Month: July 2020

  • राष्ट्रीय सुरक्षा मंच ने नागरिकों के सैन्य प्रशिक्षण की पैरवी की

    राष्ट्रीय सुरक्षा मंच ने नागरिकों के सैन्य प्रशिक्षण की पैरवी की

    राष्ट्रीय सुरक्षा : विचारधारा और सिद्धांतों का पुनरावलोकन विषय पर स्पंदन और फैन्स का वेबिनार

    भोपाल, 9 जुलाई। राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब जरुरी है कि नागरिकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी जाए । सुरक्षा, हिंदुत्व, राष्ट्रीयता जैसे विषय अकादमिक पाठ्यक्रमों में शामिल किये जाएँ । राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर गांधी, नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, स्वातंत्र्यवीर सावरकर आदि महापुरुषों के विचारों पर खुल कर बहस होनी चाहिए । इन विषयों पर बौद्धिक और अकादमिक चुप्पी देश के लिए घातक है । ‘राष्ट्रीय सुरक्षा : विचारधारा और सिद्धांतों का पुनरावलोकन’ विषय पर स्पंदन संस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा आयोजित वेबिनार में विद्वान् वक्ताओं ने यह बात रखी ।

    वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उदय माहुरकर ने वेबिनार में मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया शिक्षक डा. राधेश्याम शुक्ल ने विषय प्रवर्तन किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव गोलोक बिहारी राय ने की ।

    श्री महुराकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि सावरकर का मानना था कि भारत को विश्व गुरु बनने के लिए यहाँ की सेना का सशक्त होना आवश्यक है। गाँधीवादी अहिंसा से देश ने आजादी के पहले से आज तक बहुत कुछ खो दिया है, जिसकी देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। सम्पूर्ण अहिंसा और हिन्दू मुस्लिम एकता की बातें हिंदुओं की कीमत पर की गयी है, जिसपर देश में अब ईमानदारी से चर्चा होनी चाहिए। 1925 से ही सावरकर को यह अंदेशा था कि अहिंसा और हिन्दू मुस्लिम एकता के नाम पर देश को बांट दिया जाएगा । अंततः वही हुआ। देश में आजादी के पहले सेना में हिंदुओं की कमी थी। द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्होंने हिंदुओं को सेना में जाने का आह्वान किया। जिससे आजादी के समय सेना में हिन्दू सैनिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई और हमें देश के लिए मजबूत सेना मिली। उन्होंने कहा कि वर्तमान में असम, यूपी में सरकार का बदलना, धारा 370 का हटना, राम मंदिर का निराकरण होने से कट्टरवादी भड़क उठे है, जो शाहीनबाग में गांधी की तस्वीर लगाकर अहिंसा के नाम पर देशवासियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। भारत विभाजन, चाइना युद्ध के बाद चीन का जमीन में कब्ज़ा इन सबमें अब एक राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए।

    वेबिनार को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डा. राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि देश के स्वतंत्र होने के बाद से ही देश की सुरक्षा की अलवेहना की गई। भारत के दोनों ओर दो इस्लामिक देश बना दिए गए और सीमाओं का निर्धारण भी नहीं हुआ। नेहरू ने देश में सेना को खत्म कर देने तक कि बात कही और पंचशील को लेकर दुनिया में चीन की वकालत कर रहे थे, उसे सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बना दिया। डा. शुक्ल ने कहा कि मोदी सरकार आने से पहले देश मे सुरक्षा को लेकर न कोई विचार था न सिद्धांत, अब सरकार ने देश के बाहरी खतरों के साथ भीतरी खतरों को पहचानना शुरू किया है। देश को मुख्य रूप से सांस्कृतिक खतरा है, जिससे लड़ने के लिए देश की जनता को आगे आना होगा। इस्लाम और कम्युनिस्ट जो देश की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट कर रहे हैं, उससे देश की जनता को आगे बढ़कर सामना करना होगा तभी देश सुरक्षित रहेगा।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कृते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव गोलोक बिहारी राय ने कहा कि यह वेबिनार अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर उचित समय पर आयोजित हुआ है । इस आयोजन से राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर समाज को काफी मदद मिलेगी । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच वेबिनार के सुझावों और अनुशंसाओं को सरकार तक पहुंचाएगी और इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह करेगी । इस आयोजन में मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और फैन्स मप्र इकाई के अध्यक्ष एस. के. राउत, पूर्व कुलपति प्रो. प्रमोद वर्मा, फैन्स की राष्ट्रीय महासचिव रेशमा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अक्षत शर्मा, भाजपा प्रवक्ता नीरू सिंह ज्ञानी, नेहा बग्गा, ग्लोबल सोशल नेटवर्क की अध्यक्ष रिचा सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. स्वदेश सिंह, प्रो. तरुण गर्ग सहित सैकड़ों लोगों ने भागीदारी की ।

