Month: May 2017

  • स्किल समिट में अफसर बताएंगे रोजगार कैसे बढ़ाएं

    स्किल समिट में अफसर बताएंगे रोजगार कैसे बढ़ाएं

    भोपाल 29 मई। भोपाल में एक जून को होशंगाबाद रोड स्थित होटल आमेर ग्रीन में ग्लोबल स्किल एण्ड एम्पलायमेंट पार्टनरशिप समिट होने जा रही है। इसके लिये सभी तैयारियाँ की जा रही हैं। समिट में 6 सेमिनार भी होंगे, जिसमें विषय-विशेषज्ञ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर व्याख्यान देंगे। समिट में उदघाटन सत्र प्रात: 9.30 बजे होगा। केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजीव प्रताप रूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। उदघाटन सत्र की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। समिट में देश-विदेश के 1500 प्रतिभागी मौजूद रहेंगे।

    वेबसाइट के माध्यम से रजिस्ट्रेशन

    ग्लोबल स्किल एण्ड एम्पलॉयमेंट पार्टनरशिप समिट में वेबसाइट के माध्यम से अब तक 2578 रजिस्ट्रेशन किये जा चुके हैं। इसमें 527 कम्पनी द्वारा 3 लाख 52 हजार 295 व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिये इंटेन्शन टू एम्पलाई तथा 332 कम्पनी द्वारा 2 लाख 96 हजार 129 युवाओं को कौशल विकास प्रदान करने के लिये इंटेन्शन टू स्किल दर्ज किये गये हैं।

    6 सत्र में होगी चर्चा

    ग्लोबल स्किल एण्ड एम्पलॉयमेंट पार्टनरशिप समिट के दौरान 6 सत्र होंगे। ‘विनिर्माण क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार के अवसर” पर होने वाले सत्र में उद्योग एवं रोजगार मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल विचार रखेंगे। पूर्व मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा का भी उदबोधन होगा। सत्र में विषय-विशेषज्ञ और उद्योग संघ के पदाधिकारी सत्र में पूछे जाने वाले सवालों का उत्तर देंगे।

    ‘उच्च शिक्षा के माध्यम से रोजगार के अवसर” विषय पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया का उदबोधन होगा। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री आशीष उपाध्याय ‘मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा का परिदृश्य” विषय पर वक्तव्य देंगे। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा श्रीमती गौरी सिंह और विषय-विशेषज्ञ प्रतिभागियों के सवालों के उत्तर देंगे। समिट में ‘मध्यप्रदेश में स्व-रोजगार के अवसर” विषय पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय-सत्येन्द्र पाठक विचार रखेंगे। प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग श्री व्ही.एल. कांताराव प्रदेश में रोजगार की संभावनाओं पर प्रस्तुतिकरण देंगे। प्रतिभागियों को स्व-रोजगार को सुगम बनाने में बैंक और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका की जानकारी दी जायेगी।

    समिट के अगले सत्र में ‘युवाओं में कौशल उन्नयन के माध्यम से रोजगार के अवसर” पर प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव प्रस्तुतिकरण देंगी। तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी सत्र में अपना उदबोधन देंगे। महिलाओं के कौशल उन्नयन पर महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस का उदबोधन होगा। प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे.एन. कंसोटिया प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रदेश में महिलाओं के रोजगार के अवसरों पर विशेष जानकारी देंगे। ‘पर्यटन के क्षेत्र में कौशल विकास” विषय पर पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा का वक्तव्य होगा। पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष श्री तपन भौमिक प्रदेश में पर्यटन की संभावना पर विचार रखेंगे। सत्र के दौरान विषय-विशेषज्ञ प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी देंगे। छह सत्र के बाद समिट का समापन सत्र होगा।

  • चुनौती को अवसर में बदलते नरेन्द्र मोदी

    चुनौती को अवसर में बदलते नरेन्द्र मोदी

    (मोदी फेस्ट 26 मई से 15 जून)

