Month: May 2024

  • विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश

    विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश


    डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन और उसके बाद प्रदेश को मुखिया के रूप में मिले डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री के पद पर रहते अभी पूरे छह माह भी नहीं बीते हैं कि एक के बाद एक उनके निर्णयों ने हर क्षेत्र में राज्य की गति को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है।

    यह स्वभाविक है कि किसी भी राज्य के विकास में सबसे अहम भूमिका, शासन, प्रशासन और जनता के बीच के समन्वय की होती है । लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तब तक सफल नहीं होती, जब तक कि ये तीनों ही आपस में समन्वय के साथ कार्य करते हुए नहीं दिखते हैं । जब ये तीनों के बीच समन्वय होता है तो देश एवं प्रदेश की आर्थिक उन्नति होती है और आर्थिक गति आने से राज्य के हर नागरिक के जीवन में भौतिक सुख एवं उससे मिलनेवाले आध्यात्मिक सुख की वृद्धि होती है।

    मध्य प्रदेश में आज जो नई भाजपा की मोहन सरकार में दृश्य उभरा है, वह राज्य के नागरिक की जेब से जुड़ा हुआ है, बाजार से आप कोई वस्तु एक उपभोक्ता के रूप में तभी खरीदते हैं, जब आपकी पॉकेट इसकी अनुमति देती है। यदि आपका कोई आर्थिक संग्रह नहीं या आपकी आय पर्याप्त नहीं है तब आप चाहकर भी कोई वस्तु स्वयं के लिए और अपने परिवार जन, कुटुम्ब, बन्धु-बान्धवों के लिए नहीं खरीद पाते हैं, किंतु इस संदर्भ में मध्य प्रदेश में जो खुशी की बात वर्तमान में है, वह यह है कि राज्य में निवास कर रहे लोग खुलकर बाजार से खरीदारी कर रहे हैं और प्रदेश की सकल घरेलू आय (जीडीपी) बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं ।

    स्वभाविक है यदि राज्य में सरकार की सोच एवं कार्य लोककल्याणकारी नहीं होते तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने के साथ लगातार नवाचार करने में यदि भाजपा की मोहन सरकार कहीं कमजोर होती तो आज यह दृष्य उभरकर कभी सामने नहीं आता। यही कारण है कि देश में आज मध्य प्रदेश अपनी बड़ी आबादी के बाद भी उच्च पूंजीगत व्यय में या कहना होगा कि लग्जरी वस्तुओं की अधिक खपत के कारण राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह में, कहीं अधिक वृद्धि करने में भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे रहने में कामयाब हुआ है ।

    भारत में विनिर्माण के लिए पीएलआई, राज्य प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति के तहत लाभ जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट कानूनों सहित अधिकांश करों पर ग्राहकों को पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सलाह दे रहे केपीएमजी संस्थान के राष्ट्रीय प्रमुख अभिषेक जैन की इस संबंध में कही बातों पर हमें गौर करना चाहिए, वे कहते है कि किसी राज्य के जीएसटी की वृद्धि और गिरावट का सटीक कारण बताना कठिन है, कर संग्रह दरों को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। चूंकि जीएसटी एक उपभोग-आधारित कर है, इसलिए एसजीएसटी दरें उपभोग पैटर्न में बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं। उच्च आर्थिक क्रय शक्ति वाले राज्य और जनसंख्या आमतौर पर एसजीएसटी संग्रह को प्रभावित करने वाले कारक हैं। कई अन्य कारक भी एसजीएसटी में योगदान दे सकते हैं, जैसे सरकारी नीतियों या विनियमों में बदलाव जो राज्य में निवेश को गति देता है। अन्य प्रकार के सरकारों के सफल आर्थिक प्रयास अधिकांशत: जीएसटी की वृद्धि के कारण बनते हैं।

    इस दिशा में कहना होगा कि यह मोहन सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक और सही निर्णयों का ही प्रतिफल है जोकि मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में साल-दर-साल सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह में सफलता हासिल की है। पिछले वित्तीय वर्ष में दर्ज की गई 15.93 प्रतिशत की वृद्धि जहां मप्र ने अपने खाते में दर्ज की थी, वहीं, अभी उसने 19.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर न सिर्फ अपने ही रिकार्ड को तोड़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्यावाले राज्य जहां माल की खपत भी स्वभाविक तौर पर अधिक हैै, उसे भी पीछे छोड़ दिया है।