    बेबीनार का संचालन मीडिया चौपाल के संयोजक और स्पंदन संस्था के सचिव डॉ अनिल सौमित्र ने किया। बेबीनार में भाग ले रहे प्रतिभागियों ने देश की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं से सवाल भी

    पूछे । वेबिनार में बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, गोवा, आंध्रप्रदेश आदि प्रदेशों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से अध्येताओं, शोधार्थियों, प्राध्यापकों, पत्रकारों और कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।

  • कृषि में निवेश से छोटे किसानों को लाभ होगा बोले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर

    कृषि में निवेश से छोटे किसानों को लाभ होगा बोले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर

    नरेन्द्र सिंह तोमरः किसानों की आय बढ़ाने में कामयाब रहेगा नया प्रबंधन फार्मूला

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की शुक्रवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में नए निवेश से छोटी जोत वाले किसानों को ज्यादा फायदा होगा। उन्होंने कहा कि देश में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत की जमीन है और एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड से इस क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित होंगे जिसका किसानों को लाभ मिलेगा।

    केंद्रीय कृषि मंत्री यहां वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्यों के कृषि एवं सहकारिता मंत्रियों से बातचीत कर रहे थे। तोमर ने कहा, एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनने से आने वाले दिनों में कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव देखने को मिलेंगे।” उन्होंने राज्यों से नई प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्षेत्रवार उपयुक्त अधोसंरचना विकसित करने में सहयोग की अपील की। तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार के लिए कृषि उच्च प्राथमिकता का क्षेत्र है और इसका विकास इस प्रकार करने की आवश्यकता है ताकि नई पीढ़ी कृषि की ओर आकर्षित हो।

    बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने एफपीओ की गाइडलाइंस भी जारी की। इस मौके पर कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, एफपीओ, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के संबंध में प्रेजेन्टेशन के जरिए जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तेलंगाना, बिहार, केरल, उत्तराखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड सहित विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों एवं विभागीय अधिकारियों ने भी विचार रखे। गुजरात के कृषि मंत्री आर.सी. फल्दू ने पशुपालकों को भी नई स्कीम में जोड़ने पर केंद्र सरकार का आभार जताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सराहना करते हुए बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इससे कृषि क्षेत्र की भी प्रगति होगी। कई अन्य राज्यों के मंत्रियों ने भी अपने विचार पेश किए। इस मौके पर कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि देशभर में 90 हजार से ज्यादा सहकारी समितियां हैं, जिनमें से 60 हजार के पास जमीन भी हैं और वे सक्षम हैं। इनके जरिये एफपीओ गठन करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की कोशिश होनी चाहिए। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चैधरी भी कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद थे।

  • साकार होने लगा किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प

    साकार होने लगा किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प

    भोपाल,12 जुलाई(प्रेस सूचना केन्द्र)।इसके अंतर्गत किसानों की आय दोगुनी करने से संबंधित मुद्दों की जाँच करने और वास्तविक रूप से किसानों की आय दोगुनी करने के लिये रणनीति की सिफारिश करने हेतु एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है।

    समिति के अनुसार, इस क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है, जो ग्रामीण भारत में कृषि गतिविधियों को अंजाम देने, इसे आधुनिक बनाने और व्यवस्थित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    प्रौद्योगिकियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics), ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी (Block chain Technology), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things) आदि शामिल हैं।

    सरकार ने प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिये ज़िला स्तर पर 713 कृषि विज्ञान केंद्र और 684 कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों की स्थापना की है।

    इसके अलावा, किसानों को केंद्रित प्रचार अभियान, किसान कॉल सेंटर, कृषि-क्लीनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्रों के उद्यमी योजना, कृषि मेलों और प्रदर्शनियों, किसान एसएमएस पोर्टल इत्यादि के माध्यम से जानकारी प्रदान की जाती है।

    मंत्रालय की योजनाओं को सफल बनाने हेतु प्रौद्योगिकी का प्रसार बहुत महत्त्वपूर्ण है। प्रमुख

