Month: January 2021

  • सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    भोपाल,31जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा है कि प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए आबंटित धन की हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सतना और शिवपुरी जिले के अलावा अन्य जिलों मे जिन ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है उनमें दोषियों को अवश्य दंड मिलेगा। उन्होंने किसी भी सहकारी बैंक के बंद होने की खबरों को निराधार बताया। आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पैक्स संस्थाओं में 3629 कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने की जानकारी भी दी।

    सहकारिता और लोकसेवा प्रबंधन विभागों की विभिन्न गतिविधियों पर जानकारी देने के लिए अपेक्स बैंक में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयुक्त सहकारिता और पंजीयक सहकारी संस्थाएं नरेश पाल, प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा और संचालक मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। श्री अरविंद भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2018 में जिन कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं को परीक्षा के माध्यम से चुना गया था उन्हें अब 10 फरवरी तक नियुक्ति दे दी जाएगी। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिवराज सरकार पुलिस विभाग में भी 5200 युवाओं को नौकरी देने जा रही है। उन्होंने बताया कि पैक्स संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आवश्यकता के अनुसार व्यवसाय करने की छूट भी प्रदान की गई है। प्रदेश की लगभग 17472 दूकानों में लगभग साढ़े तेरह हजार विक्रेता हैं।

    श्री भदौरिया ने बताया कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश अभियान के तहत पैक्स संस्थाओं को दो करोड़ रुपयों तक का ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है। सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने के लिए तेलांगाना में जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश की सहकारी संस्थाओं को भी सफल बनाया जा रहा है। ये पूरा नेटवर्क कंप्यूटरीकृत होगा। इस आधुनिक नेटवर्क को बाजार की जरूरतों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। आधुनिक दौर में कृषि तकनीकों में क्या फेरबदल जरूरी है उसे लेकर सहकारिता विभाग कई बदलाव कर रहा है।

    लोकसेवा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपनी तकनीकी दक्षताओं से लगभग सात करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने की प्रक्रिया सरल बनाई है। युवाओं को जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं सिर्फ मोबाईल पर आधार कार्ड टाईप करके चंद घंटों में मिलने लगी है। खसरों और खातों की प्रति भी अब आनलाईन उपलब्ध है।

    श्री भदौरिया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि किसान कर्जमाफी का शोर मचाकर पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने केवल धोखाघड़ी की थी। किसान कर्जमाफी का बजटीय प्रावधान ही नहीं किया था। उस सरकार का कदम सहकारी बैंकों को बर्बाद करने का था। अब हमारी सरकार उन किसानों को भी मदद कर रही है जो कांग्रेस सरकार के झूठे वादों के फेर में डिफाल्टर हो गए थे। पैक्स संस्थाएं खत्म न हों इसके लिए सरकार ने आठ सौ करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

    उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को आबंटित राशि का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अब कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। ग्वालियर, छिंदवाड़ा ,सतना होशंगाबाद और कई जिलों में ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कुछ मामलों में कुर्की भी कराई जा चुकी है। गड़बड़ी रोकने के लिए अब पारदर्शी सिस्टम बनाया गया है।एक भी दोषी आदमी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    अन्नदाताओं के जीवन में आसानी, समृद्धि, किसानी में आधुनिकता और प्रगति का मूल मंत्र लिए मोदी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।इसका लाभ देश के करोड़ों किसानों को लगातार मिल रहा है।नए कृषि कानूनों के आने से यह सुनिश्चित हो गया है कि किसान अपनी फसलों को चाहे मंडी में बेचें या फिर मंडी के बाहर, ये उनकी मर्जी होगी। अब जहां किसान को लाभ मिलेगा वह बिना किसी अवरोध और रोक-टोक के वहां अपनी उपज बेच सकेगा।किसान पुत्र कृषिगत उद्योग धंधे अपने गांवों में ही लगा सकेंगे। किसान अब इन नवीन विधेयकों की बदौलत उद्योगपति भी बनेंगे।

