Month: January 2017

  • हम देशसेवा कार्यों से करते हैं बातों से नहीं

    हम देशसेवा कार्यों से करते हैं बातों से नहीं


    कैथोलिक धर्मसभा में परिवार के महत्व पर चिंतन
    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। भारतीय कैथोलिक धर्माध्यक्षीय सभा(सी.सी.बी.आई)ने भोपाल में परिवार के महत्व पर सात दिवसीय चिंतन कार्यक्रम आयोजित किया है। इस धर्मसभा में टूटते परिवारों को संवारकर राष्ट्र के विकास के तरीकों पर चिंतन किया जाएगा। धर्मसभा का आयोजन मुंबई से पधारे सी.सी.बी.आई के अध्यक्ष ओस्वाल्ड कार्डीनल ग्रेसीयस के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
    एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की चौथी सबसे बड़ी धर्माध्यक्षीय महासभा में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए भोपाल के आर्च बिशप लियो कार्नेलियो ने कहा कि हम अपने सेवा कार्यों से राष्ट्र सेवा करते हैं। केवल बयानबाजी पर हमारा कोई भरोसा नहीं। इस लिहाज से हम राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में होने जा रहे इस आयोजन में हम परिवारों की सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करने और परिवारों को टूटने से बचाने जैसे कई मुद्दों पर विचार करेंगे। हमारे 132 धर्म प्रांतों और 182 धर्माध्यक्षों की धर्मसभा इन सूत्रों पर अमल करके राष्ट्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार वार्ता को सीसीबीआई के उपाध्यक्ष फिलीपे नेरी फेराव, महासचिव वर्गीज चक्कालाकल, उप महासचिव फादर इस्टीफन अलाटारा ने भी संबोधित किया।
    श्री ओस्वाल्ड कार्डीनल ग्रेसीयस ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से हम परिवारों में प्यार और खुशी का विस्तार करके सामाजिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने के फार्मूलों पर चर्चा करेंगे। इस आयोजन में देश भर में फैली हमारी संस्थाओं के कामकाज पर विमर्श किया जाएगा। इसके साथ साथ हम उन संस्थाओं के कारोबार का भी सिंहावलोकन करेंगे। उन्होंने कहा कि गोवा समेत जिन चर्चों को विमुद्रीकरण के बाद आयकर के नोटिस प्राप्त हुए हमने उन सभी का जवाब दे दिया है। हम भारतीय संविधान के कानूनी दायरे में रहकर अपना कार्य करते हैं और पूरी जवाबदारी के साथ वैधानिक संव्यवहार करते हैं।उन्होंने कहा कि विमुद्रीकरण के बाद अन्य कारोबारों की तरह सभी धार्मिक संस्थाओं को भी अपने खातों और मुद्राओं के नवीनीकरण की प्रक्रिया करनी पड़ी है। इसमें हम कोई अलग नहीं हैं।
    धर्मांतरण के मुद्दे पर आर्चबिशप लियो कार्नेलियो ने कहा कि कोई भी किसी को जबरन अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। हम लोगों को जगाने और प्रेम से रहने का संदेश देते हैं।लोगों का धर्म परिवर्तन करना उनका मनोभाव है। ये केवल ईश्वर की कृपा से ही हो सकता है। हम देश में कम संख्या में हैं इसलिए हम पर आरोप लगा दिए जाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि घर वापिसी जैसे कार्यक्रमों को क्या धर्मांतरण नहीं कहा जाएगा।
    मध्यप्रदेश में ईसाई समाज के सामने क्या चुनौतियां हैं इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यहां के मुख्यमंत्री हों या सरकार कोई भी संवैधानिक दायरे में ही काम करते हैं। इनसे हमें कभी कोई परेशानी महसूस नहीं हुई। कुछ छुटपुट लोग यदा कदा हिंसा फैलाते रहते हैं जिनमें आमतौर पर न्याय नहीं हो पाता है।
    परिवार वाद बनाम राष्ट्रवाद के बीच विरोधाभासों के सवाल पर आर्चबिशप ने कहा कि राष्ट्रवाद का विचार हम सभी पर समान रूप से लागू होता है। हम अपने कार्यों से राष्ट्र की सेवा करते हैं, नारा लगाकर थोथी राष्ट्रभक्ति करना हमारा स्वभाव नहीं है। हम देश के प्रति पूरी बफादारी रखते हैं और देश को मजबूत बनाने के अपने लक्ष्यों पर पूरी ईमानदारी के साथ अमल भी करते हैं।
    प्रेस को जानकारी देते हुए कांन्फ्रेंस आफ कैथोलिक बिशप्स आफ इंडिया के भोपाल चैप्टर के मीडिया प्रभारी फादर मारिया स्टीफन ने बताया कि 29 वीं अखिल भारतीय कैथोलिक धर्माध्यक्षीय महासभा का आयोजन कल 31 जनवरी से 8 फरवरी 2017 तक किया जा रहा है। भोपाल धर्म प्रांत आशानिकेतन केम्पस स्थित पास्ट्रल सेंटर में इस आयोजन की मेजबानी करेगा। इस आयोजन का मूल एजेंडा परिवारों में प्रेम के आनंद को बढ़ाना है। हम देश भर में फैले अपने धर्म प्रांतों के माध्यम से आम नागरिकों के बीच प्रेम का जो ताना बाना बुन सकते हैं उन तरीकों पर चर्चा करके हम अपनी कार्यप्रणाली में कसावट लाने का प्रयास करेंगे।
    महासभा की शुरुआत यूखारिस्तीय पूजन विधि समारोह के साथ होगी। उद्घाटन सभा की अध्यक्षता भारतीय कैथोलिक धर्माध्यक्षीय महासभा एवं एशियाई कैथोलिक धर्माध्यक्षीय महासभा के अध्यक्ष एवं मुंबई के महाधर्माध्यक्ष ओस्वाल्ड कार्डिनल ग्रेशियस करेंगे।
    इस आयोजन में सीसीबीआई के नए पदाधिकारियों का चुनाव भी किया जाएगा। बैठक में भारतीय कलीसिया की वर्तमान स्थिति पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।

  • शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन टूटा

    शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन टूटा


    मुंबई: महाराष्‍ट्र में शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन टूट गया है. बीएमसी चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर पिछले कई दिनों से जारी बातचीत में दोनों पार्टियां किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकीं.

    शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने खुद गठबंधन के टूटने के विषय में बताते हुए कहा कि अब भविष्‍य में महाराष्‍ट्र में दोनों पार्टियों के बीच कोई गठबंधन नहीं होगा. उद्धव ने कहा कि बीजेपी ने हमारे घर में घुसकर हमें तंग किया और हमारे 25 साल बर्बाद हो गए.

    उन्‍होंने कहा कि अब जंग शुरू हो गई है. हालांकि उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि वर्तमान गठबंधन फिलहाल बना रहेगा. सबसे महत्वपूर्ण बृहन्मुंबई नगर निगम में गठबंधन के लिए भाजपा और शिवसेना के बीच बातचीत पिछले कुछ दिन में गतिरोध के दौर से गुजर रही थी.

    ठाकरे ने गुरुवार शाम पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं अकेले लड़ने के लिए तैयार हूं. शिवसैनिक अकेले मुकाबले के लिए तैयार हैं. मैं अपने साथ मजबूत सिपाही चाहता हूं जिनमें सामने से हमला करने का साहस हो, पीछे से नहीं. एक बार मैंने फैसला कर लिया तो मैं नहीं चाहता कि इस पर कोई सवाल खड़ा करे.’

