Month: September 2024

  • भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था की आमसभा में कई फैसले

    भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था की आमसभा में कई फैसले


    भोपाल,29 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल के सदस्यों ने आज अपनी वार्षिक आम सभा में शहर को सुंदर बनाने के लिए संस्था की ओर से कई निर्णय पारित किए हैं। सहकारिता अधिनियम के अनुसार संस्था भूखंडों को कलेक्टर गाईडलाईन के अनुसार युक्ति संगत बनाएगी। बेनामी सदस्यों के भूखंडों के आबंटन निरस्त किए जाएंगे ताकि संस्था के क्षेत्राधिकार में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और राजधानी के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में सहयोग दिया जा सके।


    संस्था के अध्यक्ष सुरेश कर्नाटक की अध्यक्षता में आयोजित वार्षिक आमसभा में संस्था के तमाम सदस्यों ने भाग लिया और फैसलों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई। संस्था के वरिष्ठ सदस्य आरएस ठाकुर ने पूर्व में किए गए विकास कार्यों को आगे ले जाने में नए सदस्यों के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपने दायित्वों को पूरा करके सहकारिता आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रही है।


    संस्था के सदस्य नितिन वर्मा ने बताया कि एम्स अस्पताल परिसर के नजदीक साकेत नगर सामुदायिक भवन में आयोजित इस वार्षिक आमसभा में पारंपरिक तरीकों से हटकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सभी सदस्यों को नियमानुसार उपस्थित रहने की सूचना दी गई थी। संस्था की सदस्यता सूची के प्रकाशन के लिए सभी सदस्यों से अपने सदस्यता संबंधित दस्तावेज जमा कराने का अनुरोध किया गया था। साफ निर्देश दिया गया कि जो सदस्य अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाएंगे उनकी सदस्यता निरस्त कर दी जाएगी।

    संस्था के निर्देश के बाद सभी रहवासियों ने वार्षिक आमसभा में पहुंचकर नए फैसलों पर सहमति जताई है।


    सहकारिता विभाग के निर्देशानुसार पूरे आयोजन की वीडियोग्राफी कराई गई है। पिछली आडिट रिपोर्टों का अनुमोदन कराया गया है और नए वित्तीय सत्र के लिए अनुमानित बजट का अनुमोदन कराया गया है। संस्था ने फैसला लिया है कि भूखंडों से लगी हुई अतिरिक्त भूमियां कलेक्टर रेट पर युक्ति संगत बनाई जाऐंगी। कालोनी में जिन भूखंडों के सामने सड़क,नल लाईन और नालियों का निर्माण नहीं किया गया था उन लंबित विकास कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा। जो भूखंड नगर निगम से मुक्त कराए गए हैं उन पर तय की गई विकास दर पर भवन निर्माण कराए जाने का निर्णय लिया गया है।


    साकेत सामुदायिक भवन सेवा न्यास के उपाध्यक्ष जे.पी. साहू का नाम नए प्रतिनिधि के रूप में अनुमोदन किया गया है।इसके साथ ही अब तक प्रतिनिधि रहे एसपी शुक्ला पद मुक्त हो जाएंगे। श्री शुक्ला के विरुद्ध कई अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं थीं जिनकी जांच चल रही है। संस्था ने पूर्व सदस्य रहे नन्नू लाल राज की सदस्यता निरस्त कर करने की घोषणा भी की है।भौतिक सत्यापन के बाद अवैध सदस्यों का निष्कासन होगा और लावारिस संपत्तियों का वैधानिक तौर पर निष्पादन भी किया जाएगा।

  • लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार और जरूरत मंदों को भोजन कराने वाले वंदनीय

    लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार और जरूरत मंदों को भोजन कराने वाले वंदनीय


    मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने किया जनसंवेदना संस्था की स्मारिका का विमोचन

    भोपाल, 28 सितंबर। गरीब परिवारों के मृत परिजनों और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाली सामाजिक संस्था जन संवेदना के स्मारिका अंक(मानव सेवा ही माधव सेवा) का विमोचन आज मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने अपने कर कमलों से किया। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता को उत्कृष्ट समाजसेवा बताया।


    संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल ने बताया कि संस्था के सहयोगियों और हितग्राहियों के योगदान को याद करने के लिए हर साल इस स्मारिका का प्रकाशन किया जाता है। मानवसेवा के पुनीत कार्य के अक्षयपात्र में अपना योगदान देने वाले समाजसेवियों को देख सुनकर आम नागरिकों के मन में भी अपने सामाजिक दायित्वों का बोध हो सके इस उद्देश्य से संस्था ने अपनी वेवसाईट भी बनाई है। इसके बावजूद प्रमाणिक दस्तावेज के रूप में हम दानदाताओं और हितग्राहियों के नाम समाज के सामने लाते हैं।


    श्री अग्रवाल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि उन्हें संस्था के पुनीत कार्यों की जानकारी पहले से है। इस तरह के सामाजिक कार्य ही वसुधैव कुटुंबकम की भावना को मजबूती प्रदान करते हैं। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित मानव सेवा ही माधव सेवा कार्यक्रम में उन्होंने संस्था की स्मारिका को आम नागरिकों के लिए लोकार्पित किया। इस दौरान भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी,भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल,एवं हिमांशु अग्रवाल भी मौजूद थे।


    संस्था की ओर से पिछले सोलह सालों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। पुलिस को प्राप्त होने वाली लावारिस लाशें हों या फिर गरीबी से जूझते बेसहारा परिवारों के परिजनों का अंतिम संस्कार हो,संस्था आगे बढ़कर इस पुनीत कार्य को अपने हाथों से संपन्न कराती है। बीमारी से जूझते गरीब परिवारों और जरूरत मंदों को भी संस्था की ओर से भोजन कराया जाता है। आमतौर पर भोजन वितरण का कार्य एम्स या राजधानी के अन्य असपतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के बीच किया जाता है।


    उन्होंने बताया कि राजधानी के अलावा प्रदेश के अन्य स्थानों के लोग सहयोग देकर इस पुनीत कार्य की ज्योति जलाए हुए हैं। विदेशों में नौकरियां करने वाले युवा और वहां बस चुके बुजुर्ग भी अपने परिजनों की याद में समाजसेवा करके अपना जन्म सार्थक करने का अवसर तलाशते हैं। संस्था ने समाजसेवा के इस कार्य को पूरी पारदर्शिता से करने के लिए दान राशि को आन लाईन प्राप्त करने की सुविधा विकसित की है। इस कार्य को स्थानीय पुलिस के रिकार्ड के अनुसार ही संपन्न कराया जाता है। संस्था की विश्वसनीयता बनी रहे इसके लिए डाक्टर्स क्लब परिसर स्थित जनसंवेदना के कार्यालय में समाजसेवियों से योगदान लिया जाता है। संस्था के भवन निर्माण और शव वाहन व एंबुलेंस सेवा के लिए भी विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से योगदान दिया जाता है।

  • विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    सागर, 27 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य का बुन्देलखंड, विकसित बुन्देलखंड होगा। प्रदेश में उद्योगों के विकास का कार्य निरंतर जारी रहेगा। छोटे से छोटे उद्यमी की सहायता के लिए भी राज्य सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। केन-बेतवा परियोजना के क्रियान्वयन से बुन्देलखंड के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता की वृद्धि होगी, जिससे बुन्देलखंड क्षेत्र का स्वरूप बदल जायेगा। सागर में एयरपोर्ट का निर्माण होगा। इससे एविएशन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेगी। प्रदेश के कई स्थानों पर विमानन की गतिविधियों के लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, इससे रोजगार भी बढेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरआईसी सागर के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के अवसरों पर केन्द्रित लघु फिल्म “एडवांटेज एमपी” का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमपीआईडीसी के सागर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का वर्चुअल भूमि-पूजन किया। उन्होंने सागर संभाग के 6 जिलों सागर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर और दमोह में इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन सेंटर और संभागीय मुख्यालय में एमपीआईडीसी के रीजनल ऑफिस का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके साथ ही कोयंबटूर (तमिलनाडू) में एमपीआईडीसी के कार्यालय का भी वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर औद्योगिक क्षेत्र से सिंधगवां की जलापूर्ति के लिए नगर निगम सागर और एमपीआईडीसी के मध्य ट्रीटेड वाटर प्रदाय के लिए एमओयू का संपादन भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 96 औद्योगिक इकाइयों के आशय-पत्र जारी किए। इन इकाइयों को 240 एकड़ भूमि आवंटित की जाना है। इससे 1 हजार 560 करोड़ का पूंजी निवेश एवं 5 हजार 900 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुंदेलखंड इनोवेशन चैलेंज (हैकाथॉन) के विजेताओं बेम्बू वर्ल्ड के श्री सुजीत तिवारी, सेवा हब के श्री आशीष शर्मा, निम्बस गेमिंग के श्री विपुल सिंह परमार को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। जय अनाग गायत्री प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री निलय शर्मा को सर्वश्रेृष्ठ महिला उद्यमी के रूप में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर बुक ऑडियो के लिए सोशल मीडिया क्रिऐटर श्री राजीव यादव भी पुरस्कृत किए गए।
    क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र में मंगोलिया के राजदूत श्री गनबोल्ड डंबजाव, टीड्व्ल्यू के सीईओ श्री इंगो सोईलर, थाईलैंड के महावाणिज्यदूत श्री डोनाविट पूलसावत, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, मंत्री श्री लखन पटेल, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव और श्री भूपेन्द्र सिंह सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनसंपर्क विभाग द्वारा हिन्दी में प्रकाशित “मध्यप्रदेश संदेश” के अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया। इस अंक में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्यप्रदेश यात्रा, प्रदेश की पहली जनमन कॉलोनी शिवपुरी और अन्य उपलब्धियों का समावेश है। इस अवसर पर सचिव तथा आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर निवेश से स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इस कॉन्क्लेव से पूरा संभाग लाभान्वित होगा। संभाग के सभी जिलों में उद्योग तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। बीना में कई इकाइयां आएंगी। साथ ही 120 करोड़ की लागत से पेट्रोलियम क्षेत्र में भी निवेश हो रहा है। प्रदेश में सागर में चलने वाले डेटा सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। यह 1700 करोड़ का निवेश है और इससे लगभग एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नये 6 लेन और 4 लेन मार्गों का लाभ भी बुन्देलखंड क्षेत्र को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश आ रहा है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार सहयोग प्रदान कर गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। खनिज क्षेत्र में भी बुन्देलखंड सहित संपूर्ण प्रदेश में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुन्देलखंड ने कला, संस्कृति, वीरता से इतिहास में अपना स्थान बनाया है। इस क्षेत्र में चांदी का कार्य करने वालों, बीड़ी तथा अगरबत्ती उद्योग से जुड़े लोगों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा। सागर में चांदी से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने क्लस्टर विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय कॉन्क्लेव से स्थानीय स्तर पर नई इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से स्थानीय गतिविधियों के साथ प्रदेश स्तर पर महत्व रखने वाले उद्योगों की स्थापना को भी गति देने में मदद मिल रही है।
    खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है और उनका सपना साकार हो रहा है। सागर के पुराने अगरबत्ती और बीड़ी उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल भी हुई है। कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में नागरिकों को सुविधा देने के प्रयोग किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर अंचल में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से बुन्देलखंड अंचल को नई पहचान मिलेगी।
    एमएसएमई मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और दूरदर्शिता से ही क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन संभव हो पा रहे हैं। इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के लिए उत्साह का वातावरण बन रहा है। यह देश में अपनी तरह का अनूठा नवाचार है। इससे कृषि पर निर्भर उद्योगों के साथ व्यापार, व्यवसाय की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है।
    सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि बुन्देलखंड अंचल में खनिज, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। खजुराहों को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे है
    पेसिफिक मेटा-स्टील के श्री जे. पी. अग्रवाल ने कहा कि वे निवाड़ी में 3200 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगा रहे हैं। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रतिवर्ष लगभग 1 हजार करोड़ का राजस्व भी शासन को प्राप्त होगा। उन्होंनें मध्यप्रदेश में मेडीकल क्षेत्र में भी गतिविधियां आरंभ करने की योजना सांझा की।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की निवेशकों ने सराहना की। कॉन्क्लेव में आए बंसल समूह के श्री सुनील बंसल ने कहा कि चिकित्सा उद्योग क्षेत्र में बंसल समूह कार्य कर रहा है। सागर में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा समूह द्वारा प्रारंभ की गई है। श्री बंसल ने प्रदेश में 4 सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पीटल, एक पांच सितारा होटल और ऊर्जा क्षेत्र में 1350 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया।
    सागर ग्रुप के उद्योगपति श्री सुधीर अग्रवाल ने कहा कि भोपाल के पास तामोट में उनकी इकाइयां कार्य कर रही हैं। टेक्सटाईल क्षेत्र में नए निवेश के प्रयास सागर ग्रुप कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा, मकान सभी क्षेत्रों में ग्रुप कार्य कर रहा हैं। उनके समूह की डाईंग एण्ड प्रोसेसिंग क्षेत्र में लगभग 1400 करोड़ रूपये के निवेश की योजना है, इससे रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। उन्होंने कहा कि उनका समूह कॉम्पटीशन नहीं, को-आपरेशन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
    मध्य भारत एग्रो के श्री पंकज ओसवाल ने कहा कि उनके समूह का सर्वाधिक निवेश मध्यप्रदेश में है। निवेश की उद्योग मित्र नीति तथा शासन का सहयोगी रवैया अतुलनीय है। उनका समूह सागर में सिंगल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन कर रहा है। श्री ओसवाल ने बताया कि उनके समूह की सागर के बंडा के पास 500 करोड़ रूपये निवेश की योजना है।
    प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में 3 संभागीय कॉन्क्लेव के बाद आज सागर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही है। बैंगलुरू, कोयम्बटूर, मुम्बई और कोलकाता में इंटरैक्टिव सेशन भी इस वर्ष संपन्न हुए हैं। मध्यप्रदेश औद्योगिक दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, यहाँ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया हैं। अनेक क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की प्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं। अधोसंरचना की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होने से निवेशकों के लिए प्रदेश अनुकूल है। राज्य सरकार की उद्योग नीतियों से उद्योगपति मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए इच्छुक रहते हैं।
    अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए तैयार की गई राज्य की नीतियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर स्थापना की दृष्टि से मध्यप्रदेश सर्वाधिक अनुकूल प्रदेश है। श्री दुबे ने आईटी क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
    प्रमुख सचिव खनिज श्री संजय कुमार शुक्ला ने प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा और संचालित उद्योगों की विस्तार से जानकारी दी। श्री शुक्ला ने मध्यप्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सभी विभागों से जुड़ी अनुमतियां आसानी से प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि 17-18 अक्टूबर को भोपाल में खनन व खनिज गतिविधियों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का आयोजन प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि सागर की ढाना हवाईपट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
    एम.डी. पर्यटन श्री इलैया राजा टी. ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से बड़ी संख्या में प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सचिव सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम श्री नवनीत मोहन कोठारी ने कुटीर उद्योगों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रबंध संचालक हस्तशिल्प विकास निगम श्री मोहित बुन्दस ने मध्यप्रदेश में कुटीर उद्योग क्षेत्र में विद्यमान अवसरों के बारे में जानकारी दी। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

  • बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    -आलोक सिंघई-

    पिछले 36 सालों से बीड़ी उद्योग के कथित सहकारीकरण और सुधारों ने राज्य के लाखों मजदूरों को लाचार बना दिया है ।जिन मजदूरों को साल भर बीड़ी बनाने का रोजगार मिलता था वह लगभग समाप्त हो गया है। राज्य को अपने श्रमबल से होने वाली आय समाप्त हो चुकी है। तंबाखू की खपत सिगरेट और गुटखे से जारी है अंग्रेजों की बनाई आईटीसी कंपनी अपनी सिगरेट बेचकर मुनाफा कमा रही है ।  तेंदूपत्ता मजदूरों को बोनस बांटने का शिगूफा छेड़कर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और उसके बाद उनके अनुचरों ने सरकारों में शामिल होकर बीड़ी मजदूरों के साथ जो छल किया उसके पटाक्षेप का समय अब नजदीक आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही जीरो बैलैंस वाले  बैंक खाते खुलवाकर गरीब श्रमिकों को पहली बार बैंकों की चौखट तक पहुंचाया था। अब श्रमिकों के पंजीयन के बाद पीएफ खाते खोलकर मजदूरों का भविष्य सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मुताबिक देश में रोजगार की संख्या बढ़ी है,ऐसे में मध्यप्रदेश की डाक्टर मोहन यादव सरकार ने सागर में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करके बीड़ी उद्योग को प्रबंधित करने का जो मन बनाया है वह तारीफ के काबिल लगता है।

             तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों में धूम्रपान की लत बरकार है । भारत के साथ पाकिस्तान, श्रीलंका,नेपाल, म्यांमार, जैसे कई पडौसी देश भी लोगों की धूम्रपान की जरूरतों को पूरी करने के लिए अपना बाजार खोले बैठे हैं । ऐसे में बीड़ी हमेशा से सिगरेट की राह में अडंगा बनी हुई है । मध्यप्रदेश इस मायने में सौभाग्यशाली है  कि इसके जंगलों में तेंदूपत्ता बहुतायत से पाया जाता है। कथित सहकारीकरण के पहले राज्य के जंगलों से लगभग अस्सी लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता तोड़ा जाता था। जब से लघुवनोपज संघ ने ये काम संभाला तबसे तेंदूपत्ते के संग्रहण में लगातार गिरवट आती रही है । आज संघ का संग्रहण लक्ष्य ही  16 लाख मानक बोरा बचा है । जंगलों का रखरखाव घटने से तेंदूपत्ते की गुणवत्ता भी धराशायी  गई है। ये सारा षड़यंत्र कथित तौर पर आईटीसी कंपनी की छोटी सिगरेट को लाभ पहुंचाने की मंशा से रचा गया था।

         स्वर्गीय अर्जुन सिंह जब खुद को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे तब उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लुटियन गेंग को खुश करने के लिए छोटी सिगरेट का मार्ग प्रशस्त किया था।कांग्रेस के ही उनके करीबी बताते हैं कि कंपनी ने उन्हें अपना पार्टनर बना लिया था।ऐसे में राज्य को अपना कारोबार गंवाने की मंहगी कीमत चुकानी पड़ी। उनके बाद आए तमाम मुख्यमंत्रियों ने इस बर्रों के छत्ते में हाथ नहीं डाला। दिग्विजय सिंह जैसे पुतला पूजने वाले शासक हों या फिर शिवराज सिंह जैसी लंबी पारी खेलने वाले मुख्यमंत्री सभी साहब की लाबी का हाथ पकड़कर चलते रहे। अर्जुन सिंह से उपकृत स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा हों या उनकी भजन मंडली के बाबूलाल गौर, कैलाश नारायण सारंग सभी ने सिगरेट की राह में अड़ंगा न लगाने की परिपाटी जारी रखी।बाद में तो विश्वास सारंग पर लघु वनोपज संघ में खुद को श्रमिक के तौर पर पंजीकृत करवाने का आरोप भी लगा।  शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की तो क्या बिसात थी कि वे कोई स्वतंत्र फैसला ले सकते। उनके मंत्रिमंडल में  शामिल रहे पंडित गोपाल भार्गव ने दिग्विजय सिंह सरकार के सामने खूब उछलकूद मचाई और बीड़ी कारोबार को व्यवस्थित करने की नौटंकी भी की। दिग्विजय सिंह ने उन्हें बीड़ी कारोबार के अध्ययन के लिए कई राज्यों की सैर भी कराई इसके बाद वे भी सिगरेट लाबी की गोदी में जाकर बैठ गए। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपना मुंह बंद रखा। अब जबकि रोजगार के साधन बढ़ाने की मुहिम देश भर में चलाई जा रही है तब वे आगे आकर बीड़ी उद्योग की पुरानी सूरत लौटाने की आवाज उठाने लगे हैं।

            जब अर्जुनसिंह जी इस कारोबार को लपेटना चाह रहे थे  तब उनके वामपंथी सहयोगियों और मजदूर नेताओं ने खूब शोरगुल मचाया कि बीड़ी मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें ज्यादा मजदूरी मिलनी चाहिए। इस शोरगुल में उन्होंने बीड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी और तेंदूपत्ते के राष्ट्रीयकरण की आड़ में लघु वनोपज संघ के माध्यम से तेंदूपत्ते का कारोबार भी छीन लिया। कहा गया कि इस तेंदूपत्ते को बेचकर राज्य की आय बढ़ाई जाएगी और पत्ता संग्राहकों को बोनस भी बांटा जाएगा। तबसे लेकर हर साल बोनस बांटने की नौटंकी की जाती रही है। जब पत्ता एक्सपोर्ट होने लगा तो जिस बीड़ी मजदूर को साल भर रोजगार मिलता था वो छिन गया। मजदूरी बढ़ने से बीड़ी कारोबार की कमर टूट गई और यह धंधा पश्चिम बंगाल पहुंच गया।

           बीड़ी सेठ तो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष भी हुआ करते थे लेकिन अर्जुन सिंह के सामने उनकी एक न चली। बीड़ी श्रमिकों के नेताओं ने शोषण और अत्याचारों की ऐसी कहानियां गढ़ीं और सुनाईं कि बीड़ी कारोबारियों को खलनायक बना दिया गया। जिन परिवारों ने अपनी पीढ़ियों की साधना के बल पर गांव गांव में अपनी शाखाएं खोलीं और सट्टेदार स्थापित करके बीड़ी बनवाने व उसे एक्सपोर्ट करने का कारोबार विकसित किया वह शनैःशनैः धराशायी हो गया। बेशक बीड़ी कारोबारियों के कई सट्टेदार शोषण करके बीड़ी छांट देते थे और इस छंटी हुई बीड़ी की मजदूरी काट लेते थे। इस बीड़ी को बाद में नकली लेवल लगाकर बाजार में पिछले दरवाजे से बेच दिया जाता था। शोषण के कई तरीके विकसित किए गए थे लेकिन उन्हें पूरी शह सरकारी तंत्र की थी। रिश्वत लेकर सरकारी अमला मजदूरों के शोषण की राह प्रशस्त करता रहा और मुनाफा कूटता रहा। निश्चित तौर पर शोषण रोकना सरकार की जवाबदारी थी। तब आनलाईन खातों की व्यवस्था भी नहीं थी। मजदूरी नकद दी जाती थी। ऐसे में मजदूरों खासतौर पर महिलाओं का शोषण भी आम था। इन्हें रोकने की सख्ती करने के बजाए फैक्टरी की सिगरेट बाजार में उतारकर पूरा कारोबार धराशायी कर दिया गया।

            आज जब सभी धंधों के कार्पोरेटीकरण से निजीकरण की सीमाओं और सरकारीकरण की धूर्तताओं से अलग हटकर कारोबार को व्यवस्थित करने की सुविधा आ गई है। मजदूरी को व्यवस्थित करने की आनलाईन सुविधा आ गई है तब बीड़ी कारोबार पर नए संदर्भों में विचार किया जाना अनिवार्य हो गया है। सरकार जब एक क्लिक से किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना जैसी बहुउद्देश्यीय योजनाएं सफलता पूर्वक चला रहीं हैं तब श्रमिकों को उनके खातों के साथ देश के पूंजी निर्माण में पार्टनर बनाना सरल हो गया है। बीड़ी कारोबार हो या असंगठित क्षेत्र का खेतीहर मजदूर सभी को आनलाईन प्लेटफार्म पर जोड़ना जरूरी है। मध्यप्रदेश से जो बीड़ी कारोबार पश्चिम बंगाल, या आंध्रप्रदेश शिफ्ट हो चुका  है उसे एक बार फिर राज्य में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य  हो गया है।कथित सहकारीकरण का मॉडल फेल घोषित होने के बाद तो अब तय हो गया है कि बीडी़ का धंधे को कुचलकर राजनेताओं ने मजदूरों की रीढ़ तोड़ने का षडयंत्र किया था। बीड़ी कारोबारी परिवार से आए सागर के विधायक शैलैन्द्र जैन कहते हैं कि लंबी उपेक्षा के बाद तमाम बीड़ी कारोबारियों ने दूसरे धंधे शुरु कर दिए हैं और बीड़ी का कारोबार बंद कर दिया है ऐसे में इस कारोबार की पुरानी सूरत कैसै लौटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही मिल श्रमिकों के कल्याण के लिए जो ठोस फैसले लिए थे उन्हें देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिए कि खासतौर पर बुंदेलखंड के बीड़ी श्रमिकों के हित में भी वे बगैर किसी दबाव के फैसले ले सकेंगे। सागर में आयोजित इन्वेस्टर समिट में कम से कम यह एक ठोस फैसला लिए जाने की तो उम्मीद की ही जा सकती है।

  • दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    भोपाल, 25 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर के युवाओं ने गुणवत्ता युक्त दवाओं के निर्माण में नए कीर्तिमान स्थापित करके प्रदेश का नाम रोशन किया है। राज्य में बनाई जा रहीं कई जीवन रक्षक दवाएं वैश्विक बाजारों में साख अर्जित कर रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने फार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए जो उपाय किए हैं उनके नतीजे मिलने शुरु हो गए हैं। जल्दी ही प्रदेश के फार्मेसिस्ट अपनी रचनाधर्मिता से राज्य को औषधि निर्माण,विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर एक विशेष मुलाकात में काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस क्षेत्र की कई बारीकियों की जानकारी दी।


    काउंसिल के अध्यक्ष संजय कुमार जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में फार्मासिस्ट का औषधि निर्माण हॉस्पिटल मेडिकल स्टोर शोध कार्य एवं कई विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान है। काउंसिल अपने मापदंडों के अनुरूप फार्मेसी के क्षेत्र में कार्य कर रही है और भविष्य में भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।इन्हें जल्दी लागू किया जाएगा।


    काउंसिल की सचिब एवं रजिस्ट्रार सुश्री दिव्या पटेल ने कहा कि काउंसिल के माध्यम से फार्मेसी के छात्रों को कम समय में फार्मेसी के रजिस्ट्रेशन प्रदान करने का प्रयास किए जा रहे हैं। काउंसिल के अध्यक्ष एवं सचिव ने विश्व फार्मेसी दिवस पर सभी को अपनी शुभकामनाएं प्रकट की।


    कार्यक्रम का संचालन एवं आभार काउंसिल के ही गोपाल यादव ने किया । उन्होंने बताया कि आए हुए आवेदनों पर सक्रियता से फैसले लिए जा रहे हैं।

  • डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश

    डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश


    भोपाल,23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पचास लाख युवाओं को नौकरी दिलाने का अभियान चला रहे सैडमैप की कार्यकारी निदेशक अनुराधा सिंघई(शर्मा) को इकतरफा आदेश से सस्पेंड करने वाला मामला गहराता जा रहा है। ईडी ने इस अन्याय की शिकायत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से की तो मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता समेत आठ कानूनविद हाईकोर्ट में कैविएट का जवाब लेकर पहुंच गए। हाईकोर्ट ने लताड़ लगाई तो जजों को मैनेज करने के लिए सैडमैप से ही नौ लाख रुपए निकालकर मुकदमेबाजी पर खर्च कर दिए गए। मजेदार बात तो ये है कि इस अवैधानिक कार्रवाई के बारे में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री को भी विश्वास में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के सुशासन की जवाबदारी संभालने वालों को इस मामले में कुछ पता नहीं। सचिव नवनीत कोठारी कहते हैं मैं बता नहीं सकता। जब किसी को कुछ पता नहीं तो आखिर प्रदेश सरकार को चला कौन रहा है।


    जब सैडमैप घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था कर्मचारियों को दस दस महीने क तनख्वाह नहीं मिल रही थी सरकार इसे बंद करने का विचार कर रही थी तब एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई ने अपनी हिकमतअमली से संस्थान को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। आते ही उन्होंने जब संस्थान में जोंक की तरह लिपटे नौकरी माफिया को निकाल बाहर किया तो इन लोगों नेऊटपटांग कहानियां गढ़कर ईडी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवा दी। अदालत और सरकार को गुमराह करके की गई इस शिकायत की पोल हाईकोर्ट में खुल गई और श्रीमती सिंघई को बेदाग बरी कर दिया गया। उसी नौकरी माफिया ने इस बार सरकार के चोर दरवाजे से घुसकर संस्थान के निकाले गए भ्रष्ट अफसरों को दुबारा नौकरी में लाने की मुहिम चला दी है। इकतरफा सस्पेंशन के आदेश के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक जूनियर अधिकारी को यहां बिठा दिया गया उसने न तो विधिवत चार्ज लिया और न ही श्रीमती सिंघई के सस्पेंशन की प्रक्रिया पूरी की गई।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए धड़ाधड़ नौकरियां जनरेट कर रहीं श्रीमती अनुराधा सिंघई को ये कहकर सस्पेंड किया गया कि वे आला अधिकारियों की बात नहीं मानती हैं। जबकि यही माईबाप संस्थान को कभी ठीक से नहीं चला सके । पिछले तीस सालों में संस्थान ने कोई करिश्मा नहीं किया। यहां पदस्थ ईडी और अन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जैसे संस्थानों को छापे मारकर जांच करनी पड़ी। जब प्रदेश की एक हुनरमंद कंपनी सेक्रेटरी ने राज्य की पूंजी बनाने का पारदर्शी अभियान शुरु किया तो नौकरी माफिया ने तरह तरह के षड़यंत्र रचकर युवाओं की राह अवरुद्ध करने की मुहिम छेड़ दी है।


    हाईकोर्ट के पीठासीन जजों ने याचिका के निपटारे के लिए सरकार से जो सवाल जवाब किए उससे महाधिवक्ता समेत तमाम कानूनविद हकला गए। उन्होंने कई तरह के तर्क जुटाकर अदालत में रखे हैं इसके बावजूद वे किसी न्यायाधीश का सामना नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन रोटेशन के आधार पर किसी ऐसे जज का इंतजार किया जा रहा है जिसके माध्यम से शासन की काली करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।


    सवाल तो ये है कि आखिर क्या वजह है कि राज्य सरकार स्वयं युवाओं को रोजगार दिलाने के अभियान में टांग फंसा रही है। सरकार में बैठे वो कौन लोग है जो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने के अभियान में रोड़े अटका रहे हैं। यदि सैडमैप की ईडी कोई गलती कर रहीं थीं या कोई भ्रष्टाचार कर रहीं थीं तो राज्य मंत्रालय में बैठे आईएएस अफसरों में से ही कई अधिकारी उपलब्ध हैं जिनसे जांच करवाकर ईडी की गलतियां उजागर की जा सकतीं थीं। जिस नौकरी माफिया ने लोकायुक्त में शिकायत की उसी की जांच करवाकर ईडी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी। ये न करते हुए शासन के विधि एवं न्याय विभाग ने मुकदमेबाजी पर मोटी फीस खर्च करने का फैसला ले लिया। सूत्र बताते हैं कि अपनी आत्मनिर्भरता की राह खोज रहे सैडमैप के ही फंड से नौ लाख रुपए वकीलों की फीस निकाली गई है।


    इस षड़यंत्र की भी पोल खुल गई है। कथित तौर पर शासन में सक्रिय जिस मंच के माध्यम से ये अभियान चलाया जा रहा है वह नौकरी माफिया का अड्डा बन गया है। सवा तीन लाख करोड़ रुपयों का बजट खर्च करने वाली मोहन यादव की भाजपा को पार्टी फंड के लिए कोई चंदे की जरूरत तो नहीं जो वह दिन को रात करने के लिए वकीलों और जजों की नाव पर डोल रही है।


    गौरतलब है कि प्रदेश के युवाओं में नौकरी की आकांक्षा होते हुए भी सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करा पा रही है। लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों के बजट से दस लाख अनुत्पादक सरकारी अमले को पाला पोसा जा रहा है। इसके विपरीत जब सरकार का ही एक संस्थान सरकारी के साथ कार्पोरेट,कोआपरेटिव, सेक्टर और उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार संवर्धन का पथ प्रशस्त कर रहा हो तो आखिर वो कौन है जो सरकार के इस अभियान में पलीता लगा रहा है। डाक्टर मोहन यादव की सरकार के नुमाईंदों को इसकी पड़ताल करनी होगी ताकि युवाओं को न्याय मिल सके और मोदी सरकार के राष्ट्रीय अनुष्ठान की आहूतियां बेरोकटोक जारी रह सकें।

