Month: June 2023

  • सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    भोपाल,27जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता का क्षेत्र भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। विकास की दौड़ में आज सहकारिता अप्रासंगिक होता नजर आ रहा है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश का एक छोटा सा अधिकारी आज सहकारिता को सामाजिक बदलाव की कडी बनाए हुए है। राजधानी भोपाल में जिस तरह से सहकारिता को बदलाव की भूमिका में देखा जा रहा है उसके लिए विभाग के एक डिप्टी ऑडिटर मुकुंद राव भैंसारे पर प्रशासन की भी निगाह है।प्रशासन ने उनके कार्य को पुरस्कृत किया है और सहकारिता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत भी

              मुकुंदराव भैंसारे को मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग फायर ब्रिगेड की तरह इस्तेमाल करता है । जिस गृह समिति में गड़बड़ियों की शिकायत मिलती है उन्हें वहां प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया जाता है । उन्होंने राजधानी के भारत नगर कि जिस तरह से कायापलट की उससे नगर निगम सहकारिता विभाग और प्रशासन का हर तबका अचंभित है ।श्री भैंसारे ने भारत नगर को ना केवल एक साफ-सुथरे मोहल्ले में तब्दील कर दिया है बल्कि उसे आत्मनिर्भर आर्थिक आजादी भी प्रदान की है।इसी के परिणामस्वरूप भारत नगर को स्वच्छता पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।परिश्रम के इस पुरस्कार ने तीन बार समूचे सहकारिता विभाग की शान बढ़ाई है।

            स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त तत्कालीन प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में सफल सामाजिक आयोजन किए थे।

     रोहित नगर के रहवासी लंबे समय से अपने प्लाट पर मकान बनाने के लिए निवर्तमान पूर्व अध्यक्ष घनश्याम सिंह राजपूत के घर के चक्कर काट रहे थे । उन्हें उनकी जमीन ही नहीं मिल रही थी ।समिति के 550 सदस्यों में से 330सदस्य अपना आशियाना आज भी तलाश रहे हैं।श्री भैसारे ने कार्यभार संभालने के बाद खाली पड़ी लगभग ढाई एकड़ जमीन पर प्लाट दर्शाने की कार्यवाही शुरू कर दी।उन्होंने चुनाव कराने की भी प्रक्रिया जारी रखी है। एक स्कूल संचालक जो इस जमीन पर कब्जा जमाना चाहता था उसने अपने राजनीतिक संबंधों का इस्तेमाल करके श्री भैंसारे को हटाने का षड्यंत्र रचा लेकिन उनके कुशल प्रशासन को देखकर आला अफसरों ने रोहित नगर की विकास यात्रा बदस्तूर जारी रखी। इस गृह निर्माण समिति के नागरिकों की दूसरी पीढ़ी अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। सहकारिता विभाग के अफसर अपने सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आज संकल्पित होकर खड़े हैं।मैदान में उनके बुलंद इरादों को साकार करने की जवाबदारी श्री भैंसारे कुशलता पूर्वक निभा रहे हैं,ये राहत की बात है।

  • कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर

    कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर


    बूटकॉम सिस्टम्स के प्रकाश गुप्ता पर देश भर के व्यापारियों ने दर्ज कराए अमानत में खयानत के केस


    भोपाल,25 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। यूपी के लालगंज से आकर राजधानी में कंप्यूटर का कारोबार चलाने वाले प्रकाशचंद गुप्ता ने ठगी और लूट के लिए कानून की पेचीदगियों को अपना हथियार बना रखा है। पिछले तीस सालों में उसने हजारों लोगों के साथ धोखाघड़ी और ठगी की है लेकिन हर बार वह कानून की पकड़ से बचता रहा है। लूट के धन को उसने इस्कान फाऊंडेशन और राजधानी के एक बड़े माफिया समूह में निवेश कर दिया है। कई इमारतें और फार्महाऊस खरीदकर उसने अपनी स्थायी आय का इंतजाम किया है। कंप्यूटर की दूकान तो महज आय दिखाने और टर्नओवर बढ़ाने के लिए खोल ऱखी है। अपना बढ़ा कारोबार दिखाने के लिए वह दूसरे व्यापारियों का माल लेकर सस्ते में बेच देता है और उन व्यापारियों का धन गड़प लेता है। राजधानी में ही उसके विरुद्ध ढेरों केस लंबित पड़े हैं। वह हर मुकदमे को अदालत तक पहुंचने की राह सरल करता है फिर दांवपेंच और कुछ जजों से सांठगांठ करके बच निकलता है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः चरित्रहीनता, धोखाधड़ी और चालबाजियों ने कारोबारी परंपराओं को तार तार किया.


    राजधानी की पुलिस बरसों से इस ठग की चालबाजियों के सामने लाचार है। कभी भ्रष्ट पुलिस अफसर उसके लिए ढाल बन जाते हैं तो कभी भ्रष्ट न्यायाधीश उसके अपराधों के अभिभावक बन जाते हैं। शहर के एक नामी गिरामी वकील तो उसके अघोषित पार्टनर बनकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उसने एक रखैल रख छोड़ी है जिससे उसके एक बेटी है। एक बेटी पहली शादी से है। इन दोनों परिवारों की शान शौकत के लिए वह करोड़ों रुपए खर्च करता है। सोने के जेवर और विलासिता की वस्तुएं तो वह ऐसे खरीदता है जैसे किसी रियासत का महाराजा हो। जजों और अफसरों को सप्लाई की जाने वाली लड़कियों को वह स्कूटर और कारें गिफ्ट में देता है। अपना धन मांगने वालों को डराने के लिए उसने कई बंदूकें और तलवारें ले रखी हैं। रौब जमाने के लिए वह पुलिस अफसरों के साथ शूटिंग अकादमी में शामिल होता है। जजों और पुलिस अफसरों को रिश्वत देने के लिए उसने उनका पैसा ब्याज पर चलाने के नाम पर खासा निवेश कर रखा है। यही पुलिस अफसर जनता से लूट में उसके सहयोगी बनते रहते हैं।
    प्रकाश चंद गुप्ता ने पिछले तीन दशकों में हजारों नागरिकों से ठगी और धोखाघड़ी की है। अपनी दूकान बूट काम सिस्टम पर वह कई बार ग्राहकों को असली कीमत से कम दाम पर कंप्यूटर बेच देता है और कई बार तीस हजार का कंप्यूटर डेढ़ लाख में भी बेच देता है।ग्राहक की अज्ञानता का लाभ लेकर वह लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कारोबार चला रहा है। यदि कोई जांच एजेंसी का अफसर या सिपाही उसकी दूकान पर जाकर छानबीन करने की कोशिश करे तो वह झग़ड़ा करने पर उतारू हो जाता है और अपने टुकड़खोर पुलिस वालों के माध्यम से उसे गालियां पड़वाता है। उसके चंगुल में फंसे व्यापारी यदि उसे माफ कर दें और दुबारा धंधा करने पर राजी हो जाएं तब भी वह उन्हें दुबारा ठगने से नहीं चूकता।

    अयोध्यानगर पुलिस थानाः समाज से गद्दारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने का साहस


    बड़े व्यापारियों और निवेशकों को ठगने के लिए वह उनसे पारिवारिक संबंध बढ़ाता है और घर की महिलाओं को गिफ्ट देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लेता है। बाद में जब उनके परिवार से बड़ी रकम लेकर ठगी की बात सामने आती है तो इन्हीं महिलाओं को लालच देकर वह अपना मुखबिर बना लेता है। बड़े धन्नासेठों पर अड़ी बाजी और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कराकर ठगने के लिए वह वकीलों और भ्रष्ट जजों का सहारा लेता है। जब किसी मुकदमे की वजह से उसे जेल यात्रा करनी पड़े तो उसकी खबर अखबारों में न छप सके इसके लिए वह मोटी रकम खर्च करता है। उसके गिरोह में कई ऐसे पत्रकार भी शामिल हैं जो सही खबर छापने वाले पत्रकारों के विरुद्ध ही दुष्प्रचार करने में जुट जाते हैं। इसके बावजूद उसकी ठगी और धोखाधड़ी के कई मुकदमे आज भी अदालतों में विचाराधीन है।
    कई बैंकों मैनेजरों से सांठ गांठ करके उसने करोड़ों रुपए हासिल किए हैं। इन बैंकों से मुकदमा जीतने में और मुआवजा पाने में वकीलों और भ्रष्ट जज उसके सलाहकार होते हैं। वे साक्ष्य बनवाते हैं और अदालती प्रक्रिया पूरी करके उसे मोटी रकम दिलवाते हैं। इसी राशि का बड़ा हिस्सा जजों और वकीलों में भी बंटता है। इस विषय पर आरोप लगाने वालों को धमकाने के लिए अवमानना कानून का सहारा लिया जाता है।
    उससे पीड़ित लोगों में कलकत्ता , मुंबई , दिल्ली ,इंदौर, भोपाल और कई थोक व्यापारी भी शामिल हैं।अफसरों औंर न्यायाधीशों की तो बड़ी फेरहिस्त है।कई अफसरों और न्यायाधीशों को तो इसके चंगुल में फंसकर अपनी नौकरियां भी गंवानी पड़ी हैं।कुख्यात अपराधी मुख्तयार मलिक ने जब एक जज राजीव भटजीवाले की रकम गड़प जाने की वजह से इसे धमकाया तो इसने पुलिस अफसरों और न्यायाधीशों की मदद से उसके एनकाऊंटर का आदेश तक करवा दिया था।


