Month: August 2016

  • फिर सदन में कौन बोलेगा

    फिर सदन में कौन बोलेगा

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    कड़वे प्रवचन सुनाने वाले संत तरुण सागर जी के विचारों से असहमति जताई जा सकती है। शायद ये समझ बूझकर ही तरुण सागर जी अपने विचारों को कड़वे प्रवचन कहते रहे हैं। देश भर में बुखार आने पर कहा जाता है कड़ुए भेषज पिए बिन मिटे न तन को ताप । जाहिर है वैचारिक बुखार को दूर करने के लिए कड़वे विचारों की ही औषधि असरकारी हो सकती है। यही सोच समझकर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने इसके लिए सदन का विशेष सत्र भी बुला डाला। यही नहीं राजदंड की ऊंचाई पर बिठाकर तरुण सागर जी से कड़वे प्रवचन भी करने का निवेदन कर डाला। इस गरिमापूर्ण फैसले के लिए हरियाणा की विधानसभा की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। इससे इतना तो साबित हो गया है कि खट्टर सरकार समस्याओं का समाधान करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

    तरुण सागर जी बरसों से अपने प्रवचनों में कहते रहे हैं कि दुनिया के सदनों में सबसे खतरनाक लोग बैठते हैं। वे कहते हैं कि यदि सत्ता के इन सिंहासनों पर बैठने वालों की गलती ये है कि उन्हें कोई बताता नहीं कि वे कैसे जनता के दिलों पर राज कर सकते हैं। सत्ता के मद में डूबे ये सत्ताधीश गरीब और कमजोर लोगों को कुचलने को ही शासन करना समझ बैठते हैं। अब इस विचार में क्या बुराई है। क्या हमारे राजनेता अपनी जिद पूरी करने के लिए जनता की नीतियों का मुंह अपने निजी खजाने के हित में नहीं मोड़ देते हैं। यदि ऐसा न होता तो आज आजादी के सत्तर सालों बाद तक हम देश के आम नागरिकों की मूलभूत जरूरतें तक क्यों नहीं मुहैया करा पाए हैं। चांद सूरज तक की दूरियां तय करने में सफल होने के बावजूद हम देश की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सुखी जीवन क्यों नहीं मुहैया करा पा रहे हैं। वे कौन सी बाधाएं हैं जो हमारे राजनेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को अपना कर्तव्य पूरा करने से रोकती हैं। क्या इन मुद्दों पर चिंतन नहीं होना चाहिए। पर ये करे कौन। सत्ता की सवारी करने वालों को तो बस अपनी सफलताओं का लक्ष्य दिखता है। फिर पिछड़ गए लाचार की बात कौन करेगा।

    सत्ता पर काबिज होने की होड़ इतनी खतरनाक है कि अच्छे से अच्छा राजनेता बुराईयों को देखने और उसे दूर करने की जुर्रत नहीं कर पाता है। वो तभी तक राजनेता है जब तक लोग उसे चुनते रहते हैं। जिस दिन उसे वोट मिलना बंद हुआ उसी दिन वो कचरे के डिब्बे में पहुंचा दिया जाता है। अब इन हालात में बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे। तरुण सागर जी बरसों से देश के गली कूंचों में घूम फिरकर बोलते रहे हैं कि यदि सत्ता के सर्वोच्च सदन सुधर जाएं तो देश के हालात बदले जा सकते हैं। सरकारों को उनकी ये आवाज बहुत पहले सुन लेनी चाहिए थी। इस आवाज को सत्ता का संदेश भी बना दिया जाना था। ये इसलिए न हो पाया क्योंकि देश की जनता कांग्रेस को आजादी दिलाने वाली पार्टी मानती रही है। वो कांग्रेस को ही सत्ता में भेजती रही। कांग्रेस की सरकारें अंग्रेजों की कृपा पर इतनी ज्यादा निर्भर रहीं हैं कि वे देश की आवाज को सदन के पटल तक पहुंचने ही नहीं देती थीं। ज्यादातर समय देश में एक पक्षीय शासन ही चलता रहा। सरकार को जनता के लिए जो नीतियां पसंद थीं वही लागू की जाती रहीं। सत्ता में जनता की भागीदारी उतनी ही रही जितने से लोकतंत्र की छवि बनी रहे। जनता बरसों से इस समस्या को समझती रही है।

    तरुण सागर जी जैसे कई संत बरसों से समाज की आवाज बोलते रहे हैं और समय के साथ विदा होते रहे हैं। तरुण सागर जी कोई पहले आदमी नहीं जिन्होंने सामाजिक समस्याओं के लिए सदनों तक पहुंचने वालो को जिम्मेदार बताया हो। शायद कांग्रेस की सरकारों में इस सच को स्वीकार करने का साहस ही नहीं रहा। निराशा का दौर झेलती रही देश की जनता ने बरसों बाद अंत्योदय की बात कहने वाली भाजपा को देश की बागडोर सौंपी है। इसी वजह से सत्ता के सिंहासनों पर जनता की आवाज सुनाई देने लगी है। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने लीक से हटकर देश विदेश में गूंजती एक आवाज को सत्ता की आवाज बनाने का साहसिक कारनामा कर दिखाया है। देश के राजनेताओं और जनता ने भी इस आवाज को सकारात्मक तौर पर लिया है। आखिर राजनेता भी तो जनता के बीच से ही आते हैं। वे भी जनता के दर्द को समझते हैं। उनकी मजबूरी ये होती है कि सत्ता को ताकत देने वालों का लालच उन्हें धकेलकर आगे कर देता है और उसकी आड़ में अपने गोरखधंधे भी खोल देता है। इसलिए हरियाणा सरकार ने सत्ता के पर्दे की आड़ में पलने वाले लालची लोगों को स्पष्ट संदेश दिया है।

    गौरव की बात ये है कि देश के किसी सत्ताधीश ने इस फैसले की बुराई नहीं की है। बुरा तो उन्हें लग रहा है जो सत्ता के नाम पर घोटालों का जंजाल फैलाए रहते हैं। थोड़ा थोड़ा दान और खुद का महाकल्याण जिनका सूत्र वाक्य होता है. वे भी तरुण सागर जी की बात को गलत तो नहीं ठहरा सकते इसलिए उन्होंने कहना शुरु कर दिया कि प्रवचन गलत स्थान पर हो गए। वो स्थान चुने हुए प्रतिनिधियों का है। इसलिए उस स्थान का अतिक्रमण नहीं किया जाना चाहिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली आप पार्टी के नेता विशाल दादलानी ने तो दिगंबर जैन संत पर ही मजाक छोड़ दिया। ये सभी वो लोग हैं जो सत्ता की आड़ में रबड़ी सूंतते रहे हैं।

    मध्यप्रदेश में दमोह तेंदूखेड़ा की माटी में पैदा हुए इस संत की प्रतिभा को मध्यप्रदेश सरकार पहले ही पहचान चुकी थी। इसलिए मध्यप्रदेश की विधानसभा में भी उनके प्रवचन कराए गए। इस बार उस आवाज को और बुलंद बनाने के लिए हरियाणा की सरकार ने जनता के अधिकृत मंच का उपयोग कर अपनी रचनाधर्मिता का परिचय दिया है। जो लोग कह रहे हैं कि तरुण सागर जी को जनता के दरबार का उपयोग नहीं करने देना था वे भूल जाते हैं कि ये पवित्र सदन जनता की आवाज को ही स्वर देने के लिए बनाए गए हैं। यही काम तो हरियाणा में हुआ। विरोध करने वाले क्या चाहते हैं कि नियमों, कानूनों और परंपराओं के बियाबान में जनता की आवाज को हमेशा कुचला जाता रहे। बच्चा बच्चा जानता है कि यदि राजनेताओं को मजबूर न किया जाए तो वे जनता के हितों की पैरवी जरूर कर सकते हैं। इसके बावजूद ताकतवर लोग जन प्रतिनिधियों को उनके लिए नियम कानून बनवाने में ही लगाए रखते हैं। विरोध की सुगबुगाहट लेकर रेंग रहे लोग तरुण सागर जी के उद्घाटित सच का विरोध करने की औकात तो रखते नहीं इसलिए वे उनके दिगंबर रूप और विधानसभा की परंपरा का तर्क देकर इस विचार को खारिज करने का षड़यंत्र कर रहे हैं। बेचारों को पता नहीं कि जनता की आवाज आंधी होती है जो राह में आने वाले दरख्तों, दीवारों को जमींदोज भी कर देती है।

  • पशु भूखे हैं भोजन बचाओःविद्यासागर जी

    पशु भूखे हैं भोजन बचाओःविद्यासागर जी

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    अनाज बचाओ ताकि मूक पशुओं को भी साफ भोजन मिलेःआचार्य विद्यासागर जी

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। विख्यात संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने कहा है कि देश में कृषि उत्पादों के संधारण की चाक चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आपात स्थितियों के लिए देश में इतना खाद्यान्न मौजूद होना चाहिए कि इंसान तो क्या जानवरों को भी साफ भोजन की कमी न हो। आचार्य श्री से भेंट करने पहुंचे कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन से उन्होंने कहा कि देश का विकास तेजी से हो रहा है पर कीटनाशक रहित साफ खाद्यान की कमी होती जा रही है। मूक पशुओं को पेट भरने के लिए कचरा खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार को बहुत सावधानी से व्यवस्था में सुधार की कमान संभालनी होगी।

    आचार्यश्री से भेंट के बाद चर्चा में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि खाद्यान्न के प्रसंस्करण और परिरक्षण के संदर्भ में ये बात सही है कि भंडारण की उचित व्यवस्था न होने के कारण हमारे खाद्यान्न का बहुत सारा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि हमने आचार्यश्री को आश्वस्त किया कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है। सरकार इसके लिए नए भंडारगृह बनाने और भंडारण की तकनीक के प्रशिक्षण पर भी खासा जोर दे रही है।

    श्री बिसेन ने बताया कि आचार्य श्री ने कृषि मंत्री के नाते उनसे कहा कि हम लोग अपने भोजन को तो साफ सुथरा रखने का प्रयास करते हैं पर पशुओं को कचरा खाने के लिए भी दर दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि वे सड़कों पर आए दिन पशुओं को भोजन के अभाव में भटकता देखते हैं । ये स्थिति गौ पालन से सुधारी जा सकती है। आखिर क्यों हमारे पशुधन को भोजन के लिए भटकना पड़े। यदि हम केवल भोजन की बर्बादी रोक सकें तो पशुओं को बगैर किसी अतिरिक्त खर्च के पेट भरने लायक भोजन दिया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि आचार्यश्री ने उन्हें गौवंश के पालन और उनके स्वास्थ्य की देखभाल से होने वाले सामाजिक फायदों के बारे में जन चेतना जगाने की सलाह दी। आचार्य़श्री का कहना था कि गौवंश की देखभाल सुधारने का माहौल बनाकर बड़ी हद तक कुपोषण से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पशुओं को पौष्टिक आहार मिलेगा तो समाज के लिए मिलने वाला पौष्टिक दूध बड़ी आबादी का कुपोषण स्वमेव दूर कर देगा। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी आबादी पौष्टिक भोजन से वंचित है। सरकार कृषि और पशुपालन की व्यवस्था सुधारने पर जोर देगी तो प्रदेश और देश की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में हम बहुत कम खर्च में ज्यादा उपलब्धियां हासिल कर सकेंगे।

    श्री बिसेन ने कहा कि आचार्य़श्री की भावनाओं पर गौर करते हुए हम जैविक खेती और खाद्य प्रसंस्करण के कार्यक्रमों को नई ऊर्जा से चलाने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि कृषि उत्पादों से किसान की माली हालत तो सुधरे ही साथ में उसकी मेहनत से उपजाया गया खाद्यान्न जरूरतमंदों के हाथों में पहुंचे। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री ने उनसे कहा कि हम तो अपने मिलने जुलने वालों से हमेशा कहते हैं कि जूठन के रूप में खाद्यान्न की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। यदि हम अपने बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं दिला पाएंगे तो हमारे देश की नई पीढ़ी वांछित सफलताएं कैसे अर्जित कर पाएगी। श्री बिसेन ने कहा कि मैं अपने भाषणों में आचार्यश्री के इस मार्गदर्शन का उल्लेख हमेशा करूंगा और लोगों से खाद्यान्न की बर्बादी रोकने की अपील करूंगा।

    कृषि मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि हालिया ओलंपिक खेलों में भारत के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखकर एक बार फिर पौष्टिक भोजन युवाओं तक पहुंचाने की ओर देश का ध्यान गया है। इसे देखते हुए सरकार ने जनता की जरूरत के मुताबिक खाद्यान्न पैदा करने का कैलेण्डर बनाया है। इसके अनुसार किसानों को उनके खेत की मिट्टी और मौसम के मुताबिक खाद्यान्न उत्पादन की सलाह दी जा रही है।

  • केंपा राशि से फिर लग सकेंगे जंगल

    केंपा राशि से फिर लग सकेंगे जंगल

    केंपा बिल पारित हो जाने से एक बार फिर जंगलों को नया जीवन देने का मार्ग सुलभ हो गया है।केन्द्रीय मंत्री अनिल दवे इसे क्रांतिकारी पहल बता रहे हैं।
    केंपा बिल पारित हो जाने से एक बार फिर जंगलों को नया जीवन देने का मार्ग सुलभ हो गया है।केन्द्रीय मंत्री अनिल दवे इसे क्रांतिकारी पहल बता रहे हैं।

    प्रतिपूरक वनीकरण निधि कानून की सामयिकता……
    भरतचन्द्र नायक…..
    वन संपत्ति प्रकृति का अनुपम उपहार है। वनों के क्षरण को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जाती रही है और विरोधाभास यह भी है कि इसके लिए वन प्र्रान्तर में रहने वाले उन आदिवासियों के सिर ठीकरा फोड़ा जाता रहा है, जो आदिकाल से वनों के न्यासी सिद्ध हुए है। संपत्ति की लालसा और प्रगति की चाह में हमनें आधारभूत मानवीय संस्कारों को तिलांजलि दे दी है। वन संपत्ति की अवधारणा को पूंजी में परिवर्तित कर लिया है। लेकिन आदिवासी, वनवासियों ने हमेशा निजी संपत्ति की उस धारणा को नकारा है जो सभ्य समाज कहे जाने वाले समुदाय का प्रिय शगल है। आदिकाल से वे जानते रहे है कि प्रकृति के शोषण की लालसा इंसान के लिए आपदा का आमंत्रण है। प्रकृति के साथ तादाम्य, मानवेत्तर प्राणियों के साथ सह अस्तित्व का जीवन जीना आदिवासी परंपरा का अटूट हिस्सा है। वैश्वीकरण ने निजी संपत्ति की धारणा को प्रबल किया, पूंजी का वर्चस्व बढ़ा। मानवीय, जीव-जगत, वन-संपदा के सरोकार तिरोहित हो गये, जिसनेे वन संपत्ति के दोहन के बजाय शोषण का मार्ग खोल दिया। वनों के अंधाधुंध शोषण से जहां प्राकृतिक संतुलन गड़बड़ा गया, वहीं वन्य प्राणी आश्रय की खोज में शहरों की आरे झांकने लगे, बाघ, मगर के बाद अजगर के कदम बसाहट की ओर बढ़ते देखे जा रहे है। वहीं आखेट करने वालों ने मौके का फायदा उठाकर वन्य प्राणियों का शिकार करना शौक और व्यवसाय बनाकर ‘कोढ़ में खाज’ पैदा कर दी।। देर आयत-दुरूस्त आयत, केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण को प्राथमिकता दी। राज्यों से इससे सरोकार जोड़ने के लिए पूर्व में निधि गठित की गयी थी, लेकिन इस निधि के परिचालन के लिए संवैधानिक व्यवस्था न होने से राज्यों से प्राप्त क्षतिपूर्ति वनीकरण की 40 हजार करोड़ रू. की राशि फिक्सड़ डिपाॅजिट में जमा रही। ब्याज तो बढ़ता गया लेकिन राज्य इस निधि से अंशदान के लिए तरसते रहे। मोटे तौर पर तय किया गया था कि एक हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वन के लिए उपयोग होने पर दो हेक्टेर में क्षतिपूर्ति वनीकरण किया जाये, जो सिर्फ औपचारिक तौर पर कागजों पर होता रहा।

    संसद के पावस सत्र की यह एक उपलब्धि कही जायेगी कि संसद ने दो ऐसे बिल सर्वोच्च प्राथमिकता से पारित कर दिये जिससे एक ओर आर्थिक क्रांति की आशा की जा सकती है। पहला वस्तु एवं सेवा कर विधेयक है एवं दूसरा प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक है, जो वनों के बारें में परंपरागत सोच के स्थान पर वैज्ञानिक आधार पर वनीकरण को देशव्यापी बनानें और वन्य जीवों को सहेजने, संवारनें में मील का पत्थर सिद्ध होगा। वनवासियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने आशा व्यक्त की है कि इससे देश को जलवायु परिवर्तन की तपिश से मुक्ति मिलने में सहायता मिलेगी। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भारत वैसे भी प्रयासवान अग्रणी मुल्क है, इस विधेयक के अमल में आने सेे ‘सोने में सुहागा’ होगा।
    प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक का सरोकार वन से संबद्ध सभी पक्षों की बेहतरी से होगा। वनों पर आश्रित समुदाय की आजीविका, वनों, चरागाहों, दलदली क्षेत्र समेत प्राकृतिक पारितंत्र के संरक्षण, सुरक्षा, पुर्नवास पर सुविचारित प्रणाली के तहत उपयोग में लायी जायेगी। यह भी एक वास्तविकता है कि दुनिया में वन आश्रित अर्थव्यवस्था भारत की पुरातन परंपरा है, बड़ी संख्या में आबादी वनों पर निर्भर है। वनों की उपयोगिता औद्योगिक प्रयोजन के अलावा, कार्बन को सोखने, बाढ़ की विभीषिका को रोकने, मिट्टी को सरंक्षित रखने, मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने के अलावा जलवायु के अनुकूलन के लिए भी है। हम वन को वृक्षों का समूह मानकर रह जाते है। लेकिन वन जीवित परितंत्र है जो जैव विविधता को आश्रय देते है और परिस्थितीय प्रतिकूल विकृति पर लगाम लगाता है। प्रतिपूरक वनीकरण निधि (सीएपी) विधेयक केंपा सभी सरोकारों को एक सूत्र में पिरोता है। इससे यह भी कहा जा सकता है कि इससे पंचायती राज व्यवस्था की भावना समृद्ध होगी। पंचायत की भूमिका और वर्चस्व पर आंच नहीं आयेगी। संसद में इस आशय की प्रतिबद्धता अनिल माधव दवे व्यक्त कर भी चुके है।

    ‘‘केंपा का दिलचस्प सफर’’

    प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक और इसके परिचालन के लिए अनिवार्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्राधिकरण केंपा के लिए पूर्व में सारे काम तदर्थवादी भावना से मनमाने ढंग से चल रहे थे। राज्यों में वनभूमि ली जाती, क्षतिपूर्ति राशि एक हेक्टेयर के बदले में दो हेक्टेयर वन विस्तार की योजना बनती, कागजी जमा खर्च होता रहता था। अस्सी के दशक में वनों के सिकुड़ने का अहसास होने पर वन पर्यावरण क्षेत्र में केन्द्र का वर्चस्व होने के लिए व्यवस्था की गयी। राज्यों की परियोजना बिजली घर, बांध, सड़क, बिजली लाईन ले जाने, कारखाना, खनिज उत्खनन, स्कूल जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता पर निर्णय लेने का अधिकार केन्द्र से निहित हो गया। 2008 में केन्द्र सरकार ने प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक तैयार किया। विधेयक लोकसभा में पारित हो गया, लेकिन राज्यसभा में बहस के लिए प्रस्तुत नहीं हो सका। इसी दरम्यिान लोकसभा विघठित हो गई। परिणाम स्वरूप विधेयक लेप्स हो गया। प्रतिपूरक निधि झमेले में पड़ गयी। तब लेखा महानिरीक्षक ने प्रतिपूरक निधि को शासकीय लेखा से परे जमा करने का सुझाव दिया। सर्वोच्च न्यायालय से तदर्थ केंपा के बारें में मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता महसूस की गयी, जिससे प्रतिपूरक वनीकरण राशि लोक लेखा का अंश बन सके। इसी परिप्रेक्ष्य में 2014 मंे वन पर्यावरण मंत्रालय ने केंपा की स्थायी रूप से शुरूआत की। केन्द्र और राज्यों में निधि संचालन के लिए प्रथक-प्रथक प्राधिकार स्थापित करने का खाका तैयार कर अंतिम निर्णय के लिए सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दिया। अभी तक सर्वोच्च न्यायालय से इस संबंध में सहमति अपेक्षित है। वनों की क्षतिपूर्ति और प्रतिपूर्ति वनीकरण निधि के उपयोग की त्वरा को देखते हुए केन्द्र सरकार ने लोकसभा में प्रतिपूरक वनीकरण निधि विधेयक-2015 लोकसभा में प्रस्तुत कर दिया। 13 मई 2015 को लोकसभा ने विधेयक विज्ञान-टेक्नोलाॅजी संसदीय स्थायी समिति के विचारार्थ भेज दिया। समिति की राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और इससे संबद्ध व्यक्तियों, संस्थाओं के साथ बैठकों का लंबा दौर चला। 26 अनुशंसाएं की गयी, जिनमें से 20 अनुशंसाएं मंजूर कर ली गयी। विधेयक में 49 संशोधन कर दिये गये। लोकसभा ने मई 2016 में विधेयक पारित कर दिया। 28 जुलाई 2016 को राज्यसभा ने भी विधेयक पर अपनी मोहर लगाते हुए तदर्थवाद से मुक्ति दिला दी। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अनिल माधव दवे ने राज्यसभा को विश्वास दिलाया है कि एक वर्ष बाद जनता की आपत्ति पर पुनः विचार किया जायेगा और नियमों का जन सुविधा की दृष्टि से पुनार्वलोकन किया जायेगा।

    केंपा बिल के पारित हो जाने के साथ जमा राशि 40 हजार करोड़ रू. और ब्याज की राशि करीब 2000 करोड़ रू. देश के प्रदेशों में प्रतिपूर्ति वनीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत उपयोग किये जायेंगे। इससे प्रत्यक्ष रोजगार की दृष्टि से 15 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजन होगा। दुनिया के वन क्षेत्र का 40 प्रतिशत वन क्षेत्र भारत के बिगड़े वन के रूप में मौजूद है। इसे हरि परिधानाच्छादित करने का बीड़ा उठाया जाना है। इससे वनवासी, पिछड़ी जाति बहुल वसाहटों मंे जहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे वहीं वन-पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता का ज्वार उठेगा। इमारती लकड़ी, काष्ठ, पशुचारा की उन्नत किस्में वनोपज के साथ विपुल क्रांति लायेगी जिससे इन क्षेत्रों में निवासियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। केंपा विधेयक के कानून के रूप में अमल में आते ही केन्द्र और राज्य स्तर पर स्थायी संस्थागत सरंचना तैयार होगी जो इस निधि के विधि और तर्क संगत उपयोग पर नजर रखेगी। यह निधि ऐसे खाते में जमा होगी जो लेप्स नहीं होगा, किन्तु ब्याज की निरंतरता बनी रहेगी। संसद और विधानसभा निगरानी के लिए सक्षम होगी। एक मानीटरिंग समूह भी गठित किया जायेगा। प्रतिपूरक वनीकरण निधि जो 40 हजार करोड़ प्लस 2000 करोड़ रू. ब्याज है में से 90 प्रतिशत राज्यों को और 10 प्रतिशत केन्द्र के हिस्से में आयेगी। इस दरम्यिान राज्यों में वनभूमि गैर-वन के उपयोग में ली जायेगी, उससे क्षतिपूर्ति राशि की उगाही गयी राशि राज्यवार लोक निधि मद में जमा की जायेगी। वन सरंक्षण कानून-1980 में वनभूमि गैर-वन के प्रयोजन के लिए दिये जाने की अनुमति के साथ यह शर्त रखी है कि इस क्षतिपूर्ति राशि के प्राप्त होने पर उसका उपयोग क्षतिपूर्ति वनीकरण, जलग्रहण क्षेत्र के उपचार, वन्य-जीव प्रबंधन और वन भूमि के प्रत्यावर्तन से उत्पन्न समस्याओं के समाधान पर किया जायेगा। अब इस दिशा में नियमों का कड़ाई से पालन होगा।

    केन्द्र सरकार ने पर्यावरण सरंक्षण कानून-1985 के तहत प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और नियोजन प्राधिकरण केंपा का गठन किया था, लेकिन व्यवस्था प्रभावशील नहीं हो सकी थी। नये परिप्रेक्ष्य में केंपा व्यवस्था को संवैधानिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और विश्व में जलवायु परिवर्तन के दौर की चुनौती से निपटने के जो उपाय विश्वव्यापी चल रहे है, उसमें भारत की अग्रणी भूमि तय करनें में यह व्यवस्था निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होगी।

  • गांधी को संघ ने नहीं माराः राहुल गांधी

    गांधी को संघ ने नहीं माराः राहुल गांधी

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    नई दिल्ली.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गरियाने के चक्कर में राहुल गांधी अपने ही बुने जाल में उलझ गए हैं। मानहानि के मुकदमे से बचने के चक्कर में वे अदालत के सामने अपने ही बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने संघ को कभी महात्मा गांधी की हत्या का दोषी नहीं बताया । राहुल गांधी की इस हरकत से एक बार फिर कांग्रेस को अपनी भद पिटवाना पड़ी है।

    गांधी की हत्या के लिए संघ को ज़िम्मेदार बताने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए मानहानि केस में राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक संगठन के तौर पर कभी जिम्मेदार नहीं बताया है.