    आंकड़ों को देखें तो मध्य प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर वित्त वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 18.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी ने भी बीते एक वर्ष में एकदम से लगभग चार पायदान की छलांग लगाई है। 18.58 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना अगले क्रम में है। सूची में चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है, जिसका वास्तविक रूप से एक लाख करोड़ रुपये का सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह रहा है और वित्त वर्ष 24 में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखी है। दूसरी ओर गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, हरियाणा और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में 15 प्रतिशत से कम वृद्धि दर्ज होते दिख रही है।

    इसके साथ मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में अपने पूंजीगत व्यय में 97 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो आंशिक रूप से एसजीएसटी संग्रह में उछाल आगे ले जाने में सहायक रहा है। राज्य में बड़ी आबादी को रोजगार पाने एवं उन्हें मिलनेवाले वेतन में बढ़ोत्तरी को भी इससे जोड़कर देखा जा सकता है, प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की क्रय क्षमता इसके कारण से बढ़ जाती है । इससे किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलती है। मध्य प्रदेश के शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र ने भी इस बार कर संग्रह में एक बड़ी भूमिका निभाई है। जोकि यह समझता है कि राज्य में न सिर्फ शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय में लगातार अच्छी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश ने वाहन खरीदी में भी अपना एक नया रिकार्ड बनाया, यह भी आज प्रत्येक परिवार की आर्थिक समृद्धि को दर्शा रहा है।

    वस्तुत: इस मामले में आज ”बिजनेसलाइन” द्वारा देश के शीर्ष 15 राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन एवं उसकी रिपोर्ट मध्य प्रदेश के संदर्भ में एक उत्साह जगा रही है। यदि इसी तरह से मध्य प्रदेश आगे बढ़ता रहा तो जैसा अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सभा के दौरान कहा था कि भाजपा की सरकार मप्र को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएगी और इसके लिए हम संकल्पित हैं, तो कहना होगा कि उनका यह संकल्प साकार होने की दिशा में जरूर सफलता से आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है।
    (लेखक, फ‍िल्‍म सेंसर बोर्ड एडवाइजरी कमेटी के सदस्‍य एवं पत्रकार हैं) 

  • धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    उज्जैन24 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उज्जैन के लोगों ने आपसी सामंजस्य और समन्वय से धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने की मिसाल पेश की है। बरसों से शहर के विकास में रोड़े बने इन धर्मस्थलों को हटाने में प्रशासन के बजाए जनता ने खुद बड़ी भूमिका निभाई है। केडी मार्ग चौड़ीकरण में नागरिकों की इस पहल में जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र देखने मिला आम तौर पर वैसा अन्य इलाकों में नहीं देखा जाता है।
    जिला प्रशासन, पुलिस एवं नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा गुरुवार और शुक्रवार को केडी गेट तिराहें से तीन इमली चौराहे के जद में आने वाले 18 धार्मिक स्थलों को जनसहयोग से शांतिपूर्वक ढंग से हटाने की कार्रवाई की गई हैं। जिसमें धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों , पुजारियों और लोगों द्वारा भी सहयोग किया गया। 18 धार्मिक स्थलों में 15 मंदिर, 2 मस्जिद, एक मजार हैं, जिन्हें पीछे करने और अन्यत्र स्थापित करने की कार्यवाही की गई हैं। हटाई गई प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों द्वारा बताए गए निर्धारित स्थान पर विधि विधान से स्थापित किया गया। साथ ही 20 से अधिक भवन जिनका गलियारा आगे बढ़ा लिया गया था। ऐसे भवनों के उस हिस्से को भी भवन स्वामियों द्वारा स्वेच्छा से तोड़ने की कार्यवाही की गई।


    केडी मार्ग के विकास के लिए विभिन्न धार्मिक संप्रदाय न केवल आगे आए बल्कि उन्होंने स्वयं अपने धार्मिक स्थलों को हटाने में सहयोग किया। जिला प्रशासन द्वारा भी विभिन्न धार्मिक संप्रदायों से आपसी सामंजस्य और समन्वय बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई गई। कलेक्टर उज्जैन श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा द्वारा लगातार कार्यों की मॉनिटरिंग की गई।

    धार्मिक भावना आहत न हो इसका रखा गया विशेष ध्यान

    कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा के निर्देशानुसार धार्मिक स्थलों को हटाने से पूर्व और दौरान प्रत्येक संप्रदाय के व्यस्थापकों और प्रमुख लोगों से चर्चा की गई और समन्वय स्थापित किया गया। कलेक्टर श्री सिंह के निर्देशानुसार किसी भी संप्रदाय की धार्मिक भावना आहत न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा गया।

