताओं ने अपने चहेते व्यापारियों के माध्यम से निवेश किया और महाराजा बन बैठे उनसे काला धन भी निकलवाया जाने लगा है।इस सब कार्य के लिए मोहन यादव ने अफसरशाही को खुला अवसर दिया है।


    मुख्य सचिव के रूप में अनुराग जैन को भेजकर राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाया गया है।जिन अफसरों के हाथों में आज राज्य की कमान है,योजनाओं को लागू करने की जवाबदारी है वे अपेक्षाकृत रूप से साफ सुथरे हैं। ये भी कहा जा सकता है कि अफसरशाही पर शिकंजा कसकर उसे औद्योगिक विकास के अनुकूल बनाया गया है। यही वजह है कि इस बार की इंवेस्टर समिट पिछले तमाम सम्मेलनों से अलग तस्वीर लेकर सामने आई है। निवेशकों की परख के लिए राज्य की पूरी जानकारी डिजिटल कर दी गई है। उनके आवेदनों की प्रक्रिया भी इतनी सरल कर दी गई है कि वे निवेश का प्रस्ताव देकर आसानी से अपना कारोबार शुरु कर सकते हैं।दुनिया के बहुराष्ट्रीय बैंकों में कार्य कर चुके भोपाल के ही युवा उद्यमी अंकेश मेहरा ने बताया कि उन्होंने अलान्ना ब्रांड नेम से राजधानी में एक स्टार्टअप शुरु किया है। उनका प्रोडक्ट होंठों की सुंदरता के लिए दुनिया का आधुनिकतम आविष्कार है। अपने माल को सस्ता और आम जनता की पहुंच का बनाने के लिए उन्हें कुछ पैकिंग मटेरियल आज भी चीन से बुलाना पड़ता है। जल्दी ही वे ये सामान भी भारत में बनाने लगेंगे। राज्य की औद्योगिक नीतियां उद्यमियों के लिए दोस्ताना हैं ।ये माहौल बना रहेगा तो राज्य जल्दी ही एक सफल स्टेट के रूप में अपना नाम रौशन करेगा।


    इसके पहले तक राज्य में एक कुप्रथा छाई हुई थी कि टेंडर किसी भी उद्यमी के नाम खुले उसे एक विशेष प्रजाति का साईलेंट पार्टनर रखना पड़ता था। कांग्रेस के आपराधिक चरित्र वाले मुख्यमंत्रियों की चलाई इस प्रथा का पालन भाजपा की सरकारें भी दो दशक तक करती रहीं।इसका सबसे बड़ा नुक्सान ये होता था कि निवेशक यदि गुणवत्ता का कार्य करे और कम मुनाफा ले तब भी उसे सत्ता के दलालों को मुनाफे का कट देना पड़ता था। सत्ता का पेट भरते भरते उसे यहां कारोबार करना घाटे का सौदा बन जाता था और वो यहां की परंपराओं से घबराकर निवेश से पीछे हट जाता था। पहली बार डाक्टर मोहन यादव की सरकार ने निवेशकों को सत्ता के दलालों के भय से मुक्ति दिलाकर स्वच्छंद वातावरण मुहैया कराया है। यही वजह है कि राज्य में निवेशकों ने धड़ाधड़ निवेश शुरु कर दिया है।


    लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस नीरज मंडलोई ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट की सफलता का आलम ये है कि आज पहले दिन ही उनके विभाग को लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। कल तक ये आंकडा़ नया रिकार्ड स्थापित करेगा। इसी तरह एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उद्यमियों में जो उत्साह देखने मिल रहा है वह अद्वितीय है। हमें अब तक के अनुभवों और निरंतर संवाद का लाभ भी मिला है। ये बात सही है कि राज्य में कई मूलभूत बदलाव हुए हैं लेकिन अब तक भाजपा के कई स्थानीय नेता भी इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेताओं के नाम पर भड़काया जा रहा है। अब तक जो हुआ सो हुआ पर जीआईएस के आयोजन की सफलता की जो तस्वीर उभरी है वह मध्यप्रदेश और देश में मेक इन इंडिया का एक सफल माडल दुनिया के सामने लाने में सफल हुई है।

  • खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह

    खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह


    अटल आडवाणी के खास सिपहसालार प्रमोद महाजन ने जब मध्यप्रदेश पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा था तब तक वे एक संघर्षरत नेता के रूप में ही पहचाने जाते थे। उमा भारती के तूफानी नेतृत्व के सामने शिवराज सिंह एक टिमटिमाते दिए की भांति थे। बाबूलाल गौर महज केयर टेकर के रूप में थे और उन्हें किनारे खिसका दिया गया था।भाजपा की लगभग डेढ़ दो दशक की सत्ता संभालने के बाद राज्य भले ही साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे में डूब गया हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान आज महाराजा बनकर सामने उपस्थित हैं। वे बार बार ये अहसास कराने का प्रयास भी करते रहते हैं कि आज भी राज्य में उनकी हैसियत कम नहीं हुई है। उनके बेटे की शादी में राजधानी भोपाल में जो रिसेप्शन हुआ वह उनके इन्हीं तेवरों का प्रदर्शन था। साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी तो इस जश्न के सामने फीकी नजर आती है। शादी के इस जश्न ने भाजपा की रीति नीति और सोच को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए डाक्टर मोहन यादव ने जिस पारिवारिक आयोजन को सादगीपूर्ण तरीके से मनाया उसे शिवराज सिंह ने आखिर क्यों अपनी शान की कुतुब मीनार बनाकर पेश किया।

    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने बेटे की शादी को केवल पारिवारिक आयोजन बनाया


    लगभग साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी राजस्थान के पुष्कर स्थित पुष्करा रिसोर्ट से हुई थी।पुत्र वैभव की शादी में शामिल होने के लिए सीएम डाक्टर मोहन यादव भी पहुंचे थे। दो दिनों के इस आयोजन में ध्यान रखा गया था कि लोगों को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आयोजन के आधे घंटे पहले पुष्कर सरोवर और ब्र्हमा मंदिर खाली करा दिया था। बाद में रिसोर्ट में पुत्र वैभव और पुत्र वधू शालिनी यादव का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। इस आयोजन में पूजा अर्चना के बाद मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव ने अपने पति के चरण धोए और आशीर्वाद लिया।
    इसके विपरीत शिवराज सिंह चौहान के बेटे की शादी का आयोजन तीन चरणों में और भव्यता के बीच संपन्न किया जा रहा है। पहले चरण में जैत गांव में नगर भोज दिया गया जिसमें आसपास के गांवों के करीब एक लाख लोग शामिल हुए। राजधानी के भव्य समारोह में लगभग बीस हजार से अधिक लोगों ने नगर भोज में हिस्सा लिया। इसी तरह दिल्ली का आयोजन भी भव्य रखा गया है। शिवराज सिंह के करीबी बताते हैं कि ये आयोजन जन सहयोग से विशाल बन गया है। टेंट और भोजन की व्यवस्था माजिद भाई संभाले हुए थे। उनके पिता कंजे मियां राजधानी के नामी गिरामी टैंट हाऊस के मालिक थे। अपने कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान उन्हें लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों से अधिक का भुगतान कर चुके हैं। इसी तरह सत्ता में रहते हुए उन्होंने जिन अफसरों और ठेकेदारों को भरपूर कमाई कराई वे सभी उनकी कृषि मंत्री की भूमिका से आशान्वित हैं।
    इस आयोजन की भव्यता राजनेताओं के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। भाजपा खुद को आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी मानती है। उसके पूर्वज चना चबेना खाकर संगठन को गढ़ने का कार्य करते रहे हैं। जबकि उसी भाजपा के वर्तमान राजनेता खुद को महाराजा साबित करने में जुटे हुए हैं। खुद को किसान पुत्र बताकर शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की सत्ता में लंबी पारी खेली और वे अब इसी छवि को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री भी हैं। उनके बेटे की हैसियत इतनी बड़ी नहीं कि इतना विशाल आयोजन कर सके। खुद शिवराज सिंह चौहान की घोषित आय भी इतनी नहीं कि वे इतना बडा आयोजन कर सकें। इसके बावजूद उनके आयोजन की भव्यता बताती है कि इसमें आय से अधिक काले धन का इस्तेमाल किया गया है।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा, दिल्ली की आप सरकार पर घोटालों और कुप्रबंधन के आरोप लगाकर सत्ता में पहुंची है। मोदी स्वयं केजरीवाल को अनुभवी चोर की संज्ञा देते रहे हैं। सरकार बनाने के बाद भाजपा वहां केजरीवाल सरकार के घोटालों की जांच कराए जाने की बात भी कह रही है। ऐसे में क्या मोदी अपनी ही कैबिनेट के मंत्री शिवराज सिह चौहान की संपत्तियों की जांच कराने का साहस दिखा पाएंगे। क्या वे उस काले धन के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की पहल करवा पाएंगे जिसकी वजह से आज मध्यप्रदेश साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों के कर्ज में डूबा हुआ है।

