Month: August 2024

  • संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत

    संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत


    देश और दुनिया के दूर दराज के देशों में भी आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जबसे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आव्हान किया उसके बाद से तो गली गली और गांव गांव में जन्माष्टमी का माहौल सुरम्य बन चला है। हमेशा की तरह इस बार भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेश भर में बारिश के छींटे पड़ रहे हैं। कई इलाकों में तो इतना अधिक पानी गिर रहा है कि मानों भगवान स्वयं नंदलाला के जन्म से आल्हादित हैं। ऐसे में कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के आव्हान से असहमति जताते हुए बेसुरा राग अलापना शुरु कर दिया है। उन नेताओं का कहना है कि जन्माष्टमी जनता मनाए, धार्मिक संगठन मनाएं तो ठीक है लेकिन सरकार क्यों आव्हान कर रही है। दरअसल ये सभी वे आवाजें हैं जो विदेशी धर्मों की गोद में फलती फूलती रहीं हैं। आयातित सोच में रंगे इन नेताओं ने हमेशा सनातन को निशाना बनाया है। विदेशी सोच की नकल करने वाले ये नादान कहते हैं कि देश को आगे बढ़ना है तो किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन लोगों को ये नहीं मालूम कि समूची वसुधा को अपना कुटुंब मानने वाला सनातन किसी भी खंडशः सोच से मीलों आगे सोचता है। आक्रांता बनकर भारत में आए जो विदेशी सोच कभी भी भारत के अस्तित्व को कुचल नहीं पाए वे आज संविधान की दुहाई देकर कह रहे हैं कि कृष्ण जनमाष्टमी मनाने से अन्य धर्मों को असमानता भरे माहौल का सामना करना पड़ेगा। ऐसे बयान देने वालों को श्रीमद भगवत गीता के उपदेशों की जानकारी मिल सके इसीलिए तो जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से मनाया जा रहा है। जब युद्ध की तलवारें खिंची हुई हों तब कर्म का उपदेश देने वाले देवकीनंदन के मंत्र और भी ज्यादा सार्थक हो जाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यही ज्ञान देने के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्धभूमि तक गए थे। हठी जेलेंस्की यदि इस भाषा को समझ जाते तो यूक्रेन एक बार फिर खुशहाल देश बन सकता था। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने तो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए युद्ध रोक दिया। रूस भी चाहता है कि शांति का कोई मार्ग निकले। ये संभव इसलिए नहीं हो सका कि किसी ने यूक्रेन या अमेरिका को पहले कभी गीता के उपदेश नहीं सुनाए। युद्ध भूमि की हुंकार के बीच उन उपदेशों को समझने का सामर्थ्य आम योद्धा में नहीं होता। यदि श्रीकृष्ण दुर्योधन से कहते कि अनीति और अधर्म की राह पर चलोगे तो कर्म फल तुम्हें छोड़ेगा नहीं ऐसे में तुम्हारा नाश हो जाएगा,तो वो नहीं मानता। । कुछ ऐसी ही चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का दर्शन युद्धभूमि तक पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया। कमोबेश यही प्रयास मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं। जब विदेशी घुसपैठियों, आक्रांताओं और षड़यंत्रों के साथ कांग्रेस की पारिवारिक परंपरा के अध्यक्ष राहुल गांधी देश में जातिगत जनगणना का वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तब उन्हें गीता के उपदेश अवश्य पढ़ने चाहिए। मध्यप्रदेश की धरती से गीता का कर्म सिद्धांत पूरे विश्व को एक बार फिर सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह कर रहा है। चाहे असददुद्दीन औवेसी हों या फिर कांग्रेस के चंपू टाईप नेता उन सभी को समझना होगा कि भारत का संविधान लागू हुए तो मात्र 74 वर्ष हुए हैं। ये देश तो हजारों सालों से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री राम के बनाए आदर्शों पर चल रहा है। तबसे यहां कभी किसी अन्य धर्म या विचार को पद दलित करने का विचार नहीं फैला। चंद लुटेरों ने भले ही भारत की अस्मिता को कुचलने का प्रयास किया हो पर भारत आज भी अविचल और अडिग है। स्थिर है और संपूर्ण है। कितने ही आक्रांता आए और आकर चले गए। हम अपने शाश्वत सिद्धांतों पर लगातार चलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी तो यही समझाने का प्रयास कर रही है कि केवल और केवल सत्य के मार्ग पर चलिए। अन्य विचारों से गुमराह होकर सत्कर्म के मार्ग से विमुख होंगे तो फिर दंड भी आपको ही भोगना पड़ेगा। भारत अभी घोषित युद्ध के दौर में नहीं पहुंचा है इसलिए शायद नंदलाला के जीवनदर्शन की ये पुकार भटके हुए नौजवानों और नागरिकों का पुण्य मार्ग प्रशस्त करेगी।

  • क्राईम सीन को कागज पर उकेरते नितिन महादेव

    क्राईम सीन को कागज पर उकेरते नितिन महादेव

    मुंबई 23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ) शक्ति मिल्‍स गैंगरेप से लेकर जर्मनी बेकरी ब्‍लास्‍ट, कसाब और दाभोलकर मर्डर केस तक के अपराधियों को अपने स्‍केच के जरिए जेल की सलाखों तक पहुँचाने वाले नितिन महादेव यादव आज अपराध जगत की अबूझ पहेली बन गए हैं।उन्हें लोग प्यार से “आधा पुलिसवाला” भी कहते हैं। कई लोग इन्हें ‘यादव साहब’ कह कर भी बुलाते है।

