Month: July 2024

  • एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर).मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक बाघ वाला प्रदेश है। प्रदेश में बाघों की आबादी बढ़कर 785 पहुँच गई है। यह प्रदेश के लिये गर्व की बात है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा का कार्य अत्यंत मेहनत और परिश्रम का है। समुदाय के सहयोग के बिना वन्य प्राणियों की सुरक्षा संभव नहीं है। वन विभाग और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं, जिनके कारण मध्यप्रदेश एक बार फिर टाइगर स्टेट बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर जंगलों में बाघों के भविष्य को सुरक्षित करने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिये संवेदनशील प्रयासों की आवश्यकता होती है जो वन विभाग के सहयोग से संभव हुई है। हमारे प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में बेहतर प्रबंधन से जहाँ एक ओर वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलता है, वहीं बाघों के प्रबंधन में लगातार सुधार भी हुए हैं।

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता का हाल ही में सीहोर जिले में एक उदाहरण सामने आया था। सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रेक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गये थे, जिसमें दो गंभीर रूप से घायल शावकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन और वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम द्वारा एक डिब्बे की विशेष ट्रेन से उपचार के लिये भोपाल लाया गया था।

  • सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया

    सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया


    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सोलर बिजली प्लांट लगाने के लिए जो सब्सिडी देने की योजना चलाई गई है उसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगाना शुरु कर दिए हैं और उस बिजली से वे घरों को रोशन करने के साथ साथ मुफ्त परिवहन का भी आनंद उठा रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस परियोजना पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। एनडीए सरकार इस अभियान में हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने के साथ-साथ 1 करोड़ घरों को रोशन करके भारत की ऊर्जा जरूरतों का नया इतिहास लिखने जा रही है।
    पब्लिक रिलेशंस सोसायटी आफ इंडिया,भोपाल ने इस विषय पर आज एक सेमिनार का आयोजन किया। इसमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के उप मुख्य महाप्रबंधक (एनएसई) सौरभ श्रीवास्तव ने एक समारोह में बताया कि वे किस तरह इस योजना में सब्सिडी का लाभ लेकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकते हैं और बिजली कंपनी को अतिरिक्त बिजली बेचकर अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी के पोर्टल और वेवसाईट पर इस योजना की लिंक दी गई है। इस पर आवेदन करके घर बैठे वे अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगवा सकते हैं। सरकार एक किलोवाट बिजली प्लांट पर तीस हजार रुपए ,दो किलोवाट के बिजली प्लांट पर साठ हजार रुपए और तीन किलोवाट बिजली प्लांट पर 78 हजार रुपए सब्सिडी दे रही है। इससे ज्यादा क्षमता वाले बिजली प्लांटों पर सब्सिडी 78 हजार रुपए ही रहेगी।
    उन्होंने बताया कि इन घरेलू बिजली प्लांटों से प्राप्त बिजली से घर की लाईट ,एसी ,गीजर और हीटर भी चलाए जा सकते हैं। इस बिजली से इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी भी चार्ज की जा सकती है। इससे बिजली के साथ परिवहन के ईंधन की भी बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ईंधन के आयात पर हर साल लाखों करोड़ रुपए खर्च करती है। घरेलू बिजली से जहां पर्यावरण की रक्षा की जा सकेगी वहीं देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि काफी अनुसंधान के बाद ऐसे फोटो वोल्टिक सेल भी अब बाजार में आने लगे हैं जिनसे बादलों की मौजूदगी के बीच भी बिजली बनाई जा सकती है।
    वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ये महत्वाकांक्षी योजना है। लोगों को आगे बढ़कर इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। इस योजना के अधिक प्रचार प्रसार की भी जरूरत है जिससे लोग अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
    इस परियोजना से जुड़े मोंटाज इंफ्रा पावर प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि अब देश में ही निर्मित उच्च क्वालिटी के सोलर पैनल अधिक बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। सोलर पैनलों के छाया वाले पृष्ठ पर भी अब ऐसे फोटो वोल्टिक सेल लगाए जाते हैं जो आसपास की धूप से भी बिजली का उत्पादन करते हैं। इससे सोलर प्लांटों की क्षमता में इजाफा हुआ है। भारत में लगभग तीन सौ दिनों तक धूप उपलब्ध होती है। इससे बिजली का उत्पादन सरलता से हो जाता है।
    कार्यक्रम के आयोजक और पीआरएसआई के अध्यक्ष मनोज द्विवेदी ने कहा कि भारत सरकार की इस योजना पर मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने गंभीरता से अमल शुरु किया है। इससे प्रदेश की बिजली की मांग को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। आगे आने वाले समय में हम सोलर बिजली का ऐसा नेटवर्क तैयार करने में सफल होंगे जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। पीआरएसआई के सचिव पंकज मिश्रा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था के कोषाध्यक्ष के.के.शुक्ला ने अतिथियों के सत्कार और गोष्ठी की व्यवस्था का दायित्व संभाला।

  • किसान पर रुपया बरसाएगी डिजिटल मुद्रा

    किसान पर रुपया बरसाएगी डिजिटल मुद्रा

    बजट में तेल, खाद्यान्न व उर्वरकों पर सब्सिडी का सर्वाधिक बोझा होता है। भारत सरकार ने तेल कंपनियों को बाज़ार के अनुरूप मूल्य निर्धारित करने का अधिकार दे कर तेल सब्सिडी से लगभग छुटकारा पा लिया है। खाद्य सुरक्षा का संवैधानिक दायित्व होने के कारण आज सरकार विश्व की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना संचालित कर रही है जिसके तहत 813 मिलियन से अधिक लोगों को सब्सिडी पर राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस कड़ी में तीसरी सबसे बड़ी सब्सिडी हैं उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी जो 2.53 ट्रिलियन रूपये तक पहुँच गई है।

    हमारे देश में प्रति वर्ष लगभग 65 मिलियन टन विभिन्न प्रकार के उर्वरकों की पूर्ति देश में स्थापित 0.26 मिलियन पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आउटलेट्स के माध्यम से की जाती है। जहां लाभार्थियों की पहचान आधार कार्ड के नम्बर, किसान क्रेडिट कार्ड या अन्य दस्तावेजों के माध्यम से की जाती है।खुदरा विक्रेताओं द्वारा किसानों को की गई बिक्री के आधार पर उर्वरक निर्माता कंपनियों को उर्वरक सब्सिडी जारी की जाती है। देश अपनी डीएपी की लगभग आधी आवश्यकता आयात करता है और लगभग 25% यूरिया की आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। घरेलू म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) की मांग पूरी तरह से आयात (बेलारूस, कनाडा और जॉर्डन आदि से) के माध्यम से पूरी की जाती है।डायमोनियम फॉस्फेट सहित फॉस्फेटिक और पोटाश (पी एंड के) उर्वरक की खुदरा कीमतें (डीएपी) को सरकार द्वारा एक वर्ष में दो बार घोषित पोषक तत्व आधारित सब्सिडी तंत्र के हिस्से के रूप में ‘निश्चित-सब्सिडी’ व्यवस्था की शुरूआत सन् 2020 से की गईं हैं । उदाहरण के लिये आज यूरिया के मामले में, प्रति बैग (45 किलोग्राम) उत्पादन लागत  लगभग 2,650 रुपये है जबकि किसानों को 242 रुपये की निर्धारित कीमत का भुगतान कर उपलब्ध करवाई जा रही है तथा शेष राशि सरकार द्वारा उर्वरक इकाइयों को सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है।

    उपरोक्त कारणों के कारण ही सरकार ई- रूपी से सब्सिडी सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए डिजिटल वाउचर का लाभ उठाने के लिए प्रयास कर रही है। हमारे देश में सार्वजनिक सेवा वितरण डिजिटल क्रांति के शिखर पर है जिसके तहत सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण निवेश और प्रगति के लिए अनेक योजनाएँ शुरू की गई है जैसे जन धन-आधार-मोबाइल ट्रिनिटी (जेएएम) से लेकर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) से लेकर इंडिया स्टैक से लेकर यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) तक, भारत ने सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटल नेतृत्व वाली व्यवस्था को अपनाया है। इस दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम हाल ही में लॉन्च किया गया ई-आरयूपीआई है, जो एक व्यक्ति को विशिष्ट उद्देश्य के लिए डिजिटल भुगतान का साधन है। जिसे रिसाव और लक्ष्यीकरण समस्याओं को समाप्त करने के लिए प्रभावी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।आधार कार्ड योजना, यूपीआई के माध्यम से सीधे बैंक खाते से भुगतान की योजना, किसान सम्मान निधि का भुगतान तथा घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी का सीधा भुगतान आदि अनेक सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं में सीधे हितग्राहियों के खाते में पैसा सीधे ट्रांसफ़र किया जा रहा है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ई-रूपी  इसी कड़ी का अगला कदम है।  यह प्रौद्योगिकी के लिए “सामान्य रूप से व्यवसाय” दृष्टिकोण में एक बदलाव है और जो वास्तव में प्रधान मंत्री के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास”के आह्वान के अनुरूप है।