    उद्धव ने कहा, ‘मैं पार्टी की आगामी रणनीति का ऐलान कर रहा हूं. आप साथ आओगे? मैं अंगारों पर चलूंगा, आप चलोगे? मुझे गद्दार नहीं चाहिए. आप मजबूती से खड़े रहें. मैं सामनेवाले के दांत गिरा दूंगा. अगर आप मुझे साथ दे रहे हो तो मैं ऐलान कर रहा हूं, आज के बाद, भविष्य में, शिवसेना अकेली महाराष्ट्र में भगवा लहराएगी. अब के बाद मैं गठबंधन के लिए किसी के दरवाजे पर कटोरा ले कर नहीं जाऊंगा. जो कुछ होगा वो मेरे शिवसैनिकों का, शिवसेना प्रमुख का, हमारा होगा. किसी की भीख नहीं. इसकी की शुरुआत के रूप में महानगर पालिका और जिला परिषद के आगामी चुनाव में कहीं भी हम गठबंधन नहीं करेंगे. मेरा शिवसैनिक शिवसेना के साथ गद्दारी नहीं करेगा. अब लड़ाई शुरू हो चुकी है.’

    बृहन्मुंबई नगर निगम के साथ नासिक, पुणे, कोल्हापुर और नागपुर नगर निगमों के लिए चुनाव 21 फरवरी को होना है.

    शिवसेना का यह फैसला राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार का नाम पद्म पुरस्‍कारों की सूची में आने के एक दिन बाद आया है. शरद पवार को पद्मविभूषण से सम्‍मानित किया गया है.

    इससे पहले अनिश्चितताओं के बीच 23 जनवरी को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बीएमसी चुनावों के लिए अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी कर दिया था. ठाकरे ने कहा था कि घोषणा पत्र पार्टी द्वारा स्वतंत्र रूप से जारी किया जा रहा है क्योंकि यह शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जयंती है. उन्होंने कहा था, ‘23 जनवरी शिवसैनिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है और हम इस दिन मुंबई के लोगों के प्रति वचनबद्ध हैं. इसलिए, हमने आज अपना घोषणा पत्र जारी करने का फैसला किया.’ बीएमसी चुनाव 21 फरवरी को होने वाले हैं.

    दोनों पार्टियों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बावजूद उनके बीच समझौता नहीं हो सका. दोनों पार्टियां अपने-अपने लिए बड़ी संख्या में सीटों की मांग पर अड़ी रहीं. जहां भाजपा 227 सदस्यीय परिषद में 100 से अधिक सीटों पर दावा करती रही, वहीं शिवसेना अपने सहयोगी दल की मांगों के आगे झुकने को तैयार नहीं थी.

  • आईटीबीपी के शूटर जेल संभालेंगे

    आईटीबीपी के शूटर जेल संभालेंगे

    भोपाल,21 जनवरी(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। राजधानी की केन्द्रीय जेल तोड़ने और सिमी आतंकवादियों की मुठभेड़ में हत्या के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में पुलिस की घुसपैठ बढ़ाने के नए नए तरीके खोजने शुरु कर दिए हैं। राज्य शासन ने भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के जवानों की तीन बटालियन मांगी हैं। शूटिंग में माहिर इन जवानों को जेलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। इसके साथ साथ मध्यप्रदेश पुलिस के चार आला अफसरों को भी जेलों का प्रबंधन संभालने भेजा जा रहा है।

    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने होशंगाबाद जिले के सांगाखेड़ा खुर्द में नर्मदा सेवा यात्रा के 33 वें दिन एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐलान किया है कि महिलाओं से दुराचार करने वालों पर अब मुकदमा तो चलेगा पर दोषियों को सीधे फांसी चढ़ाने की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्य की भाजपा सरकार ने जबसे महिलाओं के हित के नाम पर नई योजनाएं चलाईं हैं तबसे जेलों में छेड़छाड़ संबंधी अपराधों के दोषियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज जेलों में महिला अपराधों से संबंधित आरोपियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें से ज्यादातर मामले महिलाओं को मुआवजा राशि दिलाने और विरोधियों को कथित तौर पर निपटाने की रणनीति के तहत दर्ज किए गए हैं। बताते हैं कि भाजपा सरकार दोषियों को इस्लामिक देशों की तरह सख्त सजा से दंडित करने की तैयारी कर रही है।

    गौरतलब है कि राज्य में पहली बार जेलों में बंदियों के सुधार की जिम्मेदारी पुलिस अफसरों को सौंपी जा रही है। अंग्रेजों के शासनकाल से जेलों की जवाबदारी जेल विभाग के अधिकारी कर्मचारी संभालते रहे हैं। जस्टिस मुल्ला कमेटी की रिपोर्ट में तो जेलों में पुलिस के हस्तक्षेप को अनैतिक बताया गया है। इसके बावजूद जेलों में पुलिस का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। पुलिस को अपराधों की जांच के साथ साथ दोषियों को दंडित करने की भी जबाबदारी सौंपे जाने से न्यायाधीशों में भी दहशत फैल रही है। उन्हें लगता है कि जजों को चुनने वाली कोलोसियम पद्धति पर विवादों के बाद भाजपा ने पूरे देश में अपनी सरकारों को दंड का अधिकार अपने हाथों में लेने की तैयारी शुरु कर दी है।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश की जेलों में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। राजनीतिक चंदा वसूली के चलते बंदियों के साथ मारपीट की घटनाएं भी बढ़ीं हैं और उनके परिजनों पर अनैतिक तरीके से चंदा वसूली का दबाव बढ़ता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जेलों में बंदियों के साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की जा रही है। उनकी कराहों और आवाजों से जेलों में दहशत का माहौल बन गया है। सिमी से जुड़े आरोपियों के कथित जेल ब्रेक कांड के बाद बदनामशुदा जेल डीजी सुशोभन बैनर्जी को तो हटा दिया गया है लेकिन इस मामले में जेल विभाग के अफसरों और प्रहरियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इससे जेल विभाग के अफसरों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

    हाल ही में जेल डीजी संजय चौधरी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान प्रदेश की जेलों के प्रभारियों को साफ चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने मुख्यालय के निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी और जेल विभाग के प्रमुख सचिव विनोद सेमवाल भी मौजूद थे।

  • मध्यप्रदेश की जेलों में मीसा बंदी का दौर

    मध्यप्रदेश की जेलों में मीसा बंदी का दौर

    भोपाल (पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। सुशासन का वादा करने वाली भाजपा ने मध्यप्रदेश में ढांचागत विकास पर तो बहुत जोर दिया है लेकिन उसने कांग्रेस की वे तमाम बुराईयां भी अपना लीं हैं जिन्हें वह कभी पानी पी पीकर कोसती रही है।श्रीमती इंदिरा गांधी के आपातकाल की ज्यादतियों की कहानी आज भी जो सुनता है उसकी रूह कांप जाती है। उन्हीं कहानियों को सुनाकर शिवराज सिंह चौहान की मिठबोली सरकार ने मीसाबंदियों के लिए पेंशन योजना भी लागू की है। इसके बावजूद अब उनकी सरकार जेलों में जो दमन चक्र चला रही है उससे प्रदेश के लगभग पैंतीस हजार बंदियों और उनके परिवारों के बीच आतंक फैल गया है। बंदियों पर जो नए नियम लादे जा रहे हैं उससे बंदियों में आक्रोश फैल गया है और वे भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं।

    अंग्रेजों के बाद से पहली बार शिवराज सिंह सरकार ने जेलों को राजनीतिक योजनाओं की आय का स्रोत बनाना शुरु किया है। मजेदार बात ये है कि इस काली दौलत की खेती कथित तौर पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी कर रहे हैं। जेलों में आधुनिकीकरण के नाम पर लागू की जा रही योजनाओं को सफल बनाने के लिए जेल विभाग में पुलिस के तीन आला अफसर तैनात किये गए हैं। अब वहां चार और बड़े अफसर भेजे जाने की तैयारी हो रही है जो सरकार की मंशाओं को पूरा करने की जवाबदारी संभालेंगे। जेलों में प्रहरियों की भारी कमी है उन्हें भर्ती किया जाना जरूरी है पर इसके स्थान पर सरकार ने जेलों में एसएएफ के जवान भेज दिए हैं। जेलों में पुलिस की तैनाती को सही साबित करने के लिए भोपाल जेल ब्रेक कांड की जांच में लापरवाही की जवाबदारी जेल महकमे के कर्मचारियों और प्रहरियों पर डाली जा रही है। जबकि हकीकत ये है कि सिमी के आतंकवादी जब भोपाल की केन्द्रीय जेल तोड़कर फरार हुए तब जेल पर एसएएफ के जवान ड्यूटी दे रहे थे। एकबारगी ये मान भी लिया जाए कि जेल के प्रहरी लापरवाह थे तब भी पुलिस को उसकी ड्यूटी के लिए क्लीनचिट कैसे दी जा सकती है।