    प्रकाश चंद गुप्ता से पीड़ित व्यापारियों में सवेरा इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के चौबीस मुकदमे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कलकत्ता के समक्ष विचाराधीन हैं। स्काईलाईन सिस्टम्स इंदौर ,बाईट पेरी फेरल्स इंदौर, हस्ती कंप्यूटर्स इंदौर, सेन्ट्रोनिक्स इंदौर, शर्ललाईन सिस्टम्स इंदौर, मित्तल इंफोटेक इंदौर, आई प्लांट इंदौर, एमीट्रान डिजिटेक इंदौर, विनायक इंफोटेक इंदौर, डीबी इंफोटेक इंदौर, लेटेस्ट डिवाईस प्राईवेट लिमिटेड भोपाल, दीप कंप्यूटर्स भोपाल, सेज विश्वविद्यालय भोपाल, शिवांकरी सिंह, रंजना सिंह, छोटी बाई, डब्ल्यूपीजी सीएंडसी कंप्यूटर्स एंड पेरीफेरल्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड दिल्ली, सवेरा डिजिटल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कोलकाता, राज्य सरकार, संदीप जैन माईक्रोलैंड कंप्यूटर्स जबलपुर, विक्रमादित्य सिंह, अभिलाषा राहते, समेत कई अन्य व्यापारियों के मुकदमे भी अदालतों में विचाराधीन हैं। इसके अलावा प्रकाश गुप्ता ने फाईनेंस फर्म भी पंजीकृत करा रखी है जिस पर उसने सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए ऊंचा ब्याज देने के नाम पर ले रखे हैं। उन्हें उसने ब्याज देना बंद कर रखा है। कई लोगों के तो मूल चैक बापस ले लिए हैं और वे अपनी रकम पाने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। पक्की लिखा पढी न होने से तो वह सैकड़ों लोगों की रकम गड़प कर चुका है। हुंडी कारोबार के कई अगड़िए इसके गोपनीय अड्डे पर व्यापारियों का करोड़ों रुपया पहुंचाते हैं जिसे गड़प करने के लिए इसने विभिन्न तरीके अपना रखे हैं।लोगों को झांसा देने के लिए उसने कई नोटरियों, वकीलों, पत्रकारों,जजों,पुलिस अफसरों को अपने जाल में फंसा रखा है। अवैध हथियारों की तस्करी हो या फिर नशे का गोरखधंधा सभी कारोबारों में उसकी हिस्सेदारी है। वह कई बार बड़बोले पन में कहता है कि बूचड़खानों से जुड़े अपराधियों की मदद से वह अधिक दबाव डालने वाले लोगों की हत्याएं भी करवा देता है। राजधानी पुलिस के सामने यह सफेद कालर अपराधी अब एक अनसुलझी पहेली बन गया है। हाल ही में एक बालिका पर यौन हमले के आरोप में इस पर पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। यदि अदालतों, पुलिस और राजनीति में जड़े जमाए अपराधियों का संरक्षण नहीं मिल सका तो इस बार प्रकाश गुप्ता की लंका राख हो सकती है।

  • भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा

    भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा


    भोपाल,24 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता ने जब कांग्रेस के कुशासन को खारिज करके 2003 में भाजपा को सत्ता सौंपी तबसे लेकर अब तक उसने प्रदेश को सम्मान, समृद्धि और विकास की हर कसौटी पर अव्वल बनाया है। पहले मध्यप्रदेश दुरावस्था का शिकार और बीमारू राज्य था। भ्रष्टाचार का बोलबाला था । सड़क, बिजली, पानी के लिए जनता तरस रही थी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने प्रदेश को उस स्थिति से निकाल कर विकसित प्रदेश बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के अपने ही लोगों ने जिस तरह से उनके भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा खोला है, उससे बौखलाई कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर अनर्गल आरोप लगा रही है। लेकिन कांग्रेस अपने इन कुत्सित प्रयासों से न तो अपने भ्रष्टाचार को छिपा सकती है और न ही भाजपा सरकार के प्रयासों से किए गए विकास को झुठला सकती है। कांग्रेस ने अपनी हरकत से प्रदेश में हुए विकास के अपमान का जो प्रयास किया है, उसका जवाब प्रदेश की जनता देगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि हाल ही में शहर में कुछ ऐसे पोस्टर लगे थे, जिनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को करप्शननाथ बताया गया था और पोस्टर को स्कैन करने पर उनके भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा सामने आ जाता था। कांग्रेस इस पोस्टर से बौखला गई है, लेकिन उसे इस घटना के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सोचना चाहिए कि इस घटना के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह या नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि कहीं यह पार्टी में चल रहे अंतर्द्वंद और नेताओं के बेटों के बीच चल रही लड़ाई का परिणाम तो नहीं है?
    प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मि. बंटाढार के जमाने में प्रदेश की दुरावस्था किसी से छिपी नहीं है। बाद में 15 महीनों के लिए बनी कांग्रेस की सरकार ने गरीबों के हक छीने। जनहित की सारी योजनाएं बंद कर दीं। इंदौर में आईफा अवार्ड के लिए करोड़ों का प्रावधान किया, लेकिन मैचिंग ग्रांट न होने का बहाना बनाकर लाखों प्रधानमंत्री आवास लौटा दिए और गरीबों के सिर से छत छीन ली। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति तो स्वयं कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए दी थी कि हम दिल्ली से 1 रुपया भेजते हैं, तो संबंधित व्यक्ति तक 15 पैसा ही पहुंचता है। उन्होंने कहा कि अगर पोस्टर में कमलनाथ जी को करप्शननाथ लिखा गया था, तो इसमें गलत क्या है? प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी के यहां से छापे में जो 281 करोड़ रुपये नकद मिले थे, वो कहां से आए? श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय में वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह और कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने ही यह आरोप लगाए थे कि सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और उसका पैसा ऊपर तक जाता है। श्री शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि उनकी सरकार ने 7 बांध और नहर परियोजनाओं के काम से पहले 877 करोड़ रुपये का भुगतान क्यों किया? ई-टेंडर मामले की आरोपी कंपनी को 244 करोड़ और जनसंपर्क को 131 करोड़ क्यों दिए थे?
    श्री शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है और बिजली सरप्लस है। मि. बंटाढार के समय प्रदेश में सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, आज 45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 44605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे सूखा बुंदेलखंड अब हरा-भरा और समृद्ध होगा। मि. बंटाढार के समय प्रदेश का बजट जहां 23161 करोड़ था, उसे श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा दिया है। प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर जो उस समय 4.4 प्रतिशत थी, आज 16.43 प्रतिशत है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71594 करोड़ रुपये से बढ़कर 1322821 करोड़ रुपये हो गया है। प्रतिव्यक्ति आय 11718 रुपये से 1,40,583 करोड़ रुपये हो गई है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार हर गरीब का जीवन बदलने का अभियान चला रही हैं और इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 1 करोड़ से अधिक आयुष्मान कॉर्ड वितरित करेंगे, ताकि गरीबों को मुफ्त उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह झूठ, छल कपट का सहारा लिया था, उससे प्रदेश के किसान डिफाल्टर हो गए थे। इन किसानों के 2100 करोड़ रुपये प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुकाये हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकारें गुड गवर्नेंस, सेवा के भाव, गरीब कल्याण और विकास के मंत्र पर काम कर रही हैं और इन नीतियों से प्रदेश की जिस गरीब जनता के चेहरे पर मुस्कान खिली है, वही जनता कांग्रेस को उसकी हरकत का जवाब देगी।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है। भारतीय इतिहास में आज ही के दिन रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ था। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि देश का चहुंमुखी विकास करेंगे, लेकिन विकास के साथ ही अपनी विरासत को भी संजोकर रखेंगे। श्री शर्मा ने रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की यही सोच उसके निर्णयों में भी परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश में हमारी सरकार ने ऐसे जनजातीय क्रांतिवीरों, योद्धाओं और महानायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए कदम उठाए हैं, जिनका देश की आजादी व भारतीय इतिहास में बड़ा योगदान रहा है। इसी को देखते हुए जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरूआत की गई।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश भाजपा के लिए 27 जून बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपनी अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करके भारत आएंगे और उसके बाद उनका पहला दौरा भोपाल का होगा। यहां पार्टी कार्यकर्ता रोड शो के माध्यम से उनका स्वागत करेंगे, जिसकी तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री भोपाल में मेरा बूथ सबसे मजबूत के संकल्प को लेकर देश के 3 हजार बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 10 लाख बूथों से डिजिटली जुड़े रहेंगे। यहां से प्रधानमंत्री जी शहडोल जाएंगे, जहां रानी दुर्गावती गौरव यात्रा का समापन करेंगे और आयुष्मान हितग्राहियों को कार्ड का वितरण करेंगे। इससे पहले 26 जून को राष्टीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भोपाल आएंगे। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए प्रदेश का एक-एक कार्यकर्ता उत्साहित और आतुर है। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा।

  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।

  • नेहरू के षड़यंत्रों के बाद भी मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं : कृषि मंत्री कमल पटेल

    नेहरू के षड़यंत्रों के बाद भी मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं : कृषि मंत्री कमल पटेल


    हरदा 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). कृषि मंत्री कमल पटेल ने पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय मौत को लेकर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने कहा कि पंडित श्यामा मुखर्जी की रहस्यमय तरीके से हत्या की गई थी। जिस पर अभी तक रहस्य बना हुआ है।पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के षड़यंत्रों की वजह से ही भारत को इतने लंबे समय तक कश्मीर में अपने युवाओं की जान गंवानी पड़ी।
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कश्मीर जाने के लिए अपने ही देश में वीजा लेना पड़ता था लेकिन वर्तमान परिदृश्य हम सब कह सकते हैं कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है


    कृषि मंत्री कमल पटेल ने पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर हरदा में मुखर्जी कीमूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना करते हुए कश्मीर में सत्याग्रह किया उन्होंने उस समय कहा था कि यह देश दो विधान से नहीं चलेगा। मंत्रीपटेल ने कहा कि देश में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को पूरा किया। गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की इच्छा का पालन करने के लिए संसद पारित प्रस्ताव के माध्यम से कश्मीर से धारा 370 का कानून हटवा दिया। अब कश्मीर में दो विधान दो निशान नहीं है। मंत्री पटेल ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नेहरू देश में तुष्टीकरण की राजनीति करते थे। जिसका ज्वलंत उदाहरण कश्मीर था नेहरू के उसी तुष्टीकरण की नीति आज भी कांग्रेस पार्टी के रग रग में समाई हुई है।

  • रोजगार के सशक्त माध्यम हैं सूक्ष्म और लघु उद्योग

    रोजगार के सशक्त माध्यम हैं सूक्ष्म और लघु उद्योग

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बढ़ते मध्यप्रदेश का रोडमैप प्रस्तुत किया,ओमप्रकाश सखलेचा ने ली बैठक