    कांग्रेस उपाध्यक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मुंबई हाई कोर्ट के समक्ष दायर किए गए राहुल गांधी के हलफनामे का हवाला दिया. इस हलफनामे के मुताबिक राहुल ने RSS के कुछ लोगों पर गांधी की हत्या करने का आरोप लगाया था न कि संगठन को महात्मा का हत्यारा बताया था.

    इस मामले में अगली सुनवाई 1 सितंबर होगी. सिब्बल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गांधी ने आरएसएस संस्थान को गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया था, बल्कि सिर्फ जुड़े लोगों के लिए कहा था.

    राहुल की ओर से कहा गया कि जिस संघ कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, उसने उनके बयान की गलत व्याख्या की है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से इस संबंझ में अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए कहा है.

    पिछले महीने राहुल ने इस मुद्दे पर माफी मांगने से इंकार कर दिया था. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार भी लगाई थी.

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राहुल गांधी को एक संगठन की ‘सार्वजनिक रूप से निंदा’ नहीं करनी चाहिए थी और अगर उन्होंने खेद नहीं जताया तो उन्हें मानहानि मामले में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.

    न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन की पीठ ने राहुल के भाषण पर सवाल उठाए और आश्चर्य जताया था कि उन्होंने गलत ऐतिहासिक तथ्य का उद्धरण देकर भाषण क्यों दिया.

    गौरतलब है कि साल 2014 में महाराष्ट्र के ठाणे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि RSS के लोगों ने गांधी जी की हत्या कर दी थी और आज उनके लोग (बीजेपी) उनकी बात करते हैं.

    संघ की भिवंडी इकाई के सचिव राजेश कुंटे ने 2014 में गांधी की हत्या का आरोप कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाने के संबंध में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दाखिल किया गया था.

    कुंटे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सोनाले में 6 मार्च 2014 को एक चुनावी रैली में कहा था कि संघ ने गांधी जी की हत्या की. इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी. 2015 में गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ क्रिमिनल केस को खत्म करने की मांग की थी.

  • अदालतें बोलती रहें दही हांडी तो फूटेगी

    अदालतें बोलती रहें दही हांडी तो फूटेगी

    दही हांडी उत्सव तो जोर शोर से मनेगा.
    दही हांडी उत्सव तो जोर शोर से मनेगा.

    चल समारोह के बीच इक्कीस स्थानों पर फूटेगी दही हांडी

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। दही हांडी उत्सव पर सख्ती के मुंबई हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से भले ही इंकार कर दिया हो पर मध्यप्रदेश के गोविंदा इसके बावजूद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रहे हैं। राजधानी में हरिहर महोत्सव धार्मिक एवं सामाजिक संस्था समिति ने चल समारोह के साथ इक्कीस स्थानों पर दही हांडी फोड़ने का आयोजन किया है। इस तरह की कई अन्य संस्थाएं शहर भर में सैकड़ों स्थानों पर दही हांडी फोड़ने का आयोजन धूमधाम से कर रहीं हैं। दही हांडी उत्सवों में भाग लेने वाले गोविंदा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं,उनका कहना है कि हिंदु त्यौहारों को षड़यंत्र पूर्वक निशाना बनाया जा रहा है।

    हिंदू त्यौहारों की परंपराओं में नया रंग भरने में जुटे समाजसेवी प्रमोद नेमा का कहना है कि पिछले कुछ सालों से हिंदू त्यौहारों पर तरह तरह के सवाल उठाने और रोक लगाने की प्रवृत्तियां बढ़ती जा रहीं हैं। लोग इन मुद्दों पर अदालतों में वाद दायर कर देते हैं और अदालतें भारतीय समाज की पृष्ठभूमि पर गौर किए बगैर फतवानुमा फैसले जारी कर देती है। उन्होंने कहा कि दही हांडी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अठारह साल से कम उम्र के बच्चों को इस उत्सव में भाग न लेने दिया जाए। जबकि उमंगों और उत्साह से भरे माहौल में गोविंदाओं के उम्र के प्रमाणपत्र नहीं जांचे जा सकते। श्री नेमा ने कहा कि इस आयोजन में पूरा ध्यान रखा जाता है कि गोविंदाओं को चोट न लगे। इसलिए दही हांडी भी कम ऊंचाई पर ही लटकाई जाती है, इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट त्यौहार के अवसर पर रोक लगाकर लोगों को नाराजगी के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि दही हांडी का उत्सव युवाओं में जोश भरने वाला होता है। इसके लिए बच्चे और युवा अखाड़ों में कसरत करते हैं। सामूहिक भाईचारा पैदा करने वाले इस आयोजन को रोकना कतई उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालती फैसलों से हिंदुओं के प्रति नकारात्मक माहौल बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की पहल अदालतों को ही करनी होगी।

    श्री नेमा ने कहा कि भोपाल में दुर्गा उत्सव के समय झांकियों को ठंडा करने के लिए प्रेमपुरा घाट तय किया जा चुका है। वहां झांकियां विसर्जित करने से तालाब का पर्यावरण किसी भी तरह खराब नहीं होता है इसके बावजूद प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्तियां और उनके रंगों पर रोक लगाने की मुहिम चलाई जा रही है। जब उन मूर्तियों का विसर्जन तालाब में होना ही नहीं है तो फिर किस तरह पर्यावरण प्रभावित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम भी इसी शहर में रहते हैं और शहर का पर्यावरण न बिगड़े ये हम भी चाहते हैं। इसके बावजूद नेशनल ग्रीन टिब्यूनल जैसी संस्थाएं बेवजह हस्तक्षेप करती रहती हैं।

    आज आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजन के संयोजक डॉ.अतुल कौशल, संयोजक मनोज राठौर, और समिति के अध्यक्ष संजय सिसोदिया ने बताया कि शोभायात्रा का पूरा मार्ग मथुरा वृंदावन की तर्ज पर सजाया जाएगा। 25 अगस्त गुरुवार को श्री जी मंदिर लखेरापुरा तिलकोत्सव और आरती के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान 21 प्रमुख चौराहों पर ग्वाल टोलियां मटकी फोड़ने और मक्खन लूटने का अद्भुत प्रदर्शन करेंगी।

    शोभायात्रा में चार घोड़े वाले रथ में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन की झांकी, शंकर पार्वती का तांडव, नृत्य करती झांकी, भगवान विष्णु की झांकी, लड्डू गोपाल की पालकी, राधाकृष्ण मयूर झांकी के साथ ही धार्मिक कथाओं पर आधारित झांकियां आकर्षण का केन्द्र रहेंगी।

    भगवान श्री जी की शोभायात्रा में विभिन्न झांकियों के साथ उज्जैन, कुरावर, नरसिंहगढ़, और भोपाल की बैंड पार्टियों की धुनों पर गरबा करते कलाकार, बुरहानपुर की धमाल ढोल पार्टी और नाशा पार्टी, दुल दुल घोड़ी, डीजे के साथ इस्कान समूह के भक्तगण मंजीरे और मृदंग पर हरे रामा हरे कृष्णा के कीर्तन से भक्तिरस की गंगा बहाते हुए चलेंगे।

    शोभायात्रा में बुंदेलखंड सागर और मंडला जिलों के लोक व आदिवासी नृत्य की मंडलियों के साथ मुखौटा नृत्य, मोर नृत्य, राजस्थानी नृत्य, फायर डांस, गरबा नृत्य आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। शोभायात्रा मार्ग पर पड़ने वाले चौराहों पर दूध दही मक्खन से भरी मटकियां लगाई जाएंगी। जिन्हें बालकृष्ण और उनके सखा फोड़ते हुए चलेंगे। अनेकों स्थानों पर स्वागत द्वार बनाए जाएंगे। माताएं और बहनें भगवान श्री जी की पूजा अर्चना और पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत करेंगी।

  • जीएसटी एक क्रांतिकारी आर्थिक सुधार

    जीएसटी एक क्रांतिकारी आर्थिक सुधार

    bharatchandra nayak

    भरतचन्द्र नायक…..

    भारतीय संसद ने वस्तु एवं सेवा कर विधेयक (जीएसटी) पर अपनी मोहर लगाकर आर्थिक उदारीकरण के पश्चात् आजादी के बाद एक ऐतिहासिक आर्थिक सुधार किया है। यह वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था में विकासोन्मुखी बदलाव लाकर गेम चेंजर सिद्ध होगा, जिसे चलतू भाषा में पाशा पलटना कहते है। इससे ‘वन इंडिया-वन मार्केट’ की कल्पना साकार होने के साथ ही घरेलू उत्पादन पर आयात की जो मार पड़ रही है, उससे भी मुक्ति मिलेगी। आर्थिक विश्लेषक छोटी कारें महंगी और विलासितापूर्ण मंहगी कारें सस्ती होने का जो फार्मूला बता रहे है, वह एक अंकगणितीय तथ्य अवश्य है, लेकिन सरकार की मंशा आम आमदी की दैनंदिन जीवन से जुड़ी वस्तुएं जीएसटी की परिधि से बाहर रखने से जीएसटी आम आदमी को उपभोक्ता सामान मंहगा पड़ने में चेक एंड बेलेंस का काम करेगी। कारों की कीमत के बारें में तो सीधी बात है कि जीएसटी की दर यदि 16 से 18 के बीच स्थिर होती है तो सस्ती कार पर लगने वाला 8 से 10 प्रतिशत का टैक्स बढ़ जायेगा और बड़े वाहनों पर 20 से 22 प्रतिशत टैक्स 18 प्रतिशत पर स्थित हो जायेगा। लेकिन इससे चुनिंदा खरीददार ही प्रभावित होंगे। आम आदमी प्रभावित होने वाला नहीं है। उदाहरण के तौर पर पिछड़ेपन से ग्रसित राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश उपभोक्ता राज्य है, इनकी अर्थव्यवस्था पर इससे अनुकूल असर पड़ेगा। उपभोक्ता राज्यों में कर संग्रह अधिक होगा। क्योंकि मौजूदा हाल में उपभोक्ता राज्य 20 से 30 प्रतिशत कर चुकाते है, वह घटकर 16 से 18 जो भी निर्धारित होगा रह जायेगा। कर का परिमाण निर्धारित करके का काम जीएसटी परिषद करेगी। जीएसटी के प्रभावी होने पर कराधान प्रशासन की मुश्किले आसान होने के साथ प्रामाणिकता और गुणवत्ता में अनुकूल बदलाव आयेगां जीएसटी की दोहरी माॅनीटरिंग, राज्य और केन्द्र द्वारा किये जाने पर जो चिंता जतायी जा रही है, वह निर्मूल साबित होगी। अलबत्ता, राज्य और केन्द्र के बीच एक स्वस्थ स्पर्धा आरंभ होगी।

    जीएसटी दर निर्धारित करते समय राजस्व संग्रह, टैक्स प्रशासन के सरलीकरण, टैक्स वसूली में प्रोत्साहन और मुद्रा स्फीति में वृद्धि न हो इस बात ऐहतियात बरता जाना है, जिससे भारत में लगने वाला जीएसटी अन्य देशों की तुलना में भारी न होकर न्याय संगत हो। सामाजिक दृष्टिकोण एवं आमजन की उपयोगिता को देखते हुए जीएसटी कव्हरेज में वस्तुओं को लाया जाना चाहिए। जीएसटी से मुक्ति वाले आइटमों का निर्धारण निहित स्वार्थ के बजाय सामाजिक उपयोगिता के आधार पर अपेक्षित होगा तथा गरीबों की आवश्यक वस्तुएं दायरें में आने से बरकायी जायेंगी। जीएसटी विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में पारित किये जाने में भारी विलंब हुआ है, लेकिन ‘अंत भला तो सब भला’। यह भारतीय लोकतंत्र की विजय है। न तो पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को दोष दिया जाना चाहिए और न ही मौजूदा एनडीए सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। लेकिन इस विधेयक ने देश के राजनैतिक दलों को ‘सास भी कभी बहू थी’ की स्थिति से रूबरू जरूर करा दिया है। जो पहले विपक्ष में रहकर विरोध कर रहे थे, सत्ता में पहुंचनें के बाद जीएसटी के लाभ गिना रहे थे। जो प्रणव मुखर्जी और पी. चिदम्बरम पूर्व वित्त मंत्रियों की पेरोकारी पर मजाक उड़ा रहे थे, वे जीएसटी की प्रशस्ति करते दिखे और जो इसे ड्रीम सुधार बता रहे थे वही जीएसटी का मार्ग अवरूद्ध करते देखे गये। गोया देशहित में वक्त पर सुधार में सहमति की राय पर पार्टी हित भारी पड़ता जनता ने देखा और संसद के पावस सत्र में सहमति बनने पर वास्तविक प्रसन्नता व्यक्त की।

    मजे की बात यह है कि तमिल राजनीति जीएसटी के विरोध में थी। लेकिन उसने राष्ट्रहित में समर्थन देते हुए देखने के बजाय सदन से वाॅकआउट कर दिया, ‘सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी’। यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का एक नायाब सबूत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में जीएसटी विधेयक पारित होने पर सभी राजनैतिक दलों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए जो भरोसा सदन को दिया उसमें सबसे महत्वपूर्ण मंहगायी को 4 प्रतिशत पर स्थित करने का है, यह आम आदमी को प्रफुल्लित कर रहा है। जिस मंहगाई के सामने जाने-माने अर्थशास्त्री विश्व अर्थव्यवस्था की देन बता रहे थे उस पर काबू पाने में भारत की क्षमता वास्तव में सराहनीय मानी जायेगी। केन्द्रीय सरकार का दावा है कि आम आदमी, गरीब के इस्तेमाल की सभी वस्तुएं जीएसटी की परिधि में शामिल नहीं की जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी को ‘ग्रेट स्टेप टूवर्ड ट्रांसफार्मेशन, स्टेप टूवर्ड ट्रांसपरेंसी, गे्रट स्टेप वाई टीम इंडिया’ घोषित करके राजनैतिक सहमति, राजनैतिक दलों के बीच सहयोगी संघवाद, टीम इंडिया की भावना को महिमा मंडित किया है। उपभोक्ता को बादशाह बताते हुए मोदी ने यह भी कहा कि इससे छोटे उत्पादक लाभांवित होंगे और उपभोक्ता को पारदर्शिता की गारंटी मिलेगी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ भारत दुनिया के कारोबारियों का स्वर्ग बन जायेगा। जब देश में फाईव-एम (मेन, मटेरियल, मशीन, मनी और मेथड) का अधिकतम उपयोग होगा, तब देश में रोजगार के अवसरों का स्वमेव सृजन होगा। एकीकृत कर लगने से राज्यों की आय बढ़ेगी, जिससे विकास का चक्र तेजी से घूमेगा और गरीबी उन्मूलन का अभियान तीव्र गति से आगे बढ़ेगा। आज हम कर वसूली में ही सारा समय गंवा रहे है। मालवाहक वाहन तीसों दिन अधिकांश समय बेरियरों पर खड़े रहकर समय गंवाते है और उनकी गति अवरूद्ध रहने से देश को क्षति होती है। उससे मुक्ति मिलने के साथ जो मेनपाॅवर नाकों पर तैनात रहकर जुगाड़ में लगा रहता है, उसे दीगर उत्पादनशील कार्यों में जुटाया जा सकेगा।

    गरीबों के काम आने वाली औषधियों को जीएसटी से बाहर रखने का केन्द्र का इरादा जनोन्मुखी सोच उजागर करता है। जीएसटी संग्रह में टेक्नाॅलोजी का भरपूर उपयोग होने से कारोबार में शुचिता सुनिश्चित करनें में मदद मिलेगी। देश में एनडीए सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करके कर्मचारी-अधिकारियों की मुराद तो पूरी की है, अब उन्हें नयी कार्य संस्कृति का सबूत देना है। कामचोरी, भ्रष्टाचार देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। जीएसटी जहां कर संग्रह के रूप में देश को प्रचुर धनराशि सुनिश्चित करेगी वहीं नया दिशा बोध भी विकसित करने मंे सहायक होगा। आर्थिक विश्लेषकों का दावा है कि जीएसटी व्यवस्था के तहत जीएसटी का संग्रह आपूर्तिकर्ता उत्पादकों और सेवा प्रदाता द्वारा कर का भुगतान प्रारंभिक बिन्दु पर किया जायेगा। इससे कर संग्रह की लागत कम होगी। जीएसटी प्रभावी होने के बाद जिस राज्य में सामान बेचा जायेगा, उसी राज्य को टैक्स मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश जैसे उपभोक्ता राज्यों के पौ-बारह होंगे। मौजूदा अर्थव्यवस्था विकसित राज्यों के पक्ष में है। यह क्रम बदलेगा। गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिणी राज्य तमिलनाडू, कनार्टक जो औद्योगिक रूप से समृद्ध है, उन्हें होने वाला लाभ अब उपभोक्ता राज्यों को मिलने जा रहा है। उनकी तकदीर और तस्वीर बदलने जा रही है। असम राज्य ने संसद में विधेयक पारित होते ही विधानसभा में विधेयक पर मोहर लगा दी। मध्यप्रदेश ने भी 24 अगस्त को सदन का विशेष सत्र बुलाकर जीएसटी की उपयोगिता को रेखांकित कर दिया है। 30 दिन में कमोवेश 15 राज्य विधेयक पर मोहर लगा चुकेंगे। जिससे इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलना आसान हो जायेगा। जीएसटी लागू होने पर निर्मित वस्तुओं के दामों में कमी होगी। लेकिन कितना आर्थिक लाभ होगा यह समय ही बतायेगा। जीएसटी लागू होते ही कई लागू कानून रद्द हो जायेंगे। यदि परिस्थिति ने राज्य को अतिरिक्त कराधान के लिए विवश किया तो राज्य को इसके लिए जीएसटी कौंसिल की शरण लेना पड़ेगी, जिसका सृजन होना फिलहाल शेष है।

    एमआरपी लूट का जरिया न बनें

    जीएसटी से करों के मकड़जाल में उलझे उद्योगों को राहत मिलेगी। खाद्यान्न, दलहन, शक्कर शून्य दर में रहने से राहत, प्र्रसंस्कृत वस्तुएं मंहगायी का शिकार बन सकती है। दस लाख रू. से कम टर्नओवर दायरे से बाहर होगा। लेकिन जोर का झटका धीरे से कालेधन पर अवश्य लगेगा। सर्राफा में संगठित क्षेत्र सरसब्ज होगा। पुराने स्वर्णाभूषण पर इनपुट कम होगा। जिन 53-54 वस्तुओं पर जीएसटी छूट होगी, उनमें तीन दर्जन से अधिक वस्तुओं के मूल्य कम होंगे। सवाल मौजू है कि एमआरपी अब तक लूट का जरिया बना है, इसका ऐसा फार्मूला तय हो कि उपभोक्ता जान सकें कि इसमें कितना मूल्य कच्चे माल का, कितना मूल्य उत्पादन व्यय और कितना मुनाफा शामिल है। इससे जीएसटी सार्थक होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

  • एजेंट कांग्रेस क्यों समझे मोदी का दर्द

    एजेंट कांग्रेस क्यों समझे मोदी का दर्द

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    भारत की कांग्रेस गणराज्य के विभिन्न समूहों का महासंघ रही है।उसका किसी विचारधारा से कोई लेना देना कभी नहीं रहा। जो जहां से आ गया उसे उसके नेता समेत मंच पर जगह मिल गई। भारत की आजादी के विचार के लिए ये वक्त की जरूरत थी। यही वजह थी कि अंग्रेजों को अपना उत्तराधिकारी चुनने में आसानी हो गई। जब 1857 की क्रांति असफल हो गई तो अंग्रेजों को ये अहसास हो गया था कि स्थानीय लोगों को सत्ता में भागीदार बनाए बगैर वह इतने विशाल देश पर शासन नहीं कर सकते हैं। इसीलिए ए.ओ.ह्यूम ने तत्कालीन वायसराय लार्ड डफरिन की सलाह से 1884 ईस्वी में इंडियन नेशनल यूनियन की स्थापना की थी। डफरिन भी चाहता था कि भारत के राजनीतिज्ञ वर्ष में एक बार इकट्ठे हों और उनकी सुविधा और नाराजगी को ध्यान रखते हुए भारत का शासन चलाया जा सके।इस संगठन की स्थापना से पूर्व ह्यूम इंग्लैण्ड गये, जहां उन्होंने रिपन, डलहौजी जान व्राइट एवं स्लेग जैसे राजनीतिज्ञों से इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श किया। भारत आने से पहले ह्यूम ने इंग्लैण्ड में भारतीय समस्याओं के प्रति ब्रिटिश संसद के सदस्यों में रुचि पैदा करने के उद्देश्य से एक ‘भारत संसदीय समिति’ की स्थापना की। भारत आने पर ह्यूम ने ‘इण्डियन नेशनल यूनियन’ की एक बैठक मुम्बई में 25 दिसम्बर, 1885 को की, जहां पर व्यापक विचार विमर्श के बाद इण्डियन नेशनल युनियन का नाम बदलकर ‘इण्डियन नेशनल कांग्रेस’ या ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ रखा गया। यहीं पर इस संस्था ने जन्म लिया।

    लाला लाजपत राय ने अपनी पुस्तक ‘यंग इंडिया’ में लिखा है कि ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की स्थापना का मुख्य कारण यह था कि इसके संस्थापकों की उत्कंठा ब्रिटिश साम्राज्य को छिन्न-भिन्न होने से बचाने की थी। ह्यूम के जीवनीकार वेडरबर्न ने लिखा है है कि भारत में असन्तोष की बढ़ती हुई शक्तियों से बचने के लिए एक अभयदीप की आवश्यकता है और कांग्रेसी आन्दोलन से बढ़कर अभयदीप नामक दूसरी कोई चीज़ नहीं हो सकती। रजनीपाम दत्त ने अपनी पुस्तक इण्डिया टुडे में लिखा है कि ‘कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश सरकार की एक पूर्व नियोजित गुप्त योजना के अनुसार की गयी।” इस कांग्रेस में शामिल भारतीय नेता भी जानते थे कि ये अंग्रेजों की पिछलग्गू संस्था ही है। इसके बावजूद वे लहर पर सवार होने की कोशिश में कांग्रेस में शामिल रहे।