    प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अमले ने निभाई सक्रिय भूमिका

    केडी मार्ग चौड़ीकरण के लिए कलेक्टर व एसपी के मार्गदर्शन में निगम आयुक्त श्री आशीष पाठक, एडीएम श्री अनुकूल जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री जयंत सिंह राठौर सहित अन्य अधिकारियों द्वारा विभिन्न धार्मिक संगठनों से समन्वय और सामंजस्य में सक्रिय भूमिका निभाई गई। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे केडी मार्ग के लिए विभिन्न सेक्टर्स में कार्यपालिक मेजिस्ट्रेट्स की ड्यूटी लगाई गई। प्रशासन पुलिस एवं नगर निगम का अमला भी मुस्तैद रहा।

  • तुष्टिकरण के लिए दलित आरक्षण की चोरी बर्दाश्त नहींःमोहन यादव

    तुष्टिकरण के लिए दलित आरक्षण की चोरी बर्दाश्त नहींःमोहन यादव

    नई दिल्ली 23 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले से सवालिया निशान लग गया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में 2010 के बाद जारी पांच लाख से अधिक ओबीसी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया है. इससे राज्य ही नहीं पूरे देश की राजनीति में आरक्षण पर एक फिर बहस छिड़ गई है. हाईकोर्ट ने 2012 में राज्य की ममता बनर्जी सरकार के 77 जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने संबंधी कानून को ही अवैध करार दिया है.देश की प्रतिभा को खदेड़कर विदेश भेजने के इस षड़यंत्र पर आम चुनावों में पहले से ही बड़ी बहस चल रही है।


    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने ममता बैनर्जी के इस व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है।उन्होंने कहा है कि संवैधानिक आधार पर दिए गए आरक्षण की चोरी करके अपना वोट बैंक खड़ा करना दलित,पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग के साथ अन्याय है।उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम तुष्टिकरण के षड़यंत्र से लिए गए तृणमूल कांग्रेस सरकार के फैसले का विरोध करते हैं। माननीय हाईकोर्ट ने जिन तथ्यों के आधार पर ये फैसला दिया है ममता बैनर्जी को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए।


    दरअसल, पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण की पूरी कहानी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गठित सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से शुरु हुई थी। उस रिपोर्ट में देश में मुस्लिम समुदाय की स्थिति के बारे में विस्तृत बातें की गई थीं. रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों में केवल 3.5 फीसदी ही मुस्लिम थे. इसी को आधार बनाकर 2010 में पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार ने 53 जातियों को ओबीसी की श्रेणी में डाल दिया और ओबीसी आरक्षण सात फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया. इस तरह उस वक्त करीब 87.1 फीसदी मुस्लिम आबादी आरक्षण के दायरे में आ गई. लेकिन, 2011 में वाम मोर्चा की सरकार सत्ता से बाहर हो गई और उसका यह फैसला कानून नहीं बन सका.


    जब राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार आई और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं. ममता की सरकार ने इस सूची को बढ़ाकर 77 कर दिया. 35 नई जातियों को इस सूची में जोड़ा गया, जिसमें से 33 मुस्लिम समुदाय की जातियां थीं. साथ ही तृणमूल सरकार ने भी राज्य में ओबीसी आरक्षण सात फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी कर दिया. ममता सरकार के इस कानून की वजह से राज्य की 92 फीसदी मुस्लिम आबादी को आरक्षण का लाभ मिलने लगा.


    दूसरी तरह, ओबीसी आरक्षण को भी दो वर्गों में बांट दिया गया. 10 फीसदी आरक्षण एक वर्ग को दिया गया, जिसमें से अधिकतर जातियां मुस्लिम समुदाय की थीं. दूसरे वर्ग को सात फीसदी आरक्षण मिला जिसमें हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय की जातियां थीं.