  • किसान को कारोबारी बनाएंगे एफपीओः विश्वास सारंग

    किसान को कारोबारी बनाएंगे एफपीओः विश्वास सारंग


    भोपाल, 10 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि नई तकनीक और सहकारिता से किसानों का उत्थान होगा। खेत, खलियान और किसान सरकार की प्राथमिकता है। विकसित भारत की परिकल्पना में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इन तीनों के उन्नयन और उत्थान की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने से ही देश विकसित हो पाएगा, सरकार इस दिशा में प्रयासरत है। मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इससे प्रोडक्शन में रिकॉर्ड दर्ज किया और 7 बार लगातार कृषि कर्मण अवार्ड भी मिला। मंत्री श्री सारंग सोमवार को नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित कृषि क्रांति 2025 एफपीओ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह भी उपस्थित थे।

    मंत्री से सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश ने कृषि को उन्नत बनाने हर क्षेत्र में काम किया है। किसानों को फसल का सही मूल्य मिल सके, समय पर उपार्जन सहित खाद, बीज, पानी मिल सके इसका ध्यान रखा गया है। अब किसान को व्यवसायी के रूप में परिवर्तन करना सरकार का मुख्य काम है और यह केवल सहकारिता के माध्यम से ही हो सकता है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को एफपीओ के माध्यम से ऑर्गेनिक खेती से जोड़ना होगा, जिससे उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। एफपीओ को किसानों को जागरूक करना होगा। सरकार एफपीओ को हर तरह की सुविधा देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष- 2025 में हर पंचायत में पैक्स के माध्यम से सहकार सभा होगी। इसमें भी एफपीओ जोड़कर किसान को सरकार से समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं।

    एफपीओ कॉन्क्लेव से सहकार की भावना मजबूत होगी

    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि एफपीओ कॉन्क्लेव से सहकार की भावना मजबूत होगी। सहकारिता मानव स्वभाव का मूलभूत आधार है.सहकारिता के बिना इस समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती। आज के समय में सहकारिता के माध्यम से नई-नई तकनीक से जोड़ना, फूड प्रोसेसिंग आदि पर काम करना, खेती में वैल्यू एडिशन करने की आवश्यकता हैं, जिससे अच्छे परिणाम आए इसमें सरकार सहायता देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ समाज जनता सहकारी संस्थाओं एफपीओ सब मिलकर काम करें, इस दिशा में कार्य करने के लिए सरकार प्रदेश के उन्नयन के लिए तत्पर है।

    खाद्य प्र-संस्करण से किसानों की आत्मनिर्भरता

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि एफपीओ और खाद्य प्र-संस्करण को मजबूत बनाना किसानों की आत्मनिर्भरता की कुंजी है। उन्होंने फसल विविधीकरण और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि”राज्य सरकार जल्द ही एक विशाल फूड प्रोसेसिंग सम्मेलन का आयोजन करेगी, जिसमें किसानों, उद्यमियों, क्रेताओं और विक्रेताओं को एक मंच पर लाया जाएगा।”

    मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि किसान की आय दोगुना करने के लिये चल रहे कार्यों से फसलों का मूल्य अच्छा मिल सकेगा और उसका संवर्धन हो सकेगा। आत्मनिर्भर भारत बनाने में किसानों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश मसाला उद्योग में एक नम्बर पर है। सरकार अलग-अलग योजनाओं से किसानों की उत्थान की दिशा में काम कर रही है। उद्यानिकी विभाग के पोर्टल पर नये किसानों को रजिस्टर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विकसित कृषि के लिये नई खेती से जुड़ना होगा, इसके लिये किसान उद्यानिकी से भी जुड़े।

    मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि कई देश जैविक खेती में आगे बढ़ रहे हैं। जैविक खेती से पैदा होने वाली फसल से दुष्प्रभाव नहीं होता। इससे बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता और स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्र-संस्करण के क्षेत्र में कोई भी परियोजना व्यक्ति या संस्था लगाती है तो 35 प्रतिशत अनुदान सरकार दे रही है। साथ ही अनेक योजनाओं और कृषि उपकरण में भी सरकार अनुदान दे रही है।

    मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि आधुनिक कृषि यंत्र खराबी पर मैकेनिक एवं उपकरण स्टोर, प्रबंधन आदि आवश्यक है। इस पर भी ध्यान देकर आगे बढ़ा जा सकता है। तकनीकी विशेषज्ञ के माध्यम से किसानों को मदद मिलेगी और उचित दाम से किसान संबल होंगे।

    ‘कृषि क्रांति : एफपीओ कॉन्क्लेव’ में अधिकारियों, विशेषज्ञों, निर्यातकों, क्रेताओं और तकनीकी प्रदाताओं ने एफपीओ के विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य एफपीओ को खाद्य प्र-संस्करण और निर्यात योग्य उत्पाद तैयार करने में सक्षम बनाना था। कॉन्क्लेव का आयोजन भूमिशा ऑर्गेनिक, डिक्की और सर्च एंड रिसर्च डेवपलमेंट सोयायटी ने किया।

    विशेषज्ञों के विचार एवं मार्गदर्शन

    कृषिका नेचुरल्स प्राइवेट लिमिटेड की प्रबंध निदेशक सुश्री प्रतिभा तिवारी, डिक्की के अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैया और सर्च एंड रिसर्च डेवलपमेंट सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. मोनिका जैन ने भी कॉन्क्लेव में विचार रखे। कॉन्क्लेव में सॉलिडरिडाड के जनरल मैनेजर सुरेश मोटवानी, एसबीआई के एजीएम श्री शशांक कुमार, एमपी स्टार्ट-अप सेंटर के श्री अरुणाभ दुबे, सी-मैप लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक कृष्णा और उद्यानिकी विभाग के अपर संचालक श्री कमल सिंह किरार प्रमुख थे।

    कृषि रत्न सम्मान एवं सहयोग

    कार्यक्रम में 8 एफपीओ और 2 किसानों को ‘कृषि रत्न सम्मान प्रदान किया गया। इनका सम्मान पत्र बांस से तैयार किया गया था। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 2 एफपीओ को 28.5 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई, जिसकी पहली किश्त सहकारिता मंत्री श्री सारंग और एनएसडीसी की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री इंद्रजीत कौर ने प्रदान की। इस मौके पर लक्ष्य प्राप्ति के सूत्र पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

  • खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नवाचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार माइनिंग में नवाचार कर रही है। प्रदेश में सबसे पहले क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक्स को नीलामी में रखा गया है। सबसे अधिक खनिज ब्लॉक्स की नीलामी कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर आ गया है। प्रदेश की समृद्ध खनिज सम्पदा और नई खनन नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। खनिज संसाधनों के उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों का विशाल भण्डार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
    प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले खनिज राजस्व संग्रह में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रदेश में पहली बार खनिज राजस्व संग्रह 5 अंकों में पहुंच गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस अवधि में 4 हजार 958 करोड़ 98 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। जबकि वर्ष 2024-25 में यह प्राप्ति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया गया है
    मध्यप्रदेश मुख्य खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या में नीलामी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल पर देश की आत्म-निर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इन खनिजों की आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रदेश द्वारा इस खनिज समूह के अंतर्गत अभी तक ग्रेफाइट के 8 खनिज ब्लॉक, रॉक-फॉस्फेट खनिज के 6 ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। मुख्य खनिज के 20 ब्लॉकों की नीलामी के लिये विभाग द्वारा 9 अगस्त, 2024 को निविदा आमंत्रण सूचना-पत्र (NIT) जारी की गयी है, जिसकी कार्यवाही प्रचलन में है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिज गोल्ड के 4 ब्लॉक, मैग्नीज खनिज के 16 ब्लॉक एवं कॉपर का एक ब्लॉक अभी तक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2024 में एक्सप्लोरेशन नीति प्रभावशील की गयी। इस नीति के तहत मध्यप्रदेश राज्य द्वारा क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक नीलामी में रखे गये हैं। मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की इस नीति का क्रियान्वयन करने वाला पहला राज्य बन गया है। खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल, मुख्यत: रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम एवं दुर्लभ धातु (आरईई) के लिये कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य किया गया।
    प्रदेश में जिला खनिज विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य, जिसमें पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास और वृद्ध, विकलांग कल्याण के लिये 16 हजार 452 परियोजनाएँ स्वीकृत की गयी हैं, जिनकी लागत 4406 करोड़ रुपये है। इनमें से 7 हजार 583 परियोजना लागत 1810 करोड़ रुपये का कार्य पूर्ण हो गया है।
    प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट स्थापित किए जा रहे हैं। ई-चेकगेट पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहन की जाँच की जा सकेगी। परियोजना में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर तथा जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमाण्ड सेंटर स्थापित किया गया है। इस वर्ष तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है।
    अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस परियोजना के माध्यम से 7 हजार खदानों को जियो टैग देकर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही हो सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-डी इमेजिंग तथा वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आँकलन किया जा सकेगा। माइनिंग में नवाचारों से प्रदेश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होगी, साथ ही इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
    मध्यप्रदेश सरकार निजी क्षेत्र को प्रदेश के प्रचुर खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिये प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हाल ही में भोपाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में कई बड़ी कम्पनियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश की इच्छा जताई है। कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई सुधार किये हैं। इनमें पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुकूल खनन और स्थानीय समुदायों को मुनाफे में भागीदारी देने जैसे कदम शामिल हैं।
    प्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। मलाजखण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लाइम-स्टोन, डायमण्ड और पाइरोफ्लाइट जैसे खनिज संसाधन हैं।
    मध्यप्रदेश के जिलों में खनिज के भण्डार हैं, जिसमें सतना, रीवा और सीधी में लाइम-स्टोन, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, गोल्ड और ग्रेनाइट, सिंगरौली में कोयला, गोल्ड और आयरन, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में कोयला, कोल बेड, मिथेन और बॉक्साइट, छतरपुर, सागर और पन्ना में डायमण्ड, रॉक फास्फेट, आयरन, ग्रेनाइट, लाइम, डायस्पोर और पाइरोफ्लाइट, जबलपुर और कटनी में बॉक्साइट, डोलोमाइट, आयरन, लाइम-स्टोन, मैग्नीज, गोल्ड और मार्बल, नीमच और धार में लाइम-स्टोन, बैतूल में कोयला, ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लीड और जिंक, छिंदवाड़ा में कोयला, मैग्नीज और डोलोमाइट, बालाघाट में कॉपर, मैग्नीज, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन और बॉक्साइट, मण्डला और डिण्डोरी में डोलोमाइट और बॉक्साइट, ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, फ्लेग-स्टोन और क्वार्ट्ज, झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फस्फेट, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन, मैग्नीज और ग्रेफाइट के भण्डार हैं।
    के.के. जोशी (लेखक जनसंपर्क विभाग में उप संचालक है।)