    नितिन मात्र 5वीं कक्षा के छात्र थे जब उन्होंने कागज़ को बीस रुपये के नोट के आकार में काटा और अपने पेंट ब्रश की मदद से हूबहू असली नोट जैसा पेंट कर दिया। उस नोट को लेकर नितिन एक होटल में गये और काउंटर पर वह नोट पकड़ा दिया। नोट इतना हूबहू पेंट हुआ था कि सामने खड़े व्यक्ति ने उसे असली नोट समझ कर रख लिया।जब नितिन ने बताया के वह नोट नकली है तो सभी लोग पाँचवीं कक्षा के इस छात्र की प्रतिभा का लोहा मान गये।

    एक रोज़ नितिन मुम्बई के ही एक पुलिस स्टेशन में नेमप्लेट पेंट कर रहे थे।थाने में एक मर्डर केस आया, मर्डर का गवाह होटल में काम करने वाला एक वेटर था। पुलिस उससे मर्डर करने वाले व्यक्ति का हुलिया पूछ रही थी और वेटर समझा नहीं पा रहा था।नितिन थानेदार के पास गये और उनसे कहा कि अगर वह वेटर को केवल आधा घंटा उसके साथ बैठने दें तो वह मर्डर करने वाले व्यक्ति का हूबहू स्केच तैयार कर सकता है। पहले थानेदार ने नितिन की बात को मज़ाक में लिया पर नितिन के बार बार आग्रह पर थानेदार मान गया।उसके बाद जो हुआ वह चमत्कार था।

    वेटर से मर्डर करने वाले का हुलिया पूछने के बाद नितिन ने थानेदार के हाथ में एक स्केच पकड़ाया। वह चेहरा हूबहू मर्डर करने वाले व्यक्ति से मिलता था।स्केच की मदद से 48 घंटे के अंदर वह आरोपी पकड़ा गया। सारा पुलिस महकमा अब नितिन का मुरीद बन चुका था।

    कुछ समय के पश्चात एक लड़की से बलात्कार हुआ जो मूक बधिर थी। ना बोल सकती थी, ना सुन सकती थी। नितिन को तत्कालीन डीएसपी ने याद किया और बच्ची से मिलवाया। नितिन बलात्कारी का चेहरा बच्ची की आँखों में देख चुके थे। नितिन ने एक एक कर के कई स्केच बनाये। कई तरह की आँखें, कई तरह का चेहरा। कई तरह के नैन-नक्श। एक एक कर इशारे के ज़रिये बच्ची बताती गयी की बलात्कारी कैसा दिखता है।आठ घँटे की अथक मेहनत के बाद नितिन मनोहर यादव ने डीएसपी के हाथ में बलात्कारी का स्केच थमा दिया।स्केच की मदद से अगले 72 घण्टे में बलात्कारी को पकड़ा गया।

    नितिन अब मुम्बई पुलिस के लिये संजीवनी बूटी बन चुके थे। हर एक केस में नितिन के स्केच ऐसी जान फूँक देते के पुलिस उसे आसानी से सुलझा लेती।बीते 30 वर्ष के अंतराल में यादव पुलिस के लिये करीबन 4000 से अधिक स्केच बना चुके हैं।उल्लेखनीय है के केवल यादव की बनायी हुई तस्वीर की बदौलत मुम्बई पुलिस 450 से अधिक खूँखार अपराधी को गिरफ्तार कर चुकी है।

    अब वह विषय, जिसके लिये यह पूरा लेख लिखा गया है….

    30 साल में किसी भी स्केच या तस्वीर के लिये नितिन ने पुलिस या किसी भी अन्य व्यक्ति से “एक नया पैसा” भी नहीं लिया है।बार-बार पुलिस महकमे के बड़े से बड़े अफसर ने नितिन को ईनामस्वरूप धनराशि देने का प्रयास किया पर नितिन ने एक रुपया भी लेने से इनकार कर दिया।”नितिन मनोहर यादव” चेम्बूर एजूकेशन सोसाइटी के एक स्कूल में शिक्षक रहे।जो तनख्वाह आती उसी से गुज़र बसर करते रहे।

    वह कहते हैं कि स्केच बना कर वह एक तरह से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों की पहचान होती है तो वह सलाखों के पीछे जाते हैं।नितिन 30 साल तक अपना काम राष्ट्र सेवा के भाव से करते रहे और आज भी एक बुलावे पर सब कामकाज छोड़ कर हाज़िर हो जाते हैं।30 साल की इस सेवा में नितिन को करीबन 164 प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है।

    नितिन बड़े फक्र से सम्मानपत्र और ट्रॉफी दिखाते हुये कहते हैं….