    जब देश में नई सरकार चुनने के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही है तभी  भारतीय रिज़र्व बैंक व अनेक सरकारी विभाग उर्वरक सब्सिडी प्राप्तियों के वित्तपोषण को बंद करने की संभावना पर बैंकों के साथ चर्चा कर रहे है। जिस के तहत लाभार्थियों को खुदरा विक्रेताओं की वास्तविक बिक्री के आधार पर उर्वरक कंपनियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की पेशकश की जाना है।

    उर्वरक सब्सिडी के लिए सरकार पायलट आधार पर कर्नाटक, असम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित सात राज्यों के एक-एक जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी। जिसके तहत इन राज्यों के सात जिलों में उर्वरकों की सब्सिडी को  प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना  के तहत, किसानों को उनकी भूमि जोत को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री की सीमा तय की जाएगी।अनेक स्तर पर विभिन्न संगठनों द्वारा प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के विचार पर आपत्ति जताई गई थी, क्योंकि उस मॉडल के तहत, किसानों को वास्तविक सब्सिडी राशि उनके बैंक खातों में स्थानांतरित होने से पहले उर्वरक खरीदने के लिए एक बड़ी राशि का भुगतान करना होगा। हालाँकि, सरकार ने किसानों को उनके बैंक खातों में सब्सिडी प्राप्त करने से पहले, बाजार दरों पर पोषक तत्वों को क्रय कर अग्रिम  भुगतान करने की योजना को छोड़ दिया है।क्योंकि विभाग का मानना है कि बाज़ार दर पर उर्वरक ख़रीदने के लिए कई किसानों के पास पैसा नहीं होता है।विभाग का मानना है कि “बेचे गए उर्वरक का सब्सिडी घटक काफी अधिक है जबकि किसानों की वास्तविक बाजार दर पर उर्वरक खरीदने की क्षमता सीमित है।”

    पायलटों की प्रतिक्रिया के आधार पर संशोधित डीबीटी को पूरे देश में लागू किया जाएगा। उर्वरक विभाग  के मुताबिक, किसानों के भूमि रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें बेचे जाने वाले अत्यधिक सब्सिडी वाले उर्वरक का कोटा तय किया जाएगा तथा निर्धारित कोटा से ऊपर की किसी भी मात्रा के लिए, किसानों को उर्वरक बाजार दर पर खरीदना होगा।इसका उद्देश्य मिट्टी के पोषक तत्वों के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है।पायलट परियोजनाओं को शुरू करने से पहले राज्यों को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, फसल सर्वेक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड की कवरेज और लैंडिंग होल्डिंग्स में औपचारिक और अनौपचारिक किरायेदारी के प्रावधानों को डिजीटल करने की आवश्यकता है।

    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा विकसित ई-आरयूपीआई, एक बार का संपर्क रहित और कैशलेस वाउचर-आधारित भुगतान का तरीका है, जिसमें वाउचर का मोचन किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए किसी विशिष्ट व्यक्ति तक ही सीमित है। यह अनिवार्य रूप से एक प्रीपेड डिजिटल वाउचर है जो लाभार्थी को एसएमएस या क्यूआर कोड के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से वितरित किया जाता है। लाभार्थी इन वाउचरों को इच्छित वस्तुओं या सेवाओं के बदले नामित विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं पर भुना सकता है। उदाहरण के लिए, एक किसान को सार्वजनिक योजना के तहत जारी किए गए ई-आरयूपीआई खाद ख़रीदने के लिए जारी वाउचर के साथ एक निर्दिष्ट खाद की दुकान से संपर्क कर सकता है जहां वह खाद पर उपलब्ध सब्सिडी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए वाउचर को भुना सकता है। जैसे ही एसएमएस कोड दर्ज किया जाता है या क्यूआर कोड स्कैन किया जाता है, वाउचर राशि तुरंत सरकार द्वारा वित्तीय मध्यस्थों के माध्यम से खाद निर्माता कम्पनी के खाते में जमा कर दी जाती है।

    जबकि डीबीटी प्रणाली के लिए लाभार्थी के पास आधार कार्ड से जुड़ा एक पंजीकृत बैंक खाता होना आवश्यक है, ई-आरयूपीआई के लिए केवल एक कार्यात्मक बुनियादी फोन की आवश्यकता होती है। स्मार्टफोन की कोई जरूरत नहीं! किसी डेबिट/क्रेडिट कार्ड, डिजिटल भुगतान ऐप, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस या यहां तक कि इंटरनेट कनेक्शन की भी आवश्यकता नहीं है! लाभार्थी को बस एक मोबाइल फोन चाहिए, जो एसएमएस या क्यूआर-कोड प्राप्त करने में सक्षम हो। दूसरे, सेवा प्रदाता खातों में पैसा तभी जमा किया जाता है जब लाभार्थी द्वारा लेनदेन पूरा कर लिया जाता है। यह एक लीक-प्रूफ भुगतान प्रणाली बनाता है जिसमें वैकल्पिक उपयोग के लिए धन के विचलन की संभावना को नियंत्रित किया जाता है। तात्कालिक हस्तांतरण व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि सेवा प्रदाताओं को कोई दावा, उपयोगिता प्रमाण पत्र या सहायक दस्तावेज जमा किए बिना तुरंत भुगतान किया जाता है, जिससे उनके निपटान में कार्यशील पूंजी की उपलब्धता भी बढ़ती है। जारीकर्ता के दृष्टिकोण से, ई-आरयूपीआई किसी भी उपभोग के बाद के सत्यापन की परेशानियों को समाप्त कर देता है, क्योंकि लाभार्थी एक तरह से पूर्व-सत्यापित होता है, और केवल निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए वाउचर को भुनाने के लिए पात्र होता है। ई-आरयूपीआई, एक वास्तविक समय भुगतान प्रणाली होने के नाते, सार्वजनिक सेवा वितरण की रसद लागत को कम करने, स्थानीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और बढ़ी हुई दक्षता और प्रभाव के माध्यम से सार्वजनिक धन के सीमांत मूल्य में सुधार करने के लिए बाध्य है। लक्ष्य लोगों को पहले स्थान पर रखना, सेवाओं को लागत प्रभावी, सुविधाजनक और समावेशी तरीके से डिजाइन और वितरित करना है।

    किसी भी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के साथ मुख्य चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थी को हस्तांतरित नकदी का उपयोग इच्छित परिणामों के लिए किया जा रहा है या नहीं। भारत सरकार द्वारा हाल ही में लॉन्च की गई ई-आरयूपीआई भुगतान प्रणाली का लक्ष्य सामाजिक लाभ हस्तांतरण को इच्छित उद्देश्य से जोड़ना और बिना किसी मध्यस्थ के सेवा प्रदाताओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। उम्मीद है कि सार्वजनिक सेवाओं की लक्षित, पारदर्शी और लीकेज-प्रूफ डिलीवरी सुनिश्चित करने में ई-आरयूपीआई एक प्रमुख भूमिका निभाएगी।

  • कृषक की सोच बदलें तो दौड़ेगा विकास का इंजन

    कृषक की सोच बदलें तो दौड़ेगा विकास का इंजन


    संसद में बजट प्रस्तुत करने के पहले आर्थिक समीक्षा 2023-24 को प्रस्तुत किया गया। जिसके अनुसार वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.2% रहने का अनुमान किया गया है। जबकि मुद्रास्फीति काफ़ी हद तक नियंत्रण में है तथा व्यापार घाटा भी सकल घरेलू उत्पाद का 0.7% ही हैं तथा विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त मात्रा में है। इसके साथ सार्वजनिक व निजी निवेश की गति निरंतर जारी है। 33,000 से अधिक निजी कम्पनियों के परिणाम बताते हैं कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का कर पूर्व लाभ लगभग चार गुना हो गया है। जिस कारण निफ़्टी व सेंसेक्स सूचकांकों में तेज़ी बनी हुई है।
    कृषि और किसान किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और भारत भी इसका अपवाद नहीं है। इसलिए भारत में किसानों को पानी, बिजली और उर्वरक पर सब्सिडी दी जाती है। उनकी आय पर कर नहीं लगता। सरकार 23 चुनिंदा फसलों के लिए उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करतीं हैं। पीएम किसान योजना के तहत किसानों को मासिक नक़द राशि प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय व राज्य सरकारें समय समय पर किसानों के ऋण माफ़ कर देती है। लेकिन किसानों की समस्याओं को देखते हुए इन नीतियों में बदलाव करने के लिए अखिल भारतीय संवाद की आवश्यकता है।
    भारतीय कृषि क्षेत्र लगभग 42%आबादी को आजीविका प्रदान करता है तथा सकल घरेलू उत्पाद में 18% योगदान देता है। कृषि क्षेत्र 4.18% की गति से प्रति वर्ष वृद्धि कर रहा है। विश्व कृषि में भारत दूध, दालों व मसालों के उत्पादन में प्रथम स्थान व चावल, गेहूँ, कपास और गन्ना उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है।
    राष्ट्रीय व राज्य सरकारों के एक-दूसरे के विपरीत उद्देश्यों वाली नीतियों के कारण किसानों के हितों को नुक़सान पहुँच रहा है, मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रहीं है, भूजल स्तर घट रहा है, नाइट्रेट ऑक्साइड से नदियाँ और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, फसलों में पोषक तत्वों की कमी के कारण हमारे भोजन में फ़ाइबर और प्रोटीन के बजाय चीनी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन के कारण लोगों के स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँच रहा है। यदि हम कृषि नीतियों में व्याप्त विसंगतियों को समाप्त कर दे तो इस के परिणाम स्वरूप बहुत अधिक सामाजिक व आर्थिक लाभ होगा तथा राष्ट्र को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने के आत्मविश्वास और क्षमता में विश्वास बहाल होगा।
    पहले के विकास मॉडलों में अर्थव्यवस्था को कृषि, औद्योगीकरण और मूल्य संवर्धित सेवाओं के विकास के क्रम में प्रतिपादित किया जाता रहा है। लेकिन व्यापार संरक्षणवाद, संसाधन जमाख़ोरी, अतिरिक्त क्षमता और डंपिग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आने से विश्व में नई चुनौतियों का निर्माण हो रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में इसका हल खेती के मामले में जड़ों की ओर लौट कर परम्परागत खेती को बढ़ावा देने के रूप में प्रस्तुत किया गया है तथा उम्मीद की गई है कि इससे किसानों की आय बढ़ाई जा सकेगी। इससे उच्च मूल्य संवर्धन के लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ खाद्य प्रसंस्करण से निर्यात के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है तथा कृषि क्षेत्र को फ़ैशनेबल बना कर शहरी युवाओं को काम करने के लिए आकर्षित किया जा सकता है।
    क्या आज के पेचीदा समाज में यह प्रस्तावित समाधान कृषि क्षेत्र का उद्धारक हो सकता है? इस विषय में आप क्या सोचते हैं? आप किसानों को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करना चाहिए जिससे शासन प्रशासन में बैठे लोगों, नीति निर्माताओं तथा जनता की राय की दिशा बनाने वाले प्रभावशाली लोगों तक बात पहुँच सके। यदि इस समय भी आप चुप रहे तो कोई ओर आपके लिए निर्णय लेगा।