    जब आजादी के बाद इन नेताओं ने गांधीजी से अंग्रेजों के षड़यंत्रों के बारे में शिकायत की और कहा कि वे इसी कांग्रेस के नाम पर अपना छद्म शासन जारी रखना चाहते हैं तो गांधीजी ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि कांग्रेस अपना काम कर चुकी है अब उसका अवसान कर देना चाहिए। इसके बावजूद अंग्रेजों के एजेंट बनकर नेहरू ने कांग्रेस की सफलता पर अपनी सवारी नहीं छोड़ी। जाहिर है आज नेहरू के निधन के 52 सालों बाद उनके वंशज राहुल गांधी कैसे अपने पुरखों की गलती स्वीकार सकते हैं। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा कार्यालय की आधारशिला रखते वक्त कहा कि आजाद हिंदुस्तान में जितना संघर्ष भाजपा के कार्यकर्ताओं को करना पड़ा है उतना तो आजादी की लड़ाई में कांग्रेस के नेताओं को भी नहीं करना पड़ा था। मोदी के इस बयान पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचें वाले अंदाज में राहुल गांधी बोले कि मोदी को अज्ञानता से आजादी मिले। मरती कांग्रेस के वारिस से इसके अलावा क्या बोलने की उम्मीद की जा सकती थी।

    वहीं मोदी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा था कि आजादी के बाद उसके नेताओं की हर बात को गलत ठहराया गया। यही वजह है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को कठिन संघर्षों से जूझना पड़ा। अब जबकि देश को ये मालूम पड़ चुका है कि अंग्रेजों ने लार्ड माऊंटबेटन और नेहरू के सहयोग से जो ट्रांसफर आफ पावर एग्रीमेंट हस्ताक्षरित किया था उसने किस तरह अंग्रेजों को मुनाफे के धंधों में भागीदारी दिलाई। आज जब ब्रिटेन का पाऊंड 87.85 रुपए में आ रहा है तब इस षड़यंत्र को आसानी से समझा जा सकता है कि किस तरह ब्रिटेन ने आजाद हिंदुस्तान से भी अपनी आय जारी रखी है। यही वजह है कि भारत में ब्रिटेन की लाबी आज भी बड़े निर्णायक के तौर पर कार्य कर रही है। इस लाबी के एजेंट भारत के जमीनी राजनेताओं को धूल धूसरित करने में जुटे रहते हैं। वे उन नेताओं को चंदा दिलाते हैं। उन्हें गुमराह करते हैं और फिर उन्हें बदनाम कर उन्हें सत्ता की दौड़ से बाहर धकेल देते हैं।

    मोदी जी की बात सौ फीसदी सही है। भाजपा को आज के वैभव तक पहुंचाने के लिए इसके नेताओं को तरह तरह की यातनाएं झेलनी पड़ी हैं। प्रधानमंत्री खुद उसी प्रताड़ना तंत्र के बीच से तपकर आए हैं। वे जानते हैं कि जमीनी नेताओं को प्रताड़ित करने का ये अभियान आज भी जारी है। अब इसकी कमान भाजपा और संघ में घुसपैठ कर चुके कुछेक कार्यकर्ता संभाले हुए हैं। इसके बावजूद मोदी इससे मुकाबले का तंत्र विकसित करने में जुटे हुए हैं। ये संतोष की बात है कि देश की नई पीढ़ी ब्रितानी हुकूमत और उसके एजेंटों की हरकतों को समझ रही है। यही वजह है कि तमाम षड़यंत्रों और शिकायतों के बावजूद देश की जनता भाजपा की विकास यात्रा को जारी रखे हुए है। देश को बुलंदियों तक ले जाने में जुटे नेताओं को अपना नजरिया साफ रखना होगा। उन्हें कांग्रेस की पूंछ पकड़कर चलने वाली अपनी प्रवृत्ति पर विराम लगाना होगा। मोदी बेशक शेर की चाल से अपना मार्ग प्रशस्त करते चले जा रहे हैं पर देश के लोगों को भी अपनी भूमिका पर अमल करना होगा। भाजपा ने अपने भीतर छुपे अंग्रेजों के एजेंटों पर लगाम नहीं लगाई तो आज जो लोग भाजपा का बधियाकरण करने में जुटे हैं वे क्षेत्रीय दलों को उभारकर इस नए स्वाधीनता संग्राम को कुचलने में कामयाब हो जाएंगे।

  • रिलायंस पर ढाई हजार करोड़ का जुर्माना

    रिलायंस पर ढाई हजार करोड़ का जुर्माना

    जनता को झांसा देने वाली रिलायंस इंडस्ट्री पर ढाई हजार करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।
    जनता को झांसा देने वाली रिलायंस इंडस्ट्री पर ढाई हजार करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।

    एजेंसी नई दिल्ली 18 अगस्त।
    सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके भागीदारों पर कंपनी के पूर्वी अपतटीय क्षेत्र केजी-डी6 से लक्ष्य से कम गैस उत्पादन होने पर 38 करोड़ डॉलर (करीब 2,500 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही इस परियोजना क्षेत्र को विकसित करने पर कंपनी के कुल 2.76 अरब डॉलर का दावा नामंजूर किया जा चुका है। इसका अर्थ है कि कंपनी इस परियोजना के तेल-गैस की बिक्री में से अब इतनी राशि की वसूली नहीं कर सकती है। कंपनी अप्रैल 2010 से लगातार पांच वित्तीय वर्षों में उत्पादन लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई है।

    केजी-डी6 क्षेत्र के आवंटन के समय किए गए उत्पादन भागीदारी अनुबंध (पीएससी) में यह व्यवस्था है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी भागीदारी कंपनियां ब्रिटेन की बीपी पीएलसी और कनाडा की नीको रिसोर्सिज तेल-गैस की खोज पर आए पूंजी और परिचालन खर्च को गैस की बिक्री से प्राप्त राशि से पूरा कर सकते हैं। उसके बाद ही वह मुनाफे को सरकार के साथ बांटेंगे। कंपनी के खर्च के उपरोक्त दावे नामंजूर होने से खनिज तेल-गैस मुनाफे में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2013-14 तक क्षेत्र में 2.376 अरब डॉलर की लागत को नामंजूर किया गया था जिसके परिणामस्वरूप सरकार की क्षेत्र के पेट्रोलियम मुनाफे में भागीदारी 19.53 करोड़ डॉलर बढ़ गई। रिलायंस के केजी-डी6 के धीरूभाई एक और तीन से गैस का उत्पादन आठ करोड़ घनमीटर प्रतिदिन होना चाहिए था लेकिन 2011-12 में यह 3.35 करोड़ घनमीटर प्रतिदिन, 2012-13 में 2.09 करोड़ घनमीटर, 2013-14 में 97 लाख घनमीटर और उसके बाद 80 लाख घनमीटर प्रतिदिन के स्तर पर रहा।


  • क्रांतिकारियों सा जज्बा जगेः शिवराज सिंह

    क्रांतिकारियों सा जज्बा जगेः शिवराज सिंह

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    भोपाल :15 अगस्त ,

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के विकास के लिये वैसे ही जोश, जूनून और जज्बे़ की जरूरत है जैसा स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों ने दिखाया था। उन्होंने नागरिकों का आव्हान किया कि वे अपने दायित्‍वों का निर्वहन पूरी निष्‍ठा से करें और नये संकल्प के साथ मध्यप्रदेश के विकास में जुट जायें।

    स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए अपने संदेश में श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास और लोगों की तरक्की के समर्पित प्रयासों की यात्रा निरंतर जारी है। श्री चौहान ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को नमन किया। श्री चौहान ने आज राजधानी के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली।

    रोजगार केबिनेट बनाने की घोषणा

    श्री चौहान ने रोजगार की नई संभावनाएँ चिन्हित करने और पात्र लोगों को रोजगार पाने में मदद करने के लिये रोजगार केबिनेट बनाने की घोषणा की। इसके लिये अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतनभोगियों को स्थायी कर्मियों के रूप में लिया जायेगा ताकि उन्हें भी वेतनमान, वेतन वृद्धि और मंहगाई भत्ता आदि की सुविधाएँ मिलेंगी। साथ ही उनकी योग्यतानुसार अन्य विभागों में उनका समायोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कार्यभारित कर्मियों की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलेगा। शासकीय कर्मियों को सातवाँ वेतनमान दिया जायेगा। श्री चौहान ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाने की भी घोषणा की।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जन्म स्थली आजादनगर, अलीराजपुर से “याद करो कुर्बानी” कार्यक्रम के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल में शौर्य स्मारक एवं धावाबावड़ी, बड़वानी, में भीमा नायक स्मारक का शीघ्र लोकार्पण किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी लोकप्रिय वैश्विक नेता के रूप में उभरे हैं जिनके नेतृत्व में दुनियाभर में भारत की साख बढ़ी है।

    श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे समतामूलक समाज की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध है जिसमें बिना भेदभाव के सभी सभी को विकास का लाभ मिले। मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक विकास दर प्रचलित मूल्‍यों पर निरंतर दो अंकों में बनी हुई है।

    आनंद विभाग का गठन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश आनंद विभाग गठित करने वाला देश का पहला राज्य है। इसी के अंतर्गत राज्य आनंद संस्थान भी बनाया गया है। किसानों के हितों के संरक्षण के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि विगत वर्ष प्राकृतिक आपदा प्रभावित किसानों को 5000 करोड़ से अधिक की राहत राशि भी वितरित की गई। कृषि से जुड़े क्षेत्रों में किये गये प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में जहाँ देश में दुग्ध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 6.27 प्रतिशत थी, वहीं मध्यप्रदेश की वृद्धि दर 12.70 प्रतिशत रही है।

    बिजली में सरप्लस

    विगत 10 साल में सिंचाई क्षमता में वृद्धि की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई का रकबा 40 लाख हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने कहा कि बिजली के मामले में मध्यप्रदेश सरप्लस राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत उत्पादन क्षमता को वर्ष 2022 तक 22 हजार मेगावाट से अधिक किया जायेगा। वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार 169 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है। किसानों को विद्युत प्रदाय में विगत वर्ष लगभग सात हजार करोड़ की सब्‍सिडी दी गई। नवकरणीय ऊर्जा की क्षमता 3 हजार 176 मेगावाट हो गई है।

    ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र बताते हुए श्री चौहान ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक 5 लाख 40 हजार ग्रामीण शौचालयों का निर्माण किया गया, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायतों के चुनावों में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के आवास परिसर में शौचालय होना अनिवार्य किया गया है। आगामी तीन साल में सभी गाँव बारहमासी सड़कों से जुड़ जायेंगे।

    पर्यावरण विभाग का गठन

    वन सम्पदा समृ‍द्धि की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कान्हा टाइगर रिजर्व तथा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को पुरस्कृत किया गया। पहली बार तेन्दू पत्ता संग्राहकों को ई-पेमेंट से भुगतान किया गया है। प्रभावी रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिये पर्यावरण विभाग का गठन किया गया है।

    मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में एक करोड़ 16 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है। शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को शहर की किसी भी उचित मूल्य दुकान से सामग्री लेने की सुविधा भोपाल, इन्दौर एवं खण्डवा शहर में लागू कर दी गई है।

    श्री चौहान ने नगरों के सुनियोजित विकास के संबंध में कहा कि स्मार्ट सिटी योजना में भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर शहर में कम्पनी का गठन हो गया है। उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ के सफल आयोजन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मानवता के नाम 51 -सूत्रीय सार्वभौम अमृत संदेश जारी किया गया। उन्होंने सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिये सभी को बधाई दी और कहा कि ऐसा आयोजन कहीं नहीं हुआ।

    2000 नये उप-स्वास्थ्य केन्द्र

    “स्वस्थ मध्यप्रदेश” की अवधारणा को साकार करने का संकल्प दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि 11 नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना हो रही है । स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 2000 नये उप स्वास्थ्य केन्द्रों को मंजूरी दी गई है।

    लाडो अभियान से 82 हजार से अधिक बाल विवाह रोके गये। लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ 23 लाख बालिकाओं को मिल चुका है। कक्षा छटवीं में आने पर 17 हजार लाड़लियों को 2000 रुपए की छात्रवृत्ति दी जा रही है। स्कूली शिक्षा सुविधा विस्तार के प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यापक संवर्ग को एक जनवरी 2016 से छठवाँ वेतनमान स्वीकृत किया गया है।

    सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिये विभाग

    उद्योग क्षेत्र की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि वर्ष 2014 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक ढाई लाख करोड़ का निवेश हुआ है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये अलग विभाग का गठन किया गया है।

    मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार और मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में गत वर्ष 72 हजार हितग्राहियों को लाभ दिया गया। लगभग 48 हजार सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यमों में पाँच हजार करोड़ रुपये का पूँजी निवेश और करीब दो लाख लोगों को रोजगार मिला है।

    अनुसूचित जाति – जनजाति के विकास के लिये प्रतिबद्ध

    अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विकास के लिये संकल्प दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि आदिवासी विकासखण्ड में सामुदायिक विकास प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाओं में लगभग 5500 युवाओं को लाभ मिला। राज्य सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के सर्वांगीण विकास और संवैधानिक हितों के संरक्षण के लिये कटिबद्ध है। सामाजिक न्याय की दिशा में प्रयासों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना में अब तक कुल 3 लाख 68 हजार 431 जोड़ों और निकाह योजना में 8 हजार 353 जोड़ों का विवाह हुआ है।

    राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश को पाँच पर्यटन पुरस्कार मिलने की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि पिछले वर्षों में प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिये सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में निरंतर सुधार के पुलिस बल में 6250 नवीन पद की स्वीकृति दी गई है। सभी थानों का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो गया है।

    भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का कानून

    किसानों की आय दोगुनी करने के लिए रोड-मेप तैयार कर लिया गया है। इस वर्ष सहकारिता के क्षेत्र में 15 हजार करोड़ का ऋण वितरण किया जायेगा। मुख्यमंत्री कृषक सहकारी ऋण सहायता योजना में किसानों को वस्तु ऋण के लिये 370 करोड़ का अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।

    प्रदेश में बटाई पर जमीन देने तथा लेने वाले दोनों के हित संरक्षण के लिए “मध्यप्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण बिल-2016” बनाया गया है। इस कानून में भूमि-स्वामी अनुबंध के द्वारा अपनी भूमि दे सकेगा। भूमि पर स्वामित्व भू-स्वामी का ही रहेगा। इससे कृषि भूमि का रकबा तथा उत्‍पादन बढ़ेगा और जिससे बटाईदार और भू-स्वामी दोनों को लाभ होगा।

    उद्यानिकी को बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश के प्रमाणीकृत जैविक खेती का 32 प्रतिशत क्षेत्रफल मध्यप्रदेश में है । इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जायेगा। उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिये लगभग 600 क्लस्टर विकसित किये जायेंगे। आगामी एक साल में 50 हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलें ली जायेंगी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जायेगी। प्याज के बेहतर भण्डारण की व्यवस्था के लिये अगले दो साल में पाँच लाख मीट्रिक टन प्याज भण्डारण की क्षमता विकसित की जायेगी। किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार ने जो प्याज खरीदा है उसे गरीबों में बाँटा जायेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक योजना का काम जारी है। इससे 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। नर्मदा घाटी की सिंचाई परियोजनाओं से अगले वर्ष पाँच लाख 50 हजार हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जायेगा।

    “नमामि देवि नर्मदे’’ यात्रा नवंबर में

    “हरियाली चुनरी योजना” में नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण एवं जलग्रहण क्षेत्र उपचार किया जा रहा है। माँ नर्मदा के जल को शुद्ध बनाये रखने में आमजन की सहभागिता के साथ “नमामि देवि नर्मदे” यात्रा नवम्बर में प्रारम्भ की जाएगी। नर्मदा नदी के दोनों तटों से एक-एक किलोमीटर चौड़ाई में एक वर्ष में 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फल-पौध रोपण किया जायेगा।

    मध्यप्रदेश दीनदयाल अन्त्योदय राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में गाँवों में रहने वाली 16 लाख 46 हजार निर्धन महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का नया इतिहास लिख रही हैं। हर परिवार को भूखण्‍ड एवं आवास देने के लिये आवासीय भूखण्ड का पट्टा देने का अभियान चलाया गया है। वर्ष 2022 तक कोई भी नागरिक आवासहीन नहीं रहेगा।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में प्रदेश की एक तिहाई राशन दुकानें यथासंभव महिलाओं की संस्थाओं को आवंटित की जायेंगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक दुकान खोली जायेगी। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में गरीब महिलाओं को वर्ष के अंत तक 20 लाख नवीन गैस कनेक्शन दिये जायेंगे।

    श्री चौहान ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के दूसरे चरण के लिये ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं सतना शहरों के प्रस्ताव भेजे गये हैं। राज्य सरकार अपने साधनों से अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी का रूप देने की योजना बन रही है।

    स्वास्थ्य संवाद केन्द्रों की स्थापना

    स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बढ़ाने के लिये सभी जिला चिकित्सालयों में आज से “स्वास्थ्य संवाद केन्द्र” की स्थापना की जा रही है। जबलपुर में स्टेट केंसर इंस्टीट्यूट एवं ग्वालियर में केंसर केयर सेंटर की स्थापना की जा रही है। चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 2000 बिस्तर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिये करीब 436 करोड़ की स्‍वीकृति दी गयी है। ई-रक्त कोष का एकीकृत साफ्टवेयर शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिये 4305 नवीन आँगनवाड़ी केन्द्र और 600 मिनी आँगनवाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे।

    नैतिक शिक्षा और योग पाठ्यक्रम में शामिल

    श्री चौहान ने कहा कि नैतिक शिक्षा और योग को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का फैसला लिया है। पाठ्यक्रमों में समय और आज की जरूरतों के अनुसार सुधार कर रोजगारोन्मुखी बनाया जायेगा।

    मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सहायता योजना का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक कारणों से योग्य विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं रहें इसलिये मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सहायता योजना प्रारम्भ की जायेगी। इसके लिये 1000 करोड़ तक का फण्ड बनाया जायेगा।

    शासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्मार्टफोन प्रदाय किया जाना प्रारंभ हो गया है। इस साल साढ़े तीन लाख छात्रों को स्‍मार्टफोन दिये जायेंगे। शहडोल में पंडित एस.एन. शुक्ला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।

    नौ नये उद्योग क्षेत्रों की स्थापना

    औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की प्राथमिकता रेखांकित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि इस वर्ष 22-23 अक्टूबर को इन्दौर में “ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2016” किया जा रहा है। वर्ष 2020 तक 2600 हेक्टेयर भूमि पर 2000 करोड़ की लागत से नौ नवीन औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जायेगी। अब तक ढाई लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश प्रदेश में आ चुका है।

    शिक्षा को और अधिक गुणवत्तायुक्त बनाने हेतु संविदा शाला शिक्षकों के लगभग 20 हजार पद भरे जाएंगे। ज्ञानोदय विद्यालय की सीट संख्या बढ़ाकर 6 हजार 400 की जा रही है। इन्‍दौर, जबलपुर और भोपाल में 720 सीटर आवासीय उत्‍कृष्‍ट विद्यालय ”गुरूकुलम्” प्रारंभ किए जाएंगे।

    सायबर अपराधों के निराकरण के लिए विशेष न्यायालय

    कानून-व्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना-प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। आगामी एक वर्ष में डायल-100 योजना में 200 वाहन और बढ़ाये जायेंगे। पचास नये शहरों में सी.सी.टी.वी. आधारित सुरक्षा एवं निगरानी प्रणाली स्थापित की जायेगी। सायबर और उच्च तकनीकी अपराधों के निराकरण के लिए जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में विशेष न्यायालयों का गठन किया जायेगा।

  • भारत बुलंद बनेगाःप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    भारत बुलंद बनेगाःप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेद्रमोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा दुनिया मानवता की संस्कृति और आतंकवाद में फर्क को महसूस करे।
    प्रधानमंत्री नरेद्रमोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा दुनिया मानवता की संस्कृति और आतंकवाद में फर्क को महसूस करे।

    स्वतंत्रता दिवस 2016 के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

    मेरे प्‍यारे देशवासियों,

    आजादी के इस पावन पर्व पर सवा सौ करोड़ देशवासियों को, विश्‍व में फैले हुए सभी भारतीयों को लाल किले की प्राचीर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

    आजादी का यह पर्व, 70वां वर्ष एक नया संकल्‍प, नई उमंग, नई ऊर्जा, राष्‍ट्र को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का संकल्‍प पर्व है। आज हम जो आजादी की सांस ले रहे हैं, उसके पीछे लक्ष्याव्धि महापुरूषों का बलिदान है, त्‍याग और तपस्‍या की गाथा है। जवानी में फांसी के फंदे को चूमने वाले वीरों की याद आती है। महात्‍मा गांधी, सरदार पटेल, पंडित नेहरू अनगिनत महापुरूष, जिन्‍होंने देश की आजादी के लिए अविरत संघर्ष किया और उसी का नतीजा है कि आज हमें स्‍वराज में आजादी की सांस लेने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है।

    भारत एक चिर पुरातन राष्‍ट्र है। हजारों साल का इतिहास है, हजारों साल की सांस्‍कृतिक विरासत है। वेद से विवेकानंद तक, उपनिषद् से उपग्रह तक, सुदर्शन चक्रधारी मोहन से ले करके चरखाधारी मोहन तक, महाभारत के भीम से ले करके भीमराव तक, एक हमारी लम्‍बी इतिहास की यात्रा है, विरासत है। अनेक उतार-चढ़ाव इस धरती ने देखें हैं। अनेक पीढि़यों ने संघर्ष किया है। अनेक पीढि़यों ने मानवजाति को महामूल्‍य देने के लिए तपस्‍याएं की है।

    भारत की उम्र 70 साल नहीं है, लेकिन गुलामी के कालखंड के बाद हमने जो आजादी पाई, एक नई व्‍यवस्‍था के तहत हमने देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। यह यात्रा 70 साल की है। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल ने देश को एक किया, अब हम सबका दायित्‍व है देश को श्रेष्‍ठ बनाए। एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत का सपना पूरा करने का हम लोगों को निरंतर प्रयास करना चाहिए।

    भाइयों-बहनों स्‍वराज ऐसे नहीं मिला है। जुल्‍म बेशुमार थे, लेकिन संकल्‍प अडिग थे। हर हिंदुस्‍तानी आजादी के आंदोलन का सिपाही था। हरेक का जज्‍बा था, देश आजाद हो। हो सकता है हर किसी को बलिदान का सौभाग्‍य न मिला हो, हो सकता है हर किसी को जेल जाने का सौभाग्‍य न मिला हो, लेकिन हर हिंदुस्‍तानी संकल्‍पबद्ध था। महात्‍मा जी का नेतृत्‍व था, सशस्त्र क्रान्तिकारियों के बलिदान की प्रेरणा थी और तब जाकर के स्वराज प्राप्त हुआ है। लेकिन अब स्वराज्य (Self-Governance) को सुराज (Good-Governance) में बदलना, ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प है। अगर स्वराज बलिदान के बिना नहीं मिला है, तो सुराज भी त्याग के बिना, पुरुषार्थ के बिना, पराक्रम के बिना, समर्पण के बिना, अनुशासन के बिना संभव नहीं होता है और इसलिए सवा सौ करोड़ देशवासियों के सुराज (Good-Governance) के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए अपनी-अपनी विशेष जिम्मवारियों की ओर प्रतिबद्धता से आगे बढ़ना होगा।

    पंचायत हो या Parliament हो, ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री हो, हर किसी को, हर Democratic Institution को सुराज्य (Good-Governance) की ओर आगे बढ़ने के लिए अपनी जिम्मेवारियों को निभाना होगा, अपनी जिम्मेवारियों को परिपूर्ण करना होगा और तब जा करके भारत सुराज के सपने को पाने में और अधिक देर नहीं करेगा।

    ये बात सही है देश के सामने समस्याएं अनेक हैं, लेकिन ये हम न भूलें कि अगर समस्याएं हैं तो इस देश के पास सामर्थ्य भी है और जब हम सामर्थ्य की शक्ति को लेकर के चलते हैं, तो समस्याओं से समाधान के रास्ते भी मिल जाते हैं। और इसलिए भाइयों-बहनों, भारत के पास अगर लाखों समस्याएं हैं तो सवा सौ करोड़ मस्तिष्क भी हैं जो समस्याओं का समाधान करने का सामर्थ्य भी रखते हैं।