    किसानों को महत्त्वपूर्ण मापदंडों पर सूचना के प्रसार के लिये किसान सुविधा मोबाइल एप्लिकेशन को विकसित किया गया है, उदाहरण के लिये मौसम, बाजार मूल्य, पौध संरक्षण, इनपुट डीलर (बीज, कीटनाशक, उर्वरक) फार्म मशीनरी, मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card), कोल्ड स्टोरेज और गोदाम, पशु चिकित्सा केंद्र और डायग्नोस्टिक लैब्स आदि।

    आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों को बाजार की जानकारी के साथ उपज बेचने के लिये बाजारों के बारे में बेहतर जानकारी दी जाती है, साथ ही बाजार की मौजूदा कीमतें और बाजार में वस्तुओं की मांग की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे किसान उचित मूल्य और सही समय पर उपज बेचने के लिये उचित निर्णय ले सकते हैं।

    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agriculture Research-ICAR) ने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (State Agricultural Universities) और कृषि विज्ञान केंद्रों (Krishi Vigyan Kendras) द्वारा विकसित 100 से अधिक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किये हैं जो इनकी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

    ये मोबाइल ऐप फसलों, बागवानी, पशु चिकित्सा, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और एकीकृत विषयों के क्षेत्रों में किसानों को बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं, जिसमें विभिन्न वस्तुओं के बाजार मूल्य, मौसम से संबंधित जानकारी, सेवाएँ आदि शामिल हैं।

    पंजीकृत किसानों को SMS के माध्यम से विभिन्न फसल संबंधी मामलों पर सलाह भेजने के लिये mKisan पोर्टल (www.mkisan.gov.in) का विकास।

    किसानों को इलेक्ट्रॉनिक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिये ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-National Agriculture Market- e-NAM) पहल की शुरूआत की गई है।

    कृषि उत्पादन के भंडारण, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद और उत्पादन के पश्चात होने वाले फसल नुकसान को कम करने के लिये वैज्ञानिक तरीके से भंडारण क्षमता को बढ़ाया जाएगा, इसके लिये कृषि बाजार से जुड़ी एकीकृत कृषि योजनाओं को क्रियांवित किया जाएगा।

    देश भर के सभी किसानों को 2 वर्ष के चक्र के भीतर एक बार मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करने में राज्य सरकारों की सहायता की जा रही है इसके माध्यम से किसानों को मृदा के पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी प्रदान की जाती है। फसल उत्पादकता में वृद्धि करने तथा मृदा की उर्वरता को बनाए रखने के लिये किसानों को उचित पोषक तत्त्वों का उपयोग करने की सलाह भी दी जाती है।

    किसानों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (ऑयल सीड्स और ऑयल पाम) के तहत बीज उपलब्ध करवाना, तकनीक का अंतरण (Transfer) करना, उत्पादन इकाइयों तथा जल संसाधन का उपयोग करने के लिए आवश्यक उपकरणों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध की जा रही है जिससे किसानों को कृषि से संबंधित प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सके ताकि किसान फसल का उत्पादन बढ़ा कर आर्थिक लाभ में वृद्धि कर सकें।

    कृषि-मौसम विज्ञान और भूमि आधारित अवलोकन परियोजना, बागवानी आकलन और प्रबंधन पर समन्वित प्रोग्राम के लिये भू-सूचना विज्ञान का उपयोग, राष्ट्रीय कृषि विकास आकलन और निगरानी प्रणाली जैसी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

    देश में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य

    सरकार ने 2022-23 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिये कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग के राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय समिति गठित की है। इस समिति को किसानों की आय दोगुनी करने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और वर्ष 2022 तक सही अर्थों में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक उपयुक्त रणनीति की सिफारिश करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

    समानांतर रूप से सरकार आय में वृद्धि को केंद्र में रखते हुए कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों के लिये शुद्ध धनात्मक रिटर्न सुनिश्चित करने हेतु राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के ज़रिये निम्नलिखित योजनाओं को बड़े पैमाने पर क्रियान्वित किया जा रहा है:

    मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, नीम लेपित यूरिया, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि बाज़ार योजना (e-NAM), बागवानी के एकीकृत विकास के लिये मिशन, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, इत्यादि।

    इनके अलावा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर खरीफ और रबी दोनों ही फसलों के लिये MSP को अधिसूचित किया जाता है। यह आयोग खेती-बाड़ी की लागत पर विभिन्न आँकड़ों का संकलन एवं विश्लेषण करता है और फिर MSP से जुड़ी अपनी सिफारिशें पेश करता है।

    किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने वर्ष 2018-19 के सीजन के लिये सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में वृद्धि की थी। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 के बजट में MSP को उत्पादन लागत का कम-से-कम 150 फीसदी तय करने की बात कही गई थी।