    - भरतचन्द्र नायक

    देश की जनता याद करती है कि 2004 मार्च-अप्रैल के दरम्यान जब कहा जाता था कि मंहगाई कमर तोड़ रही है। यूपीए सरकार जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने के बजाय एक ही जबाव देकर कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेती थी कि मंहगाई विश्वव्यापी समस्या है। आये दिन भ्रष्टाचार और घोटाले जनचर्चा का विषय होते थे। सरकार का ध्यान सीएजी द्वारा भ्रष्टाचार का अनावरण कर दिये जाने के कारण झूठे तर्क देकर जनता के प्रति गैर जिम्मेदाराना मतिभ्रम पैदा करना रह गया था। न्यायालयों ने इनका संज्ञान लिया। यूपीए सरकार के मंत्रिगंण आरोपों के कठघरे में खड़े हुए। उनकी तिहाड़ यात्रा ने सवा अरब जनता का विश्वास खंडित कर दिया। सरकार किंकत्र्तव्य विमूढ़ और जनता हताश थी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 लोकसभा चुनाव लड़े गये। सेकुलर ब्रिगेड ने बड़े इत्मीनान के साथ जनता को फुसलाया, प्रलोभित किया, बरगलाया तथा नरेन्द्र मोदी के चरित्र हनन में अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने में कसर नहीं छोड़ी। श्री नरेन्द्र मोदी ने निरर्थक आलोचना के प्रति गहन गंभीर सहिष्णुता का परिचय देते हुए जनता को गरीब हितैषी, भ्रष्टाचार मुक्त, विकासोन्मुखी सरकार देने का वायदा किया। लोकतंत्र में जनविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है। नरेन्द्र मोदी ने हताशा से त्रस्त जनमानस में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। जनता और भाजपा के बीच विश्वास का सेतु बना। 26 मई 2014 को जनादेश, प्रचंड बहुमत अर्जित कर नरेन्द्र मोदी ने नीतिगत अस्त-व्यस्तता के आलम में केन्द्र मंे प्रचंड बहुमत के बावजूद घटक दलों के साथ एनडीए सरकार का गठन किया। नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। तीन वर्ष के सरकार के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने न तो जनविश्वास को खंडित किया और न ही पार्टी को लज्जित होने का अवसर आने दिया। काजल की कोठरी में बेदाग बने रहने का कीर्तिमान बनाकर जनता को सुखद परिवर्तन का अहसास कराया। देश विदेश में साफ-सुथरी, शुचितापूर्ण विकासोन्मुखी सरकार का सबूत पेश किया। मजे की बात यह है कि लोकसभा चुनाव 2014 के पश्चात हुए राज्यों के विधानसभा चुनावों, उपचुनावों में दिल्ली, बिहार और पंजाब को अपवाद मानें तो हर चुनाव में बाजी मारकर उन्होनें सिद्ध कर दिया कि करिश्माई नेतृत्व ने जो लहर पैदा की है वह अनवरत तीन साल मंे भी जस की तस बरकरार है। जनता का नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर अटल विश्वास है। सोलह राज्यों में पार्टी और घटक दलों की भागीदारी से सरकार है। नरेन्द्र मोदी की गणना दुनिया के श्रेष्ठ शासकों में ही नहीं उन्होनें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी लोकप्रियता के मामले में पीछे धकेल दिया है। जीडीपी विकास में चीन को पीछे धकेला है।

    नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह चुनौतियों को अवसर में बदला, उनके नक्शेकदम पर चलकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई शाह ने पार्टी संगठन को कुशलतापूर्वक नेतृत्व देकर पार्टी को विश्व का सबसे बड़ा (12 करोड़ सदस्य संख्या वाला दल) राजनैतिक दल बना दिया है। अब तक चीन का वामपंथी दल इसका दावेदार था। सदस्यता में अंकों की कारीगरी नहीं मैदानी स्तर पर देश के हर राज्य में मतदान केन्द्र तक पार्टी का ऊर्जावान नेतृत्व खड़ा करके साबित कर दिया है कि राजनैतिक दल की सफलता नारों और वादों में नहीं मतदान केन्द्र पर खड़ी जुझारू विकासोन्मुखी कार्यकर्ताओं की टीम पर निर्भर है। जो आंचलिक समस्याओं के समाधान के लिए राह बन सके है। यह टीम तीन वर्षों की मोदी सरकार की यशोगाथा लेकर 26 मई से 15 जून 2017 तक मतदाताओं का आशीर्वाद लेने मैदान में उतरकर मतदाताओं से रूबरू हो रही है। मोदी फेस्ट के नाम से लोकप्रिय यह अभियान वन-वे ट्रैफिक नहीं, कार्यकर्ता मतदाता का सुख-दुःख में भागीदार बनकर जन समस्याओं औश्र उनके उचित समाधान में पूर्ण मनायोग से जुटे है। नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों ‘मन की बात’ करके जनता से रागात्मक संबंध जोड़ा और इस दरम्यिान जन की बात सुनने के लिए ‘जन की बात’ अभियान को गति प्रदान कर लोकतंत्र की अनुभूति दी है। आजादी के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने जन-धन योजना आरंभ करके जीरो बैलेंस पर आम आदमी को बैंक खाता खोलने का अवसर दिया और इसे दुर्घटना बीमा का समावेशी बनाकर सामाजिक-आर्थिक कवच सुनिश्चित कर दिया। बीस करोड़ बैंक खाते खोलकर उनमें सब्सीडी दी जाने लगी है। जन-धन योजना और जीवन ज्योति बीमा योजना से सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। 1971 के गरीबी हटाओ अभियान से ठगी गयी जनता को पहली बार लगा कि मोदी सरकार कुछ परफार्मेन्स देने वाली सरकार है। लोकतंत्र में जन विश्वास ही राजनैतिक दल की सबसे बड़ी शक्ति होती है और इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़ती है। नरेन्द्र मोदी ने जन विश्वास के न्यासी की भूमिका में विलक्षण प्रतिभा दिखाकर करोड़ो लोगों को मुरीद बना लिया है।

    नरेन्द्र मोदी ने सत्ता के पटल पर अवतरित होते ही ऐलान किया कि ‘‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’’। सेकुलर ब्रिगेड ने ठाठ-बाट, सूट-बूट की सरकार जैसे जुमले गढ़े, लेकिन उसे हताश तो तब हुई जब तीन वर्षों में एक भी मामला भ्रष्टाचार, घोटाले का उसके हाथ नहीं लगा। लेकिन सिर्फ यही हताशा का कारण नहीं बन रहा। आजादी के बाद पहली बार सरकार में पं. नेहरू के समय सेना की जीप खरीदी जैसे घोटाले हुए। इंदिरा जी के कार्यकाल में तो स्टेट बैंक से तक फर्जी काल पर रकमें निकाली गयी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वीकार किया कि शासन-प्रशासन में गोलमाल है और जनता तक एक रू. भेजने में सिर्फ 15 पैसे पहुंचते है। मोदी सरकार ने सारी सब्सीडी हितग्राही के खाते में जमा कर दो लाख करोड़ रू. जो बिचैलियों की जेब में जाते थे, उन पर रोक लगा दी। जनता ने जहां इस पहल को जनोन्मुखी माना, वहीं बिचैलियो के रूप में इस रकम को हड़पने वालों की छाती पर सांप लौटने लगे और मोदी सरकार कीप्रगति देखने सराहने के बजाय दुष्प्रचार करनें में जुट गये। मोदी सरकार ने कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी (विमुद्रीकरण) का ऐलान कर बड़े नोट (1000 और 500 के नोट) को प्रचलन से बाहर कर दिया। बैंको के सामने लाइने लगी और विपक्ष ने हाहाकर मचाया। लेकिन गरीब वर्ग ने अपने साथ अमीरों को कतार में खड़ा देखकर माना कि आर्थिक विषमता दूर करने और भ्रष्टाचार तथा कालेधन पर रोक लगाने में नोटबंदी कारगर कदम है। निम्म वर्ग और मध्यम वर्ग ने कठिनाई झेलते हुए नोटबंदी का स्वागत किया। नतीजा यह हुआ कि सरकारी खजाने में टैक्स संग्रह का रिकार्ड बन गया। नकदी की समस्या से जूझ रहे बैंक मालामाल हो गये और जन-जन को कर्ज मिलना आसान हो गया। 23 हजार करोड़ रू. कालाधन का खुलासा हो गया। नजरे बदलता है तो नजरिया बदल जाता है।