  • सावन की फुहार लाए विजया भारती के लोकगीत

    सावन की फुहार लाए विजया भारती के लोकगीत

    भोपाल,26 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) देश की प्रख्यात लोकगायिका विजया भारती इन दिनों राजधानी भोपाल में अपने सदाबहार लोकगीतों के साथ एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। उनके लोकगीत इतने मधुर हैं कि सावन की फुहारें एक बार फिर जीवन संगीत बनकर बरसने लगीं हैं। भारतीय लोक संगीत की दुनिया में विजया भारती का नाम बड़े प्यार और सम्मान से लिया जाता है. विजया बिहार की हैं. इसलिए बिहार की तमाम लोक भाषाओं भोजपुरी, मैथिली, अंगिका आदि में तो वे गाती ही हैं, किन्तु उनकी पहचान समूचे देश और दुनिया में 18 भाषाओं में गाने वाली एक स्तरीय और झुमा देने वाली गायिका के रूप में स्थापित है. सुर-सौंदर्य और सौम्यता से परिपूर्ण विजया भारती ने संगीत के मंचों से लेकर ऑडियो-वीडियो एलबमों तथा टेलीविजन चैनलों के अलावा फिल्मों में भी अपनी कला का जादू बिखेरा है. विजया ने मुंबई फिल्म जगत की तमाम जानी-मानी हस्तियों यथा महानायक अभिताभ बच्चन, स्व अमरीशपुरी, गोविन्दा, अमोल पालेकर, जितेन्द्र, यश चोपड़ा, जया प्रदा, शत्रुघन सिन्हा, मनोज बाजपेयी, उदित नारायण, स्व. रविन्द्र जैन आदि के साथ दिल्ली, मुंबई से लेकर यूरोप के अनेक देशों में मंचों पर सफलता के साथ कार्यक्रम पेश कर अपार लोकप्रियता अर्जित की है.

    विजया पारंपरिक लोकगीतों के अलावा ज्यादातर स्वरचित और स्वयं संगीतबद्ध गीत गाती हैं और इसीलिए उनकी अपनी विशिष्ट् पहचान है. हिन्दी और संगीत में डबल एमए के अलावा, विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त विजया भारती ने हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका भाषाओं में सैकड़ों गीत लिखे और गाये हैं.

    मूलत: बिहार की रहने वाली और मुंबई में पैदा विजया भारती ने भारत सरकार के ‘भारतीय सास्कृतिक संबधं परिषद’ (आईसीसीआर) के माध्यम से दुनिया के 20 देशों में भोजपुरी गायन प्रस्तुत कर अंर्तराष्ट्रीय पहचान बनायी है. उनके कार्यक्रम रूस, ब्रिटेन, हालेंड, जर्मनी, बेल्जियम, त्रिनिडाड, पोर्ट ऑफ स्पेन, फ्रांस तथा अनेक कैरेबियन देशों में काफी यादगार रहे हैं. त्रिनिडाड के एक अखबार ने विजया का कार्यक्रम देखने के बाद प्रशंसा करते हुए शीर्षक लिखा – इलेक्ट्रिफाइंग भारती.

    विजया भारती (संगीत और हिंदी में डबल एमए व विद्यावाचस्पति) देश की जानी मानी लोकगायिका, एंकर, कवयित्री व लोक संस्कृति की मर्मज्ञ हैं| आकाशवाणी व दूरदर्शन की ऐ ग्रेड कलाकार विजया ने देश के कोने कोने से लेकर 20 से अधिक देशों में भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया है| तमाम टीवी चैनलों पर नियमित कार्यक्रम करने के अलावा आपने महुआ टीवी पर लगातार चार साल तक प्रतिदिन बिहाने बिहाने कार्यक्रम की एंकरिंग कर रिकार्ड बनाया है| अनेकों पुरस्कार के अलावा आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजया की सराहना करते हुए आपको कुपोषण और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित और निमंत्रित भी किया|

    विजया के कार्यक्रम केन्द्र सरकार के विभिन्न संस्थानों के अलावा कई राज्य सरकारों के जरिये नियमित तौर पर होते हैं. विजया बिहार-यूपी की पहली कलाकार हैं, जिन्होंने दूरदर्शन पर ‘सुबह-सवेरे’ जैसे बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम के जरिये भोजपुरी लोकगीतों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी. आकाशवाणी और दूरदर्शन की नियमित कलाकार रहीं विजया ने ‘सुबह-सवेरे’ के बाद एनडीटीवी, आज तक, स्टार न्यूज, आईबीएन सेवन, जी टीवी, सहारा समय, पी-7 तथा ईटीवी आदि अनेक निजी टीवी चैनलों पर छा गयीं. इन चैनलों पर लोकसंगीत के अनेकानेक कार्यक्रमों के अलावा ईटीवी यूपी और बिहार पर भी विजया कई सालों तक लगातार ‘फोक जलवा’, ‘धुन’ और ‘तेरे मेरे गीत’ जैसे कार्यक्रमों में गायन व एंकरिंग सहित पेश करती रही हैं. विजया के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड है – महुआ चैनल पर लगातार चार सालों तक बिहाने बिहाने कार्यक्रम की एंकरिंग. इस कार्यक्रम के जरिये विजया को अपार लोकप्रियता हासिल हुई. इसके बाद विजया एक अन्य टीवी सीरियल भौजी नंबर वन की प्रमुख जज के रूप में भी खासी चर्चित रही हैं. विजया को अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं.

    उनके गीत टी-सीरीज, वीनस, टिप्स, लिप्स, रामा, भारत और नीलम आदि अनेक कैसेट कंपनियों से भोजपुरी, मैथिली और अंगिका भाषाओं में जारी हो चुके हैं.

    विजया ने अपने गाये गीतों में ज्यादातर खुद ही लिखे और कंपोज किए हैं. विजया ने उन्हीं गीतों को अपना सुर और स्वर दिया है, जिसमें भारतीय संस्कृति, संस्कार और माटी की खुशबू है. विजया का मानना है कि लोक संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक के गीत है. प्रकृति, उत्सव और उपनयन संस्कार के गीतों के अलावे जन -जन की आत्मा में लोक गीत और लोक संगीत रचा बसा है. वे कहती है कि लोक गीत और संगीत के बिना जीवन अधूरा है. मुझे अपनी विशुद्ध लोकगायिकी पर गर्व है.