    जेल विभाग पर पुलिस का शिकंजा किसी भी तरह न तो कानूनी है और न ही नैतिक उसके बावजूद मौजूदा सरकार जेलों की आड़ में जिस दंड प्रक्रिया को लागू कर रही है वह आपातकाल से भी गंभीर प्रताड़ना और अमानवीयता की ओर जाती साफ नजर आ रही है। भोपाल जेल ब्रेक कांड के बाद हटाए गए जेल महानिदेशक सुशोभन बैनर्जी की हरकतों को पूरी तरह नजरंदाज करके जिस तरह जेल विभाग के अफसरों के खिलाफ दमन चक्र चलाया जा रहा है उससे जेल महकमे के भीतर भी असंतोष घुमड़ रहा है। जेल विभाग में दो डीआईजी और दो एडीशनल एसपी भेजे जाने की खबर ने तो अफसरों की नींदें उड़ा दीं हैं। उन्हें पता है कि कि मौजूदा पदों पर जब पुलिस के बड़े अधिकारी जम जाएंगे तो उनके प्रमोशन की राह तो हमेशा के लिए अवरुद्ध हो जाएगी। जेल महकमें में लंबे समय तक नौकरी करने वाले जिन अफसरों ने प्रशासन में सुधार के जो सपने संजोए थे उन्हें पुलिस के आला अफसर अपने नौसिखिएपन में मट्टी पलीत करे दे रहे हैं।

    सूत्र बताते हैं कि ये सारा खेल साजिशन किया जा रहा है,जिससे जेलों में असंतोष फैले और पुलिस के अलावा सरकार के पिट्ठुओं की तैनाती का रास्ता प्रशस्त हो सके। पिछले दिनों जेल प्रशासन ने एक आदेश निकाला जिसमें कहा गया कि कोई भी मुलाकाती बंदियों को अपने घरों से बनाया हुआ या बाहिरी सामान नहीं दे सकता। कोई बहन यदि अपने बंदी भाई को संक्रांति पर तिल के लड्डू भी खिलाना चाहे तो उसे इसकी इजाजत नहीं है। क्योंकि जेलों में बंदियों के लिए बाहर से लाए जाने वाले नमक, मसाले, तेल, टाफी, बिस्किट, सिगरेट, बीड़ी, तंबाखू, जूते आदि पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब तक बंदियों को तय लगभग पचपन रुपए के डाईट प्लान में सुबह नाश्ते में चाय के साथ उबले चने और पौष्टिक आहार दिया जाता था, पर अब उनकी डाईट में ब्रेड, बिस्किट, मिठाई, खीर जैसे आईटम शामिल कर दिए गए हैं। ये पैक सामान एक तो पूरा बजट बिगाड़ रहा है वहीं नई समस्याएं भी खड़ी कर रहा है। अब कैदियों को यदि ब्रेड दी जाए तो उसके लिए बड़े मग भर चाय भी चाहिए। इस तरह की दिक्कतें बंदियों को नए झमेले में धकेल रहीं हैं।

    बंदियों को उनकी घरेलू समस्याओं की देखभाल करने के लिए जेलों में पे रोल का प्रावधान किया गया है। इससे जहां बंदियों को सामाजिक दायरों की अहमियत समझाई जाती है वहीं जेलों के संचालन के लिए मनोवैज्ञानिक सहारा भी मिल जाता है। पुलिसिया फंडों को लादने वाले जेल प्रशासन ने पे रोल को लगभग बंद कर दिया है। इससे बंदियों को नई मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है और प्रदेश भर की जेलों के बंदी भड़क रहे हैं।

    दंड प्रकिया में अपराधी को दोषी साबित करवाने वाले पुलिस के अफसरों को बंदियों का कथित संरक्षक बनाने पर तुली शिवराज सरकार को आंखें मूंदकर जेलों की सीमा रेखा लांघ रही है। जेलों में एसएएफ के साथ साथ विशेष दस्ते भी तैनात किए जा रहे हैं जिन्हें बंदियों की निगरानी की जवाबदारी सौंपी गई है। सूत्रों का कहना है कि ये ही वो दस्ता है जो राजनैतिक विरोधियों को जेलों में भेजकर उन्हें प्रताड़ित करने की जवाबदारी संभाल रहे हैं। भोपाल में इस दस्ते को सेना जैसी वर्दी दी गई है। जेलों के प्रहरियों और अफसरों को प्रशिक्षण देने का काम अरसे से बंद है। नतीजा ये है कि प्रहरी बेडोल हो रहे हैं और कई ने तो अपनी नौकरी के दौरान बंदूक की गोली भी नहीं चलाई है। इसके बावजूद जेलों में जो प्रक्रिया अपनाई जाती है उसके चलते बंदियों में विद्रोह के भाव नहीं पनपते हैं और वे अपनी सजा शराफत से पूरी करके एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं। पुलिसिया घुसपैठ ने वो समरसता का माहौल बिगाड़ दिया है। जेल ब्रेक कांड भी उसी कड़ी का नतीजा है।

    जेलों में संवाद का आलम ये है कि कथित तौर पर जेलों की व्यवस्था धराशायी करने और अवैध कमाई में जुटे रहे पूर्व डीजी सुशोभन बैनर्जी ने जेल विभाग की वेवसाईट ही बंद करा दी थी। आज यदि आप प्रदेश की किसी भी जेल की जानकारी या संपर्क तलाशना चाहें तो संभव नहीं है। जेल विभाग के प्रशासनिक प्रतिवेदन को तलाशना संभव नहीं है। यदि बंदियों के परिजन कोई संदेश पहुंचाना चाहें तो उन्हें वही पुरातनपंथी समय साध्य व्यवस्था को ढोना पड़ता है। जेल महकमे के पुलिसिया ढर्रे का आलम ये है कि भोपाल केन्द्रीय जेल की पुरानी वेवसाईट अब तक चल रही है जिसे कभी 2008 में पूर्व जेल अधीक्षक पीडी सोमकुंवर ने बनवाया था। आज सोमकुंवर स्वयं जेल में बंद हैं पर वेवसाईट पर उन्हें जेल अधीक्षक ही बताया जा रहा है।

    भाजपा को जमीनी विचारधारा देने वाले पं.दीन दयाल उपाध्याय ने समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान का संस्कार दिया था। लंबे समय तक भाजपा के नेता इसे अपनी गीता मानते रहे। आज भी भाजपा से जुड़े परिवारों में इसे ध्येय विचार माना जाता है। इसके बावजूद सत्ता की चाशनी चांटने के बाद सत्ता शीर्ष पर विराजमान भाजपाईयों में जो विकार घर कर गए हैं उनसे भाजपा की सत्ता धिक्कार के पथ पर अग्रसर हो चली है। आमतौर पर कबाड़खाने से किसी भी समाज की मानसिकता और उसकी स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जाहिर है समाज के सुधार गृह में बंदियों में सुधरने के बजाए यदि विद्रोह के संस्कार फैलने लगें तो सरकार के औचित्य की जरूरत ही क्या रह जाएगी।