    नोटबंदी और जीएसटी कराधान जैसी साहसिक पहल ने देश विदेश में निवेशकों को प्रभावित कर दिया कि वास्तव में मोदी के नेतृत्व में गतिशील दूरदर्शी सरकार मिली है। किसान, गरीब, मजदूर, आम आदमी का कल्याण ही सरकार की असल प्रतिबद्धता है। नोटबंदी और जीएसटी से जहां देश का जीडीपी दहाई में पहुंचने जा रहा हे, वहीं महंगाई दर में 2 प्रतिशत की कमी आने से जनता अच्छे दिनों का अहसास करने जा रही है। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, असंगठित क्षेत्र में न्यूनतम पेंशन योजना, किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सामाजिक आर्थिक कवच साबित हुई है। जनता का विश्वास अटल हुआ है कि श्री नरेन्द्र मोदी जो कहते है वह करके दिखाते है। भारतीय जनता पार्टी की कथनी और करनी में साम्य है। कृषि के मोर्चा पर मिली कामयाबी से इस क्षेत्र में विकास दर नकारात्मक से 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी आने से देश में बंपर कृषि उत्पादन हुआ। खाद्यान्न के मूल्य घटने से असल लाभ आम आदमी को मिल रहा है। देश के 14 करोड़ किसानों के लिए उनकी जमीन का स्वाईल हेल्थ (मृदा स्वास्थ्य परीक्षण) कार्ड किया जा रहा है। इससे किसान जमीन की तासीर पहचान कर न्यूनतम परिमाण में उर्वरक का इस्तेमाल करेगा और कृषि की लागत घटेगी। 2014 तक किसान यूरिया खाद के लिए भटकते थे। वितरण केन्द्रों पर कालाबाजारी होती थी। एनडीए सरकार ने यूरिया को नीम कोटेड बनाकर उसकी हेराफेरी समाप्त कर दी और उत्पादन बढ़ा दिया है। अब रासायनिक खाद मुंह मांगा बाजार में उपलब्ध है उस पर मिलने वाली सब्सीडी उत्पादकों और वितरकों की जेब में जाने के बजाय किसान के खाते में जमा हो रही है।