    “यही मेरी कमाई है। यही मेरी जमापूँजी है!”कभी कभी लगता है के यह राष्ट्र कैसे चल रहा है। चहुँओर बेईमानी का दबदबा है। चहुँओर भ्रष्ट आचरण का बोलबाला है।फिर किसी दिन नितिन महादेव यादव जैसे किसी समर्पित व्यक्ति के विषय में पढ़ कर ऐसा लगता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पित यादव जैसा एक व्यक्ति भी हज़ारों #बेईमानों पर भारी है।।

  • परिवहन माफिया पर चला सुशासन का चाबुक

    परिवहन माफिया पर चला सुशासन का चाबुक

    भोपाल,14अगस्त (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)मध्यप्रदेश की राजनीति में बरसों से घुसपैठ जमाए सत्ता माफिया के एजेंट को जेल भेजकर डॉ.मोहन यादव की पुलिस ने उसे अपनी हद में रहने की खुली चुनौती दे डाली है। इस घटना से सत्ता के गलियारों में दौड़ भाग करने वाले तमाम नेता और उनके दलाल हतप्रभ हैं। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मोहन यादव सरकार कभी उस लक्ष्मण रेखा की सुरक्षा में इतनी मुस्तैद हो सकती है जिसे कभी उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने अपने दो दशक लंबे कार्यकाल में छूने की हिम्मत भी नहीं दिखाई थी। बीच में आई कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने तो सत्ता माफिया के एक अड्े को मटियामेट करके खुली जंग का ऐलान कर दिया था लेकिन इसी दंभ में भरे कमलनाथ की सरकार समय से पहले धराशायी हो गई और मध्यप्रदेश की रगों में घुसकर खून चूसने वाले सत्ता माफिया के सफाए का अभियान अधूरा रह गया था।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपने लंबे शासनकाल में जिस तरह कर्ज लेकर विकास करने का जो मार्ग चुना था उसकी वजह से सत्ता के इर्द गिर्द लुटेरों का जमघट लग गया था यही सत्ता के दलाल राज्य के सारे ठेकों में हिस्सेदार बन गए थे। विकास के नाम पर चलने वाली योजनाओं का कोई भी ठेका हो उन सभी में इस गिरोह का उदय हो जाता था। शिवराज सिंह का सचिवालय हो या मंत्रालय के अफसर सभी को ताकीद थी कि इस संगठन के इशारे पर ही ठेके दिए जाएं। जिस ठेके में इस गिरोह का कम से कम एक सदस्य साईलेंट पार्टनर के रूप में शामिल होता था उसी को ठेका दिया जाता था।इस ठेके का इस्टीमेट इसी तरह का बनाया जाता था कि उसमें सबकी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो जाए।
    सत्ता को धमकाने का जो खून इस सत्ता माफिया के मुंह लग चुका है उसके चलते गुंडागर्दी के सामने पुलिस अक्सर लाचार हो जाती रही है। पिछले दो दशकों में सत्ता माफिया के इन्हीं गुर्गों को प्रदेश का कर्णधार बताने की परंपरा सी पड़ गई है। उद्योगपतियों के नाम पर यही गिरोह सत्ता का लाभ लेता रहा है। इसमें भाजपा तो क्या कांग्रेस के भी तमाम लोग शामिल रहे हैं। कांग्रेस के जिन नेताओं थोड़ी बहुत कमर सीधी की उसे इस सत्ता माफिया ने या तो तोड़ दिया या अपने बीच मिला लिया।
    एेसा नहीं था कि शिवराज सिंह चौहान इस परिस्थिति को नहीं समझते थे। तभी तो 13 दिसंबर 2018 को जब कमलनाथ ने शपथ ली तब शिवराज सिंह ने भाजपा की हार के बाद एक सार्वजनिक मंच पर कहा था कि मैं मुक्त हो गया। वे जानते थे कि किस तरह एमपी की सत्ता चलाना एक गंभीर कीमिया गिरी से ज्यादा नहीं है। इसके बावजूद वे इतने कमजोर साबित होते रहे कि प्रदेश की आय बढ़ाने के बजाए वे सत्ता माफिया को पालने में ही जुटे रहे।
    पहली बार डाक्टर मोहन यादव ने इस सत्ता माफिया को उसकी सीमाओं में रहने की चुनौती दी है। जबसे उन्होंने सत्ता संभाली है तभी से वे सुशासन के उस फार्मूले पर सरकार चला रहे हैं जो नीति आयोग ने निर्धारित किया है। सुशासन की इसी परंपरा को अटल सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के सीईओ एवं स्टाफ लागू करने का प्रयास कर रहा है। सत्त के इसी तंत्र में घुसपैठ करने के लिए इस माफिया गिरोह ने एमपी भाजपा कार्यसमिति सदस्य हीरेन्द्र बहादुर सिंह की बेटी को संविदा पर नियुक्त करवा दिया था। विदेश से पढ़कर आई उनकी बेटी सरकार के निर्णयों की मुखबिरी करके सत्ता माफिया को एलर्ट भेज रही थी। जब इसकी असलियत खुली तो संस्थान के सीईओ लोकेश शर्मा ने उसे चलता कर दिया। इससे बौखलाए हीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री से शिकायत करने के लिए तेज आवाज में तू तू मैं मैं कर डाली। यही नहीं जब संस्थान में एक बैठक चल रही थी तब वहां जाकर उन्होंने सीईओ के कक्ष में गुंडागर्दी मचाई। उन्होंने सीईओ को धमकााया कि वे मध्यप्रदेश में भी नहीं रह पाएंगे।