    भोपाल, 19 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आत्म-निर्भर भारत के लिए आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का जो रोडमेप हमने बनाया है, उसके रोम-रोम में सशक्त औद्योगिक परिदृश्य के निर्माण और रोजगार सृजन की भावना रची-बसी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 21वीं सदी के आत्म-निर्भर भारत बनाने का जो यज्ञ चल रहा है, उसमें बड़े उद्योगों की भूमिका जितनी अहम है, उतना ही महत्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्यमियों का भी है। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में इन उद्यमियों की भूमिका बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, यह स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने के सशक्त माध्यम हैं। स्थानीय परिवेश-स्थानीय संसाधनों पर कार्य करने वाली इन इकाइयों की सहायता और विकास के लिए राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से आज हो रही समिट का ध्येय वाक्य “आर्थिक विकास के शुभ संयोग-मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग” रखा गया है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने होटल आमेर ग्रीन भोपाल में राज्य स्तरीय एमएसएमई समिट का शुभारंभ किया। भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय विशेष रूप से उपस्थित थी। समिट में अनेक उद्योग परिसंघ के पदाधिकारी, बड़े औद्योगिक घराने, नव उद्यमी, केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर समिट का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश में एमएसएमई की भूमिका पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सफल उद्यमियों को एमएसएमई अवार्ड प्रदान किए और राज्य सरकार एवं देश की प्रतिष्ठित कंपनी और संस्थानों के बीच एम.ओ.यू का आदान-प्रदान भी हुआ। प्रदेश के सभी जिले कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मध्यप्रदेश की समृद्धि और विकास के भागीदार हैं। हम मिल-जुल कर कैसे आगे बढ़ सकते हैं, इस पर विचार-विमर्श के लिए यह समिट की गई है। सफलता के लिए उत्साह सबसे आवश्यक है। आप सकारात्मक सोच के साथ ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ें। सरकारी नीतियों में जहाँ सुधार की आवश्यकता हो, उन बिन्दुओं को सरकार के साथ साझा करें। जो भी बेहतर होगा उसे क्रियान्वित किया जाएगा। हम मिल कर काम करेंगे और मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेृतत्व में भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए हम सब प्रतिबद्ध हैं।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्व-रोजगार और छोटे उद्योगों को सहायता के लिए प्रदेश में 12 योजनाएँ संचालित हैं। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी लागू की जा रही है, जिसमें 700 कार्य चिन्हित किए गए हैं। उद्यमी इस योजना से जुड़ें, युवाओं को जोड़ें, उन्हें दक्ष बनाएँ और योजना का लाभ उठाएँ। यह योजना उद्यमियों, रोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए उपयोगी और मध्यप्रदेश को सक्षम एवं आत्म-निर्भर बनाने के लिए प्रभावी है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर स्तर के उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप नीतियाँ और योजनाएँ बनाकर उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्रचुर खनिज संसाधन, पर्याप्त लैण्डबैंक, सुविकसित सड़क अधो-संरचना, बढ़ती कृषि उत्पादकता और निवेश अनुकूल नीतियों से औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। एमएसएमई सेक्टर के विकास के लिए पृथक से विभाग गठित किया गया है। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर ईको सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क के साथ एक्सप्रेस-वे विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही निवेश गलियारों का भी निर्माण होगा। बेहतर औद्योगिक अधो-संरचना सुविधा के लिए उद्योगों के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। “एक जिला-एक उत्पाद” से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए ग्लोबल स्किल पार्क के साथ संभाग और जिला स्तर पर आई.आई.टी को भी सशक्त किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। हम अब बीमारू राज्य नहीं हैं। मध्यप्रदेश की जीएसडीपी का आकार 15 लाख करोड़ पार कर चुका है। राज्य की प्रतिव्यक्ति आय एक लाख 40 हजार रूपए हो गई है। इस वर्ष का बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ रूपए का है। प्रदेश ने वित्तीय प्रबंधन की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। राज्य सरकार लाड़ली बहनों को प्रतिमाह एक हजार रूपए देने और केपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने का कार्य एक साथ कर रही है।
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि हमारा विभाग अर्थ-व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला विभाग है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सबसे अधिक आवश्यकता तकनीकी अपग्रेडेशन की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के सहयोग, मार्गदर्शन और उदारता से प्रदेश में उद्यमशीलता का वातावरण बना है। राज्य सरकार औद्योगिक क्लस्टर्स के साथ डिस्प्ले सेंटर और ऑनलाइन कनेक्टिविटी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में उत्पादित सामग्री की बेहतर मार्केटिंग के लिए भी बेहतर प्रयास हो रहे हैं।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए एमएसएमई अवार्ड प्रदान किए। प्रभावी कार्य संस्कृति और बेस्ट प्रेक्टिसेस अपनाने के लिए वर्ष 2018-19 का प्रथम पुरस्कार आईटीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड इंदौर को, द्वितीय पुरस्कार शास्त्री सर्जिकल इण्डस्ट्रीज रायसेन और तृतीय पुरस्कार शक्ति एम्पोरियम झाबुआ को प्रदान किया गया। महिला उद्यमियों में मंत्रा कम्पोजिट इंदौर की श्रीमती ममता महाजन को पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2019-20 के लिए नंदिनी मेडिकल लेबोरेट्रीज इंदौर को प्रथम, न्यू लाईफ लेबोरेट्रीज मण्डीदीप रायसेन को द्वितीय और सेफफ्लेक्स इंटरनेशनल धार को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2020-21 के लिए मॉर्डन लेबोरेट्रीज इंदौर को प्रथम, डीइसीजी इंटरनेशनल मण्डीदीप रायसेन को द्वितीय और हेल्थीको क्वालिटी प्रोडक्ट्स धार को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 2020-21 में महिला उद्यमियों की श्रेणी में सांई मशीन टूल्स इंदौर की श्रीमती शिखा विशाल जायसवाल और श्रीमती निहारिका अजय जायसवाल तथा अर्थव पैकेजिंग इंदौर की श्रीमती ममता शर्मा को पुरस्कृत किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान की उपस्थिति में एनएसई इंडिया, वॉलमार्ट, आरएक्सआईएल, इनवॉइस मार्ट तथा आइसेक्ट के साथ एम.ओ.यू. का आदान-प्रदान हुआ।
    सचिव एमएसएमई पी. नरहरि ने अतिथियों का स्वागत किया तथा समिट और विभागीय कार्यक्रमों एवं योजनाओं की जानकारी दी। समिट में 6 सत्र हैं, जिनसे उद्यमियों, विषय-विशेषज्ञों और युवाओं को उद्यमिता के लिए मार्गदर्शन प्राप्त होगा। सत्रों को ऐसा डिजाइन किया गया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर विशेष फोकस रहे। समिट में एमएसएमई के लिए टेक्नालॉजी ट्रांसफर, न्यू एज फाइनेंस, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन और डिजिटल रूपांतरण विषयों पर विशेष सत्र हुए।
    समिट में संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के भारत प्रतिनिधि श्री रेने वान बर्कल, फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री सुधा शिवकुमार, कोप्पल टॉय क्लस्टर के सीईओ श्री किशोर राव, राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त), भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक श्री सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी और लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष श्री महेश गुप्ता उपस्थित थे। इन्वेस्ट इंडिया, एसोचेम इंडिया, सीआईआई, फिक्की, पीएचडी चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री और डिक्की के प्रतिनिधि समिट में शामिल हुए।

  • हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    भोपाल,18 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघवजी के विरुद्ध कथित दुराचार के मामले को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश की राजनीति में वित्त मंत्री जैसा महत्तपूर्ण पोर्ट फोलियों रखने वाले व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों ने दबाव डालकर ये प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस प्रकरण में साफ तौर पर दुर्भावना के तथ्य पाए गए हैं। हाईकोर्ट ने भोपाल के हबीबगंज पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को खारिज करने के आदेश दिये है।


    पूर्व वित्त मंत्री राधव जी की ओर से दायर की गयी याचिका में भोपाल के हबीबगंज थाने में उनके खिलाफ धारा 377, 506 तथा 34 के तहत 7 जुलाई 2013 को दर्ज की गयी एफआईआर खारिज किये जाने की राहत चाही गयी थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत कर्ता ने कहा है कि वह 2010 में नौकरी के लिए विदिशा से भोपाल आया था। तब उन्हीं की अनुशंसा पर उसे सोम डिस्टिलरी के एकाऊंट विभाग में नौकरी मिली थी। अभियुक्त शेर सिंह चौहान ने उसे वित्तमंत्री राघवजी के चार इमली स्थित बी 19 बंगले के कर्मचारी आवास में रहने का मौका दिया था।


    शिकायतकर्ता ने अपने बयानों में कहा है कि उसने एक अन्य पीडि़त की मदद से वित्तमंत्री का छुपकर विडियों बनाया था। कथित तौर पर सहमति के साथ एकांत में अप्राकृतिक यौन करने का वीडियों उसने साजिश के तहत बनाया था जिसके आधार पर वह उन्हें ब्लैकमेल करना चाहता था । उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने याचिकाकर्ता का सरकारी निवास मई 2013 में छोड़ दिया था। इसके लगभग तीन माह बाद उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता साल 2010 से 2013 तक याचिकाकर्ता के सरकारी निवास में रहता था, इस दौरान उसने किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं की। राजनीतिक प्रतिद्वंदियो के इशारे तथा आपसी रंजिश के कारण शिकायतकर्ता ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।


    एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त याचिका साल 2016 से लंबित है और न्यायालय का अभिमत है कि अपराधिक मामले में अभियुक्त को ट्रायल का सामना करना चाहिये। न्यायालय के आदेश है कि अपराधिक मामला दुर्भावना व निजी रंजिश के कारण दर्ज करवाया जाता है तो एफआईआर निरस्त की जा सकती है। इस प्रकरण में अपराधिक कार्रवाई से स्पष्ट है कि दुर्भावना के कारण प्राथमिकी दर्ज कराई गयी है। प्रदेश में सबसे लंबे समय तक वित्तमंत्री रहने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों के इशारे पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी के आधार पर न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिये।