    मोदी सरकार ने प्राथमिकता से स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप प्रगतिशील कदम उठाए है।देश के हर गांव का किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहे इसलिए भंडारण की आधुनिक व्यवस्थाएं बनाने, कोल्ड स्टोरेज बनाने और फूड प्रोसेसिंग के नए उपक्रम लगाने के लिए सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाते हुए नए द्वार खोल दिए हैं।यदि बात न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की करें, तो मोदी सरकार किसानों को बेहतर लागत मूल्य देकर किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सफल हुई है। वर्ष 2014 के पूर्व और वर्ष 2014 के बाद एमएसपी का तुलनात्मक अध्ययन करें, तो हम पायेंगे कि विभिन्न फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्ष 2014 के बाद निरंतर बढ़ा है। यूपीए सरकार में गेहूँ का एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि आज 1975 रुपये प्रति क्विंटल है। मूंग दाल पर एमएसपी 4500 रुपये था, जबकि वर्तमान सरकार में 7200 रुपये है। मसूर दाल की एमएसपी 2950 रुपये से बढ़कर आज 5100 रुपये है। ज्वार 1520 रुपये से बढ़कर 2640 रुपये है। धान की एमएसपी 1310 रुपये से बढ़कर 1870 रुपये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही में मध्यप्रदेश के किसानों से बात करते हुए इन उपलब्धियों का जिक्र भी किया और पूरी विनम्रता से अन्नदाताओं के हितों के लिए सभी सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया।

    किसान हितों के लिए दूरगामी और प्रभावकारी योजनाएँ केन्द्र सरकार लागू कर रही है। नवीन कृषि विधेयक किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग को सरल और सुगम बनाएंगे। यह विधेयक किसानों के आर्थिक उत्थान का मुख्य साधन बनेंगे। मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं किसान है और वे किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करने के लिए जाने जाते हैं। वे लगातार प्रदेश के किसानों से संवाद कर रहे है। ये कानून उनके हित में हैं। मैंने हरदा जिले में किसान चौपाल अभियान प्रारंभ किया है। नवीन कृषि कानूनों के समर्थन में किसान चौपालों में नये कृषि कानूनों पर मैं स्वयं बात कर रहा हूँ। हम सभी को मिलकर नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों से बातचीत करना चाहिए। इससे इन कानूनों को लेकर किसानों में फैले भ्रम को दूर किया जा सकेगा। सही मायनों में इन विधेयकों से किसानों की तकदीर और प्रदेश एवं देश की तस्वीर बदलेगी। इन विधेयकों में वे तमाम प्रावधान किए गए हैं, जिनसे किसानों में खुशहाली आये और वे समृद्द हों। राष्ट्र में सुख और समृद्धि बढ़े। अंततः हम सबका लक्ष्य अपने राष्ट्र की खुशहाली है और सरकार लोककल्याणकारी नीतियों से देश के करोड़ों लोगों के सपनों को साकार कर रही है।

    वर्ष 2014 के बाद केंद्र की मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों से देश के किसानों के जीवन में बेहद सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से किसानों के बैंक खातों में रुपये छ: हजार की राशि सीधे ट्रांसफर होती है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार भी मुख्यमंत्री किसान सम्मान योजना अंतर्गत चार हजार रुपये की अतिरिक्त राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर कर रही है। यह क्रांतिकारी बदलाव है जिससे करोड़ों भोले-भाले किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में पूरे पैसे मिलना सुनिश्चित किया है। देश के हर किसान को पानी मिले और हर खेत तक पानी पहुंचे इस दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है और हजारों करोड़ रुपए खर्च करके इन सिंचाई परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने में जुटी है। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन,पशुपालन पालन और मछली पालन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