    दरअसल हीरेन्द्र बहादुर सिंह की चेतक ट्रेवल्स नाम की टैक्सी सेवा पिछले बीस सालों से मध्यप्रदेश की प्रमुख परिवहन कंपनी बन गई है। इस कंपनी ने सरकार से कई सौ करोड़ रुपयों का भुगतान प्राप्त किया है। इस कंपनी के नाम भुगतान की जो बिलिंग की गई है उससे भी कई गुना अधिक बिलों का भुगतान इसी गिरोह की अन्य नाम की परिवहन एजेंसियों को किया गया है।कुल मिलाकर सरकार के परिवहन पर सत्ता माफिया के प्रतिनिधि के तौर पर हीरेन्द्र बहादुर ही काबिज हैं। वे खुद को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के भतीजे बताते हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह की रिश्तेदारी की वजह से उन्होंने वहां भी अपना ठेकेदारी का नेटवर्क फैला रखा है।यही ट्रेवल्स चुनावी सभाओं के लिए हेलीकाप्टर और विमानों की सेवाओं की बिलिंग करता है। यही वजह है कि वे अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रैलियों में भी हेलीकाप्टर से साथ यात्रा करते देखे जाते थे।


    जब हीरेन्द्र बहादुर सुशासन संस्थान में गदर मचा रहे थे तो संस्थान ने अपने बचाव में पुलिस को सूचना दे दी। संस्थान के ओएसडी(नायब तहसीलदार) निमेश पांडेय ने कमलानगर पुलिस को दिए अपने आवेदन में कहा कि जब 10 अगस्त को संस्थान में बैठक चल रही थी तब कुर्ता पजामा पहने हीरेन्द्र सिंह कक्ष में घुस आए और सीईओ लोकेश शर्मा के बारे में पूछने लगे,फिर यहां से वे सीईओ के कक्ष में गए और उन्हें धमकाने के बाद बाहर निकलते हुए भी गालियां दे रहे थे। कमलानगर पुलिस ने इस सूचना पर हीरेन्द्र सिंह को थाने बुलाया पर वे नहीं आए तो रविवार को उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया जहां से वे सोमवार को बाहर आ सके। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को करीब से समझने वालों का कहना है कि माफिया ने यदि सत्ता को धमकाने की आदत नहीं छोड़ी तो फिर एमपी में सुशासन लागू होकर ही रहेगा।

  • दुनिया की हर थाली में हो भारत का जैविक खाद्यान्नःप्रधानमंत्री मोदी

    दुनिया की हर थाली में हो भारत का जैविक खाद्यान्नःप्रधानमंत्री मोदी

    नई दिल्ली,16 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सरकार ने अनुसंधान बुनियादी ढांचे की समीक्षा, जलवायु के अनुकूल फसल किस्मों के विकास, एक करोड़ किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और जैव-इनपुट संसाधन केंद्रों की स्थापना जैसी पहल के जरिये कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक रणनीति की रूपरेखा तैयार की है।
    इसके अलावा सरकार के अन्‍य प्रयासों में दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना, सब्जी उत्पादन क्लस्टर विकसित करना, कृषि में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को लागू करना और नाबार्ड के जरिये झींगा पालन को प्रोत्‍साहित करना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य कृषि को आधुनिक बनाना और कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करना है। आइए, सरकार द्वारा इस क्षेत्र को उन्नत बनाने और इस संबंध में लागू सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में चर्चा करते हैं।

