
भोपाल,21 जनवरी(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। राजधानी की केन्द्रीय जेल तोड़ने और सिमी आतंकवादियों की मुठभेड़ में हत्या के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में पुलिस की घुसपैठ बढ़ाने के नए नए तरीके खोजने शुरु कर दिए हैं। राज्य शासन ने भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के जवानों की तीन बटालियन मांगी हैं। शूटिंग में माहिर इन जवानों को जेलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। इसके साथ साथ मध्यप्रदेश पुलिस के चार आला अफसरों को भी जेलों का प्रबंधन संभालने भेजा जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने होशंगाबाद जिले के सांगाखेड़ा खुर्द में नर्मदा सेवा यात्रा के 33 वें दिन एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐलान किया है कि महिलाओं से दुराचार करने वालों पर अब मुकदमा तो चलेगा पर दोषियों को सीधे फांसी चढ़ाने की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्य की भाजपा सरकार ने जबसे महिलाओं के हित के नाम पर नई योजनाएं चलाईं हैं तबसे जेलों में छेड़छाड़ संबंधी अपराधों के दोषियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज जेलों में महिला अपराधों से संबंधित आरोपियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें से ज्यादातर मामले महिलाओं को मुआवजा राशि दिलाने और विरोधियों को कथित तौर पर निपटाने की रणनीति के तहत दर्ज किए गए हैं। बताते हैं कि भाजपा सरकार दोषियों को इस्लामिक देशों की तरह सख्त सजा से दंडित करने की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि राज्य में पहली बार जेलों में बंदियों के सुधार की जिम्मेदारी पुलिस अफसरों को सौंपी जा रही है। अंग्रेजों के शासनकाल से जेलों की जवाबदारी जेल विभाग के अधिकारी कर्मचारी संभालते रहे हैं। जस्टिस मुल्ला कमेटी की रिपोर्ट में तो जेलों में पुलिस के हस्तक्षेप को अनैतिक बताया गया है। इसके बावजूद जेलों में पुलिस का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। पुलिस को अपराधों की जांच के साथ साथ दोषियों को दंडित करने की भी जबाबदारी सौंपे जाने से न्यायाधीशों में भी दहशत फैल रही है। उन्हें लगता है कि जजों को चुनने वाली कोलोसियम पद्धति पर विवादों के बाद भाजपा ने पूरे देश में अपनी सरकारों को दंड का अधिकार अपने हाथों में लेने की तैयारी शुरु कर दी है।
सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश की जेलों में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। राजनीतिक चंदा वसूली के चलते बंदियों के साथ मारपीट की घटनाएं भी बढ़ीं हैं और उनके परिजनों पर अनैतिक तरीके से चंदा वसूली का दबाव बढ़ता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जेलों में बंदियों के साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की जा रही है। उनकी कराहों और आवाजों से जेलों में दहशत का माहौल बन गया है। सिमी से जुड़े आरोपियों के कथित जेल ब्रेक कांड के बाद बदनामशुदा जेल डीजी सुशोभन बैनर्जी को तो हटा दिया गया है लेकिन इस मामले में जेल विभाग के अफसरों और प्रहरियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इससे जेल विभाग के अफसरों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
हाल ही में जेल डीजी संजय चौधरी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान प्रदेश की जेलों के प्रभारियों को साफ चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने मुख्यालय के निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी और जेल विभाग के प्रमुख सचिव विनोद सेमवाल भी मौजूद थे।
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