  • कृषि को उद्योग बनाने की तैयारी-भाजपा

    कृषि को उद्योग बनाने की तैयारी-भाजपा

    सागर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक के दूसरे सत्र में संभागशः बैठकें आयोजित की गयी। तृतीय सत्र में कृषि प्रस्ताव पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री बंशीलाल गुर्जर ने प्रस्तुत किया। समर्थन किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री रणवीर सिंह रावत एवं पार्टी के प्रदेश मंत्री श्री बुद्धसेन पटेल ने किया।
    चौथे सत्र में नर्मदा सेवा यात्रा को लेकर पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री विष्णुदत्त शर्मा का उदबोधन, प्रशिक्षण वर्ग को लेकर प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री अरविन्द कवठेकर, जन्मशताब्दी विस्तारक वर्ग को लेकर प्रदेश मंत्री श्री पंकज जोशी एवं प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र 52 नगरपालिकाओं को लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रामेश्वर शर्मा ने विस्तार से प्रकाश डाला।
    कृषि प्रस्ताव इस प्रकार है –
    कृषि प्रस्ताव
    भाईयों और बहनों,
    सागर की पावन धरा पर आप सभी का स्वागत, अभिनन्दन। यह भूमि हमारी नैत्री राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्म स्थली हैं। आप सभी जानते हैं कि यह दानवीर डॉ. हरिसिहं गौर की जन्म स्थली हैं। उन्होने शिक्षा के लिये अपने आप को समर्पित किया तथा जीवन की सारी कमाई जनता को शिक्षित करने के लिये लगाकर सागर विश्व विद्यालय की स्थापना की। यह लाखा बंजारा की समर्पण स्थली हैं। सागर महान चिन्तक आचार्य रजनीश की चिन्तन स्थली हैं। प्रसिद्ध कवि पदमाकर की नगरी हैं।

    भाईयों और बहनों, जब देश 1947 में आजाद हुआ तब देश की जनसंख्या 33 करोड़ के लगभग थी। 75 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गांव में रहती थी। 75 प्रतिशत नागरिक खेती करते थे। देश की जी.डी.पी. में कृषि का योगदान 60 प्रतिशत था। आजादी के बाद किसानों को उम्मीद थी की अब हमारी सरकार बनी हैं। खेती के दिन अच्छे आयेंगे व देश की जी.डी.पी. में खेती का योगदान 75 प्रतिशत हो जायेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा तत्कालीन सरकारों ने देश के 75 प्रतिशत जनसंख्या के धंधे को अपने एजेण्डे में स्थान नहीं दिया,उन्होने खेती व किसानों की उपेक्षा की, परिणाम हमारे समाने हैं। देश की आजादी के 70 साल बाद भी गावों में 70 प्रतिशत जनसंख्या रहती हैं। 62 से 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित हैं। देश की जी.डी.पी. में कृशि का योगदान लगभग 14 प्रतिशत हैं। अब हम कल्पना कर सकते हैं की 65 प्रतिशत जनसंख्या 14 प्रतिशत में गुजारा करती हैं तो उनकी हालत क्या होगी।

    भाईयों और बहनों, खेती की दुर्दशा को जिस महापुरूश ने पहली बार पहचाना वो हैं हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मा. अटल बिहारी वाजपेयी जी। मा. अटल जी ने अपनी सरकार के एजेण्डे में कृशि व किसान को प्रमुख स्थान पर रखा पहली बार खेती में वित्तीय प्रवाह को तेज करते हुये किसान क्रेडिट कार्ड योजना व आपदा प्रबंधन के लिये फसल बीमा योजना प्रारंभ की। हमें खुशी हैं कि मा. अटल जी की इसी परम्परा को आगे बढाने में मा. नरेन्द्र मोदी जी की नेतृत्व वाली केन्द्र की एन.डी.ए. सरकार एवं मा. शिवराजसिंह जी चौहान के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश की भा.ज.पा. सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    भाईयों और बहनों, हम सब जानते हैं की म.प्र. की आय का प्रमुख साधन कृशि हैं। म.प्र. की कृशि एवं किसान वर्श 2003 से पूर्व असहाय थे। म.प्र. की गिनती अति पिछडे़ राज्यों में होती थी। राज्य की कृषि विकास दर राष्ट्रीय कृषि विकास दर से कम होती थी। 2003 में भा.ज.पा. सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री मा. शिवराजसिंह जी चौहान ने कृशि व किसान को सरकार के एजेण्डें में प्रमुख स्थान पर लिया। कृषि उत्पादन में सहयोगी तमाम योजनाओं पर सरकार ने तेज गति से काम किया, उसी का परिणाम हैं की आज म.प्र. की कृषि विकास दर 24.99 प्रतिशत तक पहुंची हैं।
    मित्रों कभी कृषि के लिये उद्योग के दर्जे की मांग की जाती रही हैं, वजह बहुत साफ हैं उद्योग में वित्तीय प्रवाह की निरंतरता (वित्तीय प्रबंधन) तथा आपदा प्रबंधन की व्यवस्था, विद्युत प्रदाय में प्राथमिकता। वित्तीय प्रवाह में ब्याज अनुदान नवीन उद्योगों को उत्पादन के आरंभिक वर्शो में विभिन्न करो से छुट आदि सुविधाएं दी जाती हैं। इसलिये किसान उद्योगों की सुविधाओं को देखकर कृशि के लिये उद्योग के दर्जे की मांग करते रहे हैं।

    भाईयों और बहनों, म.प्र. में मा. शिवराजसिंह जी चैहान के नेतृत्व वाली भा.ज.पा सरकार ने किसानों की खेती को उद्योग के दर्जे वाली भावना को समझते हुये उस पर काम करना आरंभ किया। सरकार ने उन प्राथमिकताओं को कृशि में अपनाया जो उद्योगों के प्रोत्साहन में अपनायी जाती हैं।
    वित्तीय प्रबंधन:-म.प्र. सरकार भा.ज.पा. की मा. शिवराजसिंह चैहान के नेतृत्व वाली सरकार ने कृशि में वित्तीय प्रबंधन में अभूतपूर्व काम किया हैं। कृशि में निजी निवेश के साथ-साथ शासकीय स्तर पर सहकारिता के माध्यम से ब्याज दरों को कम करते – करते अब जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर अब किसानों को कर्ज दिये जा रहे हैं। इस वर्श 15000 हजार करोड़ रूपये के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने का निर्णय म.प्र. सरकार ने लिया हैं। इससे कृशि में वित्तीय प्रवाह तेज हुआ तथा कृशि विकास का लक्ष्य प्राप्त करते हुये दलहन-तिलहन उत्पादन में देश में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। खाद्यान्न उत्पादन मे हम दुसरे स्थान पर हैं। दुग्ध उत्पादन में राश्ट्रीय वृद्धि दर 6.27 प्रतिशत हैं वही मध्यप्रदेश में वृद्धि दर 12.70 प्रतिशत रही हैं।

    निर्बाध विद्युत प्रदाय:-भा.ज.पा. सरकार से पहले कांग्रेस सरकार के समय खेती के लिये बिजली की स्थिति बहुत खराब थी। 4 घण्टे भी बिजली किसानों को नहीं मिल पा रही थी। आज म.प्र. के किसानों को निर्बाध 10 घण्टे बिजली कृशि कार्य के लिये दी जा रही हैं। निर्बाध बिजली मिलने से किसानों के काम करने का उत्साह बढ़ा हैं।

    हमारी म.प्र. सरकार ने कृशि विद्युत प्रवाह की निरंतरता के लिये 90 हजार से अधिक अस्थाई कनेक्शनों को स्थाई कनेक्शन करने के लिये 1100 सौ करोड़ से अधिक का अनुदान दिया हैं। कृशि के लिये उपयोग की जानी वाली बिजली बिलों को 2 तिहाई भुगतान म.प्र. सरकार द्वारा किया जा रहा हैं तथा सरकार ने किसानों को बिजली बिलों के भुगतान के लिये 3830 करोड़ रूपये को टेरिफ सब्सिडी के लिये बजट प्रावधान किया हैं। साथ ही 5 एच.पी. के कृशि पम्पों, थ्रेशरों तथा एक बत्ती विद्युत प्रदाय हेतु 2000 हजार करोड रू. का प्रावधान किया हैं। कृशि सिंचाई के लिये जहां आसानी से विद्युत आपूर्ति नहीं की जा सकती वहां सरकार द्वारा किसानों को सौर उर्जा के उपयोग के लिये अनुदान पर सोलर पम्प योजना लागु की जा रही हैं।