    1. प्राकृतिक खेती
      माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में कृषि को प्राथमिकता दी है। उन्‍होंने प्रमाणन एवं ब्रांडिंग द्वारा समर्थित 1 करोड़ किसानों के समक्ष प्राकृतिक खेती करने का प्रस्ताव रखा है। इसका कार्यान्वयन इच्छुक ग्राम पंचायतों के साथ वैज्ञानिक संस्थानों के जरिये किया जाएगा। इसके अलावा आवश्यकता पर आधारित 10,000 बीआरसी स्थापित किए जाएंगे, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सूक्ष्म उर्वरक एवं कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क स्‍थापित होगा।
      क्या है प्राकृतिक खेती
      प्राकृतिक खेती रसायन मुक्त खेती है, जिसमें पशुधन को शामिल करते हुए कृषि के प्राकृतिक तरीके और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित विविध फसल व्‍यवस्‍था शामिल हैं। इसका उद्देश्‍य जलवायु के प्रति बेहतर अनुकूलता के साथ मृदा स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार लाने और किसानों की इनपुट लागत को कम करने के लिए गैर-सिंथेटिक रासायनिक इनपुट का उपयोग करना है।
      भारत में प्राकृतिक खेती
      भारत सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत सीमित क्षेत्रों में ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी)’ के जरिये 2019-20 में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। बीपीकेपी को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (एनएमएनएफ) के जरिये मिशन मोड में आगे बढ़ाने की योजना है।
      एनएमएनएफ, को खेती की प्रकृति पर आधारित टिकाऊ प्रणालियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया जा रहा है। इसमें कृषि इनपुट भी शामिल है ताकि बाहर से खरीदे गए इनपुट पर निर्भरता कम होगी, मृदा क्वालिटी बेहतर होगी और इनपुट लागत में कमी आएगी। साथ ही इसमें विस्तार एवं अनुसंधान संस्थानों की खेतों पर कृषि-पारिस्थितिकी अनुसंधान एवं ज्ञान पर आधारित विस्तार क्षमताओं को मजबूत करना, प्राकृतिक खेती के फायदे, संभावना एवं कार्यप्रणाली पर बेहतर ज्ञान एवं प्रस्‍तुति के लिए प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के अनुभव और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को साथ लाते हुए उनसे सीखना, प्राकृतिक रूप से उगाए गए रसायन मुक्त उत्पादों के लिए वैज्ञानिक तौर पर समर्थित एवं किसानों के अनुकूल आसान प्रमाणन प्रक्रियाएं स्थापित करना और प्राकृतिक रूप से उगाए जाने वाले रसायन मुक्त उत्पादों के लिए एकल राष्ट्रीय ब्रांड स्‍थापित करना और उसका प्रचार करना शामिल हैं।
      चार वर्षों (2022-23 से 2025-26) की अवधि के लिए इस योजना का कुल परिव्यय 2,481.00 करोड़ रुपये है।
    2. दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी पहल
      दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत सरकार की प्राथमिकता रही है। इसके लिए विभिन्न पहल एवं योजनाएं शुरू की गई हैं:
      राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम)
      भारत सरकार द्वारा 2018-19 से देश में खाद्य तेल में उत्‍पादन बढ़ाकर, आयात का बोझ कम करने के उद्देश्‍य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन- तिलहन (एनएफएसएम-ओएस) को लागू किया गया है।
      इसका उद्देश्य देश में तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन, रेपसीड एवं सरसों, सूरजमुखी, कुसुम, तिल, नाइजर, अलसी एवं अरंडी) के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना है। साथ ही, पाम ऑयल एवं वृक्ष आधारित तिलहन (जैतून, महुआ, कोकम, जंगली खुबानी, नीम, जोजोबा, करंज, सिमरोबा, तुंग, च्यूरा एवं जेट्रोफा) का क्षेत्र विस्तार करना है।
      सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप तिलहन की खेती के लिए कुल क्षेत्र 2014-15 में 2.56 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 30.08 करोड़ हेक्टेयर हो गया है, जो 17.5 % की वृद्धि दर्शाता है। परिणामस्‍वरूप पिछले 9 वर्षों में खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन 2015-16 में 86.30 लाख टन के मुकाबले 40 % से अधिक बढ़कर 2023-24 में 121.33 लाख टन हो गया है। घरेलू मांग में भारी उछाल के बावजूद अब आयात पर हमारी निर्भरता 63.2 % से घट कर 57.3% हो गयी है । राष्ट्रीय पाम ऑयल मिशन के तहत भी हमारे किसानों की मदद से तिलहन की खेती के लिए क्षेत्र बढ़कर 4.7 लाख हेक्टेयर तक हो गया है।
      न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)
      एमएसपी हमारे किसानों के लिए उनकी उपज की वास्तविक लागत के मुकाबले 50 प्रतिशत अधिक मूल्‍य सुनिश्चित करता है । इस प्रकार कृषि लागत पर आकर्षक रिटर्न मिलता है। आज एमएसपी सबसे अधिक है । एक दशक पहले के मुकाबले मसूर के एमएसपी में 117 प्रतिशत, मूंग के एमएसपी में 90 प्रतिशत, चना दाल के एमएसपी में 75 प्रतिशत, तुअर और उड़द के एमएसपी में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नाफेड और एनसीसीएफ, किसानों को दलहन और मसूर की खेती में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे किसानों के साथ सरकारी खरीद के लिए एक निर्धारित मूल्‍य पर 5 साल का अनुबंध करने के लिए तैयार हैं। यह भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है ।
    3. अधिक उपज और जलवायु के अनुकूल किस्में: भारत में समय की मांग
      भारत सरकार ने देश भर में कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से 32 क्षेत्रीय व बागवानी फसलों में 109 नई उच्च उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल किस्मों को पेश करने की एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। इन नई किस्मों को फसल उत्पादकता बढ़ाने और सस्‍टेनेबिलिटी सुनिश्चित करते हुए विविध जलवायु परिस्थितियों के अनुकूललिए विकसित किया गया है।
      वर्ष 2014-15 से 2023-24 के दौरान अधिक उपज देने वाली कुल 2,593 किस्में जारी की गईं। इनमें 2,177 जलवायु के अनुकूल (कुल का 83 प्रतिशत) जैविक एवं अजैविक तनाव प्रतिरोध के साथ और 150 जैव-फोर्टिफाइड फसल किस्में शामिल हैं। इसके अलावा 56 फसलों की 2,200 से अधिक किस्मों के 1 लाख क्विंटल से अधिक ब्रीडर बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। जलवायु के अनुकूल प्रौद्योगिकी को अपनाए जाने से असामान्य वर्षों के दौरान भी उत्पादन में वृद्धि हुई है।
    4. कृषि में बदलाव: डिजिटल फसल सर्वेक्षण में क्रांति लाने के लिए डीपीआई पहल
      कृषि में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को लागू किए जाने संबंधी सरकार की पहल का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाने और कृषि दक्षता को बेहतर करने के लिए डिजिटल तकनीक का फायदा उठाते हुए इस क्षेत्र में क्रांति लाना है। पायलट परियोजनाओं की सफलता से उत्साहित होकर इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम को तीन वर्षों के दौरान राज्य सरकारों के सहयोग आगे बढ़ाया जाएगा।
      शुरुआती चरण में खरीफ सीजन के दौरान 400 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके तहत डीपीआई का उपयोग करते हुए तीनों फसल सीजन में खेतों में बोआई की गई फसल और उसके रकबे के बारे में विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे हरेक खेत के लिए सटीक, वास्तविक समय आधारित फसल क्षेत्र की जानकारी प्रदान करने और गिरदावरी जैसे पारंपरिक सर्वेक्षण तरीकों को बदलने में मदद मिलेगी। इन पहलुओं के डिजिटलीकरण के साथ सरकार सब्सिडी वितरण, बीमा कवरेज और आपदा प्रबंधन सहित कृषि रणनीतियां तैयार करने और उन्हें बेहतर ढंग से लागू कर सकती है।
    5. तकनीकी पहल: सुलभ किसान क्रेडिट कार्ड के साथ किसानों का सशक्तिकरण
      कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्लू) अपनी प्रमुख संशोधित ब्याज सहायता योजना (एमआईएसएस) के जरिये किसानों की सहायता के प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये अल्पकालिक आवश्यकताओं के लिए किफायती ऋण प्रदान करना है। इस योजना की दक्षता, पारदर्शिता और समय पर लाभ वितरण को बेहतर करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पिछले साल शुरू किए गए किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) के जरिये दावा प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है।
      फिलहाल केआरपी 1,71,221 बैंक शाखाओं, 33 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी), 356 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), 20 राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी), 45 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी), आरबीआई और नाबार्ड के साथ एकीकृत हो चुका है। यह पोर्टल फिलहाल किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों के लिए ब्याज अनुदान एवं पीआरआई दावों को प्रॉसेस कर रहा है, जिसमें वर्ष 2024-25 के लिए 22,600 करोड़ रुपये का बढ़ा हुआ आवंटन शामिल है।
      इसके अलावा सरकार संस्थागत ऋण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का फायदा उठाते हुए किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) की क्षमताओं को बढ़ा रही है। इससे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये कृषि ऋण तक निर्बाध और बिना किसी परेशानी के पहुंच सुन‍िश्चित होगी। सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप चालू केसीसी खातों की संख्या 2013 में 6.46 करोड़ से बढ़कर 2024 में 7.75 करोड़ हो गई है। इसी प्रकार इन केसीसी खातों में बकाया ऋण 2013 में 3.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 9.81 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
    6. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी)
      देश में 2015-16 से पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी) यानी प्रति बूंद अधिक फसल योजना लागू की जा रही है। पीडीएमसी सूक्ष्म सिंचाई यानी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती है। सूक्ष्म सिंचाई से जल की बचत होने के साथ-साथ उर्वरक उपयोग, श्रम खर्च एवं अन्य इनपुट लागत में भी कमी आती है और किसानों की समग्र आय में वृद्धि होती है।
      इस योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई की व्‍यवस्‍था के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत और अन्य किसानों को 45 प्रतिशत की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सूक्ष्म सिंचाई के कवरेज का विस्तार करने के लिए संसाधन जुटाने में राज्यों की मदद के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ मिलकर सूक्ष्म सिंचाई कोष (एमआईएफ) स्‍थापित किया है।
      वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक पीडीएमसी के जरिये देश में सूक्ष्म सिंचाई के तहत कुल 90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है, जो पीडीएमसी से पहले के नौ वर्षों की कवरेज की तुलना में काफी (92 प्रतिशत) अधिक है।
      निष्कर्ष
      केंद्र सरकार की समग्र कृषि रणनीति का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास के जरिये उत्पादकता एवं पर्यावरण के प्रति अनुकूलता को बेहतर करना और अधिक उपज वाली नई फसल किस्मों को पेश करना है। इसके तहत एक करोड़ किसानों के लिए प्राकृतिक खेती की पहल को प्राथमिकता दी गई है, जैव-इनपुट केंद्र स्‍थापित करने और दलहन एवं तिलहन के उत्‍पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं । डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और झींगा प्रजनन केंद्रों के लिए मदद जैसी पहल देश भर में कृषि के विस्‍तार एवं आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये जा रहे महत्वपूर्ण क़दमों को रेखांकित करती हैं।
  • फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन

    फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन


    भोपाल,15 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि राज्य सरकार फार्मा उद्योग की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान रख रही है और जल्दी ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्वाधीनता दिवस आयोजन में राष्ट्रध्वज फहराने पहुंचे श्री संजय जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भारत सरकार के आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं जिससे जनता को राहत मिलेगी।


    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के परिसरों में झंडा वंदन के दौरान देशभक्ति के भाव से सराबोर उद्यमियों ने जोरदार नारे लगाकर राष्ट्र की आराधना की। श्री संजय जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह राजनीति को परिवार की बपौती बनाने वालों को चुनौती देने के लिए आम नागरिकों से राजनीति में आने का आव्हान कर रहे हैं उसी तरह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सत्ता माफिया पर चोट करके प्रदेश की तरुणाई को मुख्य धारा में लाने का अभियान चला रहे है। देश नई करवट ले रहा है इसलिए मध्यप्रदेश में के दवा निर्माताओं और व्यापारियों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री राजेन्द्र शुक्ल के माध्यम से प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का केंद्र प्रारंभ करने के लिए एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। श्री शुक्ल ने फार्मेसी की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए फार्मेसी काऊंसिल के माद्यम से देश और प्रदेश स्तर पर फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए कई योजनाएं बनवाई हैंं। इसका लाभ नई पीढ़ी के फार्मासिस्टों को मिलेगा।


