
आजादी का पर्व नजदीक है। भारतीय लोकतंत्र और स्वाधीनता को लेकर राग जयजयवंती गाने वालों की टोलियां बाजार में निकलने वाली हैं। जिसने भी लाभ की मिठाई पा ली वह इस लोकतंत्र की का गुणगान करने लग जाएगा। जो वंचित रहा निश्चित तौर पर वह गाली देगा। दरअसल हम सोचने को राजी नहीं कि लोकतंत्र और आजादी के उल्लास में हमने क्या गंवा दिया है।हमें सोचना होगा कि आखिर भारत की तरुणाई को लगभग आधी सदी तक किन्होंने तरह तरह के षड़यंत्रों में फंसाकर रखा । भारत में किसी प्रतिष्ठान को चलाना कितना दुरूह कार्य है ये मध्यप्रदेश सैडमैप के प्रयासों को देखकर समझा जा सकता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ये संस्थान इसलिए बनाया था ताकि इसके माध्यम से प्रदेश के गौरवशाली प्रतिष्ठानों के लिए अच्छी गुणवत्ता का प्रशिक्षित मानव बल तैयार किया जा सके। डिग्रियां लेकर तो हर साल युवाओं की बड़ी वर्कफोर्स तैयार हो रही है। उनमें से नतीजे देने वाले युवाओं की तलाश भूसे में सुई तलाशने जैसी होती है। यही सोचकर सरकार ने एक गुणवत्ता पूर्ण संस्था के माध्यम से वर्कफोर्स उपलब्ध कराने का इंतजाम किया था। अब तक की यात्रा में सैडमैप ने प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभाई है। सरकारी संरक्षण होने की वजह से इस संस्थान को अधिक अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। संस्थान सरकारी नहीं है और एक तरह से निजी संस्था है इसलिए इसमें वैयक्तिक लाभ लेने के भी अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। केवल नैतिकता की झीनी चंदरिया ही सामाजिक दायित्वों की रक्षा कर पाती है। सैडमैप की कार्यकारी संचालक अनुराधा सिंघई के पहले तक जिन लोगों ने जवाबदारियां संभालीं उनमें से कई पर आरोप लगे। जांच एजेंसियों ने उनके घरों पर छापे भी मारे और कई गड़बड़ियां भी पाईं । यही वजह है कि अब कोई भी यहां नवाचार करने का प्रयास करता है उसे भी संदेह की निगाह से देखा जाने लगता है। मध्यप्रदेश शासन ने अनुराधा सिंघई को उनकी विश्वस्तरीय योग्यताओं को देखते हुए संस्थान संभालने की जवाबदारी दी है। उन्होंने जब यहां चल रहे नाकारेपन की गंदगी को साफ करना शुरु किया तो यहां अड्डा जमाए बैठी तरह तरह की माफिया ताकतों ने हल्ला मचाना शुरु कर दिया।अब तक इस संस्थान को लेकर भी उनकी उपलब्धियों पर चर्चा कम हुई अखबारी सुर्खियां बने फड़तूस बयानों को चटखारे लेकर खूब सुना सुनाया गया। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने के लिए जो कहानियां सुनाई गईं उन्हें आधार मानकर स्थानीय अदालत ने पुलिस को जांच की जवाबदारी दे दी । ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में श्रीमती अनुराधा सिंघई ने उच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत किया और अदालत ने उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए क्लीनचिट दे दी। अदालत ने झूठे तथ्यों के आधार पर अदालत और प्रशासन का समय बर्बाद करने वाले षड़यंत्रकारियों को भी फटकार लगाई है। अदालत की कड़ी पड़ताल के बाद तो अब इन षडयंत्रकारियों को बाज आना चाहिए। शासन को भी अपने उन महत्वाकांक्षी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आगे आना होगा जिनसे मध्यप्रदेश में सुशासन स्थापित होने जा रहा है। कुशल युवाओं को साथ लेकर एक सफल प्रदेश का निर्माण होने जा रहा है। प्रदेश में अब तक की जो राजनीति चलती रही है उसकी वजह से आज भी प्रदेश के विकास की रफ्तार गुजरात या अन्य राज्यों की तरह तेज गति नहीं पकड़ सकी है। अब तक की कांग्रेसी सरकारें रहीं हों या लगभग दो दशकों का भाजपा का शासनकाल दोनों के दौरान कभी बंधे बंधाए ढर्रे से आगे देखने की परंपरा विकसित नहीं हो पाई।संघ और भाजपा संगठन की आड़ लेकर भी कई बार षड़यंत्रकारियों ने सुशासन को ध्वस्त करने के प्रयास किए।इसके बावजूद कुछ प्रतिभाशाली अफसरों ने पहल करके रचनाधर्मी युवाओं को आगे लाने की जो मुहिम चलाई वह अब सफलीभूत होती नजर आने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि कृषि पर बोझ घटाने के लिए हमें उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा ताकि विशाल युवा वर्ग को हम नौकरियां उपलब्ध करा सकें। ऐसे में कंपनी सेकेट्री के रूप में लंबा अनुभव रखने वाली अनुराधा सिंघई जैसै प्रतिभाशाली प्रबंधकों पर हमें भरोसा करना होगा।उनके नेतृत्व में सैडमैप न केवल सरकारी प्रतिष्ठानों बल्कि कार्पोरेट जगत के लिए भी युवाओं की खेप तैयार कर रहा है। ऐसे में उन्हें सहारा देकर अवसर भी देना होगा ताकि प्रदेश एक नए दौर में प्रवेश कर सके। हम अपने पुरातनपंथी सोच को ही पकड़े बैठे रहेंगे और उसी के अनुसार लोगों को घुटने के स्तर पर लाते रहेंगे तो राज्य को ऊंचाईंयों तक नहीं पहुंचाया जा सकेगा। सेना की अग्निवीर योजना का विरोध करने वालों को अहसास भी नहीं कि पुरानी पेंशन स्कीम का शोर मचाकर वे युवाओं को किस अंधे कुएं में धकेल रहे हैं। कार्पोरेट सेक्टर में आरक्षण का षड़यंत्र करके किस तरह आरक्षित वर्ग के विशाल तबके को रोजगार के मंगलमयी अवसरों से वंचित कर रहे हैं। हमें पुराने शासकों और पुरानी सोच में ढल चुके लोगों को सख्ती से गो बैक कहना होगा। यदि लोकतंत्र के नाम पर लूजर्स को सत्ता के नजदीक जगह दी जाएगी तो विनर्स के माध्यम से रचे जा रहे नए संसार से हम प्रदेश को वंचित कर देंगे। हमें इस लोकतंत्र को नए संदर्भों में रीसेट होने देना होगा। सरकार ने अब तक अफवाहों पर ध्यान दिए बगैर स्वविवेक से फैसले लिए हैं। उसे इसी तरह आगे बढ़ते रहना होगा, तभी हम भारत माता के परम वैभव के लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे।
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