Month: June 2024

  • लौह प्रतिमाओं के बोझ तले कुचली जाती भाजपा

    लौह प्रतिमाओं के बोझ तले कुचली जाती भाजपा


    आलोक सिंघई
    आम चुनाव 2024 के नतीजों के बाद भाजपा की आलोचना करने वालों के हौसले बुलंद हो गए हैं। तमाम विपक्षी दल एक सुर में चिचिया र हे हैं कि भाजपा की नीतियों को जनता ने नकार दिया है। इस कथित हार के कारणों की समीक्षा भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि ये समीक्षा भाजपा और आरएसएस कर रहे हैं। चर्चाएं जरूर हैं पर भाजपा संगठन ने औपचारिक तौर पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। अलग अलग धड़े हार का ठीकरा फोड़ने के लिए खोपड़ी ढूंढ़ रहे हैं। जबकि कम सीटें आने के बावजूद सत्ता में लौटी मोदी सरकार जोर शोर से अपनी नीतियों का क्रियान्वयन करने में जुट गई है। जो भाजपाई और विपक्षी कांग्रेसी व अन्य राजनीतिक दल भाजपा की कथित हार की समीक्षा कर रहे हैं वे केवल बाहर से खड़े होकर कयास लगा रहे हैं। भाजपा की अंदरूनी स्थितियों की समीक्षा नहीं हो पा रही है।


    भाजपा और संघ को जो लोग करीब से देखते रहे हैं वे जानते है कि भाजपा का संगठन ऊपर से जितना सर्वव्यापी दिखता है भीतर से उतना ठोस नहीं है। इसकी वजह देश का वो संविधान है जिसने अन्य राजनीतिक दलों की वजह से समाज को खंड खंड देखने की परंपरा पाई है। कांग्रेस का फार्मूला तो देश को विभाजित करके राजनीति करने के लिए ही बनाया गया था। कांग्रेस ने अपने पूरे शासनकाल में समाज को खंड खंड बांटने का प्रयास किया और फिर उनमें राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करने का प्रयास किया । ये स्वाभाविक नेतृत्व हो सकता था लेकिन कांग्रेस को जिस तरह एक ही परिवार के इर्द गिर्द खड़ा करने का प्रयास किया गया उसने जनता के बीच से स्वाभाविक नेतृत्व उभरने की प्रक्रिया को कुचल दिया। नतीजतन परिवारवाद, बाहुबल, धन बल, बंदूक बल,बलात्कार, चमड़े की नाव सभी कुटैवों ने कांग्रेस को जनता का मुकुट बनने से रोक दिया। अब उसकी जगह भरने के लिए भाजपा ने जिस तरह विकल्प बननेका प्रयास किया उससे वह अपनी स्वाभाविक पहचान ही गंवा बैठी है।


    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी जैसे कई पड़ाव पार करने के बाद जो विचारधारा सत्ता में आगे बढ़ी उसे पुष्पित और पल्लवित करने में कई पीढ़ियां खप गईं। त्याग और तपस्या के अटूट परिश्रम ने भाजपा को सत्ता के नजदीक तक तो पहुंचाया लेकिन वह सत्ता में नहीं पहुंच पा रही थी। तब कांग्रेस के भीतर से ही खुद को असहाय महसूस कर रहे नेताओं ने भाजपा को मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी। जो भाजपा कुशा भाऊ ठाकरे, बलराज माधोक, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, विजया राजे सिंधिया, जैसे नेताओं के आगोश में पल रही थी वह अचानक कांग्रेस बनने निकल पड़ी। भाजपा के इस बधियाकरण में पुरानी पीढ़ी के कई नेता पीछे छूट गए। अवसर वादी नेताओं की पौध तैयार हो गई जो सत्ता के शीर्ष पर झंडा फहराने लगी। इस लीडर शिप के मन में चोरी का भाव था इसलिए वह खुलकर संवाद तो कर नहीं सकती थी। जिन्हें सत्ता से दूर धकेला गया वे क्षोभवश खुद अपने दायरे में सिमट गए।