    गौरतलब है कि राघवजी भाई के वित्त मंत्री रहते हुए तीन सालों तक भारत सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी। उन्होंने इस मसले पर हर बैठक में जीएसटी की खामियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया था। बताते हैं कि इसके बाद जो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं जीएसटी लागू करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बना रहीं थीं उन्हीं के इशारे पर राघवजी को राह से हटाने के लिए ये मामला दर्ज कराया गया था। मध्यप्रदेश को वित्तीय दुर्दशा से बाहर लाकर ऊंचाईयों पर ले जाने वाले राघवजी को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में ये विभाग सौंपा गया था।इसके बाद से ही कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश को दुनिया भर की वित्तीय संस्थाओं से मदद मिलनी शुरु हो गई। बाद में बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उन्हें ही वित्तीय प्रबंधन की जवाबदारी सौंपी। बताते हैं कि ये मामला सामने आने के बाद जीएसटी लागू करने में आ रही बड़ी अड़चन समाप्त हो गई और तभी से राज्यों को वित्तीय संकटों से जूझना पड़ रहा है।

  • जल प्रबंधन में देश भर में अव्वल बना मध्यप्रदेश

    जल प्रबंधन में देश भर में अव्वल बना मध्यप्रदेश


    भोपाल 17 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश को जल संसाधन के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी का प्रथम राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह देश का चौथा राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2022 है। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और अपर मुख्य सचिव एस.एन. मिश्र को नई दिल्ली विज्ञान भवन में प्रथम पुरस्कार के प्रशस्ति-पत्र और ट्रॉफी से सम्मानित किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जल शक्ति राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल और बिश्वेश्वर टुडु भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में 11 विभिन्न श्रेणी में 41 विजेताओं को सम्मानित किया गया।
    इंदौर नगर निगम को जल आपूर्ति तथा वितरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय श्रेणी के द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और अपर आयुक्त सिद्धार्थ जैन को प्रशस्ति-पत्र, ट्रॉफी और एक लाख 50 हजार रूपये नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।
    जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि और किसानों के लिए ऐतिहासिक काम हुए हैं। विगत 18 वर्ष में प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ कर 45 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसे वर्ष 2025 तक 65 लाख हेक्टेयर किये जाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। जल प्रबंधन के हर क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट कार्य किया है।
    प्रदेश में बांध से सीधे खेतों तक भूमिगत पाइप लाइन से जल पहुँचाने का नवाचार हुआ है। प्रदेश की मोहनपुरा एवं कुंडालिया परियोजना, जिसकी सिंचाई क्षमता 2 लाख 25 हज़ार हेक्टेयर है, जल उपयोग दक्षता उन्नयन के क्षेत्र में अनुकरणीय सिंचाई परियोजना के रूप में स्थापित हो चुकी है।

  • कांग्रेस के खून में अंग्रेजों और मुगलों के जीन्सःविष्णुदत्त शर्मा

    कांग्रेस के खून में अंग्रेजों और मुगलों के जीन्सःविष्णुदत्त शर्मा

    भोपाल,16 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। छिंदवाड़ा गरीब कल्याण की योजनाओं के हितग्राहियों का गढ़ है। आज यह साबित हुआ है कि पार्षद के उपचुनाव में कमलनाथ जी के अपील जारी करने के बाद नकुल नाथ के पार्षद चुनाव में इंवॉल्वमेंट होने के बाद भी वार्ड के सभी बूथों पर भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत पाकर छिंदवाड़ा के अंदर इतिहास बनाया है। छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ जी, मिस्टर बंटाढार जी और प्रियंका गांधी जी जो चुनाव प्रचार करके अभी गई थीं, उन्हें भी आईना दिखाया है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। प्रदेश अध्यक्ष ने छिंदवाडा के वार्ड चुनाव सहित प्रदेश की अन्य नगरीय निकायों में हुए पार्षद उपचुनाव में भाजपा की जीत के लिए स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं को आभार माना है।

    प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर का संकल्प, छिंदवाडा से हुई शुरूआतप्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा  ने कहा भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर का जो विजय संकल्प लिया है, आज उसकी छिंदवाड़ा से शुरुआत हुई है। छिंदवाडा के वार्ड क्रमांक 42 के पार्षद उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्री संदीप चौहान ने सभी बूथों पर कांग्रेस को पछाड़ते हुए 436 वोटों से जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी ने हर बूथ पर लगभग 62 प्रतिशत वोट प्राप्त किये है। उन्होंने कहा कि अभी तो यह अंगड़ाई है आगे देखते चलिए मध्य प्रदेश विजय के परचम की ओर अग्रसर हुआ है।

    कमलनाथ बताएं की क्या वे कर्नाटक सरकार के धर्मांतरण कानून रद्द के निर्णय से सहमत है ?प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द किये जाने को कर्नाटक सरकार का जेहादी चेहरा बताया है। श्री शर्मा ने कहा कि सत्ता पाने के लिए हनुमान भक्ति का ढोंग करने वाली कांग्रेस सत्ता में आते ही धर्मांतरण का समर्थन करने लगी है। कर्नाटक में धर्मान्तरण के  विरुद्ध बनाये गए कानून को कांग्रेस सरकार ने रद्द करके एक बार पुनः सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस में मोहब्बत की दुकान केवल और केवल जेहादियों,धर्मान्तरण करने वालों एवं देश विरोधी तत्वों के लिए है। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की हिन्दू विरोधी क्रोनोलॉजी इस बात से समझ में आती है कि कांग्रेस ने पहले ’केरला स्टोरी’ जैसी धर्मांतरण और जिहाद को उजागर करने वाली फिल्म का विरोध किया फिर चुनाव जीतने के लिए हनुमान भक्ति का छद्म चोला ओढ़ा और अब चुनाव जीतकर धर्मांतरण विरोधी कानून खत्म कर जिहादियों और कट्टरपंथियों को बढ़ावा देकर हिन्दुओं के दमन का कुत्सित प्रयास किया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2018 के चुनाव से पूर्व कमलनाथ मुसलमानों को बूथ के आधार पर बांटकर 90 प्रतिशत वोट मांग रहे थे और जीतने के बाद ’इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस’ में जिन्ना के सपनों का पाकिस्तान दिखाया। मध्यप्रदेश कांग्रेस और कमलनाथ भी धर्मान्तरण का समर्थन करते हैं और अगर नहीं करते तो कर्नाटक सरकार के निर्णय का विरोध करें। कमलनाथ बताएं कि क्या वे कर्नाटक सरकार के निर्णय से सहमत है?

    दिग्विजय सिंह के विचार उनकी जेहादी मानसिकता को प्रदर्शित करते हैंप्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह के बयान ने यह सिद्ध कर दिया है कि कांग्रेसियों के खून में सिर्फ अंग्रेजों के जीन्स नहीं बल्कि मुगलों के भी जीन्स है। दिग्विजय सिंह वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री होकर भी जेहादियों का गुणगान करते हैं और देश विरोधी शक्तियों के समर्थन में खड़े होते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एक ओर ठोंगी जैसे अपशब्दों से दमोह में हिन्दू बेटियों के ज़बरन धर्म परिवर्तन के दर्द का एहसास नहीं होने देते हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे पूज्य संतों और सनातन संस्कृति का अपमान करते हैं। दिग्विजय सिह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का दमोह के स्कूल पर हुई कार्यवाही को अनुचित बताना इस बात को पुनः प्रमाणित करता है, कि कांग्रेस के खून में मुगलों के भी जीन्स हैं। अगर कमलनाथ धर्मान्तरण के आरोपियों पर हुई कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं तो यह क्यों न माना जाए कि वो स्वयं दमोह के जबरन धर्मान्तरण के समर्थन में हैं। वो उस ईको सिस्टम का हिस्सा हैं, जिसके तहत दमोह में षड्यंत्र पूर्वक बेटियों को बहला-फुसला कर धर्मान्तरण करने का कार्य चल रहा था। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का आरोपियों के साथ खड़े होना यह दर्शाता है कि ये सारा खेल कांग्रेस की सहमति एवं संरक्षण में चल रहा था। ये सभी तथ्य प्रमाणित करते हैं कि कांग्रेस अपने मुगलई जींस के कारण ही तुष्टिकरण और देश विरोधी ताकतों का समर्थन करती है।

  • बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली

    बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली

    भोपाल,15 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी नगरपालिक निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ठेकेदारों के माध्यम से बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की वसूली नहीं की जाए। साथ ही इसकी प्रतिदिन वसूली भी नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 29 मई 2023 को हाथठेला, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत में हितग्राहियों के अनुरोध पर बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन की वसूली और वसूली में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की घोषणा की गई थी।

    मंत्री श्री सिंह ने कहा है कि जिन नगरीय निकायों में बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन वसूली के लिये ठेके किये गये हैं, उन्हें प्राप्त होने वाली आय का आकलन करके शेष अवधि के लिये ठेके निरस्त करने की कार्यवाही परिषद की बैठक में की जाए। साथ ही बैठक में प्रतिदिन वसूली के स्थान पर अर्द्धवार्षिक-वार्षिक दरों का निर्धारण किया जाए। की गई कार्यवाही की जानकारी समय-सीमा में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  • जन धन खातों में न्यूनतम बैलेंस जरूरी नहीं

    जन धन खातों में न्यूनतम बैलेंस जरूरी नहीं

    भोपाल,14 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) के कुछ जिलों में कहीं-कहीं मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की लाड़ली बहनों के बैंक खातों में अंतरित की गई राशि क्रेडिट नहीं होने की जानकारी मिली है। न्यूनतम बेलेंस नही होने से सेवा शुल्क में रूप में बैंकों द्वारा राशि काटे जाने की आशंका व्यक्त की गई है, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री जन धन योजना में खुले बैंक अकाउंट सहित बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट में न्यूनतम बेलेंस रखने की बाध्यता नहीं है। बैंक, इन अकाउंट पर सेवा शुल्क नहीं ले सकते हैं।

