विकास की खंती को आदिकालीन कानून से भरने की कोशिश

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2 Responses

  1. विधुल्लता says:

    शानदार आलेख, स्त्री के समग्र पक्ष के साथ पर स्त्री को भी कानून समाज और देशहित में सहयोग के लिये सच्चाई से तत्पर होना होगा, तभी किसी कानून कि सार्थक्ता सिद्ध होगी

  2. alok singhai says:

    विदुलता जी आभार। आपकी नामचीन पत्रिका – औरत – हमेशा से स्त्री विमर्श पर सटीक संवाद करती रही है। हम भी यही मानते हैं कि स्त्री पुरुष संबंधों को वोट बैंक से आगे बढ़कर सार्थकता के स्तर तक ले जाना जरूरी है।

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