    भाइयों-बहनों, एक समय था, हमारे यहां सरकारें आक्षेपों से घिरी रहती थीं, लेकिन अब वक्त बदल चुका है। आज सरकार आक्षेपों से घिरी नहीं है, लेकिन अपेक्षाओं से घिरी हुई है। और जब अपेक्षाओं से घिरी रहती है तब, ये इस बात का संकेत होता है कि जब आशा हो, भरोसा हो, उसी की कोख से अपेक्षाएं जन्म लेती हैं और अपेक्षाएं सुराज की ओर जाने की गति को तेज करती हैं, नए प्राण पूरती हैं और संकल्पों की पूर्ति नित्य, निरंतर होती रहती है। इसलिए मेरे भाइयों-बहनों हम लोगों के लिए इस सुराज की यात्रा.. आज जब मैं लालकिले की प्राचीर से आपसे बात कर रहा हूं तो बहुत स्वाभाविक है कि सरकार क्या कर रही है, देश के लिए क्या हो रहा है, देश के लिए क्या होना चाहिए, इन बातों की चर्चा होना बड़ा स्वाभाविक है। मैं भी बहुत बड़ा लंबा सरकार का कार्यकाज का हिसाब आपके सामने रख सकता हूं, बहुत सारी बातें आपके सामने प्रस्तुत कर सकता हूं।

    दो साल के कार्यकाल में अनगिनत Initiatives, अनगिनत काम लेकिन अगर उसका ब्यौरा देने जाऊंगा मैं, तो पता नहीं हफ्ते भर मुझे लालकिले की प्राचीर से बोलते रहना पड़ेगा।

    और इसलिए मैं उस मोह के बजाए आज, कार्य की नहीं, इस सरकार की कार्य-संस्कृति के प्रति आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। कभी-कभी कार्य का तो लेखा-जोखा करना सरल होता है, लेकिन कार्य-संस्कृति को, जब तक गहराई में न जाएं, जानना, समझना, पहचानना सामान्य मानव के लिए सरल नहीं होता है।

    और इसलिए मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, मेरे प्यारे देशवासियों, आज मैं सिर्फ नीति की नहीं, नीयत की भी और निर्णय की भी बात कर रहा हूं। भाइयों-बहनों, सिर्फ दिशा नहीं, एक व्यापक दृष्टिकोण का मसला है। सिर्फ रूपरेखा नहीं, ये रूपांतर का संकल्‍प है। ये लोक आकांक्षा, लोकतंत्र और लोकसमर्थन की त्रिवेणी धारा है। ये मति भी है ये सहमति भी है, ये गति भी है और प्रगति का अहसास भी है।

    और इसलिए मेरे प्‍यारे देशवासियों, मैं आज जब सुराज्य की बात करता हूं तब सुराज का सीधा-सीधा मतलब है- हमारे देश के सामान्‍य से सामान्‍य मानव के जीवन में बदलाव लाना है। सुराज का मतलब है शासन सामान्‍य मानव के प्रति संवेदनशील हो, जिम्‍मेवार हो, और जन सामान्‍य के प्रति समर्पित हो। और तब जा करके Good Governance पर बल देना होता है, हर किसी के दायित्‍व को टटोलते रहना पड़ता है, responsibility और accountability ये उसकी जड़ में होनी चाहिए, वहीं से रस-कस प्राप्‍त होना चाहिए। और इसलिए भाइयो-बहनों, शासन संवेदनशील होना चाहिए।

    हमें याद है, कि वो भी एक दिन थे जब किसी बड़े अस्‍पताल में जाना हो तो कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। AIIMS में लोग आते थे, दो-दो, तीन-तीन दिन बिताते थे, तब जा करके कब उनको जांचा-परखा जाएगा उसका तय होता था। आज उन सारी व्‍यवस्‍थाओं को हम बदल पाएं हैं। Online registration होता है, Online डॉक्‍टर की appointment मिलती है, तय समय पर patient आए तो उसका काम शुरू हो जाता है। इतना ही नहीं, उसके सारे medical records भी उसको Online उपलब्‍ध होते हैं। और हम इसको आरोग्‍य के क्षेत्र में देशव्‍यापी culture के रूप में विकसित करना चाहते हैं। आज सरकार के बड़े-बड़े 40 से अधिक अस्‍पतालों में इस व्‍यवस्‍था को किया है लेकिन इसका मूलमंत्र शासन संवेदनशील होना चाहिए। भाइयो-बहनों, शासन उत्‍तरदायी होना चाहिए। अगर शासन उत्‍तरदायी नहीं होता है, तो जन सामान्‍य की समस्‍याएं ऐसे की ऐसे लटकी रहती हैं। बदलाव कैसे आता है, technology तो है, लेकिन एक समय था rail tickets…हिन्‍दुस्‍तान के सामान्‍य मानव को rail tickets से संबंध आता है, रेल से संबंध आता है, गरीबों का संबंध आता है। पहले आधुनिक technology से एक मिनट में सिर्फ दो हजार tickets निकल पाते थे, और वो भी जो उस जमाने में जिसने देखा होगा, वो चक्‍कर घूमता रहता था, पता नहीं कब website खुलेगी। आज मुझे संतोष के साथ कहना है कि आज एक मिनट में 15 हजार रेल टिकट मिलना संभव हो गया है।

    एक Responsible Government सामान्‍य मानव की आवश्‍यकता और अपेक्षाओं के लिए किस प्रकार के कदम उठाती है, सरकार में जवाबदेही होनी चाहिए।

    सारे देश में एक वर्ग है, खास करके मध्‍यम वर्ग, उच्‍च-मध्‍यम वर्ग, उसको जब मिलो, कभी-कभी वो पुलिस से ज्‍यादा Income Tax वालों से परेशान हुआ करता है। ये स्थिति मुझे बदलनी है और मैं लगा हूं, बदल के रहूंगा। लेकिन एक समय था, जब सामान्‍य ईमानदार नागरिक अपना income-tax में पैसा देता था और बेचारा carefully दो रुपए ज्‍यादा ही दे देता था। उसको लगता था भई पीछे से कोई तकलीफ न हो। लेकिन एक बार सरकारी खजाने में धन आ गया तो refund लेने के लिए उसको चने चबाने पड़ते थे, सिफारिश लगानी पड़ती थी और महीनों तक नागरिक के हक का पैसा सरकारी खजाने से जाने में टालमटोल हुआ करता था। आज हमने online-refund देने की व्‍यवस्‍था की। हफ्ते-दो हफ्ते में, तीन हफ्तों में आज refund मिलना शुरू हो गया। जो आज मुझे टीवी पर सुनते होंगे, उनको भी यह बात ध्‍यान में आती होगी, हां भाई, मेरा refund तो सीधा-सीधा मुझे.. मैंने कोई application नहीं की, आ गया। तो यह उत्‍तरदायी, जवाबदेही ये सारे जो प्रयास होते हैं, उनका परिणाम है।

    शासन में सुराज के लिए पारदर्शिता को बल देना उतना ही महत्‍वपूर्ण है। आप जानते हैं! आज समाज में पहले से एक विश्‍वव्‍यापी संपर्क संबंध धीरे-धीरे सहज बनता जा रहा है। मध्‍यम वर्ग के व्‍यक्‍ति अपना पासपोर्ट हो…पहला जमाना था साल में करीब 40 लाख – 50 लाख पासपोर्ट के लिए अर्जियां आती थी। आजकल दो-दो करोड़ लोग पासपोर्ट के लिए apply करते हैं। भाइयों-बहनों, पहले पासपोर्ट पाने में अगर सिफारिश नहीं है, तो चार-छह महीने तो यूं ही जांच-पड़ताल में चले जाते थे। हमने उस स्‍थिति को बदला और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि करीब हफ्ते-दो हफ्ते में नागरिकों के हक में जो पासपोर्ट है, उसको पहुंचा दिया जाता है और पारदर्शिता, कोई सिफारिश की जरूरत नहीं, कोई टालमटोल की जरूरत नहीं। आज मैं कह सकता हूं कि सिर्फ 2015-16 में पौने दो करोड़ पासपोर्ट, इतने कम समय में देने का, हमने काम किया है।

    सुराज में, शासन में दक्षता भी होनी चाहिए, efficiency होनी चाहिए और इसलिए हमारे यहां पहले किसी company को अपना कोई कारखाना लगाना है, कारोबार करना है तो apply करते है। सिर्फ registration का काम था, वो देश के लिए कुछ करना चाहता था। लेकिन छह-छह महीने तो यूं ही निकल जाते थे। भाइयो-बहनों अगर दक्षता लाई जाए तो उसी सरकार, वो ही नियम, वो ही मुलाजिम, वो ही company registration का काम, आज 24 घंटे में करने के लिए सज्ज हो गए हैं और कर रहे हैं। अकेले पिछली जुलाई में 900 से ज्‍यादा ऐसे Registration का काम उन्‍होंने कर दिया।

    भाइयो-बहनों सुराज के लिए सुशासन भी जरूरी है। Good governance भी जरूरी है और उस Good governance के लिए हमने जो कदम उठाए….मैंने पिछली बार यहां लाल किले से कहा था कि हम Group ‘c’ और Group ‘d’ सरकार के इन पदों को इंटरव्‍यू से बाहर कर देंगे। Merit के आधार पर उसको Job मिल जाएगा। हमने करीब-करीब 9,000 पद ऐसे खोज कर निकाले हैं और जिसमें हजारों-लाखों लोगों की भर्ती होनी है। अब इन 9,000 पदों पर कोई इंटरव्‍यू प्रक्रिया नहीं होगी। मेरे नौजवानों को इंटरव्‍यू देने के लिए खर्चा नहीं करना पड़ेगा, जाना नहीं पड़ेगा, सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ेगी। भ्रष्‍टाचार और दलालों के लिए रास्‍ते बंद हो जाएंगे और इस काम को लागू कर दिया गया है।

    भाइयो-बहनों, देश….एक समय था कि सरकार कोई योजना घोषित करे, सिर्फ इतना बता दे कि ये करेंगे। तो सामान्‍य मानव संतुष्‍ट हो जाता था। उसको लगता था चलिए अब होगा कुछ। एक समय आया जब योजना का drawing आए नहीं, तब तक लोग अपेक्षा करते थे भई बताओ, plan बताओ। फिर समय आया कि जरा बजट बताओ? लोग मांगते थे। आज 70 साल में देश का मन भी बदला है, वो योजनाओं की घोषणा से संतुष्‍ट नहीं होता है, plan दिखाने से संतुष्‍ट नहीं होता है, उसको budget provision कर दिया तो वो मानने को तैयार नहीं है। वो तब मानता है, जब धरती पर चीजें उतरती हैं, तब मानता है और धरती पर हम पुरानी रफ्तार से चीजों को नहीं उतार सकते। हमें अपनी काम की रफ्तार को तेज करना पड़ेगा, गति को और आगे बढ़ाना पड़ेगा, तब जा करके हम कहते हैं।

    हमारे देश में ग्रामीण सड़क…हर गांव के नागरिक की अपेक्षा रहती है कि उसको एक पक्‍की सड़क मिले। काम बहुत बड़ा है, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने विशेष ध्‍यान दे करके इसको शुरु किया था। और बाद में भी सरकार ने इसको continue किया, आगे बढ़ाया। हमने उसमें गति देने का प्रयास किया है। पहले एक दिन में 70-75 किलोमीटर का ग्रामीण सड़क का काम हुआ करता था, आज उस रफ्तार को तेज करके हम प्रतिदिन 100 किलोमीटर की ओर ले गए हैं। ये गति आने वाले दिनों में सामान्‍य मानव की अपेक्षाओं को पूर्ण करेंगी।

    हमारे देश में ऊर्जा और उसमें भी Renewable Energy इस पर हमारा बल है। एक समय था, जो हमारे देश में इतने सालों में आजादी के बाद wind energy में काम हुआ, पवन ऊर्जा में काम हुआ, पिछले एक साल के भीतर-भीतर करीब-करीब 40 प्रतिशत उसमें हमने वृद्धि की है, ये है उसकी गति का मायना। Solar Energy…पूरा विश्‍व Solar Energy की ओर बल दे रहा है। हमने 116% बढ़ोत्‍तरी की है। ये बहुत बड़ा, ये incremental change नहीं है, ये बहुत बड़ा high-jump है। हम चीजों को उसके quantum की दृष्टि से हम आगे बढ़ाना चाहते हैं। हमारे देश में हमारी सरकार बनने के पहले अगर ऊर्जा का उत्‍पादन है, तो ऊर्जा पहुंचाने के लिए transmission line भी चाहिए और अच्‍छी transmission line की व्‍यवस्‍था चाहिए। हमारी सरकार बनने के पहले के दो साल, हमारे पूर्व के दो साल, एक दिन में, एक साल में करीब 30-35 हजार कि.मी. Transmission line डाली जाती थी। आज मुझे संतोष के साथ कहना है कि आज ये काम करीब-करीब 50 हजार किलोमीटर. हमने पहुंचाया है। ये गति बढ़ाने का काम किया है। अगर पिछले 10 साल का Rail line commissioning की बात है और commissioning का मतलब होता है, ट्रेन चलने योग्‍य हो जाना, सारे trial पूरे हो जाना। पहले, 10 साल 1500 किलोमीटर का हिसाब था और आज मुझे दो साल में 3500 किलोमीटर का काम करने में हम सफल हुए है। ये गति को हम आगे बढ़ा रहे हैं।

    भाइयों-बहनों आज आधार कार्ड को सरकारी योजनाओं के साथ जोड़ करके direct benefit के लिए जो भी leakages उसको रोक करके, काम करने पर हम बल दे रहे हैं। पहले की सरकार में, सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने में करीब 4 करोड़ लोगों को जोड़ा जा पाया था। आज मुझे संतोष के साथ कहना है कि 4 करोड़ पर काम वहां हुआ था, आज हमने 70 करोड़ नागरिकों को आधार और सरकारी योजनाओं के साथ जोड़ने का काम पूरा कर दिया है और जो बाकी हैं उनको भी पूरा करने का काम चल रहा है।

    हमारे यहां मध्‍यम वर्ग का मानव हो, सामान्‍य मानवी हो उसको आज जैसे कार घर में हो उसको प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। एक वक्‍त था कि घर में गैस का चूल्हा हो तो उसको एक standard माना जाता था समाज में एक status के रुप में माना जाता था। देश आजाद होने के 60 साल के दरम्यान, ये रसोई गैस करीब 14 करोड़ लोगों को 60 साल में मिला था। भाइयों-बहनों, मुझे बड़ा संतोष है कि एक तरफ 60 साल में 14 करोड़ रसोई गैस के connections और हमने 60 सप्ताह में चार करोड़ नए लोगों को रसोई गैस के connections दिए। कहां 60 साल के 14 करोड़ और कहां 60 सप्ताह के 4 करोड़। ये गति है जो सामान्य मानव की जिन्दगी में Quality of Life में आज बदलाव लाने के लिए संभव हुआ है।

    हमने कानूनों के जंजालों की सफाई का भी काम आरंभ किया है। कानूनों का बोझ सरकार को भी, न्यायपालिका के लिए भी और नागरिक के लिए भी उलझनें पैदा करता रहता था। हमनें खोजबीन करके करीब 1700 ऐसे कानून निकाले हैं। पौने 1200 करीब already Parliament के द्वारा उसको निरस्त कर दिये हैं और बाकियों को भी निरस्त करने कि दिशा में जाकर के उस सफाई अभियान को भी हम चलाना चाहते हैं।

    भाइयों-बहनों, कभी-कभी देश में एक स्वभाव बन गया था कि ये काम तो हो सकता है, ये काम तो नहीं हो सकता है। भई अभी तो नहीं होगा, कभी होगा तो पता नहीं। निराशा ये हमारा मिजाज बनता जा रहा था। इसको Breakthrough करना, शासन में ऊर्जा भरना और जब कोई सिद्धि दिखती है, तो उत्साह भी बढ़ता है, ऊर्जा भी बढ़ती है, संकल्प भी बड़ा Sharp हो जाता है और परिणाम भी निकट नजर आने लग जाते हैं।

    भाइयों-बहनों, जब हमनें प्रधानमंत्री जनधन योजना, एक प्रकार से असम्भव काम था, असंभव काम था। इतने सालों से बैंक थी, सरकारें थीं, राष्ट्रीयकरण हो चुका था लेकिन सामान्य व्यक्ति देश की अर्थव्यवस्था मुख्यधारा का हिस्सा नहीं बन पाता था। भाइयों-बहनों, 21 करोड़ परिवारों को, 21 करोड़ नागरिकों को जनधन योजना में जोड़करके असंभव, संभव हुआ और ये असंभव को संभव ये सरकार के खजाने में, ये सरकार की Credit का विषय नहीं है, ये सवा सौ करोड़ देशवासियों ने किया है और इसलिए मैं इस काम को करने के लिए मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का नमन करता हूं।

    आज हिन्दुस्तान के गांवों में नारी गौरव का अभियान…उसका एक महत्वपूर्ण पहलू है। खुले में शौच बंद होना चाहिए, गांव में Toilet बनना चाहिए। पहली बार जब मुझे लालकिले की प्राचीर से आप सबके दर्शन करने का सौभाग्य मिला था। उस दिन मैंने अपनी भावना को व्यक्त किया था कि मेरा देश ऐसे कैसे हो सकता है। आज मैं कह सकता हूं कि इतने कम समय में हिन्दुस्तान के गांवों में दो करोड़ से ज्यादा शौचालय बन चुके हैं। 70 हजार से अधिक गांव आज खुले में शौच जाने की परम्परा से मुक्त हो चुके हैं। सामान्य जीवन में बदलाव लाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं।

    इसी लालकिले की प्राचीर से मैंने पिछले साल कहा था कि एक हजार दिन में हम उन 18 हजार गांवों में जहां बिजली नहीं पहुंची है…आजादी के 70 साल होने जा रहे हैं, उन्होंने अब तक बिजली नहीं देखी है। 18वीं शताब्दी में जीने के लिए वो मजबूर हुआ करते थे। हमने बीड़ा उठाया कि अब असंभव को संभव करने का संकल्प किया। और आज मुझे खुशी के साथ कहना है, हजार दिन में अभी तो आधे भी नहीं हुए हैं, आधे से भी काफी दूर है, उसके बाद भी 18 हजार गांवों में से दस हजार गांवों में आज बिजली पहुंच गई है। और मुझे बताया गया कि उनमें से कई गांव हैं, जो आज पहली बार टीवी पर ये भारत की आजादी के जश्न को वहां बैठे-बैठे देख रहे हैं। मैं उन गांवों को भी आज यहां से विशेष शुभकामनाएं देता हूं।

    भाइयों-बहनों, आपको हैरानी होगी। दिल्ली से सिर्फ तीन घंटे की दूरी पर हम यात्रा करें, तो तीन घंटे लगेंगे, दिल्ली से तीन घंटे की दूरी पर हाथरस इलाके में एक गांव नगला-फटेला। ये नगला-फटेला, तीन घंटे लगते हैं पहुंचने में, तीन घंटे। लेकिन बिजली को पहुंचने में 70 साल लग गए मेरे भाइयों-बहनों 70 साल लग गए और इसलिए हम उन कामों पर, हम किस कार्य-संस्‍कृति से काम कर रहे हैं, इसका मैं परिचय करा रहा हूं।

    भाइयों-बहनों, LED बल्‍ब विज्ञान में अनुसंधान करने वालों ने हर नागरिक की भलाई के लिए उसको विकसित किया। लेकिन भारत में साढ़े तीन सौ रुपये में LED बल्‍ब बिकता था। कौन खरीदेगा? और सरकार को भी लगता था कि भई ठीक है, यह तो हो गया तो हो गया, कोई काम करता होगा, बात ऐसे नहीं चलती। अगर LED बल्‍ब से हिंदुस्‍तान के सामान्‍य जीवन में बदलाव लाया जा सकता है, पर्यावरण में बदलाव लाया जा सकता है, भारत की अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार लाया जा सकता है, तो फिर सरकार को उसमें कोशिश करनी चाहिए। सरकार का स्‍वभाव रहता है, जहां टांग न अड़ानी चाहिए, वहां अड़ा देता है और जहां अड़ानी चाहिए वहाँ नहीं अड़ाता, भाग जाता है। यह स्थिति, यह कार्य-संस्‍कृति बदलने का हमने प्रयास किया है और इसलिए साढ़े तीन सौ रुपये में बिकने वाला बल्‍ब, सरकारी intervention का परिणाम यह हुआ कि आज हम 50 रुपये में वो बल्‍ब बांट रहे हैं। कहां साढ़े तीन सौ और कहां पचास! मैं यह पूछना नहीं चाहता हूं कि यह रूपये कहां जाते थे, लेकिन 13 करोड़ बल्‍ब अब तक बांटे गए हैं। हमारे देश की राजनीति लोकरंजक बन गई है, लोकरंजक अर्थनीति ही बन चुकी है। अगर सरकारी खजाने से उसको हर बल्‍ब के पीछे तीन सौ रुपया दिया गया होता, तो वाह-वाही होती कि यह अच्‍छा प्रधानमंत्री है, हमारी जेब में तीन सौ रुपया डाल दिया। लेकिन हमने 50 रुपये में बल्‍ब दे करके उसके हजारों रुपये बचाने में मदद की है। 13 करोड़ बल्‍ब बंट चुके हैं। 77 करोड़ बल्‍ब बांटने का संकल्‍प है। और मैं आज देशवासियों को कहना चाहता हूं कि आप भी अपने घर में LED बल्‍ब लगाइये, सालभर का ढ़ाई सौ, तीन सौ, पांच सौ रुपया बचाइये और देश की ऊर्जा बचाइये, देश के पर्यावरण को बचाइये। जिस समय 77 करोड़ LED बल्‍ब लग जाएंगे, हिंदुस्‍तान की 20 हजार मेगावाट बिजली बच जाएगी और जब 20 हजार मेगावाट बिजली बचेगी, मतलब करीब-करीब सवा लाख करोड़ रुपया बच जाएगा। भाइयों-बहनों आप अपने घर में एक LED बल्‍ब लगा करके, देश के सवा लाख करोड़ रूपये बचा सकते हैं। 20 हजार मेगावट बिजली बचा करके, हम Global warming के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं। हम देश के पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं और यह सामान्‍य मानव दे सकता है और इसलिए भाइयों-बहनों हमने उस दिशा में काम किया है।

    असंभव से संभव काम आपको मालूम है! हम ऊर्जा पर, Petroleum product पर, विश्‍व के अन्‍य देशों पर निर्भर हैं। और इसके कारण लम्‍बे काल के agreement हुए हैं, ताकि हमें लम्‍बे अरसे तक निश्चित दाम से चीजें मिलती रहीं। Qatar के साथ, गैस का हमारा agreement 2024 तक का है। लेकिन दाम इतने है कि हमें भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए महंगा पड़ रहा है। हमारी विदेश नीति के संबंधों का परिणाम यह आया कि Qatar के साथ फिर बात की, जो agreement हो चुका था, जो Qatar का हक था 2024 तक हम उस भाव से गैस लेने के लिए बंधे हुए थे, हमने उनसे वार्ता की और मैं आज संतोष के साथ कहता हूं, असंभव भी संभव हो गया और उन्‍होंने अपने दाम को re-negotiate किया और हिंदुस्‍तान के खजाने से 20 हजार करोड़ रुपया बच जाएगा। 20 हजार करोड़ रुपया वो लेने के हकदार थे, लेकिन हमारे संबंधों का रूप बड़ा है, हमारी नीतियों का स्‍वरूप बड़ा है कि जिसके कारण हम उसको कर पाए हैं।

    चाबहार का port जो मध्‍य एशिया के साथ जोड़ने की एक अहम कड़ी है सब सरकारों में लगातार बातें होती रहीं, पुन: प्रयास होते रहे। आज मुझे असंभव कार्य को संभव करते देख संतोष हो रहा, जब ईरान, अफ़गनिस्‍तान और हिंदुस्‍तान मिल करके चाबहार port के निर्माण के लिए कदम उठाने की दिशा में नवकर योजना के साथ आगे बढ़ते हैं तब असंभव काम संभव हो जाता है।

