दिमागी बीमारियों से बचना है तो पौष्टिक खाएं और पसीना बहाएं

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भोपाल । मेदांता अस्पताल गुड़गांव और मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल इंदौर के डाक्टरों का कहना है कि मिर्गी, दिमाग में खून का थक्का जमने से होने वाले लकवे और ब्रेन ट्यूमर जैसे रोगों से बचना है तो हमें पौष्टिक भोजन के साथ साथ भरपूर वर्जिश करके खुद को स्वस्थ रखना होगा। मध्यप्रदेश के गंभीर रोगियों के लिए मेदांता अस्पताल ने कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं जुटाईं हैं। प्रदेश के डाक्टरों को और आम नागरिकों को अब दिमागी बीमारियों के निदान के लिए इंदौर में ही ये सुविधाएं उपलब्ध होने लगीं हैं।
मध्यप्रदेश प्रेस क्लब की ओर से आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में आए न्यूरोलाजी के विशेषज्ञ डॉ.आत्माराम बंसल, डॉ.स्वाति चिंचुरे और डॉ.सुधीर दुबे ने दिमागी बीमारियों के संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए लोगों को भरोसा दिलाया कि दिमागी बीमारियों के उचित निदान के लिए अब लोगों को उचित मार्गदर्शन आसानी से मिलना संभव हो गया है।
डॉ.सुधीर दुबे ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को देखने, सुनने, बोलने, खाना गटकने में तकलीफ हो,हाथ पैर में तकलीफ हो, शरीर के किसी अंग में सुन्नपन होतो तो उसे तत्काल न्यूरो फिजिशियन से मार्गदर्शन लेना चाहिए।
डॉ. स्वाति चिंचुरे ने कहा कि दिमाग में खून का थक्का जमने, लकवा लगने की स्थिति में अब सिर की खोपड़ी को काटे बगैर तंत्रिकाओं का इलाज संभव है। पैर की या हाथ की नस से उपकरण मरीज के दिमाग में पहुंचाया जाता है और उससे तंत्रिकाओं की रुकावट दूर की जाती है। इससे डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का भी सफल इलाज संभव हो गया है।
डॉ. आत्माराम बंसल ने कहा कि दिमाग के किसी हिस्से में करंट बढ़ जाने से लोगों को मिर्गी आने लगती है। जिस मरीज को मिर्गी आ रही है उसके परिजनों को उसका वीडियो बना लेना चाहिए ताकि डाक्टर को उसका इलाज करने में आसानी हो सके। मेदांता अस्पताल में मरीज के दिमाग की स्केनिंग करके दिमाग के उस हिस्से का पता लगाया जाता है जहां से मिर्गी पैदा हो रही हो। इसके बाद यदि मरीज गंभीर स्थिति में हो तो उसके दिमाग का वो हिस्सा निकाल दिया जाता है। यदि बीमारी गंभीर नहीं है तो दवाईयों से भी मरीज का इलाज संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि अब आधुनिक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं से मिर्गी लाईलाज नहीं रही है।

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