    VIJAYA BHARTI
    India’s Multilingual Folk Singer
    Mob – 9810482284
    F-1 & 2, 6/155, Behind Milind Academy,
    Media Enclave, Sec-6, Vaishali, Ghaziabad 201012, UP
    Email- vijayabharti28@gmail.com

    http://folksingervijayabharti.blogspot.in

  • इस लोकतंत्र को रीसेट होने दीजिए

    इस लोकतंत्र को रीसेट होने दीजिए


    आजादी का पर्व नजदीक है। भारतीय लोकतंत्र और स्वाधीनता को लेकर राग जयजयवंती गाने वालों की टोलियां बाजार में निकलने वाली हैं। जिसने भी लाभ की मिठाई पा ली वह इस लोकतंत्र की का गुणगान करने लग जाएगा। जो वंचित रहा निश्चित तौर पर वह गाली देगा। दरअसल हम सोचने को राजी नहीं कि लोकतंत्र और आजादी के उल्लास में हमने क्या गंवा दिया है।हमें सोचना होगा कि आखिर भारत की तरुणाई को लगभग आधी सदी तक किन्होंने तरह तरह के षड़यंत्रों में फंसाकर रखा । भारत में किसी प्रतिष्ठान को चलाना कितना दुरूह कार्य है ये मध्यप्रदेश सैडमैप के प्रयासों को देखकर समझा जा सकता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ये संस्थान इसलिए बनाया था ताकि इसके माध्यम से प्रदेश के गौरवशाली प्रतिष्ठानों के लिए अच्छी गुणवत्ता का प्रशिक्षित मानव बल तैयार किया जा सके। डिग्रियां लेकर तो हर साल युवाओं की बड़ी वर्कफोर्स तैयार हो रही है। उनमें से नतीजे देने वाले युवाओं की तलाश भूसे में सुई तलाशने जैसी होती है। यही सोचकर सरकार ने एक गुणवत्ता पूर्ण संस्था के माध्यम से वर्कफोर्स उपलब्ध कराने का इंतजाम किया था। अब तक की यात्रा में सैडमैप ने प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभाई है। सरकारी संरक्षण होने की वजह से इस संस्थान को अधिक अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। संस्थान सरकारी नहीं है और एक तरह से निजी संस्था है इसलिए इसमें वैयक्तिक लाभ लेने के भी अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। केवल नैतिकता की झीनी चंदरिया ही सामाजिक दायित्वों की रक्षा कर पाती है। सैडमैप की कार्यकारी संचालक अनुराधा सिंघई के पहले तक जिन लोगों ने जवाबदारियां संभालीं उनमें से कई पर आरोप लगे। जांच एजेंसियों ने उनके घरों पर छापे भी मारे और कई गड़बड़ियां भी पाईं । यही वजह है कि अब कोई भी यहां नवाचार करने का प्रयास करता है उसे भी संदेह की निगाह से देखा जाने लगता है। मध्यप्रदेश शासन ने अनुराधा सिंघई को उनकी विश्वस्तरीय योग्यताओं को देखते हुए संस्थान संभालने की जवाबदारी दी है। उन्होंने जब यहां चल रहे नाकारेपन की गंदगी को साफ करना शुरु किया तो यहां अड्डा जमाए बैठी तरह तरह की माफिया ताकतों ने हल्ला मचाना शुरु कर दिया।अब तक इस संस्थान को लेकर भी उनकी उपलब्धियों पर चर्चा कम हुई अखबारी सुर्खियां बने फड़तूस बयानों को चटखारे लेकर खूब सुना सुनाया गया। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने के लिए जो कहानियां सुनाई गईं उन्हें आधार मानकर स्थानीय अदालत ने पुलिस को जांच की जवाबदारी दे दी । ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में श्रीमती अनुराधा सिंघई ने उच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत किया और अदालत ने उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए क्लीनचिट दे दी। अदालत ने झूठे तथ्यों के आधार पर अदालत और प्रशासन का समय बर्बाद करने वाले षड़यंत्रकारियों को भी फटकार लगाई है। अदालत की कड़ी पड़ताल के बाद तो अब इन षडयंत्रकारियों को बाज आना चाहिए। शासन को भी अपने उन महत्वाकांक्षी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आगे आना होगा जिनसे मध्यप्रदेश में सुशासन स्थापित होने जा रहा है। कुशल युवाओं को साथ लेकर एक सफल प्रदेश का निर्माण होने जा रहा है। प्रदेश में अब तक की जो राजनीति चलती रही है उसकी वजह से आज भी प्रदेश के विकास की रफ्तार गुजरात या अन्य राज्यों की तरह तेज गति नहीं पकड़ सकी है। अब तक की कांग्रेसी सरकारें रहीं हों या लगभग दो दशकों का भाजपा का शासनकाल दोनों के दौरान कभी बंधे बंधाए ढर्रे से आगे देखने की परंपरा विकसित नहीं हो पाई।संघ और भाजपा संगठन की आड़ लेकर भी कई बार षड़यंत्रकारियों ने सुशासन को ध्वस्त करने के प्रयास किए।इसके बावजूद कुछ प्रतिभाशाली अफसरों ने पहल करके रचनाधर्मी युवाओं को आगे लाने की जो मुहिम चलाई वह अब सफलीभूत होती नजर आने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि कृषि पर बोझ घटाने के लिए हमें उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा ताकि विशाल युवा वर्ग को हम नौकरियां उपलब्ध करा सकें। ऐसे में कंपनी सेकेट्री के रूप में लंबा अनुभव रखने वाली अनुराधा सिंघई जैसै प्रतिभाशाली प्रबंधकों पर हमें भरोसा करना होगा।उनके नेतृत्व में सैडमैप न केवल सरकारी प्रतिष्ठानों बल्कि कार्पोरेट जगत के लिए भी युवाओं की खेप तैयार कर रहा है। ऐसे में उन्हें सहारा देकर अवसर भी देना होगा ताकि प्रदेश एक नए दौर में प्रवेश कर सके। हम अपने पुरातनपंथी सोच को ही पकड़े बैठे रहेंगे और उसी के अनुसार लोगों को घुटने के स्तर पर लाते रहेंगे तो राज्य को ऊंचाईंयों तक नहीं पहुंचाया जा सकेगा। सेना की अग्निवीर योजना का विरोध करने वालों को अहसास भी नहीं कि पुरानी पेंशन स्कीम का शोर मचाकर वे युवाओं को किस अंधे कुएं में धकेल रहे हैं। कार्पोरेट सेक्टर में आरक्षण का षड़यंत्र करके किस तरह आरक्षित वर्ग के विशाल तबके को रोजगार के मंगलमयी अवसरों से वंचित कर रहे हैं। हमें पुराने शासकों और पुरानी सोच में ढल चुके लोगों को सख्ती से गो बैक कहना होगा। यदि लोकतंत्र के नाम पर लूजर्स को सत्ता के नजदीक जगह दी जाएगी तो विनर्स के माध्यम से रचे जा रहे नए संसार से हम प्रदेश को वंचित कर देंगे। हमें इस लोकतंत्र को नए संदर्भों में रीसेट होने देना होगा। सरकार ने अब तक अफवाहों पर ध्यान दिए बगैर स्वविवेक से फैसले लिए हैं। उसे इसी तरह आगे बढ़ते रहना होगा, तभी हम भारत माता के परम वैभव के लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे।

  • अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    पुलिस में दर्ज प्राथमिकी खारिज, शिकायत कर्ताओं को लगाई फटकार

    भोपाल। ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका क्रमांक 29833/2023 पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने न केवल सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही माना है, बल्कि उनके विरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को भी झूठा बताया है। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई की नियुक्ति उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में 27 जुलाई 2021 को की गई थी। उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी योग्यता पर सवाल उठाए जाने लगे थे। अब कोर्ट का बहुप्रतीक्षित निर्णय आने के बाद यह साबित हो गया कि सभी आरोप झूठे और निराधार थे, जिससे विरोधियों को कोर्ट में पराजय का सामना करना पड़ा। न्यायालय के निर्णय के सम्मान में सेडमैप में खुशी मनाई गई। निर्णय आते ही ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई को सभी ओर से बधाइयां मिलना शुरू हो गईं।


    बता दें कि सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति के खिलाफ न केवल पुलिस थाना में झूठी और फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी, बल्कि उन्हें परेशान करने के लिए न्यायालय में भी याचिका दायर की गई थी कि वह ईडी पद के लिए योग्य नहीं हैं और इस पद पर उनकी नियुक्ति में अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है, साथ ही विरोधियों के झूठ का भी पर्दाफाश हो गया है।


    दरअसल, भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘‘जीरो टॉलरेंस’’ की नीति पर अडिग कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई को पद से हटाने के लिए पिछले तीन वर्षाें से कतिपय तत्वों द्वारा हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे थे। भ्रष्टाचार के मंसूबे पूरे न होते देख कुछ लोगों ने कार्यकारी संचालक की नियुक्ति को ही चुनौती दे डाली। बिना जांच पड़ताल किए एक के बाद एक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने सबका डटकर मुकाबला किया, और जैसे-जैसे प्रकरण आगे बढ़ता गया, सभी को वास्तविकता का आभास होने लगा। ईडी के पक्ष में धीरे-धीरे लोग सामने आने लगे। कार्यकारी संचालक ने नियुक्ति सम्बंधी जो तथ्य प्रस्तुत किए, उनके सामने, विरोध में मुखर लोगों को हार मानने, के लिए विवश होना पड़ा।
    हालांकि इस मामले की बहस पिछले माह ही पूरी हो गई थी, परंतु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनने के बाद जहां सेडमैप के कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे वहीं उद्यमिता भवन में खुशियां मनाई गईं। कार्यकारी संचालक ने कहा कि अदालत ने किसी भी धारा में उन्हें दोषी नहीं पाया। उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था। नियुक्ति सम्बंधी मामले में बीते तीन वर्षों से घिरीं कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई ने गर्व से न्यायालय के फैसले का सम्मान किया। कर्मचारियों के बीच जीत की घोषणा करते ही उद्यमिता भवन में हर्ष की लहर दौड़ गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व संस्था के एक भ्रष्ट समूह ने षड़यंत्रपूर्वक ईडी को पद से हटाने के इरादे से पुलिस थाने में भी एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी, जिसमें गहन जांच-पड़ताल के बाद यह पाया गया कि ईडी सही हैं और भोपाल जिला और सत्र न्यायालय ने गहन जांच और विचार-विमर्श के बाद, कार्यकारी संचालक के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को झूठा करार दिया व एफ.आई.आर. खारिज कर दी गई।
    बताना चाहेंगे कि इससे पूर्व में हो चुकी विभागीय जांच में भी विभागीय अधिकारियों द्वारा श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही ठहराया गया। अब हाईकोर्ट के निर्णय उपरांत उस पर मोहर लग गई है।
    हालांकि तीन साल तक कार्यकारी संचालक को कई आरोपों का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी कार्यप्रणाली, उनकी उपलब्धियां और वित्तीय स्थिति के लिए उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आने का खतरा मंडराने लगा था। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने फैसले के बाद सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और राहत व्यक्त की।