    मेरे भाइयों-बहनों, एक बात जिसको इस समय मैं आपसे कहना चाहूंगा, जो सामान्य मानव से जुड़ी हुई है, वो है महंगाई। ये बात सही है कि पहले की सरकार में Inflation rate 10 प्रतिशत को भी पार कर गया था। हमारे लगातार कदमों के कारण Inflation rate हमने 6 percent से ऊपर जाने नहीं दिया है। इतना ही नहीं अभी तो हमने रिजर्व बैंक के साथ समझौता किया है कि 4% two -plus(+2)- minus(-2) के साथ, Inflation को control करने की दिशा में रिजर्व बैंक कदम उठाए। Inflation और Growth के balance की जो चर्चाएं होती थी, उस से ऊपर उठकर के आगे आने की दिशा में काम करे लेकिन इसके बावजूद भी, 2 साल देश में अकाल रहा, सब्जियों के दाम पर अकाल का प्रभाव तुरंत होता है, मार्केट की कमी का प्रभाव होता है। उसके कारण कुछ दिक्कतें जरूर आईं। 2 साल के अकाल के कारण दाल के उत्पादन की गिरावट भी चिंता का विषय़ बना। लेकिन भाइयों-बहनों, इसके बावजूद भी अगर जिस प्रकार से पहले महंगाई बढ़ती थी अगर उसी रफ्तार से बढ़ी होती, तो पता नहीं मेरे देश के गरीब का क्या होता, इसको रोकने में हमने भरपूर कोशिश की है लेकिन फिर भी, ये सरकार अपेक्षाओं से घिरी सरकार है। आप की मेरे देशवासियों, अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं लेकिन मैं उस दिशा में प्रयत्न करने में कोई कोताही बरतने नहीं दूंगा। जितना प्रयास मुझसे होगा, मैं करता रहूंगा और गरीब की थाली को महंगी नहीं होने दूंगा।

    मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, ये देश गुरू गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती मनाने की तैयारी कर रहा है। देश के लिए बलिदान की गाथा, सिक्ख गुरुओं की परंपरा, ये देश कैसे भूल सकता है और जब गुरू गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती हम मना रहे हैं तब, गुरू गोबिंद सिंह जी ने एक बात बड़े अच्छे ढंग से कही थी, गुरू गोबिंद सिंह जी कहते थे जिस हाथ ने कभी सेवा न की हो, जिस हाथ में कभी कोई काम न हुआ हो, जो हाथ मजदूरी से मजबूत न हुए हो, जिन हाथों को काम करते-करते, हाथ में गाठें न बन गई हों, उस हाथ को मैं पवित्र हाथ कैसे मान सकता हूं, ये गुरू गोबिंद सिंह जी कहते थे। आज जब गुरु गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती हम मना रहे हैं तब, मैं मेरे किसानों को याद करता हूं, उनसे बढ़कर पवित्र हाथ किसका हो सकता है? उससे बढ़कर पवित्र हृदय किसका हो सकता है? उसके बिना पवित्र मकसद किसका हो सकता है? मैं मेरे किसान भाइयों को 2 साल के अकाल के बावजूद भी, देश के अन्न के भंडार भरने के लिए उन्होंने जो निरंतर प्रयास किया, उसके लिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं।

    सूखे की स्थिति बदली, इस बार वर्षा अच्छी हो रही है, कहीं-कहीं पर अधिक वर्षा के कारण तकलीफ भी हुई है। जिन राज्यों को, जिन नागरिकों को तकलीफ हुई है, भारत सरकार संकट के समय पूरी तरह उनके साथ है। लेकिन मेरे किसान भाइयों को आज मैं विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहता हूं, जब हमारे देश में दलहन की कमी महसूस कर रहे हैं, हमारा किसान दूसरे crop पर चला गया था, लेकिन जहां भारत के सामान्य मानव की दाल की मांग बढ़ी, आज मुझे संतोष के साथ कहना है कि इस बार बुआई में मेरे किसानों ने दाल की बुआई डेढ़ गुना कर दी है, दाल के संकट को मिटाने के लिए, उससे रास्ता खोजने में मेरा किसान आगे आया है। और मैं किसान का अभिनंदन करता हूं हमने दाल के लिए MSP तय किया है। हमने दाल के लिए बोनस निकाला है। हमने दाल के द्वारा उसको purchase करने की व्‍यवस्‍था का सुप्रबंधन किया है। और इसलिए अब किसान को दाल के लिए भी हम प्रोत्‍साहित कर रहे हैं और उसका लाभ भी बहुत बड़ा होगा।

    भाइयो-बहनों, मैं जब कार्य-संस्‍कृति की बात कर रहा था, तो ये बात साफ है कि हम चीजों को टुकड़ों में नहीं देखते हैं। हम चीजों को एक समग्रता में देखते हैं, integrated देखते हैं, और integrated चीजों के तहत, सिर्फ agriculture ले लीजिए, हमने किस प्रकार से ऐसी कार्य-संस्‍कृति को विकसित किया है, जिसकी एक पूरी chain कितना बड़ा परिणाम दे सकती है।

    हमने सबसे पहले ध्‍यान केन्द्रित किया इस धरती माता की तबीयत के लिए, जमीन की सेहत के लिए, Soil Health Card, macro-nutrition, micro-nutrition की चिन्‍ता और किसान को ये समझाया कि तुम्‍हारी जमीन में ये कमी है, ये अच्‍छाइयां हैं, तुम्‍हारी जमीन इस फसल के लिए योग्‍य है, इस फसल के लिए योग्‍य नहीं है। और किसानों ने धीरे-धीरे Soil Health Card के जरिए अपना plan करना शुरू किया और जिन-जिन लोगों ने plan किया है वो मुझे बताते हैं कि साहब हमारा खर्चा करीब-करीब 25% कम हो रहा है। और हमारे उत्‍पादन में 30% वृद्धि नजर आ रही है। अभी ये संख्‍या कम है लेकिन आने वाले दिनों में जैसे-जैसे बात पहुंचेगी, ये बात आगे बढ़ेगी। किसान को जमीन है, अगर उसको पानी मिल जाए, तो मेरे देश के किसान की ताकत है, वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। ये ताकत मेरे देश के किसान में है और इसलिए हमने जल प्रबंधन पर बल दिया है, जल सींचन पर बल दिया है, जल संरक्षण पर बल दिया है। एक-एक बूंद का उपयोग किसान के काम कैसे आए, पानी काम महात्‍मय कैसे बढ़े, per drop-more crop, Micro-irrigation इसको हम बल दे रहे हैं। 90 से ज्‍यादा सिंचाई की योजनाएं आधी-अधूरी ठप्‍प पड़ी थीं, हमने बीड़ा उठाया है सबसे पहले उन योजनाओं को पूरा करेंगे। और लाखों धरती को सींचन का लाभ मिले, उस दिशा में काम करेंगे। हमने किसान की input-cost कम करने के लिए, क्योंकि किसान को आजकल बिजली की भी जरूरत पड़ती है, पानी चाहिए तो बिजली चाहिए, बिजली महंगी पड़ती है, हमने solar pump की ओर बड़ा काम उठाया है, बड़ी मात्रा में उठाया है, उसके कारण किसान का input-cost कम होने वाला है, recurring expense कम होने वाला है, और solar pump घर में होने के कारण बिजली भी अपनी, सूरज भी अपना, खेत भी अपना, खलिहान भी अपना। मेरा किसान खुदहाल-खुशहाल भी होगा। अब तक 77 हजार solar pump बांटने में हमने सफलता पाई है।

    भाइयो-बहनों, मैं मेरे देश के वैज्ञानिकों को भी बधाई देना चाहता हूं। जमीन, पानी, solar pump, साथ के साथ अच्‍छे बीज की भी जरूरत होती है, अच्‍छे seeds की जरूरत होती है। भारत की वायु को, प्रकृति के अनुकूल हमारे देश के वैज्ञानिकों ने 131 से ज्‍यादा नए कृषि के योग्‍य बीज तैयार किए हैं, जो हमारे प्रति हेक्‍टेयर उत्‍पादन को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। उसके अंदर जो values हैं, उस values में भी बढ़ोतरी हो रही है। मैं इन वैज्ञानिकों को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

    किसान को यूरिया चाहिए, खाद चाहिए। एक जमाना था खाद को पाने के लिए black-marketing होता था, एक जमाना था खाद पाने के लिए पुलिस लाठीचार्ज करती थी, एक जमाना था कि इंसान खाद के अभाव में अपनी आंखों के सामने बर्बाद होता हुआ अपनी फसल देख रहा था। भाइयो-बहनों, खाद की कमी, ये बीते हुए दिनों का विषय बन गए, इतिहास के गर्त में चला गया। आज हमने खाद की कमी, सबसे ज्‍यादा खाद का उत्‍पादन करने में हम सफल हुए हैं।

    भाइयो-बहनों, इस खाद के उत्‍पादन के कारण किसानों को आवश्‍यकता के अनुसार समय पर खाद मिलने की संभावना।

    उसी प्रकार से हमने फसल बीमा योजना बनाई है, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना। किसान को जमीन से ले करके उत्‍पादित चीजों तक उसकी रक्षा करना। पहली बार कम से कम प्रीमियम से अधिक से अधिक, वो भी गारंटी के साथ फसल बीमा योजना देने का काम, भाइयो-बहनों हमने किया है। हमने फसल के उत्‍पादन को 15 लाख टन अन्‍न के संरक्षण के लिए नए गोदामों का निर्माण किया है।

    हमारे देश में किसान का भला तब होगा, जब हम Value additionकी तरफ जाएंगे और Value addition की ओर जाने के लिए,हमने पहली बार food processing को विशेष रूप से बल दिया है। 100% Foreign Direct Investment को हमने प्रोत्‍साहित किया है जिसके कारण कृषि आधारित उद्योगों को बल मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को जब बल मिलेगा, तो मेरे भाइयो-बहनों मुझे विश्‍वास है कि हमारे किसान को और जो मेरा सपना है, कि 2022 में किसान की income को double करना है,ये चीजें हैं जिसके द्वारा ये संभव होने वाला है और उसके लिए हमने एक के बाद एक कदम उठाए हैं।

    भाइयो-बहनों, हमारे देश में एक परंपरा बन गई। सरकारों ने अपनी पहचान बनाने के लिए तो बहुत कुछ किया है और हमारे देश का जिस प्रकार का स्‍वभाव है, एकाध लोकरंजक काम कर दो, एकाध लोक लुभावना काम कर दो, सरकारी खजाने को खाली कर दो, सरकार की एक पहचान बनाने की परंपरा रही है। भाइयो-बहनों, मैंने अपने आप को इस मोह से दूर रखने का भरपूर प्रयास किया है और इसलिए एक total transformation, transparency के साथ transformation. Reform, Perform, Transform उस मंत्र को लेकर के हमने एक के बाद एक चीजें और हर range में, हर range में करने का हमने प्रयास किया है।

    भाइयो-बहनों हमें सरकार की पहचान बनाने से ज्‍यादा मेरे हिन्‍दुस्‍तान की पहचान कैसी बने, उस पर बल है। दल की पहचान बने या न बने, देश की पहचान बननी चाहिए। देश की पहचान बनेगी तो आने वाली सदियों तक,हमारी आने वाली पीढ़ियों तक उसका लाभ होने वाला है और इसलिए हमने सरकार की पहचान को प्राथमिकता नहीं दी है, देश की पहचान को प्राथमिकता दी है।

    आज हम रेलवे में, आप देखते होंगे कि हमारे काम की range क्‍या है। एक तरफ रेल में हम Bio-toilet की भी चर्चा करते हैं तो दूसरी तरफ Bullet train को भी लाने का सपना देखते है। हम एक तरफ किसान के लिए Soil Health Card की चर्चा करते हैं, तो दूसरी तरफ हम satellite और space technology की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। हम Stand-up India की बात करते हैं तो हम Start-up India के लिए और कदम उठाते हैं। हम symbolism की जगह पर substance पर बल दे रहे हैं। हम isolated development की जगह पर integrated development की ओर बल दे रहे हैं। हम entitlement से छोड़कर के empowerment पर ध्‍यान दे रहे हैं और जब भी देश empower होता है तो मेरे भाइयो-बहनों, हमारे देश में नई योजनाएं घोषित करने से सरकारें पहचान बन जाती है। लेकिन पुरानी योजनाएं, वो ऐसे लुढ़क जाती है। सरकारें continuity होती हैं। अगर पहले की सरकारों ने भी कोई काम किया है। तो देश का भला इसमें है कि उसकी कुछ कमियां जरूर दूर करें, लेकिन उस काम को आगे बढ़ाना चाहिए। ये आपकी सरकार का, हम नहीं करेंगे, हम तो हमारी सरकार का करेंगे, ये अहंकार लोकतंत्र में नहीं चलता है और इसलिए हमने सर झुकाकर के पुरानी सरकारों के काम को भी उतनी ही तव्‍वजो दी है और ये हमारी कार्य-संस्‍कृति का परिचायक है क्‍योंकि देश, देश अखंड, अविरत व्‍यवस्‍था है और उस व्‍यवस्‍था को हम चलाना चाहते हैं और उसी के तहत मैं एक प्रगति कार्यक्रम चलाता हूं और खुद review करता हूं, खुद बैठता हूं। आपको हैरानी होगी कि साढ़े सात लाख करोड़ रुपए के करीब-करीब 118 project, वो किसी न किसी सरकार ने कभी प्रारंभ किए थे, सोचा था, योजना बनाई थी, ऐसे लटके पड़े थे। उनको मैंने बाहर निकाला, मैंने कहा पूरा करें। इतने रुपए बर्बाद हुए, और जोड़कर के काम को पूरा करो। आज वो काम पूरे हो रहे हैं।

    हमने एक project monitoring group बनाया, जिसको मैंने अलग से कहा कि जरा देखिए ऐसे कौन से काम थे जो किसी समय शुरू हुए। कोई 20 साल पहले, कोई 25 साल पहले, कोई 30 साल पहले, कोई 15 साल पहले लटके पड़े थे। आज जो लोग उस इलाके में रहते है उनको पता है। करीब-करीब 10 लाख करोड़ रुपयों के 270 प्रोजेक्‍ट ऐसे हमने identify किए जो किसी सरकार ने शिलान्‍यास किया होगा, किसी ने 1000-2000 हजार करोड़ रुपया लगा दिया होगा। लेकिन बाद में वो मिट्टी में मिलता चला जा रहा था उसको हमने फिर से काम करने के लिए, उस अटकी हुई योजनाओं को…भाइयों-बहनों, योजनाओं का अटकाना, योजनाओं का delayed होना, रुपयों की बर्बादी होना एक प्रकार से criminal negligence है और उससे हमने पार करने का प्रयास किया है।

    भाइयों-बहनों Railway project की मंजूरियां दो-दो साल लगते थे। train जा रही है ऊपर bridge बनाना है, दोनों तरफ रास्‍ते बन चुके हैं। दो-दो साल लग जाते थे। भाइयों-बहनों आज वो काम तीन महीना-चार महीना, ज्‍यादा से ज्‍यादा छ: महीने में प्रोजेक्‍ट को मंजूरी देने की गति हम ले आये हैं।

    भाइयों-बहनों हम कितना ही काम करें, कितनी ही योजनाएं बनाएं। लेकिन सरकार सुशासन के लिए last man delivery, आखिरी इंसान को उसका लाभ कैसे मिलता है, उस पर ध्‍यान देना होता है। भाइयों-बहनों जब नीति साफ हो, नीयत स्‍पष्‍ट रुप से हो, साफ नीति, स्‍पष्‍ट नीति, साफ नीयत, स्‍पष्‍ट नियत होती है, तब निर्णय करने का जज्‍बा भी कुछ और होता है और इसलिए निर्णय बेझिझक हो सकते हैं।

    हमारी सरकार स्‍पष्‍ट नीतियों के कारण, साफ नियत के कारण, बेझिझक निर्णय करके, बेझिझक निर्णय करके चीजों को आगे बढ़ाने में और last man delivery पर बल दे रही है।

    हमने देखा है, अगर उत्‍तर प्रदेश के अखबार देखोगे, हर वर्ष गन्‍ना किसानों का बकाया, ये हर बार चर्चा में रहता था। sugar mill ये नहीं करती, राज्‍य सरकार ये नहीं करती, गन्‍ना किसान को ये परेशानी है। हजारों करोड़ रुपयों का बकाया था, हजारों करोड़ रुपए का। हमने इसके पीछे योजनाएं बनाई, पीछे लग गए, last man delivery किसान के घर तक पैसा पहुंचना चाहिए। पुराना जो बकाया था हजारों करोड़ बकाया था। भाइयों-बहनों, आज मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं 99.5% पुराना बकाया चुकता कर दिया गया है। ये बहुत सालों के बाद पहली बार हुआ है। इस बार का जो गन्‍ने का व्‍यापार हुआ, गन्‍ना खरीदा गया, आज मैं कह सकता हूं संतोष के साथ, अब तक करीब-करीब 95% किसानों को गन्‍ने का दाम चुका दिया गया है और 5% भी बचा हुआ होगा,तो आने वाले दिनों में जरूर चूक जाएगा ऐसा मुझे विश्‍वास है।

    भाइयों-बहनों, LPG के Gas connection गरीब परिवारों को देने का हमने बीड़ा उठाया है। उज्‍ज्‍वला योजना के तहत, मेरी गरीब मां को चूल्‍हे के धूएं से मुक्ति दिलाने का अभियान बहुत तेजी से चलाया है। 5 करोड़ गरीब परिवारों को जब गैस का चूल्‍हा पहुंचेगा और तीन साल में करने का बीड़ा उठाया, काम चल रहा है। करीब-करीब 50 लाख तक हम पहुंच चुके हैं और वो भी सिर्फ पिछले 100 दिन के अंदरये काम कर दिया है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, हो सकता है। तीन साल के पहले भी इस काम को हम पूरा कर लें last man delivery उस पर हम बल देना चाहते हैं।

    हमारी post office, information technology, whatsapp, messages, online, e-mail इनके कारण धीरे-धीरे post irrelevant हो रहा था, डाकघर हमारा। जो हमारी एक पहचान है। हमने इन डाकघरों को पुनर्जीवित, पुर्नताकतवर बनाने का, डाकघर गरीब और छोटे व्‍यक्ति से जुड़ा रहता है। सरकार का प्रतिनिधि अगर कोई हिन्‍दुस्‍तान के सामान्‍य मानव से प्‍यार से जुड़ा हुआ होता है तो वो डाकिया होता है। डाकिये को हर कोई प्‍यार करता है, डाकिया हर किसी को प्‍यार करता है।

    लेकिन उस डाकिया की तरफ हमारा कभी ध्‍यान नहीं जाता है। हमने हमारे post offices को payment bank में convert करने की दिशा में कदम उठाया है। ये payment bank बनने से एक साथ देश के गांवों तक बैंकों का जाल बिछेगा,जन-धन account का लाभ मिलेगा और सामान्‍य मानव MNREGA का पैसा भी अब आधार के द्वारा उसके खाते में जा रहा है, corruption कम हो रहा है।

    भाइयों-बहनों, हमारे देश में जो भी PSUबनते हैं वो PSU या तो गड्ढे में जाने के लिए बनते हैं, या तो लुढ़क जाने के लिए बनते हैं, या ताले लगने के लिए बनते हैं या फिर बेचने के लिए बनते हैं। ये उसका इतिहास रहा है। हमने एक नई कार्य संस्कृति लाने का प्रयास किया है। और आज मैं पहली बार संतोष के साथ कहता हूं जो Air India पूरी तरह बदनाम हुआ करता था। पिछले साल हम Air India को, उसके Operation को Operational Profit में लाने सफल हुए हैं। BSNL, सारी दुनिया की Telecom कंपनियां कमा रही हैं,BSNL गड्ढे में जा रहा था। पहली बार BSNL को Operational Profit में लाने में हमें सफलता मिली है।Shipping Corporation of India ये कभी फायदे में आएगा कि नहीं मानते नहीं थे। आज Shipping Corporation of Indiaफायदे में आया है।

    एक जमाना था बिजली का कारखाना अगले हफ्ते चलेगा कि नहीं चलेगा। कोयला आएगा कि नहीं आएगा। कितने बिजली के कारखाने कोयले के अभाव में बंद पड़े यही खबरें हुआ करती थीं। आज कोयला बिजली के कारखाने के दरवाजे पर खड़ा हुआ है। महीनों तक जितनी चाहिए उसके दरवाजे पर आकर के खड़ा हुआ है। भाइयों-बहनों इस काम को हमने किया है। आपने देखा होगा।

    कभी-कभी हमारे देश में, बड़े-बड़े Corruption की चर्चाएं तो होती हैं। लेकिन Corruptions समाज में निचले स्तर तक गरीब आदमी को इस प्रकार से लूटता रहा है, इस प्रकार से पैसे बर्बाद होते रहे हैं,ये मैंने भलीभांति देखा है। हमने आधार कार्ड को आधार नम्बर को सरकारी योजनाओं से जोड़ा और सरकारी योजना से जुड़ने के कारण, भाइयों-बहनों एक समय था जब हम ये देखते थे कि विधवा Pension हो, scholarship हो, दिव्यांगों के लिए कोई व्यवस्था हो, minority के लिए कोई व्यवस्था हो। सरकारी खजाने से पैसे जाते थे। लाभार्थियों की सूची भी आती थी। लेकिन जब हमनें जरा गहराई से देखा तो हमारे ध्यान में आया कि जिनका जन्म भी नहीं हुआ है, इस दुनिया में जिसने जन्म नहीं लिया, ऐसे लोग भी सूची में हैं। और इस प्रकार की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। ये बिचौलिये अरबों-खरबों रुपया निकाल देते थे और कभी किसी का ध्यान नहीं जाता था। इस आधार व्यवस्था के तहत हमनें ऐसे सारे बिचौलियों को बाहर किया। पैसा direct किया और अनुभव आया कि करोड़ों लोग ऐसे मिले हैं कि जो हैं ही नहीं लेकिन रुपये जाते थे। अरबों-खरबों रुपये जाते थे। अब वो तो बंद हुआ पैसे बच गए लेकिन हमनें कहा जो जरूरतमंद बेचारे बाहर रह गए थे, उनको ढूंढ-ढूंढ करके लाओ और ये बचे हुए पैसे, उनके खजाने में जाने चाहिए, जो अपने हक के लिए लड़ना चाहते हैं। Last man delivery उस दिशा में हमने काम किया है और आज उसको हमने पहुंचाया है।

    Transparency का बल, कोयले का Corruption कौन नहीं जानता है। आज कोयले की नीलामी कोई आरोप नहीं, दाग नहीं और हिन्दुस्तान में राज्यों को आने वाले दिनों में जैसे-जैसे कोयला निकलता जाएगा लाखों रुपयों की कमाई होती जाएगी।

    Spectrum की नीलामी एक जमाना था, आक्षेपों के घेरे में फंसी पड़ी थी। हमनें onlineउसका auction किया और आज देश का खजाना भी भरा, स्वस्थ Competition भी हुई और उसके कारण देश का लाभ हुआ।

    भाइयों-बहनों,आजका विश्व एक Global Economy के युग से गुजर रहा है। आज हर देश Inter Connected है, Inter dependent है। आर्थिक विषयों से पूरा विश्व एक प्रकार से किसी न किसी रूप से जुड़ा हुआ है। हम हमारे देश में कितनी ही प्रगति करें। लेकिन इसके साथ-साथ हमें वैश्विक Economy को ध्यान में रखते हुए, Global arena को ध्यान में रखते हुए, हमारे देश को भी वैश्विक मानकों में खरा उतारना पड़ेगा, उसकी बराबरी से लाना पड़ेगा। तब जाकर के हम Relevant रहेंगे, तब जाकर के हम अपना योगदान दे पाएंगे और तब जाकर के वक्त आने पर हम विश्व की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व भी कर पाएंगे। और इसलिए हमें अपने आपको हर पल सज्ज करना पड़ेगा। अगर अपने आप को सज्ज करना है तो वैश्विक मानकों के साथ हमें ताल मिलाना होगा। पिछले दिनों आपने देखा होगा world Bank हो, IMF हो, World Economic Forum हो, Credit-Rating Agencies हो, दुनिया में जितनी प्रकार की संस्‍थाएं हैं सबने भारत की प्रगति को सराहा है। भारत के एक के बाद एक निर्णयों के कारण कानूनी सुधार, व्‍यवस्‍था में सुधार, approach में बदलाव इन चीज को दुनिया बराबर देख रही है। Ease of doing business, हमने बहुत तेजी से हमारा ranking में सुधार किया है …निवेश के मामले में Foreign Direct Investment के मामले में हमारे देश में आज दुनिया के अंदर अगर सबसे पसंदीदा कोई देश है तो हिंदुस्‍तान बन गया है। विकास दर में देश की बड़ी-बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था को भी हमने Growth rate की दुनिया में, GDP में हमने पीछे छोड़ दिया है।