    इस साल पंचायती राज स्थापना दिवस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के सरपंचों से बात करते हुए किसानों के जीवन में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की रूप में एक स्वर्णिम योजना की शुरुआत की थी। जिससे भारत  के किसान,ग्रामीण समाज का विकास और प्रगति से सीधे जुडने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत गांवों में ड्रोन से गाँव,खेत और भूमि की मैपिंग की जा रही है। इससे गांवों में संपत्ति को लेकर विवाद खत्म हो जाएंगे। इससे भूमि की सत्यापन प्रक्रिया में तेजी और भूमि भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता मिलेगी। पहले गांव की जमीन पर लोन मिलना मुश्किल होता था,इसी कारण जोत की जमीन बेचकर किसान परिवार शहर की ओर पलायन कर जाते थे। अब गांवों में भी लोग बैंकों से लोन ले सकेंगे और इन सब सुविधाओं के कारण ग्रामों के विकास कार्यों को प्रगति मिलेगी। जमीन की मैपिंग के बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। ग्रामीणों के पास स्वामित्व होगा तो उस संपत्ति के आधार पर ग्रामीण बैंक से लोन ले सकेंगे। नये विधेयकों के आने से किसान आगे बढ़कर उद्यमी बनेंगे। हम सब मिलकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेंगे।

  • इस दोराहे पर लुटेरों से कैसे मुक्ति दिलाएंगे बाजीराव के सेनानी

    इस दोराहे पर लुटेरों से कैसे मुक्ति दिलाएंगे बाजीराव के सेनानी

    देश के नीति आयोग ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश को भी आत्मनिर्भर बनाने का फार्मूला पेश किया है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार इसे सफल बनाने के लिए प्राण प्रण से जुट गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अब कर्ज लेकर बांटे जाने वाले बजट के भरोसे न रहें। उन्हें प्रदेश के लगभग साढ़े सात करोड़ लोगों को काम देना है और अपने अपने जिलों की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। कमोबेश यही शुरुआत 2003 में उमा भारती की सरकार ने की थी। दिग्विजय सिंह की कांग्रेसी सरकार को प्रदेश की जनता ने जिस आक्रोश के साथ कुचला था उसे देखते हुए यही कामना की जा रही थी कि मध्यप्रदेश की दशा और दिशा बदली जा सकेगी। तब केन्द्र में कांग्रेसी सरकारें थीं और उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होते मध्यप्रदेश को एक बार फिर कर्ज की बैसाखियों पर ला खड़ा करने के लिए तमाम षड़यंत्र रचे। उमा भारती को केवल लोधियों से घिरा हुआ दिखाकर उन्हें अपदस्थ किया गया। ये तमाशा देश भर ने देखा लेकिन कोई कुछ न कह सका।

    बाबूलाल गौर की ढपोरशंखी सरकार ने कांग्रेसी हाई कमान की मंशाओं को अक्षरशः लागू किया और प्रदेश एक नए कर्ज के दलदल में फंसने के लिए तैयार हो गया। शिवराज सिंह चौहान की ताजपोशी तो इसी एजेंडे के तहत की गई थी। नतीजतन पंद्रह सालों तक उन्होंने अधोसंरचना के विकास के नाम पर धड़ा धड़ कर्ज लिया। दिग्विजय सिंह की जो फौज मध्यप्रदेश को लूटने का डेरा डाले बैठी थी शिवराज सरकार को उसी ठग लाबी ने घेर लिया। भाजपा के संगठन महामंत्री कप्तान सिंह सोलंकी ने जिन्हें मध्यप्रदेश का स्वाभाविक शासक बताते हुए भाजपा में शामिल किया वे दरअसल बजट के लुटेरे थे।शिवराज को कई सालों बाद ये अहसास हुआ कि वे ठगों से चंगुल में बुरी तरह फंस चुके हैं। उमा भारती ने जिन राघवजी भाई को वित्तमंत्री बनाया था उन्होंने बेहतर वित्तीय प्रबंधन किया और कर्ज पर कर्ज लेने की राह प्रशस्त होती चली गई। राज्य आय बढ़ाता जा रहा था इसलिए तयशुदा कर्ज लेने में कोई गुरेज भी नहीं था। राघवजी भाई के बाद घटिया वित्तीय प्रबंधन और लोकप्रियता की लोलुपता ने राज्य को हवाई किले में तब्दील कर दिया। यही वजह थी कि शिवराज सरकार उस कांग्रेस से चुनाव हारी थी जिसका न तो कोई संगठन था, न नेता और न ही बजट। सत्ता से उतरने पर शिवराज ने ये कहकर अपनी लाचारी का प्रकटीकरण भी किया था कि मैं मुक्त हो गया।

