Month: January 2025

  • कॉमन सेंस वाला महानायक

    कॉमन सेंस वाला महानायक

    राजीव मिश्रा

    अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही जो सार्वजनिक फैसले लिए हैं वो पूरी दुनिया की शासन प्रणालियों के लिए सत्ता का नया पैमाना बनकर सामने आए हैं।अब तक जिन मनोभावों को बेड़ियां बनाकर विकास की स्वछंद धारा को बांधा जाता रहा है ट्रंप ने एक झटके में उन बेड़ियों को ताक पर धर दिया है।सबसे पहले – अमेरिका फिर से एक फ्री कंट्री है. किसी को भी उसके ओपिनियन के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाएगा.

    दक्षिणी सीमा पर इमरजेंसी की घोषणा – यानि अवैध घुसपैठ बंद, घुसपैठियों की शामत.

    देश में DEI (Diversity, Equality, Inclusion) का ड्रामा बंद.. यानि रेस, जेंडर, सेक्सुअलिटी को रखिए पिछवाड़े, बताइए कि आप किस काम के हैं, और काम कीजिए.

    फौज के भीतर आइडियोलॉजिकल बकवास बन्द.. फौज का बस एक काम है, देश के दुश्मनों को परास्त करना. और फौज को इतना मजबूत बनाना कि लड़ाइयाँ लड़नी ही ना पड़े.
    इजरायली बंधकों की तत्काल वापसी.

    और सबसे बड़ा धमाका – सिर्फ और सिर्फ दो जेंडर… स्त्री और पुरुष.

    उसके अलावा आर्थिक पहलुओं पर कुछ छोटे छोटे धमाके…
    ड्रिल बेबी ड्रिल… अमेरिका अपने तेल भंडार से तेल निकालेगा और इस्तेमाल करेगा. यानि वामपंथ की ग्रीन डिक्टेटरशिप समाप्त. और गाड़ी जैसी मर्जी, वैसी चलाओ.. चाहे पेट्रोल-डीजल, चाहे इलेक्ट्रिक..

    ट्रम्प ने टेस्ला के मालिक एलोन मस्क को बाजू में बिठा कर यह घोषणा की… ऐसा नहीं है कि मस्क ने ट्रम्प को इलेक्शन जितवाया है तो वह ट्रम्प से अपने फायदे के लिए फैसले भी करवाएगा. बल्कि ट्रम्प ने इलेक्ट्रिक कारों का बाजार खड़ा किया, लेकिन वह खुद पेट्रोल कारों पर रोक लगाए जाने का विरोधी है. यह होना चाहिए कैपिटलिज्म का कैरेक्टर… आओ, आकर कम्पीट करो!

    उसके अलावा, ट्रम्प ने स्टार एंड स्ट्राइप को मार्स तक ले जाने का इरादा भी जताया है.

    सिर्फ एक बात है पूरे संबोधन में, जो अर्थशास्त्र की दृष्टि से कमजोर लगी – आयात पर ट्रेड टैरिफ लगाने की घोषणा.
    जब कोई देश कोई चीज निर्यात करता है तो उसमें उसका फायदा है, और जब कुछ आयात करता है तो वह भी अपने फायदे के लिए ही करता है. इंपोर्ट पर टैरिफ लगाना किसी भी देश के हित में नहीं है. कोई चीज आप बाहर से खरीदते हैं तो इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वह चीज उतनी कीमत पर आपके यहाँ नहीं बन सकती. आयात पर टैरिफ लगा कर आप किसी और का नहीं, अपने ही लोगों का नुकसान करते हैं, अपने ही नागरिकों को महंगा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं.

    यहां तक तो है कहने की बात. पर उससे बड़ा प्रश्न है, जितना कहा गया है, उसमें से कितना किया जा सकेगा? स्कूलों में, यूनिवर्सिटी में, ज्यूडिशियरी में, फौज में जो भी वोक एलिमेंट्स हैं वे अपना काम करते रहेंगे… प्रेसिडेंट के कहने से टीचर्स क्लासरूम में जो पढ़ा रहे हैं उसे बदल नहीं देंगे. अमेरिका फेडरल है, राज्यों पर प्रेसिडेंट का बस नहीं चलता. इसलिए ट्रम्प के एक भाषण से अमेरिका बदल जाएगा यह सोचना नादानी होगी. कम्युनिज्म से खुली दुश्मनी के जमाने में, जोसेफ मैकार्थी के जमाने में भी जो वामपंथी घड़ा अपना काम करता रहा वह एक भाषण के सामने घुटने टेक देगा यह उम्मीद तो मत रखें.