    भारतीय जनता पार्टी स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन होने का दावा करती है। कहा जाता है कि उसके नेतागण देश को सबसे तेज बढ़ती इकानामी बनाना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई संस्थान उसके ही वोटरों को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाए हुए है तब उसे अस्थिर करने से आखिर किसे लाभ होने वाला है। ये षड़यंत्र भी तब चल रहा है जब सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप स्वयं उद्यमिता को बढ़ावा देने की मुहिम चलाए हुए हैं। वे खुद उद्योगपति हैं और सरकार से कोई वेतन भत्ते नहीं लेते हैं। भाजपा को सोचना होगा कि वह वित्तीय संरचनाओं में देश को आगे ले जाने वाले युवाओं को भर्ती करना चाहते हैं या फिर भेड़िया धसान युवाओं के सहारे शेखचिल्ली ख्वाब देखते रहना चाहेंगे।भारत माता की आराधना सुपुत्रों से होती है माफियागिरी से तो केवल पप्पू पैदा होते हैं।

  • सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    भोपाल, 17 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत 50 जिलों के जिला अस्पतालों में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से मेडिकल स्टोर का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कर कमलो से संपन्न हुआ
    कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया गया।

    इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय राजेंद्र शुक्ल ,नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजय वर्गीय,श्रीमती कृष्णा गौर, विश्वास सारंग,विजय शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद बी डी शर्मा भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गण , सांसद , विधायक गण मध्य प्रदेश शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस अवसर पर भोपाल में जनऔषधि केन्द्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    संजय जैनःमध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी काऊंसिल, जनोपयोगी दवाओं के लिए फार्मासिस्टों का मार्गदर्शन कर रही है।


    मध्य प्रदेश शासन की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव संदीप यादव भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के प्रदेश संयोजक संजय जैन ने बताया कि देश में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बन गया है जहां हर जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना का मेडिकल स्टोर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काऊंसिल ने सभी जन औषधि केन्द्रों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काऊंसिल की पंजीयन प्रणाली में विशेष सुविधा का प्रावधान किया है। आम जनता को सस्ती दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें इसके लिए काऊंसिल की तरफ से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।नए फार्मासिस्टों को उन आवश्यक दवाओं की सूची उपलब्ध कराई जा रही है जिनके माध्यम से जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाएं दिलाकर राहत दिलाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दवाओं की कालाबाजारी और मंहगी दवाओं के मकड़जाल से मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र परियोजना शुरु की थी जिसके संकट में फंसे आम नागरिकों की आंखों में धूल झोंकने वाले दवा माफिया को नियंत्रण में करना सरल हो गया है।


    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागरसिंह चौहान ने आज अलीराजपुर से स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने अलीराजपुर में जन औषधि केन्द्र का शुभारंभ भी किया।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जिले को जन औषधि केन्द्र का वर्चुअल शुभारंभ कर जिले को सौगात दी है। उन्होंने कहा कि औषधि केन्द्र के माध्यम से आम नागरिकों को 2000 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां प्राप्त होगी और 300 से अधिक सर्जिकल उपकरण भी उपलब्ध होंगे जो गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी होंगे, जिनकी कीमत बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होगी।


    मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की अनुपम सोच के कारण आज हर जरूरतमंद को कम कीमतों में दवा उपलब्ध होगी। निश्चित ही आदिवासी अंचलों के साथ- साथ शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी जन औषधि केंद्र का लाभ मिलेगा ।
    इस अवसर पर सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान, कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सुनहरे सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  • हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा  भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    भोपाल,16 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितम्बर से शुरू हो रहे स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन सभी जिला चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह कदम प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्र का शुभारम्भ, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शन सेंटर में सुबह 10 बजे आयोजित होने वाले समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2015 के बाद से इस योजना में और गति आयी। इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ती दवाइयों की पहुंच को व्यापक बनाना था। वर्तमान में इस परियोजना में देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ उठा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 500 से अधिक जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित हैं। ये केंद्र शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जिससे सभी नागरिकों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खरीद रहे हैं। उनके मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत हो रही है। अब सभी ज़िला चिकित्सालयों में भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं।

    सभी को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है। मरीजों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम दाम पर दवाइयां उपलब्ध होंगी।

    ग्रामीण और शहरी परिवारों को सस्ती दवाइयां मिलेंगी। मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी।

    सस्ती और सुलभ दवाओं के माध्यम से लोग अपने उपचार को निरंतर जारी रख सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के माध्यम से जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जिससे लोग ब्रांडेड दवाओं पर निर्भरता कम करेंगे और सस्ती जेनेरिक दवाओं को अपनाएंगे।

    स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। प्रत्येक केंद्र के चालन के लिए फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी आवश्यक होंगे, जिससे राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र राज्य में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन इसी स्थान पर प्रात: 10:30 बजे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में देश के 4 लाख आवासों का गृह प्रवेश कार्यक्रम होगा। इनमें मध्यप्रदेश के 51 हजार आवासों में गृह प्रवेश होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2-0 का शुभारंभ तथा पीएम स्वनिधि अंतर्गत पीआरएआईएसई अवार्ड वितरित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास श्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि होंगे। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी अध्यक्षता करेंगी। भोपाल नगर पालिग निगम की महापौर श्रीमती मालती राय, नगर पालिग निगम भोपाल के परिषद अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

  • सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया

    सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया


    भोपाल,10 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).देश में उद्यमिता को जनांदोलन बनाने में जुटे उद्यमिता विकास केन्द्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में एक बार फिर नौकरी माफिया ने घुसपैठ का प्रयास किया है।इस बार सरकारी तंत्र में सेंध लगाने के लिए सरकार में दखल रखने वाले एक संगठन की आड़ ली गई है।सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप को अंधेरे में रखकर रचा गया ये षड़यंत्र कामयाब भी हो सकता था लेकिन जिस तरह इस प्रयास की परतें खुल रहीं हैं उससे सरकार की बदनामी का एक नया शिलालेख तैयार होने लगा है।


    इस षडयंत्र का सूत्रधार कथित तौर पर रमन सिंह अरोरा नामक नौकरी माफिया बताया जा रहा है।ये व्यक्ति कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह के बेटे अजय सिंह के केरवा डैम स्थित रिसार्ट टचवुड का व्यवस्थापक भी बताया जाता है। इसने खुद की फर्म रतन एम्पोरियम बना रखी है जो सरकारी प्रतिष्ठानों में सिक्योरिटी गार्ड सप्लाई करने का ठेका लेती है। उसकी ये फर्म कथित तौर पर सरकारी दफ्तरों में फाईलें चोरी करवाने और अफसरों को रिश्वत देकर सरकारी धन को साईफन करवाने में जुटी रहती है।इसी वजह से कई सरकारी संस्थानों ने रीढ वाले अफसरों ने इसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। खुद को उद्योगपति दर्शाने के लिए इसने कुछ समय पहले एक राष्ट्रीय अखबार से खुद को सम्मानित कराया था तभी से ये अफसरों और नेताओं पर दबाव बनाकर ठेके कबाड़ने की जुगाड़ कर रहा है।बताते हैं कि इसने अपने कई चमचों को प्रदेश के प्रमुख अखबारों में पे रोल पर नोकरी दिलवाई है जिनके माध्यम से ये सरकार को धमकाने के लिए उलटी सीधी खबरें प्लांट करवाता रहता है।


    जब इसकी फर्म को फर्जी बिलिंग और सुरक्षा गार्डों के वेतन में चिल्लरचोरी के आरोप में धरा गया तो इसने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक आला अधिकारी को बदनाम करने के लिए एक महिला अधिकारी से अश्लील चैट बनाकर वायरल किया था। इसकी पुलिस जांच हुई तो इसके कर्मचारी ने स्वीकार किया कि रमनवीर अरोरा ने ही उससे ये फर्जी चैट लिखवाया था।इस मामले में पुलिस जांच में सारे तथ्य उजागर हो गए हैं और संभावित जेल यात्रा से ये बुरी तरह बौखलाया हुआ है। इस षड़यंत्र के सूत्र विपक्ष के नेताओं से भी जुड़ रहे हैं इसलिए खुद को बचाने और सरकार को बदनाम करने के लिए इसने पूरा जाल बिछाया है।