    उन्होंने कहा कि न्यायालय का निर्णय एक कानूनी जीत से कहीं अधिक है। यह पारदर्शिता, नैतिक आचरण और भ्रष्टाचार के विरूद्ध छेड़ी गई मुहिम के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। कानूनी विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित टीम द्वारा हर प्रकार से मुकाबला किया गया और पूरी लगन से बहस की गई। एक अनुचित जांच का सामना करते हुए ईडी की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा, परंतु चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेगुनाही बरकरार रखी और कानूनी कार्यवाही में लगातार सहयोग किया।


    आरोपों के झूठा साबित होने पर अपनी प्रतिक्रिया में कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने कहा कि आज उन्हें फिर से विश्वास हो गया कि ईश्वर के घर में देर है, अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि वे शुरू से स्वयं को निर्दाेष बता रहीं थीं। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। आखिर सच की जीत हुई। न्यायालय का निर्णय आने के पश्चात कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने अपने अधिवक्ताओं, परिवार, मित्रों, और प्रशंसकों के समर्थन के लिए, सभी की शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, जो इस कठिन समय के दौरान उनके समर्थन में अटूट रहे तथा जिनकी वजह से उन्हें साहस और संबल मिला और वे कठिनाइयों से जूझ सकीं, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन सभी के प्रति उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित किया।
    अनुराधा को ऐसे किया प्रताड़ित…!


    o संस्था में बाहरी एजेंसियों से मिला हुआ, कुछ कर्मचारियों का एक ऐसा अंदरूनी समूह (सिंडिकेट) था, जो वित्तीय अनियमितता में लिप्त था और संस्था के हितों से ऊपर अपने हितों को रखता था।
    o इस षडयंत्रकारी समूह ने ही कार्यकारी संचालक के कार्यभार संभालने से पूर्व ही दो प्रकरण दर्ज करा रखे थे, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।
    o उसके बाद शुरू हुआ अनगिनत आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) लगाने और सी.एम. हेल्पलाइन में झूठी शिकायतों का सिलसिला
    o दुर्भावनापूर्ण इरादे और बुरी नियत से भद्दे, अशोभनीय पत्र लिखे गए
    o छवि धूमिल करने के इरादे से कई तरह की अफवाहें फैलाई गईं, कर्मचारियों को उनके विरूद्ध कार्य करने के लिए बरगलाया गया।
    o योग्यता और नियुक्ति को लेकर जनहित याचिका (पी.आई.एल.) क्रमांक 11889/2022 लगाई गई, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 23 मई 2022 को खारिज कर दिया और नियुक्ति को सही ठहराया।
    o कूटरचित, मिथ्या और भ्रामक दस्तावेज तैयार कर षडयंत्रपूर्वक आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया, जो पुलिस जांच में झूठे पाए गए और न्यायालय ने भी पुष्टि करते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
    o षडयंत्रकारी यहीं नहीं रूके, छवि धूमिल करने के लिए कतिपय तत्वों द्वारा गुमनाम, फर्जी और झूठी शिकायतें, अलग-अलग नामों से विभिन्न फोरम पर की जाती रहीं।
    o संस्था में कार्यरत कर्मचारियों के अतिरिक्त नवनियुक्त कर्मचारियों को ईडी के खिलाफ़ भड़काकर कार्य बाधित किया गया।
    o कोर्ट में अपील खारिज हो जाने से हताश लोगों ने मनगढ़ंता तरीके से मिथ्या, भ्रामक और काल्पनिक चैट बनाकर वायरल किया और चरित्र हनन का प्रयास किया। आपको बता दें कि क्राइम ब्रांच द्वारा जांच में साबित हो गया कि मनगढ़ंत और झूठी चैट बनाने के पीछे एक निष्कासित एजेंसी रतन एम्पोरियम का प्रबंधक रमनवीर अरोरा था। उसके विरूद्ध कोर्ट में चालान भी पेश हो गया है।
    o अपने मंसूबों में कामयाबी मिलते न देख और कोर्ट में अपील खारिज होने से हताश भ्रष्ट समूह की शह पर कई दफा ईडी की रैकी और पीछा करते हुए लोगों से भी जान का खतरा पाया गया, जिसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में की गई।
    o उक्त समूह द्वारा दहशत फैलाने का मकसद ईडी को मरवाने की कोशिश भी हो सकता है।
    o मीडिया को भी गुमराह करने की कोशिशें की गईं, झूठी, भ्रामक और मनगढ़ंता जानकारी देकर ईडी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन की साजिशें की गईं।


    § * योग्यता पर प्रश्नचिन्ह कैसे…?*
    o एक स्वशासी संस्था जो वर्ष 2021 में बंद की कगार पर थी और निरंतर कई वर्षों से घाटे में जा रही थी, उसे अपनी कार्यकुशलता से सफलतापूर्वक संचालित कर दिखाया। उन्होंने आर्थिक संकट की स्थिति में ईडी का कार्यभार संभालते हुए मात्र चार माह में 14 माह का (बीते 10 माह सहित) वेतन देकर संस्था को घाटे से उबार दिया।
    o ईडी के कार्यभार से पूर्व संस्था की हालत यह थी कि कर्मचारियों को 10 माह से वेतन नहीं मिल पा रहा था, जो कि उनके ज्वाइन करने के चार माह के भीतर ही 14 माह का वेतन प्रदान कर दिया गया और तब से अब तक कर्मचारियों को नियमित वेतन प्राप्त हो रहा है।
    o संस्था के क्षेत्रीय समन्वयकों की वित्तीय अनियमितता और दुराचार के कारण संविदा कर्मचारी और जिला समन्वयक काफी प्रताड़ित हो रहे थे, उनकी मुश्किलों को क्षेत्रीय समन्वयक का पद समाप्त करते हुए, दूर किया गया।
    o संस्था अपने अस्तित्व से लड़ रही थी और बेहद खराब छवि से गुजर रही थी, तब उन्होंने छवि निखारने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए और संस्था के प्रति विश्वास का वातावरण निर्मित करते हुए पहचान दिलाने का कार्य किया।
    o संस्था में गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। मैनपावर प्रभाग में चल रही विसंगतियों को दूर करते हुए सेडमैप को बतौर मॉनीटरिंग एजेंसी और फेसिलिटेटर के रूप में उभारा, जिसके परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम के अन्तर्गत प्रशिक्षण एवं आउटसोर्स सेवाओं के लिए संस्था को नामांकित किया गया।
    o संस्था के लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए एक ब्लूपिं्रट तैयार किया गया, जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश मंे कोई बेरोजगार न रहे, इस हेतु सभी को रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने का बीड़ा उठाया गया।
    o और भी कई ऐसे प्रेरक कार्य हैं जो शासन की मंशा के अनुरूप किये जा रहे हैं और उनके सुखद परिणाम भी आ रहे हैं।
    § क्या इसे कहेंगे अयोग्य होना?
    o जो कार्यभार संभालने के उपरांत महज 4-5 माह में ही संस्था को घाटे से उबार देता है।
    o जो गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए संस्था को उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर करता है।
    o जो जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार के विरूद्ध कठोर कदम उठाता है।
    o जो संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन के लिए नए-नए प्रयोग करता है।
    o जिन्हें कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पाेरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सरकारी सलाह सहित विकास और कॉर्पाेरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
    o जो बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं और बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर सहित कई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत हैं।
    o जो फैलो कंपनी सेक्रटरी की उपाधि से विभूषित हैं और वेद, वेदांग एवं उपनिषद में गहन अध्ययन के लिए सम्मानित हैं।
    o जो आजीविका संवर्द्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए विदेशों में तीन बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
    o जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता और दूरदर्शिता से संस्था का कायापलट किया है।


    फैसले के बाद विधि विशेषज्ञों की राय
    न्यायालय के फैसले पर सेडमैप के विधिक सलाहकार एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह और वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे ने प्रसन्नता प्रकट की। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई के पक्ष में न्यायालय का निर्णय आने के उपरांत खुशी जताते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह ने कहा कि ईडी वाकई बहुत साहसी और जुझारू हैं, जिन्होंने अकेले इस विषम परिस्थिति का सामना किया और बुराई को जड़ से हटाया। यदि देश में ऐसे और लोग हों तो प्रदेश का कायापलट करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शासन की राजस्व चोरी को रोका है। उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।
    वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे का भी कहना है कि ईडी की नियुक्ति को कोर्ट ने पूरी तरह से सही ठहराया है। कोर्ट ने माना कि ईडी की नियुक्ति पूरी तरह से सही है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनकी नियुक्ति को सही ठहराया गया है वह काफी योग्य हैं। इसलिए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद साबित हुए।