    भाइयों-बहनों, United Nation की एक संस्‍था ने अभी अनुमान लगाया है कि भारत आने वाले दो साल में क्या होगा? उन्‍होंने अनुमान लगाया है कि जो भारत, आज इस अर्थव्‍यवस्‍था के दायरे में दसवें नम्‍बर पर खड़ा है, उन्‍होंने UN के Institute ने कहा है कि दो साल के भीतर-भीतर यह दसवें नंबर से तीसरे नंबर पर आ जाएंगे। भाइयों-बहनों, वैश्‍विक मानकों में logistic support, infrastructure इन सारी बातों का भी आज लेखा-जोखा होता है। दुनिया के समृद्ध देशों के साथ तुलना होती है। भाइयों-बहनों,World Economic Forum में भारत के इस logistic support के संबंध में,infrastructure के संबंध में analysis करके कहा है पहले से भारत 19 rank ऊपर चला आया है और भारत बहुत तेजीसेऊपर आगे बढ़ रहा है।

    भाइयों-बहनों, हमारे देश में जिस प्रकार से हम एक वैश्विक संदर्भ में भी एक गतिशील और predictable अर्थव्‍यवस्‍था को ले करके आगे बढ़ रहे हैं।अभी-अभी जो GST का जो कानून पास हुआ, वो भी उसमें एक ताकत देने वाला काम हुआ है और वो सभी दल उसके लिए अभिनंदन के अधिकारी हैं।

    भाइयों-बहनों एक अभियान के संदर्भ में मैंने यही से चर्चा की थी। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ हम कोई काम टुकड़ों में नहीं करते हैं। हमारा एक integrated approach होता है और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ में हमने जो initiative लिए हैं, उसमें अभी भी मुझे समाज के सहयोग की आवश्यकता है। एक-एक मां-बाप को सजग होने की आवश्‍यकता है। हम बेटियों का सम्‍मान बढ़ाएं, बेटियों की सुरक्षा करें, सरकार की योजनाओं का लाभ लें। हमने सुकन्‍या समृद्धि योजना से करोड़ों परिवारों को जोड़ा है। जो बेटी बड़ी होगी तो उसकी गांरटी ले लेता है, हमने महिलाओं को लाभ हो, उस प्रकार की बीमा योजनाओं को सबसे ज्‍यादा बल दिया है। उसके कारण इनको फायदा होने वाला है। हमने इंद्रधनुष टीकाकरण की योजना, क्‍यों‍कि माताओं, बहनों को एक आर्थिक सशक्‍तीकरण, और एक health की भी सशक्‍तीकरण अगर यह दो काम कर लिए, शिक्षित कर लिया, आप मान कर चलिए घर में एक महिला भी अगर शिक्षित है, शारीरिक रूप से सशक्‍त है, आर्थिक रूप से स्‍वतंत्र हैं, एक महिला गरीब से गरीब परिवार को भी गरीबी से बाहर निकालने की ताकत रखती है। और इसलिए गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में महिलाओं का सशक्‍तीकरण, महिलाओं का स्‍वास्‍थ्‍य, महिलाओं की आर्थिक सम्‍पन्‍नता, शारीरिक सम्‍पन्‍नता उस पर बल दे करके हम काम कर रहे हैं और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों मुद्रा योजना, मुझे खुशी हुई मुद्रा योजना का लाभ साढ़े तीन करोड़ से ज्‍यादा परिवारों ने लिया और उसमें अधिकतम नये लोग थे, जो बैंक केदरवाजें पर पहुंचे। उसमें भी 80% करीब-करीब SC, ST, OBC के थेऔर उसमें भी बैंक में, मुद्रा बैंक में लोन लेने वाली 80% महिलाएं हैं। ये महिलाएं कैसे आर्थिक विकास में योगदान करेंगी। इसकी ओर आप ध्‍यान देते हैं।

    भाइयों-बहनों पिछले हफ्ते हमने निर्णय किया, जो हमारी माताएं-बहनें आज विकास यात्रा में भागीदार बनी हैं, लेकिन प्रसूति के बाद उसको छुट्टी चाहिए। पहले वो छुट्टी कम मिलती थी। अब हमने ये छुट्टी 26 हफ्ते की कर दी है, ताकि मां अपने बेटे का लालन- पालन कर सके।

    हमारे यहां बुनकर, Textile में काम करने वाले लोग, इनको, जो धागा बनाते हैं, धागे का लच्छा बनाते हैं। पहले उनको 100 रुपए मिलता था, हमने उसको 190 रुपए कर दिया ताकि मेरी वो मां, मेरी वो बहन, जो तार बनाने का काम करती हैं, उसको एक ताकत मिलेगी। जो सिल्क के काम में लगी हुई माताएं-बहनें हैं, जो बुनकर लगे हैं, उनके दाम में हमने 50 रुपये प्रति मीटर बढ़ा दिया और ये फैसला किया कि ये 50 रुपया व्यापारी को नहीं जाएगा, दलाल को नहीं जाएगा, बिचौलियों को नहीं जाएगा, जिस बुनकर ने उस सिल्क पर काम किया है, प्रति मीटर 50 रुपए सीधा उसके खाते में आधार के द्वारा जमा हो जाएंगे, मेरा बुनकर सशक्त बनेगा। उस दिशा में हमने ये योजनाएं है और उस योजनाओं का प्रभाव छोड़ रहा है।

    मेरे प्यारे देशवासियों, जब रेल को देखते हैं, डाकघर को देखते हैं तो हमें भारत की एकता भी नजर आती है। हम जितना ज्यादा भारत को जोड़ने वाले प्रकल्पों को आगे बढ़ाएंगे, हमारी व्यवस्थाओं में बदलाव लाएंगे, देश की एकता को बल देगा।और इसलिए हमने किसानों के लिए मंडी e-NAM की योजना की है। आज किसान अपना माल online हिंदुस्तान की किसी भी मंडी में बेच सकता है। अब वो मजबूर नहीं होगा कि अपने खेत से 10 किलोमीटर की दूरी की मंडी पर मजबूरन माल देना पड़े, सस्ते में देना पड़े और उसकी मेहनत की कमाई न हो। अब देशभर में e-NAM के द्वारा एक ही प्रकार की मंडी का Network खड़ा हो रहा है।

    GST के द्वारा Taxation का एक प्रकार से एक समानता का, समान व्यवस्था का परिणाम आने वाला है। जो भारत जोड़ने का भी एक काम करेगा।

    हमने बिजली में, आपको हैरानी होगी, एक इलाके में बिजली रहती थी कोई लेना वाला नहीं था और दूसरा इलाका बिजली के लिए तड़पता था, अंधेरे में जीता था, कारखाने बंद हो जाते थे और उसको बदलाव लाने के लिए One Nation-One Grid-One Price उसमें हमने सफलता पाई है और बहुत तेजी से जो कभी गर्मी में 10 रुपया यूनिट का दाम देना पड़ता था। मैं पिछले दिनों तेलंगाना गया था, उस दिन 1 रुपया 10 पैसे दाम था जो कभी 10 रुपया हुआ करता था ये One Price का परिणाम देश को जोड़ने के लिए काम होता है।

    हमारे देश का मजदूर एक जगह पर काम करता है, एक-दो साल के बाद नौकरी बदलता है, EPF में उसका पैसा कटता है लेकिन पैसा Transfer नहीं होता था और आपको हैरानी होगी, जब मैं सरकार में आया मेरे देश के मजदूरों को 27 हजार करोड़ रुपया EPF में पड़े थे कोई गरी‍ब – मजदूर लेने वाला नहीं था क्योंकि उसको इसकी पद्धति नहीं थी।

    हमने इस समस्या का समाधान करने के लिए एक Universal Account Number दिया हमारे मजदूरों को और उसके कारण अब उसके पैसे वो जहां जाएगा EPF का fund transfer होगा। मजदूर जब retire होगा तो उसके रुपए उसके हाथ जाएंगे, किसी सरकारी खजाने में सड़ते नहीं पड़े रहेंगे, उस काम को हमने किया है।

    चाहे भारतमाला हो, चाहे सेतूभारतम हो, चाहे Bharat Net हो ऐसे अनेक प्रकल्पों को हमने बल दिया है। इन सारे प्रकल्पों का हमारा उल्लेख भारत को जोड़ने की दिशा में भी हो, भारत के आर्थिक विकास की दिशा में भी हो, उस दिशा में काम कर रहे हैं।

    भाइयों-बहनों ये वर्ष अनेक प्रकार के महत्व का है। देश दक्षिण के संत श्रीमान रामानुजाचार्य जी की1000वीं जयंती मना रहा है, देश महात्मा गांधी के गुरू श्रीमद राजचंद्र जी जिनकी 150वीं जयंती मना रहा है, देश गुरू गोबिंद सिंह जी के 350वीं साल की जयंती मना रहा है, देश पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की शताब्दी का वर्ष मना रहा है। आज जब मैं रामानुजाचार्य जी को याद करता हूं तो एक बात मैं कहना चाहता हूं, हजार साल पहले, आज जब सामाजिक तनाव देखते हैं तो रामानुजाचार्य जी संत पुरुष, उन्होंने देश को क्या संदेश दिया था। रामानुजाचार्य जी कहते थे भगवान के सभी भक्‍तों को,भेदभाव और ऊंच-नीच का ख्‍याल किए बिना सेवा करो। उम्र-जाति के कारणों की वजह से किसी का भी अनादर मत करो, हर किसी का सम्‍मान करो। जो बात गांधी ने कही, जो बात अम्‍बेडकर ने कही, जो बात रामानुजाचार्य ने कही, जो भगवान बुद्ध ने कही, जो हमारे शास्‍त्रों ने कही, जो हमारे सभी आचार्य-महंतों, गुरूओं ने शिक्षको, ने कही वो है हमारी सामाजिक एकता की। समाज अगर टूटता है, साम्राज्‍य बिखर, ऊंच-नीच में बंट जाता है, स्‍पृश-अस्‍पृश में बंट जाता है तो भाइयो-बहनों वो समाज कभी टिक नहीं सकता है। बुराइयां हैं, सदियों पुरानी बुराइयां हैं, लेकिन बुराइयां अगर पुरानी हैं तो उपचार भी जरा ज्‍यादा कठोरता से करने पड़ेंगे, ज्‍यादा संवेदनशीलता से करने पड़ेंगे। होती है, चलती है, से सामाजिक समस्‍याओं का समाधान नहीं हो पाएगा, और ये दायित्‍व सवा सौ करोड़ देशवासियों का है। सरकारों ने समाज ने मिल करके समाज में जो टकराव की स्थितियां पैदा होती हैं, उसमें से हमें निकलना होगा।

    और भइयों-बहनों हम सबको, हम सबको सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ना होगा। हमने सबने अपने व्‍यवहार से सामाजिक बुराइयों से ऊपर उठना होगा, हर नागरिक को उठना पड़ेगा, और तभी जा करके हमसशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान बना सकते हैं। सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान, सशक्‍त समाज के बिना नहीं बन सकता है। सिर्फ आर्थिक प्रगति सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान की गारंटी नहीं है, सशक्‍त समाज, सशक्‍त हिन्‍दुस्‍तान की गारंटी है और सशक्‍त समाज बनता है सामाजिक न्‍याय के अधिष्‍ठान पर। सामाजिक न्‍याय के अधिष्‍ठान पर ही सशक्‍त समाज निर्माण होता है और इसलिए हमारा सबका दायित्‍व है कि सामाजिक न्‍याय पर हम बल दें। दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, मेरे आदिवासी भाई हों, ग्रामवासी हों या शहरवासी हो, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़ हो, छोटा हो या बड़ा हो, सवा सौ करोड़ देशवासी हमारा परिवार है, हम सबने मिलकर के देश को आगे बढ़ाना है और उसी दिशा में हमें काम करना होगा।

    भाइयो-बहनों, आज पूरे विश्‍व का ध्‍यान भारत की उस बात पर जाता है कि भारत एक युवा देश है। Eight hundred million , 65 प्रतिशत जनसंख्‍या, जिस देश के पास 35 साल से कम उम्र की हो, वो देश अपनी युवा शक्ति के द्वारा क्‍या कुछ नहीं कर सकता है। और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों, युवाओं को अवसर मिले, युवाओं को रोजगार मिेले, ये हमारे लिए समय की मांग है।

    आज जब हम पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी की जन्‍मशती की ओर आगे बढ़ रहे हैं तब, पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी कह रहे थे, जो महात्मा गांधी के भी विचार थे कि ‘आखिरी मानव का कल्‍याण’। पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय अंत्‍योदय के विचार को ले करके चले। आखिरी छोर के इन्‍सान के कल्‍याण, ये पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी की political philosophy का केंद्रवर्ती विचार था। आखिरी व्‍यक्ति के विचार में वो कहते थे, हर नौजवान को शिक्षा उपलब्‍ध होनी चाहिए, हर नौजवान के हाथ में हुनर होना चाहिए, हर नौजवान को अपने सपने साकार करने के लिए अवसर होना चाहिए। पंडित दीनदयाल जी के उन सपनों को पूरा करने के लिए देश के eight hundred million युवाओं के आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हमने अनेक initiativesलिए हैं। जिस प्रकार से सड़क बढ़ रही है, देश में सबसे ज्‍यादा गाडि़यों का उत्‍पादन हो रहा है, देश में ज्‍यादा, सबसे ज्‍यादा Software निर्यात हो रहा है, देश में 50 से ज्‍यादा नई मोबाइल की फैक्ट्रियां लगी हैं, ये सारी बातें नौजवानों के लिए अवसर देती हैं। अगर दो करोड़ door toilet बनते हैं, तो उसने किसी न किसी को रोजगार दिया है। कहीं से सीमेंट लिया है, कहीं से लोहा लिया है, कहीं से लकड़ी का काम हुआ है। काम का व्‍याप जितना बढ़ेगा, रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी, आज हमने उस दिशा में बल दिया है।

    उसी प्रकार से कोटि-कोटि युवकों के हाथ में हुनर हो। Skill development को mission के रूप में काम कर रहे हैं। हमने एक ऐसा कानून बदला। दिखने में बहुत छोटा है Model Shop and Establishment Act हमने राज्‍यों को advisory भेजी है कि क्‍या कारण है कि बड़े-बड़े mall तो 365 दिन चले, रात को 12 बजे तक चले, लेकिन गांव में एक छोटा-सा दुकान चलाने वाले को शाम के बाद दुकान बंद करनी पड़े? हर गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति भी दुकान चलाता है, उसको 365 दिन मौका देना चाहिए। क्‍या कारण है कि हमारी बहनों को रात को काम करने का अवसर न दिया जाए? हमने कानूनन व्‍यवस्‍था की है कि रात को भी हमारी बहनें काम पर जा सकती हैं। उनकी सुरक्षा और व्‍यवस्‍था का प्रबंध होना चाहिए लेकिन काम का अवसर मिलना चाहिए। ये चीजें हैं जो रोजगार बढ़ाने वाली चीजें हैं और भाइयों-बहनों हमारी इस दिशा में कोशिश है कि हम करने के लिए तैयार हैं।

    भाइयो-बहनों, हम वो इंसान है, ये वो सरकार है, हम चीजों को टालने में विश्‍वास नहीं करते हैं। हम टालना नहीं, टकराना जानते हैं और इसलिए जब तक हम समस्‍याओं को सामने होकर के भिड़ते नहीं हैं, नहीं होता है। हमारे देश में, मेरे देश के लिए जीने-मरने वाले सेना के जवान, आज जब हम आजादी का जश्‍न मनाते हैं, कोई मेरा जवान सीमा पर गोलियों को झेलने के लिए तैयार खड़ा होगा, कोई बंकरों में बैठा होगा, कोई कभी रक्षाबंधन पर अपनी बहन को भी नहीं मिल पाता होगा। फौज में, सेना में कितने जवान काम कर रहे हैं। आजादी के बाद 33 हजार से ज्‍यादा, हमारे पुलिस के जवानों का बलिदान हुआ। हम क्‍यों भूल जाए उनको? हम उनको कैसे भूल सकते हैं। यही तो लोग हैं जिनके कारण हम सुख-चैन की जिन्‍दगी जी सकते हैं। इसलिए यह पर्व उनको भी नमन करने का है और कई वर्षों से ‘One Rank-One Pension’ का मसला लटका पड़ा था। हम टालने वालों में से नहीं, हम टकराने वालों में से हैं। हमने उसको पूरा किया, ‘One Rank-One Pension’. हर हिन्‍दुस्‍तान के फौजी के घर में खुशहाली पहुंचा दी, इस काम को किया।

    हमारे देश के लोगों की भावना थी कि नेताजी सुभाष बाबू की फाइलें, लोगों के सामने खुलें। आज मैं सर झुकाकर के कहता हूं कि जो काम असंभव था, टालने में, टाला जा रहा था, जो भी होगा हमने उन फाइलों को खोलने का निर्णय कर दिया। परिवार को बुलाकर के फाइलें रख दी और वो निरंतर प्रक्रिया आज भी जारी है। दुनिया के देशों को भी मैंने कहा है कि आपके यहां जो फाइलें है, आप उसको खोलिए, दीजिए। हिन्‍दुस्‍तान को सुभाष बाबू और भारत के इतिहास को जानने का हक है। उस दिशा में हमने काम किया।

    बांग्‍लादेश, जिस दिन हिन्‍दुस्‍तान का विभाजन हुआ तब से लेकर के सीमा विवाद चले हैं। बांग्‍लादेश बना, तब से हमारा सीमा विवाद चला है। कई दशक चले गए। भाइयों-बहनों सभी दलों ने मिलकर के भारत-बांग्‍लादेश की सीमा विवाद का निपटारा कर दिया। संविधान में भी हमने बल दे दिया।

    भाइयो-बहनों, मध्‍यम वर्ग का व्‍यक्‍ति अपना मकान बनाना चाहता है, फ्लैट लेना चाहता है लेकिन बिल्‍डरों की जमात, वो बड़ा अच्‍छा printed booklet दिखाते हैं। वो भी बेचारा उसमें जुड़ जाता है। उसे technical knowledge तो होती नहीं, पैसे देता रहता है। समय के अंदर मकान नहीं मिलता है। जो कहा गया वो मकान नहीं मिलता है। मध्‍यम वर्ग के व्यक्‍ति के जीवन में एक बार ही तो मकान बना होता है। पूरी पूंजी लगा देता है। भाइयो-बहनों, हमने Real estate bill लाकर के नकेल डाल दी है, ताकि मध्‍यम वर्ग का परिवार जो भी व्‍यक्‍ति अपना घर बनाना चाहता होगा, आज उसको कोई रुकावट नहीं आएगी। इन कामों को करने की दिशा में हमने काम किया है।

    भाइयों-बहनों, मैंने पहले ही कहा श्रीमद राजचंद्र जी, जिनकी 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी उन्‍हें अपना गुरु मानते थे और श्रीमद राजचंद्र जी के साथ जब वो साउथ अफ्रीका में थे, तब भी श्रीमद राजचंद्र जी के साथ पत्र व्‍यवहार करते थे। एक पत्र में श्रीमद राजचंद्र जी ने गांधी जी के साथ हिंसा और अहिंसा की चर्चा की थी और राजचंद्र जी कह रहे थे कि जिस समय हिंसा का अस्‍तित्‍व रहा है, उसी समय से अहिंसा का भी सिद्धांत आया है। दोनों में अहम ये है कि हम किसे महत्‍व देते है या फिर इनमें किसका उपयोग मानव हित में हो रहा है।

    भाइयो-बहनों, हिंसा-अहिंसा की चर्चा हमारे देश में बहुत स्‍वाभाविक है।मानवता हमारी रगों में है। हम एक महान विराट संस्कृति के लोग हैं। ये देश विविधताओं से भरा हुआ है, रंग-रूप से भरा हुआ है। ये भारत मां का गुलदस्ता ऐसा है, जिसमें हर प्रकार की खुशबू है, हर प्रकार के रंग हैं, हर प्रकार के सपने हैं। भाइयों-बहनों, विविधता की एकता, ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है, एकता का मंत्र हमारी जड़ों से जुड़ा हुआ है। भाइयों-बहनों, जिस देश की 100 से ज्यादा भाषाएं हों, सैंकड़ों बोलियां हों, अनगिनत पहनाव हों, अनगिनत जीवन पद्धतियों हों, उसके बाद भी ये देश सदियों से एक रहा है, उसका मूल कारण हमारी सांस्कृतिक विरासत है। हम सम्मान देना जानते हैं, हम सत्कार करना जानते हैं, हम समावेश करना जानते हैं इस महान परंपरा को लेकर के हम चले हैं और इसलिए हिंसा और अत्याचार का हमारे देश में कोई स्थान नहीं है। अगर भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाना है, भारत के सपनों को पूरा करना है तो हमारे लिए हिंसा का मार्ग कभी कामयाब नहीं होगा।

    आज कहीं, जंगलों में माओवाद के नाम पर, सीमा पर उग्रवाद के नाम पर, पहाड़ों में आतंकवाद के नाम पर, कंधे पर बंदूक लेकर के निर्दोषों को मारने का खेल चला जा रहा है। त्राहि-त्राहि हो गया, ये धरती माता रक्त से रंजित होती गई हैं, लेकिन इस आतंकवाद के रास्ते पर जाने वालों ने कुछ नहीं पाया है। मैं उन नौजवानों को कहना चाहता हूं। ये देश हिंसा को कभी सहन नहीं करेगा, ये देश आतंकवाद को कभी सहन नहीं करेगा, ये देश आतंकवाद के सामने कभी झुकेगा नहीं, माओवाद के सामने कभी झुका नहीं। लेकिन मैं उन नौजवानों को कहता हूं अभी भी समय है, लौट आइए, अपने मां-बाप के सपनों की ओर देखिए, अपने मां-बाप की आशा-आकांक्षाओं की ओर देखिए, मुख्यधारा में आइए, एक सुख-चैन की जिंदगी जिए। हिंसा का रास्ता कभी किसी का भला नहीं करता है।

    भाइयों-बहनों, हम जब विदेश नीति की बातें करते हैं, मैं उसका लंबा-चौड़ा जिक्र करना नहीं चाहता हूं, लेकिन जिस दिन हमने शपथ लिया था, सार्क देशों के नेताओं को बुलाया था, हमारा संदेश साफ था कि हम सभी देश, अड़ोस-पड़ोस के हम सभी देश, हम सबकी एक सबसे बड़ी common चुनौती है गरीबी। आओ हम मिलकर के गरीबी से लड़ें, अपनों से लड़ाई लड़के तबाह तो हो चुके हैं, लेकिन अगर गरीबी से लड़ेंगे, तो हम तबाही से निकलकर समृद्धि की ओर चल पड़ेंगे और इसलिए मैं सभी पड़ोसियों को गरीबी से लड़ने का निमंत्रण देता हूं। हमारे देश के नागरिकों को, हर देश के नागरिकों को गरीबी से मुक्ति दिलाना- इससे बड़ी कोई आजादी नहीं हो सकती। हमारे कोई भी पड़ोसी देश का नागरिक जब गरीबी से आजाद होगा, तब हिंदुस्तान कितनी खुशी का अनुभव करेगा, जब हमारे पड़ोसी देश का गरीब, गरीबी से आजादी पाता हो।

    भाइयों-बहनों, मानवता की प्रेरणा से पले-बड़े लोग कैसे होते हैं और आतंकवाद को पुरस्‍कार देने वाले लोग कैसे होते हैं। मैं विश्व के सामने दो चित्र रखना चाहता हूं, दो घटनाएं उनके सामने रखना चाहता हूं और मैं विश्व को कहता हूं, मानवता में विश्वास रखने वाले लोगों को कहता हूं कि जरा तराजू से तौलकर के देखिए वो एक घटना जब पेशावर में आतंकवादियों ने निर्दोष बच्चों को मौत के घाट उतार दिया, घटना पेशावर में हुई थी, घटना आतंकवादी थी, निर्दोष-निर्दोष बालकों का रक्त बहाया गया था। ज्ञान के मंदिर को रक्त रंजित कर दिया था, निर्दोष बच्चों को मार दिया गया था।