    मध्यप्रदेश का दुर्भाग्य है कि इसे हमेशा से आक्रमणकारी लुटेरों ने अपनी हवस का निशाना बनाया है। मुगलों ने जिस तरह यहां लूट मचाई उससे राज्य के वनवासी अलग अलग टोलों और मजरों में बंट गए और गरीबी की जहालत भरी जिंदगी जीने को मजबूर हुए थे। भारत में मुगल शासन का पतन होने पर मराठों ने 18 वीं शताब्दी में मालवा पर अधिकार करना चाहा था। मालवा के तत्कालीन सूबेदार और जयपुर के सवाई जय सिंह ने भेलसा का अधिकार भोपाल के नवाब को दे दिया था। नवाबों की अक्षमता के चलते ये हिस्सा शीघ्र ही मराठों के आधिपत्य में चला गया। मई 1736 ईस्वी के अंत तक जयसिंह के कहने पर बाजीराव पेशवा को मालवा का नायब सूबेदार बनाया गया। दिल्ली की सल्तनत बहुत कमजोर थी और जयसिंह ने बाजीराव के कंधे पर रखकर अपनी सूबेदारी बचाने की कोशिश की। पेशवा को लगा कि इस इलाके को नए सिरे से संगठित करना चाहिए और उसने अपनी कई मांगों के बारे में दिल्ली को अवगत भी कराया। अपनी शैली का शासन स्थापित करने के बाद वह दक्षिण की ओर चल पड़ा।तब विदिशा मराठों के मार्गदर्शन में चल रहा था। पेशवाओं की ओर से ये क्षेत्र सिंधिया राजघराने की निगरानी में था। सिंधिया राजपरिवार की अंदरूनी उठापटक का फायदा उठाकर देवास के तुकोजी और जीवाजी पंवार बंधुओं ने विदिशा की घेराबंदी कर डाली। 11 जनवरी 1737 को उन्होंने उस पर अधिकार करके कर वसूलना शुरु कर दिया। इस स्थिति पर नियंत्रण के लिए पेशवा को बुंदेलखंड से वापस विदिशा आना पड़ा।

    मराठों की शक्ति बढ़ रही थी इसे देखते हुए निजाम को दिल्ली बुलाकर पुख्ता रणनीति बनाई गई। निजाम अपने लाव लश्कर के साथ सिरोंज पहुंच गया। यहां का मराठा एजेंट विशाल सेना देखकर भाग गया। निजाम यहां से पेशवा की गतिविधियों का अध्ययन कर रहा था तभी उसे उत्तर से लौटता पिलाजी जाधव मिल गया। निजाम ने उसका उचित सम्मान किया। पिलाजी तब निजाम की सेना का सहयोगी बन गया था। निजाम ने दिल्ली जाकर वहां के मुगल बादशाह को आश्वासन दिया कि वह मराठों को नर्मदा से आगे बढ़ने से रोक देगा। इस हूल के बदले में निजाम को मुगल बादशाह से पांच सूबे और एक करोड़ रुपए का वचन मिल गया। दिल्ली के तख्त ने तभी जयसिंह को सूबेदार और बाजीराव को नायब सूबेदार पद से हटाकर निजाम के बड़े बेटे को मालवा का सूबेदार बना दिया।