    शिकायतकर्ता मनोज शर्मा निष्कासित अकाउंटेंट है जो कि वित्तीय अनियमितता में भ्रष्ट समूह में शामिल था। इसके लिए उसके द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से फर्जी और झूठी शिकायत की गई। माननीय कोर्ट ने उसे बुरी तरह फटकार लगाई है।
    विभागीय जांच के विरूद्ध आर.डी. मांडवकर जब हाईकोर्ट में स्टे लेने गया तो माननीय हाईकोर्ट जज ने स्टे की पिटीशन को खारिज करते हुए आर.डी. मांडवकर को भी फटकार लगाई थी। ईडी ने विभागीय जांच शुरू की तो उसने बदला लेने के लिए ईडी के विरूद्ध झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कराई।


    माननीय न्यायालय का निर्णय भ्रष्ट समूह में शामिल मनोज शर्मा, शरद कुमार मिश्रा, आर.डी. मांडवकर और रमनवीर अरोरा समेत समस्त अंदरूनी कर्मचारी और बाहरी उनके सहयोगी साजिश में जुटे अन्य लोगों के लिए एक बड़ा सबक है।

  • सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं

    सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं


    भोपाल 20 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग ने जिन उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर कुशल कामगार के रूप में जिलों में भेजा है उन्हें कई कलेक्टर वेतन ही नहीं देना चाहते हैं। गुना कलेक्टर ने ऐसे करीब दस कर्मचारियों से साल भर काम कराया और बाद में कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया में शामिल सैडमैप को ये कहते हुए वापस लौटा दिया कि उन्हें काम करना नहीं आता है। कर्मचारियों ने अपना हक पाने के लिए शासन के दरवाजे खटखटाए हैं।


    मामला सैडमैप संस्था का है। इस अर्धशासकीय संस्था को सरकार ने नई पीढ़ी के उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिए तैनात कर रखा है।संस्था विभिन्न रुचियों वाले उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करती है और कार्पोरेट व सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराती है। निजी क्षेत्रकी भी कई बड़ी कंपनियां कुशल कर्मचारियों के लिए सैडमैप को डिमांड भेजती हैं और उन्हें अपनी उद्यमिता बढ़ाने में मदद मिलती है। विभिन्न जिलों में पदस्थ संस्था के क्षेत्रीय अधिकारी युवाओं को उनकी रुचि के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं और शासन की निर्धारित दर पर सैडमेप को भी अपना खर्ची निकालने की जवाबदारी दी गई है। शासन सीधे तौर पर संस्था को अनुदान नहीं देता है।


    ताजा मामला गुना कलेक्टर सत्येन्द्र सिंह के उस इंकार से गरमाया है जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया से चयनित कर्मचारियों का वेतन जारी करने से इंकार कर दिया। उनकी ओर से सैडमैप को पत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि वे कर्मचारी सक्षम नहीं हैं और उन्हें काम नहीं आता है। गुना कलेक्ट्रेट को ये अहसास तब हुआ जब उन कर्मचारियों ने कई महीनों का लंबित वेतन मांगते हुए कलेक्टर कार्यालय से संपर्क किया। कलेक्टर महोदय ने कर्मचारियों का वेतन तो जारी नहीं किया बल्कि उनके चयन का ठीकरा सैडमैप पर ही फोड़ दिया।


    गौरतलब है कि सैडमैप में इन पैनल्ड रूप से जुड़ी हुई एजाईल सिक्यूरिटी फोर्स प्राईवेट लिमिटेड फर्म की ओर से आयोजित चयन प्रक्रिया में जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक का भी एक प्रतिनिधि शामिल था। उनसे अपनी कसौटी पर जांचकर युवाओं का चयन किया था। लगभग साल भर तक परियोजना में काम करते रहने के बावजूद जब कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया गया तब उन्होंने शोरगुल मचाना प्रारंभ कर दिया। उनकी जरूरतों को देखते हुए लगभग दो माह का वेतन सैडमैप ने अपने फंड से उपलब्ध कराया ताकि बजट जारी होने और वेतन मिलने तक कर्मचारियों का जीवनयापन हो सके।


    कलेक्टर गुना की ओर से जब कर्मचारियों को वेतन देने से इंकार कर दिया गया तब उन्होंने अपनी पीड़ा से शासन को अवगत कराया है। शोरगुल बढ़ता देख गुना कलेक्टर की ओर से जारी पत्र सार्वजनिक कर दिया गया जिसमें कर्मचारियों के चयन के लिए ठीकरा सैडमैप पर फोड़ा गया है।


    मामले में पेंच तो ये है कि यदि गुना जिला शिक्षा केन्द्र के समन्वयक के पास वेतन देने की हैसियत नहीं थी तो उन्होंने सैडमैप से कर्मचारी मांगे ही क्यों। कर्मचारियों का चयन भी उनके प्रतिनिधि ने स्वयं किया तब क्या कलेक्टर महोदय से अनुमति नहीं ली गई थी। गुना जिला प्रशासन यदि कर्मचारियों का वेतन देने में सक्षम नहीं था तो कलेक्टर महोदय ने उन्हें अन्य उद्यमों में रोजगार मुहैया कराने की जवाबदारी क्यों नहीं निभाई। लगभग साल भर कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनकी योग्यता पर सवालिया निशान लगाकर युवाओं के जीवन से खिलवाड़ क्यों किया गया।


    जनता के खजाने से लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों का स्थापना व्यय वसूलने वाली नौकरशाही आखिर क्यों युवाओं को अपना दुश्मन मान रही है। इतना बड़ा बजट लेकर भी ये नौकरशाही उत्पादकता बढ़ाने के पैमाने पर लगातार फिसड्डी साबित होती जा रही है। तमाम कार्पोरेट संस्थान अपने कर्मचारियों की कुशलता बढ़ाने के लिए उन्हें नए नए प्रशिक्षण देते हैं ऐसे में सैडमैप से प्रशिक्षण पाकर सेवाएं उपलब्ध कराने वाले युवाओं के साथ ये खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है इस पर शासन को विचार अवश्य करना होगा।

  • अग्निवीरों को चिंतामुक्त करने के उपाय करेगी सेना

    अग्निवीरों को चिंतामुक्त करने के उपाय करेगी सेना


    नई दिल्ली,13 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना वर्तमान में सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ भर्ती कार्यक्रम का आंतरिक मूल्यांकन कर रही है और कुछ समायोजन का सुझाव दे सकती है ।
    केंद्र सरकार ने 2022 में इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरु किया था। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इस योजना पर सवाल उठाए थे इसके बाद सेना ने आंतरिक मूल्यांकन करके योजना में और भी नए सुधार शामिल करने की तैयारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समीक्षा का उद्देश्य आने वाली सरकार को कार्यक्रम में संभावित संशोधन करने में सहायता प्रदान करना है।


    इंडियन एक्सप्रेस ने जिन अधिकारियों के हवाले से ये खबर जारी की है उसमें बताया गया है कि , सेना का सर्वेक्षण अग्निवीरों सहित विभिन्न हितधारकों से फीडबैक एकत्र कर रहा है, साथ ही विभिन्न रेजिमेंटल केंद्रों में भर्ती और प्रशिक्षण कर्मियों, तथा अग्निवीरों की देखरेख करने वाले यूनिट और सब-यूनिट कमांडरों से भी फीडबैक एकत्र कर रहा है।रिपोर्ट में बताया गया है कि सेना ने संबंधित पक्षों को 10 सवालों वाली प्रश्नावली भेजी थी। मई माह तक उसने प्राप्त फीडबैक के आधार पर नए सुधार लागू करके योजना को कारगर बनाया है।


    फीडबैक में योजना के शुरू होने से पहले भर्ती किए गए सैनिकों के साथ अग्निवीरों के तुलनात्मक प्रदर्शन का विश्लेषण, साथ ही उनके सकारात्मक और नकारात्मक गुणों पर टिप्पणियां शामिल होंगी।
    इस फीडबैक के आधार पर, सेना योजना में संभावित समायोजन का प्रस्ताव करेगी। इसके अतिरिक्त, अग्निवीरों से रक्षा सेवाओं में शामिल होने के उनके उद्देश्यों, उनके पिछले नौकरी प्रयासों और क्या उन्हें लगता है कि उन्हें स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाना चाहिए, के बारे में इनपुट मांगा जाएगा। वे अपनी चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अपने पसंदीदा करियर विकल्पों के बारे में भी जानकारी देंगे और क्या वे सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं।इसके अलावा, सर्वेक्षण में यह भी पूछा जाएगा कि क्या ये सैनिक अपने परिचितों को अग्निवीर बनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।


    अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवारों की भर्ती की जाती है, जिन्हें अग्निवीर के नाम से जाना जाता है। उन्हें या तो सीधे शैक्षणिक संस्थानों से या भर्ती रैलियों के माध्यम से भर्ती किया जाता है। सैनिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे पेंशन के लिए पात्रता के बिना चार साल की अवधि तक सेवा करें।
    योजना की शर्तों ने विवाद को जन्म दिया है, तथा सेवानिवृत्त सैनिकों और इच्छुक व्यक्तियों ने सेवारत कार्मिकों पर इसके संभावित प्रभाव, सशस्त्र बलों की व्यावसायिकता और नागरिक समाज के संभावित सैन्यीकरण के संबंध में चिंताएं व्यक्त की हैं।


    हरियाणा में हाल ही में एक रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि सेना अग्निपथ योजना का विरोध करती है, जिसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया तथा कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह इसे बंद कर देंगे।
    हालाँकि, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले कहा था कि यदि आवश्यक हो तो सरकार अग्निपथ योजना में समायोजन करने के लिए तैयार है।
    वर्तमान में, 40,000 अग्निवीरों के दो बैच सेना में सेवारत हैं, जिनमें से 7,385 अग्निवीरों के तीन बैचों ने नौसेना में प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, तथा 4,955 अग्निवीर वायु प्रशिक्षु वायु सेना में प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि कांग्रेस के इस दुष्प्रचार अभियान से सेना के भीतर भी असमंजस की स्थितियां बन गईं थीं। जिस प्रकार नई पेंशन स्कीम को लेकर कांग्रेस ने हंगामा मचाया था उसी प्रकार सेना की पेंशन के आधार पर वैमनस्य के बीज बोने की कोशिश की गई है।गृह मंत्रालय के सूत्र इस हंगामे को विदेश प्रवर्तित मानने से इंकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि भले ही ये दुष्प्रचार किन्हीं विदेशी ताकतों के इशारे पर किया जा रहा हो लेकिन इससे हमें आंतरिक सुधार का अवसर मिला है और हम अपने सैनिकों और उनके परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक सुधार की संभावना पर पूरी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

  • बाबा रामदेव की कंपनियों में रोजगार दिलाएगा सैडमैप

    बाबा रामदेव की कंपनियों में रोजगार दिलाएगा सैडमैप

    सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने किया पतंजलि आयुर्वेद से समझौता

    भोपाल। आजीविका सृजन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अब पतंजलि समूह और उद्यमिता विकास केन्द्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) मिलकर काम करेंगे। केन्द्र की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने इस आशय के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।


    सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि पतंजलि समूह के साथ आने से आजीविका अभिवृद्धि के प्रयासों को बल मिला है। रोजगार-स्वरोजगार के क्षेत्र में सेडमैप द्वारा किए जा रहे प्रयास किसी से छिपे नहीं हैं। सेडमैप की उपलब्धियों को देखते हुए ही अब पतंजलि समूह द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, महिलाओं के समग्र उत्थान और विभिन्न क्षेत्रों में आजीविका सृजन पर सेडमैप के साथ मिलकर काम किया जाएगा।


    सेडमैप के साथ कार्य किए जाने पर बाबा रामदेव ने भी प्रसन्नता जताई। इस अवसर पर पतंजलि समूह के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आजीविका सृजन के लिए जो सुझाव सेडमैप द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं वह सराहनीय हैं। सेडमैप और पतंजलि समूह दोनों देश की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है, और पतंजलि में किए गए अनुसंधान कार्यों का लाभ मध्यप्रदेश के विकास के कार्यों मंद हो सकेगा। सेडमैप के साथ नए करार के उपरांत कई व्यावसायिक अवसरों की खोज और मुख्यधारा से बेरोजगार युवाओं को जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस अवसर पर रोजगार-स्वरोजगार के लिए आवश्यक उद्यमशीलता की सफलता पर चर्चा की गई।

  • जगदीश देवड़ा ने बजट में समृद्धि के नए आयाम खोले

    जगदीश देवड़ा ने बजट में समृद्धि के नए आयाम खोले

    भोपाल,03 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश कर दिया है। 3.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसानों को ध्यान रखकर जो सुधार किए गए हैं उनके अनुरूप लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से मिलने वाली सौगातें इसमें शामिल नहीं हैं।


    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने जमकर हंगामा किया। उनकी मांग थी कि नर्सिंग कॉलेज घोटाले के लिए तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को बर्खास्त किया जाए। इस एकसूत्री मांग के साथ विधायकों ने आसंदी के पास आकर नारेबाजी की और बजट भाषण में व्यवधान डालने की कोशिश की। जब तक देवड़ा बोलते रहे, तब तक विपक्ष के विधायक हंगामा करते रहे। बाद में उन्होंने वॉकआउट कर लिया और बाहर जाकर धरना दिया। पत्रकारों से चर्चा में देवड़ा ने विपक्ष के इस रवैये को कष्टप्रद बताया है।


    देवड़ा ने 2024-25 के बजट में जो प्रमुख घोषणाएं की हैं, उनमें पीएम ई-बस योजनांतर्गत छह शहरों (इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं सागर) में भारत सरकार की सहायता से 552 ई-बसों का संचालन करना शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने पांच साल में वार्षिक बजट के आकार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। 2024-25 के लिए 3,65,067 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया है, जो 2023-24 के 3,14,025 करोड़ रुपये के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है।
    मध्य प्रदेश में अगले पांच साल में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के माध्यम से 299 किमी का अटल प्रगति पथ, 900 किमी का नर्मदा प्रगति पथ, 676 किमी के विंध्य एक्सप्रेस-वे, 450 किमी का मालवा-निमाड़ विकास पथ, 330 किमी का बुंदेलखंड विकास पथ एवं 746 किमी का मध्य भारत विकास पथ बनाया जाएगा। इनके दोनों ओर औद्योगिक कॉरीडोर विकसित होंगे। भोपाल, इन्दौर, जबलपुर एवं ग्वालियर में एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन शहर में बायपास के साथ शहर में आने वाले सभी मार्गों को चार लेन अथवा आठ लेन किया जाएगा।


    राज्य सरकार ने संस्कृति विभाग के लिए 1,081 करोड़ रुपये रखे हैं। यह 2023-24 के मुकाबले 250 प्रतिशत अधिक है। इस राशि से भारत के कालजयी महानायकों की तेजस्विता का संग्रहालय वीर भारत न्यास स्थापित किया जा रहा है। यह देश और दुनिया का अपनी तरह का पहला संग्रहालय होगा। भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पथ गमन किया। राज्य की सीमाओं के अंतर्गत राम पथ गमन के अंचलों के विभिन्न स्थलों को चिह्नांकित कर उनका विकास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री कृष्ण पाथेय योजना की घोषणा की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में श्री कृष्ण पथ के पुनरावेषण और संबंधित क्षेत्रों के साहित्य, संस्कृति तथा संस्कार का संरक्षण, संवर्धन किया जाना प्रस्तावित है।
    कृषि क्षेत्र का बजट 15 प्रतिशत, स्वास्थ्य के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। शिक्षा में चार प्रतिशत, एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की योजनाओं के लिए 10 प्रतिशत, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 9 प्रतिशत, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के लिए 13 प्रतिशत, संस्कृति संवर्धन के लिए 35 प्रतिशत, रोजगार के लिए 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।


    अगले पांच साल में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के माध्यम से 299 किमी का अटल प्रगति पथ, 900 किमी का नर्मदा प्रगति पथ, 676 किमी के विंध्य एक्सप्रेस-वे, 450 किमी का मालवा-निमाड़ विकास पथ, 330 किमी का बुंदेलखंड विकास पथ एवं 746 किमी का मध्य भारत विकास पथ बनाया जाएगा। इनके दोनों ओर औद्योगिक कॉरीडोर विकसित होंगे।


    सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन शहर में बायपास के साथ शहर में आने वाले सभी मार्गों को चार लेन अथवा आठ लेन किया जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 2024-25 में 1,000 किमी सड़क बनाएंगे और 2,000 किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य है।
    अमरकंटक एवं सतपुडा ताप विद्युत गृहों में 660-660 मेगावाट की नई विस्तार इकाइयों का निर्माण होगा। 603 सर्किट किमी पारेषण लाइनों एवं 2,908 मेगावाट क्षमता के अति उच्च दाब उपकेन्द्र के कार्य प्रस्तावित हैं।
    प्रति व्यक्ति आय 2023-24 में 1,42,565 रुपये रही, जो 2003-04 की 13,465 रुपये से लगभग 11 गुना हो गई है। नीति आयोग की जनवरी-2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच मध्य प्रदेश के 2.30 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
    श्री अन्न उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन गठित किया है। राज्य सरकार द्वारा श्री अन्न के उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि के लिये फेडरेशन के माध्यम से उपार्जित किये जा रहे कोदो-कुटकी पर प्रति किलोग्राम 10 रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।
    डिंडोरी में श्री अन्न अनुसंधान केन्द्र की स्थापना होगी। क़ृषि क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन में चना तथा ग्वालियर में सरसों अनुसंधान संस्थान बनेंगे।