    उन्होंने कहा कि भारत के दवा उद्योग को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के दवा निर्माता और व्यापारी आम जनता को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के प्लेटफार्म पर भी मध्यप्रदेश में निर्मित दवाओं ने अपनी भागीदारी शुरु कर दी है। इस देशव्यापी नेटवर्क से हम राज्य और देश के लिए पूंजी निर्माण का अनुष्ठान कर रहे हैं. इसमें आम फार्मासिस्ट और दवा निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।


    श्री जैन ने कहा कि कुछ इलाकों में फार्मासिस्टों को पंजीयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है ।काऊंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार शुरु किए हैं। जल्दी ही आम फार्मासिस्टों को कई सुविधाएं घर बैठे पारदर्शी तरीके से मिलने लगेंगी।
    फार्मेसी काऊंसिल के झंडा वंदन कार्यक्रम में श्री संजय जैन के साथ काऊंसिल के उपाध्यक्ष श्री राजू चतुर्वेदी और फार्मेसी काऊंसिल की रजिस्ट्रार सुश्री माया अवस्थी ने भाग लिया। काऊंसिल के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यापारियों को सम्मानित किया गया। मप्र फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने लगभग पचहत्तर वर्ष से अधिक उम्र के केमिस्टों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़, सचिव विवेक खंडेलवाल, अनिल कुमार जैन,राहुल नगाइच, सुहाग सिंह तोमर, अनिरुद्ध पारे, विक्रम शेरवानी, मनोज शर्मा, सुनील कुमार गुप्ता एवं दवा बाजार और राजधानी के दवा व्यापारी भी उपस्थित थे।

  • संदीप डाकोलिया ने फिर संभाली जैन पत्रकारों की कमान

    संदीप डाकोलिया ने फिर संभाली जैन पत्रकारों की कमान

    अ.भा.जैन पत्रकार संघ प्रदेश कार्यसमिति की बैठक महेश्वर में हुई संपन्न ,

    महेश्वर,7अगस्त (प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर) अ.भा. जैन पत्रकार संघ मध्य प्रदेश की विशेष बैठक 6 अगस्त मंगलवार को महेश्वर (जिला खरगोन )में आयोजित की गई । बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने की। प्रारंभ में सभी पधाधिकारियो ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। मुख्य संरक्षक हिम्मत मेहता, ऋतुराज बुडावनवाला, संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढ़ा, मुख्य सलाहकार जवाहर डोसी , राजेश नाहर, वरिष्ठ पत्रकार इंदर मल सांड आदि ने विशेष रूप से उपस्थित रह कर मार्गदर्शन प्रदान किया।
    प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि बैठक में प्रदेश के पदाधिकारी प्रदेश संयुक्त सचिव अरुण बुरड, प्रचार सचिव नेमीचंद कावड़िया, कार्यसमिति सदस्य विशाल वागमार, मनोज भंडारी, राजकुमार नाहर, अनिल जैन, ओमप्रकाश कोचर, देवेन्द्र जैन ,निलेश जैन, पियूष पटवा,पंकज खिंवसरा मोजूद रहे। सदस्यो ने अपने अपने सुझाव देकर संघटन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने कहा कि अ.भा.जैन पत्रकार संघ मप्र शासन द्वारा पंजीकृत संस्था होकर प्रदेश के जैन पत्रकारों को एकजुट कर उनके हितों के लिए संघर्षरत रहा हैं। संघटन द्वारा सदस्यो के लिए दो वर्ष के परिचय पत्र बनाने का काम इस वर्ष भी किया गया। आपने कहा कि हमारे सदस्यो को अन्य समानांतर संघटन की गतिविधियों व आयोजनों में शामिल होने से बचना होगा।
    क्योंकि हम यदि संघटित रहेंगे तो हमारा संघ और अधिक रचनात्मक कार्य करेगा।

    बैठक में नवंबर माह में संघ का एक मिलन समारोह श्री नागेश्वर तीर्थ ,या सैलाना में आयोजित करने का निर्णय हुआ। स्थान का चयन कोर कमेटी की बैठक में होगा। सदस्यता अभियान को लेकर भी चर्चा हुई।
    डाकोलिया पुनः अध्यक्ष…
    कार्य समिति की बैठक में वरिष्ठ जनों की समिति से प्रदेश अध्यक्ष पद पर पुनः संदीप डाकोलिया (करही)के नाम की घोषणा की गई। जिसका सभी ने करतल ध्वनि से व माला पहनाकर स्वागत किया। डाकोलिया ने सभी का आभार माना और कहा कि आप सभी के सहयोग से मैं पूरी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वाह करूंगा।

    इस अवसर पर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज जे.पटवा की सुपुत्री मुमुक्षु मीमांसा के संयम जीवन की राह पर चलने का निर्णय लेने पर पटवा का शाल ओढ़ाकर , श्री फल भेट कर बहुमान किया गया।
    राष्ट्र गीत के साथ बैठक का समापन हुआ।
    संचालन प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने किया ।आभार अरुण बुरड ने माना। बैठक के बाद सभी पदाधिकारीयो ने महेश्वर भ्रमण किया।