    हर खेत को पानी-हर हाथ को काम:- पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की संकल्पना हर खेत को पानी हर हाथ को काम को साकार करने के लिये भा.ज.पा नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने सिंचाई के लिये 6752 करोड़ रूपय, नर्मदा घाटी विकास के लिये 1212 करोड़ रूपये के बजट प्रावधान कर सिंचाई का रकबा 40 लाख हेक्टर तक पहुंचाकर हर हाथ को काम के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर तेजी से अपने कदम बढायें हैं।
    आपदा प्रबंधनः-म.प्र. देश का ऐसा राज्य हैं जहां कृशि में आपदा प्रबंधन में अग्रणीय भूमिका म.प्र. सरकार ने निभाई हैं। गत वर्श अतिवर्शा व अवर्शा के कारण फसलों की बर्बादी की आपदा प्रदेश में आयी। मा. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी चैहान ने आपदा के समय किसानों के बीच जाकर उन्हे भरोसा दिलाया की म.प्र. सरकार किसानों के साथ हैं। इसी भरोसे का परिणाम हैं कि किसान आपदा के समय भी मैदान में डटा रहा।
    मा. मुख्यमंत्री ने नुकसानी की परिस्थितियों को देखते हुये किसानों को 4700 करोड़ रूपये से अधिक का मुआवजा तत्काल वितरण कराया, साथ ही उन्हे भरोसा दिलाया की सरकार किसानों को फसल बीमा भी दिलायेंगी। मा. मुख्यमंत्री जी ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से 10 दिसम्बर को फसल बीमा राशि का वितरण किया व पूरे म.प्र. के लाखों किसान परिवारों को 4414 करोड़ रूपये से अधिक की फसल बीमा राशि वितरीत की गई। आज हम कह सकते हैं की म.प्र. आपदा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभा रहा हैं।

    बेहतर विपणन:-म.प्र. की भा.ज.पा सरकार उत्पादन में तो अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। साथ ही किसानों के उत्पाद की बेहतर बिक्री की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जा रही हैं। विमुद्रीकरण के बाद पूरे देश की मण्डियों में खरीदी-बिक्री बंद हो गई, उस समय मा. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जी चैहान ने आगे आते हुये किसानों की फसलों की खरीदी का भरोसा दिलाया, साथ ही किसानों की उपज धान सर्मथन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की। मण्डियों में अन्य फसलों की बिक्री का भुगतान निर्बाध गति से आर.टी.जी.एस., एन.एफ.टी. व चेक व्यवस्था से सुनिश्चित कर किसानों की कृशि उपज का बेहतर विपणन सुनिश्चित किया गया हैं। हम कह सकते हैं कि म.प्र. देश का पहला ऐसा राज्य हैं जहां विमुद्रीकरण के बाद सर्वप्रथम किसानों की फसलों की बिक्री प्रारंभ हुई व सभी राज्यों ने म.प्र. का अनुसरण किया हैं।

    भाईयों और बहनों, मा. नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने कृशि में क्रांतिकारी परिर्वतन लाने के लिये महत्वपूर्ण पहलें की हैं:-
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना:-
    · किसानों को प्राकृति आपदा किट व्याधि प्रकोप आदि के कारण फसलों में होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिये तथा कृषि के क्षैत्र में रिस्क मेनेजमेंट की व्यवस्था बनाने तथा वित्तिय सुदृढ़ता प्रदान करने किसानों को कृशि के माध्यम से सत्त आय प्राप्त हो तथा कृषि क्षैत्र में स्थायीत्व देने के लिये इस योजना को लाया गया हैं। इस वर्ष म.प्र. के लगभग 40 लाख किसानों ने इस योजना में भागीदारी की है।

    कृषि के लिये वित्तीय प्रबंधन:-हमारेयशस्वी प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी जी ने कृषि व किसानों को खेती के लिये बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिये अब तक का सार्वाधिक ऋण लक्ष्य 9 लाख करोड़ रूपये के बजट प्रावधान किये। साथ ही ब्याज अनुदान के लिये 15 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया हैं।केन्द्र सरकार ने कृशि बजट बढ़ाकर 35984 करोड़ रूपये किया गया हैं। साथ ही पानी को अपनी प्राथमिकता सूची में रखते हुये प्रधानमंत्री कृशि सिंचाई योजना को मिशन मोड पर लाते हुये इसके अधिन 28.5 लाख हेक्टेयर क्षैत्रफल को लाया गया हैं।

    · नाबार्ड में लगभग 20000 (बीस हजार करोड़) रूपये की प्रारंभिक निधि से एक समर्पित दीर्घावधिक सिंचाई निधि सृजित की गई जिससे सिंचाई योजनाओं का काम सत्त चलता रहे।
    · मनरेगा के तहत वर्शापोशित क्षेत्रों में 5 लाख फार्म तालाबों और कुओं तथा जैविक खाद के उत्पादन के लिये 10 लाख कम्पोस्ट गड्ढों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा हैं।
    · नीम कोटेड यूरिया वितरण व्यवस्था:- प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी जी ने यूरिया की कालाबाजारी रोकने तथा यूरिया का गैर कृषि उपयोग रोकने के लिये नीम कोटेड यूरिया किसानों को वितरण किये जाने का निर्णय किया, जिससे नीम कोटेड यूरिया की उच्च गुणवत्ता से उत्पादन बढ़ा तथा कालाबाजारी रूकी।

    राष्ट्रीय कृषि बाजार:- देश के कृषि विपणन को बेहतर बनाने के लिये राष्ट्रीय कृषि बाजार के साथ साझे ई-बाजार की व्यवस्था करने के लिये एकीकृत कृशि विपणन ई-प्लेटफार्म प्रारंभ किया गया। जिससे देश के किसानों को पूरे विश्व बाजार की जानकारी मिल सकेगी साथ ही विश्व बाजार के भाव भी किसान जान सकेंगे। बडे़ खरीददार भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़कर सीधे किसानों की कृषि उपज खरीदने का लाभ ले सकेंगे। बिचोलियों की भूमिका समाप्त होगी। किसान शोषण से छुटकारा पायेगा तथा किसानों को उनकी उपजों का अच्छा मूल्य प्राप्त हो सकेंगा। म.प्र. की 51 मण्डियां ई-नेम से जुड रही हैं। इससे कृशि विपणन और बेहतर होगा।
    विमुद्रीकरण एक सशक्त आर्थिक परिर्वतन:- मा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 8 नवम्बर 2016 को देश के इतिहास में एक सशक्त आर्थिक कदम उठाते हुये 1000 व 500 के नोट को बंद किया इसके अन्य फायदों के साथ-साथ आर्थिक जगत में भारतीय अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ होगी, उससे विकास तेजी से होगा। इसका लाभ किसानों को सर्वप्रथम देने के लिये मा. प्रधानमंत्री जी ने 31 दिसम्बर 2016 को देश को संबोधित करते हुये किसानों के लिये सशक्त पहलंे की हैं:-
    1. किसानों के कृशि ऋण पर 60 दिन का ब्याज भारत सरकार चुकायेगी। इस पहल से किसानों को लगभग 18 हजार करोड़ रूपये का लाभ होने का अनुमान हैं, जो किसानों के लिये बड़ी सौगात हैं।
    2. किसानों के 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड को रूपी कार्ड में बदला जायेगा।
    3. किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दिये जाने वाले कर्ज को दुगना करने के लिये 20 हजार करोड़ रूपये की अतिरिक्त व्यवस्था नाबार्ड के माध्यम से की जायेगी।
    भाईयों और बहनों, हमारी सरकारें सुगम वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से बेहतर जल प्रबंधन करते हुये उत्पादन बढाने के साथ-साथ उत्पादकता बढाने की व्यवस्थाएंकर रही हैं। साथ ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ मूल्य संर्वधित मूल्य दिलाने की भी सरकारें पहलें कर रही हैं। हम पूरा विश्वास करते हैं कि हमारी सरकारों की पहलों से 2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। इस प्रस्ताव के माध्यम से हम प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी जी, मुख्यमंत्री मा. शिवराजसिंह चौहान जी को धन्यवाद देते हैं।
    बहुत-बहुत धन्यवाद
    ’’ जय जवान – जय किसान – जय मध्यप्रदेश – भारत माता की जय ’’