    ओबीसी आरक्षण को दो वर्गों में बांटने का फॉर्मूला कई राज्यों में लागू किया गया है. बिहार में पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग दो कैटगरी है. यहां ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 37 फीसदी कर दिया गया है. केंद्र सरकार और कई अन्य राज्यों में ओबीसी आरक्षण क्रीम लेयर और नॉन क्रीमी लेयर श्रेणी में बंटा है. इस आधार पर ओबीसी आरक्षण को ज्यादा तार्किक बनाने की कोशिश की गई. क्रीम और नॉन क्रीमी लेयर का आधार परिवार की आय होती है. ओबीसी समुदाय से होने के बावजूद एक दंपति की आय अगर एक निश्चिच लेवल से अधिक हो तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है.
    ममता बनर्जी पर आरोप लगता है कि उन्होंने राज्य में ओबीसी की सूची में 77 जातियों को शामिल करने का कानून वोट बैंक की राजनीति के आधार पर लागू किया. इसमें राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी सूची में जातियों को शामिल करने का जो मानक है उसका ध्यान नहीं रखा गया.


    हालांकि, इस पिक्चर का एक अन्य पहलू भी है. सच्चर कमेटी के मुताबिक राज्य सरकार की नौकरियों में 2010 से पहले कभी केवल 3.5 फीसदी मुस्लिम थे. उस स्थिति में आज काफी सुधार हुआ है. टेलीग्राफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में मुस्लिम समुदाय की स्थिति में काफी सुधार देखा गया. बंगाल सरकार के अल्पसंख्यक विभाग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2011 से 2015 के बीच पश्चिम बंगाल सर्विस कमिशन की भर्तियों में 9.01 फीसदी अल्पसंख्यकों का चयन हुआ. इस अवधि में पश्चिम बंगाल कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में 15 फीसदी अल्पसंख्यक चयनित हुए. ठीक इसी तरह पश्चिम बंगाल म्यूनिशिपल सर्विस कमिशन की भर्तियों में 12.5 फीसदी अल्पसंख्यक चयनित हुए. राज्य में मुस्लिम समुदाय के लोगों की आबादी 2.47 करोड़ यानी 27 फीसदी के करीब है.