    ये हिन्दुस्तान संसद की आँखों में आंसू थे। भारत का हर स्कूल रो रहा था। भारत का हर बच्चा पेशावर के बच्चों की मौत से सदमा अनुभव कर रहा था। उसकी आँखों से आंसू सूखते नहीं थे। आतंकवाद से मरने वाला पेशावर का बच्चा भी हमें दर्द देता था, दुख देता था। ये है हमारी मानवता से पली बड़ी संस्कृति की प्रेरणा, यही है हमारी मानवता, लेकिन और तरफ़ देख लीजिये कि जब आतंकवादियों को Glorify करने का काम हो रहा था। जहां आतंकवादी घटना में निर्दोष लोग मारे जाएं तो जश्न मनाए जाते हैं। ये कैसा आतंकवाद से प्रेरित जीवन है। कैसे आतंकवाद से प्रेरित सरकारों की रचनाएं हैं। ये दो भेद दुनिया भली भांति समझ लेगी। इतना मेरे लिए काफी है।

    मैं आज लालकिले की प्राचीर से कुछ लोगों का विशेष अभिनन्दन और आभार व्यक्त करना चाहता हूं। पिछले कुछ दिनों से बलूचिस्तान के लोगों ने, Gilgit के लोगों ने, पाक Occupied कश्मीर के लोगों ने, वहां के नागरिकों ने जिस प्रकार से मुझे बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है, जिस प्रकार से मेरा आभार व्यक्त किया है, मेरे प्रति उन्होंने जो सद्भावना जताई है, दूर-दूर बैठे हुए लोग जिस धरती को मैंने देखा नहीं है, जिन लोगों के विषय में मेरी कभी मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन ऐसे दूर सुदूर बैठे हुए लोग हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री को अभिनन्दन करते हैं, उसका आदर करते हैं, तो मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का आदर है, वो मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। और इसलिए ये सम्मान का भाव, धन्यवाद का भाव करने वाले बलूचिस्तान के लोगों का, Gilgit के लोगों का, पाक के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों का मैं आज तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ।

    भाइयों-बहनों, आज जब हम आजादी के 70 साल मना रहे हैं तब देश में स्वतंत्रता सैनिकों का बड़ा योगदान रहा है। इन स्वतंत्र सैनिकों का योगदान रहा है तो। आज मैं इन सभी मेरे श्रद्धेय स्वतंत्रता सैनिक परिवारजनों को, जो उनको सम्मान राशि मिलती है, जो पेंशन मिलती है। उस पेंशन में बीस प्रतिशत की वृद्धि करने का सरकार निर्णय कर रही है। जिस स्वतंत्रता सेनानी को अगर पहले 25 हजार मिलते थे, तो अब उसको 30 हजार रुपये मिलेंगे। और हमारे इन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को एक छोटा-सा, एक मेरा पूजा अर्चन का प्रयास है।

    भाइयों–बहनों, हमारे देश के आजादी कि इतिहास की बातें होती हैं, तो कुछ लोगों की चर्चा तो बहुत होती है। कुछ लोगों की आवश्यकता से भी अधिक होती हैं। लेकिन आजादी में जंगलों में रहने वाले हमारे आदिवासियों का योगदान अप्रतिम था। वो जंगलों में रहते थे। बिरसा मुंडा का नाम तो शायद हमारे कानों में पड़ता है। लेकिन शायद कोई आदिवासी जिला ऐसा नहीं होगा कि 1857 से लेकर के आजादी आने तक आदिवासियों ने जंग न की हों बलिदान न दिया हो। आजादी क्या होती है? गुलामी के खिलाफ जंग क्या होता है? उन्होंने अपने बलिदान से बता दिया था। लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियों को इस इतिहास से उतना परिचय नहीं है। सरकार की इच्छा है, योजना है। आने वाले दिनों में उन राज्यों में इन स्वतंत्र सेनानी जो आदिवासी थे। जंगलों में रहते थे। अंग्रेजों से जूझते थे। झुकने को तैयार नहीं थे। उनके पूरे इतिहास को समावेश करते हुए, इन वीर आदिवासियों को याद करते हुए एक स्थायी रूप से Museum बनाने के लिए जहां-जहां राज्य के अंदर कोई एकाध जगह हो सकती है जहां सबको समेट करके बड़ा Museum बनाया जा सकता है। और ऐसे अलग-अलग राज्यों में Museum बनाने की दिशा में सरकार काम करेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हमारे देश के लिए मर मिटने में आदिवासी कितने आगे थे, उसका लाभ मिलेगा।

    भाइयों-बहनों, महंगाई में कुछ चीजों की चर्चाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन हम अनुभव कर रहे हैं कि गरीब के घर में अगर बीमारी आ जाए, तो उसकी पूरी अर्थ रचना समाप्‍त हो जाती है। बेटी की शादी तक रूक जाती है। बच्‍चों की पढ़ाई तक अटक जाती है, कभी शाम को खाना भी नहीं मिलता है। आरोग्‍य सेवाएं महंगी होती जा रही हैं और इसलिए मैं आज लाल किले की प्राचीर से गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले मेरे इन परिवारों के आरोग्‍य के लिए सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। हम यह योजना ले करके आए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे किसी गरीब परिवार को आरोग्‍य की सेवाओं का लाभ लेना है, तो वर्ष में एक लाख रुपये तक का खर्च भारत सरकार उठाएगी, ताकि मेरे गरीब भाइयों को, इन आरोग्‍य की सेवाओं के कारण वंचित रहना न पड़े। उनके सारे सपने चूर-चूर न हो जाएं।

    और इसलिए मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों आजादी के इस पावन पर्व में एक नया संकल्‍प, नई ऊर्जा, नया उमंग ले करके आओ हम चल पड़ें। हमारे लिए जिन्‍होंने आजादी के लिए बलिदान दिया, उनसे प्रेरणा पा करके, आजादी के लिए जीने वालों के लिए प्रेरणा पा करके, देश के लिए मरने का मौका तो नहीं मिल रहा है, लेकिन देश के लिए जीने का मौका जरूर मिल रहा है। हम देश के लिए जी करके दिखाए, देश के लिए कुछ करके दिखाए, अपने दायित्‍वों को भी निभाएं, औरों को दायित्‍व के लिए प्रेरित भी करे। एक समाज, एक सपना, एक संकल्‍प, एक दिशा, एक मंजिल इस बात को ले करके हम आगे बढ़ें। इसी एक भावना के साथ मैं फिर एक बार महापुरूषों को नमन करते हुए जल, थल, नभ में हमारी रक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाले, हमारे पुलिस के नौजवान, 33 हजार शाहदतों को नमन करते हुए, मैं देश के भविष्‍य की ओर सपनों को देखते हुए, अपने आप को समर्पित करते हुए आज लाल किले की प्राचीर से आप सबको पूरी ताकत के साथ मेरे साथ बोलने के लिए कहा रहा हूं भारत माता की जय..

    आवाज दुनिया के हर कोने में जानी चाहिए –

    भारत माता की जय, भारत की जय।

    वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।

    जय हिंद, जय हिंद, जिय हिंद।

    बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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  • सूचना को कुचलने वाला आयोग

    सूचना को कुचलने वाला आयोग

    jyoti prakash भोपाल, ११ अगस्त। जिस म० प्र० राज्य सूचना आयोग पर प्रदेश भर में सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन करवाने की जिम्मेदारी है, उसी ने मनमानी व्याख्या, कार्यवाही तथा टाल-मटोल करते हुए इस अधिकार का माखौल बना रखा है। स्वाभाविक रूप से ही, उसकी यही प्रवृत्ति प्रदेश भर के सरकारी कार्यालयों में तेजी से फैल रही है। परिणाम यह हो रहा है सूचना के अधिकार के तहत्‌ सूचना प्राप्त करने के इच्छुक लोगों का यह अधिकार अवरुद्ध हो रहा है। (more…)

  • टीम की तरह आगे बढ़ेगा देश :नरेन्द्र मोदी

    टीम की तरह आगे बढ़ेगा देश :नरेन्द्र मोदी

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    भोपाल,9 अगस्त(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सवा सौ करोड़ देशवासी टीम इंडिया के रूप में देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। जनशक्ति में देश को आगे बढ़ाने की ताकत होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज अलीराजपुर जिले के चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में ‘आजादी 70 – याद करो कुर्बानी’ कार्यक्रम का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रव्यापी तिरंगा यात्रा का शुभारंभ भी किया।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज अगस्त क्रांति दिवस है। आज महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों से भारत छोड़ो का आव्हान किया था। आज फिर से अवसर है कि आजादी की लड़ाई में जिन लोगों ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया उनका स्मरण करें। उन्होंने शहीदों और उनके बलिदान को याद करते हुये कहा कि वे जिन महान उद्देश्यों को लेकर लड़े, उन उद्देश्यों की पूर्ति का प्रण लें। उन्होंने जिस भारत का सपना देखा, उसे पूरा करने का हर देशवासी संकल्प लें। संकल्प लें कि देश के लिये जियें और गाँव, गरीब, पीड़ित और शोषित, वंचितों के जीवन में बदलाव लाने के लिये काम करें। आजादी के बाद 70 वर्षों में देश का जितना विकास होना चाहिये था उतना हुआ नहीं। आज भी देश में हजारों गाँव ऐसे हैं जिनमें बिजली नहीं है। केन्द्र सरकार ने एक हजार दिन में इन गाँवों में बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया है। पिछले एक वर्ष में ऐसे आधे से अधिक गाँव में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। आज भी देश में बहुत से बच्चे शिक्षा से वंचित है। हर बच्चे को स्कूल पहुँचाने का संकल्प लें।

    कश्मीर के विकास के लिये हरसंभव मदद

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर हर देशवासी के लिये स्वर्ग भूमि है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंसानियत, कश्मीरियत और जमहूरियत का मार्ग अपनाया था। हम इसी मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। आजादी के सेनानियों ने जो आजादी देश को दिलाई वही आजादी हर कश्मीरी को भी मिली है। उन्होंने कहा कि मुट्ठीभर गुमराह हुए लोग कश्मीर की महान परंपरा को ठेस पहुँचा रहे हैं। हम कश्मीर को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाना चाहते हैं और कश्मीर की युवा पीढ़ी को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना चाहते हैं। उन्होंने कश्मीर के युवाओं का आव्हान किया कि कश्मीर को दुनिया का स्वर्ग बनाने के संकल्प के लिये मिलकर काम करें। कश्मीर में इंसानियत और कश्मीरियत को दाग नहीं लगने दिया जायेगा। देश के नौजवानों से उन्होंने आव्हान किया कि देश के विकास के लिये आगे आयें। विकास के मार्ग पर चलकर कठिनाइयों के हल खोजे जा सकते हैं। उन्होंने सभी राजनैतिक दलों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर एक स्वर से समर्थन किया। कश्मीर के विकास के लिये जो भी संभव होगा, वह किया जायेगा।

    श्री मोदी ने कहा कि पूरा हिन्दुस्तान आजादी के लिये एक होकर लड़ा था। आज फिर देश के रूप में एक सपने को लेकर आगे बढ़ने का अवसर है। देश के लिये कुछ करने का संकल्प लें। उत्साह और उमंग से काम करें, तो देश आगे बढ़ेगा।

    मुख्यमत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की जन्मभूमि पर आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी है। देश को आजादी दिलाने में हजारों देशभक्त और क्रांतिकारियों के बलिदान का महत्वपूर्ण योगदान हैं। सम्पूर्ण देश में 9 से 23 अगस्त तक क्रांतिकारियों को याद करने का उत्सव मनाया जायेगा। केन्द्र सरकार का यह प्रयास अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के राष्ट्र निर्माण के स्वच्छता, डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों में आगे आकर सहयोग करें। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि देशभक्ति के जज्बे से काम करें।

    पशुपालन एवं मत्स्य-पालन मंत्री श्री अंतरसिंह आर्य ने आदिवासी बोली में स्वागत भाषण िदया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी बहुल जिले में आये प्रधानमंत्री का प्रदेशवासियों की ओर से स्वागत है।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी का परम्परागत आदिवासी पगड़ी, जैकेट तथा कड़ा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्म-स्थली पहुँचकर श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।

    कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय शाह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे, पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान और सांसद श्री विनय सहस्त्रबुद्धे, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में जनता उपस्थित थी। आभार प्रदर्शन सहकारिता राज्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया।

  • खेती चली मुनाफे की ओर

    खेती चली मुनाफे की ओर

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    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। भारतीय खेती को बढ़ावा देने की दिशा में केन्द्र सरकार के सुधारों के साथ कदमताल करते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने भी बटाई पर खेती देना आसान बनाने की तैयारी कर ली है। बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्रीय सरकार ने खेती की ज़मीन को लीज़ पर देने और लेने वाले लोगों का जीवन आसान करने के लिए एक नया अध्यादेश बनाया है। मध्यप्रदेश में इसके लागू होने के बाद देश में खेती की ज़मीन बटाईदारी पर या लीज़ पर देना कानूनन अपराध नहीं बचेगा। दावा है कि नए नियमों से ग्रामीण भारत में गरीबी मिटाने, उत्पादकता बढ़ाने व विकास दर को तेज़ करने में मदद मिलेगी।

    केंद्र सरकार की थिंक टैंक संस्था नीति आयोग ने कुछ समय पहले एक कमेटी गठित की थी, जिसका उद्देश्य खेतिहर भूमि को लीज़ पर देने से जुड़ी समस्याओं को समझने और सुलझाने के सुझाव देना था। कमेटी ने विभिन्न राज्यों की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ‘खेतिहर भूमि लीजिंग एक्ट 2016’ तैयार कर हाल ही में सरकार को सौंपा है। राज्यों द्वारा इस एक्ट को अपनाए जाते ही पुराने सारे नियम समाप्त हो जाएंगे।इसी पर अमल करते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने भी ये फैसला लिया है कि वो खेती को मुनाफे का धंधा बनाने की दिशा में सभी बदलाव स्वीकार करेगी।

    जानकारों का कहना है कि नया एक्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे गांव का एक खेती जानने वाला किसान ज़मीन के आभाव में मजदूरी नहीं करेगा। अब बिना डर के जब भूस्वामी उसे अपना खेत लीज़ पर देगा तो वो खेती कर सकेगा।कृषि अर्थशास्त्री टी. हक़ की अध्यक्षता वाली कमेटी ने ही नीति आयोग के तहत ये नया एक्ट तैयार किया है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 14 करोड़ किसान हैं। पुराने नियमों के हिसाब से बटाईदारों की गिनती किसानों में नहीं होती थी जिसके कारण उन्हें सरकारी योजनाओं से लेकर खेती की सामग्रियों पर मिलने वाली आर्थिक मदद भी नहीं मिल पाती थी। वे फसलों का मुआवजा भी नहीं ले पाते थे।

    डॉ हक ने बताया कि ज़मीन बटाई पर देने वाला और बटाईदार के बीच कोई लिखित समझौता नहीं होता था। ऐसे में बटाईदार फसल बीमा नहीं करवा पाते थे, न ही किसी आपदा में फसल गंवाने पर सरकारी राहत के हकदार होते थे। अब नए एक्ट के लागू होते ही बटाईदार किसान भी इन सभी योजनाओं व सहायताओं में अपना हक पा सकेंगे, भूस्वामी उनका हक नहीं छीन पाएगा।

    नए नियम के बाद अब कोई भू-मालिक भी दोतरफा कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करके एक नियत समय के लिए बिना किसी डर अपनी ज़मीन बटाईदार या खेती के लिए लीज़ पर दे सकेगा। देश में बहुत सी खेती की ज़मीन का सही इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं हो पाता है क्योंकि ज़मीन मालिक गाँव में नहीं रहता या खेती छोड़ चुका है। लेकिन वह किसी अन्य किसान को अपनी खेती बटाई या ठेके पर भी सिर्फ इस डर से नहीं देता था कि कहीं उसकी ज़मीन न चली जाए।

    नियमत: यदि कोई बटाईदार एक नियत समय से ज्यादा किसी खेत पर बटाई पर खेती करता रहा है तो वह उस खेत को अपने नाम कराने का हकदार है।

    डॉ हक के अनुसार, “भूस्वामियों को बढ़ावा मिलेगा कि वो अपनी ज़मीन गंवाने का डर पाले बिना उसे लीज़ पर देकर मिलने वाले धन को खेती के बाहर किसी इकाई में लगाएं। इससे देश में व्यावसायिक विविधता आएगी, जो ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।”

    कमेटी ने यह पाया था कि देश में खेतिहर भूमि का पूरा प्रयोग इसलिए भी नहीं हो पा रहा क्योंकि अलग-अलग राज्यों में खेती की ज़मीन को लीज़ पर देने को लेकर अलग-अलग नियम हैं। ज्यादातर खेतिहर भूमि की लीज़ को बढ़ावा नहीं देते जो कि देश की खाद्य उत्पादकता और कृषि विकास के लिए एक समस्या है।

    देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, कर्नाटक, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खेत लीज़ पर देना प्रतिबंधित रहा है, केवल विधवा, अवयस्क, शारीरिक अक्षमता वाले व सैनिक किसानों को छूट दी गई है। केरल में भी बटाईदारी प्रतिबंधित रही है, लेकिन हाल ही में सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को कुछ छूट दी है।

    इसी तरह पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्यों में ज़मीन लीज़ पर देना तो गैरकानूनी नहीं है लेकिन बटाईदारों को यह अधिकार है कि निर्धारित समय तक बटाई पर खेती करने के बाद वे भूस्वामी से ज़मीन खरीदने के हकदार हो जाते हैं।

    केवल आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, और पश्चिम बंगाल में ही बटाईदारी के सरल कानून हैं।

    खेती की ज़मीन गैर-कृषि कार्यों के लिए भी लीज़ पर देना बने आसान

    नए अध्यादेश का प्रारूप तैयार करने वाले नीति आयोग के वाइस चेयरमेन अरविंद पनगढ़िया ने एक्ट का ज़िक्र करते हुए अपने आधिकारिक ब्लॉग पर लिखा, “मेरा मानना है कि इस एक्ट में खेती की ज़मीन को खेती के उपयोगों में ही लीज़ पर दिए जाने के नियम को और विस्तार दिया जाना चाहिए, ताकि खेती की ज़मीन को उद्योगों या गैर-कृषि कार्यों के लिए भी लीज़ पर देना आसान हो सके”।

    जानकारों की राय

    नया एक्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे गांव का एक खेती जानने वाला किसान ज़मीन के आभाव में मजदूरी नहीं करेगा। अब बिना डर के जब भूस्वामि उसे खेत लीज़ पर देगा तो वो खेती करेगा और गौरव के साथ जिंदगी काटेगा।

    – डॉ टी. हक, अध्यक्ष, खेतिहर भूमि लीज़िंग एक्ट कमेटी, नीति आयोग

    यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। बटाईदार किसानों की हालत बुरी है देश में, इससे सुधार में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं अनाज उत्पादन भी सुधरेगा क्योंकि जो छोटा किसान खेती बढ़ाना चाहता है वो अब असानी से लीज़ पर खेत लेगा।

    – राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन

    यह सही दिशा में उठाया गया कदम है उम्मीद है कि आगे चलकर यह कॉर्पोरेट सेक्टर के खेती में उतरने का रास्ता बन सकता है। नए एक्ट में अभी तो छोटे किसान द्वारा बड़े किसान को ज़मीन लीज़ पर देने का प्रावधान नहीं है पर आगे एक्ट में यह परिवर्तन होते ही, कॉर्पोरेट सेक्टर छोटे किसानों की ज़मीन लीज़ पर ले लेंगे। इससे इकोनोमी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • सुविधाजनक बने प्रदेश के शहर

    सुविधाजनक बने प्रदेश के शहर

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    भोपाल (पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।
    राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्र के विकास की सुनियोजित योजनाएँ बनायी हैं। अधोसंरचना हो या बुनियादी नागरिक सुविधाएँ, नागरिकों को उपलब्ध करवाने के लिये गुणवत्तापूर्ण काम सभी नगरीय क्षेत्र में किये गये हैं। मेट्रो रेल की परिकल्पना हो या लोक परिवहन का मामला, स्वच्छता की बात हो या ई-गवर्नेंस, शहरी गरीबों को आवास सुविधा या उनके लिये पेयजल उपलब्ध करवाना, इन सभी बुनियादी सुविधाओं के लिये नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के जरिये निरंतर काम किया जा रहा है।

    प्रदेश की 2 करोड़ 59 हजार की आबादी वाले नगरीय क्षेत्रों में नगरीय सुविधाओ के लिये हुए कामों ने शहरी अधोसंरचना की तस्वीर बदल दी है। इस उद्देश्य के लिये वर्ष 2015-16 में 7812 करोड़ 98 लाख रुपये का बजट था। वर्ष 2002-03 में यह बजट मात्र 738 करोड़ था। वर्ष 2005 से प्रदेश के 4 बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन में 2679 करोड़ की 28 परियोजना स्वीकृत की गयी हैं। अन्य छोटे तथा मझौले शहरों में 114 निकाय की 181 परियोजना स्वीकृत की गयी हैं। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में 1500 करोड़ में से 288 नगरीय निकाय को 1403 करोड़ 15 लाख रुपये के कामों के लिये स्वीकृति दे दी गयी है।

    भोपाल एवं इंदौर के लिये देश का प्रथम लाइट मेट्रो सिस्टम प्रक्रिया में है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्थित हेरीटेज स्मारकों/स्थलों/भवनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये वर्ष 2013-14 में शहरी विरासत संरक्षण एवं संवर्धन योजना शुरू की गयी है। स्वर्ण जयंती शहरी स्व-रोजगार योजना में वर्ष 2013-14 तक 2 लाख 14 हजार 76 हितग्राही तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम में 4 लाख 18 हजार 411 हितग्राही को प्रशिक्षण दिया गया। अक्टूबर, 2013 में इस योजना के स्थान पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन शुरू किया गया है।

    मध्यप्रदेश अर्बन डेव्हलपमेन्ट कम्पनी

    नगरीय निकायों की वर्तमान क्षमता तथा मानव प्रबंधन में कमी के कारण परियोजनाओं को समय से पूरा करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने और अधोसंरचना के काम समय-सीमा में क्रियान्वित करने के लिये मध्यप्रदेश अर्बन डेव्हलपमेंट कम्पनी बनायी गयी है। कम्पनी द्वारा निकायों को तकनीकी तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के साथ निकाय-स्तर पर स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी किया जायेगा।

    स्मार्ट-सिटी

    भारत सरकार की स्मार्ट-सिटी योजना में पहले चरण में प्रदेश के 3 शहर भोपाल, इंदौर और जबलपुर का चयन किया गया है। स्मार्ट-सिटी योजना में प्रदेश के नागरिकों को मुख्य बुनियादी सुविधाएँ, स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण, जीने के लिए उच्च-स्तरीय गुणवत्ता और स्मार्ट समाधान प्राप्त होगा। राज्य शासन स्तर पर अन्य शहरों को स्मार्ट-सिटी बनाने की कार्य-योजना भी तैयार की जा रही है।

    शहरी गरीबों को आवास

    शहरों में गरीबों के लिये आवास उपलब्ध करवाने के लिये ‘सबके लिए आवास” योजना बनाई गयी है। प्रधानमंत्री आवास योजना में भारत सरकार द्वारा ग्वालियर शहर के एक्शन प्लान को देश के सभी राज्य में मॉडल के रूप में मान्य किया गया है। वर्ष 2018 तक शहरी गरीबों के लिये 5 लाख घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। एक हजार करोड़ रुपये की लागत से 50 हजार शहरी गरीब आवासों का निर्माण किया जायेगा।

    अटल मिशन फॉर रिज्युवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफार्मेशन

    मध्यप्रदेश ने भारत सरकार की अटल मिशन फॉर रिज्युवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफार्मेशन योजना में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। योजना में स्वच्छ पेयजल, सीवरेज कनेक्शन, वर्षा जल के निकासी, हरित क्षेत्रों में विकसित एवं शहरी परिवहन को सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के 34 शहर का चयन किया गया है।