    रमनवीर की रतन एम्परियम समेत जिन फर्मों और व्यक्तियों को एमएसएमई विभाग की निगरानी में चलने वाले सैडमैप संस्थान ने ब्लैकलिस्ट किया था उन्होंने इस बार सरकार को झांसा देने के लिए एक सांस्कृतिक संगठन से कथित तौर पर जुड़े हुए मंच की आड़ ली है।इस कहानी की पोल तब खुली जब एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने अचानक एक आदेश निकाला जिसमें सैडमैप की ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई(शर्मा) से लगभग सवा लाख पृष्ठों की जानकारी दो दिनों में देने का उल्लेख किया गया था। वे जवाब दे पातीं इसके पहले सचिव ने अनुराधा सिंघई को निलंबन का आदेश थमा दिया। एमएसएमई विभाग के एक जूनियर अधिकारी को आनन फानन में कार्यभार भी दिला दिया गया। इस अधिकारी ने सैडमैप पहुंचकर ईडी से कार्यभार छीन लिया और निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद करवा दिए। इस बदलाव को लोकप्रिय फैसला दर्शाने के लिए पर्दे के पीछे से सक्रिय रमनवीर और इसके गेंग में शामिल षड़यंत्रकारियों ने कर्मचारियों के बीच मिठाई बंटवाई और फटाके फोड़े। हालांकि इस असंवैधानिक कदम को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है और केविएट लगाने पहुंचे सरकारी कानूनविदों को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब सैडमैप ने सारी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की है और अपने पिछले फैसले में हाईकोर्ट तमाम आरोपों की जांच करके ईडी को क्लीनचिट दे चुका है तब इस आपराधिक षड़यंत्र को छुपाने के लिए सरकार क्यों हाईकोर्ट पहुंच गई।


    गौरतलब है कि सैडमैप की ईडी अनुराधा सिंघई एक कुशल कंपनी सेक्रेटरी हैं और उन्होंने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए अपने विभाग की मंशा अनुरूप पचास लाख रोजगार सृजित करने की मुहिम चला रखी है। उन्होंने इतने कम समय में CEDMAP जैसे संगठन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।उनके नेतृत्व में सैडमैप ने आधुनिक प्रबंधन के पारदर्शी तरीकों को अपनाकर वो कर दिखाया है जो पिछले तैतीस सालों के इतिहास में कभी नहीं हो सका था। उसी स्टाफ और वही अधिकारियों को साथ लेकर उन्होंने निजी क्षेत्र को रोजगार विस्तार के लिए आगे लाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है।इस कार्य में उनका कंपनी प्रबंधक और कानूनी सलाहकार होने का सुदीर्घ अनुभव काम आ रहा है। मेक इन इंडिया अभियान हो या स्टार्टअप के माध्यम से देश की पूंजी और रोजगार के अवसर बढ़ाने का तरीका सिखाकर वे उद्यमियों को सफल बनाने में कारगर साबित हो रहीं हैं।उनके प्रयासों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अपने ही स्वशासी निकाय सैडमैप को भंडार क्रय नियम के अंतर्गत सरकारी विभागों और उपक्रमों के लिए अनुबंध आधारित सेवा कर्मी उपलब्ध कराने को अधिकृत कर दिया है।


    जब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी तो फर्जी बिलिंग और ठगी में धरे गए इस नौकरी माफिया ने आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपनी जांच के बाद आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जब सैडमैप लगभग बंद होने की कगार पर था और कर्मचारियों को लगभग दस दस महीनों से वेतन नहीं दे पा रहा था तब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी। इस संगठन को सरकार के बजट में से वेतन और प्रशासनिक खर्च नहीं दिया जाता है। ऐसे में उन्हें एक महीने का वेतन पाने के लिए, पहले पिछले 10 महीनों के लिए सभी कर्मचारियों के लिए राजस्व अर्जित करना था।श्रीमती सिंघई ने कुशल प्रबंधन की तकनीकें अपनाकर नियुक्ति के बाद अगस्त 2021 से ही पूरे स्टाफ को नियमित वेतन दिलवाना शुरु कर दिया। जब तक कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं हो गया तब तक उन्होंने खुद का वेतन भी नहीं लिया। लगभग चार महीनों बाद उन्होंने खुद का वेतन लेना शुरु किया।


    इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (IECCI) और कंपनी सेक्रेटरी प्रैक्टिस में सुश्री अनुराधा सिंघई के 21 वर्षों से अधिक का अनुभव रहा है। ये संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और वे खुद संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष सलाहकार रहीं हैं। उन्हें डब्ल्यूटीओ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में शामिल होने का अवसर भी मिला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की ओर से बनाए गए भ्रष्टाचार विरोधी समीक्षा तंत्र के साथ विभिन्न मंचों पर विदेश में 4 बार भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। कुआलालंपुर, मलेशिया में ड्रग एंड क्राइम (यूएनओडीसी) और आयात संवर्धन केंद्र, हेग, नीदरलैंड। जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में काम कर चुकी इस कंपनी सेक्रेटरी ने न केवल सैडमैप बल्कि प्रदेश के उद्योग जगत में भी सरकार के भरोसे को जीवित करने में योगदान दिया है।


    फिलहाल तो सरकारी जांच एजेंसियां अब ये जानने का प्रयास कर रहीं हैं कि सैडमैप को चूना लगाकर खुद का घर भरने वाले षड़यंत्रकारी आर डी मंडावकर, शरद मिश्रा, दिनेश खरे, मनोज सक्सैना, आर के मिश्रा, प्रमोद श्रीवास्तव की संपत्ति उनकी आय से कई गुना अधिक कैसे हो गई । आरोप लगाया गया कि अनुराधा सिंघई ने कई पदों पर जैन लोगों को नियुक्त कर दिया है।श्रीमती सिंघई खुद जन्मजात ब्राह्रण हैं और वे अपनी टीम में केवल ईमानदार और योग्य लोगों का ही चयन करने पर जोर देती हैं। जब सभी आरोप फर्जी और ओछे साबित हुए और अदालती जांच में ये साबित हो गया कि वे एक कुशल प्रबंधन विशेषज्ञ हैं तो उन्हें पद से हटाने के लिए इस बार नया षड़यंत्र रचा गया है।


    अनुराधा सिंघई एक परिणाम प्रेरित कुशल शख्सियत हैं । उन्होंने भ्रष्टाचारियों के गिरोह में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।भ्रष्टाचार के सभी रास्ते जब बंद कर दिए तो CEDMAP के कुछ अत्यधिक भ्रष्ट कर्मचारी उन्हें पद से हटाने में घटिया स्तर के नए षड़यंत्र रचने लगे। अब, जब CEDMAP अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, तो भ्रष्ट लोगों के इस समूह को काली कमाई का भारी स्कोप नजर आने लग गया है। उन्हें लगता है कि CEDMAP उनकी निजी दुकान है।

    अनुराधा सिंघई ने अपनी कुशल टीम के माध्यम से CEDMAP के इन भ्रष्ट कर्मचारियों के कई घोटालों और उनकी कार्यप्रणाली को बार बार उजागर किया है। घोटालों का खुलासा होने पर बाकायदा निदेशक मंडल की मंजूरी से इन काली भेड़ों की परियोजनाओं का विशेष फोरेंसिक ऑडिट कराया गया, जिसमें करोड़ों रुपये का घोटाला और गबन पाया गया। ये सभी कार्रवाई पूरे पारदर्शी तरीके से कराई गई जिसके मिनिट्स अब सभी जांच एजेंसियों और अदालत के सामने चीख चीखकर सत्ता माफिया की काली करतूतों की पोल खोल रहे हैं।

    कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कर्मचारियों की हेराफेरी के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए थे, कुछ कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त भी किया गया।सभी भ्रष्टाचारों पर रोक लगायी गई,कर्मचारियों को अपने वेतन के बदले अपना दायित्व पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया गया। इससे नौकरी माफिया को रिश्वत देकर भर्ती हुए मक्कार कर्मचारियों ने कपोल कल्पित बातें करनी शुरु कर दीं।कुछ भ्रष्ट मीडिया कर्मियों को मिलाकर बदनामी का बवंडर खड़ा किया गया जो बार बार जांच की कसौटियों पर औंधे मुंह गिरता रहा है।