    आज यूपी में भाजपा की कथित हार की समीक्षा हो रही है लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा की कथित जीत की समीक्षा करने कोई तैयार नहीं है। एमपी की भाजपा भी देश के अन्य राज्यों की तरह अपने ही बोझ तले दबी हुई है। जोर जोर से दावे करके दंभोक्तिपूर्ण भाषण देने वाले भाजपा के नेताओं को लगता है कि उनके प्रयासों से ही भाजपा ने अपना शत प्रतिशत परफार्मेंस दिखाया है जबकि ये अर्धसत्य ही है। एमपी की भाजपा को उसके कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस के दिग्गजों ने भी आगे बढ़ कर सत्ता में पहुंचाया है। एमपी की कांग्रेस तो जान रही थी कि भाजपा को एक बार फुल मेजोरिटी देना अनिवार्य है। क्योंकि ऐसा किए बगैर देश को नई दिशा में नहीं ले जाया जा सकता। भारत माता के पैरों में पड़ी बेड़ियां भी नहीं काटी जा सकतीं। इस रहस्य को भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व नहीं समझ पाया। उसे लग रहा था कि उसकी बेहतरीन योजनाएं जनमन को प्रभावित कर चुकीं हैं और उसे अब केवल सत्ता का मुकुट अपने सिर पर सजाना मात्र है।


    यूपी में जिन राजनीतिक पंडितों को लगता है कि चार सौ पार और संविधान बदल देने के भय ने भाजपा को सत्ता से दूर किया है उन्हें अपने आकलन पर एक बार फिर विचार कर लेना चाहिए। बेशक भाजपा की हार में टिकिट वितरण और सत्ता विरोधी लहर ने अपना असर दिखाया है लेकिन इससे ज्यादा भाजपा का बोझ ही उसे कुचलने में सबसे बड़ा कारण रहा है। आरएसएस के नाम पर जिस तरह से सत्ता की लूट की गई और दंभोक्ति भरे दावे किये गए उससे भाजपा का संगठन बुरी तरह चकनाचूर हो गया है। एमपी में भी कमोबेश यही हालत है लेकिन यहां कांग्रेस की मजबूत लाबी राहुल गांधी के बोगस नेतृत्व को दरकिनार करने के लिए लामबंद हो गई थी। जीतू पटवारी जैसे ओछे और दंभी व्यक्ति की मौजूदगी ने कांग्रेसियों को अपने अपने दायरे में सिमट जाने के लिए जमीन तैयार कर दी। नतीजतन इसा लाभ भाजपा को मिला। कमलनाथ के भाजपा में जाने की अफवाह और उनके समर्थकों का भाजपा में जाने की कवायद ने जो संदेश दिया उससे जनता ने भी भाजपा को ही वोट देने में अपनी भलाई समझी और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।


    डाक्टर मोहन यादव की सरकार को आए हुए आधा साल हो गया लेकिन अब तक सरकार अपनी स्वाभाविक गति नहीं पकड़ पाई है। आम चुनावों की अपरिहार्यता और आर्थिक चुनौतियों ने सरकार के हाथ बांध रखे हैं। भाजपा के नेताओं को खुद समझ नहीं आ रहा है कि वे कैसे प्रदेश सरकार की गाड़ी को पटरी पर लाएं। भाजपा को अपने संगठन की कमियों पर निश्चित रुप से आत्म चिंतन करना चाहिए। किसी भीजीवित संगठन में ये सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होती है लेकिन संगठन और सरकार दोनों को अपने भीतर पल रहे पाखंडियों से निजात पानी जरूरी है। चाहे वे भाजपा के मूल कार्यकर्ता रहे हों या सिंधिया के संग कांग्रेस से आए नेतागण सभी को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए आगे बढ़ना होगा। सबसे बड़ी बात तो ये कि डींगें हांकने वाले संगठन के स्वंभू नेताओं से भी दूरी बनानी होगी तभी भाजपा देश को बुलंदियों पर ले जाने के अपने उस स्वप्न को साकार कर पाएगी जिसा सपना उसके पूर्वजों ने कभी देखा था। लौह प्रतिमाओं का बोझ भाजपा को रसातल में पहुंचा देगा।

  • भारतीय योग परंपरा की मशाल थामकर आगे आई आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी

    भारतीय योग परंपरा की मशाल थामकर आगे आई आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी


    भोपाल,21 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रसिद्ध योग गुरु आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी ने उनकी समृद्ध योग परंपरा की मशाल थामकर एक नया अध्याय लिख डाला है। उनके पुत्रों,पुत्री और शिष्यों ने योग के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ना आरंभ कर दिये हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आनंद नगर स्थित आश्रम में योग शिविर का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों और युवाओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन करके उपस्थित जन समुदाय का मन मोह लिया।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चालू हुआ भारतीय योग दिवस आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चला है। इस अवसर पर भोपाल में भी कई स्थानों पर योग दिवस के आयोजन हुए। आनंद नगर स्थित भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र परिसर में ये आयोजन धूमधाम से मनाया गया। भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र में योगमाता डाक्टर शुभ्रा शनकुशल, सचिव ज्ञानेश्वर शनकुशल, और खुशबू शनकुशल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए।