    मोदी सरकार ने पाॅलिसी पेरालिसिस के आरोप से सरकार को मुक्त किया है। जनहित में हर दिन फैसला होता है और अगले दिन प्रगति की निगरानी खुद नरेन्द्र मोदी करते है, जिससे राजनैतिक क्षेत्र और प्रशासन में नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। राजनैतिक और प्रशासकीय क्षेत्र में कर्महीन, आलसी, लापरवाह लोगों का सितारा अस्त हो रहा है। जनता मानती है कि मोदी सरकार काम करने वाली सरकार है, तीव्र गति से लिए जाने वाले फैसलों की देश में बेहद चर्चा है। सरकार ने कालाबाजारी खत्म करने के लिए 64 विभागों की 533 योजना में नकद सब्सीडी वितरण से बिचैलियों को अलविदा करने, राशि का हितग्राही के खातों में हस्तातंरण आरंभ कर दिया तो देश के बैंकों का आठ लाख करोड़ रू. कर्जदारों की गैर अदायगी के कारण डूबन्त खाते में जा रहा था, सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए रिजर्व बैंकों को निर्णयात्मक पहल करने के लिए शक्ति संपन्न बनाने के लिए बैंकिंग रेगुलेशन में संशोधन कर दिया है। इस कदम से रकम डकारने वाले औद्योगिक, वाणिज्यक क्षेत्र ऊहापोह में है, सरकार को घेरने की जुगत में है। लेकिन सरकार लोकधन की वसूली के लिए कृत संकल्प है। सरकार ने बेनामी संपत्ति को जप्त किये जाने के लिए कानून में संशोधन करके संपत्ति राजसात किये जाने की व्यवस्था करके दोहरी अर्थव्यवस्था के सृजन पर रोक लगा दी है। बेनामी संपत्ति संशोधन कानून-2016 ने काली अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़़ दी है। भ्रष्टाचार के फैलाव में नकदी और बड़े नोटों का प्रचलन खाद-पानी का काम करता है। मोदी सरकार ने कैशलेस इकाॅनोमी की दिशा में सर्तकतापूर्ण कदम बढ़ाया है। डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाया गया है। आधार नंबर के जरिये लेनदेन में भीम एप्प, यूपीआई, यूएएसए जैसे माध्यमों को प्रोत्साहन देकर न्यूनतम कैश, मिनीमम कैश की पद्धति अपनाने पर बल दिया है।

    मोदी सरकार की नीतियों की दिशा और दशा से देश में सकारात्मक वातावरण बना है। सुदूर ग्रामों में चूल्हे के धुंआ से परेशान महिलाओं को जब उज्जवला योजना में केन्द्र सरकार ने निःशुल्क गैस कनेक्शन दिया, तब गांव-गांव तक यह संदेश पहुंचा कि यह जनहितैषी सरकार है। महिलाएं भी सरकार के राडार पर है, गैस चूल्हा का इस्तेमाल करने वाली बहनें मोदी सरकार के ‘सबका साथ-सबका विकास’ संदेश की संवाहक बन चुकी है। केन्द्र सरकार ने निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य पर्यटन के रूप में विकसित अस्पतालों के खर्चीले बिलों को देखते हुए तय किया कि सरकारी अस्पतालों में सरकारी खर्च पर दवाईयां सुलभ हो। जहां बाजार से जीवन रक्षक दवाएं खरीदना अनिवार्य हो दवाईयां उपकरणों पर अनुचित मुनाफाखोरी न हो पाये। इसके लिए लाख रू. कीमत का स्टेंट सस्ता कर आम आदमी की पहुंच में लाया गया है। जेनेरिक दवाईयों के इस्तेमाल को तरजीह दी जा रही है। जेनेरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाओं से कई गुना सस्ती होती है। इसके विक्रय केन्द्र शहरों में खोले जा रहे है। नरेन्द्र मोदी सरकार की ‘तीन साल बेमिसाल’ की उपलब्धियां जन-जन तक पहुंचाना लोकतंत्र में आवश्यक इसलिए भी है कि जनता सूचना के अधिकार से संपन्न है।

    मोदी फेस्ट के रूप में पार्टी संगठन और एनडीए सरकार ने इक्कीस दिन का जनसंपर्क महासंवाद अभियान आयोजित करके जन जिज्ञासा को शांत करने की अनूठी पहल की है। यह एक अवसर है जब पाॅलीटिक्ल क्लास और सिविल सोसायटी इस अभियान में प्रगति पर समावेशी बहस कर जनता जनता को विकास के प्रति जागरूक बना सकती है। विकास के इस स्वर्ण युग में कुछ कमियां भी हो सकती है। लेकिन एक बात तो तय है कि राष्ट्र के जीवन में तीन साल मूल्यवान साबित होने पर दो मत नहीं है। देश में अधोसरंचना विकास, आवासहीनों के सिर पर 2022 तक छत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा बैंक, स्किल्ड इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसे अभियानों ने युवकों में इल्म और हुनर की चाह पैदा की है। वे देश में बढ़ते रोजगार के अवसरों को छोड़ना नहीं चाहते। ब्रेन-ड्रेन की जगह ब्र्रेन गेन की जुगत लग गयी है। स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत, खुशहाल भारत का जो सपना स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों ने देखा था, उस दिशा में अनुष्ठान शुरू हो चुका है। राष्ट्र के जीवन में तीन वर्ष की अवधि मूल्यांकन की दृष्टि से नगण्य है किंतु नीतियों बताती है कि दशा और दिशा सही है। गत तीन वर्षों में भारत में विकास का नया विहान हुआ है। योजना आयोग नीति आयोग में बदला है। टीम इंडिया का प्रादुर्भाव हो चुका है। नीति आयोग और जीएसटी परिषद में राज्यों का वर्चस्व बढ़ने से संविधान की संघवाद की भावना ने मूर्तरूप लिया है। राज्यों को केन्द्र से मिले वाले राज्यांश का 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत हो जाने से राज्यों की माली सेहत सुधरी है। अब तक मोदी सरकार राज्यों के बीच पक्षपात से बची है। यह भी एक लोकतांत्रिक उपलब्धि है।

