Category: संपादकीय

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कर्ज से गुलछर्रे उड़ाने वालों की दहशत

देश में विमुद्रीकरण की आंधी ने जनता के नाम पर कर्ज लेकर गुलछर्रे उड़ाने वाले तथाकथित उद्योगपतियों की नींदें उड़ा दी हैं। विकास योजनाओं के नाम पर कर्ज लेने वाले और गुल्ली करने वाले...

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खाट लुटे या बैंक, सलामत रहे वोट बैंक

फार्मूलों के दम पर राज करती रही कांग्रेस ने एक नया जुमला उछाला है। कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी कह रहे हैं कि गरीब खाट ले गए तो भाजपा उन्हें चोर बता रही है...

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फिर सदन में कौन बोलेगा

कड़वे प्रवचन सुनाने वाले संत तरुण सागर जी के विचारों से असहमति जताई जा सकती है। शायद ये समझ बूझकर ही तरुण सागर जी अपने विचारों को कड़वे प्रवचन कहते रहे हैं। देश भर...

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एजेंट कांग्रेस क्यों समझे मोदी का दर्द

भारत की कांग्रेस गणराज्य के विभिन्न समूहों का महासंघ रही है।उसका किसी विचारधारा से कोई लेना देना कभी नहीं रहा। जो जहां से आ गया उसे उसके नेता समेत मंच पर जगह मिल गई।...

ऐसे ही डूबी कांग्रेस की महानता 0

ऐसे ही डूबी कांग्रेस की महानता

कोयला नीलामी कांड से जनचर्चा के घेरे में आए नवीन जिंदल दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस महान पार्टी है। लोग इसमें आते जाते रहते हैं इसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। भारत...