  • बडे़ बाबा के दर्शन को पहुंचे स्वामी रवीन्द्र कीर्ति

    बडे़ बाबा के दर्शन को पहुंचे स्वामी रवीन्द्र कीर्ति


    कुण्डलपुरः- विश्व की सबसे ऊँची 108 फुट आदिनाथ भगवान की मांगीतुंगी में स्थापना कराने वाले जम्बूदीप के पीठाधीश स्वस्ति स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी ने कुण्डलपुर पहुँचकर बडे़ बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन किए उन्होने अर्ग समर्पित कर छत्र चढाया उनके साथ कुण्डलपुर कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई, विद्ववान डॉ.भगचंद भागेन्दु, तहसीलदार रूपेश सिंघई विमल लहरी, अभय बनगांव, नवीन निराल, श्रेयांस लहरी, मुकेश शाह, शैलेन्द्र मयूर, सुनील वेजीटेरियन, दीपचन्द्र जैन, नरेन्द्र बजाज, अजित खडेरी, चन्द्र कुमार जैन, साथ रहे । बडे़ बाबा के मंदिर का उन्होने सूक्षमता से अवलोकन किया। इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी की ओर से उनका सम्मान किया गया। उन्होने कहा कि शीघ्र निर्माण पूर्ण होने से देश की सम्पूर्ण जैन समाज को गौरव एवं प्रसन्नता होगी। मंदिर का निर्माण सून्दर एवं सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होने कहा कि सन् 2001 में महोत्सव के समय आया था तब से काफी परिवर्तन आ गया है। और मंदिर का निर्माण भी बहुत हो गया है, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आर्शीवाद प्राप्त है, इसीलिए यह कार्य शीघ्र पूर्ण होगा। मंदिर कमेटी को मेरी यह प्रेरणा है कि मंदिर निर्माण को प्राथमिकता के साथ समय सीमा में पूर्ण करने का प्रयास करें, उन्होने वर्द्यमान सागर के समीप शिखर मंदिरों के दर्शन किये।


    पीठाधीश स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी का हुआ भव्य अभिनंदन
    कुण्डलपुरः- विश्व की सबसे ऊँची 108 फुट आदिनाथ भगवान की मांगीतुंगी में स्थापना कराने वाले पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति जी के दमोह आगमन पर दिगम्बर जैन समाज के द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। वसुन्धरा नगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर के समीप स्थित विद्या चिन्मय संत भवन में स्वामी जी का समाज की ओर से अभिवंदना प्रशस्ति भेंट कर सम्मान किया गया।
    कार्यक्रम के आरंभ में मंगलाचरण के उपरान्त स्वामी जी ने बडे बाबा एवं छोटे बाबा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया।

    समाज के वरिष्ठ विद्ववान डॉ.भागचन्द्र भागेन्दु जी ने स्वामी जी एवं धर्मपीठोें का परिचय दिया, इसके पश्चात् दिगम्बर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई विमल लहरी,संतोष भारती, रूपेश सिंघई अभय बनगांव, अरविन्द्र इटोरया, सुभाष बमोरया, रूपचंद जैन, अजित जैन, सुनील वेजीटेरियन, दिलेश चौधरी, आनंद जैन ,महेन्द्र जैन आदि के साथ विभिन्न जैन मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने श्रीफल अर्पित कर स्वामी जी का आर्शीवाद प्राप्त किया।

    इस अवसर पर अपने उदगार् व्यक्त करते हुये। स्वामी जी ने कहा कि मै दमोह पहली वार आया हूँ और बुन्देलखण्ड के भक्तों से मिलने आया हूं, 15 वर्षो पूर्व कुण्डलपुर आया था, तथा वहां के नये मंदिर मॉडल का उद्घाटन करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मंदिर निर्माण कार्य को देखने की मेरी भावना थी, उन्होने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज 40वर्षो से बुन्देलखण्ड में है, मुझे यहां आकर ज्ञात हो गया है ं चूंकि बुन्देलखण्ड के भक्तों की त्याग और त्यागियों के प्रति, श्रद्धा और भक्ति असीम है, यही कारण है कि आचार्य श्री इस क्षेत्र को नही छोड पा रहे, आचार्य श्री और आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माता जी पूरे विश्व में धर्म की महति प्रभावना कर रहे है। पूज्य माता जी की पावन प्रेरणा से हमें विश्व की सबसे बडी प्रतिमा बनाने का सौभाग्य प्राप्त हो सका है जो कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है, आज समाज को संगठन की बहुत आवश्यकता है। इसलिए हमें अपने समाज के अस्तित्व को बनायें रखना होगा। हमें खानदान और खानपान को बचाने की आवश्यकता है, तथा युवा पीढी को बचाये रखने के लिये संस्कारित करना जरूरी है।