  • संघ को साकार करने वाला जाणता राजा

    संघ को साकार करने वाला जाणता राजा


    -आलोक सिंघई-
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के कार्यकाल से ही समाज को संपूर्णता की ओर ले जाने का प्रयास करता रहा है। गद्दारी, परिवारवाद और अवसरवादिता ने उसे जितना बदनाम करने की कोशिश की वह दिन ब दिन निखरता चला गया। लाखों करोड़ों स्वयंस्वकों ने अपमान, कलंक और दुत्कार सहकर भी प्रखर राष्ट्रवाद की ज्वाला को लगातार जलाए रखा। ऐसे सैकड़ों स्वयंसेवकों को हम अपने आसपास देख सकते हैं जिन्होंने त्याग और तपस्या के उदाहरण प्रस्तुत किए और समाज के लिए जीते जागते मॉडल बन गए। स्व. अनिल माधव दवे उसी परंपरा के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र रहे हैं। जीते जी उन्होंने जितने देशभक्तों को प्रेरित और प्रोत्साहित किया विदाई की बेला में वे उससे कई गुना अधिक चुंबकीय आकर्षण लेकर उपस्थित हुए। सौम्य व्यक्तित्व के धनी और प्रखर मेघा का तेज लिए हुए इस जाणता राजा के व्यक्तित्व को जितने नजरियों से तौला जाए उनके हिस्से वाला पलड़ा हर बार भारी साबित होता है।

    संघ से विदा लेकर जब वे राजनीति के क्षेत्र में उतरे तो उनसे मिलने वालों को हरदम यही आशा रही कि वे कभी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे और प्रदेश को नई ऊंचाईयां प्रदान करेंगे। इसकी वजह भी थी कि वे कई बार मुख्यमंत्री बनाने का काम सहजता से कर चुके थे। जब प्रदेश में कांग्रेस के भ्रष्टतम शासनकाल की कालिख प्रदेश वासियों को बैचेन किए हुई थी तब भाजपा के थिंक टैंक जावली से ही दिग्विजय सिंह के लिए बंटाढार शब्द निकला। ये शब्द जनता की जुबान पर चढ़ गया और मतदाताओं को अपना फैसला करने में आसानी हुई। उस दौरान कांग्रेस की शासनशैली को इतनी बारीकियों से जनता के सामने प्रस्तुत किया गया कि लोगों ने समझ लिया कि कांग्रेस अपनी उम्र पूरी कर चुकी है।आज जब देश को कांग्रेस मुक्त करने की बात कही जाती है तो लोग इसे शेखचिल्ली का सपना कह देते हैं। उन्हें जरा भी भान नहीं कि उनकी सत्ता की चूलें उनके कुकर्मों ने किस तरह ढीली कर दीं हैं। देश की युवा पीढ़ी जब अराजकता फैलाने वालों की तुलना संघ के तपोनिष्ठ स्वयंसेवकों से करते हैं तो वे किसी प्रलोभन में आए बिना अपनी राह खुद चुन लेते हैं।