    मराठों को भगाने के लिए निजाम ने दिल्ली से बड़ी सेना ली। वह दिसंबर 1737 के शुरु में सिरोंज और 13 दिसंबर को भोपाल पहुंचा। तब पेशवा नजदीक ही पड़ाव डाले पड़ा था। उसने चतुराई से निजाम की सेना की नाकेबंदी कर डाली। निराश निजाम ने निकल भागने की कोशिश की लेकिन मराठों ने उसे पीछा करके हलाकान कर दिया। उसकी सेना की रसद बंद कर दी गई। छापामार शैली में हमले किए गए। इससे घबराकर निजाम ने 6 जनवरी 1738 में दोराहा सराय में पेशवा से संधि कर ली। संधि की शर्तों के अनुसार निजाम ने मालवा में मराठों का प्रभुत्व स्वीकार कर लिया। नर्मदा और चंबल के बीच के पूरे इलाके में उसने मराठों की संप्रभुता स्वीकार कर ली। हालांकि इस संधि पर पड़ा पर्दा 1741 में जाकर उठा। अगले पांच सालों में पेशवा ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली और प्रशासन दुरुस्त कर लिया।

    मराठा सेनाओं ने मार्च 1745 में विदिशा(भेलसा) के किले पर आक्रमण किया और उस पर कब्जा कर लिया। विदिशा 1753 तक पेशवा मराठों के अधिकार में रहा। मराठों ने अपने कुशल भूमि प्रबंधन के सहारे धीरे धीरे भोपाल राज्य में भी अपना दखल बढ़ा लिया था। पेशवाओं का साम्राज्य और भी अधिक मजबूत हो सकता था लेकिन मराठों के बीच अयोग्य लोगों को मिले महत्व की वजह से ये इलाका अधिक प्रगति नहीं कर पाया।

    आजादी के बाद दिल्ली की सल्तनत ने नेहरू इंदिरा को मजबूत बनाकर मराठों को तहस नहस कर दिया। इंदिरा गांधी के करीबियों ने जब सिंधिया राजघराने का खजाना और जमीनें लूटने का अभियान चलाया तो उन्हें भरपूर संरक्षण मिलता रहा। अब कालचक्र घूमकर एक बार फिर सिंधिया घराने की ओर आशाभरी निगाहों से देख रहा है। कमलनाथ सरकार के माध्यम से दस जनपथ यहां क्षत्रियों की सत्ता को कुचलने का प्रयास कर रहा था लेकिन सिंधिया की बगावत ने उसकी मंशा पर पानी फेर दिया । बाजीराव का प्रयास था कि वह भारत की धरती से लुटेरों को खदेड़कर बाहर कर दे। बहुत हद तक वह इसमें सफल भी हुआ। दोराहा की संधि इस दिशा में सबसे प्रमुख मील का पत्थर बनी। सिंधिया की बगावत लगभग यही संदेश देती है कि पेशवाई एक बार फिर लाचार निजाम को घुटनों पर लाने में सफल हुई है।

    भारतीय जनता पार्टी के मजबूत होने और नरेन्द्र मोदी जैसे मजबूत शासक की मौजूदगी ने अलग अलग ढपली और अपना अपना राग सुना रहे शासकों को एकजुट होने का अवसर दिया है। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश इसी प्रशासनिक सुधारों का मुखपत्र बनकर सामने आया है। देखना ये है कि मध्यप्रदेश को चरोखर समझने वाले लुटेरे इस जन अभियान में क्या भूमिका निभाते हैं। बाजीराव के सेनानी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के वंशजों की योग्यता भी इस अभियान में कसौटी पर है। उन्हें दशकों तक दिल्ली की सल्तनत संभालते रहे माफिया से भी निपटना है और मध्यप्रदेश में मजबूत हो चुके भ्रष्ट माफिया से भी टक्कर लेनी है। शिवराज सिंह चौहान जिस शैली में शासन चला रहे हैं वह निश्चित रूप से आगे जाकर टकराव का रूप लेगी यह संकेत अभी से मिलने लगे हैं।

    ( लेख के ऐतिहासिक तथ्य विदिशा जिले के गजेटियर से लिए गए हैं.)