  • जनता ने तो चुन लिया मोदी मार्ग

    जनता ने तो चुन लिया मोदी मार्ग


    मोदी सरकार को जनता तीसरी बार सत्ता में भेजने जा रही है। अब तक पांच चरणों के चुनाव में साफ हो गया है कि भाजपा और एनडीए गठबंधन भारी जनसमर्थन से सरकार में पहुंच रहा है। ये जनादेश देश के विकास का जनादेश होगा। पहली बार न तो कोई सहानुभूित की लहर है और न ही जाति धर्म के दलालों की जोड़ तोड़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं और कारगर संवाद के माध्यम से अपनी सरकार के कार्यकलापों का उल्लेख करके कार्यकाल का जनादेश जुटा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा और अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे इस महाभियान में दुनिया की सबसे विशाल लोकतांत्रिक पार्टी एक स्वर में चुनाव लड़ रही है। अंग्रेजों ने जब भारत के टुकड़े करके यहां धर्म आधारित फूट के बीज बोए थे तब उन्हें भी एहसास नहीं था कि कभी उनके तमाम प्रयासों को भारत का सनातन धता बता देगा। सनातन ने हमेशा से सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया है। वसुधैव कुटुंबकम का विचार पूरी दुनिया को परिवार मानने का संदेश देता है इसके बावजूद अंग्रेजों के प्रश्रय से पनपी कांग्रेस ने सतर सालों तक जाति ,धर्म,भाषा का ऐसा वैमनस्य बोया कि जनता सिर फुटौव्वल में ही लगी रही। सबको एक करने का विचार लिए जनसंघ हो या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इनके करोड़ों कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां खप गईं। गरीबी दूर करने का स्वप्न दिखाकर नेहरू गांधी परिवार ने लगातार सत्तर सालों तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लूट का साझीदार बनाए रखा। बाबा रामदेव के पातंजलि आर्युवेद जैसे सैकड़ों प्रकल्पों ने देश को पहली बार बताया कि अहिंसात्मक चिकित्सा ही समाज को बेहतर जीवन दे सकती है। इसके पहले तो एलोपैथी के माध्यम से समाज को स्वास्थ्य प्रदान करने का ऐसा अभियान चलाया गया था कि लोगों को लगता था यदि उन्हें दवा नहीं मिली तो उनका जीवन नष्ट हो जाएगा। स्वयंसेवकों ने इतने विशाल देश को जीवन संयम की डोर में बांधकर जैसा पुनर्जागरण चलाया उन्हें समझाया कि सर्जरी जैसी उपचार विधि आपातकाल में जरूरी होती है स्वस्थ्य रहने के लिए तो जीवनशैली में बदलाव लाना होंगे। आज भी देश की बड़ी आबादी जीवनशैली जनित बीमारियों से ग्रस्त है। उन्हें नहीं मालूम कि बहुत छोेटे उपाय उनका जीवन खुशहाल बना सकते हैं। नरेन्द्र मोदी अपने चुनाव प्रचार अभियान को लोकतंत्र का उत्सव बताते हैं। इसके विपरीत शैतान पर कंकर फेंकने की सोच से भरे कांग्रेस के राहुल गांधी बदतमीजी की भाषा में प्रधानमंत्री को गाली देते फिरते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी मुस्लिमों को उकसाकर दंगे करवाकर सत्ता में बने रहने का प्रयास कर रहीं हैं। अखिलेश यादव ,की समाजवादी पार्टी हो या केरल के वामपंथी सभी लड़ने मारने पर उतारू हैं।इसके विपरीत भाजपा के प्रचारक अपनी वोटर सूची का पन्ना संभाले लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं। चुनाव अभियान का असर ये है कि कांग्रेस का निराश मतदाता तो पोलिंग बूथ तक भी नहीं पहुंच रहा है। उसे लगता है कि इंडी गठबंधन की विचारधारा समय के साथ पिछड़ गई है। धारा 370 हो या राममंदिर निर्माण जैसे तमाम मुद्दों पर इस गठबंधन की पहले ही करारी हार हो चुकी है।आज वह खलनायक बनकर समाज के बीच खड़ा है ऐसे में आम जनता उससे दूरी बनाकर रखने में ही अपनी भलाई समझ रही है। जाहिर है इसका सीधा लाभ एनडीए गठबंधन को ही मिलना है। भाजपा की राज्य इकाईयां भले ही अब तक विकास की मुख्यधारा को आत्मसात नहीं कर पाईं हों लेकिन जिस तरह चुनाव प्रचार अभियान में हर बिंदु पर प्रवक्ता की तरह प्रकाश डाला गया उससे संगठन को बड़ा सहारा मिला है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की पूर्ववर्ती सरकार आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर बहुत कुछ नहीं कर पाई थी। ऐसे में जनता के बीच असंतोष भी बढ़ गया था लेकिन चुनाव अभियान ने जनता से जिस तरह संवाद किया उससे वो नाराजगी दूर हो गई। डॉ.मोहन यादव की सरकार अभी तक अपना काम शुरु नहीं कर पाई है वह भी चुनाव अभियान की जिम्मेदारी उठाए हुए है। भाजपा का केन्द्रीय प्रचार अभियान इतना सफल जन शिक्षण कर रहा है कि उससे आम नागरिक तक को अपना लक्ष्य साफ नजर आने लगा है। मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार से देश को भारी अपेक्षाएं हैं। देखना है कि विकास की जो समझ देश के बीच विकसित हुई है उसकी कसौटी पर वर्तमान सरकार किस हद तक सफल होती है. फिलहाल मतदान के दो चरण बाकी हैं और बहुत सारी प्रमुख सीटों पर मतदान होना है । प्रचार की लय इतनी सुरीली है कि देश टकटकी लगाए उसे सुन रहा है। वोट कर रहा है। जाहिर है कि सकारात्मक अभियान अपने बड़े लक्ष्य को भी आसानी से वेध लेगा। एनडीए लगभग चार सौ सीटों पर पहले ही काबिज है अब वह चार सौ पार की ओर बढ़ रहा है।

  • सरकारी छूट से मुनाफे का उद्यम चलाना सिखाएगा सैडमैप

    सरकारी छूट से मुनाफे का उद्यम चलाना सिखाएगा सैडमैप

    55 जिलों में 37 सेक्टर में निशुल्क अत्याधुनिक पाठ्यक्रम

    भोपाल11 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश (सेडमैप) सभी पचपन जिलों में लगभग सैंतीस प्रकार के उद्यम शुरु करने के लिए प्रशिक्षण देने जा रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र (डीआईसी) अंतर्गत संचालित शासकीय स्वरोजगार योजनाओं की सब्सिडी का लाभ युवाओं को तभी मिल पाता है जब वे किसी भी विधा में विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हों। सैडमेप ने एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है जिसमें छोटा व्यवसाय शुरु करने जा रहे उद्यमियों के लिए, व्यावसायिक उद्यमों की स्थापना को सुविधाजनक बनाने और मौजूदा व्यावसायिक इकाइयों के विकास को बढ़ावा देने के गुर सिखाए जाएंगे। पाठ्यक्रम में अध्ययन सामग्री, वीडियो आधारित ट्यूटोरियल, केस-आधारित उदाहरण भी शामिल होते हैं। केंद्र की ओर से डीएलईसी फोरलेन फार्मूला आधारित ‘सर्टिफिकेट इन बिजनेस स्किल, डिसेंट्रलाइजेशन, लोकल, एंटरप्रेन्योरशिप तथा कोऑपरेशन’ के साथ ‘फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सर्टिफिकेट’ का संयुक्त संचालन भी किया जा रहा है। 