    लेकिन ट्रम्प ने अपने एक भाषण से पॉलिटिकल करेक्टनेस को कम से कम बीस साल पीछे धकेल दिया है. उन्होंने दुनिया की साइलेंट मेजॉरिटी को स्वर दिया है. कॉमन सेंस की जो बात कहने में एक आम आदमी हिचकने लगा था, वह फिर से कहने की हिम्मत दी. एक बार फिर से अमेरिका को लैंड ऑफ द फ्री एंड होम ऑफ द ब्रेव बना दिया.

  • बड़े बाबा के छोटे भक्त

    बड़े बाबा के छोटे भक्त

    इस महाकुंभ के शाही स्नान में बारह फरवरी से छह करोड़ से अधिक लोग एक साथ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम में स्नान करने जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों के अखाड़ों से जुड़े लाखों सनातनी एक साथ महाकुंभ में होंगे। महाकुंभ पहली बार नहीं जा रहा है। ये परम्परा सनातनकाल से चली आ रही है। ऐसे भगवान के दरबार में दमोह जिले के कुंडपुर तीर्थ में बड़े बाबा के चंद ओछे भक्तों की जो थू थू हो रही है वह विचारणीय है। यहां जैन मुनि अंतरमना आचार्य आकर्षक सागर जी को मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने निराहार गमन करने के लिए मजबूर कर दिया। अंतरमना संघ के भक्तगण यहां नए साल के आगमन के अवसर पर भजन संध्या का आयोजन करना चाह रहे थे। मंदिर समिति का कहना था कि तीर्थ क्षेत्र की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया है इसलिए दूसरे कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती। बांसुरी म्युजिकल ग्रुप के अक्षय पंड्या और डिशी जैन की भजन मंडली ये कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रही थी। समिति के कुछ कुटिल मंदिर समिति ने कहा कि लड़कियां नाचने के इस कार्यक्रम के बारे में विचार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि यह धार्मिक आयोजन आचार्य श्री आकर्षक सागर जी के नाम पर हो रहा था इसलिए मंदिर समिति ने इस पर रोक लगा दी। आकर्षक सागर जी तो अगले दिन सुबह क्षेत्र से निराहार गमन कर गए इस घटना पर कई सवाल कर दिए गए हैं। कुंडपुर में इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों घटती हैं। यहां आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की कृपा से विशाल मंदिर बनकर तैयार हो गया है। सैकड़ों साज़िशों के मंदिर बने हुए हैं। ये विशाल तीर्थ पूरी दुनिया में जैन धर्म की कीर्ति पताका फहरा रहा है। पूर्ण होने के बाद आचार्यश्री मंदिर में विशाल पंच कल्याणक महोत्सव के लिए गए थे। आचार्यश्री ने भी तीर्थ क्षेत्र से यात्रा की थी। निर्यापक बनाये गये सुधा सागर जी महाराज ने भी तीर्थ क्षेत्र से कुछ ऐसी ही मनःस्थिति में गमन किया था। जबकि वे तो आचार्य श्री के ही नियुक्त किये गये निर्यापक संत थे। आचार्य सागर जी को गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी ने चार शिष्यों के साथ आचार्य की पदवी प्रदान की है। ये समाधिनाथ पुलक सागर जी,प्रमुख सागर जी और प्रमुख सागर जी भी शामिल हैं। इस समारोह में जाने वाले प्रोफेसर के पदवी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड एलेक्टोल ने प्रतिनिधि के रूप में अपने सलाहकार प्रोफेसर फिलिप एलेक्जेंड्रा को भी भेजा था। ये अमेरिकी सरकार की ओर से उनका सम्मान था। ऐसे विद्वान संत को कुंडलपुर समिति ने क्यों स्वीकार नहीं किया, इस पर पूरी दुनिया के जैन समाज के बीच गंभीर सांत्वना मनन चल रहा है। निश्चित रूप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का वास्तुशिल्प अद्वितीय है। बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा बिना खंडित किस चमत्कारिक तरीके से नए मंदिर में हो गई ये अनोखी घटना। लाल पत्थर से बना कुंड, पुरी का जैन मंदिर, अयोध्या के भगवान श्रीराम के मंदिर की ऐसी ही अद्भुत संरचना है। इस तीर्थ क्षेत्र की वंदना करने के लिए दक्षिणी आचार्य श्री आकर्षक सागर जी की सेवा और साख लेकर यहां की प्रबंधन समिति तीर्थ क्षेत्र की यशोगाथा पूरी दुनिया में निकाली जा सकती थी, लेकिन समिति में पाई गई जगह पर कुछ ओछे लोगों ने इसे तीर्थ क्षेत्र की गरिमा का खंडन कर दिया। तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे। इस घटना के बाद उन्होंने खेद भी व्यक्त किया। असल में उनके कुछ षडयंत्रकारी कार्यकर्ताओं ने ये कहा था कि निवृत्तमान अध्यक्ष संतोष सिंघई ने मंदिर की कमान दमोह के बाहर जैन धर्मावलंबियों के हाथों में दे दी है। दरअसल मंदिर निर्माण में पूरी दुनिया में अंतिम जैन धर्मावलंबियों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया था। तब आचार्य श्री ने सकारात्मक लोगों को दिये महत्वपूर्ण उत्तर। कुछ लोगों को मंदिर निर्माण के कार्य से दूर रखा गया था। आज वही लोग मंदिर के आभूषण बन गए हैं और वे कुंडलपुर की चमक-दमक को फीका करने की वजह बन रहे हैं। आचार्यश्री ने इस मंदिर को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए जैन धर्म की वकालत का संदेश दिया था। आज भारत में जैन धर्म को अल्पसंख्यक माना जाता है। सनातन धर्म के विभिन्न मतावलंबियों में भी जैन धर्म के मतावलम्बियों को प्रेरणा लेनी होगी।