    संयुक्त संचालक महिला बाल विकास डॉ. विशाल नाडकर्णी ने बताया है कि स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) ने निर्देश जारी कर निष्क्रिय खातों वाली लाड़ली बहनाओं के खाते, जन धन खातों में परिवर्तित करने की कार्यवाही के निर्देश भी दिये हैं, जिससे कि बहनों के खाते में अंतरित की गई राशि जमा हो सके।

    डॉ. नाडकर्णी ने कहा है कि महिला बाल विकास संचालनालय द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि महिलाओं के बैंक खातों से न्यूनतम बेलेंस न होने के कारण बैंकों द्वारा राशि काटी गई है, ऐसे सभी प्रकरणों के लिये जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि इन महिलाओं के बेसिक सेविंग डिपाजिट अकाउंट में या तो परिवर्तन किया जाएगा या फिर नवीन अकाउंट खुलवा कर डीबीटी सक्रिय किया जाएगा, जिससे उनके अकाउंट से राशि न कटे। इसके अतिरिक्त इस अवधि के दौरान जितने भी डीबीटी हुए हैं, उन सभी के भुगतान की प्रक्रिया महिला बाल विकास संचालनालय द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार की जाएगी। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के स्वीकृति-पत्र मिलने के बाद भी लाड़ली बहनों के खाते में राशि नहीं आने के प्रकरण बहुत कम संख्या में हैं। राशि प्राप्त नहीं होने के कारणों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध हो गई है। ऐसे प्रकरणों का निदान जिला स्तर से ही किया जा रहा है और डीबीटी सक्रिय होते ही शेड्यूल अनुसार भुगतान किया जाएगा।

  • कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    बालासोर 13 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि विगत 2 जून को ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे (Odisha Train Accident) की मूल वजह का पता चल गया है। इस बात का पता लगा लिया गया है कि हादसा क्यों हुआ।


    अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जांच पूरी हो गई है। रेलवे सेफ्टी कमिश्नर जल्द रिपोर्ट देंगे। जल्द सारे तथ्य सामने आएंगे। यह साफ है कि रूट कॉज का पता चल गया है। जल्द ही सच सबके सामने लाया जाएगा। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जांच की है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए। हमने घटना के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली है। यह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ।” दरअसल, इस ट्रेन हादसे में 288 लोगों की मौत हुई है। एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।


    इस बीच सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन सिग्नल में गड़बड़ी के चलते मालगाड़ी से टकराई थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को पहले आगे बढ़ने के लिए सिग्नल मिला फिर वापस ले लिया गया। अब यह गड़बड़ी तकनीकी खराबी के चलते हुई या इसमें किसी इंसान की भागीदारी थी इसकी जांच की गई है।
    गौरतलब है कि 2 जून की शाम करीब 7 बजे हाल के वर्षों में सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। हादसे में तीन ट्रेनें (दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी) शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानागा बाजार स्टेशन के पास ट्रैक पर पहले से खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। इसके चलते कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए थे। ये डिब्बे दूसरे ट्रैक पर चले गए थे जिसपर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस तेज रफ्तार से आ रही थी। इसने पटरी पर मौजूद डिब्बों को टक्कर मार दी। दोनों पैसेंजर ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।


    रेल दुर्घटना ओड़िशा के बालासोर और भद्रक स्थानों के बीच में पड़ते बहानगा नामक स्थान पर हुआ ।कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन को उस स्टेशन पर रूकना नहीं था, इसको ग्रीन सिग्नल दे दिया गया, ट्रेन के नज़दीक आने पर ग्रीन सिग्नल वापिस ले लिया गया और एक्सप्रेस ट्रेन को लूप लाईन की तरफ़ मोड़ भी दिया गया जबकि लूप लाईन पर पहले ही 2 माल गाडियां खड़ीं थी । कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन पूरी स्पीड में थी और माल गाड़ी से टक्कर इतनी जोर से हुई कि कोरामंडल एक्सप्रेस का इंजन और कई बोगियाँ माल गाड़ी के ऊपर चढ़ गई और और पास से गुजर रही अप लाईन पर गिर गई । थोड़ी ही देर में अप लाईन पर आ रही बंगलौर हावड़ा दुरंतो ट्रेन रेलवे लाइन पर गिरी हुई बोगियों से टकरा गई ।


    2012 में एक सुरक्षा प्रणाली कवच विकसित कर ली गई थी जिसमें गाड़ियों के आमने सामने आने पर भी गाड़ियों में टक्कर नहीं होती और गाड़ियाँ अपने आप रूक जाती हैं । आज के समाचारों के अनुसार आज भी भारतीय रेलवे के 19 संभागों में से सिर्फ़ एक संभाग ( सिकंदराबाद) में लगभग 1200 किलोमीटर रेल ट्रैक पर यह कवच नामक प्रणाली काम कर रही है । देश में रेलवे के पास 13215 रेलवे इंजन हैं जिनमें से सिर्फ़ 65 इस प्रणाली से लैस हैं । जानकारों का कहना है कि अगर कवच प्रणाली लगी होती तो दुरंतो ट्रेन का इंजन 400 मीटर पहले ही रूक जाता और जान माल का नुक़सान बहुत कम होता ।


    लगभग एक साल पहले 4मई को सिकंदराबाद संभाग में कवच प्रणाली का परीक्षण हुआ था जिसमें रेलमंत्री अश्विन वैष्णव ने भी भाग लिया था और परीक्षण सफल रहने पर रेलमंत्री ने कवच प्रणाली से रेल इंजनों को लैस करने की घोषणा की थी परन्तु एक वर्ष में सिर्फ़ 65 रेल इंजन ही इससे लैस किए जा सके । रेलवे के सरकारी अधिकारी यदि यात्री और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में लेते तो ये हादसा नहीं होता ।ओडिशा में ट्रेन इसलिए टकराई क्योंकि वह गलत ट्रैक पर चली गई थी, लेकिन उसे गलत ट्रैक पर भेजा किसने? क्या कोई आदमी ट्रैक चेंज करने के लिए नियुक्त होता है जिसने लापरवाही की?

  • सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    भोपाल, 12 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन में सोमवार को आग लग गई। तीसरी मंजिल से शुरू हुई यह आग देखते ही देखते छठी मंजिल तक पहुंच गई। देर रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी। इस आग से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज और फर्नीचर जल गया है। 30 से ज्यादा एयर कंडीशनरों में ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है। कांग्रेस ने आग लगने की टाइमिंग पर सवाल किए हैं। आरोप लगाया है कि शिवराज सरकार की चला-चली की बेला है। इस वजह से आग लगाकर घोटालों की फाइलें जलाई गई हैं। वहीं सीएम शिवराज ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी है। वायुसेना की मदद मांगी है।
    जानकारी के मुताबिक आग सोमवार को करीब चार बजे लगी। आग की शुरुआत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के दफ्तर से हुई। फिर चौथी मंजिल पर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया। पहले तो कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे उस पर काबू नहीं पा सके । एसी में ब्लास्ट हुए, जिससे आग तेजी से फैली। आग की वजह से पूरी इमारत में हड़कम्प मच गया। सीआईएसएफ और एसडीईआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच समिति की निगरानी में आग से हुई क्षति का अनुमान लगाया जाएगा। सतपुड़ा भवन में कई विभागों के संचालनालय हैं, जिनमें आईएएस अफसर भी बैठते हैं।
    मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर चर्चा कर उन्हें सतपुड़ा में दुर्भाग्यपूर्ण आगजनी की घटना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को आग बुझाने के प्रदेश सरकार के प्रयासों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों (आर्मी, एयरफोर्स, भेल, सीआईएएसएफ, एयरपोर्ट एवं अन्य) से मिली मदद से भी अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री चौहान ने गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर चर्चा कर सतपुड़ा भवन में आग की घटना की जानकारी दी एवं आवश्यक मदद मांगी। सतपुड़ा के जिन मंजिलों में आग लगी है, वहां मूलतः तीन विभाग हैं, आदिम जाति कल्याण विभाग, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग । तीसरी, चौथी, पांचवीं व छठवीं मंजिल में इनमें से किसी भी विभाग का टेंडर, प्रैक्योरमेंट संबंधित कोई भी कार्य नहीं होता है। मूलतः यहां स्थापना संबंधित विभागीय कार्य होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी सतपुड़ा भेजा और सुरक्षा उपायों की निगरानी करने को कहा है।
    इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की। उन्होंने आग बुझाने के लिए एयरफोर्स की मदद मांगी। रक्षा मंत्री ने एयरफोर्स को निर्देशित किया। रक्षा मंत्री के निर्देश पर एएन 32 विमान और एमआई 15 हेलीकॉप्टर भोपाल पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन आग पर काबू कर लिया गया है। आग दुबारा न भड़क सके और विमानों व हेलीकाप्टरों की आवाजाही सुनिश्चित हो सके इसके लिए एयरपोर्ट को रात भर खुला रखा गया है।
    मुख्यमंत्री चौहान ने आग के प्रारंभिक कारणों को जानने के लिए कमेटी घोषित की है। कमेटी में एसीएस होम राजेश राजौरा, पीएस अर्बन नीरज मंडलोई, पीएस पीडब्ल्यूडी सुखबीर सिंह और एडीजी फायर रहेंगे। कमेटी जांच के प्रारंभिक कारणों का पता कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री चौहान को सौंपेगी।
    सूत्रों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के कई मामलों की शिकायत ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को हुई थी। इनसे जुड़ी जांच की फाइलों को भी आग से नुकसान पहुंचा है। इसी तरह आदिम जाति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जले हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुछ महीनों पहले रिनोवेशन का काम हुआ था। पुरानी अलमारियों और फर्नीचर को निकाला गया था, जिसे आग ने पूरी तरह नष्ट कर दिया।
    आदिम जाति विभाग के दफ्तर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आग तीसरी मंजिल पर ही लगी थी। आग की लपटों की वजह से फर्नीचर पूरी तरह से जल गया। पांचवें और छठी मंजिल पर रखा सामान भी जला है। प्लास्टर टूटकर गिर गया है। पूरी इमारत में मधुमक्खियों के पुराने छत्ते हैं। इस वजह से छत्तों से मधुमक्खियों के उड़ने की दहशत भी थी।
    सतपुड़ा भवन में इससे पहले भी आग लग चुकी है। 25 जून 2012 में भी चौथी मंजिल पर आग लगी थी। तब यहां तकनीकी शिक्षा विभाग का दफ्तर था। यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी।
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सतपुड़ा भवन में लगी आग पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रियंका गांधी जी ने जबलपुर में “विजय शंखनाद रैली” में घोटालों को लेकर हमला बोला तो सतपुड़ा भवन में भीषण आग लग गई। इसमें महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गई है। कहीं आग के बहाने घोटालों के दस्तावेज जलाने की साज़िश तो नहीं। यह आग मप्र में बदलाव के संकेत दे रही है। पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पचास प्रतिशत कमीशन वाली सरकार ने अपने दस्तावेज जला दिए। सितंबर 2018 में भी सतपुड़ा भवन में भी आग लगी थी। सर्वे कांग्रेस के पक्ष में है। आम लोगों में राय है कि कांग्रेस की सरकार आ रही है। साफ है कि भ्रष्टाचार छिपाने के लिए आग लगी है। मेरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधा सवाल है – यह आग लगी है या लगाई गई है? आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव से पहले सबूत मिटाने के लिए सरकार ऐसी ‘हरकत’ करती है! हार रही है भाजपा। अब यह भी बताए कि पुराने ‘अग्निकांड’ में दोषी कौन थे? किसे/कितनी सजा मिली?