    स्वर्गीय आचार्य हुकुमचंद शनकुशल ने जिस योग परंपरा के माध्यम से भारत की यशोगाथा लिखी थी उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए योग गीतों पर आसनों का लयबद्ध प्रदर्शन किया गया। गुरुमाता शुभ्रा शनकुशल ने बताया कि आचार्यश्री ने लगभग पंद्रह साल पहले रोम में जगत गुरु शंकराचार्य के नेतृत्व में सबसे पहले योग दिवस का शंखनाद किया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से यूनाईटेड नेशंस ने योग दिवस मनाने का अभियान पूरी दुनिया में शुरु कर दिया है।


    कार्यक्रम में मौजूद पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक जोशी , वार्ड 62 की पार्षद सुश्री छाया ठाकुर, पार्षद सुश्री विश्वकर्मा आदि ने आयोजन का आनंद लिया और युवाओं की आगे बढ़ती नई पीढ़ी को अपना शुभाशीष प्रदान किया। इस अवसर पर भीमाशंकर शनकुशल ने नोली क्रिया और हैंड स्टैंडिंग के साथ एसओएस बालग्राम के बच्चों को प्रशिक्षण दिया। भीमाशंकर के कुशल योग प्रदर्शन को सभी आगंतुकों ने बहुत सराहा।


    योग दिवस के आयोजन में शामिल बच्चों और युवाओं को पुरस्कार एवं पुरस्कार वितरण श्री दीपक जोशी और अर्जुन यादव के कर कमलों से किया गया। ज्ञानेश्वर शनकुशल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और योग परंपरा को एक बार फिर ऊंचाईयों पर ले जाने का आव्हान किया।

  • इक्विटास बैंक के प्रशंसकों ने चलाई पर्यावरण बचाने की मुहिम

    इक्विटास बैंक के प्रशंसकों ने चलाई पर्यावरण बचाने की मुहिम


    भोपाल, 5 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इक्विटास बैंक के प्रशंसकों और ग्राहकों ने शालीमार एन्क्लेव परिसर में पौधा रोपण करके पर्यावरण बचाने की मुहिम शुरु की है। रोपण किया गया। इस अवसर पर समिति के रहवासियों ने अपने ही परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए और अपने परिचितों को शहर के विभिन्न स्थानों में पेड़ लगाने के लिए उनके पौधे वितरित किए।


    इक्विटास बैंक एमपीनगर शाखा के प्रबंधक श्री लोकेश जैन ने बताया कि दुनिया भर में बढ़ते तापमान का असर अब नजर आने लगा है। ग्लैशियर पिघल रहे हैं और ऋतु चक्र बदलने लगा है। ऐसे में खाद्यान्न उत्पादन का कैलेन्डर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बैंक ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए आम नागरिकों के बीच में जन जागरण अभियान चलाया है। जिन नागरिकों को हमारी बैंकिंग सुविधाओं से फायदा पहुंच रहा है हमने उन्हें खासतौर पर पर्यावरण प्रतिनिधि के रूप में समाज का मार्गदर्शन करने को प्रेरित किया है।


    उन्होंने बताया कि इक्विटास बैंक ने अपने वित्तीय प्रबंधन में नवाचारों के चलते कम समय में ऊंचा लाभांश देकर आम नागरिकों का जीवन सफल बनाया है। हम अपने कुशल वित्तीय सलाहकारों की मदद से आम नागरिकों को अपना वित्तीय प्रोफाईल सुधारने में मदद कर रहे हैं। ऐसे में आम नागरिकों के मन में हमारी बैंकिंग प्रणाली अपनी साख स्थापित करती जा रही है। अपनी इस कारोबारी साख के माध्यम से हम पर्यावरण अनुकूल बेहतर समाज का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे इस अभियान में हमारे बैंकिंग मार्गदर्शकों का पूरा सहयोग मिलता है। बैंक प्रबंधन के उच्चाधिकारी भी यही चाहते हैं कि हम अपनी बैंकिंग गतिविधियों से समाज में संतोष और उत्तरदायित्व का भाव विकसित करें। इस कार्यक्रम में बैंक के सीएसआर विभाग के राजेश भूमरकर ने आगे बढ़कर अपना सक्रिय सहयोग प्रदान किया।


    श्री जैन ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के वृक्षारोपण कार्यक्रम में आम नागरिकों के साथ क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देश पांडे, क्लस्टर प्रमुख मनीष मरदवार, ने भी अपना सक्रिय योगदान देकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।उन्होंने बताया कि हमारे बैंक का हर कर्मचारी अपने ग्राहकों को बेहतर वित्तीय प्रबंधन की सलाह देता है और उन्हें पर्यावरण बचाने की सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा भी देता है।