    पशुओं को घर पहुंच चिकित्साः मई 2023 से प्रारंभ 406 चलित पशु चिकित्सा इकाइयों ने अब तक 5.46 लाख से अधिक पशुओं को घर पर चिकित्सा सुविधा दी है। चलित पशु कल्याण सेवा योजना में 82 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
    मुख्यमंत्री सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समितियों के माध्यम से प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट।
    2,190 गौ-शालाओं का संचालन हो रहा है। इनमें लगभग तीन लाख गौ-वंश का पालन हो रहा है। प्रति गौ-वंश प्रति दिन 20 रुपये दिए जाते थे, जिसे दोगुना कर 40 रुपये किया जाएगा। तीन गुना वृद्धि करते हुए बजट में 250 करोड़ रुपये रखे हैं। 2024-25 को गौ-वंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।
    किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के महत्वपूर्ण घटक जैसे सूक्ष्म सिंचाई, फसल विस्तार, संरक्षित खेती, बागवानी, मधुमक्खी पालन की स्थापना पर फोकस।
    किसानों की आय बढ़ाने में फूड प्रोसेसिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्योग संवर्धन नीति के अंतर्गत फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को पांच वर्ष तक मंडी शुल्क में शत-प्रतिशत तथा विद्युत टैरिफ में एक रुपये प्रति यूनिट की छूट।
    प्रदेश में उपलब्ध 4 लाख 42 हजार हैक्टेयर जलक्षेत्र में से 4 लाख 40 हजार हेक्टेयर जलक्षेत्र मछली पालन अन्तर्गत लाया जा चुका है। वर्ष 2023-24 में 3 लाख 82 हजार मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन तथा लगभग 215 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है।
    अहमदाबाद में ग्लोबल फिशरीज कॉन्फ्रेंस में सिवनी को बेस्ट इनलेण्ड डिस्ट्रिक्ट का प्रथम पुरस्कार तथा बालाघाट की प्राथमिक सरस्वती मछुआ सहकारी समिति को मछुआ सहकारी समिति की श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला है।
    विद्यार्थियों में स्किल डेवलपमेंट एवं एमर्जिंग ट्रेण्डस के दृष्टिगत ए.आई, मशीन लर्निंग, कोडिंग आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।


    प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत अभी तक 1,500 प्री-स्कूल क्लासेस संचालित कर रहे हैं। 2024-25 में 3,200 प्राथमिक शालाओं में प्री-स्कूल शुरू होंगे।
    सरकारी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता के साथ खेल, नृत्य, संगीत शिक्षकों के 11 हज़ार पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है।
    730 स्कूलों को पीएम श्री योजना अंतर्गत चिन्हित किया है। शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के साथ भौतिक संसाधनों का उन्नयन भी किया जाएगा। प्रदेश के बैगा, भारिया, सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु पीएम जन-मन योजना के अंतर्गत इस वर्ष 22 नवीन छात्रावास प्रारंभ किए जाएंगे।
    प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा सुगम बनाने हेतु तीन नवीन शासकीय विश्वविद्यालयों यथा क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन, तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना एवं रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर की स्थापना की है। दो निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना भी प्रदेश में हुई है।
    वर्ल्ड बैंक परियोजना के माध्यम से 247 महाविद्यालयों में राशि 244 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर भौतिक एवं अकादमिक अधोसंरचना विकास के कार्य कराये जा रहे हैं।


    उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पीएम उषा परियोजना के तहत प्रदेश में 565 करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत हुई है।
    प्रत्येक जिले में एक कॉलेज को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में अपग्रेड किया जाएगा। इन कॉलेजों के लिए दो हजार से अधिक नवीन पद भी सृजित किए गए हैं।
    प्रदेश में 22 नए आईटीआई शुरू होंगे। वर्तमान में 268 सरकारी आईटीआई संचालित हो हैं। नए आईटीआई में 5,280 नई सीट्स मिलेंगी। देवास, छिंदवाडा एवं धार को ग्रीन स्किलिंग आईटीआई में विकसित कर सोलर टेक्नीशियन एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक पाठ्यक्रम प्रांरभ किए हैं ।
    विद्यार्थियों को विशिष्ट कौशल एवं आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक संभाग में स्थित इंजीनियरिंग/पॉलीटेकनिक महाविद्यालय में कोडिंग लैब की स्थापना की जाएगी।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा


    भोपाल,01 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आज मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने पहली बार जिस सख्त लहजे में जवाब दिया उससे पूरे सदन में अचानक सन्नाटा फैल गया। कमोबेश दो दशक बाद पहली बार सदन के नेता की दहाड़ ने नेतृत्व की मौजूदगी का अहसास कराया है।


    मामला कथित नर्सिंग भर्ती घोटाले का था जिसमें विपक्ष ये कहते हुए आक्रामक था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहती क्योंकि इससे उसकी नाकामियां उजागर होने वाली हैं। विपक्ष में बैठे कांग्रेस के कई सदस्य सफेद एप्रिन पहिनकर सदन में आए थे। चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराए जाने के लिए उन्होंने सदन में दबाव बनाना शुरु किया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर से कहा कि हमारे तीस चालीस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव देकर इस लोक महत्व के विषय पर चर्चा कराने की मांग की है। ये मामला युवाओं से जुड़ा है और परीक्षाओं व संचार घोटालों की वजह से वे परेशान हैं। इस विषय पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए।


    इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा एवं कार्य संचालन संबंधी पुस्तिका के पेज क्रमांक साठ पर साफ लिखा है कि जो मुद्दे किसी न्यायाधिकरण आयोग आदि के सामने विचाराधीन हैं उन विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। इन मामलों में जांच एजेंसी जांच कर रही है। प्रकरण न्यायालय में भी चल रहा है जजों की कमेटी इस मामले पर विचार कर रही है ऐसे में नियमों और परंपराओं के अनुसार इस विषय पर चर्चा नहीं हो सकती।


    इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग परीक्षा के संबंध में बात करना चाह रहे हैं। सीबीआई तो कालेजों की जांच कर रही है। ये मामला न्यायालय में नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव में जो मुद्दा उठाया गया है वो न्यायालय में विचाराधीन है। उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग काऊंसिल पर सरकार के बनाए गए नियमों राजपत्र में प्रकाशन आदि के विषय में बात करना चाह रहे हैं। सरकार इस पर बात क्यों नहीं करना चाहती वह बच क्यों रही है।


    अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट का सत्र हो या न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण उन पर सदन में चर्चा नहीं कराई जाती है क्योंकि चर्चा के दौरान कई तरह के आक्षेप भी लगा दिये जाते हैं जिनका जवाब न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप करना हो जाता है। इन्हीं सब चर्चाओं में पक्ष और विपक्ष के कई सदस्य तैश में आकर तर्क दे रहे थे ,शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक स्थगित कर दी।


    एक बार फिर जब सदन समवेत हुआ तो उमंग सिंघार ने एक बार फिर इस विषय पर चर्चा कराए जाने की मांग कर दी। इस पर कैलाश विजय वर्गीय ने कहा कि डाक्टर मोहन यादव की सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। ये कोई तात्कालिक घटना नहीं है तीन चार या पांच सत्र बीत चुके हैं पुराना मामला है इसलिए इस पर बजट चर्चा के दौरान आसानी से बात हो जाएगी।
    इस पर कांग्रेस के भंवर सिंह शेखावत ने गुस्से में भरकर कहा कि मामला कांग्रेस और भाजपा का नहीं है,प्रदेश के बच्चों के भविष्य का है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें ये कहकर समझाने का प्रयास किया कि सरकार ने कह दिया है कि वह चर्चा कराने को तैयार है। इस पर श्री शेखावत गुस्से से बोले कि फिर चर्चा कराईए न। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बात को संभालते हुए कहा कि हम किसी विषय पर पीछे नहीं हट रहे हैं। जन हितैषी विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। विधानसभा का कामकाज रोककर स्थगन लाने और ध्यानाकर्षण में अंतर होता है इसे अगली बार ले आईए फिर चर्चा करा लेंगे।


    इस पर भंवर सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि आप चर्चा से नहीं घबराते आप बहादुर हैं आपको इसका प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जवाब में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमें आपके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ये सर्टिफिकेट आप अपने पास रख लें हम पारदर्शी तरीके से सरकार चलाते हैं । सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो रही है और हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर भी श्री शेखावत शांत नहीं हुए उन्होंने कहा कि आप चर्चा क्यों नहीं कराना चाहते जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उन्हें आप बचाना चाह रहे हैं।


    इस मुद्दे पर लगभग शांत बैठे मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमने शुरु से स्वर रखा है कि हम हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। किसी मसले पर हमारी सरकार डरने वाली नहीं है और न ही हम पीछे हटने वाले हैं। आपके स्वर किसी भी स्तर तक जा सकते हैं लेकिन हम संयम के साथ स्पष्टता से अपनी बात रखना चाहते हैं। यदि कोई उत्तेजना से बात करेगा तो ये सुनने की आदत हमारी भी नहीं है।माननीय सदस्य गण सुन लें अपनी बात को संयमित तरीके से रखें। तीखे स्वरों में कही गई उनकी बात पर पूरे सदन में खामोशी छा गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बात को संभालते हुए कहा कि हम विवाद के बजाए चर्चा कराना चाहते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि ये चर्चा ग्राह्यता पर नहीं हो रही है। दोनों पक्षों ने इस विषय पर फैसला लेने का अवसर मुझे दिया है इसलिए कल मैं किसी उचित नियम के तहत इस पर चर्चा कराऊंगा।