  • भारतीय रेल ने नौ साल में लिखी विकास की नई कहानी

    भारतीय रेल ने नौ साल में लिखी विकास की नई कहानी

    नई दिल्ली, 11 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). बीते 9 साल में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारतीय रेलवे में अभूतपूर्व बदलाव देखा गया है. आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए मजबूत रेलवे नेटवर्क के महत्व को स्वीकार करते हुए, केंद्र की मोदी सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं.
    मोदी सरकार ने पैसेंजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑपरेशनल कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए रेलवे के बुनियादी ढांचे के एडवांसमेंट पर फोकस किया है. सिग्नलिंग और टेलीकम्यूनिकेशन सिस्टम को बढ़ाने के लिए पैसे का पर्याप्त आवंटन किया गया है और पुराने उपकरणों को अत्याधुनिक तकनीक से बदल दिया गया है. इससे दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है और रेलवे के समग्र सुरक्षा रिकॉर्ड में सुधार हुआ है.
    डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना मोदी सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है. ये हाई-स्पीड कॉरिडोर, जैसे कि पश्चिमी डीएफसी और पूर्वी डीएफसी, गुड्स को सही तरीके से ट्रांसपोर्ट करने और मौजूदा रेलवे लाइनों पर भीड़ को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. ये कॉरिडोर पूरे देश में गुड्स ढुलाई की निर्बाध आवाजाही को सुगम बनाकर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे.
    केंद्र की मोदी सरकार भारत में हाई-स्पीड रेल (Bullet Train) लेकर आई है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना, जापान के सहयोग से, इंटरसिटी यात्रा में रिवोल्यूशन लाने के लिए तैयार है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा. यह परियोजना न केवल तकनीकी प्रगति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को भी मजबूत करती है.
    मोदी सरकार ने देश भर में रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है. कई नई रेलवे लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो पहले से असंबद्ध क्षेत्रों को जोड़ती हैं और मौजूदा मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करती हैं. इसके अलावा, सरकार ने भारतमाला परियोजना और सागरमाला परियोजनाएं शुरू की हैं, जो रेलवे को रोडवेज और पोर्ट कनेक्टिविटी के साथ इंटीग्रेट करती हैं, मल्टीमॉडल परिवहन को बढ़ावा देती हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं.
    डिजिटल युग को गले लगाते हुए, मोदी सरकार ने पैसेंजर्स के अनुभव को बढ़ाने और संचालन को सिस्टमेटिक करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं. भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की शुरुआत ने टिकट बुकिंग को आसान बना दिया है, जिससे फिजिकल टिकट काउंटरों पर निर्भरता कम हो गई है. इसके अतिरिक्त, रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सेवाओं ने उन्हें डिजिटल हब में बदल दिया है.
    भारत की गौरव गाथा में वंदे भारत ट्रेन ने बड़ा योगदान दिया है. इस अत्याधुनिक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन ने देश में रेल यात्रा में क्रांति ला दी है, कनेक्टिविटी को बढ़ाया है और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है. अपनी अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधा के साथ, इसने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटकों को आकर्षित किया है, पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा दिया है और रोजगार के अवसर पैदा किए हैं. साथ ही तेजस ट्रेनों को भी लाया गया है. ये ट्रेनें प्राइवेट हाथों में हैं. डबल डेकर ट्रनों के भी इंट्रोड्यूस किया गया है.
    पैसेंजर सुविधाओं पर सरकार का मुख्य फोकस रहा है. देश भर के स्टेशनों को बेहतर प्रतीक्षालयों, बेहतर स्वच्छता सुविधाओं और एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया गया है.
    कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए, मोदी सरकार ने रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन पर बहुत जोर दिया है. ब्रॉड-गेज रेलवे लाइन के 100% इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सख्ती से पालन किया गया है, जिससे ईंधन की लागत में काफी बचत और ग्रीन रेलवे सिस्टम का रास्ता खुला है. इस संक्रमण ने न केवल प्रदूषण को कम किया है, बल्कि ट्रेन संचालन की गति और दक्षता को भी बढ़ाया है.
    मोदी सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने में रेलवे की क्षमता को पहचाना है. रेलवे कर्मियों के स्किल डेवलपमेंट के जरिए सक्षम कार्यबल बनाने के प्रयास किए गए हैं. भारतीय रेलवे विश्वविद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी पहलें लोगों को रेलवे उद्योग में करियर बनाने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने के लिए शुरू की गई हैं. इससे न केवल नौकरी चाहने वालों को लाभ हुआ है बल्कि रेलवे की समग्र मानव संसाधन क्षमताओं को भी मजबूती मिली है.

  • नेशनल इनोवेशन सिस्टम से जुड़ें फार्मासिस्ट

    नेशनल इनोवेशन सिस्टम से जुड़ें फार्मासिस्ट


    अगर हम अपनी कंपनियों, सार्वजनिक शोध और नियमन में जरूरी बदलाव करें तो इनोवेशन पर आधारित एक ऐसा औष​धि उद्योग तैयार कर सकते हैं जो दुनिया को पीछे छोड़ देगा।

    भोपाल, 10 जून (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). प्रभावी नैशनल इनोवेशन सिस्टम कायम करने के लिए हमें बीते 70 वर्षों की सबसे सफल आर्थिक घटनाओं से सबक लेना होगा। जापान, द​क्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और चीन इसके उदाहरण हैं। इन सभी देशों ने इनोवेशन की क्षमता विकसित करने की एक प्रक्रिया का पालन किया। एक प्रतिस्पर्धी उद्योग तैयार किया गया फिर गहरी तकनीकी क्षमता, उसके पश्चात आंतरिक शोध एवं विकास तथा अंत में सरकारी स्तर पर शोध और विकास किया गया।

    हम फार्मा सेक्टर में दुनिया को पछाड़ने वाला इनोवेशन कर सकते हैं। यह एक ऐसा उद्योग है जिसमें हम शोध एवं विकास में वै​श्विक स्तर का निवेश कर सकते हैं। हमने यह नतीजा कैसे निकाला? दरअसल यह जानकारी उन टिप्प​णियों का नतीजा है जो फार्मा सेक्टर में इनोवेशन को लेकर बंद दरवाजों के पीछे हुई एक बैठक में निकलीं। इस बैठक में फार्मा उद्योग के कुछ सर्वा​धिक जानकार लोग, विद्वान, सरकार के लोग आदि शामिल थे। इसका आयोजन सेंटर फॉर टेक्नॉलजी इनोवेशन ऐंड इकनॉमिक रिसर्च तथा अनंत सेंटर ने किया था।

    कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि भारतीय फार्मा उद्योग एक सफल क्षेत्र है। 50 वर्ष पहले जहां हम विदेशी कंपनियों और ब्रांड पर निर्भर रहते थे, वहीं अब हमने एक बड़ा और जीवंत फार्मा सेक्टर तैयार किया है जहां उद्यमिता श​क्ति से भरपूर भारतीय कारोबारी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुकाबला कर रहे हैं। आकार के मामले में हम 10 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं लेकिन 42 अरब डॉलर की बिक्री के साथ हम मूल्य में 14वें स्थान पर हैं और हमारी हिस्सेदारी केवल 1.5 फीसदी है।

    फार्मा उद्योग की आकांक्षा 2030 तक अपना आकार तीन गुना करने की है। इसमें इनोवेशन का योगदान होगा। परंतु इसके लिए पूरी व्यवस्था बनानी होगी। इसकी शुरुआत शोध एवं विकास में निवेश से होनी चाहिए। अमेरिका, जापान, जर्मनी, ​स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन में बड़ी-बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां हैं। इन सभी ने शोध एवं विकास में अरबों डॉलर का निवेश किया है। ​​

    स्विट्जरलैंड की रॉश और नोवार्टिस, अमेरिका की जेऐंडजे, फाइजर, ब्रिस्टल-मायर्स, मर्क और इलाई लिली, ब्रिटेन की ऐस्ट्राजेनेका और जीएसके, जर्मनी की बेयर, बोरिंगर और मर्क डी, जापान की ताकेदा, दाइची, एस्टेल्लास, ओत्सुका और एईसाई। हमें उनकी बराबरी के लिए क्या करना चाहिए? ये कंपनियां हमारी टॉप पांच फार्मा कंपनियों के कुल टर्नओवर से अ​धिक रा​शि तो अपने शोध एवं विकास पर व्यय करती हैं। हमारी कंपनियों को कम से कम 10 वर्षों तक शोध एवं निवेश व्यय बढ़ाना होगा।