    इस संदर्भ में जानकारी देते हुए सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसके लिए संयुक्त रूप से एक कोर्स ‘ज्ञान हैंडबुक’ डिजाइन किया गया है जिसमें 37 विभिन्न सेक्टर से सम्बंधित उद्यमिता के आयाम को सम्मिलित किया गया है । साथ में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के माध्यम से भी इसमें युवाओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इच्छुक युवा इस प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे भी पा सकते हैं और प्रमाण-पत्र भी निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। प्रत्येक विषय पर जानकारी के साथ प्रत्येक वीडियो  यूटूयूब पर उपलब्ध रहेगा। 

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि पाठ्यक्रम में उद्यमिता के उभरते हुए अनेक सेक्टर को सम्मिलित किया गया है. जिसमें प्रमुख रूप से वनौषधि- आयुष एपीआई, 64-कलाओं, सोलह सिंगार, हर्बल, 108 जड़ी-बूटी, मोटा अनाज, 108 भारतीय मसाला, जनजातीय उद्यमिता, हथकरघा-बुटीक, गोबर उत्पाद, पूजन सामग्री, फूड प्रोसेसिंग, भारतीय शिल्प, अलाइड डेयरी, मिलेट बेकरी, महुआ, जैव उर्वरक, घरेलू / दैनिक उपयोग की वस्तुओं, बायोप्लास्टिक, स्पोर्ट्स, योग-नेचुरोपैथी पर्यटन उद्यमिता तथा अन्य सम्बंधित उपसेक्टर शामिल है। जल और ऊर्जा स्वराज के साथ एग्रोएंटरप्रेन्योर तैयार करना, विकसित मध्य प्रदेश, फूड प्रोस‍ेसिंग हब, एग्रोप्रेनर ग्रामीण अर्थव्यवस्‍था के नए इंजन, न्‍यूट्री हब, श्रीअन्‍न सुपरफूड को वर्ल्डवाइड एक्सपोर्ट,  छोटे किसानों के लिए मिलेट्स (श्रीअन्‍न) आधारित उद्यमिता, सौर उर्जा ट्यूबवेलों, कृषि‍ मशीनरी और उपकरण आधारित उद्यमिता, पीएम कि‍सान समृद्धि का वि‍स्‍तार, ड्रोन-कृषि-सैटेलाइट उद्यमिता के क्षमता निर्माण होने से उपज के प्रभावी मार्केटिंग के लिए नए आयामों को स्थापित करना शामिल है।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसमें संयुक्त रूप से स्वावलंबी भारत अभियान, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी भारत सरकार प्रोजेक्ट राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद म.प्र. सरकार, आईसीएआर-अटारी जबलपुर, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में भारत के सवा सौ करोड़ ‘ज्ञान’ जी फॉर गरीब, वाई फॉर युवा, ए फॉर अन्नदाता (किसान), एन फॉर नारीशक्ति (महिला) पर ध्यान कर डीएलईसी फार्मूला डिसेंट्रलाइजेशन (विकेंद्रीकरण), लोकल (स्वदेशी), एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता), कोऑपरेशन (सहकारिता) आधारित अत्याधुनिक पाठ्यक्रम का नि:शुल्क संचालन किया जा रहा है।  

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने यह भी बताया कि अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष को देखते हुए क्षमता सम्‍वर्धन के इस कार्यक्रम में कुटुंब प्रबोधन और नागरिक शिष्टाचार के साथ स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधन का पर्यावरण हितैषी के रूप में उपयोग एवं सामजिक समरसता को ध्यान में रखकर सहकारिता आधारित आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग वाले उद्यमिता के माध्यम से क्लास बी और क्लास सी कैटेगरी के स्वदेशी उत्पादों से बड़े पैमाने पर इंपोर्ट कम तथा एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने सम्मिलित किया गया है। पंच परिवर्तन के सूत्र सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण तथा नागरिक शिष्टाचार का पालन करते हुए उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र उद्यमिता का निर्माण प्रायोगिक रूप में कराने का प्रशिक्षण भी इस पाठ्यक्रम में शामिल है।