
कुण्डलपुरः- विश्व की सबसे ऊँची 108 फुट आदिनाथ भगवान की मांगीतुंगी में स्थापना कराने वाले जम्बूदीप के पीठाधीश स्वस्ति स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी ने कुण्डलपुर पहुँचकर बडे़ बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन किए उन्होने अर्ग समर्पित कर छत्र चढाया उनके साथ कुण्डलपुर कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई, विद्ववान डॉ.भगचंद भागेन्दु, तहसीलदार रूपेश सिंघई विमल लहरी, अभय बनगांव, नवीन निराल, श्रेयांस लहरी, मुकेश शाह, शैलेन्द्र मयूर, सुनील वेजीटेरियन, दीपचन्द्र जैन, नरेन्द्र बजाज, अजित खडेरी, चन्द्र कुमार जैन, साथ रहे । बडे़ बाबा के मंदिर का उन्होने सूक्षमता से अवलोकन किया। इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी की ओर से उनका सम्मान किया गया। उन्होने कहा कि शीघ्र निर्माण पूर्ण होने से देश की सम्पूर्ण जैन समाज को गौरव एवं प्रसन्नता होगी। मंदिर का निर्माण सून्दर एवं सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होने कहा कि सन् 2001 में महोत्सव के समय आया था तब से काफी परिवर्तन आ गया है। और मंदिर का निर्माण भी बहुत हो गया है, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आर्शीवाद प्राप्त है, इसीलिए यह कार्य शीघ्र पूर्ण होगा। मंदिर कमेटी को मेरी यह प्रेरणा है कि मंदिर निर्माण को प्राथमिकता के साथ समय सीमा में पूर्ण करने का प्रयास करें, उन्होने वर्द्यमान सागर के समीप शिखर मंदिरों के दर्शन किये।
पीठाधीश स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी का हुआ भव्य अभिनंदन
कुण्डलपुरः- विश्व की सबसे ऊँची 108 फुट आदिनाथ भगवान की मांगीतुंगी में स्थापना कराने वाले पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति जी के दमोह आगमन पर दिगम्बर जैन समाज के द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। वसुन्धरा नगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर के समीप स्थित विद्या चिन्मय संत भवन में स्वामी जी का समाज की ओर से अभिवंदना प्रशस्ति भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में मंगलाचरण के उपरान्त स्वामी जी ने बडे बाबा एवं छोटे बाबा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया।
समाज के वरिष्ठ विद्ववान डॉ.भागचन्द्र भागेन्दु जी ने स्वामी जी एवं धर्मपीठोें का परिचय दिया, इसके पश्चात् दिगम्बर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई विमल लहरी,संतोष भारती, रूपेश सिंघई अभय बनगांव, अरविन्द्र इटोरया, सुभाष बमोरया, रूपचंद जैन, अजित जैन, सुनील वेजीटेरियन, दिलेश चौधरी, आनंद जैन ,महेन्द्र जैन आदि के साथ विभिन्न जैन मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने श्रीफल अर्पित कर स्वामी जी का आर्शीवाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर अपने उदगार् व्यक्त करते हुये। स्वामी जी ने कहा कि मै दमोह पहली वार आया हूँ और बुन्देलखण्ड के भक्तों से मिलने आया हूं, 15 वर्षो पूर्व कुण्डलपुर आया था, तथा वहां के नये मंदिर मॉडल का उद्घाटन करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मंदिर निर्माण कार्य को देखने की मेरी भावना थी, उन्होने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज 40वर्षो से बुन्देलखण्ड में है, मुझे यहां आकर ज्ञात हो गया है ं चूंकि बुन्देलखण्ड के भक्तों की त्याग और त्यागियों के प्रति, श्रद्धा और भक्ति असीम है, यही कारण है कि आचार्य श्री इस क्षेत्र को नही छोड पा रहे, आचार्य श्री और आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माता जी पूरे विश्व में धर्म की महति प्रभावना कर रहे है। पूज्य माता जी की पावन प्रेरणा से हमें विश्व की सबसे बडी प्रतिमा बनाने का सौभाग्य प्राप्त हो सका है जो कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है, आज समाज को संगठन की बहुत आवश्यकता है। इसलिए हमें अपने समाज के अस्तित्व को बनायें रखना होगा। हमें खानदान और खानपान को बचाने की आवश्यकता है, तथा युवा पीढी को बचाये रखने के लिये संस्कारित करना जरूरी है।
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