  • बाजारवाद ने बढ़ाई उपभोक्ता की चेतना

    बाजारवाद ने बढ़ाई उपभोक्ता की चेतना


    – भरतचन्द्र नायक
    इतिहास और परंपराओं में जीवन का सत्व छिपा होता है, यह सबक की चीज है। इसमें लोकनायक के नायकत्व का स्थान आचार, विचार, व्यवहार भविष्य के लिए सीख देता है। लेकिन जब लोकनायक का स्थान बाजारवाद महानायक का मुखौटा लगाकर ले लेता है तो सुधार, स्थिरता, परंपरा की प्रक्रिया स्थगित हो जाती है और हम महानायक के साथ कदम बढ़ाकर आत्ममुग्ध होकर बाजारवाद की गिरफ्त में आ जाते है। लोकनायक और महानायक की इस स्पर्धा में हमें महानायक भाता है। इसका फर्क समझने के लिए लोकनायक जयप्रकाश और महानायक अमिताभ बच्चन प्रतीक बन चुके है। दोनों परिवर्तन के संवाहक है। लेकिन चलन में आज महानायक है, जो उपभोक्ता वस्तुओं की छवि ढ़ो रहा है। चाहे फिल्मी अभिनेता होे, क्रीडागंन में खिलाड़ी हो, इनके नाम से उपभोक्ता ललचा जाता है और उपभोक्ता चाहे-अनचाहे उत्पाद अपनी झोली में भरता है, जेब खाली करता है। खाद्य पेय वस्तुओं के गुण-अवगुण का अनुसंधान करने के बजाय हम अपनी सेहत का सौदा कर रहे होते है। समाज में रोग व्याधि बढ़ने का आमंत्रण अनायास मिलता है।
    उपभोक्ता बाजारवाद की गिरफ्त में इस बात का भी विचार नहीं कर पा रहा है कि खाने-पीने की वस्तुएं तो सेहत को शिकार बना रही है, सौंदर्य प्रसाधन जो सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने के संसाधन बन चुके है, वे भी बीमारी को आमंत्रण दे रहे है। आॅनलाईन से जिस खरीद योजना की पूर्ति मिनटों में हो जाती है, उसमें यह जानने का भी वक्त नहीं है कि भोजन में मिलावट और प्रदूषक का कौन सा तत्व हमनें उदरस्थ करने का तामझाम जुटा लिया। मजे की बात यह है कि नववर्ष जैसे मांगलिक अवसर पर ही हम मिलावटी भोजन, पेय पदार्थों और प्रसाधन सौंदर्य के उत्पादों का सेवन कर प्रफुल्लित होने का स्वांग कर रहे होते है। सवेरे-सवेरे चाय की चुस्कियों का आनंद सभी लेते है, लेकिन वे अंजान है कि चाय कि पत्तियों के अर्क के साथ वे लौह कण भी निगल रहे है जो यदि परिमाण से अधिक हो गये तो उदर रोग होने की गारंटी देते है। पत्तियों को सूखाने के बाद चायपत्ती पर चलाने वाले रोलर से ये कण चाय में छूट जाते है, जो छन्नी द्वारा भी बाहर नहीं किये जा सकते। फलों को पकाने के लिए रसायन कार्बाईड कंपाउन्ड का इस्तेमाल प्रतिबंध के बाद भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। प्रतिबंधित केल्शियम कार्बाईड में जब रासायनिक क्रिया होती है तो ऐसे तत्व तैयार होते है जो कैंसर रोग के लिए जमीन तैयार करते है। इसी तरह फल, सब्जी की अच्छी ग्रोथ लेने के लिए लालच में आक्सीटोसिन का उपयोग किया जाता है। इस तरह उत्पादित फल, सब्जी खाने से हृदय रोग, सिर दर्द, बांझपन पनपने के साथ याददाश्त भी क्षीण हो जाती है। चांदी के बर्क को मिठाई की शान माना जाता है। आकर्षक शोकेस में सजी मिठाईयां देखकर मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन कोई नहीं जानता कि यह चांदी का बर्क पशु की आंत से बनी शीट पर रखकर कूटने के बाद बनता है। इस प्रक्रिया पर भी प्रतिबंध है, लेकिन प्रक्रिया रूकी नहीं है। दूसरी तरफ चांदी की जगह एल्युमीनियम का उपयोग करना हमारी वणिक बुद्धि में शुमार है। दूध तो भोजन में अमृत तुल्य है। लेकिन हमें नहीं मालूम कि इसमें क्या मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है। कहीं यूरिया तो कहीं चाक का इस्तेमाल कर दूध बनाया जाता है, जो केवल स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद ही नहीं होता अपितु संक्रमित होने से कई विकृतियों को जन्म देता है। लेकिन हम विज्ञापन पढ़ने के बाद उपयोग कर रहे दूध को कामधेनु उत्पाद मानकर मंुह मांगा दाम चुकाते और बीमारी खरीद रहे होते है।
    आर्गेनिक फूड एक सुरक्षित विकल्प होता है, लेकिन इस मंहगाई के दौर में आॅर्गेनिक फूड तक पहुंच पाना आम आदमी के लिए दिवा स्वप्न बन गया है। फिर हमारे हाट में शुद्धता, प्रामाणिकता मानव उपकार की वस्तु नहीं दाम बढ़ाने की पक्रिया में गिनी जाने लगी है। उपभोक्ता फोरम में कई मामले आते रहते है, लेकिन न तो इस प्रक्रिया में कहीं वास्तविक रोक लगी है और न ही इसके विरूद्ध कार्यवाही कोई निश्चित अंजाम तक पहंुची है। बाजारों में विज्ञापनों में महानायक की तकरीर को ही शुद्धता ओर स्वास्थ्य की कसौटी मानकर हम ठगे जाने को बेताब है। खाद्य पेय पदार्थों में खतरे जुटाना हमारी तरकीब बन चुकी है। इसी कारण अब भारत में कुपोषण सिर्फ गरीबों तक सीमित नहीं रहा है। भारत की गिनती दुनिया के सबसे कुपोषण ग्रस्त देशों में करने में हमने सारी शक्ति झौंक दी है। खेत-खलिहान से लेकर बाजार तक पहुंचानें में खाद्य पेय पदार्थों को प्रदूषित, मिलावटी बनानें में सहयोग करने का पूरा चक्र बन चुका है। मानव जीवन के साथ खिलवाड़ इस व्यापार में लगे लोगों का पुनीत कर्मकांड बन जाना वास्तव में राष्ट्रीय चेतना का मृत प्राय हो जाना है। इसमें कानून का लाचार होना, प्रवर्तन तंत्र का लालची होना और उपभोक्ता जागरूकता के अभाव में इस मिलीभगत के प्रति तदर्थवाद की प्रवृत्ति भी कम दोषी नहीं है। कभी-कभी और कहीं-कहीं जब ग्वाले की केन में से अतिरिक्त दूध खरीद लिया जाता है तो ग्वाला शरमाये बगैर ही उतना पानी उपभोक्ता के नल से भरकर अपनी केन में उड़ेल लेता है। उसे से तो बस कमाई से मतलब है। दूसरे के स्वास्थ्य का क्या होगा यह चेतना आजादी के बाद तो कमोवेश हमारी तासीर से जा चुकी है। कहने की बात तो यह है कि मिलावट की रोकथाम में सरकार की जिम्मेदारी है। उपभोक्ता मंच की भूमिका कम नहीं है, लेकिन जो कंपनियां प्रतिष्ठान है उनकी भी गंभीर जिम्मेदारी है। उपभोक्ता की सेहत का सौदा कर ये प्रतिष्ठान समाज में प्रतिष्ठा भी पाते है और दसवीर की सूची में अपना नाम दर्ज कराते है। अन्यथा क्या कारण है कि चंद दिनों में इनका एम्पायर खड़ा हो जाता है और राजनेता इनके इर्द-गिर्द मंडराने लगते है।
    मानव जीवन के प्रति संवेदना का घोर अभाव परिलक्षित हो रहा है। इससे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि मानक ब्यूरों भी खाद्य पदार्थों, उनके कंटेनरों और बोतलों में विषैले रसायनों के प्रति सचेत नहीं है। हमारा जीवन प्लास्टिक युग में प्रवेश तो कर गया है लेकिन प्लास्टिक की गुणवत्ता और प्रामाणिकता के बारें में मानक ब्यूरों, उपभोक्ता मंच और जनता बेपरवाही का सबूत दे रही है। भारतीय सादे मिजाज के होने के कारण खाद्य पेय, सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियों को उनके दायित्वों के प्रति विवश करने मंे अपने को समर्थ नहीं पाते। सिर्फ यह शिकायत करते है कि वे बीमारी से विकृति से ग्रस्त हो रहे है, जबकि उनका खान-पान स्तर का है। लेकिन वे इस बात को जानने की जेहमत नहीं उठाते कि पता लगाये कि उनके उपयोग में आ रहे उत्पाद शैम्पू, क्रीम, पाउडर, डियोडरेंट गुणवत्ता विहीन और नकली तो नहीं है। विज्ञापन बाजी देकर चकाचैंध में हम झूठी प्रतिष्ठा, झूठी शान में स्तरहीन, नकली उत्पादों का सेवन कर खुद रोग व्याधियों को निमंत्रण दे रहे है। उपभोक्ता मंचों की उपयोगिता पर यह एक प्रश्नचिन्ह है।

  • शिवराज की जेलों में चंदा उगाही का नारकीय आतंक

    शिवराज की जेलों में चंदा उगाही का नारकीय आतंक

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम). दुनिया भर में सुधारगृह कही जाने वाली जेलें शिवराज सिंह चौहान की सरकार के कार्यकाल में चंदा उगाही के नारकीय आतंक का घर बन गईं हैं। इस त्रासदी को भोगने वाले बताते हैं कि वे किसी डॉन की तुलना में जेल के वसूली जल्लादों से ज्यादा भयभीत रहते हैं। ये स्थिति इसलिए बनी है कि शिवराज सिंह सरकार का चंदा वसूली कोटा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी पूर्ति के लिए पुलिस विभाग के अफसरों ने जेल विभाग के अफसरों को किनारे बिठाकर वसूली की कमान अपने हाथों में ले ली है। गृह विभाग से प्रतिनियुक्ति पर जेल महकमें में भेजे गए पुलिस अफसरों ने अपने गुर्गों के हाथों में ये वसूली की कमान थमा दी है। उन्होंने जेल विभाग के अफसरों को तो पद पर बिठा रखा है पर वसूली का ठेका किसी डिप्टी जेलर, चक्कर अधिकारी जैसे कर्मचारी को थमा दिया है। खुद जेल महकमे के अफसर हताश हैं क्योंकि उनके महकमे में पुलिस का दखल बढ़ता जा रहा है। हालत ये है कि पुलिस के अफसर जेल मंत्री तक की बात नहीं सुनते। इसकी जगह गृहमंत्री यदि कुछ कहे तो वो आदेश तत्काल लागू हो जाता है। हालत ये है कि आपराधिक रिकार्ड वाले अफसरों को जेलों की कमान थमा दी गई है, जो अफसर चापलूसी में और नजराना पेश करने में हाजिरी नहीं देते उन्हें किनारे बिठा दिया जाता है।

    जस्टिस मुल्ला कमेटी की सिफारिशों में साफ कहा गया है कि जो व्यक्ति आपराधिक प्रकरणों की जांच करेगा वो अपराधी को दंडित नहीं कर सकता। इसीलिए ये जवाबदारी अदालतों को दी गई है। इसके बाद कैदी को जेल विभाग के निर्देशन में सुधार की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। जबकि पुलिस के बढ़ते दखल से राजनैतिक विरोधियों को निपटाने का रास्ता सुलभ बना दिया गया है। जेलों में बढ़ते पुलिस के दखल ने जेलों को सुधार गृह के बजाए प्रताड़ना घर बना दिया है जो किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरे का सबब कहा जा सकता है।