    सभी सरकारी एजेंसियों ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त और फिर हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए,आरोप लगाए गए। जांच में वे निर्दोष और बेदाग पाई गईं। हाईकोर्ट ने 2022 और 2024 में ही नियुक्ति में अनियमितता को लेकर उनकी याचिका खारिज कर दी है। झूठी खबरें छाप चुके मीडिया संस्थानों की जब भद पिटी तो वे चुपके से दाएं बाएं होने लगे हैं। एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने जिस अधिकारी को कार्यभार संभालने भेजा है उसने जाते ही वहां से निकाले गए आरडी मांडवकर एवं अन्य अधिकारियों की फाईल निकलवाईं हैं बताया जाता है कि वे संस्थान से निकाले गए भ्रष्ट अधिकारियों को दुबारा नौकरी पर रखवाने का प्रयास कर रहे हैं।


    गौरतलब है कि सैडमैप उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर उनका परिचय औद्योगिक संस्थानों से करवाता है। इस प्रक्रिया में जिन कर्मचारियों को नौकरी पर रखा जाता है उसका एक तयशुदा कमीशन सैडमैप को मिलता है। इस राशि से ही संस्थान के कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन दिया जाता है। अनुराधा सिंघई ने आते ही कर्मचारियों से किसी भी प्रकार का कमीशन लिया जाना निषिद्ध कर दिया था जिसकी वजह से औद्योगिक संस्थानों को अच्छे और प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने की राह प्रशस्त हो गई थी।अब सरकारी नौकरियों में भी गुणवत्ता पूर्ण वर्कफोर्स आसानी से उपलब्ध होने लगा है। कंपनियों ने अपने एचआर डिपार्टमेंट में सैडमैप को सहयोगी बनाकर उससे अपने संस्थानों के अन्य कार्य भी करवाने शुरु कर दिए हैं। जिसकी वजह से संस्थान की आय बढ़ी है। ऐसे में कमीशनखोर नियुक्ति माफिया को लगने लगा है कि वह यहां अब अच्छी कमाई कर सकता है। केन्द्र और प्रदेश की सरकार जब युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में हैरान परेशान घूम रही है तब सैडमैप उनके लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।ऐसे में यदि नौकरी लगवाने के कार्य में रिश्वतखोरी की परंपरा फिर शुरु कर दी जाएगी तो ये सरकार की बदनामी का कारण तो बनेगी ही साथ में रोजगार दिलाने के सरकारी संकल्प पर भी कुठाराघात करेगी। नौकरी माफिया के माध्यम से विपक्ष तो सरकार गिराने के इस षड़यंत्र में खुलकर सामने खड़ा है,लेकिन एमएसएमई विभाग और सरकार दोनों कई महत्वपूर्ण मंचों पर अपनी जग हंसाई किस मजबूरी के तहत करवा रहे हैं, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।

  • एमपी की नौकरशाही को वसूली के नतीजों की चिंता नहीं

    एमपी की नौकरशाही को वसूली के नतीजों की चिंता नहीं


    -आलोक सिंघई-
    डाक्टर मोहन यादव की भाजपा सरकार सरकारी तंत्र के मकड़जाल में बुरी तरह उलझ गई है। नीति आयोग ने आय बढ़ाने के जो निर्देश दिए हैं उनसे सरकारी मशीनरी अपना रिकार्ड तो अपडेट कर रही है लेकिन आम जनता की आय बढ़ाने में ये कवायद बुरी तरह असफल साबित हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो कर्ज लेकर खूब खैरात बांटी और भरपूर लोकप्रियता बटोरी। खुद प्रधानमंत्री को कहना पड़ा था कि वे मध्यप्रदेश के अतिलोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं। अब ये शोर तो शांत हो गया है लेकिन सुशासन की जिद ने राज्य के उद्यमियों की बैचेनी बढ़ा दी है।बजट में अस्सी हजार करोड़ रुपए का स्थापना व्यय देकर मोहन यादव समझ रहे हैं कि इतना मंहगा प्रशासन राज्य के विकास में चार चांद लगा देगा ।हकीकत ये है कि बोगस अफसर और नाकारा सरकारी तंत्र प्रदेश के विकास की राह में बेड़ियां बन गया है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार लगभग दो दशकों से कर्ज लेकर आधारभूत ढांचे के विकास का जो शोर मचा रही थी उसे अब मोहन यादव की सरकार केवल आंकड़ों में बदल रही है।पिछले लगभग दस महीनों से डाक्टर मोहन यादव सुशासन पर जोर दे रहे हैं। वे इस सुशासन का ख्वाब उस सरकारी तंत्र के माध्यम से साकार करने का प्रयास कर रहे हैं जो प्रदेश के खोखले विकास का जनक ही साबित हुआ है।
    सरकार ने उत्पादकता के जिन पैमानों पर काम शुरु किया है उनमें सबसे बड़ा राजस्व महा अभियान खोखली कवायद साबित हो रहा है। नए साफ्टवेयर के माध्यम से पटवारियों और वित्तीय प्रबंधन को जिस तरह से कसा गया है उससे सरकारी तंत्र में आक्रोश और उदासीनता बढ़ी है नतीजा सिफर रहा है। भूमिसुधार के साथ राजस्व महाअभियान 2 के नतीजे सामने आने लगे हैं। जनता से कहा गया था कि वह आनलाईन माध्यम से और तहसील स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। लोग सरकारी अमले के पास पहुंचे भी ।उन्होंने सरकारी अमले की सेवा में कोर्निशें भी बजाईं पर परिणाम केवल शिकायत के कागज पर खात्मे तक ही पहुंच पाया। सरकारी अमले का प्रयास रहा कि फिलहाल शिकायत बंद हो जाए और हम सरकार को अपनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की सूचना दे दें। ये प्रक्रिया भी आनलाईन ही थी इसलिए जवाब पुख्ता तरीके से दिया जा रहा है। ये कुछ वैसे विकास का नमूना है जिसके बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले की प्राचीर से और विदेशों में किए जाने वाले आयोजनों में दहाड़कर सुनाते हैं। देश के आंकड़ें बताते हैं कि जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट पिछली 5 तिमाही में सबसे कम रही है। अप्रैल-जून 2024 तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.7% दर्ज की गई है। ये तयशुदा लक्ष्य से कम है।
    मुख्य मंत्री अपील कर रहे हैं कि आप अपनी कृषि भूमियां बेचें नहीं क्योंकि सरकार की नीतियों से जल्दी ही खेतों पर पैसा बरसेगा। बेशक खेती पर मुनाफा बरसने की तमाम संभावनाएं खुली पड़ीं हैं। रूस यूक्रेन युद्ध हो या इस्राईल फिलिस्तीन संग्राम, समूचे विश्व में तीसरे विश्व युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में भारत की जमीन विश्व की भूख शांत करने में उपयोगी साबित हो सकती है। इसके बावजूद सरकार इस अवसर को भुनाने लायक तंत्र विकसित नहीं कर पा रही है। तीन कृषि कानून देश की आर्थिक समृद्धि में सहायक साबित होने वाले थे। किसान की भी तकदीर बदल सकते थे। सरकार भले ही उन्हें देश भर में लागू न कर पाई हो लेकिन भाजपा शासित राज्यों पर तो कोई बंधन नहीं है कि वे अपनी कृषि का ढांचा इस तरह विकसित करें कि वे कृषि सुधारों के माडल बन जाएं। इसके विपरीत संघ के नाम पर भू माफिया जमीनों के दस्तावेजों का हेर फेर करने में जुटा हुआ है।
    फिलहाल जो आंकड़े हैं वे सरकारों के दावे की असलियत उजागर कर रहे हैं। MoSPI डेटा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर धीमी होकर 6.7% हो गई है। भारत के सबसे अहम सेक्टर माने जाने वाला एग्रीकल्चर और माइनिंग सेक्टर में बड़ी गिरावट देखी गई है. एग्रीकल्चर सेक्टर में ग्रोथ घटकर दो फीसदी हो गई है जबकि पिछले वर्ष ये 3.7 प्रतिशत थी। ये बताता है कि जब दुनिया को खाद्यान्न की सबसे अधिक जरूरत है तब भारत का कृषि ढांचा बाजार की मांग का उपयोग नहीं कर पा रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। एमपी में तो सरकारी खरीद घटती जा रही है और आढ़तियों के चंगुल में फंसा किसान हर चौराहे पर छला जा रहा है। आम आदमी की खरीद क्षमता घटने से बाजार की रौनक भी उड़ गई है। संगठित रोजगार के क्षेत्र तो प्रसन्न हैं पर असंगठित क्षेत्र के लिए चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
    सरकारी तंत्र सोच रहा है कि लाड़ली बहना,किसान सम्मान निधि और अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं से उनका पेट काटा जा रहा है जबकि हकीकत ये है कि उद्योगों को बल देने के लिए बढ़ाए गए सरकारी तंत्र का स्थापना व्यय आम नागरिकों का कचूमर निकाल रहा है। अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए सरकारी तंत्र ने जो सख्ती अपनाई है उससे भी जनता के बीच आक्रोश गहराता जा रहा है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने जिस आक्रामक शैली में आंदोलन किए उनसे भी उजागर हो रहा है कि विपक्षियों को सरकार और जनता के बीच जमी मिठाई की सड़ांध महसूस हो रही है।इसके बावजूद संगठन के दंभ में डूबे भाजपा के नेतागण और सरकार अपने पैरों तले खिसकती जमीन की हकीकत से बेखबर है। तख्त और ताज का गुमान शासकों को एक सुनहरे संसार की सैर कराता है। मुख्यमत्री डॉक्टर मोहन यादव तो राजा विक्रमादित्य के सुशासन की सौंधी महक में पले बढ़े हैं।उम्मीद है कि उन्हें राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की बत्तीस पुतलियों की गवाही अच्छे से याद होगी।