    स्व. अनिल दवे भाजपा के वे नगीने थे जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुलाकर मंत्री बनाया और अपने सहयोगी के रूप में उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। आज यदि देश में नदियों को विकास का इंजन बनाने का अभियान चल रहा है तो उसके पीछे स्व. अनिल दवे की ही सोच काम कर रही है। असम में नमामि ब्रह्मपुत्र अभियान, उत्तर प्रदेश में गंगा सफाई अभियान ऐसे ही उपक्रम हैं जो न केवल प्रदेशों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं बल्कि पर्यावरण को संवारने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। मध्यप्रदेश में नमामि नर्मदे अभियान को फिजूलखर्ची बताने वाले कई ओछे राजनेता बदलाव की इस कुंजी को घूरा समझ रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे बदलाव की बयार बना डाला है। अपने व्यस्ततम समय में बदलाव करके श्री चौहान ने न केवल नर्मदा के तटों पर फैली विशाल आबादी से सीधा संपर्क स्थापित किया बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में भारी निवेश को भी न्यौता दे डाला है। मध्यप्रदेश आज गेहूं के उत्पादन में तो सिरमौर हो ही चुका है, साथ में अब वह कृषि उत्पादों की विशाल श्रंखला का भी सरताज बनने जा रहा है। ये बदलाव न केवल नर्मदा के तटों से शुरु हो रहा है बल्कि प्रदेश की तमाम नदियों के किनारों पर भी पुष्पित हो रहा है। जो लोग नर्मदा घाटी की क्षमताओं से परिचित नहीं हैं वे इसे बहुत हल्के में ले रहे हैं लेकिन नर्मदा घाटी का करीब से अध्ययन कर चुके अनिल दवे काफी पहले यहां की परिस्थितिकी की क्षमता का आकलन कर चुके थे। आजादी के बाद उत्पादकता बढ़ाने के सैकड़ों प्रयोग हुए हैं। औद्योगिकीकरण की मंहगी लागत के बाद भी देश को उसका फल नहीं मिल सका है। इसकी तुलना में नदी घाटों को संवारने की सोच कितनी तेजी में अपना असर दिखा रही है ये कृषि जिन्सों की बढ़ती पैदावार से सहज की महसूस किया जा सकता है।

    आजादी के बाद कांग्रेस की अराजक राजनीति ने देश के लोगों को जितना गैरजिम्मेदार बनाया उसके चलते शासन करना किसी भी लोकतांत्रिक राजनेता के लिए बहुत कठिन हो गया था। कांग्रेस के शासक वे चाहे प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री सभी लुभावनी घोषणाओं का जाल फेंककर लोगों को कर्ज के दलदल में धकेलते रहे हैं। भाजपा के सामने भी यही चुनौती थी कि फोकटबाजी की अभ्यस्त जनता को वह कैसे सबल राष्ट्र बनाने की ओर ले जा सके। ये काम अचानक संभव नहीं था। आज जिस तरह नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आरोपों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है इतना प्रतिरोध कोई आम राजनेता झेल ही नहीं सकता था। स्व. अनिल दवे ये बात काफी पहले समझ चुके थे। इसलिए उन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने वाली हर आवाज को नर्मदा के घर तक ही सीमित कर दिया। उन्होंने जब सुश्री उमा भारती की सरकार का हश्र देखा तो समझ लिया कि इतना गरिष्ठ पकवान खाने की आदत न तो प्रदेश के उद्योगपतियों को है और न ही प्रदेश का मीडिया इतना समझदार और सक्षम है कि वह ढर्रेबाजी को अनुशासित कर सके। इसलिए उन्होंने मध्यमार्ग पर चलने वाली शिवराज सरकार को ही भाजपा का चेहरा बनाए रखने का सूत्र दिया।

    शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार कांग्रेस की ही नीतियों पर चलने वाली सरकार साबित हुई और जिसने जनता के प्रतिरोध को बहुत हद तक शांत बनाए रखा। ये जादू शिवराज सिंह चौहान जैसा शांतचित्त और सेवा भावी राजनेता ही कर सकता था। भाजपा के भीतर से भी कई बार आवाजें उठीं कि ये सरकार भाजपा के बधियाकरण का प्रयास कर रही है। कांग्रेसियों को बेवजह स्पेस दिया जा रहा है। भाजपा की नीतियों को ताक पर धर दिया गया है। इस तरह की आवाजों के बीच शिवराज सिंह चौहान अनवरत जनता की योजनाओं को लागू करते चले गए। हालांकि कई बार चर्चा के दौरान अनिल दवे ने अपनी बैचेनी भी जाहिर की लेकिन उनका मानना था कि इससे बेहतर मार्ग फिलहाल कोई दूसरा नहीं हो सकता। जातियों और संप्रदायों की राजनीति के आदी हो चुके लोगों को पहले तो ये महसूस कराया जाए कि भाजपा सरकार उनके साथ भेदभाव नहीं करती है। कमोबेश उनका ये अनुमान सही भी साबित हुआ। आज शिवराज सिंह चौहान जिस तरह समाज के सभी तबकों में स्वीकार्य हैं ये अनिल दवे जैसे कुशल रणनीतिकार की ही देन थी। भाजपाईयों को कभी गांधी विरोधी और सांम्प्रदायिक होने का लेबल लगाकर बदनाम किया जाता था लेकिन गांधी मार्ग का अनुसरण करके अनिल दवे की रणनीति ने वो षड़यंत्रकारी लेबल उतार फेंका। वीर शिवाजी की छापामार शैली को लोकतांत्रिक राजनीति के मंच पर साकार करने वाले अनिल दवे आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके सन्मार्ग पर चलकर टकराव टालने वाली सोच निश्चित तौर पर देश को एक मजबूत राष्ट्र की ओर ले जाएगी। उन्होंने अपनी पारी बखूबी खेली अब उनकी पगडंडी को राजमार्ग बनाना अगली पीढ़ी के नेताओं की जिम्मेदारी है।
    (लेखक जन न्याय दल के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं)

  • नर्मदा को बचाना सरकार का सराहनीय कार्यःमोदी

    नर्मदा को बचाना सरकार का सराहनीय कार्यःमोदी

    अमरकंटक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश के अमरकंटक में कहा कि मां नर्मदा ने सालों से लोगों को जीवन दिया है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम मां नर्मदा को बचाएं. उन्होंने यह बात आज नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के समापन समारोह में कही है.

    पीएम मोदी आज इस कार्यक्रम में शामिल होने अमरकंटक पहुंचे और उन्होंने नर्मदा के उद्गम स्थल मंदिर की पूजा भी की. पूजा करने के बाद जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मां नर्मदा हिमालय या बर्फीले पहाड़ों से नहीं निकली है, यह पौधों से निकली है, इसे बचाने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने होंगे.

    पीएम मोदी ने कहा कि नदियों के प्रति हमें अपना दायित्व निभाना होगा. उन्होंने कहा, ‘मां नर्मदा ने बरसों से हमारे पूर्वजों को बचाया है, अब हमें मां नर्मदा को बचाना है. हमने मां नर्मदा की परवाह नहीं की, बल्कि अपनी परवाह की है, लेकिन अब हमें मां की परवाह करना है.’

    उन्होंने कहा कि देश के नक्शे में कई नदियां दिखती है, लेकिन हकीकत में वो नदियां दिखाई नहीं देती हैं, सारी नदियां सूख चुकी हैं, लेकिन अगर उन्हें बचाना है तो ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने होंगे.

    पीएम मोदी ने नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा पर बात करते हुए कहा, ‘मध्य प्रदेश की सरकार ने सराहनीय काम किया है. 25 लाख से ज्यादा लोगों ने नर्मदा को बचाने का संकल्प लिया. जनसमर्थन के बिना कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता है.’