  • परिवहन माफिया को कुचलते मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव

    परिवहन माफिया को कुचलते मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव

         भोपाल,07 जनवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली जनता को चौंका रही है। जिस तरह पिछले बीस सालों से मध्यप्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की जी हुजूरी वाली सरकार देखने के आदी हो चले थे उन्हें अब नई सरकार का कामकाज चौंका रहा है।छह जनवरी से मुख्यमंत्री जो जनता दरबार की परंपरा शुरु करने जा रहे हैं उसके लिए प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की है। इस जनता दरबार से दलालों को दूर रखा जाएगा जो मूलभूत समस्याएं लेकर पहुंचने वालों को बदनाम करके हतोत्साहित करने का प्रयास करते हैं।  
    
          राजनीति के गलियारों के सूत्र बताते हैं कि  सौरभ शर्मा पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उसे परिवहन विभाग के अफसरों ेने बताया था कि सरकार परिवहन चौकियों को बंद करने जा रही है। तबसे सौरभ ने मुख्यमंत्री को एकमुश्त चुनावी चंदा पहुंचाने का प्रस्ताव भेजा था। उसके कुछ परिचितों ने उसे मुख्यमंत्री कार्यालय के जिम्मेदार अफसरों से भी मिलवाया था। उन अफसरों को साफ निर्देश थे कि परिवहन माफिया की कोई भी पेशकश पर गौर न किया जाए। परिवहन नाकों पर जनता की लूट खसोट रोकने के लिए भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व की मंशा भ्रष्टाचार रोकने की है इसलिए चौकियां हटाई जाएं।
     
          इससे बरसों से परिवहन चौकियों को कमाई का अड्डा बनाने वाले नेता, और माफिया के गुर्गों ने मिलकर काफी चंदा जुटाकर मुख्यमंत्री के निजी फंड में चंदा देने की तैयारी की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियो ने जानकारी मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस को छापामार कार्रवाई को कह दिया। सौरभ शर्मा और इसके आकाओं को अंदेशा था कि मुख्यमंत्री चंदा लेने का प्रस्ताव नामंजूर कर सकते  हैं. इसके बावजूद उन्होंने सोना,चांदी और नकदी गाड़ी में भरकर रवाना कर दी। जब लोकायुक्त पुलिस छापा मार रही थी तब भी सौरभ शर्मा के गुर्गे मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसरों को कह रहे थे कि लोकायुक्त ने छापा भले ही मार दिया है पर आप आदेश करें तो ये गाड़ी सीधे मुख्यमंत्री के बंगले पर पहुंच जाएगी। 
    
         सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त का जो व्यक्ति इस छापे सं संबंधित प्रक्रिया का संवाद सूत्र था उसने डीजी जयदीप प्रसाद तक वही जानकारियां पहुंचने दीं िजससे नियंत्रित धनराशि ही पकड़ी जा सके। इसी सूत्र ने गाड़ी को घर से रवाना करके सुनसान इलाके में खडी़ करने वाली योजना बनाई ताकि किसी को मालूम न पड़े और मुख्यमंत्री कार्यालय को चंदा पहुंचाकर परिवहन नाकों की पुरानी परंपरा जारी रखी जा सके। 
    
