
भोपाल,08 अक्टूबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) हरियाणा विधानसभा चुनावों में अब तक आए नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा के कोर वोटर ने एंटी इंकम्बेंसी और बदलाव की बयार का रुख मोड़ देने में सफलता पाई है।वोट प्रतिशत के आंकड़ों में काग्रेस को फायदा है। भाजपा को इस बार 39.94प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि उसकी विरोधी कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं।ये नतीजे तब आए हैं जब तमाम सर्वेक्षण और राजनीतिक दल सत्ता परिवर्तन की आशंकाएं दर्शा रहे थे।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी को 1.79 फीसदी वोट मिले हैं। अगर हरियाणा में लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी इंडिया गठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरता तो सीटों के हिसाब से रिजल्ट में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता था।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में अब तक हुई वोटों की गिनती में करीब 28 ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशियों के 5 हजार या उससे कम वोटों का अंतर दिख रहा है। ऐसे में आम आदमी पार्टी अगर कांग्रेस के साथ हरियाणा चुनाव में उतरती तो इसका कुछ और ही असर हो सकता था।
कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी अंतिम वक्त चाहते थे कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन हो। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा के अति आत्मविश्वास के चलते यह गठबंधन नहीं होने दिया । चुनाव के बीच में अरविंद केजरीवाल जब जेल से बाहर आए तो लगा कि कांग्रेस और आप का गठबंधन लगभग तय है, लेकिन हुड्डा इसके लिए तैयार नहीं हुए।
उनका दावा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ भी इसी तरह के अति आत्मविश्वास में दिखे थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी को साथ लेने से मना कर दिया था और अखिलेश यादव के नाम पर बड़बोलेपन वाला बयान भी दे दिया था। हरियाणा के विधानसभा चुनाव को देखकर यही लगता है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कमलनाथ वाली गलती की और कांग्रेस का एक और राज्य जीतने का सपना धरा रह गया था।
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