    आंतरिक शोध एवं विकास में निवेश को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। हम कंपनियों से वह करने के लिए कहने में भी हिचकिचाते हैं जो उन्हें अपनी बेहतरी के लिए खुद कहना चाहिए यानी शोध एवं विकास पर व्यय बढ़ाना। शोध एवं विकास पर व्यय करने वाली टॉप कंपनियों से यह कहा जाना चाहिए कि वे इस सेक्टर में निवेश बढ़ाएं। अगले 10 वर्षों तक शोध एवं विकास व्यय में इजाफे के मामले में आय कर पर कर छूट दी जानी चाहिए।

    हमें ऐसी नियामकीय व्यवस्था बनानी चाहिए जो कंपनियों में इनोवेशन को बढ़ावा दे। हमारी एक राउंडटेबल बैठक में वक्ताओं ने नियामकीय ढांचे में सुधार की बात कही थी। नियमन का काम ऐसे अ​धिकारियों के हवाले है जिनको औष​धि निर्माण में लगने वाले नए घटक के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

    ऐसी ही वजहों से भारतीय औष​धि निर्माताओं को पहले चरण के परीक्षण भारत के बजाय ऑस्ट्रेलिया में करने पड़ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसकी लागत 10 गुना तक अ​धिक होती है लेकिन वहां प्रक्रिया व्यव​स्थित, पारद​र्शी और सुनि​श्चित है। अगर हम नियामकीय व्यवस्था में सुधार करें तो हमें औष​धि निर्माण में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है।

    हम अपने सकल घरेलू उत्पाद का करीब 0.4 फीसदी सार्वजनिक फंडिंग वाले शोध एवं विकास में खर्च करता है जो वै​श्विक औसत का 0.5 फीसदी है। परंतु इस निवेश पर हमें बहुत कम प्रतिफल मिलता है। समस्या यह नहीं है कि हम कितना व्यय करते हैं ब​ल्कि दिक्कत यह है कि हम कहां खर्च करते हैं। राष्ट्रीय शोध एवं विकास व्यय का आधा से अ​धिक हिस्सा सरकार अपनी स्वचालित प्रयोगशालाओं में व्यय करती है। सबसे अ​धिक व्यय रक्षा पर उसके बाद परमाणु ऊर्जा, CSIR और कृ​षि पर व्यय होता है। स्वास्थ्य शोध छठे स्थान पर है और शोध एवं विकास पर होने वाले सरकारी व्यय का छह फीसदी उस पर खर्च किया जाता है।

    अमेरिका में स्वास्थ्य क्षेत्र का शोध रक्षा के ठीक बाद आता है और सकार शोध विकास व्यय का 27 फीसदी हिस्सा उस पर खर्च करती है। ब्रिटेन में यह 20 फीसदी है। मजबूत आंतरिक व्यय से ही इस क्षेत्र में बात बन सकती है। सरकारी शोध एवं विकास व्यय का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च करने से इसलिए भी लाभ होगा क्योंकि फार्मा उद्योग में गहन शोध एवं विकास होता है।

    इसके अलावा भी अवसर हैं। फार्मा उद्योग का कोई भी व्य​क्ति आपको बता देगा कि वे आसानी से कई फार्मेसी पाठ्यक्रमों के ​युवा स्नातकों को नौकरी दे सकते हैं। लेकिन उन्हें आसानी से बढि़या शोध प्रतिभाएं नहीं मिलतीं। विशेष प्रतिभाएं अक्सर अमेरिका और ब्रिटेन की प्रयोगशालाओं में चली जाती हैं। यह बात उन्हें बेहतर फंडिंग वाले विश्वविद्यालयों से जोड़ती है जो इस दिशा में ढेर सारा शोध करते हैं।

    तमाम ऐतिहासिक कारणों से हमारे अ​धिकांश सार्वजनिक शोध स्वायत्त सरकारी प्रयोगशालाओं में होता है। जबकि तमाम अन्य देश सरकारी विश्वविद्यालयो में शोध करते हैं। अगर हम उच्च ​शिक्षा में सार्वजनिक शोध पर बल दें तो हम बेहतर प्रतिभाएं तैयार कर पाएंगे।

    इनोवेशन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आकांक्षा होनी आवश्यक है। चीन के अनुभव से भी हम सीख सकते हैं। 15 वर्ष पहले भारतीय फार्मा उद्योग इनोवेशन में चीन से आगे था लेकिन आज हम 10 वर्ष पीछे हैं। 2012 के आसपास चीन में नियामकीय बदलाव करके चिकित्सकीय परीक्षणों को आसान बना दिया गया, वि​भिन्न स्थानीय सरकारों के बीच की प्रतिद्वंद्विता ने कंपनियों को अपने शहर में शोध विकास बढ़ाने को प्रेरित किया।

    वहां प्रतिभा खोज कार्यक्रम में हजारों प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया गया और चीन के बाजार और निर्यातोन्मुखी उद्योग ने पूरा परिदृश्य बदल दिया। इसके इर्दगिर्द फलता-फूलता वेंचर कैपिटल उद्योग तैयार हुआ। गत वर्ष इस उद्योग ने चीन में इस क्षेत्र के स्टार्टअप में 15 अरब डॉलर का निवेश किया। भारत में इसकी तुलना में बहुत कम प्रगति हुई। आगे की राह एक व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य से निकलेगी जिसके तहत भारत के फार्मा उद्योग को इनोवेशन में अग्रणी बनाने का प्रयास होना चाहिए।

    नियामकीय ढांचे में बदलाव लाकर चिकित्सकीय परीक्षणों का मार्ग सहज किया जा सकता है और स्वास्थ्य से जुड़े शोध के क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने से भी हालात में सुधार होगा। आज से 10 वर्ष बाद हमारे फार्मा उद्योग का बदला हुआ इनोवेशन भारतीय उद्योग को दिशा दिखा सकता है।

    (नौशाद फोर्ब्स, फोर्ब्स मार्शल के को-चेयरमैन और सतीश रेड्डी, रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन हैं) बिजिनेस स्टैंडर्ड हिंदी से साभार

  • जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज

    जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज

    भोपाल 2 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़ा देव भगवान में हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा है। सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव भगवान के नव-निर्मित मंदिर में बड़ा देव भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होते हुए हृदय प्रफुल्लित है। मुख्यमंत्री ने भगवान बड़ा देव से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री चौहान सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव मूर्ति कुसमी की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर जनजातीय सम्मेलन को छतरपुर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट से जनजातीय विकासखंडों की ग्राम सभाओं को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। प्रदेश की 268 ग्राम सभाएँ स्वयं तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य कर रही हैं। ग्राम सभाओं को गाँव में शराब की दुकान खोलने का फैसला करने का अधिकार दिया गया है। गाँव में छोटे-छोटे विवादों के निराकरण के लिए शांति और विवाद निवारण समितियाँ बनी हैं। गाँव से यदि किसी श्रमिक को काम के लिए बाहर ले जाया जाता है तो उसकी सूचना ग्राम सभा को देनी होती है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 10 जून से प्रत्येक पात्र बहन के खाते में एक हजार रूपये डाले जाएंगे। इससे बहनों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सभी को निःशुल्क खाद्यान्न, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का आवास, बीमारी पर आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों का धूमधाम से विवाह संपन्न किया जा रहा है। किसानों को केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भगवान बड़ा देव की प्रेरणा से निरंतर प्रदेशवासियों की प्रगति के लिए कार्य करते रहेंगे।

    जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण तथा सीधी जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कुसमी प्रवास के दौरान जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा भगवान बड़ा देव के मंदिर निर्माण तथा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की माँग की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा पूरी श्रद्धा से माँग को पूरा करते हुए मंदिर का निर्माण कराया गया है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को स्वीकृत-पत्र वितरित किए गए। साथ ही कुसमी क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।

  • जीवन का बेहतर उपसंहार समृद्ध समाज की गारंटी है-राधेश्याम अग्रवाल

    जीवन का बेहतर उपसंहार समृद्ध समाज की गारंटी है-राधेश्याम अग्रवाल


    भोपाल, 03 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ). जिन लावारिस लाशों का पता ठिकाना पुलिस भी नहीं जानती राजधानी का एक आवारा मसीहा उन्हें सद्गति देकर पुण्य बटोर रहा है। उसके पुण्य भंडार को भरने में ऐसे सैकड़ों समाजसेवी जुटे हैं जिन्हें आम लोग नहीं जानते। हर दिन बीमार जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करना उसकी दिनचर्या ही बन गई है। जनसंवेदना नाम की जिस संस्था को उन्होंने समाज में अनोखी पहचान दिलाई है उसमें कई चिकित्सक, पुलिस कर्मी, व्यापारी, उद्योगपति, इंजीनियर, लेखक और सामान्य लोग भी जुड़े हैं। हर दिन वे स्वेच्छा से संस्था को भोजन और कफन दफन की राशि मुहैया कराते हैं। लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब राधेश्याम अग्रवाल नाम के ये समाजसेवी कहते हैं कि जनसहयोग ने मेरा जीवन सफल बना दिया है। गुमनाम लोगों की अंतिम यात्रा का बेहतर उपसंहार देखकर उन्हें लगता है कि यही एक समृद्ध समाज की गारंटी है।
    सत्तर वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल हर दिन सुबह घर से नाश्ता करके निकलते हैं और जेल पहाड़ी स्थित अपनी संस्था के दफ्तर पहुंच जाते हैं। विभिन्न पुलिस थानों और अस्पतालों से जो जानकारियां आती हैं उसके अनुसार वे धनराशि मुहैया कराते हैं। ये दानराशि जुटाने के लिए वे दिन भर समाजसेवियों से जाकर मिलते हैं और उन्हें इस पुण्य कार्य से जोड़ते हैं। संस्था से जुड़े स्वयंसेवी और विभिन्न लोग इस दौरान दफ्तर आकर भी मिलते रहते हैं। संस्था के अभियान को जिस लगन से वे सफल बनाते रहे हैं उन्हें देखकर हर व्यक्ति नतमस्तक हो जाता है।
    आमतौर पर श्रेष्ठिवर्ग में पूजा, और अपने प्रतिष्ठान के प्रति लगाव देखा जाता है, लेकिन राधेश्याम अग्रवाल के लिए तो लाशों की अंतिम क्रिया ही पूजा है ।वे लगभग अठारह सालों से ये पुण्य कार्य कर रहे हैं और कभी विश्राम नहीं करते। वे कहते हैं कि हर दिन जरूरत मंदों को भूख लगती है और हर दिन कहीं न कहीं जीवन की डोर यमराज के हाथों में जा अटकती है। वे कहते हैं कि एक दुर्घटना में बाल बाल बचने के बाद उन्होंने संकल्प किया था कि वे किसी भी गुमनाम इंसान को लावारिस होकर नहीं जाने देंगे। उन्हें इस कार्य की प्रेरणा देने का काम मेडीकोलीगल एक्सपर्ट डॉक्टर डी.के.सत्पथी ने किया था। तब वे अपराध संवाददाता के रूप में उनके पास खबर लेने जाते थे। डाक्टर सत्पथी ने उन्हें बताया कि जिन लावारिस लाशों का वे पोस्टमार्टम करते हैं उनका अंतिम संस्कार पुलिस के लिए बड़ी समस्या होता है। यदि कोई समाजसेवी ये बीड़ा उठा ले तो बेगुनाह लोगों को भी बैकुंठयात्रा कराई जा सकती है। इसी विचार ने आगे चलकर जनसंवेदना संस्था को जन्म दिया और आज यह एक विशाल नेटवर्क का रूप ले चुकी है। हजारों दानदाता इससे जुड़कर अपना भी जन्म सफल बना रहे हैं और लावारिस मरने वालों के लिए आशा की किरण बन गए हैं।