           बताते हैं कि सरकार ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए परिवहन नाकों से चली आ रही पुरानी चोरी की परंपरा को बंद करने को बड़े उपाय के रूप में अपनाया है। परिवहन नाकों से चंदा वसूली की ये प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल से चलती आ रही है। इस प्रक्रिया में जुटाई गई धनराशि चंदे के रूप में कथित तौर पर मुख्यमंत्री के फंड, अफसरों और नेताओं पत्रकारों तक भी पहुंचाई जाती थी।
     
         परिवहन माफिया के चंदे पर पलने वाले पत्रकारों की जो  सूची पिछले दिनों जारी हुई थी  उसके बाद सरकार ने जब जांच कराई तो पता चला कि ये करतूत भी परिवहन माफिया की ही है। एक तरह से यह गिरोह सरकार को धमकाने का प्रयास कर रहा था कि अभी तो पत्रकारों की असलियत खोली गई है।यदि सरकार ने चंदा वसूली की परिपाटी नहीं रोकी तो सरकार के भी कुछ नेताओं की कलई खोली जा सकती है। 
    
     पूर्व परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और गोविंद राजपूत दोनों इस सूची के उजागर हो जाने के बाद असहज हो गए थे। दोनों के बीच पिछले दिनों जिस तरह के आरोप प्रत्यारोप सामने आए उनके पीछे परिवहन नाकों के काले धंधे की कहानियां भी शामिल थीं।  जानकारों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और केपी सिंह कक्काजू का अनुमान था कि पत्रकारों की सूची सामने आ जाने से मुख्यंमंत्री मोहन यादव डरेंगे और परिवहन नाकों पर अपनी नीति बदलने की प्रक्रिया रोक देंगे. 
    
          सरकार ने जबसे परिवहन नाकों की प्रक्रिया को रोककर जांच की परिपाटी शुरु की है तबसे माफिया का प्रयास है कि किसी तरह सरकार के इस तंत्र को बदनाम किया जाए ताकि अभी भी परिवहन विभाग अपने पुराने ढर्रे पर लौट आए। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद भी मुख्यमंत्री ने अपने स्टाफ को साफ कह दिया है कि सरकार को जो भी कीमत चुकानी पड़े नाकों से टैक्स चोरी की परंपरा दुबारा चालू नहीं की जाएगी। 
          परिवहन माफिया ने सरकार को चंदा देने के लिए बड़ी रकम को सोने और चांदी में बदलवाया था। ये सारी प्रक्रिया पूर्ववर्ती नेताओं के अनुभवों के आधार पर पूरी की गई थी। इसके बावजूद सरकार ने ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय माफिया और दलालों के हाथों में पहुंचने से रोकने की इच्छा शक्ति को नहीं डिगने दिया। इस प्रलोभन के जाल में न फंसकर सरकार ने एक तरह से अपना दामन साफ रखने में कामयाबी पाई है। यदि मुख्यमंत्री सचिवालय इस चंदे को स्वीकार कर लेता और सोचता कि ये राशि मुख्यमंत्री महोदय के हाथों से बंटवाकर वाहवाही बटोरी जाएगी तो वो परिवहन माफिया की ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाता।
    
          युवा आईएएस और मुख्यमंत्री के कामकाज को संभालने वाले भरत यादव वैसे भी सख्त प्रशासक माने जाते रहे हैं। उन्होंने परिवहन माफिया के संदेशों और दलालों के प्रस्तावों की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी न पनप सके। दलालों के गिरोह पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने सभी विभागों के आला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब तक चली आ रहीं पुरानी परिपाटियों को बदला जाए। प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाकर विकास कार्यों में गति लाई जाए और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। इसी का नतीजा है कि परिवहन माफिया के बड़े घोटाले पर अंकुश लगाया जा सका है।
     
         हालांकि राजनीति के कई बड़े खिलाड़ी अब कह रहे हैं कि चंदे की रकम रोककर मुख्यमंत्री एक नए जाल में फंसने जा रहे हैं। इस तरह राजनीति करके वे घनघोर अलोकप्रियता को आमंत्रित कर रहे हैं। ये माफिया बहुत ताकतवर है और सरकार को कई मोर्चों पर बदनाम कर देगा। इसके बावजूद सरकार ने अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। 
    
          पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने तो पत्रकारों के वेश में आने वाले दलालों को जन सुनवाई से बाहर रखने के निर्देश दिए हैं। जाहिर है कि मोहन सरकार पहली बार सत्ता के दलालों पर रोक लगाती नजर आ रही है. नए साल में सरकार की ये पहल सराहनीय कही जा रही है।