    प्रदेश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में केन्द्र शासन से 33 प्रतिशत, राज्य शासन से 50 प्रतिशत एवं नगरीय निकायों द्वारा 17 प्रतिशत अंशदान के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है एवं प्रदेश के 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में केन्द्र शासन से 50 प्रतिशत, राज्य शासन से 40 एवं नगरीय निकायों के 10 प्रतिशत अंशदान के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन एवं स्वच्छ भारत अभियान

    स्वच्छ भारत मिशन में आगामी 5 वर्ष के लिये 5209 करोड़ 14 लाख रुपये की स्वच्छता कार्य-योजना में व्यक्तिगत शौचालय, सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे काम करवाये जा रहे हैं। दिसम्बर-2015 तक 50 लाख घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवायी जा चुकी है। सभी 52 हजार गाँव को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य है। अभी 1500 से अधिक गाँव को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है।

    राज्य सरकार ने शहरों की स्वच्छता के लिये मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन प्रारंभ किया था जिसे भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता के स्वच्छ भारत मिशन में शामिल किया गया है। संपूर्ण राज्य में व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। चार लाख से अधिक शौचालयों को स्वीकृत कर डेढ़ लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कर मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। सामुदायिक शौचालयों में 5068 से अधिक सीट्स का निर्माण करवाया जा चुका है।

    सार्वजनिक क्षेत्रों में स्वच्छता बनाये रखने के लिये 637 से अधिक सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालयों की स्वीकृति दी गई है। इसमें से 208 से अधिक सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया जा चुका है।

    नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये सफाई उपकरण जैसे- छोटा कचरा वाहन, बेलिंग मशीन, काम्पेक्टर एवं मड पम्प आदि के लिये नगरीय निकायों को आर्थिक सहायता दी गई है। प्रदेश के निकायों के क्लस्टर बनाकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जन-निजी भागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है।

    योजना में घर-घर से कचरा एकत्रित कर क्षेत्रीय लेण्डफिल साईट तक ले जाकर वैज्ञानिक तरीके से उसका डिस्पोजल किया जायेगा। इससे पर्यावरण का संरक्षण होगा।

    घर-घर से कचरा एकत्रित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जाकर वर्ष 2016-17 में 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति का उद्देश्य है। स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन के लिये सूचना शिक्षा संप्रेषण के माध्यम से जन-जागरूकता का काम भी किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार एवं राज्य सरकार के 50:50 प्रतिशत अंशदान के अनुपात में क्रियान्वित किया जा रहा है।

    मेट्रो रेल परियोजना

    राज्य शासन द्वारा प्रदेश के नागरिकों को उच्च स्तरीय लोक परिवहन सुविधा प्रदान करने तथा प्रदेश को विश्व परिवहन मानचित्र पर स्थान प्रदाय करने भोपाल एवं इंदौर शहरों में स्टेट-ऑफ-आर्ट मेट्रो परियोजना वर्ष 2021-2022 तक क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया है। जबलपुर एवं ग्वालियर के लिये भी मेट्रो रेल परियोजना के लिये डीपीआर प्रक्रिया में है।

    मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कंपनी का गठन किया जा चुका है। योजना में भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो के लिये प्रस्तावित नेटवर्क की कुल लंबाई क्रमशः 95 किलोमीटर एंव 103 किलोमीटर है। प्रथम चरण में भोपाल में 28 किलोमीटर और इंदौर में 31 किलोमीटर लागत 14 हजार करोड़ रुपये से निर्माण काम प्रस्तावित है।

    शहरी लोक परिवहन

    भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन नगर के लिये पार्किंग, लोक परिवहन एवं ट्रांजिट ओरिएन्टेड डेव्हलपमेंट मास्टर-प्लान की तैयारी की जा रही है।

    शहरों में बढ़ते शहरीकरण से वाहनों की संख्या में हो रही बढ़ोत्तरी से शहरी यातायात बेतरतीब हो रहा है तथा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। ऐसी स्थिति में शहरी लोक परिवहन अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। इस कार्य को प्राथमिकता देते हुए इसे दृष्टि पत्र 2018 में मिशन के रूप में रखा गया है।

    सुरक्षित एवं सुगम यातायात के लिये प्रदेश के प्रमुख शहरों में यातायात सूचना प्रबंधन एवं नियंत्रण केन्द्र की स्थापना के लिये परियोजना प्रतिवेदन तैयार करवाया जा रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन नगरों के लिये पार्किंग, लोक परिवहन, विज्ञापन एवं ट्रान्जिट ओरिएन्टेड डेव्हलपमेंट के मास्टर प्लान तैयार करवाये जा रहे हैं।

    प्रदेश के चार शहर- भोपाल में 225, इन्दौर में 175, जबलपुर में 119 एवं उज्जैन में 89 आधुनिक एवं आरामदायक बसों के माध्यम से लोक परिवहन बस सेवा संचालित है। प्रदेश के 21 शहर के लिये कम्प्रेहेन्सिव मोबेलिटी प्लान तैयार करवाये जा रहे हैं।

    प्रदेश के शहरों में लोक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ किये जाने के लिये राज्य-स्तरीय डेडीकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फण्ड एवं शहर स्तरीय डेडीकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फण्ड का गठन किया गया है। इन दोनों फण्ड के लिये इस वित्त वर्ष में 48 करोड़ का बजट प्रावधान है।

    प्रदेश के 20 नगरीय निकायों में लोक परिवहन के लिये प्रस्ताव भारत सरकार को अमृत योजना में स्वीकृत की जा चुकी हैं।

    ई-गवर्नेंस एवं शहरी सुधार योजना

    बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए नगरीय निकायों की कार्य-प्रणाली में सुधार की जरूरत है। शहरी सुधार कार्यक्रम में वित्तीय सुधार, प्रशासकीय सुधार, ई-गवर्नेंस, सम्पत्ति कर एवं उपभोक्ता प्रभार में सुधार इत्यादि शामिल है। इसके लिए वर्ष 2013-14 से ”शहरी सुधार कार्यक्रम” योजना शुरू की गयी है।

    नगरीय निकायों की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता तथा नागरिकों की सुविधा के लिये राज्य-स्तर से अनुदान देकर ”ई-नगरपालिका परियोजना” शुरू की गई है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया योजना को देखते हुए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ई-गवर्नेंस रिफार्म का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    प्रदेश के सभी नगर निगमों में भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में ऑनलाईन भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है। इस परियोजना में मैदानी जाँच के लिये भी मोबाईल ऐप की सुविधा भी उपलब्ध करवायी गयी है। नागरिकों को ”फायर एनओसी” ऑनलाईन देने का काम भी शुरू किया गया है।

    नगरीय निकायों में राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से जियोग्राफिकल इन्फार्मेशन सिस्टम द्वारा आधुनिक सेटेलाईट नक्शे के माध्यम से घर-घर सर्वे का काम शुरू करवाया गया है। 44 निकायों में यह काम पूरा कर लिया गया है, 79 नगरीय निकायों में काम प्रगति पर है। कई निकायों में सम्पत्ति कर की वसूली में 50 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

    सूचना प्रौद्योगिकी उन्नयन

    सूचना प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना में जी.आई.एस. तकनीक पर तैयार किये गये खसरावार भूमि उपयोग मानचित्र की जानकारी के लिये 4 नगरों को आनलाईन किया जा चुका हैं।

    राज्य नगर नियोजन संस्थान द्वारा 4 नगरों की वेबबेस्ड जी.आई.एस. एप्लीकेशन तैयार करवाये जाने की कार्यवाही प्रचलन में हैं।

    मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना

    प्रदेश के ऐसे नगरीय निकाय जहाँ भारत सरकार की अमृत योजना और बाह्य पोषित योजना में पेयजल योजनाएँ प्रस्तावित नहीं है, ऐसे नगरीय निकाय को मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में शामिल किया गया है। योजना की शुरूआत वर्ष 2012-13 में की गई। कुल 135 नगरीय निकाय में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस वित्त वर्ष में इस योजना में 122 करोड़ से ज्यादा का बजट प्रावधान है। दृष्टि-पत्र 2018 के अनुसार प्रदेश के सभी नगरों में सतही तथा स्थाई जल-स्त्रोतों से 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाना है।

    नगरों में पेयजल उपलब्ध करवाने के लिये यूआईडीएसएसएमटी योजना में 114 शहर में 179 परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने के लिये भी 322 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    सिंहस्थ-2016

    राज्य सरकार ने प्रदेश में 12 वर्ष के अन्तराल पर होने वाले महापर्व सिंहस्थ का सफल आयोजन करवाया। महापर्व की तैयारी नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग ने अन्य सहयोगी विभाग के माध्यम से वर्ष 2011 से ही शुरू कर दी थी। इस अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन को भव्य और चिरस्मरणीय बनाने के लिये श्रेष्ठ व्यवस्थाएँ और आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण करवाया गया। श्रद्धालुओं को सुगमता के लिये उज्जैन, इंदौर, देवास, ओंकारेश्वर, मंदसौर शहर में रेलवे ओव्हर-ब्रिज, पुल, सीमेन्ट-कांक्रीट सड़क के साथ क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने के लिये नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना का निर्माण किया गया।

  • ऐसे ही डूबी कांग्रेस की महानता

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    कोयला नीलामी कांड से जनचर्चा के घेरे में आए नवीन जिंदल दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस महान पार्टी है। लोग इसमें आते जाते रहते हैं इसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। भारत में एक कहावत हमेशा कही जाती है कि रस्सी जल जाए पर बल न जाए। कमोबेश यही हालत इन दिनों कांग्रेस की है। मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस और भी दुर्गति में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव कांग्रेस को उसकी परंपराओं की नींव पर ही पुख्ता करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनके प्रयास एक दिन मरने की कगार पर खड़ी कांग्रेस में जान फूंक देंगे। कांग्रेस के कई बड़े नेता इसी मुगालते में जी रहे हैं। हकीकत ये है कि गया हुआ समय कभी वापस नहीं आता। कांग्रेस का भी एक समय था। आजादी के दौर में तो पूरे देश के जमींदारों, सामंतों पूंजीपतियों ने कांग्रेस के बैनर पर ही गरीबों को लामबंद करने का करिश्मा किया था। तब मुगल शासकों को निपटाने में इस्तेमाल हुए अंग्रेज भारत के सेठों को ही लूटने में लग गए थे। उन्होंने नए नए कानून बनाकर रियासतों से लेकर राजे रजवाड़े तक हड़प लिए थे। जाहिर था कि तब अंग्रेजों से निपटना भारत के हर वर्ग हर जाति समूह और हर आम आदमी की जरूरत थी। उस सफलता के बाद निपटने और निपटाने की नीति का खात्मा कर दिया जाना था। गांधीजी ने तो बाकायदा अपने भाषणों में कहा कि कांग्रेस का काम खत्म हो गया है इसे अब भंग कर दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद नेहरू और उनके सहयोगियों ने नए सिरे से कहानी लिखने के बजाए लोकप्रिय कांग्रेस के बैनर पर ही सवारी गांठने का फैसला कर लिया। उसके बाद कांग्रेसियों की हर नई पीढ़ी सफलता की गारंटी वाली इस सत्ता को छोड़ने राजी नहीं हुई। कभी अंग्रेजों से करीबी रखने वाली कांग्रेस अंग्रेजों के फार्मूलों पर ही देश में राज करने लगी। उसके नेताओं को अच्छी तरह पता है कि सत्ता में बने रहने के लिए हमें समाज के किस तबके को खुश रखना है। वे कौन से साधन अपनाने हैं कि गरीब का नाम लेकर अमीरों को खुश किया जाए। यही वजह है कि कांग्रेस हमेशा से गरीबी हटाओ का नारा तो लगाती रही लेकिन गरीबों को गरीब बनाए रखने की नीति पर ही काम करती रही। नतीजतन हिंदुस्तान में उत्पादकता का ग्राफ कभी नहीं बढ़ सका। जितनी उत्पादकता बढ़ी उतनी ही जनसंख्या बढ़ गई और संसाधन फिर कम पड़ गए। यही वजह है कि आज सवा सौ करोड़ आबादी वाले देश की मुद्रा ब्रिटेन की मुद्रा के सामने भिखारी बनी नजर आती है। डालर के सामने ही वह कराहती नजर आती है। कई छोटे छोटे देशों की मुद्रा भी भारत की मुद्रा के सामने पहलवान की तरह सीना ताने खड़ीं हैं। गरीबों और अमीरों के बीच लगातार बढ़ते इस अंतर के कारण ही असंतोष फैला और लोगों ने नरेन्द्र मोदी की आवाज में अपनी आवाज मिलाकर कांग्रेस को विदा कर दिया। हार के चीथड़े पहिनने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं का दंभ जहां का तहां खड़ा है।रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। कांग्रेस के नेता अपने ऐंठ भरे दावे करने से नहीं चूक रहे हैं। वहीं वे आम इंसान की भावनाओं को भी समझने तैयार नहीं है।
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    हाल में जब मुख्यमंत्री निवास पर दद्दाजी ने मिट्टी के शिवलिंग बनाने का अभियान चलाया तब भक्तों के बीच भजनों का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अपने परिवार के साथ मौजूद थे। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी साधना जी ने प्रफुल्लित मुख्यमंत्री के गाल में प्यार भरी चिकोटी काट ली। ये मुख्यमंत्री बने आम नागरिकों की भावनाएं ही थीं लेकिन कांग्रेस उसे तमाशा बनाने में लग गई। कांग्रेसियों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की हरकतें उचित नहीं हैं। ये बात सही है कि आमतौर पर स्त्री और पुरुष के बीच इस तरह की चुहलबाजियां घरों के भीतर ही होती हैं। पर ये भी सही है कि ये आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर हो रहा था। इस आयोजन में भी मुख्यमंत्री जी सपत्नीक शामिल थे। ये आयोजन की सफलता ही कही जाएगी जिसने उसमें शामिल लोगों के बीच दूरियां घटा दीं। ऐसे आयोजन की तारीफ की जानी चाहिए। इसके बावजूद कांग्रेस के नेता निहायत पारिवारिक घटना को तूल देने में जुट गए हैं। कांग्रेस को प्रदेश के उन मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी जो आम जनता को प्रभावित करते हैं। जिनसे प्रदेश के आम लोगों का जीवन संवारा जा सकता है। लेकिन वह ये नहीं कर रही है। ये भी उसकी परंपरा है। वह आम लोगों का नाम भले ही लेती रहती हो पर हमेशा वह बड़े लोगों के मुद्दे ही उठाती रही है। इस मामले में भी वह मुख्यमंत्री पर निशाना साधकर जनता के मूलभूत मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। उसे इस नीति से बाज आना चाहिए। अभी तो जनता ने उसे विपक्ष में बिठा दिया है। यदि उसने आम जनता की आवाज बनने के बजाए इसी तरह के दांव पेंच न छोड़े तो वह दिन दूर नहीं जब लोग कांग्रेसियों को देखते ही उन्हें हकालने लगेंगे।

  • आनलाईन लीक हुई सुल्तान

    आनलाईन लीक हुई सुल्तान

    salman-sultan मुंबई(फिल्मसिटी न्यूज)।खबरें आ रही हैं कि ताजा रिलीज हुई सलमान खान की ‘सुल्तान’ ऑनलाइन लीक हो गई। कहा जा रहा है कि सुल्तान रिलीज से ठीक एक दिन पहले ही लीक हुई है। साइबर क्राइम एक्सपर्ट दीप शंकर के मुताबिक फिल्म की कॉपी डार्कनेट पर मौजूद है और जल्द ही यह टॉरेंट पर भी उपलब्ध होगी। (more…)

  • बारिश में लें सेहत का आनंद

    बारिश में लें सेहत का आनंद

    barish chatri
    भोपाल। इस बार वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी को सच साबित करते हुए बारिश लगातार हो रही है।गरमी के सीजन के बाद तेजी से ठंडी होती धरती पर कई बीमारियां भी फैलने लगीं हैं। हर किसी को इस सुहाने मौसम का पूरा लुफ्त उठाने की इच्छा होती है पर साथ ही इस मौसम मे लोग अक्सर जल्दी बीमार हो जाते है।

    बारिश के मौसम में मलेरिया,डेंगू ,सर्दी-खांसी,जुलाब,उलटी,टाईफ़ोइड,त्वचा रोग,पीलिया इत्यादी अनेक रोग फैलते है। जिस तरह हम बारिश से बचने के लिए छाते के इस्तेमाल करते है ठीक उसी तरह बरसात के मौसम मे फैलनेवाली इन बीमारियों से बचने के लिए हमें कुछ एहतियात रूपी छाते का इस्तेमाल करना चाहिए।
    वर्षा ऋतु में नीचे दिए हुए जरुरी एहतियात बरते !
    १) हमेशा ताजे और स्वच्छ सब्जी / फल का सेवन करे।
    • ध्यान रहे की खाने से पहले फल / सब्जी को अच्छे से स्वच्छ पानी से धो कर साफ कर ले,खास कर हरी पत्तेदार सब्जी।
    • बासी भोजन,पहले से कटे हुए फल तथा दुषित भोजन का सेवन न करे ।
    • हमेशा ताजा गरम खाना खाए।
    • इस मौसम में सब्जी / फल जल्दी ख़राब हो जाते है इसलिए हमेशा ताजा फल या सब्जी का प्रयोग करे।
    • इन दिनों में हमारी पाचन शक्ति सबसे कम होती है।इसलिए जरुरी है अधिक तला,भुना खाना न खाया जाए बल्की ऐसा भोजन खाया खाए जो आसानी से पच जाए।जब भूख लगे तब ही और जीतनी भूख हो उतना ही आराम से पचने लायक खाना लेना चाहिए।
    • ज्यादा ठंडा,खट्टा न खाए।ज्यादा नमक वाली चीजे जैसे चिप्स,कुरकुरे,चटनी,पापड कम खाए क्योंकी इस मौसम मे शरीर पानी रुकने की संभावना ज्यादा होती है।
    २) बाहर की चीजें न खाएं

    • बाहर का सड़क के किनारे मिलनेवाला या होटल का खाना खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। .
    • बाहर का खाना खाने से जुलाब,उलटी,टाईफ़ोइड इत्यादी गंभीर रोग हो सकते है।
    • सड़क के किनारे बेचे जानेवाले चायनिझ फ़ूड,भेल,पानी पूरी यह फ़ूड पॉईजनिंग होने के प्रमुख कारण है।

    ३) साफ पानी खूब पिएं

    • वर्षा ऋतु में हवा में अधिक नमी होने के कारण शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती है और साथ ही पसीना भी ज्यादा आता है,ऐसे में जरुरी है की शरीर में पर्याप्त पानी का प्रमाण रखने के लिए भरपूर पानी का सेवन करे।
    • हमेशा उबाल कर ठंडा किया हुआ या फ़िल्टर किये हुए स्वच्छ पानी का सेवन करे।कम से कम १५ मिनट तक पानी अवश्य उबाले।
    • ठंडा पेय पीने की बजाय तुलसी,इलायची की चाय या थोडा गरम पानी पीना ज्यादा फायादेमंद है।

    ४) बारिश से बचना होगा

    • हर किसी को बारिश में भीगना पसंद है पर बारिश में ज्यादा देर तक भीगने से सर्दी-खांसी और बुखार हो सकता है।
    • बारिश में भीगने पर ज्यादा देर तक बालो को गीला न रखे।
    • अगर आप को अस्थमा है या फिर आपको जल्दी सर्दी-जुखाम-खांसी हो जाती है तो बारिश में न भीगे।
    • बारिश से बचने के लिये छाता/रेनकोट का इस्तेमाल करना चाहिये।
    • कपडे/जूते /चप्पल गीले हो जाने पर तुरंत बदल दे।ज्यादा समय तक गीले कपडे पहनने से फंगल ईत्यादी त्वचा रोग हो सकते है।
    • डायबिटीज के मरीजो को विशेष रूप से अपने पैरो को ज्यादा ख्याल रखना चाहिये।पैर गीले होने पर तुरंत उन्हे साफ कर देना चाहिये।
    ५) बुजर्गो का बचाव
    • बदलते मौसम मे बुजर्गो के बीमार होने कि संभावना ज्यादा होती है। इसलिये जरुरी है कि उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाए।
    • बुजर्ग बारिश मे ज्यादा बाहर न निकले।गरम चाय,कोफी या सूप पिए।
    • ज्यादा कच्चे फल या सलाद न खाए।
    • खाने मे हल्दी ,ईलायची,सौन्फ,दालचीनी का इस्तेमाल करे।इनसे रोगप्रतिकार शक्ती बढती है।

    ६) रहें सावधान
    • रात्री मे सोने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करे।
    • अपने घर के आस-पास गंदगी न होने दे। घर के आस-पास के गड्ढों को भर दे।जिससे बारिश का पानी रुककर सडने न पाए। इससे मच्छर उत्पन्न नही होंगे।
    • घर कि अच्छी तरह फ़िनाईल से सफाई करे ताकि मक्खियाँ न आए।
    • बच्चो को बारीश से पूर्व ही टाईफाईड और हेपेटाईटिस के वैक्सीन लगवा दे।
    • अपनी नियमित चल रही दवाईयो का अधिक खुराक जमा कर ले ताकि बारीश कि वजह से बाहर न जा सकने पर दवा मे कोई गैप न पडे।
    • किसी भी रोग कि शंका होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाए।
    उपचार से बचाव बेहतर है,इस नियम का पालन वर्षा ऋतू मे करना जरुरी है।
    थोड़ा सावधान रहें और बारिश के मौसम का पूरा लाभ उठाएं।

  • बढ़े वेतन का असर बाजार पर भी: राकेश सिंह

    बढ़े वेतन का असर बाजार पर भी: राकेश सिंह

    rakesh singh sansad
    भोपाल(पीआईसी). भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, महाराष्ट्र के सह प्रभारी व सांसद श्री राकेश सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा को अक्षरशः अमल में लाकर सिर्फ कर्मचारियों का वेतन ही तय नहीं किया जटिलता वाले भत्तों का भी युक्तियुक्तकरण किया है। वेतन भत्तों में वृद्धि के साथ समानता एकरूपता लाने का पुरजोर प्रयास किया गया है। कर्मचारियों को दायित्व के प्रति सचेत किया गया है। इससे कर्मचारी वर्ग अपने दायित्व के प्रति प्रोत्साहित होगा। सातवें वेतन आयोग के अमल से देश की अर्थव्यवस्था उर्जित होगी।
    उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर वेतनवृद्धि के बाद मंहगाई बढने की आशंका व्यक्त की जाती है, लेकिन इस बार यह वेतन वृद्धि अर्थव्यवस्था को उर्जित करने में सहायक होगी। पहले तो मानसून की माफिक बारिश से किसानों के चेहरे पर मुस्कान है। खेती बाडी में बरकत हुई है। खरीफ का रकबा बढा है। अच्छे उत्पादन की उम्मीदें बढी है। इससे महंगाई बढने की उम्मीदे नगण्य है। दूसरी बात यह है कि देश में दो वर्षो में हर क्षेत्र में उत्पादन बढा है और इस दौरान मांग कमजोर रही है, लेकिन सातवां वेतन आयोग जब बाजार पर असर डालेगा औद्योगिक क्षेत्र में अनुकूल प्रतिक्रिया बढती हुई मांग के रूप में परिलक्षित होगी। ड्यूरेबिल कन्यूमर गुडस, रीयल स्टेट का उठाव शुरू होगा। खेती में बरकत होगी। कर्मचारी वर्ग बचत योजनाओं की ओर भी आकर्षित होंगे।
    श्री राकेश सिंह ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अमल से राज्यों पर भी बोझ बढेगा, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि केन्द्र सरकार असल में राज्य सरकारों के प्रदर्शन का ही परिणाम होती है। वित्त आयोग केन्द्र राज्यों में संसाधनों के वितरण में समुचित व्यवस्था करता है। पिछले बजट की तुलना में राज्यों के आर्थिक स्त्रोत बढे है। प्रदेश को अब 32 के बजाए 42 प्रतिशत अंशदान मिलने जा रहा है।