    (द सूत्र में प्रकाशित आलेख के संपादित अंश)

    https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/garbhakaal-cm-mohan-yadav-alok-singhai-thesootr-bhopal-7051775

  • इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष

    इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष


    भोपाल,05 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).इक्विटास बैंक ने आधुनिक बैंकिंग में जो सुधार लागू किए हैं वे देश के संपदा निर्माताओं को बहुत पसंद आ रहे हैं। बैंक की वर्षगांठ पर पहुंचे नागरिकों उद्यमियों और श्रेष्ठी वर्ग ने इक्विटास बैंक को जन जन का बैंक बनने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बैंक के ऊर्जावान कर्मचारियों ने निवेशकों की जरूरतों पर खरा उतरने के लिए जो रुचि दिखाई है उससे आने वाले समय में ये बैंक प्रदेश भर में ग्राहकों की पहली पसंद बन जाएगा।


    इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर राजधानी की एमपीनगर शाखा में प्रबंधन ने जीवंत आयोजन किया था जो लगभग दिन भर चला। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने सभी ग्राहकों,उद्यमियों और निवेशकों को बैंक की प्रगति के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अपनी आनलाईन सेवाओं के माधयम से देश की संपदा बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। देश के अठारह राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में हमारी 964 शाखाएं हैं जिनमें 57 लाख 22 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।


    भोपाल शाखा के प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हम अपनी ग्राहक हितैषी बैंकिंग के माध्यम से आम नागरिकों का दिल जीत रहे हैं। ग्राहकों की छोटी छोटी सुविधाओं को हम तत्काल समाधान देकर उनका उचित मार्गदर्शन भी करते हैं। ग्राहकों के बताए अनुसार हम अपनी सेवाओं में लगातार सुधार और विस्तार भी कर रहे हैं। हमारा प्रबंधन हर निवेश की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखता है जिसकी वजह से हम देश के बैंकिंग मानकों पर लगातार खरे उतर रहे हैं।

    बैंक के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं की वजह से ग्राहक सेवा सफल हो रही है.


    राजधानी के गणमान्य नागरिकों और श्रेष्ठि वर्ग ने बैंक पहुंचकर वर्षगांठ के आयोजन में हिस्सा लिया। दीप प्रज्जवलन के बाद केक काटा गया और सभी ने इक्विटास बैंक की सफलताओं की कहानियां सुनाईं। श्री मनोहर लाल टोंग्या ने कहा कि बैंक के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार और बैंक की सरल योजनाओं की वजह से हमें ज्यादा मुनाफा हो रहा है। बैंक में अनावश्यक नियमों का बोझ नहीं है। वरिष्ठ जनों को तो घर पहुंच सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्यादातर काम बैंक के एप से निपट जाते हैं इसलिए हमें बार बार शाखा जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।


    कार्यक्रम में पहुंचे श्री महावीर मेडीकल कालेज के प्रशासक आईएएस राजेश जैन ने कहा कि बैंक के नीति निर्धारकों ने उद्यमियों की सुविधा के लिए जो आधुनिक बैंकिंग दी है उससे संपदा निर्माण में मदद मिल रही है। श्री देवेन्द्र जैन ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को मुनाफे का हिस्सेदार बना रहा है और इसके साथ साथ समाज कल्याण की भी योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। आयोजन में पहुंचे श्री कमलेश सेन, श्रीमती प्रीति टोंग्या, श्री डी.आर.सोनी श्री सुरेश चंद्र प्रमोद सिन्हा, श्री देवेन्द्र जैन, श्री महेश सिंघल, सुरेश जैन आईएएस, श्री त्रिलोक जाजू, श्री प्रवीण कुमार सक्सेना, सीए मयंक अग्रवाल के अलावा बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिकों ने बैंक पहुंचकर अपना स्नेह प्रदर्शित किया।


    क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने अपने स्टाफ के साथ ग्राहकों के प्रति आभार प्रकट किया और उन्हें कहा कि आपके बताए सुझावों पर अमल करके बैंक ग्राहकों को अपने मुनाफे में भागीदार बनाता रहेगा। इस अवसर पर सागर मल्टिसिटी हास्पिटल के सौजन्य से हेल्थ चैकअप शिविर भी आयोजित किया गया। जिसमें नागरिकों के रक्तचाप और डायबिटीज की मुफ्त जांच की गई।

  • बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी

    बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी


    भोपाल,2 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारी बारिश ने राजधानी की सड़कें क्षतिग्रस्त कर दी हैं पोल खुलने के डर से इंजीनियरों और ठेकेदारों ने मरम्मत का कार्य भी शुरु कर दिया है। कई स्थानों पर भारी बारिश के बीच डामर की सड़कें बनाए जाने का कार्य भी चल रहा है जबकि सड़के उखड़ने की वजह ही बारिश का पानी रहा है।


    ऐसा ही एक दृश्य बिट्टन मार्केट के नजदीक वंदेमातरम चौराहे पर देखा जा सकता है। सड़कों की मरम्मत करने वाली रिकांडो कंपनी ने भारी बारिश से लबालब सड़कों पर भी डामर की मरम्मत जारी रखी है। डामर पानी में पकड़ता ही नहीं इसके बावजूद ठेकेदार धड़ल्ले से अपना काम जारी रखे हुए है।


    सोमवार दो सितंबर को पानी भरी सड़क पर रिकांडो कंपनी के कर्मचारियों ने सड़क पर डामर गिट्टी डालने का कार्य जारी रखा है। जब मौके पर मौजूद रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर आरएस राजपूत से पूछा गया कि वे बारिश में ये कार्य क्यों कर रहे हैं। उसने जबाब दिया कि हमने जब माल तैयार कर लिया है तो क्या हम उसे वापस ले जाएंगे। पीडब्यूडी तो हमेशा से बारिश के बाद ही सड़कों की मरम्मत शुरु करता है। सीमेंट की सड़कें जरूर इस सीजन में बनाई जा सकती हैं।


    लोक निर्माण विभाग के स्थानीय अफसरों ने तो इस मसले पर बात करने से ही इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जनता की सुविधा के लिए सड़कों की मरम्मत करना हमारी मजबूरी है।इसके लिए हम बारिश खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते।उनसे पूछा गया कि खराब निर्माण की वजह से सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस पर विभाग के तमाम अफसरों ने चुप्पी साध ली है।
    गौरतलब है कि राजधानी में डामरीकरण की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इससे सड़कें ऊंची हो रहीं हैं और मकानों में पानी भरने की शिकायत आ रही है। इसके विपरीत सरकारी अमला ऐसी ही सड़कें बनाता है जो बार बार टूटें और उनके रखरखाव का कार्य बार बार दिया जाता रहे।

    रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर पीएस राजपूत ने बताया कि हम केवल आदेश का पालन कर रहे हैं,