    भोपाल जेल ब्रेक कांड के बाद जारी हो रहे तुगलकी आदेशों ने भी जेल महकमे की दुर्दशा कर दी है। भोपाल केन्द्रीय जेल से सिमी के आतंकी जब मुठभेड़ में मारे गए तो वे मंहगे जूते पहने हुए थे। पुलिस विभाग के लालबुझक्कड़ी विवेचना कर्ताओं ने कहा कि जूते पहने होने के कारण वे आसानी भाग सके। इस पर कैदियों को जूते के बजाए चप्पल पहनने के आदेश जारी कर दिए गए। अब कड़ाके की ठंड में जब कैदियों के पैरों में बिवाई फट रहीं हैं और उनसे खून रिस रहा है तब भी जेल प्रशासन अपने उसी आदेश पर अटका हुआ है।

    मध्यप्रदेश की 39 जिला जेलों और 72 उपजेलों में इस समय सजा याफ्ता 17 हजार 58 कैदी बंद हैं, इसकी तुलना में 21 हजार 300 कैदी महज विचाराधीन का तमगा लिए बंद हैं। यही विचाराधीन कैदी जेल के जल्लाद नुमा वसूली अफसरों की कमाई का बड़ा स्रोत बने हुए हैं। जो विचाराधीन कैदी छोटे अपराध में बंद होता है और जिसे जल्दी जमानत मिलने उम्मीद होती है उससे वसूली का काम जल्दी से जल्दी निपटाया जाता है। कैदी की माली हालत की खबर लाने में वकील और अदालत में तैनात पुलिस विभाग के कर्मचारी बड़ी भूमिका निभाते हैं। जैसा कैदी हो उससे वसूली की इबारत भी उसी तरह लिखी जाती है। प्रदेश में एक भी महिला जेल नहीं है। जेलों में इन दिनों 603 सजायाफ्ता महिला कैदी बंद हैं। जबकि 718 विचाराधीन महिला कैदी भी हैं। ये दैहिक शोषण का साधन तो हैं ही साथ में इनसे वसूली भी की जाती है। अब चूंकि कानून की नजर में वे अपराधी हैं या उन्हें मालूम है कि उनसे अपराध हो गया है तो उनके शोषण का रास्ता आसान हो जाता है।

    जेल महकमे में प्रतिनियुक्ति पर आए महानिदेशक संजय चौधरी खुद भोपाल की केन्द्रीय जेल में आए दिन दौरा करते रहते हैं इसके बावजूद इस जेल में जो प्रताड़ना का तंत्र चल रहा है उन्हें वो नजर नहीं आता है। जेल ब्रेक कांड के बाद ब खंड से थोड़े दिनों के लिए चक्कर अधिकारी पद से हटा दिए गए अफसर को वसूली कांड का तजुर्बेकार माना जाता है। एक कैदी मुकेश उर्फ मुक्कू उनका इशारा अच्छी तरह समझता है। अफसर का इशारा मिलते ही मुक्कू जेल में नए नए आने वाले विचारधीन या सजायाफ्ता कैदी से भिड़ जाता है। पीट पीटकर उसकी ये हालत कर देता है कि नवांतुक डर के मारे कांपने लगता है। इसके बाद मुक्कू के सहयोगी कैदी को बता देते हैं कि यदि तुम्हें जेल में ठीक तरह रहना है तो अपने घर से रुपए बुलाकर चक्कर अधिकारी को दे दो। इस रकम का एक हिस्सा मुक्कू और उसके सहयोगियों को भी मिलता है।घर से पैसे बुलाने के लिए जो फोन दिया जाता है उसके एक काल का चार्ज पचास रुपए होता है। हर सुविधा की कीमत अलग है। यदि जेल में रहते हुए आराम फरमाना है तो डाक्टर साहब हैं न। ये सेटिंग कंपाऊंडर करता है। मात्र दस हजार रुपए में आपको सिक प्रमाण पत्र मिल जाएगा फिर आप बिस्तर पर आराम फरमाईए। ये सुविधा भी तब तक मिलेगी जब तक कोई बड़ा अधिकारी जांच करने नहीं आ जाता। यदि जांच हुई तो सौदा पूरा। अगली सिक के लिए नई फीस फिर देना होगी।

    चक्कर अधिकारी का जलवा इतना जोरदार है कि गत 13 दिसंबर को जब सभी लोग सदमें में थे तब एक जेलर ने कैदियों को चक्कर अधिकारी की तारीफ में सुनाया कि वे जेल में हर सुविधा मुहैया करा सकते हैं। बस पैसे देते जाओ तो फिल्मी हीरोईन भी आ जाएगी सेवा में। कैदियों को जेल में बिस्कुट, सिगरेट, गांजा, चरस, फोन जो भी सुविधा चाहिए आसानी से मिल जाती है। कैदियों से जो पैसा वसूला जाता है वो सभी के बीच बंटता है। आंखें मूंदे रखने के लिए जेलर या जेल अधीक्षक को भी निश्चित हिस्सा मिल जाता है। यदि जेल महकमे के आला अधिकारी ने टारगेट दे दिया है तो वो रकम भी कैदियों की पिटाई से जुटाई जाती है।
    मजदूरी भी कमाई का एक नायाब स्रोत है। कैदियों को मजदूरी के नाम पर पुताई का जिम्मा दिया जाता है। खेत से सब्जी उगाने और तरह तरह के कामकाज से उसे मजदूरी दी जाती है। पर ये मजदूरी कभी लगातार नहीं मिलती। जेल के रिकार्ड में पुताई का जितना रिकार्ड दर्ज किया जाता है यदि वास्तव में उतनी पुताई कर दी जाए तो जेल की दीवारों पर इंचो में नहीं फुटों में चूने की परत चढ़ जाए।

    शिवराज सिंह सरकार के बेटी बचाओ अभियान ने जेलों में बलात्कार के दोषी और विचाराधीन कैदियों की बाढ़ ला दी है। इसकी वजह है कि बलात्कार पीढ़िता तो सरकार की ओर से राहत राशि मुआवजे के रूप में दी जाती है। अक्सर मुआवजे की ये राशि भी महिला को पूरी नहीं मिल पाती । इसका भी बंटवारा हो जाता है, पर जेल को एक फोकट की कमाई का मुर्गा जरूर मिल जाता है। पहले अनुसूचित जाति प्रताड़ना में लोगों को जेल भेजा जाता था अब ये काम महिलाओं की मदद के नाम पर होने लगा है। जिसका फायदा जेलों में खूब लिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि उन्हें प्रेस से मिलने वाले फीडबैक की ज्यादा जरूरत नहीं होती वे तो रोज हजारों लोगों से मिलते हैं। उनकी जेलों में कैदियों को किस अमानवीय प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है ये बात कैदी उनसे बता नहीं सकते और उनके रिश्तेदार उनसे कह नहीं सकते क्योंकि उनके करीबी अभी अदालतों में सुनवाई के दौर से गुजर रहे हैं या फिर उन्हें अपराधी करार दिया जा चुका है। शिवराज सिंह को शायद नहीं पता कि पुलिस किस तरह बेकसूर लोगों पर फर्जी प्रकरण लादकर उन्हें जेलों में धकेलती है। अदालतों में घसीटती है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्होंने राजनीति को ढर्रे से बाहर निकालकर पटरी पर ला दिया है। उनके चापलूस मंत्री, अफसर, पत्रकार सभी इसी सुर में सुर मिलाकर उन्हें अहसास कराने की कोशिशों में जुटे हैं कि राज्य में सब अमन चैन चल रहा है। अब इसे राजा का भाग्य ही नहीं तो क्या कहेंगे कि कि उनकी पार्टी भाजपा और सहयोगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी सब कुछ ठीक ठाक ही नजर आ रहा है। हकीकत में तस्वीर इतनी उजली नहीं है।