  • समाजसेवा के स्थायी समाधान लाई मोदी सरकारःसहस्त्रबुद्धे

    समाजसेवा के स्थायी समाधान लाई मोदी सरकारःसहस्त्रबुद्धे

    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की 9 वर्षों की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि ई-श्रम पोर्टल की स्थापना के बाद अब असंगठित श्रमिकों को मौजूदा सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित लोगों के लिए देश भर में 12 ‘गरिमा गृह’ स्थापित किये गये हैं जो उन्हें आश्रय प्रदान कर रहे हैं। इसी तरह, देश की 2.7 लाख से अधिक दिव्यांग आबादी को लाभावन्वित करने वाली 3954 परियोजनाओं को दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना के तहत 508.34 करोड़ रुपये की सहायता अनुदान जारी की गयी है। इसके अलावा 1.84 लाख दिव्यांग छात्रों को 2022 तक 556.37 करोड़ रुपये की छात्रृवृत्ति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार पोषण ट्रेकर के तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए राज्य के भीतर और बाहर एक आंगनवाड़ी केंद्र से दूसरे में प्रवास की सुविधा प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 2,900 से अधिक गांवों का चयन किया गया है, जिसमें 53 लाख से अधिक परिवारों के जीवन में बदलाव लाया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति के 2.6 करोड़ से अधिक लोग शामिल हैं। वर्तमान सामाजिक कल्याण मॉडल स्वभाविक रूप से समावेशी हैं और समग्र सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करते हुए सभी समुदायों को इसका लाभ प्रदान कर रहा है।

    भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में समाज कल्याण क्षेत्र में हो रहे बदलाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पंडित दीनदयाल जी की धारणा ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुंच’ के सिद्धांत को पूरा करने की दिशा में अथक प्रयास किया है। ऐसे ही अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सुदृढ़ हुई है। प्रत्येक योजना के लिए समर्पित पोर्टल के साथ-साथ ‘आधार’ प्रणाली में लाए गए सुधार, समाज कल्याण योजनाओं के लाभ लक्षित लाभार्थियों तक सफलतापूर्वक पहुंचा रहे हैं। पीएम उज्जवला योजना, वन नेशन-वन राशन कार्ड, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना, पीएम ग्राम सड़क योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं और पहलों के साथ इस क्षेत्र में परिवर्तन की शुरुआत सभी को प्रभावित कर रही है और भारत की लोक कल्याणकारी राज्य की छवि को मजबूती दे रही है।

    डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि लोक नीति शोध केंद्र (पीपीआरसी) ने ’सामाजिक न्याय से संपूर्ण विकास’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें देश में मौजूद मजबूत सामाजिक कल्याण मॉडल के मूल सार को शामिल किया गया और साथ ही इसे साबित करने के लिए चौंका देने वाले आंकड़े भी पेश किए गए। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के सामाजिक कल्याण के एक समग्र मॉडल को चित्रित करते हुए मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई प्रत्येक पहल या योजनाओं का विश्लेषण करती है। इसके अलावा, रिपोर्ट यूपीए और एनडीए शासन के बीच तुलना करती है, जिसमें सांख्यिकीय डेटा का उपयोग करके मोदी सरकार के तहत इस क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को उजागर किया गया है।

    डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने देश में सामाजिक कल्याण के परिदृश्य को बदल दिया है। 2014 से पहले, ग्रामीण स्वच्छता कवरेज केवल 38.7 प्रतिशत था। हालांकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 2019 में खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति को हासिल कर एक नयी कामयाबी को लिखा। इसी तरह 2014 से पहले 19.43 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 3.23 करोड़ घरों में ही नल कनेक्शन उपलब्ध थे। इसके विपरीत 4 अप्रैल, 2023 तक 11.66 करोड़ से अधिक (60 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के दायरे में लाया गया और उनके लिए स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित किया गया। उन्होंने कहा कि आवासीय योजनाओं का मामला भी कुछ अलग नहीं था। 2014 से पहले, ग्रामीण परिवेश के लिए चलने वाली आवासीय योजना चिंता जनक रूप से धीमी गति से बढ़ रही थी। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 2.25 करोड़ से अधिक घरों का निमार्ण किया हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को दिये गये हैं।
    जनजातीय मंत्रालय के आवंटन में 190 प्रतिशत की वृद्धि हुई
    उन्होंने कहा कि एनडीए शासन के तहत सामाजिक कल्याण से संबंधित मंत्रालयों के लिए बजटीय आवंटन में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए आवंटन में लगभग 190 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मंत्रालय के लिए आवंटन 2013-14 में 4295.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 12461.88 करोड़ रुपये हो गया, जो 2.9 गुना वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के बजट में 1.9 गुना की वृद्धि हुई, जो 91 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है, यह 2013-14 के 6725.32 करोड़ रुपये से बढ़कर नवीनतम बजट में 12,847.02 करोड़ रुपये हो गया है।

    डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि पीपीआरसी की रिपोर्ट में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत कार्यात्मक सामाजिक कल्याण की हर योजना को भी शामिल किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के दूसरे चरण में 1,685,545 गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था है और 2,45,064 गावों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाएं हैं, जो ओडीएफ $ स्थिति को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मिशन पोषण 2.0 के तहत देश भर में 4 लाख से अधिक पोषण वाटिकाओं का विकास किया गया है और 1.10 लाख औषधीय पौधे लगाए गए है। इस तरह बेटी बचाओ-बेटी पढाओ योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद भारत का लिंग अनुपात 918 (2014-15) से बढ़कर 937 (2020-21) हो गया है और इसमें 19 अंकों का सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2021-22 में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतिम चरण में 695 पंचायत भवन का निर्माण करवाया गया और 6 लाख से अधिक हितधारकों को प्रशिक्षित किया गया था। इसके अलावा, योजना के तहत 1619 पंचायत शिक्षण केंद्र बनाए गए। ऐसे ही मैला ढोने वालों के पुर्नवास एवं स्व-रोजगार योजना (एसआरएमएस) के एक भाग के रूप में, सभी 58,098 चिन्हित लोगों को 40,000 रुपये की एकमुश्त नकद सहायता का भुगतान किया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के लिए 690 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में से 523 को 2014-15 के बाद स्वीकृत किया गया है। श्री सहस्त्रबुद्धे ने पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय लोक नीति शोध केंद्र (पीपीआरसी) द्वारा मोदी सरकार के 9 वर्ष और यूपीए सरकार के कार्यकाल की तुलनात्मक रिपोर्ट पर पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया।
    इस अवसर पर पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंह, प्रदेश महामंत्री एवं प्रदेश कार्यालय प्रभारी श्री भगवानदास सबनानी, सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष अग्रवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी, श्री राजपाल सिंह सिसोदिया सुश्री नेहा बग्गा एवं जिला अध्यक्ष श्री सुमित पचौरी उपस्थित थे।

  • भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले वर्ष से गौरव दिवस पर एक जून को भोपाल में अवकाश रहेगा। आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से रू-ब-रू हो सके, इस उद्देश्य से भोपाल के इतिहास पर केंद्रित शोध संस्थान की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल गौरव दिवस पर भोपाल गेट पहुँच कर सफाई मित्रों का सम्मान किया। उन्होंने भोपाल विलीनीकरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि असंख्य लोगों के बलिदान और वीर सपूतों के संघर्ष के परिणामस्वरूप देश की स्वतंत्रता के 2 साल बाद एक जून 1949 को भोपाल, भारत का अभिन्न अंग बना।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रंग-गुलाल, पुष्प-वर्षा और आतिशबाजी के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने जन-गण-मन गान के बाद भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित की और मशाल जला कर विलीनीकरण के शहीदों का स्मरण किया। शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल विलीनीकरण आंदोलन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नई पीढ़ी को यह नहीं मालूम कि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के साथ भोपाल स्वतंत्र नहीं हुआ था। नवाब ने भोपाल के भारत में विलय से इंकार कर दिया था। इस स्थिति में भोपाल में विलीनीकरण आंदोलन आरंभ हुआ। उन्होंने श्रद्धेय उद्धव दास मेहता, बालकृष्ण गुप्ता और डॉ. शंकर दयाल शर्मा के संघर्ष का स्मरण करते हुए बोरास के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लगभग 100 सफाई मित्रों का शॉल पहना कर सम्मान किया। जानकारी दी गई कि भोपाल के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जा रहा है।

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा एक जून को भोपाल का गौरव दिवस मनाने की पहल से आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से अवगत होगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपालवासियों को गौरव दिवस की शुभकामनाएँ दी। पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा उपस्थित थे।