  • बिल्डर झंवेरी को दंड का फैसला अब कोर्ट करेगा

    बिल्डर झंवेरी को दंड का फैसला अब कोर्ट करेगा

    इंदौर । सिल्वर स्प्रिंग के बिल्डर मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी समेत 10 लोगों के खिलाफ जिला न्यायालय इंदौर ने विभिन्न आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करते हुए सभी को 30 अगस्त को न्यायालय के समक्ष उपस्थिति दर्ज करने के लिए समन जारी किये हैं ।
    सिल्वर स्प्रिंग फेज 2 के रहवासियों ने आलोक जैन पिता सुदेश जैन के माध्यम से एक परिवाद धारा 452, 323, 352, 506, 341, 294, 34 और 120बी के अंतर्गत प्रस्तुत किया था। माननीय न्याधीश श्री राहुल डोंगरे साहब की कोर्ट ने 31 जुलाई 2024 को हीरालाल जोशी, सुबोध गुप्ता, अभय कटारे, विकास मल्होत्रा, सत्यम राठौर, ऋषभ विश्वकर्मा, परमजीतसिंह, , जितेंद्रसिंह सोलंकी समेत बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है । 30 अगस्त को इन सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होना है।
    अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि माननीय न्यायालय के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया गया था, इसमें परिवादी आलोक जैन समेत आधा दर्जन रहवासियों के बयान दर्ज करवाए गए थे, इन बयानों, वीडियो और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर माननीय न्यायालय ने आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है ।
    यह है मामला :
    सिल्वर स्प्रिंग टाउनशिप में मालिकाना हक वाले प्लॉट धारकों जिन्हें शेयर होल्डर्स कहा जाता है, इनकी जुलाई 2022 की विशेष आमसभा में बिल्डर की शह पर कई बाहरी गुंडातत्व भी जबरन घुस आए और जानबूझकर आमसभा में मारपीट के उद्देश्य से बहसबाजी, गाली गलौज और विवाद करने लगे थे । इस दौरान परिवादी आलोक जैन के साथ सभी आरोपियों ने मिलकर मारपीट की और छिपाकर लाए गए हथियारों से जान से मारने की धमकी दी और बीच-बचाव में अन्य शेयर होल्डर्स आए तो आरोपीगण वहां से भाग निकले । पुलिस तेजाजी नगर थाने पहुंचकर परिवादी ने पूरी जानकारी दी, वरिष्ठतम अधिकारियों तक शिकायत की, इसके बावजूद बिल्डर के दबाव में पुलिस ने प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया था। दोबारा 4 अगस्त 2022 को परिवादी और सिल्वर स्प्रिंग्स संघर्ष एवं समन्वय समिति सदस्यों ने थाना तेजाजी नगर समेत आला अधिकारियों को एक शिकायत परिवादी पर हमला करने वालों और बिल्डर के खिलाफ की थी, इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई उल्टा परिवादी और रहवासियों को बिल्डर और उसके सहयोगियों द्वारा लगातार धमकाया जाता रहा ।
    रहवासियों की बडी जीत
    सिल्वर स्प्रिंग्स के बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश और अभिषेक झवेरी रसूखदार होने के साथ साथ राजनीतिक पैठ रखने वाले बिल्डर है । यही वजह है कि सैकडों शिकायतें होने के बावजूद इनके खिलाफ आज दिनांक तक पुलिस ने कोई प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया है। रहवासी क्षेत्र में जहां एक ओर बिल्डर ने मनमानी करते हुए शराब परोसने के क्लब शुरू किये, बिल्डिंग की छतों पर मोबाइल टावर लगवा दिये, नाले की जमीनों पर कब्जा करके प्लॉट बेच दिये यही नहीं कुछ बेसमेंट में सुपर मार्केट भी बनवा रखे हैं। बायपास रोड की सबसे बड़ी बसाहट वाली इस टाऊनशिप में बिल्डर डेवलपर एम झवेरी समूह ने निर्माण पश्चात भी छल बलपूर्वक अवैध अधिपत्य बनाए रखा है । घोषित एकीकृत टाऊनशिप को अनेक हिस्सों में बांटकर बिल्डर ने रहवासियों के साझा हित की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक / शासकीय धनसंपदा पर अवैध कब्जा कर रखा है । एकीकृत टाऊनशिप के हजारों रहवासियों के हित में गठित संघर्ष समिति के माध्यम से वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन द्वारा उपभोक्ता आयोग, उच्च न्यायालय व रेरा सहित हर संभव मंच पर शिकायतें परिवाद दर्ज किए गए हैं । जिनसे छुब्ध होकर बिल्डर पिता पुत्र मुकेश झवेरी व अभिषेक झवेरी द्वारा प्रायोजित कुछ रहवासियों व बाहरी गुंडों के माध्यम से 31 जुलाई 22 को रहवासियों की आमसभा में आलोक जैन के ऊपर किए गए हमले के ठीक 2 साल बाद 31 जुलाई 24 को माननीय न्यायालय के द्वारा यह प्रकरण दर्ज हो सका । भारी अनियमितताएं होने के बावजूद बिल्डर पिता-पुत्र के खिलाफ आज दिनांक तक कोई भी सख्त कार्यवाही नहीं हो पाई थी। रहवासियों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था और उम्मीद जगी है।

    न्यायालयीन केस की जानकारी: अधिवक्ता Rajesh Joshi 8462000010
    Alok jain 9425063650